सोमवार, 15 सितंबर 2025

हम यू ही परेशान होते है..

हममें से अक्सरहाँ लोग उन चीजों के लिए परेशान है,जो चीज हमारे हाथ मे नही है..।।
मगर हम इन परेशानियों पे कभी गौर ही नही करते..और बेवजह परेशान रहते है..।।
आपने अक्सरहाँ या फिर खुद को बेवजह परेशान होते हुए देखा होगा..
जैसे ट्रम्प का टैरिफ लगाना..इजरायल और ईरान में युद्ध होना,पंजाब में बाढ़ आना,उत्तराखंड में भू-स्खलन होना..
इत्यादि..इन घटनाओं का सीधे हमारे ऊपर कोई प्रभाव नही पड़ता..और इसके लिए हम सिर्फ चर्चा और सांत्वना के सिवा और कुछ नही कर सकते..।

चलिए और करीब से कुछ घटनाओं को देखते है,जो हमे परेशान करता है..
आप कभी सफर पर निकलते है तो हो सकता है,बस या ट्रैन लेट हो..जब आप को इंतजार करना पड़ता है तो आप पे क्या बीतता है..
आपने कभी गौर किया है..??
आप क्यों परेशान है..जबकि आपके और हमारे परेशान होने से कुछ नही होने वाला है..मगर इन घटनाओं के कारण हम इतना नकारात्मक हो जाते है कि ये हमे सूक्ष्म स्तर पर नुकसान पहुचाता है..।

चलिए दूसरे घटना पर गौर करते है..
एक बच्चा बुरी तरह से रो रहा है..
आप क्या करेंगे..??

आप  नोट बनाये..और देखे की आप किन-किन चीजों से परेशान होते है..और फिर सोचिये,क्या इन कारणों से परेशान होना जरूरी था..।।
जबकि आपके हाथ मे कुछ भी नही था..।।

हम यू ही परेशान होते है..
जबकि परेशान होने का कोई कारण नही है..।।

मंगलवार, 9 सितंबर 2025

नेपाल,सोशल मीडिया और जेन-Z

नेपाल में जो हुआ आप उसे किस नजर से देखते है..??
आपका क्या राय है..??


मैं तो यही सोचता हूँ..जो नेपाल में हुआ वो कंही भी हो सकता है..।।
क्योंकि जो गुलाम है,उससे चलाक मालिक कुछ भी करा सकता है..।।
भले ही हम इसे जेन-Z आंदोलन कहें..



मगर वास्तव में ये हज़ारों किलोमीटर दूर एक हॉल में बैठे कुछ क्रूर और उन्मादी लोगों का हरकत है,जो अपना मनमानी चला रहे है..।।

इसकी शुरुआत कंहा से हुई..??
इसकी शुरुआत नेपाल सरकार के एक फैसले से हुई,जिसमें उन्होंने हरेक सोशल मीडिया के मालिकों से कहा था कि हरेक कंपनी को नेपाल में रेजिस्ट्रेशन,डेटा सेंटर,और कर्मचारी को नियुक्त करने को कहा गया..
मगर इन कंपनी ने कुछ रिप्लाई तक नही किया..जबकि ज्यों-ज्यों समय सीमा नजदीक आ रहा था त्यों-त्यों ये कंपनियां सोशल मीडिया पे राजनेताओं एवं उनसे जुड़े हरेक रिस्तेदारों की रहीश लाइफ स्टाइल की फ़ोटो शेयर इस तरह करने लगे जैसे..कोई युद्ध मे बम के गोले फेकते है..
ये यंही नही रुके..बल्कि ये कंपनियां हरेक प्लेटफार्म पे भ्रस्टाचार से जुड़े मुद्दे की बमबारी करने लगे..

फिर क्या, इन्ही में से किसी एक नेता को चुना जो कल तक पर्यावरण के लिए काम करता(सूदन गुरुंग) था। अचानक इसके पास इतना कुछ कैसे आ गया कि इसने अपनी आवाज जेन-Z तक पहुँचाया..।।



हम आप सोच भी नही सकते..
ये सोशल मीडिया क्या करा सकता है..
नेपाल सिर्फ एक ट्रेलर है..
अगर हम और हमारी सरकार अभी भी सतर्क नही हुए तो ये सोशल मीडिया के आका कंही दूर कोने में बैठकर किसी भी देश को गृह युद्ध या फिर किसी भी युद्ध मे झोंक सकते है और देश की बागडोर अपने हाथ मे ले सकता है(बांग्लादेश,श्रीलंका में भी इसकी परछाई दिखी थी,मगर किसी ने गौर नही किया)..।।

आने वाला कल AI का है..
इसका दूसरा पक्ष इतना भयावह है..की लोग बात तक नही करते..
AI के लिए एक उक्ति है- "अहं ब्रह्मस्मि"

नेपाल में जो हुआ,इस बारे में हरेक लोगों को सोचना चाहिए..
इसमें कई कारण है..
मगर..
"दुनिया पे राज गुलामों के द्वारा ही किया जाता रहा है..
बस हरेक युग मे इसका स्वरूप बदलता रहा है..
इस युग मे हमलोग सोशल मीडिया के गुलाम है.."







अपने बुराइयों को कैसे पहचाने..

जिंदगी बहुत अजीब है..
कल तक जो अच्छे थे,आज वो बुरे हो गए..
क्यों..??
क्योंकि वो आदमी पहचानने लगे..।।

क्या सच में कुछ लोग बुरे होते है..??
कुछ नही,सब बुरे होते है..।
बस अनुपात का फर्क है..।

आखिर कैसे अपनी बुराइयों को पहचाने..
●अगर आप किसी एक व्यक्ति की बुराई किसी एक व्यक्ति से करते है तो ठीक है..मगर जब आप कई व्यक्तियों की बुराई कई व्यक्तियों से करने लगते है..तब आप खुद..बुरे है..।।
●जब हम किसी एक गलती को छिपाने का प्रयास करते है तब ठीक है,मगर जब हम अक्सरहाँ गलतियां करके दूसरों को दोषारोपण करते है,तब बात गंभीर है..
●जब हमें हरेक चीज में नकारात्मकता दिखने लगे, तो नजरिया बदलने की जरूरत है..
●जब लड़ने से पहले ही हारने के डर हावी हो,तो खुद को तैयार करने का वक़्त है..।।

ना जाने और कई बुराइयां है,जो हमारे जीवन का हिस्सा बन जाता है और हमें पता तक नही चलता..
ऊपर के 3 बुराइयों पे काम करके आप अपने जिंदगी में सकारात्मक बदलाव ला सकते है..
अगर 3 नही कर सकते है तो सिर्फ तीसरे पर ही काम करें..
क्या जादू होता है..??
अगर आप 3सरे बिंदु पर काम करें तो आप अपने जिंदगी में हो रहे जादू को देखना शुरू कर देंगे...😊


शनिवार, 6 सितंबर 2025

बनारस और यादें..

अभी-अभी अचानक बनारस नाम पर नजर पड़ गया..और तुम याद आ गई..।


यू ही बनारस की गलियों में भटकना याद है मुझे,
यू ही BHU के कैंपस में भटकना याद है मुझे..
यू ही गंगा घाट पे भटकना याद है मुझे..
पता है,क्यों..??
शायद तुम्हारा दीदार हो जाये..।

मगर कंहा..??
ऐसी किस्मत पाई थी मैंने.. 
जो तुम्हारा दीदार होता..।।
तुम्हारा दीदार तो ना हुआ..
मगर तुम्हारे कारण कई यादें अबतक जेहन मैं है..।।









बुधवार, 3 सितंबर 2025

क्या हुआ जो फिर गिर गए..

क्या हुआ,जो फिर गिर गए....

होंसला रख, चल खड़ा हो

और चल अपनी मंज़िल की और..।

वो तुम्ही हो,जो गिर के चलना सीखा है..                          

एक बार नही कई दफा गिर के चलना सीखा है..              

अगर तुम डर जाते,तो क्या तुम फिर चल पाते..??

क्या हुआ जो..फिर गए..।

वो तुम्ही तो थे..

जिसे अंधेरों से कभी डर लगता था..

अब अंधेरा अच्छा लगता है..।

वो तुम्ही तो थे..

जो काम ठान लिया उसे मुकाम तक पहुचाते थे..।

वो तुम्ही तो थे..

जो हार कर फिर से एक बार जीतने को खेलते थे..

मगर फिर हार जाते थे..

मगर फिर भी खेलना नही छोड़ते थे..

क्योंकि तुमने खेला था जी जान से..।।

क्या हुआ,जो फिर गिर गए..??

गिरना तो लाज़मी है, सफर में,

क्योंकि वो सफर..

सफर ही क्या..

जिस सफर में थोड़ा ग़म और खुशियां ना हो..।

क्या हुआ,जो फिर गिर गए..??

उठ खड़ा हो..

इस विराट आसमां को देख..

और अपने हौंसले को देख..

अपने हौंसले को विराट कर, 

अपने असफलता को परास्त कर..।।

क्या हुआ, जो फिर गिर गए..??

गिरना तो नियति है..

अगर गिर कर उठ ना सके तो फिर सोच ले..

क्या होगा..??

उठ खड़ा हो..

और अपने नियति से मिल..

तबतक आगे चलता चल,

जब तक अपने मुकाम को ना पा ले..।।

क्या हुआ,जो फिर गिर गए..??




अवसर कभी खत्म नही होता..

आप कभी हाईवे पे सफर किये है..??
किया ही होगा..
हाईवे और जिंदगी में कई समानता है..
जिंदगी भी तो एक हाईवे की तरह ही है..
ये भी कंही खत्म होती है, या फिर किसी मे मिल जाती है..
(इसपे कभी और बात करेंगे)

हाईवे और गाँव-घर के सड़कों में क्या अंतर है..??
ढेर सारे अंतर आपको नजर आ गया होगा..
मगर सबसे बड़ा अंतर ये है कि आप..हाईवे पे U-टर्न से ही गाड़ी को घुमा सकते है..मगर अन्य सड़को पर आप कंही से भी गाड़ी को घुमा सकते है..।।

माना कि आप.. हाईवे पे सफर कर रहें है और आगे से आपको U-टर्न लेना है..मगर आपका ध्यान कंही और चला जाता है और टर्निंग पीछे छूट जाता है..अब आप क्या करेंगे..??


क्योंकि आप गाड़ी को पीछे कर नही सकते क्योंकि पीछे से आ रही गाड़ी आपको ठोक देगा..क्या करेंगे आप..??
सोच रहे होंगे.. इसमें करना क्या है,आगे वाले टर्निंग से U-टर्न ले लेंगे..।
कितना आसान है..थोड़ा समय लगेगा मगर मंजिल तक तो जरूर पहुंच जाएंगे..।।

यही तो..जिंदगी के साथ होता है..
जिंदगी भी एक हाईवे की तरह है...
हममें से कई लोग असफल होने पर टूट जाते है,उन्हें लगता है जिंदगी खत्म हो गई..।
जो कि गलत है..इन हाईवे के तरह,आगे एक और U-टर्न पॉइंट है..
जो आपको मंजिल तक पहुंचा सकता है..अगर वो भी टर्निंग छूट गया तो क्या हुआ ,आगे फिर एक U-टर्न है..
आप भले ही लक्ष्य से दूर हो रहे है..मगर जब तक आपके अंदर लक्ष्य को पाने की लालसा है तबतक आपके लिए अवसर का द्वार खुला हुआ है..।।
जब आप अपने लक्ष्य को ही भूल जाएंगे...तो अवसर को कैसे पहचानेंगे..।।
इसीलिए चाहे कितनी बार भी असफल क्यों ना हो..
अपने लक्ष्य को ना भूले..
जब तक आपके अंदर लक्ष्य को पाने की लालसा है,तबतक आपको सफल होने से कोई नही रोक सकता..।।

सोमवार, 1 सितंबर 2025

दाग धुलते है..

आपने कभी गंदे कपड़े धोये है..??
अगर हां,तो धोने के बाद आपको क्या बदलाव नजर आता है..??
गंदगी हट जाती है,पहले से ज्यादा साफ नजर आती है..।
है ना..मजेदार बात..।।
आप कहेंगे, इसमें मजेदार क्या है..??


मजेदार बात ये है कि,जब थोड़ी मेहनत करने से कपड़े के दाग धूल सकते है..तो खुद पर मेहनत करने से खुद को क्यों नही संवार सकते है..??
जिंदगी संवारने में जो सबसे बड़ी दुविधा ये है कि हम,अपने  जिंदगी के किस क्षेत्र में काम करें जो संवर जाएं..
क्योंकि कपड़े के दाग दिखते है,तो हम उस जगह को साफ कर देते है..
मगर हममें जो कई दाग है,वो सिर्फ हमें ही दिखते है..इसलिये उसे दूर करने की कोशिस नही करते..
काश वो दाग सिर्फ हमें ही दिख रहे है,वो कई और को दिखता तो हम जरूर उसपे काम करते..क्योंकि कई लोग टोकते,तो कई लोग सलाह देते की ऐसे करने से ये सही हो जाएगा..।।
मगर अफसोस जो दाग सिर्फ हमे ही दिख रहे है वो दिन-प्रतिदिन इतना गहरा होता जाता है कि उसे धुलना नामुमकिन लगता है..कई बार प्रयास करने से भी असफलता हाथ लगती है..और फिर हम उस दाग को और गहरा होने देते है..।।

क्या ये दाग नही हट सकता..??

जरूर एक दृढ़ प्रतिज्ञा और सही दिशा में कार्य करने से ये दाग जरूर हटेंगे..।
सबसे पहले अपने दाग को पहचाने..
ये कब लगते है,और क्यों लगते है..
क्या करें कि ये ना लगे..
इस सब पर अभी कार्य करें.. 
एक नोट बनाये..।
हां अभी..बनाये..
क्या आपने बनाया..
अगर नही,तो प्लीज अभी किसी पेज पे लिखें..
क्या लिखा आपने..
अगर हां..
तो आपके समस्या का समाधान मिल गया होगा..😊।।

हरेक दाग धुलते है..कोई जल्दी,तो कोई देर से..
अगर दाग ना धुले तो..??
निरंतर प्रयास से दाग जरूर धूल जाते है...
पहले जैसा ना सही..
मगर वर्तमान से बेहतर हो जाता है..।

Yoga for digestive system