बुधवार, 8 जनवरी 2025

महिलाएं सबसे ज्यादा असुरक्षित कंहा है..

एक बात पूछता हूँ...
महिलाएं या लड़कियां सबसे ज्यादा सुरक्षित कंहा है..??


शायद आप जो जबाब सोच रहे है... वो गलत हो....


हाल ही में UN(यूनाइटेड नेशंस) द्वारा जारी घरेलू हिंसा रिपोर्ट में बताया गया है कि-
" महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित स्थान घर है ।"
जबकि सुरक्षित स्थान घर के बाहर सार्वजनिक स्थान और कार्यस्थल है..।

2023 में 85 हज़ार महिलाओं एवं बालिकाओं की हत्या जानबूझकर किया गया, (ये आंकड़े ज्यादा भी हो सकते है)
इसमें 60% हत्याएं किसी साथी या परिवार के द्वारा किया गया..प्रतिदिन 140 महिलाओं एवं बालिकाओं की हत्या उनके अंतरंग साथी या परिवार के सदस्य द्वारा कर दी जाती है..।।
(यानी जबतक आप इसे पढ़ के खत्म करेंगे तबतक किसी पारिवारिक सदस्य के द्वारा ही किसी महिला की हत्या कर दिया गया होगा)

आपको जानकर हैरानी होगी कि,इस तरह की हत्या सर्वाधिक अफ्रीका में किया जा रहा है..
वंही घरेलू हिंसा सर्वाधिक अमेरिका में किया जा रहा है,UN के अनुसार 1 लाख महिलाओं पर 1.6 महिलाओं पे किया जाता है..।।
•वंही यूरोप(1लाख/0.6) और एशिया(1लाख/0.8) में ये दर कम है..।

हो सकता है वास्तविकता इससे और भयावह हो..क्योंकि कुछ मामलों को दबा दिया जाता है..

•वंही UN रिपोर्ट के अनुसार पुरषों की अधिकांश हत्या घर के बाहर होता है,80% वंही महिला की 20% होती है..।।

महिलाओं के लिए घर सुरक्षित नही है, वंही पुरुष घर के बाहर सुरक्षित नही है..।।

जरा सोचियेगा..
आखिर क्यों महिलाओं के लिए घर सुरक्षित नही है...
क्या आप उनमें से तो नहीं,जिसके कारण कोई महिला या बालिकाएं या फिर गर्भ में पल रही बची असुरक्षित महसूस कर रही है..।।

आखिर क्यों कोई ऐसा करता है...??
"की महिला घर में ही असुरक्षित महसूस करती है"....

मंगलवार, 7 जनवरी 2025

हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचें..

इस अथाह समुन्द्र की कोई थाह नही है..(अब है)
इस खुले आसमां का कोई किनारा नही है..
इसी तरह मनुष्य की जिजीविषा का कोई अंत नही है..।
मनुष्य आज कंहा नही है..
अगर जंहा नही है..
वंहा का इसे पता नही है..
अन्यथा ये हर जगह है,
जंहा नही है,
वंहा जाने का प्रयत्न कर रहा है..।।



हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचें..
हमने अपने स्वार्थ के लिए,
अपनों का भी बलिदान दिया..
हम यू ही आज सभ्य नही कहलाते..
हमने कई सभ्यताओं का नाश कर,
आज सभ्य हुए है..
हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचे है..।

जितनी परतें खोलते जाऊंगा..
हमारी असभ्यता का परत-दर-परत खुलता जाएगा..
हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचें है..
हमारे कारण आज प्रकृति के कई जीव-जंतु और पेड़-पौधे
विलुप्त हो गए..
कितने आज विलुप्ति के कगार पे है..
आज हम मनुष्यों के कारण ऐसा कोई जगह नही जो सुरक्षित है..
हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचें है..
विकास के नाम पर हम खुद को नाश करने के कगार पे ले जा रहे है..।।
शायद ही पृथ्वी का कोई कोना हो,जो आज शांत हो..
हम मनुष्यों ने अपनी आहटों से सबकी शांति भंग कर दी है..।


हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचें..
हमने अपने स्वार्थ के लिए,
अपनों का भी बलिदान दिया..
हम यू ही आज सभ्य नही कहलाते..
हमने कई सभ्यताओं का नाश कर,
आज सभ्य हुए है..
हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचे है..।।

सोमवार, 6 जनवरी 2025

एलिफेंटा की यात्रा

"यात्रा हमेशा आपके जीवन में बदलाव लाता है..
अगर यात्रा आपके जीवन में बदलाव नही लाता तो वो यात्रा व्यर्थ है..।।"

मैं सोचता हूँ, आज हम कितना विकसित हो गए है..
मगर जब एलिफेंटा जैसी गुफाओं में खुदी आकृति,कलाकृति को देखता हूँ ,तो आश्चर्यचकित होता हूँ..
आज हमारे अंदर धैर्य की बिल्कुल ही कमी है..
मगर इन कलाकृतियों,आकृतियों को तराशने में कितना धैर्य रखना पड़ा होगा ये हम सोच के ही घबराते है..।।

वो क्या कलाकार रहें होगा..
वो कैसा हथौड़ी-छैनी रहा होगा..
जिसने पहाड़ में छुपी शिव की प्रतिमा को सबके सामने ला दिया..
जो आज भी जीवंत दिखलाय दे रहा है..
जिसे देखकर आप भाव-विभोर हो जाओगे..
आप उस तेजोमयी आभा से सरोबोर हो जाओगो..।





https://en.m.wikipedia.org/wiki/Elephanta_Caves


मंगलवार, 31 दिसंबर 2024

नव वर्ष मंगलमय हो..😊

कल भी आज की तरह ही सूरज उगेगा..
चिड़िया आज की तरह ही चहचहाएँगी,
नदिया आज की तरह ही बहेंगी..
प्रकृति में कुछ बदलाव नही होगा..
बदलेगा तो सिर्फ हमारा कैलेंडर और हमारा उत्साह..।।

मगर हम इस उत्साह को कब तक बरकरार रख सकते है..??

मगर क्या हम खुद को कैलेंडर की तरह बदल पाएंगे..??

थोड़ी देर रुकिए..और सोचिए..
2024 शुरू होने से पहले आपने खुद के अंदर परिवर्तन लाने के बारे में क्या सोचा था..और उसपे आपने कितना अमल किया..और आज आप कंहा है..।।

छोड़िए ये सब..
2025 का प्लान बनाइये..
इस वर्ष आप क्या पाना चाहते है,और क्या छोड़ना चाहते है..
इसे लिखिए और प्लानिंग बनाइये..
क्योंकि बिना रोडमैप के आप कंही नही पहुंच पाएंगे..
आप चलना शुरू तो करेंगे..
मगर ज्यादा दूर तक नही चल पायेंगे.. अगर चलेंगे भी तो भटक जाएंगे..
इसलिये थोड़ा रुकिए और 2025 में क्या पाना चाहते है और क्या छोड़ना चाहते है,उसके बारे में रोडमैप तैयार कीजिये..।।

और इस नव वर्ष को नए जीवन के रूप में परिवर्तित कीजिये..
नव वर्ष मंगलमय हो



मैंने मुस्कुराना सीख लिया है..😊

मैंने मुस्कुराना सीख लिया है..
जब भी खुद को आयने में देखता हूँ तो मुस्कुराता हूं,
जब भी पंछियो को पंख फैला कर उड़ते देखता हूँ तो मुस्कुराता हूँ..
जब भी सूर्य की लालिमा को देखता हूँ तो मुस्कुराता हूँ..
जब भी प्रकृति की लीला देखता हूँ तो मुस्कुराता हूँ
मैंने मुस्कुराना सीख लिया है..।।



अब मैं दुःखी नही होता..
क्योंकि दुःख तो जीवन का हिस्सा है..
इसे आने से कोई नही रोक सकता..
मगर ये मेरे ऊपर कितने समय तक हावी रहे,
इसका निर्णय मेरे हाथ मैं है..
इसीलिए मैं अब इसे ज्यादा देर तक अपने ऊपर हावी नही होने देता..
मैंने मुस्कुराना सीख लिया है..।।

हमारी  मुस्कान सबसे बड़ा गहना है,
जो प्रकृति से उपहार मैं मिला है..
हम जब भी मुस्कुराते है..
प्रकृति भी मुस्कुराती है..।।

सोमवार, 30 दिसंबर 2024

अपनी समस्या से खुद निपटे..

अपनी समस्या से हमें खुद को ही जूझना पड़ता है..



यंहा कोई और नही है जिसे आपकी समस्या की परवाह पड़ी हुई है...क्योंकि आपकी समस्या के बारे में आपके सिवा किसी को नही पता है..
इसीलिए कोई चाह करके भी आपकी मदद नही कर सकता..

हां सिर्फ माँ-बाप ही आपका साथ लंबे समय तक दे सकते है,बिना आपके समस्या को जाने हुए भी..
इसीलिए जितना जल्दी हो सके अपने समस्या से निपटने की कोशिश करें....


भारत विश्वगुरु कब बनेगा..??

अगर आपको इतिहास में रुचि है,या फिर आप इतिहास को जानते है तो आपको भली-भांति पता होगा कि भारत प्राचीन और मध्यकाल में,पूरे विश्व मे अपना प्रमुख स्थान क्यों रखता था..??



भले ही आज हम आर्थिक प्रगति कर रहें है..और आर्थिक रूप से हम GDP के मामले में टॉप 5 देशों में आते है,मगर उसका दूसरा पहलू ये है कि पर कैपिटा GDP इनकम के मामले में हम टॉप हंड्रेड देशों के सूची(141) में भी नही आते..।

आखिर क्यों..??

प्राचीन काल मे भारत की जनसंख्या विश्व की जनसंख्या का लगभग 33% था, वंही GDP विश्व के GDP का 33-35% था

और मध्यकाल में भारत की जनसंख्या विश्व की जनसंख्या का ~28% था, वंही GDP विश्व के GDP का 30-33%...

आखिर फिर क्या हुआ कि भारत पिछड़ गया....??

ये सबको पता है कि 1700 ईस्वी के बाद भारत ब्रिटेन के चंगुल में फंसता गया और भारत को निचोड़ता गया..भारत को  निचोड़ कर ही यूरोप में औद्योगिक क्रांति की शुरुआत हुई,और यूरोप इस क्रांति से इतना संपन्न हुआ कि पूरे विश्व पे अपना छाप छोड़ा जो अभी भी दिख रहा है..।

मगर 1947 में हमें आजादी मिल गई भले ही हमें उस तरह से नही मिली,मगर मिल गई..फिर आखिर क्या हुआ की हम खड़ा होना तो शुरू किए मगर अभी तक उस अवस्था मे खड़े नही हो पाए ...??

क्योंकि हमने नींव ही गलत जगह गाड़ी...या फिर हमने नींव गाड़ी ही नहीं..??हमने अंग्रेजो द्वारा बनाये गए महलों में बैठ कर ही रणनीतियां बनाना शुरू किया.. जिसका भुगतान आज तक हमें करना पड़ रहा है..।।

भारत तबतक समृद्ध रहा जबतक बिहार,पूर्वी उत्तर प्रदेश और बंगाल समृद्ध रहा...सिर्फ आर्थिक ही बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप  में भी समृद्ध था..जब तक ये क्षेत्र फिर से समृद्ध नही होंगे तबतक भारत कभी भी समृद्ध नही होगा,न ही कभी भारत की फिर से विश्वगुरू बनने की महत्वाकांक्षा पूर्ण होगी..इसलिए इस क्षेत्र का समृद्ध होना बहुत जरूरी है..

आखिर ये क्षेत्र पिछड़े क्यों..??

क्योंकि इन्हें आजादी की कीमत अभी भी चुकानी पड़ रही है,पहले अंग्रेजों ने फिर अंग्रेजी मानसिकता के लोगों ने..

शुरुआत में अंग्रेज का विरोध इस क्षेत्र से प्रबल हुआ, तो अंग्रेजों ने पहली अपनी राजधानी बदली और फिर धीरे-धीरे अपना पूरा व्यापार समेटकर दक्षिण की और पूर्वी और पछिमी तट पे ले के चले गए आज ये क्षेत्र समृद्ध है..

आजादी के बाद भी ये क्षेत्र समृद्ध नही हुए..क्योंकि इन्होंने आजादी के जो स्वप्न देखे थे वो आजादी के बाद दुःस्वप्न में बदल गए..आजादी सिर्फ समृद्ध लोगों को ही मिले.. आर्थिक और सामाजिक रूप से जो पिछड़े थे वो आज भी बड़ी संख्या में पिछड़े ही है..

इनके हक के मांग के कारण बार-बार हड़ताल के कारण बची खुची कंपनी भी यंहा से पलायन हो गए..

वर्तमान में ये क्षेत्र आज भी शैक्षणिक,और आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है..

महाराष्ट्र, तमिलनाडु,कर्नाटक,केरल,आंध्रप्रदेश के 10वी पास बच्चों को नॉकरी ढूंढने में उतनी तकलीफ नही होती, जितनी तकलीफ बिहार,ओडिशा,U.P, झारखंड और बंगाल के स्नातक पास छात्रों को होती है,क्योंकि इनकी शिक्षा का स्तर आजादी के बाद गिरता ही गया..

यही हाल आर्थिक रूप में भी है.... 

आप खुद सोचिए जब उत्तर भारत समृद्ध था तो पूरे विश्व का नेतृत्व करता था..मगर आज..हम कंहा है..??

मगर अब समय का पहिया घूम रहा है..ज्यों-ज्यों उत्तर भारत भी समृद्ध होता जाएगा भारत फिर से पूरे विश्व को दशा एयर दिशा तय करेगा..।।