शनिवार, 3 फ़रवरी 2024

प्यार की पांति..

कैसे बयां करू में प्यार की दास्तां..
तुम्हारी एक झलक देखने को घण्टों
दीवार की ओट में खड़ा होकर बीत जाया करता था..
और पता नही चलता था..

तुम्हारी एक झलक देखने को..
ठंड की सर्द हवाओं में,
यू ही घर से बाहर निकल जाया करता था..

तुम्हारी बस एक झलक देखने को..
मोटर की स्विच ऑन होते ही नलके पे आ जाना…
और तुम्हारी गतिविधियों को देखना बहुत ही सुकुन देता था..

बस तुम्हारी एक झलक देखने को..
थोड़ी भी सरसराहट होते ही..
खिड़की से झांकने को मजबूर हो जाता था..
बस तुम्हारी एक झलक देखने को..।।

शायद तुम्हें कभी पता नही चलेगा..
की कितना प्यारा करता हूँ मैं तुम्हें..
क्योंकि तुम बरगद के वृक्ष के समान हो,
और मैं एक प्रवासी पक्षी के समान हूँ..।।

मैं भूल गया था..
अपना आशियाना..
गलती से तुम्हें ही अपना आशियाना बनाने का 
सपना देखने लगा था..
सपना तो सपना ही होता है..।
इसिलिय तुम्हें कभी पता नही चलेगा..
की कितना प्यार करता हूँ तुम्हें..।।

तुम्हें एक झलक देखने को..




गुरुवार, 1 फ़रवरी 2024

मुस्कुराते😊 रहें..क्योंकि..??

दो पेड़ थे एक हरेभरे और एक सूखे..
जब भी कोई चिड़िया थक हारकर आती वो पहले सूखे पेड़ पर आकर रुकती और थोड़ी देर बाद हरे-भरे पेड़ पे चली जाती..।।
क्यों..??
ये सबको पता है..।।

हमसब लोगों के साथ आज यही हो रहा है..
हमसब पेड़ है..
और वो चिड़िया, हमारे चाहने और जानने वाले है..।।

अब निर्णय हमें करना है कि हम परिस्थितियों से कैसे निपटते है, अगर विपरीत परिस्थितियों के कारण हताश और उदास हो गये तो आपके चाहने और जानने वाले आपसे दूरियां बनाना शुरू कर देंगे..।।
वंही अगर आप परिस्थितियों से अच्छे से निपटते है और चेहरे पे एक मंद मुस्कान रखकर बिखेरते है, तो सिर्फ आपके जानने वाले ही नही बल्कि वो भी आपके करीब आएंगे जो आपको नही जानते..।।



निर्णय आपको करना है.. 
उदासी बिखेरना है या फिर मुस्कान..
क्योंकि ये दोनों हमारे हाथ मे है..
मगर परिस्थितियां नही..।।

हम अनजाने में ही आज सूखे वृक्ष की तरह व्यवहार करना शुरू कर दिए है,और हमें पता भी नही चल रहा है..।।
ऐसा नही है कि इससे निपटा नही जा सकता..
- सबसे पहले तो अपने भावनाओं को नियंत्रण में रखें..
                वर्तमान में बड़ा दूभर कार्य है..
- अपने समस्याओं को खुद तक सीमित रखकर दूसरों को आभास न होने दे..
- अगर आप कुछ अच्छा कर रहें है,तो करके भूल जाये,उसकी चर्चा न करें..
- और अंत मे हरेक परिस्थितियों में मुस्कुराते😊 रहे..
क्योंकि आपके मुस्कुराने 😊 से दूसरों के चेहरे पे भी मुस्कान आती है...।।


बुधवार, 31 जनवरी 2024

हमारे पास हमेशा एक मौका होता है.

वो भी मुझसे आगे निकल चुके है..

जिन्हें कभी मुझ तक आने को सोचना पड़ता था..

मैं ठहरा ही रह गया

और जो मुझसे मिलों पीछे थे,

आगे निकल गए..।


हमारे पास हमेशा एक मौका होता है,

एक लंबी छलांग लगाने को..

और उन सबसे आगे निकलने को

जिस-जिस से आप पिछड़ चुके है..।





आपकी लंबी छलांग सिर्फ आपके लिए ही नही

दूसरों के लिए भी नजीर साबित होगी..

अगर अभी नही,तो फिर कभी नही..।


हनुमान सा सामर्थ्य हम सब में है..

बस जरूरत है..

उस सामर्थ्य को जानने का..

यही समय है,सही समय है..

उस सामर्थ्य को जानने का..।।


हमारे पास हमेशा एक मौका होता है,

एक लंबी छलांग लगाने को..।।


स्वयं को तुम संवार लो..

मैं हार जाता हूँ बार-बार..
क्योंकि मैं जीत के लिए प्रयास ही नही करता..
बार-बार..
इसिलिय ही, मैं हार जाता हूँ बार-बार..।।

कोई नही है यंहा..
इस भवर से निकालने को..
स्वयं के सिवा..
क्योंकि...
वो स्व ही है,जो शिव है..
वो शिव ही है,जो स्व है..।
उस स्व को तुम पहचान लो..
और इस भवर से, 
स्वयं को तुम निकाल लो..।।




तुम इस ब्रह्मांड में..
कंही और किसी और स्वरूप में तो हो सकते थे..
तुम यंही,इस स्वरूप में क्यों हो..??
इसका कोई जबाब नही..।
मगर तुम वर्तमान परिस्थिति में क्यों हो..
इसका जबाब तुम स्वयं हो..।

स्वयं को तुम संवार लो..
स्वयं को तुम निखार लो,
क्या पता फिर कभी अवसर मिले या ना मिले..
क्योंकि हर रात के बाद सुबह तो होती है..
मगर हरेक सुबह एक जैसी नही होती..।

स्वयं को तुम संवार लो..
स्वयं को तुम निखार लो..।।





मंगलवार, 30 जनवरी 2024

गांधी आज भी प्रासंगिक क्यों है..??

क्या आपको पता है..
भारत मे सर्वाधिक गाली मरने के बाद भी किसे दिया जाता है..
गाँधीजी को..
क्यों..??
क्योंकि वे लोग.. आज भी गुलाम है..
आज भी वो मानसिक रूप से गुलाम है..
वो दूसरों के विचार से प्रभावित होकर गांधी को गाली देते है. क्योंकि उनकी खुद की सोचने और समझने की शक्ति नही है..।।

गांधी को गाली और आलोचना करने का आपको तब अधिकार है जब आप गांधी के बारे में जानते हों..
मगर अफसोस भारत मे एक बहुत बड़ा तबका गांधी को इस रूप में जानता है कि..
- उन्ही के कारण भगत सिंह को फांसी हुई..
- भारत का विभाजन भी उन्ही के कारण हुआ..

अगर आप भगत सिंह की "मैं नास्तिक क्यों है" पढ़ लेते है तो आप गाँधीजी को भगत सिंह की फांसी के लिए कभी कसूरवार नही मानेंगे...।

गांधी ही वो सख्श थे जो अंत तक भारत विभाजन का विरोध करते रहें.. अंत मे सरदार वल्लभभाई पटेल ने उन्हें समझाया और कहा बापू अगर हाथ मे घाव हो जाये और उसके कारण सारा शरीर प्रभावित हो तो हाथ काट देना ही बेहतर है..
- भारत के विभाजन के कई कारण थे,इनमें से सर्वाधिक अमेरिका और ब्रिटेन की कूटनीति थी,क्योंकि भारत का झुकाव शुरू से ही रूस के तरफ था..तो रूस को काउंटर करने के लिए एक देश तो चाहिए..जो पाकिस्तान बना..।।

महात्मा गांधी की आज 76वी पुण्यतिथि है..


आज ही के दिन नाथूराम गोडसे ने गांधीजी का निरशंस हत्या कर दिया..
क्यों..??
उसे लगा कि उनके कारण ही देश का विभाजन हुआ..
काश वो गांधी की जगह जिन्ना को मारता तो उसका भी पुतला किसी चौराहे पे होता..।।

गाँधीजी ने एकबार कहा था-
" गांधी मर सकता है,मगर उसका विचार नही "
   उन्होंने सही ही कहा था..।।

आज अनेक देश हिंसा की आग में सुलझ रहे है और उसका एक ही समाधान है... अहिंसा
क्योंकि अगर आप हिंसात्मक तरीके से अगर जीत भी जाते है तो भी ये संभावना बनी ही रहेगी कि अगर दूसरा पक्ष भविष्य में मजबूत हुआ तो फिर हिंसा करेगा..
              "अहिँसा ही सबसे बड़ा बल है" - गांधी

सर्वधर्म समभाव :- आज धर्म के नाम पर उन्माद फैल रहा है ...क्यों..??
क्योंकि हरेक कोई ये साबित करने में लगा है कि मेरा धर्म/पंथ सर्वश्रेष्ठ है..
  "सभी धर्म सत्य की खोज की विभिन्न मार्ग है"- गांधी

सादा जीवन :- आज हरेक 10 में से 8 लोग बीमार है क्यों..?
 क्योंकि हम क्या खाएंगे,क्या पियेंगे,क्या पहनेंगे,क्या देखेंगे,क्या खरीदेंगे ये सब हम नही बल्कि बाजार तय कर रहा है..
               "सादगी ही सुंदरता है" -गांधी

स्व-निर्भरता:- हमारे प्रधानमंत्री आज आत्मनिर्भर भारत की बात कर रहे है,और गांधी ने इस बात को आज से 100 साल पहले ही समझ लिया था..
उन्होंने कहा था - "स्वनिर्भरता ही स्वाधीनता की कुंजी है"

रोजगारपरक शिक्षा :- हमारी नई शिक्षा नीति में इसे अभी शामिल किया जा रहा है,गांधी उस समय रोजगारपरक शिक्षा की वकालत कर रहे थे..
           "आधुनिक शिक्षा हमें गुलाम बनाती है"

कुटीर उद्योग :- जिसे आज हम MSMEs सेक्टर कहते है,गांधी ने कुटीर उद्योग पे जोर दिया और कहा बेरोजगारी की समस्या इसी से ही दूर होगी.. 
उन्होंने कहा कि कुछ चीजों का उत्पादन का अधिकार सिर्फ इसे ही दिया जाए..।
वर्तमान में MSMEs सेक्टर की हालात खराब है क्योंकि छोटी छोटी चीजो का उत्पादन भी बड़ी कंपनियां कर रही है..।।

महिला शाक्तिकरण :- हम आज लोकसभा/विधानसभा में आरक्षण के लिए विधयेक पारित किये है..
गांधी जी उस समय से ही महिलाओं की शसक्तीकरण की बात कर रहे थे जब महिलाओं का घर से बाहर निकलना भी बुरा माना जाता था..
आज हमारी नारी शक्ति जो राजनीति में परचम लहरा रही है उसका बीज गांधी ने अपने आंदोलन में ही बो दिए थे..।।
  " बिना नारी के सशक्तिकरण के बिना,कोई भी राष्ट्र प्रगति नही कर सकता" - गांधी

सतत विकास : आज पूरा विश्व जलवायु परिवर्तन के चपेट में है,क्यों..?? 
क्योंकि हमने प्राकृतिक संसाधनों का आंख बंद करके दोहन करना शुरू कर दिया है..
गाँधीजी ने कहा था- 
"प्रकृति हमारी आवश्यकता को पूरी कर सकता है,
 मगर हमारी लालच को नही"

आज पूरा विश्व जिन-जिन समस्याओं से जूझ रहा है,हरेक का समाधान गांधी ने पहले ही बतला दिया था..
गाँधीजी ने सही ही कहा था- गांधी मर सकता है,मगर उसका विचार नही..

शायद इसीलिए गांधी आज भी प्रासंगिक है..
आज जरूरत है कि हम गांधी को सिर्फ पढ़े ही नही,उसे जीने की कोशिश करें तब ही शायद एक बेहतर देश और विश्व का निर्माण हो सकता है..


 


सोमवार, 29 जनवरी 2024

प्रतिक्रिया देने से बचे..

आप जितने भी सफल लोग को जानते है..
उनकी सबसे बड़ी खूबी क्या है..
पता है..??
वो प्रतिक्रिया देने से बचते है..।।



आपने कुछ कलाकार,खिलाड़ियों,राजनेताओं को ट्रोल होते हुए या कभी-न-कभी किया होगा..।।
मगर उसके बाद कुछ को छोड़कर किसी और को ट्रोल होते हुए नही देखा होगा..क्योंकि वो प्रतिक्रिया देना बंद कर देते है..।।
(मैं यंहा सफल लोगों के बारे में बात कर रहा हूँ,क्योंकि वर्तमान में कुछ लोग लोकप्रिय होने के लिए खुद से ट्रोल होते है)

हमें भी अगर अपने जीवन को सरल और सफल बनाना है तो, ये नुस्खा अपना कर जिंदगी को 360° बदल सकते है..।।

आपने गौर किया होगा अक्सरहाँ हम प्रतिक्रिया अपने जानने वालों के साथ करते है,जो समझदार होते है वो आपके प्रतिक्रिया का प्रतिक्रिया नही करते और जो करते है,उनके साथ आपका संबंध अच्छा नही रहता..।।

आपने कभी ध्यान दिया है..
आप अगर कुछ कर रहे है और आपकी माँ खाने के लिए बोलती है तो हमारा जबाब क्या होता है.. सोचिएगा🤔
हम ये भी कह सकते थे थोड़ी देर बाद खा लूंगा..मगर हमारा जबाब ये नही होता..😊

घर के सदस्य आपके प्रतिक्रिया को सहन करेंगे,मगर घर के बाहर के लोग क्यों सहन करेंगे..।।

इसिलिय प्रतिक्रिया देने से बचे..
मगर कैसे..??
1.मौन रह कर..
2.या फिर जब बोलना जरूरी हो तब छोटा सा जबाब देकर..
आसान नही है,मगर आप आज से शुरू करेंगे तो 3 महीने से पहले ही अपने अंदर बदलाव देखेंगे..।।

सबसे पहले घर से ही शुरू करें..
और खुद से कहें कि, जंहा जरूरी न हो..वंहा प्रतिक्रिया नही देंगे या फिर जो पूछा गया है,उसका सीधा और छोटा सा जबाब देंगे, अगर हां या ना में बात बन जाये तो अच्छा है..।।

रविवार, 28 जनवरी 2024

उम्र तो बस एक नंबर है..

ऐसे कई लोग है,जिसने उम्र को मात देकर नए कीर्तिमान रचें..
ऐसा ही कर दिखाया है रोहन बोपन्ना(टेनिस खिलाड़ी) ने..



43 साल के उम्र में ऑस्ट्रेलिया ओपन मैन्स डबल जीत कर..वो इस उम्र में मैन्स डबल जीतने वाले पहले खिलाड़ी है..
इसी जीत के साथ वो अपने कैरियर में पहली बार पहले पायदान(1st rank) पर आ गए..




जिस उम्र में अक्सरहाँ खिलाड़ी रिटायरमेंट ले लेते है उस उम्र में ये अपने कैरियर के सर्वश्रेष्ठ स्थान पे है..।।

आज अक्सरहाँ युवा हताश है..
उन हताश युवा के लिए आज वो प्रेरणास्रोत है..

उनकी जीत ये बयां करती है की, 
सफलता मिलेगी ही..
बस एक शर्त है...
मैदान छोड़ मत भागो तुम..।।

मगर अफसोस आज अक्सरहाँ युवा मैदान में है ही नही..

आपको जानकर हैरानी होगी कि भारत के 43 करोड़ युवा 
(14-35 वर्ष के) ऑनलाइन गेम खेलते है(तीन पत्ती, रमी सर्किल, pub-g इत्यादि) और इसपे  औसत 2.5- 3 घंटा बिताते हैं..

9  से 17 साल के 62% बच्चे औसतन 3.5 घंटा+ सोशल मीडिया पर बिताते हैं..

   • आज 90% युवा सोशल मीडिया इस्तेमाल करते है,जिन्होंने महीने में कम से कम एक बार लॉगिन किया है..।।
    - इसमें से 37%  addict हो  चुके है..

रोहन्न बोपन्ना ने साबित कर दिया है..
जीतेगा तो वही जो मैदान में डटा रहेगा,
न कि स्मार्टफोन पे...

आज अक्सरहाँ युवा हताश है,निराश है,परेशान है..
क्योंकि वह स्मार्टफोन का गुलाम है..।
इन गुलामी की जंजीर तोड़ कर..
खुद से कहिए..
जब 43 कि उम्र में रोहन्न बोपन्ना कर सकते है तो मैं क्यों नही..??

मगर अफसोस भारत का 90% आबादी रोहन बोपन्ना को जानता तक नही,यह जीत उनका दायरा बढ़ा देगा..
मगर क्या हम उनके दायरे से कुछ सीख पाएंगे..??
अगर हां तो जिंदगी में बदलाव आनी निश्चित है..
अन्यथा जिंदगी जैसी चल रही है..चल रही है...😊


अपने लिए कभी भी कोई सीमा तय न करें और खुद पर विश्वास रखें, क्योंकि आप नही जानते कि जीवन कब जादुई तरीके से बदल सकता है...
रोहन बोपन्ना


Yoga for digestive system