सोमवार, 2 दिसंबर 2024

माफ करना जरूरी क्यों है

क्या आप किसी ने नाराज़ हैं, क्योंकि उसने आपके साथ कुछ बुरा किया था और क्या आपको लगता है कि वह माफ़ी का अधिकारी नहीं है?

कितनी हास्यास्पद बात है कि हममें से अधिकांश लोग ये मानते हैं कि यदि हम किसी को माफ़ नहीं करेंगे तो उसे कष्ट होगा, जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत है। यदि हम किसी को माफ़ नहीं करते तो कष्ट हमें ही होता है।



किसी के आपके साथ बुरा करने पर उसे माफ़ न करना आपको दुःख के एक लंबे रास्ते पर ले जाएगा और उस पूरी यात्रा में आपको पता भी नहीं चलेगा कि आपके दिमाग़ में कितने नकारात्मक विचार घूम रहे हैं, और आपको कमज़ोर, उलझा हुआ एवं निराश बनाते जा रहे हैं।

जब हम किसी को क्षमा नहीं करते तो हम उसके जैसे बनने लगते हैं। जितनी अधिक नफ़रत हम उससे करते हैं, उतना ही अधिक हम उसके जैसे बनते जाते हैं। हमें पता भी नहीं चलता कि कब हम ख़ुद को एक क्षुब्ध, असभ्य और हृदयहीन व्यक्ति के रूप में बदल लेते हैं।

अतः हमेशा याद रखें- माफ़ी वास्तव में, माफ़ कर देने वाले के लिए होती है!

(ये लेख स्नेह देसाई द्वारा लिखित है,जो "अहा जिंदगी" पत्रिका में प्रकाशित हुई थी..)


रविवार, 1 दिसंबर 2024

आप खुद से कितना प्यार करते है..

आपने आखरी बार आयने में खुद को कब देखा था..??
कैसा बेतुकी सवाल है..आपको लग रहा होगा..
मगर मैं, फिर पूछता हूँ आपने आखरी बार खुद को आयने में कब देखा था..??


शायद आपको याद नही हो,या फिर आप अभी भी मेरे सवाल को समझ नही पा रहें होंगे..
चलिए प्रश्न को आसान करते है..
आपने आयने के सामने खुद को देखकर कब मुस्कुराया था..??
और अपने खूबसूरती पे नाज किया था..
थोड़ा याद करें..।।
अगर नही याद आ रहा है तो आप गंभीर स्वास्थ्य समस्या से घिरे होंगे,या घिरने वाले है..
इसीलिए आज से ही आयने में खुद को देखकर मुस्कुराना शुरू कीजिए..

हाल ही में,
मैं लसेन्ट द्वारा प्रकाशित हेल्थ रिपोर्ट पढ़ रहा था..
(Global burdens disease study 1990-2021)

जो मैं यंहा बताने जा रहा हूँ...
आपको जानकर हैरानी होगी कि जितना भी क्रोनिक(खतरनाक) बीमारी है,वो महिला के अपेक्षा पुरुषों में ज्यादा होता है..
कुछ आंकड़ो से समझते है..

• समय से पहले मृत्यु, महिला के अपेक्षा पुरुषों की ज्यादा होती है।
वैश्विक स्तर पर COVID-19 से महिला के अपेक्षा पुरुषों की मृत्यु 45% ज्यादा हुआ..

इसी तरह हृदय (heart) से जुड़े रोगों से मरने वालों पुरुषों की संख्या महिला से 45% ज्यादा थी,जबकि ये यूरोपियन देशों में 49% तक देखा गया..।

वंही मानसिक समस्या से जुड़ा मामला, वैश्विक स्तर पर महिला से ज्यादा पुरुषों में 35% ज्यादा देखा गया।
(गरीब देश मे ये मामला ~50% तक ज्यादा है)

वंही डाइबिटीज के मामले में 1990 के दशक में 1 लाख पर पुरुषों की संख्या महिलाओ से 56 अधिक हुआ करता था,जो  2021 तक बढ़कर 147 हो गया है..।

इसी तरह कैंसर,किडनी,अर्थराइटिस, बैक पैन की समस्या भी महिला के अपेक्षा पुरुषों में ज्यादा है..।।

https://www.healthdata.org/news-events/newsroom/news-releases/lancet-public-health-global-study-reveals-stark-differences

इस रिपोर्ट में अलग-अलग कारण बताए गए है..
मगर आपके अनुसार ऐसा क्यों हो सकता है...
फिर से मैं,वहीं सवाल पूछता हूँ,आपने आखरी बार आयने के सामने कब मुशकुराया था..
सवाल मैं ही जबाब है..

महिलाओं के साथ अच्छी बात ये है कि वो सजने सवरने के लिए आयने के सामने खड़ी होती है,इस सिलसिले में कभी-कभी चेहरे पे मुस्कान आ जाती होगी,और सारा बोझ उत्तर जाता होगा..

मगर हम पुरुषों के साथ ऐसा नही होता,हम तो बाल भी इसलिए छोटा रखते है कि संवारने का झंझट न रहे..
यंही गलती कर जाते है..

कुछ समय निकालिये खुद से प्यार करने के लिए..
क्योंकि जब हम खुद से प्यार करने लगते है,तो सिर्फ बीमारियां ही नही हरेक समस्या खुद-ब-खुद दूर भागने लगती है..।।

विश्वास नही होता..
आयने के सामने जाइये और खुद को देखिए..

मैं जानता हूँ..
अभी भी आयने के सामने में खुद को देखने की जहमत बहुत लोग नही उठा पाएंगे..
आप उनमे से तो नही..
प्लीज उठिए और खुद को आयने में देखिए...
और एक बेहतर भविष्य का निर्माण कीजिये..।।




शुक्रवार, 29 नवंबर 2024

चलो फिर से जीते है..

क्या आपको बच्चों की किलकारिया परेशान करता है..??
अगर हां...
तो आपको सोचने की जरूरत है..
की, क्या आप जिंदा है या फिर मशीन बन(मर) चुके है..।

बच्चे का स्वभाव ही होता है..
हँसना,रोना,चिल्लाना,चीखना और चुप रहना और बहुत कुछ एक साथ करना..
सबसे बड़ी बात ये है कि.. 
बच्चें एक समय मे ही ये सब एक साथ कर सकते है..
और हम सब ज्यों-ज्यों बड़े होते है..
ये सब पीछे छूट जाता है..

क्या आपको याद है..
आपने आखरी बार कब खुल के हंसा था या फिर रोया था..
आपने आखरी बार कब जोर से चीखा या चिल्लाया था..
या फिर आपने आखरी बार कब चुपी रखी थी..

शायद आपको याद न हो..
थोड़ जोर देंगे तो कंही याद आ जाये..जोड़ दीजिये..

आपको ये बात जरूर याद होगी..
आपको आखरी बार गुस्सा कब आया था..
(मुस्कुराइए😊 आपकी यादाश्त अच्छी है.)

सबसे अजीब बात ये है की..
हमें गुस्सा कंही भी किसी के ऊपर आ जाता है,कभी-कभी तो इस गुस्से के कारण रिस्ते तक खराब हो जाते है..
और शायद इसका बाद में अफसोस भी होता है..
कभी-कभी ये अफसोस ताउम्र बना रहता है..।

मगर सोचा है आखिर हमें गुस्सा आता ही क्यों है..??
क्योंकि हमनें अपने बचपना को दफना दिया है..

आपको याद है..
आप बचपन मे ढेर सारे झगड़े किये होंगे..
मगर वो झगड़े सुलझ गए होंगे..
(शायद ही कोई आपका बचपन का दुश्मन हो)
क्योंकि उस समय हमारे अंदर 'अहम' (ego)नही होता था,
मगर वर्तमान में हम लबालब ego से भरे हुए है..
वो अक्सरहाँ हरेक के बात पे,कभी भी बाहर छलक जाता है..
ना वो व्यक्ति देखता है और ना ही परिस्थिति..।।

इसका हल क्या है..
चलो फिर से जीते है..
और बच्चों की किलकारियां और हंसी ठठोली को महसूस करते है..
चलो फिर से जीते है..
बच्चों के साथ कुछ पल बच्चें हो जाते है..
चलो फिर से जीते है..
और बचपन को समझने की कोशिश करते है...
चलो फिर से जीते है..

गुरुवार, 28 नवंबर 2024

हरेक चीज का महत्व है...

हमारे जिंदगी में हरेक चीज का महत्व है..
बशर्ते हमें किसी चीज की महत्वता का पता हो..।
आपके आस-पास जो भी कुछ है..
उस हरेक चीज का महत्व है..
वो वंहा इसलिये है क्योंकि उसकी वंहा जरूरत है..।
वो अलग बात है कि हमें पता नही है..
की इसकी क्या जरूरत है..।

इसी तरह मैंने अपने जिंदगी में गंध का महत्व को समझ..
मुझे 3 तरह की गंध बहुत रोमांचित करता है..
और मुझे अतीत का सफर करा देता है..।

● पहला सुंगंध कोयले की धुंए की है जो मुझे बचपन की यादों में ले जाता है..
● दूसरी सुगंध एक अगरबत्ती की है शायद,जो मुझे किशोरावस्था में ले के चला जाता है(इस अगरबत्ती की ढूंढने की कोशिस करता हूँ,अभी तक मिला नही है)
● और तीसरी सुगंध फूल की है जो मुझे किसी की याद दिला देती है..

मालूम नही चौथी सुगंध कैसी होगी,और इसका कैसा प्रभाव होगा..

अगर आप जिंदा है तो हरेक चीज को महसूस करेंगे..
चाहे हवा का स्पर्श हो,या फिर चांद की रोशनी का..
या चिड़ियों का चहचहाटो का,या फिर बच्चों की किलकारियों का..
ये सब चीज अगर आपको रोमांचित करता है..
तो आप जिंदा है..।।

किस से बात करू...

कभी-कभी मन होता है..
किसी से बात करू..
फिर सोचता हूँ..
किस से बात करू..
अगर कोई जेहन में आ भी गया..
तो फिर सोचता हूँ..
उससे क्या बात करूं..

अगर गलती से.. 
किसी को फ़ोन मिला भी दिया..
तो उधर से आवाज आती है..
क्या बात है,कॉल किया..।

फिर सोचता हूँ..
क्या जरूरी है...कोई बात हो, 
तब ही कॉल करू...

मगर सच तो यही है..
हमसब ने खुद को वैसा ही बना लिया है..
कोई बात हो तब ही कॉल करो..
अन्यथा बात मत करो..

अगर गलती से भी किसी का कॉल आये..
तो पहले, क्या बात है.. मत पूछना..
पहले पूछना, क्या हाल है..।।

कभी-कभी मन होता है..
किसी से बात करू..
फिर सोचता हूँ..
किस से बात करू..
अगर कोई जेहन में आ भी गया..
तो फिर सोचता हूँ..
उससे क्या बात करूं..


रविवार, 24 नवंबर 2024

जबतुम थक जाओ..

जब तुम थक जाओ..
तो थोड़ा रुक जाओ..
ना कि रुक कर वहीं रह जाओ..
बल्कि वंहा से आगे बढ़ जाओ..

कौन हैं यंहा..
जो थका हुआ है..
कौन है यंहा..
जो रुका हुआ है..
यंहा कोई नही.. 
जो थका हुआ है..
यंहा कोई नही 
जो रुका हुआ है..
जो यंहा रुक गया,
जो यंहा थक गया..
फिर उसका कंहा अस्तित्व रहा..

सर् उठा के आसमां की और देखो..
चांद तारे दिख रहे है, इसलिए..
क्योंकि वो थके नही है..
अपने आसपास देखो..
जो दिख रहे है..
वो इसलिए दिख रहे है..
क्योंकि वो थके नही है..।

ये ब्रह्मांड सिर्फ उसे ही स्वीकारता है..
जो थका नही है..
जो थक गया है..
उसे ब्रह्मांड भी नही स्वीकारता है..।।

इसीलिए जबतुम थक जाओ..
तो थोड़ा रुक जाओ..
ना कि रुक कर वंही रह जाओ..
बल्कि वंहा से आगे बढ़ जाओ..।।


इक खालीपन सा है..



एक खालीपन सा है..
सच मे एक खालीपन सा है..
एक ऐसा खालीपन जो कूड़ा-कचराओ से भरा हुआ है..
ऐसा ही खालीपन सा है..

कुछ नया भरने को मन है..
मगर इन कूड़ा-कचराओ से निकले कैसे..

इक खालीपन सा है..
इसको फिर से नए सिरे से भरने को मन है..
शुरुआत कैसै और कंहा से करू..
कुछ पता नही..
इक खालीपन सा है...

या सच में..
मैं अपनी बचीं हुई संभावनाओं को भी खो रहा हु..
क्या ये उस और तो खालीपन का इशारा तो नही है..
सच मे इक खालीपन सा है..।

Yoga for digestive system