गुरुवार, 7 मार्च 2024

माँ,मैं जब भी हताश और निराश होता हूँ..



माँ,मैं जब भी हताश और निराश होता हूँ...
मैं तुम्हे याद करता हूँ..
मैं आपसे मिलों दूर हूं तब भी अक्सरहाँ..
जब भी याद करता हूँ..
आपका कॉल आ ही जाता है..

मैं सोचता ही रहता हूँ..
की क्या बात करूंगा...
कॉल करके..

और आप कॉल करके मेरी तबियत पूछ लेती है..
और मैं सोचता ही रहता हूँ..

माँ,मैं जब भी हताश और निराश होता हूँ...
मैं तुम्हे याद करता हूँ..
मैं आपसे सेकड़ो मील दूर हूँ..
मगर मेरी भावनाएं आप तक पहुंच ही जाती है..
मैं ही अभागा हूँ..
जो आपकी भावनाओं को समझने कि कोशिश तक नही करता हूं..

माँ,मैं जब भी हताश और निराश होता हूँ...
मैं तुम्हे याद करता हूँ..


मंगलवार, 5 मार्च 2024

मेरा अस्तित्व क्या है..

कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
मेरा अस्तित्व क्या है..
जब अपने जबाब से निराश और हताश होता हूँ..
तो आसमां की और देखता हूं..
और सोचता हूँ..
इस ब्रह्मांड मैं इस पृथ्वी का क्या अस्तित्व है..
तो जबाब मिलता है..
इस पृथ्वी का हमारे ब्रह्मांड में वही अस्तित्व है..
जो हमारे पृथ्वी पे एक सूक्ष्मजीव का है..
जिसे हम देख भी नही सकते..

हम अभी भी ब्रह्मांड के 95% से ज्यादा हिस्सो से अनभिज्ञ है..



हम अपने पूर्वजों से सीखते है..
मगर हमने सीखना छोड़ दिया है..
हमारा ब्रह्मांड अभी भी अपना विस्तार कर रहा है..
और हम अपने आप को संकुचित करते जा रहे है..
अगर हम यही करते रहे तो एक दिन सच मे हमारे अस्तित्व पे प्रश्नचिन्ह लग जाएंगे..??

शनिवार, 2 मार्च 2024

प्यार की पांति...तुम होती..

तुम होती तो ऐसा होता..
तुम होती तो वैसा होता..
सच कहता हूं..
अगर तुम होती तो..
जिंदगी ऐसा तो बिल्कुल नही होता..
जैसा अभी है..
तुम होती...तो ऐसा होता..



तुम थी ही ऐसी..
जिसे चाहने लगा था..
जिससे प्यार करने लगा था..
क्या करूँ...
की तुम्हें भूल जाऊं..
तुम थी ही ऐसी..
क्षणभंगुर इंद्रधनुष के जैसी..

तुम मेरी जिंदगी में आई..
सूर्य की लालिमा की तरह..
और मेरी जिंदगी में ऊर्जा भर गई
दोपहरी सूर्य की तरह
और मेरी जिंदगी से ओझल हो गई..
अस्त होते हुए सूर्य की तरह..
मुझे आज भी इंतजार है 
उस सुबह का..
जिस सुबह तुम्हार दीदार कर सकू..

तुम होती तो ऐसा होता..
तुम होती तो वैसा होता..
सच कहता हूं..
अगर तुम होती तो..
जिंदगी ऐसा तो बिल्कुल नही होता..
जैसा अभी है..
तुम होती...तो ऐसा होता..

सोमवार, 26 फ़रवरी 2024

जिंदगी एक दौड़ है

सब भाग रहे है..क्योंकि और कोई ऑप्शन नही है..
अगर हम जिंदगी के इस दौड़ में नही भागे..
तो क्या होगा..??
जरा सोचिए🤔
या तो रौंद दिए जाएंगे,या फिर जिंदगी के इस दौड़ में पीछे रह जाएंगे..।।
और क्या हो सकता है..???




हम सब भाग ही रहे है..
कोई इस दौड़ में जीत रहा है,तो कोई हार रहा है,तो कोई हार कर इस दौड़ से ही बाहर हो जा रहा है..।।
वो कायर है जो जिंदगी के दौड़ में हारकर,दौड़ से बाहर हो रहे है या होने की सोचते है..।।

हमारे हाथ मे हार और जीत नही है..
मगर हमारे हाथ मे कुछ चीजें है..
जो हमें जिंदगी के दौड़ में औरों से आगे ले जा सकता है..


हम अपने ट्रेक का चयन खुद कर सकते है..
  हमें ये निर्णय लेने का अधिकार है कि हम 100मीटर का दौड़ दौड़े या फिर 400मीटर का या फिर मैराथन..

-हममें से अक्सरहाँ लोग आज 100मीटर की दौड़ दौड़ने में 
 लगे हुए है..क्योंकि सबको सफलता जल्दी चाहिए..
किसी को मिल जाती है किसीको नही मिलती..
जिसे मिल जाती है वो किसी चकाचौंध में खो जाता है,
जिसे नही मिलता वो किसी गुमनामी में खो जाता है..

हम अपना क्षमता को जाने ही..
सीधे दौड़ना शुरू कर देते है..
बिना ये जाने की क्या...
इसके लिए में योग्य हूँ, 
या फिर ये मेरे लिए योग्य है..
सबसे पहले हमें अपनी क्षमता को जानना होगा..
उसी के अनुसार ट्रैक का चयन करना होगा..

इस धरा पे जो भी है सब क्षमतावान है..
हम अपनी क्षमता का इस्तेमाल कैसे करते है..
ये बहुत महत्वपूर्ण है...।।

हममें से कुछ ही लोग होते है जो मैराथन ट्रैक का चयन करते है..और उनमें से कुछ ही लोग अपने मंजिल तक पहुंच पाते है..
जो पहुंच जाते है उन्हें दुनिया याद रखती है..
जो नही पहुंच पाते वो खुश रहते है..

मगर वास्तविकता ये है कि हम सबको मैराथन का हिस्सा होना ही होगा..
आप चाहे कुछ भी कर लो..
आपको मैराथन के इस ट्रैक पे दौड़ना ही होगा..
आपके पास ये आजादी है कि आप खुद ट्रैक की सीमा निर्धारित कर सकते है..

जिंदगी एक दौड़ है..
दौड़ना ही होगा.
न जीत के लिए..
न हार के लिए,
जीने के लिए दौड़ना ही होगा..।
जिंदगी एक दौड़ है,
दौड़ना ही होगा..






सोमवार, 19 फ़रवरी 2024

कुछ चीजें हमारे हाथ में नही होती...

हम कब उठते है..कब सोते है,कब खाते है,कब पीते है..
कब घर से बाहर निकलते है..
कब और किससे फ़ोन पर बात करते है..
तमाम ऐसी चीज ~90% हमारे हाथ मे है..
सिर्फ 5% जो हमारे हाथ में नही है..
मगर 90% हमारे हाथ मे ही है..।।



मगर हम ताउम्र उस 5% के लिए खुद को कोसते रहते है,जो हमारे हाथ मे नही है..
और उस 95% को नजरअंदाज या दुरुपयोग करते है जो हमारे हाथ मे है..।।

ये अलग बात है कि जो 5% चीजें आपके हाथ मे नही है,अगर होती तो शायद जिंदगी आसान हो जाती..
मगर क्या हम 95% चीजों को नजरअंदाज कर सकते है..??

जो 95% को नजरअंदाज नही करते वो ही कीर्तिमान रचते है..

हम उस 5% की बात करते है..
जो हमारे हाथ मे नही है..
1.आपका जन्म कंहा,किस तरह के परिवार में होगा ये हमारे हाथ मे नही है..
ये चीज हमारे आनेवले जिंदगी को निर्धारित करता है..
(शिक्षा,स्वास्थ्य, विचार एवं अन्य चीजें)
मगर अफसोस ये हामरे हाथ मे नही है..

मगर इन सब के अलावा बाकी सब चीज आपके हाथ में है..
मगर अफसोस इस चीज का ज्ञान होने के लिए हमें 14-15 साल की उम्र तक इंतजार करना होता है..

कभी-कभी तो हम ताउम्र उन चीजों को कोसने में लगा देते है,
जो हमारे हाथ मे है ही नही..
और जो चीज हमारे हाथ मे है उसका सदुपयोग करते ही नही है..।।

जरा सोचिए आपके हाथ मे क्या है..
सच कहूं तो हमारे हाथ मे कुछ चीज नही है..
मगर हमारे हाथ मे भविष्य की कुंजी है....

आपको पता है वो भविष्य की कुंजी क्या है..??
जरा सोचिए..🤔
हमारे भविष्य की कुंजी हमारा समय है..।।

इस समय का अगर सही से इस्तेमाल कर लिया तो वो 5% मायने नही रखता जो हमारे हाथ मे नही है..।।

क्या हम तैयार है..??
अपने समय का सही से सदुपयोग करने के लिए..
शायद.....😊
 

रविवार, 18 फ़रवरी 2024

प्यार की पांति...एक थी अल्हड़ सी..

एक थी अल्हड़ सी..
जिससे प्यार हो गया..
मगर उस अल्हड़ को मुझसे हुआ ही नही..
शायद मुझे प्यार करना और जताना आया ही नही..



एक थी अल्हड़ सी..
जिससे उसके सपनों को पूरे करने में सहयोग करने का वादा किया था..
अफसोस अपना सपना भी पूरा नही कर पाया..

एक थी अल्हड़ सी..
जिसकी एक झलक देखने को बेताब रहता था
और उसकी एक झलक देखते ही..
मैं फूलों की तरह खिल जाता था..
और उसकी महक हवा में घुल जाती थी..
मगर वो इस सबसे बेखबर थी..


एक थी अल्हड़ सी..
अनजाने में ही उसके अंगुलियों का स्पर्श आज भी याद है..

एक थी अल्हड़ सी...
जिसे भूलना चाहता हूं..
मगर उसका अल्हड़पन भूल ही नही पाता हूँ..
मगर अब धीरे-धीरे उसके अनेक यादें धूमिल होती जा रही है..
एक थी अल्हड़ सी..

शनिवार, 17 फ़रवरी 2024

हमें खुद ही..

हमें अपनी कहानियां खुद ही लिखना होता है..

जिस तरह मकड़ियों को अपनी जालियां खुद ही बुनना होता है..।



हमें खुद ही अपनी मंजिल ढूंढने के लिए जदोजहद करना होता है..

जिस तरह नदियां को अपनी मंजिल ढूंढने के लिए पर्वतों को चीरना होता है...।।

हमें खुद ही अपना रास्ता बनाना होता है..

जिस तरह पानी की धारा अपना रास्ता बनाता है..।

हमें खुद ही निरंतर आगे बढ़ते रहने के लिए, हरेक परिस्थितियों में मुस्कुराना होता है..

जिस तरह प्रकृति हरेक परिस्थितियों में मुस्कुराती रहती है..।

हमें खुद ही स्वयं को तराशना होता है..

जिस तरह गंडकी के पत्थर स्वयं को तराशकर पूजित होता है...

हमें खुद ही अपनी कहानियां लिखना होता है..



Yoga for digestive system