मंगलवार, 21 नवंबर 2023

हरेक सवाल का जबाब

हमारे हरेक सवाल का जबाब,हमारे अतीत में छुपा हुआ है...
हम आज जिस परिस्थितियों में है,उसके लिए हमारा अतीत ही जिम्मेदार है..


अगर हम अपनी परिस्थितियों को बदलना चाहते है,या फिर और बेहतर करना चाहते है,तो हमें अपने अतीत में डुबकियां लगानी ही होंगी.. मगर सावधानी से..
क्योंकि डुबकियां लगाकर समस्याओं का हल ढूंढने वाले मोतियों(विचारों) को लाना होगा,ना कि समस्याओं को और जटिल करने वाले कंकडों(अवसादों) को..

हममें से ज्यादातर लोग अतीत में डुबकियां लगाते है...मगर अफसोस हम अतीत के उन हिस्सों में ही डुबकियां लगाते है,जिसने हमारे वर्तमान को और जटिल कर दिया है...।

हम जिन भी समस्या से जूझ रहे है,उसका जबाब अतीत में ही मिलेगा...अपने अतीत में डुबकियां लगाकर अपने वर्तमान समस्याओं का क्यों...कैसे का जबाब ढूंढे..
जरूर जबाब मिलेगा..सिर्फ जबाब ही नही वर्तमान समस्या का समाधान भी मिलेगा..।।

अपने अतीत में सिर्फ डुबकियां ही लगाना है..
कुछ लोग अतीत में डूब जाते है,
जो अतीत में डूब जाते है,
उसे अतीत लील जाता है..।।

अतीत में डुबकियां लगाना आसान नही है..
अतीत में डुबकियां लगाने से पहले...
अपने वर्तमान समस्या की पहचान करें...
और ये दृढ़निश्चय करें की हमें इन समस्याओं से निपटना है..
तब ही अतीत में डुबकियां लगाए..।।

हमारे अतीत का दो पक्ष है- एक अंधेरा और एक उजाला..
हमारे ज्यादातर वर्तमान समस्याओं का हल,उस अंधेरे पक्ष में ही छुपा हुआ है..
इसिलिय जब डुबकियां लगाए तो अपने अस्त्रों(तार्किक विचारों) के साथ ही,नही तो ये अंधेरा लील जाएगा..।।

अब आइने में चेहरे

अब आइने में चेहरे बदसूरत दिखने लगे है..

चेहरे पे धूल जम गई है,या फिर आइने पे धूल जम गई है..

सच कहूं तो न आइने पे धूल जमी है,न ही चेहरे पे धूल जमी है..

दृढ़ता,संकल्पता,अनुशासनहीनता के कारण चेहरा धूल धूसरित होती जा रही है..।



आइने के धूल भी हट जायेंगे, और चेहरे का धूल भी धुल जाएंगे..

मगर जो गवाया है,उसे कैसे हासिल कर पाएंगे..??

अब जो गवा दिया,सो गवा दिया..उसके लिए अफसोस क्या करना...

अब जो पा सकते है,उसे पाने का प्रयत्न करें...।।

हमेशा एक राहें खुली रहती है,जब सारे राहें बंद हो जाती है..

उस राहें पे तो चलना मुझे ही है..

इन राहों पे चल के ही,चेहरे पे जमी धूल, धुल पाएगी..

निर्णय मुझे ही करना है...

चेहरे पे जमी धूल से, इस चेहरे को धूल-धूसरित होने दु...

या फिर चेहरे पे जमी धूल को, धुल कर इक मुस्कान बिखरने दूं..

सोमवार, 13 नवंबर 2023

कमर कस हुंकार भर...

                       


                        कमर कस, हुंकार भर। 

अपनी कमियों को ललकार कर,

युद्धभूमि में सीना तानकर..

अपने कमियों पर प्रहार कर..।

अपने तरकश से पहला बाण निकालकर,

अपने काम(क्रोध,मोह) पर तुम वार कर।

दूसरे बाण से तुम अपने आलस्य पर प्रहार कर।

और तीसरे बाण से तुम अपने अंतर्द्वंद्व पर वार कर।

अगर इससे भी न हो, तो आखरी अस्त्र इस्तेमाल कर,

 पुनर्जीवन(ध्यान) को स्वीकार कर..

फिर से अंकुरित होकर अपने आप को स्वीकार कर..।।

कमर कस,हुंकार भर

अपने कमियों को ललकार कर

युद्धभूमि में सीना तानकर..

अपने कमियों पर प्रहार कर..।


शुक्रवार, 27 अक्टूबर 2023

आप उदास क्यों है..??

 आपने कभी सोचा है..??

आपके उदासी का कारण क्या है..??



थोड़ी देर सोचिए...🤔

हमारे उदासी का कारण हमारा संघर्ष है.. और संघर्ष किसके जीवन मे नही है..??

ये जीवन ही संघर्ष है,और बिना संघर्ष के जीवन, है ही नही..

तब, फिर हम उदास क्यों है..??

क्योंकि हम संघर्ष से भागना चाहते है..और भागते रहते है,और एक दिन थक जाते है..और तब,दुःख की शुरुआत होती है..।

आंखे बंद कीजिए... और अपने मन मे किसी 5 बड़े व्यक्तित्व का नाम सोचिए वो किसी भी क्षेत्र से हो सकते है... आँखें बंद करके सोचिए तो सही...😔

अब आप खुद से पूछिए की..आप उन्हें क्यों जानते है..??

शायद इसलिए कि वो सफल व्यक्ति है/थे....

नही....इसलिए हम उन्हें जानते है कि, उन्होंने संघर्ष का सहर्ष सामना किया...।।

और हम क्या कर रहें है..??संघर्ष से बचना चाहते है..हम जितना बचना चाहते है..संघर्ष उतना ही बढ़ता जाता है..और वो जितना बढ़ता जाता है,हम उतना ही दुःखी होते चले जाते है...।।

और जिस क्षण हम इन संघर्षों का सामना शुरू कर देते है,उसी क्षण से दुःख कम होता चला जाता है..।।

अब निर्णय आपको करना है..

जिंदगी को ताउम्र बोझिल बनाना है...या फिर संघर्ष को सहर्ष स्वीकार कर..स्वर्णाक्षर में अपना नाम खुदवाना है....

निर्णय तो हमें ही करना होगा..

क्या होता अगर..??

गांधी पिट्सबर्ग के बेज्जती से आहत होकर अगर भारत चले आते..तो कौन जानता इन्हें..??

एडिसन की माँ, अगर टीचर की बात मान लेती तो कौन जान पाता इस थौक के आविष्कारक को...

क्या होता अगर स्टीव जॉब्स अपने ही बनाये कंपनी से निकाले जाने के बाद हताश हो जाते...तो शायद आज ये भारत की GDP के समांतर कमाई करने वाली कंपनी नही होती..

क्या होता अगर यूक्रेन रसिया से संघर्ष करना छोड़ देता..और आज अगर इजरायल संघर्ष करना छोड़ दे तो... शायद अस्तित्व ही न बचे...

और हम क्या कर रहे है..

संघर्ष से बचना चाहते है...

हम जितना संघर्ष से बचना चाहेंगे,उतना ही हम दुःखी होते चले जायेंगे...

अब निर्णय हमें ही करना है....।।

मुस्कुराइए😊....क्योंकि आपकी मुस्कुराहट आपके संघर्ष को आसना बनायेगी...।।

मंगलवार, 24 अक्टूबर 2023

राम ने रावण को क्यों मारा

हममें से अक्सरहां को पता होगा.. की..

राम ने रावण को क्यों मारा..?? 



मगर सच कहूं तो,जो आप सोच रहे है..वो जबाब सही नही है..

राम कभी रावण को मारने के पक्ष में थे ही नही..

इसिलिय तो उन्होंने अगंद को शांति दूत बना करके भेजे..

मगर परिणाम क्या हुआ....

परिणाम ये हुआ कि राम को रावण को मारने के लिए विवश होना पड़ा.. आखिर क्यों..???

"अहंकार" रावण का अहंकार रावण से बड़ा हो गया था,जो उसका मौत का कारण बना..।।

आज हम सब में, कुछ हो न हो अहंकार भड़ा पड़ा हुआ..

अहंकार से ही क्रोध की उत्पत्ति होती है..

और क्रोध की उत्पत्ति से ही,मनुष्य की दुर्गति होती है..।।

निर्णय आपको करना है..??

की आप क्या चाहते है..

अपने अहंकार को काबू में करना चाहते है या फिर दुर्गति को प्राप्त करना चाहते है..

अहंकार को काबू में कैसे करें..??

मौन रहे...।।

इस विजयदशमी को अंदर के रावण को मारे..

रावण कौन है.. वो हमारे बुराइयों के प्रतीक है..

अपने सबसे बड़े बुराई को पहचाने और इस विजयदशमी को उसपे विजय पाने का प्रण करें...।।

विजयदशमी की ढेर सारी शुभकामनाएं...


सोमवार, 23 अक्टूबर 2023

मैं विलीन हो जाना चाहता हूं..



मैं प्रेम में डूबना चाहता हूं,बुद्ध की तरह...

मैं निरंतर बहना चाहता हूं..नदी की तरह..

मैं मुस्कुराना चाहता हूं..फूल की तरह..

मैं जलना चाहता हूं..सूर्य की तरह..

मैं विलीन हो जाना चाहता हूँ...शून्य की तरह..

रविवार, 22 अक्टूबर 2023

क्या हम अपनी घर की देवियों का सम्मान करते है..??

 यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।

यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः ।।




आपको क्या लगता है...??
शायद सही ही लगता होगा क्योंकि हम बचपन से ही ये श्लोक सुनते आ रहे है..।।
और साथ ही पूरे विश्व मे,भारत ही एकमात्र देश है जंहा देवियों की पूजा होती है..।।
कितनी अच्छी बात है...
मगर खुद से पूछिए...
क्या हम अपने घर की देवियों का सम्मान करते है...??
अपनी माँ, दादी,चाची,भाभी,बहन,बीवी का सम्मान करते है...??
शायद ही हममें से कोई होगा जिसने कभी महिलाओं के साथ बदतमीजी नही की होगी..।।
इसकी शुरुआत घर से ही शुरू हो जाती है...

आपको जानकर हैरानी होगी कि पिछले 30 वर्षों में महिलाओं के सम्मान में एक तरफ गिरावट आई है(वैश्वीकरण के कारण), तो एक तरफ सम्मान का भाव बढ़ा है(आर्थिक सम्पनता के कारण)...


मगर आपको ये जानकर आश्चर्य होगा..
की WEF(वर्ड इकनोमिक फोरम,रिपोर्ट-2023) के अनुसार भारत मे लैंगिक असमानता 146 देशों में 127 वा है..

NFHS-5(नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे)-के अनुसार भारत मे घरेलू हिंसा का सामना 29.3% महिलाएं कर रही है।



वंही यूनाइटेड नेशन्स पापुलेशन फण्ड रिपोर्ट के अनुसार भारत मे 15-49 आयुवर्ग की 70% विवाहित महिलाये हिंसा की शिकार है..।।

इसका कारण क्या है..??
हमारी सोच..।।

आपने कभी सोचा है(पुरुष)..
जब आपके साथ कोई बुरा बरताव करता है, तो आपपर क्या बीतता है..??
आपके अंदर हिंसा,द्वेष,घृणा का भाव उत्पन्न होता है..

मगर जब महिलाओं के साथ बुरा बरताव होता है तो वो क्या करती है...??
पहले वो सहन करती है..फिर...
फिर वो सहन करती है...फिर..
फिर वो सहन करती है...
वो अंतिम क्षण तक सिर्फ और सिर्फ सहन करती है..
क्योंकि वो विरोध किस-किस का करें..
क्योंकि उसके चारों तरफ शोषण करने वाले ही है..
कोई लाड़-प्यार से कर रहा है,तो कोई शक्ति के बल पर कर रहा है..।।

मगर हम भूल जाते है कि महिला सृजनकर्ता है,
और जो सृजन कर सकता है,
वो विनाश भी कर सकता है..।।
महिलाओं को सम्मान करें न कि अपने और समाज के विनाश को न्योता दे..।।
कोई भी देश और समाज तबतक शक्तिशाली और समृद्ध नही हो सकता,जबतक वंहा की महिलाओं की स्थिति सुदृढ़ न हो..।।

अपने व्यवहार में बदलाव लाये..
आप महिलाओं के साथ उसी तरह से व्यवहार करें,
जिस तरह की व्यवहार की अपेक्षा आप महिलाओं से रखते है...।।

Yoga for digestive system