सोमवार, 3 मार्च 2025

संघर्ष..

संघर्ष से भला कबतक भागोगे..
और कंहा तक भागोगे..।
तुम संघर्ष से जितना भागोगे..
संघर्ष दिन-प्रतिदिन और बड़ा होता जाएगा..
और अगर तुम ऐसे ही भागते रहें..
तो एकदिन संघर्ष के बोझ तले ही दब जाओगे..।।

भला कौन था, या भला कौन है यंहा..??
जिसे संघर्ष का सामना न करना पड़ा हो..
फर्क बस इतना है की..
कुछ लोगों का संघर्ष कोई और ने किया है..
और हमें अपने हिस्से का संघर्ष खुद ही करना पड़ रहा है..
मगर संघर्ष तो सबको करना है,
अगर आप नही,
तो आपके आने वाली पीढ़ी को, आपके हिस्से का संघर्ष करना पड़ेगा..।
मगर संघर्ष तो करना ही होगा..।।



बिना संघर्ष के, किसका उत्थान हुआ है,
बिना संघर्ष के,किसको पहचान मिला है..
बिना संघर्ष के,किसका गुणगान हुआ है..
बिना संघर्ष के,कंहा स्वयं का आत्मसाक्षत्कार हुआ है..
संघर्ष तो करना ही होगा..
स्वयं के निर्माण के लिए,
स्वयं के पहचान के लिए..
स्वयं के अभिमान के लिए..
बिना संघर्ष के, कंहा कोई बच पाया है..?
संघर्ष से भला कबतक भागोगे..
और कंहा तक भागोगे..??
संघर्ष तो करना ही होगा..।।


पथिक..

पथिक हो तुम पथ नही..
जो पथ है,उसे कोई पथिक ने ही बनाया..
क्या ताउम्र पथिक ही बने रहोगे..
या कोई पथ भी बनाओगे..??

कई पथिक आये,कई पथिक आएंगे..
कुछ ने पथ बनाया,
तो कुछ ने पथ के किनारे आशियाना बनाया..
कइयों ने तो ताउम्र यू ही बिताया..
तुम क्या करोगे..??
ताउम्र पथिक ही बने रहोगे..
या फिर पथ के किनारे आशियाने बनाओगे..
या फिर पथ बनाओगे..??



रविवार, 2 मार्च 2025

सोशल मीडिया...

कभी सोचा है🤔..
आप क्या कर रहे है..??
अगर सोचा है..
तो फिर क्यों कर रहे है..??
क्या..??
घंटों इंस्टा,fb, यूट्यूब पर रील को स्क्रोल..और क्या..
जरा सोचिए...??
आप इस साइट/एप पे क्यों गए थे...??
और क्या कर रहें है..।।


हम 10 में से 9 बार भूल जाते है कि आखिर हमने fb,insta पर लॉगिन क्यों किया था..।।
आखिर क्यों..??
क्योंकि सोशल मीडिया का इस्तेमाल हम नही,बल्कि सोशल मीडिया हमारा इस्तेमाल कर रहा है..
और कुछ चलाक/बुद्धिमान लोग है जो अपने हित के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहें है..।।

आज सोशल मीडिया इतना दम-खम रखता है कि आपको उन  ऊंचाइयों पे ले जा सकता है,जंहा तक करोडों लोग कठिन प्रयत्न करने के बाबजूद नही पहुंच पाते है..।।
वही सोशल मीडिया दूसरा स्वरूप ये है कि लाखों लोगों को अपनी मथनी में अपने अनुरूप मथ रहा है..और हमें मजा भी आ रहा है..।
और एक समय ऐसा आएगा जब सोशल मीडिया हमें मथ कर पूरा क्रीम निकाल लेगा और हम न इस्तेमाल होने वाले पानी रह जाएंगे..।।


सतर्क हो जाये..
सोशल मीडिया का आप इस्तेमाल करें, 
ना कि सोशल मीडिया आपका इस्तेमाल करें..
आज के समय में ये असंभव है,मगर कोशिश करें की..
वो हमारा इस्तेमाल कम-से-कम कर पाए..
और आप सोशल मीडिया का भरपूर इस्तेमाल अपने फायदे के लिए करें..।।
हज़ारों लोग कर रहें है,तो आप क्यों नही..।

आज सोशल मीडिया को नकारा नही जा सकता..
अगर आप को इस दुनिया मे रहना है तो सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना ही होगा..
अन्यथा आप भीड़ में बहुत पीछे रह जाएंगे..।

सोशल मीडिया आज उस भीड़ का हथियार बन गया है,
जिसे कभी कुचल दिया जाता था..
सोशल मीडिया आज अराजक फैलाने वालों का,
नरसंहार करने का औजार बन गया है..
सोशल मीडिया आज उनका आवाज बन गया है,
जिसकी आवाज को वर्षों से दबा दिया गया था..
सोशल मीडिया आज जनकल्याण का स्थान बन गया है..
मगर सावधान हो जाइये...
सोशल मीडिया आज वो ब्रह्मास्त्र है जो,अगर अच्छे हाथों में गया तो विश्व का कल्याण होगा,
और बुरे हाथों में गया तो विश्व का सर्वनाश होगा..।।


क्या सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना बुरा है..??
  बिल्कुल नही..।
तो इसका इस्तेमाल कैसे करें..??
   इसका इस्तेमाल सतर्क और स्वार्थपरक रूप में करें..।।





हताश मत हो..

मायने ये नही रखता की आप कितनी दफा हारे,
मायने ये रखता है कि आप हारने के बाद जीते की नही..?


इसलिये चाहे कितनी भी हार क्यों न झेलनी पड़े,आपको हर बार, हार कर खड़ा होना ही होगा..
ये सिलसिला तबतक चलनी चाहिए जबतक आप जीत न जाओ..।।
अपनी जीत का जश्न नही, बल्कि अपने जीत के कारण का जश्न मनाए..।।
बार-बार हारने के बाद जीतने का जो सुकून मिलता है..
वो जीत के बाद ही पता चलता है..।।

आप जब बार-बार हारेंगे..
सब आपसे मुँह फेर लेंगे..
आखरी उम्मीद जो बची होगी,वो भी एक वक्त काम नही आएगी..।
वो ही सही वक्त होता है,शांतचित होकर विजय प्राप्ति का..।।
इसीलिये...
हताश मत हो,
निराश मत हो..
अपने हार को तुम,
जीत के हार में परिवर्तित कर
अपने जीत का यशोगान कर तुम..।
हताश मत हो,निराश मत हो..
भला कौन है यंहा..
जो हारा नही,
बदकिस्मत तो वो है,
जो हार कर फिर खड़ा न हुआ..।
दुनिया ही नही,
वो खुद के नजर में गिर जाता है,
जो हार कर फिर खड़ा न हुआ..।।
दुनिया उसी का यशोगान करती है,
जो हार के नींव पे सफलता का प्राचीर खड़ा करता है..।
इसीलिय हताश मत हो,
निराश मत हो..।
धैर्य रख, 
हौंसला रख,
दृढ़संकल्प लेकर फिर से एक बार प्रयास कर..
प्रयास ही तो इंसान को प्रियतमा से मिलाता है,
और प्रियतमा ही तो इंसान को नई पहचान दिलाता है..।
कबतक यू ही, पुराने पहचान को ढोते रहोगे..
कबतक यू ही, स्वयं और दूसरे को कोसते रहोगे..
कबतक यू ही, स्वयं को सफलता से दूर रखें रहोगे..
सफलता हाथ फैला कर इंतजार कर रही है..
एकबार और जोर लगा..
और लंबी छलांग लगा..
अपने सभी कमियों को लांघकर..
सफलता को गले लगा..।।

हताश मत हो..
निराश मत हो..
अपने हार को तुम,
जीत के हार में परिवर्तित कर
अपने जीत का यशोगान कर तुम..।
हताश मत हो..
निराश मत हो..।।

शनिवार, 1 मार्च 2025

संघर्ष तो करना ही होगा..

संघर्ष तो करना ही होगा..
आज नही तो कल..
संघर्ष तो करना ही होगा..।


भला कौन है यंहा..??
जिसे बिना संघर्ष के कुछ भी मिला है..
संघर्ष तो करना ही होगा..
आज नही तो कल संघर्ष तो करना ही होगा..।
कबतक भला भागोगे संघर्ष से..?
भलाई इसी में है,
जितना जल्दी हो सके संघर्ष को सहर्ष स्वीकार कर लो..।।
संघर्ष को स्वीकारते ही,
जिंदगी में निखार आने लगेगी..।
भला कौन है यंहा...
जो संघर्ष से बच पाया है..।।
संघर्ष ही तो जिंदगी के मुकाम का रास्ता है..
भला कौन है यंहा..
जो बिना चले, इस रास्ते पे मुकाम को पाया है..।।

संघर्ष तो करना ही होगा..
आज नही तो कल..
संघर्ष तो करना ही होगा..।।

संघर्ष की शुरुआत तो गर्भ में आने से पहले ही शुरुआत हो जाती है..
आप वो नही जो आप सोच रहे है,
आप तो वो है,
जो आप नही सोच रहे है..।।
उन करोडों शुक्राणुओं को पीछे छोड़ कर आपने गर्भ धारण किया है..।
9 महीनों तक माँ के गर्भ में रहकर आपने ये स्वरूप पाया है..
और माँ के गर्भ से बाहर आते ही इस दुनिया के साथ तादात्म्य बिठाया है..
कितने चीखने और चिल्लाने के बाद आपने बोलने की कला पाया है..
न जाने कितनी दफा गिरने के बाद आपने चलना सीखा है..
आप वो नही,जो आप सोच रहे है..
आप वो है,जो आप नही सोच रहे है..।।
खुद को देखिए..
आप किस संघर्ष से भाग रहे है..
जो आपकी नियति है,
आप उसी से भाग रहे है..।

संघर्ष तो करना ही होगा..
आज नही तो कल..
संघर्ष तो करना ही होगा..।


बुधवार, 26 फ़रवरी 2025

शिव कौन है..??

शिव कौन है...??
जरा सोचिए🤔...आपके अनुसार शिव कौन है..??



मेरे अनुसार..सवाल ही गलत है..।।
शिव कौन नही है..??
जो कुछ भी है सब शिवत्व ही है..।।
हम ही मूढ़ अज्ञानी है..जो शिव से खुद को अलग कर बैठे है..।
जब कि हम सब,इस सृष्टि में विद्यमान हरेक चीज शिवत्व है..।

शंकराचार्य जब अपने गुरु के पास पहली बार गए..
तो गुरु ने उनसे पूछा कि तुम कौन हो..??
तो उन्होंने अपना परिचय इस रूप में दिया :-

मनोबुद्धयहंकारचित्तानि नाहम्   श्रोत्र जिह्वे   घ्राण नेत्रे ।
  व्योम भूमिर्न तेजॊ  वायु: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् 1

मैं न तो मन हूं, न बुद्धि, न अहंकार, न ही चित्त हूं
मैं न तो कान हूं, न जीभ, न नासिका, न ही नेत्र हूं
मैं न तो आकाश हूं, न धरती, न अग्नि, न ही वायु हूं
मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि, अनंत शिव हूं।

  प्राण संज्ञो  वै पञ्चवायु:  वा सप्तधातुर्न वा 

  पञ्चकोश:।  वाक्पाणिपादौ   चोपस्थपायू चिदानन्द रूप:

  शिवोऽहम् शिवोऽहम् 2

मैं न प्राण हूं,  न ही पंच वायु हूं
मैं न सप्त धातु हूं,
और न ही पंच कोश हूं
मैं न वाणी हूं, न हाथ हूं, न पैर, न ही उत्‍सर्जन की इन्द्रियां हूं
मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि, अनंत शिव हूं।

  न मे द्वेष रागौ  मे लोभ मोहौ मदो नैव मे नैव मात्सर्य 

                                    भाव:।

 धर्मो  चार्थो  कामो ना मोक्ष: चिदानन्द रूप: 

शिवोऽहम् शिवोऽहम् 3

न मुझे घृणा है, न लगाव है, न मुझे लोभ है, और न मोह
न मुझे अभिमान है, न ईर्ष्या
मैं धर्म, धन, काम एवं मोक्ष से परे हूं
मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि, अनंत शिव हूं।

 पुण्यं  पापं  सौख्यं  दु:खम्  मन्त्रो  तीर्थं  वेदार्  यज्ञा:
अहं भोजनं नैव भोज्यं  भोक्ता चिदानन्द रूप:शिवोऽहम् शिवोऽहम् 4

मैं पुण्य, पाप, सुख और दुख से विलग हूं
मैं न मंत्र हूं, न तीर्थ, न ज्ञान, न ही यज्ञ
न मैं भोजन(भोगने की वस्‍तु) हूं, न ही भोग का अनुभव,     और न ही भोक्ता हूं।
मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि, अनंत शिव हूं।

न मे मृत्यु शंका  मे जातिभेद:पिता नैव मे नैव माता    जन्म:
 बन्धुर्न मित्रं गुरुर्नैव शिष्य: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवोऽहम् 5

न मुझे मृत्यु का डर है, न जाति का भेदभाव
मेरा न कोई पिता है, न माता, न ही मैं कभी जन्मा था
मेरा न कोई भाई है, न मित्र, न गुरू, न शिष्य,
मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि, अनंत शिव हूं।

अहं निर्विकल्पॊ निराकार रूपॊ विभुत्वाच्च सर्वत्र   सर्वेन्द्रियाणाम्।
 चासंगतं नैव मुक्तिर्न मेय: चिदानन्द रूपशिवोऽहम्   शिवोऽहम् 6

मैं निर्विकल्प हूं, निराकार हूं,

मैं चैतन्‍य के रूप में सब जगह व्‍याप्‍त हूंसभी इन्द्रियों में हूं,

न मुझे किसी चीज में आसक्ति है, न ही मैं उससे मुक्त हूं,

मैं तो शुद्ध चेतना हूं, अनादि‍, अनंत शिव हूं।

शंकराचार्य ने अपना परिचय इस रूप में दिया.. जिसे आज हम "निर्वाणषटकं" के रूप में जानते है..।।

और हम शिव को कंहा ढूंढ रहे है..और कैसे ढूंढ रहे है..??क्या ऐसे शिव मिलेंगे...।।

फिर मन मे दुविधा उपजती होगी की जिस तस्वीर को हम पूजते है क्या वे व्यर्थ है...??

नही,उसके समाधान के लिए शंकराचार्य ने "शिव पंचाक्षरस्तोत्र" की रचना की जिसमे उन्होंने शिव के सगुण शरीर का वर्णन किया है:-

नागेन्द्रहाराय त्रिलोचनाय

भस्माङ्गरागाय महेश्वराय ।

नित्याय शुद्धाय दिगम्बराय

तस्मै नकाराय नमः शिवाय


मन्दाकिनीसलिलचन्दनचर्चिताय

नन्दीश्वरप्रमथनाथमहेश्वराय ।

मन्दारपुष्पबहुपुष्पसुपूजिताय

तस्मै मकाराय नमः शिवाय

शिवाय गौरीवदनाब्जबृंदा

सूर्याय दक्षाध्वरनाशकाय ।

श्रीनीलकण्ठाय वृषध्वजाय

तस्मै शिकाराय नमः शिवाय


वशिष्ठकुम्भोद्भवगौतमार्यमूनीन्द्र देवार्चिता शेखराय ।

चन्द्रार्कवैश्वानरलोचनाय

तस्मै वकाराय नमः शिवाय

यज्ञस्वरूपाय जटाधराय

पिनाकहस्ताय सनातनाय ।

दिव्याय देवाय दिगम्बराय

तस्मै यकाराय नमः शिवाय

पञ्चाक्षरमिदं पुण्यं यः पठेच्छिवसंनिधौ ।

शिवलोकमावाप्नोति शिवेन सह मोदते।।







शनिवार, 22 फ़रवरी 2025

चले जा रहा हूँ..

हैं कई राहगीर यंहा..
मगर इनमें से कइयों को अपने मंजिल का पता ही नही..
बस चले जा रहें है..बस चले जा रहें है..।
उन राहगीर में से, मैं भी एक हूँ..
जिसे अपने मंजिल का पता ही नही है..
बस चले जा रहा हूँ,
बस चले जा रहा हूँ..
जाना कंहा है पता ही नही है..
बस चले जा रहा हूँ..।
क्या करूँ की मंजिल का पता चल जाये..
क्या ना करू की मंजिल का पता चल जाये..।
और चल पडू मंजिल की और..
अभी जिस और चल रहा हूँ..
मुझे पता है इस राह से में,मैं अपनी मंजिल तक नही पहुंचूंगा..।
मैं ये तो जानता हूँ कि ये मेरी मंजिल नही है..
मगर मैं ये नही जानता कि मेरी मंजिल क्या है..।।
बस चले जा रहा हूँ..
बस चले जा रहा हूँ..।।

Yoga for digestive system