मंगलवार, 7 जनवरी 2025

हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचें..

इस अथाह समुन्द्र की कोई थाह नही है..(अब है)
इस खुले आसमां का कोई किनारा नही है..
इसी तरह मनुष्य की जिजीविषा का कोई अंत नही है..।
मनुष्य आज कंहा नही है..
अगर जंहा नही है..
वंहा का इसे पता नही है..
अन्यथा ये हर जगह है,
जंहा नही है,
वंहा जाने का प्रयत्न कर रहा है..।।



हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचें..
हमने अपने स्वार्थ के लिए,
अपनों का भी बलिदान दिया..
हम यू ही आज सभ्य नही कहलाते..
हमने कई सभ्यताओं का नाश कर,
आज सभ्य हुए है..
हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचे है..।

जितनी परतें खोलते जाऊंगा..
हमारी असभ्यता का परत-दर-परत खुलता जाएगा..
हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचें है..
हमारे कारण आज प्रकृति के कई जीव-जंतु और पेड़-पौधे
विलुप्त हो गए..
कितने आज विलुप्ति के कगार पे है..
आज हम मनुष्यों के कारण ऐसा कोई जगह नही जो सुरक्षित है..
हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचें है..
विकास के नाम पर हम खुद को नाश करने के कगार पे ले जा रहे है..।।
शायद ही पृथ्वी का कोई कोना हो,जो आज शांत हो..
हम मनुष्यों ने अपनी आहटों से सबकी शांति भंग कर दी है..।


हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचें..
हमने अपने स्वार्थ के लिए,
अपनों का भी बलिदान दिया..
हम यू ही आज सभ्य नही कहलाते..
हमने कई सभ्यताओं का नाश कर,
आज सभ्य हुए है..
हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचे है..।।

सोमवार, 6 जनवरी 2025

एलिफेंटा की यात्रा

"यात्रा हमेशा आपके जीवन में बदलाव लाता है..
अगर यात्रा आपके जीवन में बदलाव नही लाता तो वो यात्रा व्यर्थ है..।।"

मैं सोचता हूँ, आज हम कितना विकसित हो गए है..
मगर जब एलिफेंटा जैसी गुफाओं में खुदी आकृति,कलाकृति को देखता हूँ ,तो आश्चर्यचकित होता हूँ..
आज हमारे अंदर धैर्य की बिल्कुल ही कमी है..
मगर इन कलाकृतियों,आकृतियों को तराशने में कितना धैर्य रखना पड़ा होगा ये हम सोच के ही घबराते है..।।

वो क्या कलाकार रहें होगा..
वो कैसा हथौड़ी-छैनी रहा होगा..
जिसने पहाड़ में छुपी शिव की प्रतिमा को सबके सामने ला दिया..
जो आज भी जीवंत दिखलाय दे रहा है..
जिसे देखकर आप भाव-विभोर हो जाओगे..
आप उस तेजोमयी आभा से सरोबोर हो जाओगो..।





https://en.m.wikipedia.org/wiki/Elephanta_Caves


मंगलवार, 31 दिसंबर 2024

नव वर्ष मंगलमय हो..😊

कल भी आज की तरह ही सूरज उगेगा..
चिड़िया आज की तरह ही चहचहाएँगी,
नदिया आज की तरह ही बहेंगी..
प्रकृति में कुछ बदलाव नही होगा..
बदलेगा तो सिर्फ हमारा कैलेंडर और हमारा उत्साह..।।

मगर हम इस उत्साह को कब तक बरकरार रख सकते है..??

मगर क्या हम खुद को कैलेंडर की तरह बदल पाएंगे..??

थोड़ी देर रुकिए..और सोचिए..
2024 शुरू होने से पहले आपने खुद के अंदर परिवर्तन लाने के बारे में क्या सोचा था..और उसपे आपने कितना अमल किया..और आज आप कंहा है..।।

छोड़िए ये सब..
2025 का प्लान बनाइये..
इस वर्ष आप क्या पाना चाहते है,और क्या छोड़ना चाहते है..
इसे लिखिए और प्लानिंग बनाइये..
क्योंकि बिना रोडमैप के आप कंही नही पहुंच पाएंगे..
आप चलना शुरू तो करेंगे..
मगर ज्यादा दूर तक नही चल पायेंगे.. अगर चलेंगे भी तो भटक जाएंगे..
इसलिये थोड़ा रुकिए और 2025 में क्या पाना चाहते है और क्या छोड़ना चाहते है,उसके बारे में रोडमैप तैयार कीजिये..।।

और इस नव वर्ष को नए जीवन के रूप में परिवर्तित कीजिये..
नव वर्ष मंगलमय हो



मैंने मुस्कुराना सीख लिया है..😊

मैंने मुस्कुराना सीख लिया है..
जब भी खुद को आयने में देखता हूँ तो मुस्कुराता हूं,
जब भी पंछियो को पंख फैला कर उड़ते देखता हूँ तो मुस्कुराता हूँ..
जब भी सूर्य की लालिमा को देखता हूँ तो मुस्कुराता हूँ..
जब भी प्रकृति की लीला देखता हूँ तो मुस्कुराता हूँ
मैंने मुस्कुराना सीख लिया है..।।



अब मैं दुःखी नही होता..
क्योंकि दुःख तो जीवन का हिस्सा है..
इसे आने से कोई नही रोक सकता..
मगर ये मेरे ऊपर कितने समय तक हावी रहे,
इसका निर्णय मेरे हाथ मैं है..
इसीलिए मैं अब इसे ज्यादा देर तक अपने ऊपर हावी नही होने देता..
मैंने मुस्कुराना सीख लिया है..।।

हमारी  मुस्कान सबसे बड़ा गहना है,
जो प्रकृति से उपहार मैं मिला है..
हम जब भी मुस्कुराते है..
प्रकृति भी मुस्कुराती है..।।

सोमवार, 30 दिसंबर 2024

अपनी समस्या से खुद निपटे..

अपनी समस्या से हमें खुद को ही जूझना पड़ता है..



यंहा कोई और नही है जिसे आपकी समस्या की परवाह पड़ी हुई है...क्योंकि आपकी समस्या के बारे में आपके सिवा किसी को नही पता है..
इसीलिए कोई चाह करके भी आपकी मदद नही कर सकता..

हां सिर्फ माँ-बाप ही आपका साथ लंबे समय तक दे सकते है,बिना आपके समस्या को जाने हुए भी..
इसीलिए जितना जल्दी हो सके अपने समस्या से निपटने की कोशिश करें....


भारत विश्वगुरु कब बनेगा..??

अगर आपको इतिहास में रुचि है,या फिर आप इतिहास को जानते है तो आपको भली-भांति पता होगा कि भारत प्राचीन और मध्यकाल में,पूरे विश्व मे अपना प्रमुख स्थान क्यों रखता था..??



भले ही आज हम आर्थिक प्रगति कर रहें है..और आर्थिक रूप से हम GDP के मामले में टॉप 5 देशों में आते है,मगर उसका दूसरा पहलू ये है कि पर कैपिटा GDP इनकम के मामले में हम टॉप हंड्रेड देशों के सूची(141) में भी नही आते..।

आखिर क्यों..??

प्राचीन काल मे भारत की जनसंख्या विश्व की जनसंख्या का लगभग 33% था, वंही GDP विश्व के GDP का 33-35% था

और मध्यकाल में भारत की जनसंख्या विश्व की जनसंख्या का ~28% था, वंही GDP विश्व के GDP का 30-33%...

आखिर फिर क्या हुआ कि भारत पिछड़ गया....??

ये सबको पता है कि 1700 ईस्वी के बाद भारत ब्रिटेन के चंगुल में फंसता गया और भारत को निचोड़ता गया..भारत को  निचोड़ कर ही यूरोप में औद्योगिक क्रांति की शुरुआत हुई,और यूरोप इस क्रांति से इतना संपन्न हुआ कि पूरे विश्व पे अपना छाप छोड़ा जो अभी भी दिख रहा है..।

मगर 1947 में हमें आजादी मिल गई भले ही हमें उस तरह से नही मिली,मगर मिल गई..फिर आखिर क्या हुआ की हम खड़ा होना तो शुरू किए मगर अभी तक उस अवस्था मे खड़े नही हो पाए ...??

क्योंकि हमने नींव ही गलत जगह गाड़ी...या फिर हमने नींव गाड़ी ही नहीं..??हमने अंग्रेजो द्वारा बनाये गए महलों में बैठ कर ही रणनीतियां बनाना शुरू किया.. जिसका भुगतान आज तक हमें करना पड़ रहा है..।।

भारत तबतक समृद्ध रहा जबतक बिहार,पूर्वी उत्तर प्रदेश और बंगाल समृद्ध रहा...सिर्फ आर्थिक ही बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप  में भी समृद्ध था..जब तक ये क्षेत्र फिर से समृद्ध नही होंगे तबतक भारत कभी भी समृद्ध नही होगा,न ही कभी भारत की फिर से विश्वगुरू बनने की महत्वाकांक्षा पूर्ण होगी..इसलिए इस क्षेत्र का समृद्ध होना बहुत जरूरी है..

आखिर ये क्षेत्र पिछड़े क्यों..??

क्योंकि इन्हें आजादी की कीमत अभी भी चुकानी पड़ रही है,पहले अंग्रेजों ने फिर अंग्रेजी मानसिकता के लोगों ने..

शुरुआत में अंग्रेज का विरोध इस क्षेत्र से प्रबल हुआ, तो अंग्रेजों ने पहली अपनी राजधानी बदली और फिर धीरे-धीरे अपना पूरा व्यापार समेटकर दक्षिण की और पूर्वी और पछिमी तट पे ले के चले गए आज ये क्षेत्र समृद्ध है..

आजादी के बाद भी ये क्षेत्र समृद्ध नही हुए..क्योंकि इन्होंने आजादी के जो स्वप्न देखे थे वो आजादी के बाद दुःस्वप्न में बदल गए..आजादी सिर्फ समृद्ध लोगों को ही मिले.. आर्थिक और सामाजिक रूप से जो पिछड़े थे वो आज भी बड़ी संख्या में पिछड़े ही है..

इनके हक के मांग के कारण बार-बार हड़ताल के कारण बची खुची कंपनी भी यंहा से पलायन हो गए..

वर्तमान में ये क्षेत्र आज भी शैक्षणिक,और आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है..

महाराष्ट्र, तमिलनाडु,कर्नाटक,केरल,आंध्रप्रदेश के 10वी पास बच्चों को नॉकरी ढूंढने में उतनी तकलीफ नही होती, जितनी तकलीफ बिहार,ओडिशा,U.P, झारखंड और बंगाल के स्नातक पास छात्रों को होती है,क्योंकि इनकी शिक्षा का स्तर आजादी के बाद गिरता ही गया..

यही हाल आर्थिक रूप में भी है.... 

आप खुद सोचिए जब उत्तर भारत समृद्ध था तो पूरे विश्व का नेतृत्व करता था..मगर आज..हम कंहा है..??

मगर अब समय का पहिया घूम रहा है..ज्यों-ज्यों उत्तर भारत भी समृद्ध होता जाएगा भारत फिर से पूरे विश्व को दशा एयर दिशा तय करेगा..।।


शुक्रवार, 27 दिसंबर 2024

आर्थिक सुधार के नायक...मनमोहन सिंह

हजारों जबाबों से अच्छी है मेरी खामोशी..
न जाने कितने सवालों की आबरू रखी...।



ये उक्तियां भारत के 13वे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जी की है..
इनके बारे में अक्सरहाँ कंहा जाते था कि ये हमेशा मौन रहते थे..
इसके पीछे कारण था,ये कोई राजनीतिज्ञ नही बल्कि ब्यूरोक्रेट्स थे..जो हमेशा अनुशाषित और सधे शब्दों का इस्तेमाल करते थे...।

इनका जन्म पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में हुआ..
बचपन मे ही माँ के मृत्यु के बाद इनका लालन-पालन इनके दादा-दादी ने किया..।
इनका जीवन कोई ऐशो-आराम वाला नही था इन्होंने लालटेन में अपनी पढ़ाई शुरू की थी और कैम्ब्रिज तक गए..
और उसके बाद पंजाब विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बने..
1971 में वाणिज्य मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार बने..
1972 में वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार बने..
1982-85- RBI के गवर्नर रहे
1985-1987 तक योजना आयोग के प्रमुख

1991 में P. V नरसिम्हा राव ने वित्त मंत्री बनाया..
और उन्होंने आर्थिक बदलाव की नींव रखी और भारत का बाजार पूरे विश्व के लिए खोल दिया..
(ये काम चीन ने 1978 में ही कर चुका था...)
इसके कारण इन्हें विपक्षि पार्टियों सहित खुद के पार्टियों से भी आलोचना सुननी पड़ी..
मोन्टेन सिंह आहुलियावल अपनी पुस्तक में जिक्र करते है कि,नरसिम्हा राव ने सिंह से कहा अगर ये प्लानिंग सफल रही तो इसका श्रेय हमदोनो लेंगे..अगर असफल हुआ तो इसका श्रेय आपको लेना होगा..
यंहा तक कि जब इनकी आलोचना संसद में बहुत होने लगी तब इन्होंने इस्तीफा देने का मन बना लिया..
तब इन्हें अटल बिहारी वाजपेयी ने समझाया कि आप अब ब्यूरोक्रेट्स नही, बल्कि अब आप राजनीतिज्ञ है..इसीलिए अब आप,अपनी चमड़ी मोटी कर लीजिए..
विपक्ष का काम ही है आलोचना करना..।

इनकी आत्मा अब भी बैचैन होगी..
जब इन्होंने 2014 में प्रधानमंत्री का पदभार संभाला तो इन्होंने पहले कार्यकाल में तो बहुत कुछ किया मगर दूसरे कार्यकाल में नही कर पाए..
ये भारत को जिस आर्थिक रास्ते पे ले जाना चाहते थे वंहा तक ले जाने में सफल नही हो पाए..क्योंकि इनके हाथ बंधे हुए थे..।मगर अपने प्रधानमंत्री कार्यकाल में इन्होंने कुछ अभूतपूर्व कार्य किये..
मनरेगा
•राइट टू इनफार्मेशन
•आधार
•इंडो-अमेरिका परमाणु ट्रीटी
•फ़ूड सेक्युरिटी बिल..

मगर इनकी आत्मा अब भी बैचैन होगी क्योंकि ये भारत को जिस आर्थिक सुधार पे ले जाना चाहते थे वंहा ले जाने में नाकाम रहे..।।

अमेरिकन राष्ट्रपति बराक ओबामा ने 2010 के टोरंटो G-20 सम्मेलन में कंहा था- जब मनमोहन सिंह बोलते है,खासकर आर्थिक मुद्दे पर तो सारी दुनिया सुनती है।इन्होंने सिर्फ न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को बेहतरीन लीडरशिप दी है..।
ओबामा ने अपनी पुस्तक" अ प्रॉमिस्ड लैंड" में मनमोहन सिंह को असाधारण व्यक्ति कहा है..

जापान के पूर्व P. M सिंजे आबे के सहयोगी तोमोहिको तानिगुची 2014 में जब भारत आये तो उन्होंने कहामनमोहन सिंह को सिंजे आबे अपना गुरु मानते है..।

जब 2013 में यूरो क्राइसिस हुआ तो जर्मन चांसलर एंजेला मर्केल ने इनसे सलाह ली थी..।।

•इन्होंने 2016 में demonetization के बारे में भी कहा था,जब विपक्ष बोल रही थी कि 2025 तक हमारा GDP 10% से बढ़ेगी तो इन्होंने कहा था इससे हमारे GDP पे 2% तक स्लो डाउन रहने का डर है..जो बाद में हुआ भी..।

इन्होंने एकबार कहा था...
" मुझे उम्मीद है कि इतिहास मेरा मूल्यांकन करते समय ज्यादा उदार होगा.."

आर्थिक सुधार का नायक अब हमारे बीच में नही है..
मगर उनके द्वारा बनाया गया मार्ग आज भी है..जिसपे चलकर भारत आज पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गई है और भविष्य में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की और अग्रसर है..।।