सोमवार, 25 दिसंबर 2023

हम क्रिसमस क्यों मनाते है..??

बचपन में मेरे लिए 25 दिसंबर का मतलब छुट्टी होता था..और इसे बड़ा दिन कहा जाता था..क्यों..??
 ढेर सारे सवाल थे..
•25 दिसंबर को छूट्टी क्यों होती थी..??
•इसे बड़ा दिन क्यों कहते थे..??
•🌲क्रिसमस ट्री क्या है..??
•सांता क्लॉज कौन है..??
ढेर सारे सवाल थे..
क्योंकि में जिस समाज में रहता था वंहा ईसाई नही रहते थे इसिलिय जानकारी का अभाव था..

मगर आज पढ़ने,लिखने और एक बड़ा समाज को देखने के बाद इन सारे सवालों के जबाब मिल गए..।।

25 दिसंबर को छुट्टी इसिलिय होती थी कि इस रोज ईसाई धर्म के प्रेणता का जन्म हुआ... जिन्हें भगवान यीशु के नाम से जाना गया..।।


यीशु ने अपने विचार से दुनिया को बदल दिया,और अपने विचार पे अडिग रहे..जिस कारण उन्हें शूली चढ़नी पड़ी..
शायद वो शूली नही चढ़ते तो..दुनिया आज उन्हें नही पूजती..
यीशु अपने मृत्यु से यही संदेश देते है-  आपके विचार,आदर्श,लक्ष्य हमेशा मृत्यु से बड़ी होनी चाहिए.. इन्हें पाने के लिए जीवन भी तुच्छ लगने लगे..।।

मगर वर्तमान समय मे हमारा लक्ष्य,आदर्श, विचार सबकुछ संकुचित हो गया है..वो हमतक या फिर परिवार तक ही सिमट कर रह गया है..क्यों..??

-अपने विचारों पे अडिग रहने के कारण ही इन्हें शूली पे चढ़ा दिया गया..इसिलिय आज के दिन को बड़ा दिन कहते है..।।

मगर वास्तिविकता ये है कि उन रूढ़िवादियों को इनके विचार से कोई परेशानी नही थी..
बल्कि यीशु के विचारों से प्रभावित जो भीड़ थी उससे सबको डर लग रहा था....।।
आज भी भीड़ बड़े-बडे शक्तिशाली शासकों को नीचे झुका देती है,जबकि आज आधुनिक हथियार है,मगर तब भी भीड़ से सब सहमे हुए है...।

- क्रिसमस ट्री आखिर होता क्या है...??


सबसे पहली बात की इसका संबंध यीशु से बिल्कुल नही है..
इसकी सर्वप्रथम शुरूआत 16वी शताब्दी में ईसाई धर्मसुधारक मार्टिन लूथर के द्वारा शुरू हुई..24 दिसंबर को रास्ते से गुजर रहे थे तो उन्हें firs tree/क्रिसमस ट्री/ सनोबर(जोकि pine/चीर प्रजाति) का पौधा मिला जो पतियों पे बर्फ गिरने के कारण चमक रहा था ..जिसने मार्टिन लूथर को आकर्षित किया और उन्होंने घर ले आया और अगले दिन 25 दिसंबर को इस वृक्ष को सजाया उसके बाद ये पूरे विश्व मे इसे सजाने का प्रचलन फैल गया..।।

- सांता क्लॉज कौन है..??


इनका भी संबंध यीशु से नही है.. सांता क्लॉज का असली नाम सांता निकोलस था जिनका जन्म तुर्किस्तान के मायरा में हुआ,चपन मे ही माता-पिता के देहांत के बाद कम उम्र में ये पादरी बन गए व्यवहार से दयालु थे इसलिए बच्चों को स्नेह और टॉफियां बाटते थे,खासकर क्रिसमस के अर्धरात्रि को अपने पूरे कस्बे में..और ये धीरे-धीरे बाते फैलती गई और ढेर सारे दयालु व्यक्ति जुड़ते गए और सांता क्लॉज की संख्या बढ़ती गई..।।

ईसाइयत ने दुनिया को बहुत कुछ दिया..
दया,करुणा और सेवा भाव इनका मूल उद्देश्य है..
आधुनिक शिक्षा को बढ़ावा देने में ईसाइयत का अहम योगदान है,जिसकारण ही पृथ्वी विशालकाय होने के बावजूद मोबाइल में समा गई है..
हरेक चीज के दो पहलू होते है..और ईसाइयत का दूसरा पहलू खून से सना है..मगर ऐसे सना है जिससे बू नही आती..मगर ये बहुत डरावना है..।।

हमें यीशु के उन आदर्शों विचारों को फिर से सीखने की जरूरत है जिसने उन्हें अमर कर दिया..
"तुम एक दूसरे से प्रेम करो; मैंने तुमसे जैसे प्रेम किया है, उसी तरह तुम भी एक दूसरे से प्रेम करो।" - यूहन्ना 13:34

"न्याय का मार्ग चुनो, दया के साथ चलो और अपने परमेश्वर के साथ बस तुम रहो।" - मिखा 6:8


रविवार, 24 दिसंबर 2023

प्यार की पांति...बहुत जस्तुजु की

बहुत जस्तु-जु की तुम्हे देखने को..
हकीकत में न सही, सपनों में ही सही..
मगर वंहा भी, तुम नही..तुम्हारे अब्बू दिखे..😊

मैं आज भी वंही हूँ...
मगर तुम बहुत दूर निकल गयी हो..

जब थक जाओ..
और आने का मन करें..
मैं वंही मिलूंगा..
वैसे ही मिलूंगा..
जैसे तुमने छोड़ा था..

बहुत जस्तुजू की तुम्हे देखने को...
हकीकत में न सही,सपनो में ही सह...

बुधवार, 6 दिसंबर 2023

हम BJP से क्या सीख सकते है..

कुछ लोग अक्सरहाँ जीतते है,
तो कुछ लोग अक्सरहाँ हारते है...
जो जीतते है, वो फिर से जीत की तैयारी में जुट जाते है, और पहले की गई गलतियों को सुधारने का भी प्रयास करते है..

और जो लोग हारते है,वो हारने का कारण नही बहाना ढूंढते है, इसीलिए वो अगली बार फिर हारते है...

बहुसंख्यक लोग हार का बहाना ढूंढने वालों में से ही है..

जब से मोदी जी शक्ता में आये है तब से BJP अक्सरहाँ चुनाव जीत रही है..क्यों..??
इसका कोई एक कारण नही, बल्कि कुछ मूलभूत कारण है..



1.उद्देश्य स्पष्ट है ... BJP का उद्देश्य सिर्फ शक्ता पाना नही बल्कि शासन के माध्यम से सुशासन लाना है..अन्य दल को किसी तरह शक्ता पाना है..

2.दूरदर्शिता.. अन्य दलों में दूरदर्शिता का अभाव है

3.परिणामोन्मुखी कार्य..BJP जो कर रही वो दिखता है..

4.आरोप-प्रत्यारोप से दूरी बनाए रखना

5.अंतर्कलह..BJP अंतर्कलह को कमरे से बाहर नही आने देती है,और अन्य पार्टी अपने अंतर्कलह को रायता की तरह फैला देता है..

6.कृतज्ञता का भाव...BJP में जनता के प्रति कृतज्ञता का भाव झलकता है, और अन्य दलों में इसका अभाव है..

7.जमीन से जुड़ाव....यानि जनता से जुड़ाव बनाये रखे हुए है BJP जबकि अन्य पार्टियों में ये कम होता जा रहा है..।।

और ढेर सारे कारण है..

हम BJP से क्या सीख सकते है...??
अगर सफल होना हो तो...

- हमारा उद्देश्य स्पष्ट होना चाहिए..

-हमारा भविष्य के प्रति क्या दूरदर्शिता है..?? ये स्पष्ट होना चाहिए।

-क्या हम परिणामोउन्मुखी कार्य कर रहे है..?? या फिर यू ही समय काट रहे है..

-क्या हम भी आरोप-प्रत्यारोप करते है,अगर हां तो ये हमारी सफलता में रोड़ा बनेगी..

-क्या हम अपने अंतर्कलह में उलझे हुए है,अगर हां तो मत उलझे,सफल हो जाएंगे तो ये अंतर्कलह खुद-ब-खुद खत्म हो जाएगी..

-क्या हममें कृतज्ञता का भाव है..उन सबके लिए जिसने हमारे जीवन को बेहतर बनाने में कुछ-न-कुछ योगदान दिया है.... अगर नही तो हम सफल होके भी असफल ही है..।।

ये इतना आसान नही है..मगर नामुमकिन नही है..
अगर सफल होना है तो करना ही होगा..

मंगलवार, 5 दिसंबर 2023

कभी-कभी...

कभी-कभी खुद की ही पीठ ठोकने का मन होता है,
क्यों..
क्योंकि कभी-कभी काम ही कुछ ऐसा कर जाता हूँ..

कभी-कभी खुद पे ही हँसने लगता हूँ..
क्यों..
क्योंकि अपनी मूर्खता का भान होता है...

कभी-कभी चोरी-चुपके खूब रोता हूं..
क्यों...
क्योंकि रोने का वजह में स्वयं होता हूँ..

कभी-कभी यू ही खुली राहों पे निकल जाता हूँ..
क्यों..
क्योंकि स्वयं का होने का अहसास होता है....



 

सोमवार, 4 दिसंबर 2023

जब मन अशांत होता है..

जब मन अशांत होता है

तो मैं समुन्द्र किनारे आ जाता हूं...



क्यों..???

क्योंकि अथाह समुन्द्र के आगे मेरा अशांत मन ,शांत हो जाता है...

जब कुछ बातें करनी होती है..

तो लहरों से बाते कर लेता हूँ...

क्यों..??

क्योंकि ये मेरे बातों का बुरा नही मानता..

कुछ शिकायत करनी होती है

तो ढलते हूए सूरज से कर लेता हूँ..

क्यों..??

क्योंकि सूरज डूबते ही मेरे शिकायत को भूल कर, अगले सुबह फिर से नई ऊर्जा भर देती है.. 

जब मन शांत और...बातें शिकायत खत्म हो जाती है..

तो मैं घर को चला आता हूँ..

इक नई ऊर्जा,एक नई उत्साह,एक नई उमंग,

इक नई उम्मीद लिए..

जब मन अशांत होता है..

गुरुवार, 30 नवंबर 2023

परम सत्य क्या है..क्या मृत्यु परम सत्य है..??

जिसने भी जन्म लिया है उसे मरना ही है..
ये बचपन से हम सुनते आ रहे है..मगर इससे सीखा क्या..??

क्या, मृत्यु परम सत्य है..??
शायद है...
मगर किसके लिए..??
जो मरा है,उसके लिए,
या फिर जिसे मरा हुआ प्रतीत हो रहा है उसके लिए..??

जरा सोचिए..??🤔
हम जब-तक जिंदा रहता है, तबतक मृत्यु से हमारा कोई वास्ता ही नही रहता,हम इस बारे में सोचते ही नही..
आखिर ये कैसा सच है,जिसका मनुष्य को अहसास तक नही होता..

परम सत्य तो वो है,जिससे हम रोज रूबरू होते है..
आखिर वो है क्या..??

आज से 2500 वर्ष पहले इस परम सत्य के बारे में जिसने कहा वो महात्मा बुद्ध थे..


महात्मा बुद्ध ने 4 आर्य सत्य बताए..
 1. दुःख है
 2. दुःख का कारण है
 3.दुःख का निदान है
 4.दुःख निदान का मार्ग है..अष्टांगिक मार्ग

महात्मा बुद्ध जिस परम सत्य की बात करते है वो दुःख है..
हमारे जन्म लेते ही इस परम सत्य से सामना शुरू हो जाता है..
हम जन्म लेते है रोना शुरू कर देते है..और दुःख नामक परम सत्य का चक्र शुरू हो जाता है.
और ये तबतक चलता रहता है जबतक हमारी मृत्यु न हो जाये..।।

इस पृथ्वी पे जितने भी प्राणी है सभी दुःखी है..
और हरेक का दुःख का कारण है..
और हरेक का दुःख का निदान भी है..
और वो निदान अष्टांगिक मार्ग है..।।

ऐसे समझिए..
कोई बच्चा रो रहा है..क्यों..?? क्योंकि वो दुःखी है..
अगर बच्चा रो रहा है तो उसका कारण होगा..
या तो वो भूखा होगा या फिर उसे किसी चीज की जरूरत होगी..
अगर हमें उस बच्चे का रोने का कारण पता चल गया तो उसका निदान भी होगा..

अब हम खुद को ले... क्या हम दुःखी है..(अभी नही तो कभी न  कभी तो होंगे ही)
अगर हम दुखी है.. तो उसका कारण भी जरूर होगा.. उस कारण को ढूंढे..
अगर दुःख होने का कारण मिल गया तो उसका निदान भी है..
आप अपने स्तर पे ढूंढे अगर मिल गया तो ठीक है नही तो बुद्ध के अष्टांगिक मार्ग का अनुशरण करें..
दुःख से छुटकारा जरूर मिलेगा..।।

बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग क्या है..??
बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग, आचरण है,जिसे जीवन में अनुशरण करने से दुःख से छुटकारा मिल जाता है..।।
       1.सम्यक दृष्टि - हमारा लक्ष्य क्या है,क्या वो सही और स्पष्ट है..
       2.सम्यक संकल्प : अपने लक्ष्य की प्राप्ति के लिए दृढ़ता से संकल्प लेना।
       3.सम्यक वाक : ऐसा कुछ न बोलना जो हमारे लक्ष्य सिद्धि में हानिकारक हो,और न ही मेरे बोलने से किसी को तकलीफ हो..

      4.सम्यक कर्म : अपने लक्ष्यसिद्धि के लिए कोई भी ऐसा कर्म नही करना, जो स्वयं और दूसरे के लिए हानिकारक हो..

     5.सम्यक जीविका : ऐसा कोई भी आर्थिक गतिविधि न करना जिससे किसी को नुकसान हो..

     6.सम्यक व्यायाम : अपने शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए नियमपूर्वक और निरंतर व्यायाम करना

    7.सम्यक स्मृति : ऐसी कोई भी बातें नही याद रखना जो तकलीफ देह हो..बल्कि ऐसी स्मृति को बढ़ावा देना जिससे स्वयं और जगत का कल्याण हो
    8.सम्यक समाधि :  स्वयं में खो जाना ही समाधि है..



शुरुआत के चार मार्ग हरेक इंसान को अपने जीवन में अनुसरण करना ही चाहिए..अगर हम अनुशरण करते है तो दुःख से छुटकारा मिल जाएगा..।।

वर्तमान में हरेक समस्याओं का हल महात्मा बुद्ध के द्वारा दिये गए 4 आर्य सत्य में छुपा हुआ है..
आप कोई भी समस्या उठाये इसका निदान 4आर्य सत्य के द्वारा मिल जाएगा..
आज समाज मे आत्महत्या की प्रवृति बढ़ रही है..
क्यों..??
इसका कोई न कोई कारण जरूर होगा.. उस कारण को ढूंढ कर इसका निदान किया जाय..
और इसका निदान कंही न कंही बुद्ध के अष्टांगिक मार्ग में छुपा हुआ है..
आज अतिभोगवाद बढ रहा है,साम्प्रदायिकता बढ़ रहा है,पर्यावरणीय समस्या बढ़ रही है..
और हरेक समस्या का निदान बुद्ध के अष्टांगिक मार्ग में छुपा हुआ है..।।

आज कोई भी मनुष्य दुःख रूपी परम सत्य से अनछुआ नही है..
जिसने भी जन्म लिया उसे जन्म लेते ही उस परम सत्य से सामना करना पड़ता है..
मगर खुशी की बात ये ही कि दुःख रूपी परम सत्य का निदान है..।।

तो निर्णय आप करें आपके लिए परम सत्य क्या है..
जिससे आप लगभग नित-दिन रु-ब-रु हो रहे है,
या फिर वो जो किसी कोने में बैठ कर हमारा इंतजार कर रहा है..।।

सत्य तो वो है जिसका हमें अहसास हो..
बाकि सब मिथ्या है..

क्योंकि श्रीमद्भागवत गीता में श्रीकृष्ण कहते है मृत्यु एक प्रक्रिया है-
          जातस्य हि ध्रुवो मृत्युर्ध्रुवं जन्म मृतस्य च।
          तस्मादपरिहार्येऽर्थे न त्वं शोचितुमर्हसि।।2.27
अर्थ- जो जन्म लिया है,उसे मरना ही है,और जो मरा है उसे जन्म लेना ही है,इसिलिय शोक मत कर(कृष्ण अर्जुन से कहते है)



वंही दूसरी जगह कृष्ण कहते है-

           वासांसि जीर्णानि यथा विहाय
           नवानि गृह्णाति नोरोपणानि।
           तथा शरीराणि विहाय जीर्णान्य
           न्यानि संयाति नवानि देहि।।

-जिस प्रकार मनुषय पुराने वस्त्रो को त्यागकर नए वस्त्र धारण करता है, उसी प्रकार आत्मा पुराने तथा व्यर्थ के शरीरों को त्याग कर नवीन शरीर धारण करता है।

तो अब आप बताए परम सत्य क्या है..??

मृत्यु या दुःख..??

बुधवार, 29 नवंबर 2023

वर्तमान में परवरिश क्यों जरूरी है..??

इस पृथ्वी पे सबसे असहाय प्राणी कौन है...??
जरा सोचिए...??
पता चला...
हम और आप है... इस पृथ्वी पे सबसे असहाय ...।।
क्यों..??
क्योंकि मनुष्य को ही सिर्फ परवरिश की जरूरत पड़ती है,इस पृथ्वी पे..और कोई ऐसा जीव नही है जिसे परवरिश की जरूरत पड़े..।
जरा सोचिए हमारी अगर परवरिश न हो तो क्या होगा..??
क्या हमारा अस्तित्व होगा..??
अगर अस्तित्व होगा भी तो कैसा..??

वैसे परवरिश की लगभग हरेक कशेरुकी जीव(vertebrae)
को पड़ती है..मगर उसकी अवधि बहुत कम होती है..।।

मगर मनुष्य की परवरिश की अवधि बहुत लंबी होती है..
शायद इसिलिय मनुष्य इतना विचारशील प्राणी है..।।

मगर वर्तमान में मनुष्य की परवरिश का स्तर दिन-प्रतिदिन घटता जा रहा है..।।


अगर परवरिश सही से न हो, मगर सारी सुविधाएं मिले तो क्या होगा..??

आज हम इस युग मे है..जंहा मनुष्य गुलाम है..क्यों..??
और हमें पता नही है..क्यों..??
आप क्या देख रहे है...??
आप क्या कर रहे है...??
आप क्या करेंगे..??
इसका निर्णय आज अधिकतम मनुष्य खुद नही कर रहा है..??
क्यों...??
जरा सोचिए..।।
यंहा भी परवरिश का अहम रोल है..
क्या स्कूल,कॉलेज में इस तरह की शिक्षा दी जा रही है..की इंटरनेट,सोसल मीडिया का इस्तेमाल कैसे करें..??

आपको जान कर आश्चर्य होगा..
की 80% लोग जो internet पे सर्च करते है,वो अनैतिक(गलत चीज) है..??
आखिर क्यों लोग इस तरह की चीज सर्च करते है..??

क्योंकि परवरिश अच्छी से नही हुई है..

2 दिन पहले ही एक 10 साल के बच्चे ने अपने क्लास साथी को स्टडी इंस्ट्रूमेंट(प्रकार)  से छेद करके हत्या कर दी और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर डाला..
पता है क्यों..??
क्योंकि उसे ज्यादा व्यू मिले...

आज परवरिश की बहुत जरूरत है..
अगर आप अपने बच्चे को अच्छी तरह से परवरिश करना चाहते है तो 5 साल के उम्र तक स्मार्टफोन से उसे दूर रखें,12 साल के उम्र तक उसे अपने निगरानी में इंटरनेट इस्तेमाल करने दे....


क्योंकि आने वाला समय और भयावह होने वाला है..
क्योंकि chatGPT  जैसे कई AI(आर्टिफिशियल intelligence) अपने पैर पसार रहा है..
इसका अगला कदम और भयावह हो सकता है..



आप कल्पना कीजिये कितना भयावह..??

आप चेस खेलते है.  या फिर कोई भी गेम..
उस गेम में अभी चाल हम चलते है..
अगर हमारी परवरिश अच्छी न हो तो चाल AI+robot चलेगा..और हम प्यादे होंगे..

सकी हल्की झलक कुछ सालों पहले मिला था..
जब ब्लू व्हेल नामक गेम ने कइयों का जीवन लील लिया था..
आखिर कैसे...?? और क्यों..??

सतर्क हो जाये....
क्योंकि आने वाला समय ...??