गुरुवार, 18 जुलाई 2024

हम सब दुःखी है..क्यों..??

आप घर से बाहर निकलिए..
और सड़कों, बसों,मेट्रो,ट्रेनों के भीड़ में चेहरे को देखने की कोशिश कीजिये..
आपको अधिकतर चेहरे पे उदासी,मायूसी,परेशानी के सिवा और कुछ नही दिखेगा..
क्यों..??
कभी आपने सोचा है..??
नही...
क्योंकि हम भी उसी भीड़ के हिस्से है,या होनेवाले है..।



इस उदासी का एक ही कारण है..कि
हम अपने उस अतीत को ढोते है,जिसे हम बदल नही सकते..
और हम उस भविष्य के लिए चिंतित है,जो हमारे हाथ में है ही नही..।।

क्या इस उदासी से छुटकारा पाया जा सकता है..??
अवश्य ही पाया जा सकता है..
इसके लिए हमें वर्तमान में जीना होगा..
हमें हरेक कार्य आज के लिए ही करना है न कि भविष्य के लिए और न ही अपने अतीत को बेहतर करने के लिए..।।

न अतीत में और न ही भविष्य में हम कुछ बदलाव कर सकते है,
अगर कर सकते है तो वो हम अपने वर्तमान में ही कर सकते है..।।
अगर हम हरेक पल वर्तमान में रहना सीख ले तो चेहरे पे उदासी के जगह मुस्कान स्वयं ही आ जायेगी..
और चेहरे पे मुस्कान आते ही हमारा अतीत और भविष्य दोनों ही सुनहरा हो जाएगा..।।

जिस अतीत को हम कोसते थे,जिसके लिए अफसोस करते थे उसका शुक्रियदा करेंगे,और भविष्य का स्वागत करेंगे..
अगर हम हरेक क्षण वर्तमान में जीना सीख ले..।।

आखिर वर्तमान में कैसे जिये..??
इतना आसान थोड़े ही है,वर्तमान में जीना..
आप शुरुआत अभी से कर सकते है..
अभी क्या करना है,आज क्या करना है..
उसे पूरी तलीनता से करें..


बुधवार, 17 जुलाई 2024

मनुष्य कितना स्वार्थी है..

आज रास्ते से गुजर रहा था,हरेक रोज ही उधर से गुजरता हूं, मगर आज उस जगह एक खालीपन,एक उदासी सी महसूस हुई..
अचानक सर् ऊपर किया तो पाया कि वो पेड़ अब नही है..
जिस पेड़ पे कल तक सुबह-सुबह तोता की टे-टे सुनाई देती थी वो अब नही सुनाई देगी..
क्योंकि किसी ने अपने आसियान को और बेहतर बनाने के लिए उन तोतों का आशियाना उजाड़ दिया..।



ऐसा हरेक रोज ही नही हरेक पल हो रहा है..
जिस तरह से मनुष्य अपने आशियाना को जिस तरह दिन-प्रतिदिन आलीशान बनाने की लालसा में लगा हुआ है,
वो दिन दूर नही जब इस पृथ्वी पर सिर्फ और सिर्फ मनुष्य ही होंगे..

आप आज से सिर्फ 10 साल पीछे जाइये..
आप जिन जीव जंतुओं को 10 साल पहले देखें थे,
क्या उसे अब भी आप देख पा रहे है..
शायद नही,या फिर उसकी तादाद बहुत कम हो गई है..।।

एक अलग ही प्रचलन चल पड़ा है हमारे समाज में,
हम अपने घर मे जानवर तो पाल रहें है,उसकी देखभाल भी संतति की तरह कर रहे है,मगर उसी प्रजाति के दूसरे जानवर से नफरत करते है..
हम घर मे बागबानी तो करते है,मगर बाहर के पेड़ पौधे से कोई लगाव नही है..
ये किस तरह का प्रकृति प्रेमी का हम ढोंग रच रहे है..।।

मंगलवार, 16 जुलाई 2024

धैर्य रखें..

नीतिपरक बातें करनी तब ही अच्छी होती है,
जब आपमें नैतिकता हो..।।

हमें उपदेशात्मक बातें करनी बहुत अच्छी लगती है..
मगर हममें खुद ढेर सारी कमियां होती है..
जबतक इन कमियों को दूर न कर लिया जाय तबतक उपदेशात्मक बातें करनी अच्छी नही है..।।

योग्यता अर्जित की जाती है..
जबतक आपमें योग्यता नही होगी तबतक लोग आपके पास क्यों आएंगे..।।

लोग उन्ही के पास सहायता/मदद के लिए जाते है,
जिनके पास इसके निदान होते है..।।

अक्सरहां लोग रोना रोते है,
अपनी परिस्थितियों के ऊपर..
जबकि आप स्वयं इन परिस्थितियों के लिए जिम्मेदार होते है..।।
हां कुछ चीजें हमारे हाथ में नही होती,
मगर जो कुछ होता है,
हम उसका अनदेखा करते है..।।

चाहे परिस्थितियां कितनी भी बुरी हो..
अगर आपके पास धैर्य है..
और आप आध्यत्मिक है..
तो हरेक समस्या का निदान जरूर होगा..।।

धैर्य रखें..
ये बुरा समय भी टल जाएगा..।
क्योंकि मैंने सिर्फ सूखे पेड़ से कोपल देते ही नही,
बल्कि उसे फलते-फूलते देखा है..।।

मंगलवार, 9 जुलाई 2024

माँ

मन करता है..
माँ से बात करूं…
फिर ये सोचता हूँ कि..
क्या बात करूं..
क्योंकि बात करने को कुछ है ही नही..।।

फिर सोचता हूँ कि हालचाल के लिए ही..
माँ से बात करूँ..
सच कहूं तो ये ख्याल आता ही नही..।।

कितना निष्ठुर हूँ मैं..
सच कहूं तो निष्ठुर नही..
संवेदना विहीन हो गया हूँ मैं..
या फिर और कुछ..
(ये लेखनी खत्म भी नही हुईं थी कि माँ का फ़ोन आ गया)

मैं जितनी दफा माँ तुम्हें याद करता हूँ,
तुम्हारा कॉल हर दफा आ जाता है..
मैं ही नकारा हूँ..
जो तुम्हारे याद करने पर भी कॉल नही कर पाता हूँ।।



मंगलवार, 2 जुलाई 2024

मेरी माँ

मेरी माँ,
मेरी सफलता के लिए..
कितनी मन्नतें मानी थी..
मगर मैं,
सफल ही नही हुआ..।

आज फिर उस खुदा को..
ढेर सारे गिले-शिकवे सुनने को मिला होगा..।।

आखिर कैसे कहुँ माँ...
में तुझसे..
मैं अपनी असफलता के लिए खुद ही जिम्मेदार हूँ..
तेरा खुदा नही..
वो तो सदा, तुम्हारे साथ है..।।

सोमवार, 1 जुलाई 2024

हमें लगता है..

हमें लगता है वो बुरा है,
क्योंकि उसकी हरकतें,आदतें सब बुरे है..।

सच कहूं तो मैं ही कंहा अच्छा हूं..??
मुझमें भी, तो ढेर सारी कमियां है..
जबतक मैं अपनी कमियों को दूर न कर लूं..
तबतक हमें किसी को बुरा कहने का अधिकार नही..।

अपनी कमियां कंहा दिखती है किसीको..
अगर दिख भी जाये किसी को ..
तो कितने ऐसे लोग है जो अपनी गलतियां स्वीकार करते है..
जो स्वीकार कर उसे दूर कर लेते है..
उन्हें फिर किसी मे कमियां दिखती ही नही..।।

रविवार, 30 जून 2024

धैर्य परिणाम बदल सकता है..

गीता में श्रीकृष्ण कहते है..

  कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।                                      मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥

हमारा अधिकार सिर्फ कर्म पर है,कर्म के फल पर नही..

कल रात सभी भरतीय को लग रहा था कि अब तो मैच हाथ से गया..जब 30 बॉल में 30 रन बनाना हो और क्रीच पर #क्लासेन और #मिलर जैसे धुरंधर बल्लेबाज हो..तो स्वाभिक है कि हम जीत का आस नही कर सकते है..



मगर भविष्य के गर्भ में क्या है,ये कौन जानता था..
जब 15वे ओवर में क्लासेन अक्षर पटेल के ओवर में 24 रन बटोर लेता है, और साउथ अफ्रीका को जीत के मुहाने पर खड़ा कर देता है,
और हम भारतीय उम्मीद खो बैठते है..
मगर 17वे ओवर में जब #हार्दिक पहली गेंद पर क्लासेन को आउट करते है तो हमारी उम्मीद फिर जग जाती है.
और जब 18वे ओवर में #बुमराह ने येनसेन को आउट किया तो लगा कि अब जीत जाएंगे..
19वे ओवर में #अर्शदीप की सधी हुई गेंदबाजी ने बहुत उम्मीद जगा दी..
मगर अंतिम ओवर में #पांड्या के पहली बॉल पर मिलर ने बाउंड्री मारने की प्रयास की, मगर बाउंडरी पर खड़े #सूर्यकुमार यादव उस छक्के को कैच में तब्दील कर दिया..


अब हमें लग रहा था जीत जाएंगे मगर दूसरी बॉल पे रवाडा ने बाउंडरी मार दी.. थोड़ी धड़कन बढ़ी मगर फिर रवाड़ा भी कैच आउट हो गया..
और इस तरह हम हारी हुई बाजी जीत गए..

इस जीत के एक नही कई नायक थे..
#विराट कोहली जो अपने परफॉर्मेंस से नाराज थे उन्होंने फाइनल में सारा कसर निकाल दिया..
#हार्दिक पंड्या जिसे कुछ महीने पहले तक(IPL) इतना ट्रोल किया जा रहा था की,अगर वंहा और कोई रहता तो टूट जाता,मगर वो टूटा नही उसने लड़ा..आज उसने 150करोड़ भारतीयों को जश्न मनाने का अवसर दिया..
#बुमराह इनका कोई जबाब नही, ये हमेशा संकट मोचन का काम करते है..जब भी टीम कठिनाई में फंसी रहती है,इसे उबारते है..
#अर्शदीप सिंह.. ने खुद को इतना निखारा है कि पता ही नही चल रहा है कि क्या वे वही अर्शदीप सिंह है,जिसे लोग 2 साल पहले ट्रोल कर रहे थे..
#रोहित शर्मा इनकी यात्रा आसान नही थी..मगर वो यात्रा भी क्या जिसमें रोमांच न हो..ढेर सारे मलाल थे,इस जीत ने कई मलाल को खत्म कर दिए होंगे..।



इस जीत के एक नही,हरेक कोई हीरो है..
क्योंकि जीत किसी एक कि नही बल्कि उन सबकी होती है,
जो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से अपना योगदान दे रहे होते है..।।

ये जीत करोड़ों युवाओं को प्रेरणा देगा..
की हार नही मानना है,क्योंकि कुछ भी हो सकता है..

इस जीत ने साबित कर दिया कि-
धैर्य परिणाम बदल देता है..
जरूरी ये नही की हम जीते या हारे,
जरूरी ये है कि हम मैदान पर अंतिम क्षणों तक दृढ़ता से टिके रहे..
जीत और हार तो लगी रहती है..
अगर हम मैदान ही छोड़ दे तो..
इन दोनों में से किसी का रसास्वादन नही कर पाएंगे..
इसीलिए मैदान पे टिके रहना जरूरी है..
यही तो जीवन है..