मंगलवार, 21 नवंबर 2023
हरेक सवाल का जबाब
अब आइने में चेहरे
अब आइने में चेहरे बदसूरत दिखने लगे है..
चेहरे पे धूल जम गई है,या फिर आइने पे धूल जम गई है..
सच कहूं तो न आइने पे धूल जमी है,न ही चेहरे पे धूल जमी है..
दृढ़ता,संकल्पता,अनुशासनहीनता के कारण चेहरा धूल धूसरित होती जा रही है..।
आइने के धूल भी हट जायेंगे, और चेहरे का धूल भी धुल जाएंगे..
मगर जो गवाया है,उसे कैसे हासिल कर पाएंगे..??
अब जो गवा दिया,सो गवा दिया..उसके लिए अफसोस क्या करना...
अब जो पा सकते है,उसे पाने का प्रयत्न करें...।।
हमेशा एक राहें खुली रहती है,जब सारे राहें बंद हो जाती है..
उस राहें पे तो चलना मुझे ही है..
इन राहों पे चल के ही,चेहरे पे जमी धूल, धुल पाएगी..
निर्णय मुझे ही करना है...
चेहरे पे जमी धूल से, इस चेहरे को धूल-धूसरित होने दु...
या फिर चेहरे पे जमी धूल को, धुल कर इक मुस्कान बिखरने दूं..
सोमवार, 13 नवंबर 2023
कमर कस हुंकार भर...
कमर कस, हुंकार भर।
अपनी कमियों को ललकार कर,
युद्धभूमि में सीना तानकर..
अपने कमियों पर प्रहार कर..।
अपने तरकश से पहला बाण निकालकर,
अपने काम(क्रोध,मोह) पर तुम वार कर।
दूसरे बाण से तुम अपने आलस्य पर प्रहार कर।
और तीसरे बाण से तुम अपने अंतर्द्वंद्व पर वार कर।
अगर इससे भी न हो, तो आखरी अस्त्र इस्तेमाल कर,
पुनर्जीवन(ध्यान) को स्वीकार कर..
फिर से अंकुरित होकर अपने आप को स्वीकार कर..।।
कमर कस,हुंकार भर
अपने कमियों को ललकार कर
युद्धभूमि में सीना तानकर..
अपने कमियों पर प्रहार कर..।
शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2023
आप उदास क्यों है..??
आपने कभी सोचा है..??
आपके उदासी का कारण क्या है..??
थोड़ी देर सोचिए...🤔
हमारे उदासी का कारण हमारा संघर्ष है.. और संघर्ष किसके जीवन मे नही है..??
ये जीवन ही संघर्ष है,और बिना संघर्ष के जीवन, है ही नही..
तब, फिर हम उदास क्यों है..??
क्योंकि हम संघर्ष से भागना चाहते है..और भागते रहते है,और एक दिन थक जाते है..और तब,दुःख की शुरुआत होती है..।।
आंखे बंद कीजिए... और अपने मन मे किसी 5 बड़े व्यक्तित्व का नाम सोचिए वो किसी भी क्षेत्र से हो सकते है... आँखें बंद करके सोचिए तो सही...😔
अब आप खुद से पूछिए की..आप उन्हें क्यों जानते है..??
शायद इसलिए कि वो सफल व्यक्ति है/थे....
नही....इसलिए हम उन्हें जानते है कि, उन्होंने संघर्ष का सहर्ष सामना किया...।।
और हम क्या कर रहें है..??संघर्ष से बचना चाहते है..हम जितना बचना चाहते है..संघर्ष उतना ही बढ़ता जाता है..और वो जितना बढ़ता जाता है,हम उतना ही दुःखी होते चले जाते है...।।
और जिस क्षण हम इन संघर्षों का सामना शुरू कर देते है,उसी क्षण से दुःख कम होता चला जाता है..।।
अब निर्णय आपको करना है..
जिंदगी को ताउम्र बोझिल बनाना है...या फिर संघर्ष को सहर्ष स्वीकार कर..स्वर्णाक्षर में अपना नाम खुदवाना है....
निर्णय तो हमें ही करना होगा..
क्या होता अगर..??
•गांधी पिट्सबर्ग के बेज्जती से आहत होकर अगर भारत चले आते..तो कौन जानता इन्हें..??
• एडिसन की माँ, अगर टीचर की बात मान लेती तो कौन जान पाता इस थौक के आविष्कारक को...
•क्या होता अगर स्टीव जॉब्स अपने ही बनाये कंपनी से निकाले जाने के बाद हताश हो जाते...तो शायद आज ये भारत की GDP के समांतर कमाई करने वाली कंपनी नही होती..
•क्या होता अगर यूक्रेन रसिया से संघर्ष करना छोड़ देता..और आज अगर इजरायल संघर्ष करना छोड़ दे तो... शायद अस्तित्व ही न बचे...
और हम क्या कर रहे है..
संघर्ष से बचना चाहते है...
हम जितना संघर्ष से बचना चाहेंगे,उतना ही हम दुःखी होते चले जायेंगे...
अब निर्णय हमें ही करना है....।।
मुस्कुराइए😊....क्योंकि आपकी मुस्कुराहट आपके संघर्ष को आसना बनायेगी...।।
मंगलवार, 24 अक्टूबर 2023
राम ने रावण को क्यों मारा
हममें से अक्सरहां को पता होगा.. की..
राम ने रावण को क्यों मारा..??
मगर सच कहूं तो,जो आप सोच रहे है..वो जबाब सही नही है..
राम कभी रावण को मारने के पक्ष में थे ही नही..
इसिलिय तो उन्होंने अगंद को शांति दूत बना करके भेजे..
मगर परिणाम क्या हुआ....
परिणाम ये हुआ कि राम को रावण को मारने के लिए विवश होना पड़ा.. आखिर क्यों..???
"अहंकार" रावण का अहंकार रावण से बड़ा हो गया था,जो उसका मौत का कारण बना..।।
आज हम सब में, कुछ हो न हो अहंकार भड़ा पड़ा हुआ..
अहंकार से ही क्रोध की उत्पत्ति होती है..
और क्रोध की उत्पत्ति से ही,मनुष्य की दुर्गति होती है..।।
निर्णय आपको करना है..??
की आप क्या चाहते है..
अपने अहंकार को काबू में करना चाहते है या फिर दुर्गति को प्राप्त करना चाहते है..
अहंकार को काबू में कैसे करें..??
मौन रहे...।।
इस विजयदशमी को अंदर के रावण को मारे..
रावण कौन है.. वो हमारे बुराइयों के प्रतीक है..
अपने सबसे बड़े बुराई को पहचाने और इस विजयदशमी को उसपे विजय पाने का प्रण करें...।।
विजयदशमी की ढेर सारी शुभकामनाएं...
सोमवार, 23 अक्टूबर 2023
मैं विलीन हो जाना चाहता हूं..
मैं प्रेम में डूबना चाहता हूं,बुद्ध की तरह...
मैं निरंतर बहना चाहता हूं..नदी की तरह..
मैं मुस्कुराना चाहता हूं..फूल की तरह..
मैं जलना चाहता हूं..सूर्य की तरह..
मैं विलीन हो जाना चाहता हूँ...शून्य की तरह..
रविवार, 22 अक्टूबर 2023
क्या हम अपनी घर की देवियों का सम्मान करते है..??
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः ।।-
क्या सोच रहे हो तुम..?? यही सोच रहा हूँ कि.. क्या सोच रहा हूँ मैं..। सच कहूं तो.. कुछ तो सोच रहा हूँ मैं... मगर अफसोस क्या सोच रहा हूँ.. यह...
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अतीत से लेकर वर्तमान तक,हम सभी दुःखो से घिरे हुए है.. आखिर क्यों..?? इस क्यों का जबाब हम अतीत से ही ढूंढते आ रहे है..हमारे ऋषियों-मनीषियों न...
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हम सब खास(special) दिखना चाहते है.. मगर सवाल है क्यों..?? इसका सबसे बड़ा कारण है कि हम स्वयं को खास समझते ही नही..। जब हम स्वयं को खास समझने ...
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