सोमवार, 29 सितंबर 2025

विश्व हृदय दिवस..

आज कौन सा दिवस है..??
हमें क्या..विश्व के 95% से ज्यादा आबादी को पता नही होगा..की आज कौन सा दिवस है..??
मगर हरेक लोग के घर में,कोई न कोई इस रोग से जुड़े होंगे..

हां आज "विश्व हृदय❤️दिवस" है..और हम हरेक साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाते है..इसकी शुरुआत 2000 में 'वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन'(WHF) द्वारा किया गया..लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए..।


हरेक साल विश्व मे ~6.4 करोड़ लोग हृदय 🖤रोग के शिकार होते है..और हर मिनेट विश्व मे 38 लोग इसके शिकार होते है जिस कारण हर तीसरा मौत इसके कारण होता है..।

आखिर हृदय❤️ संबंधित बीमारी क्यों होता है..??
हाई ब्लड प्रेशर,खराब डाइट,लंबे समय तक बैठना,स्मोकिंग,लंबे समय तक तनाव, डाइबिटीज & मोटापा, कम नींद लेना..ये प्रमुख कारण है..।

इसका ❤️ख्याल कैसे रखें..
हेल्थी डाइट, व्यायाम, स्ट्रेस मैनेजमेंट और भरपूर नींद, वजन कंट्रोल, नो स्मोकिंग..

❤️हमारे दिल से 96 हज़ार किलोमीटर लंबी ब्लड वेसल्स जुड़ी होती है..ये पूरे शरीर से खून इकट्ठा करता है और ऑक्ससीजेनेटेड खून पूरे शरीर तक पहुचाता है.. एक इंसान की ब्लड वेसल्स से पृथ्वी को 2 बार लपेट सकते है..


खेल,क्रिकेट,मीडिया और राजनीति...

क्या आपको पता है..भारत का राष्ट्रीय खेल कौन सा है..?? शायद पता होगा..बचपन में कभी न कभी..तो जरूर पढ़ा होगा..मगर ज्यों-ज्यों होश संभाला होगा त्यों-त्यों उसे भूल गए होंगे..??

अगर आपसे खेल का नाम पुछु तो आप, कम-से-कम 10-20 खेल का नाम तो जरूर बता पाएंगे..

अगर उनमें से कितना खेल खेलना आता है,ये पुछु..तो आप कम-से-कम 1-2 गेम का नाम जरूर बता देंगे..

अगर कोई खेल खेलने के लिए कहा जाए.. तो आप किसी आउटडोर गेम में से,आप सर्वप्रथम क्रिकेट को चुनेंगे...(ये बात महिला खिलाड़ी पे भी लागू होता है,बस उसे खेलने का मौका मिले तो वो सर्वप्रथम क्रिकेट ही चुनेंगे)

आखिर क्यों..क्रिकेट को चुना जाएगा..??

क्योंकि क्रिकेट पे कुल खेल बजट का 80% खर्च किया जाता है,मीडिया का 95% कवरेज सिर्फ क्रिकेट पे होता है..और 100% राजनीति भी सिर्फ क्रिकेट पे होता है..

क्रिकेट को इसलिय चुना जाएगा..

क्योंकि यंहा पैसा,शोहरत,राजनीति सबकुछ है..मगर अन्य खेल में तीनों में से कोई चीज नही है... भारत मे 90% मैदान सिर्फ और सिर्फ क्रिकेट के लिए रिजर्व है..अन्य खेल के लिए मैदान तक नही है..तो अन्य संसाधनों की बात तो छोड़िए..

मीडिया का अन्य खेल से बेरुखी...क्रिकेट से इनको इतना लगाव है कि खिलाड़ी किस ब्रांड की घड़ी और चढ़ी पहनते है,यंहा तक कि खबर रखते है..मगर किसी अंतरराष्ट्रीय खेल का इवेंट भारत में हो रहा है,इसका खबर तक नही रखते..

आज हरेक के जुबान पर एशिया कप(2025)..का नाम है...क्या आपको पता है... भारत ने एशिया कप(2025) में साउथ कोरिया को फाइनल में हराया..??


आपको लग रहा होगा कि मैं क्या बात कर रहा हूँ..हां मैं सही कह रहा हूँ..हॉकी एशिया कप में भारत ने दक्षिण कोरिया को हराया..4-1 से..।

पता है ये इवेंट कंहा हुआ था..??बिहार के राजगीर में...।एक बात और पता है...?? इस इवेंट में पाकिस्तान ने भाग नही लिया था...क्या..हां पाकिस्तान ने बायकॉट किया था..ये कहकर की भारत ने पाकिस्तान पर हमला किया है,इसलिय हम भारत मे सुरक्षित महसूस नही करेंगे..।।

मगर अफसोस न इसपे राजनीति हुई और न ही मीडिया की कवरेज और न ही लोगों तक खबर पहुंची..

भारत की 90% आबादी को तो ये भी पता नही होगा..की हरमनप्रीत सिंह कौन है..??

मगर भारत के 90% लोगों को वैभव सूर्यवंशी की उम्र,हार्दिक पांड्या का हेयर का रंग तक पता होगा...आखिर क्यों..??

जब हम कल फाइनल क्रिकेट मैच देख रहे थे..


उसी दिन दिल्ली में "विश्व पैरा एथलेटिक्स" में शैलेश और वरुण ने  हाई जम्प में गोल्ड और कांस्य पदक जीता..।।


एक पैरा एथलेटिक्स की जिंदगी अपने आप मे सराहनीय है,ऊपर से जब आप खेलते हो,और पदक जीतते हो तब आप और प्रसंशानीय हो जाते है..आपका जीवन उन लाखों निराश लोगों के जिंदगी में प्रेरणा का काम कर सकता है..मगर इनकी सारी उपलब्धियां स्वयं तक ही रह जाती है..क्योंकि मीडिया को TRP से मतलब है..ऐसे खबर से नही जो जिंदगी को बदल सके..बल्कि ऐसे खबरों से है.. जो आपके जिंदगी में आक्रोश,नीरसता और घृणा पैदा करें...

आपने न्यूज़ देखा है..कभी गौर से देखियेगा..वो क्या दिखाते है..सच कहता हूँ, आप न्यूज़ चैनल उस नजरिये से तो नही देखेंगे,जिस नजरिये से कल तक देख रहे है..।।

अन्य खेल में भारत के लोगों की अभिरुचि क्यों नही है..??

ऐसा नही है कि अभिरुचि नही है..बल्कि वो चीज उन तक पहुंच ही नही पाता..पैसा,मीडिया,TRP, राजनीति सबकुछ क्रिकेट के पास है..जबतक इसे अभिकेंद्रित नही किया जाएगा तबतक भारत मे अन्य खेलों का उत्थान नही हो पायेगा..।।



शनिवार, 27 सितंबर 2025

अधूरे सपने..

अधूरे सपनों के साथ जीना,कितना दूभर है..
ये कौन जानता है..??
ये वही जानता है..
जो अधूरे सपनों के साथ जी रहा है..
हरपल कुरेदता है स्वयं को,
हरपल कोसता है स्वयं को..
काश थोड़ा और मेहनत कर लेता,
या फिर एक और मौका मिल जाता..
तो शायद कहानी कुछ और होता..।।


अधूरे सपनों के साथ जीना,कितना दूभर है..
ये कौन जानता है..??
ये वही जानता है..
जो अधूरे सपनों के साथ जी रहा है..।।

गुरुवार, 25 सितंबर 2025

सर्किल ऑफ हैबिट..

प्रकृति और हमारे जिंदगी में सर्किल(वृत,चक्र) का महत्वपूर्ण योगदान है..
हमारे आसपास जितने भी चीज है,उसमें से अधिकांश चीजें सर्किल के रूप में ही है,या फिर उसका स्वरूप कैसा भी हो उसका अंत एक सर्किल में ही होता है..।।

मगर हम आज सर्किल पे बात नही, बल्कि आदतों का चक्र(circle of habit) पर बात करेंगे..।।
हममें से हरेक लोग आदतों से घिरे हुए है,अच्छी और बुरी दोनों आदतों से..।

कुछ आदतें जिंदगी का हिस्सा बन जाते है...खासकर अच्छी आदतें..ये आदतें स्वयं को तो परेशान नही करता,मगर हो सकता है,इन आदतों के वजह से दूसरे परेशान हो😊..।
जैसे सुबह उठना, प्राथना करना,स्वछता, स्वध्याय,अनुशासन इत्यादि..
ये आदतें स्वयं को अच्छा लगता है,इसलिय ये बोझ नही लगता..।।

वंही कुछ आदतें बोझ बन जाती है..??
आखिर क्यों..??
क्योंकि उन आदतों को हम स्वयं भी गलत मानते है..
इसलिय ये आदत बोझ बन जाती है..।
जैसे :-धुम्रपान,मद्यपान,आलस्य,क्रोध इत्यादि..।

हममें से 99.9% लोग जानते है,कि ये गलत है..और इनमें से अधिकांश लोग स्वयं या परिवार के कारण इन आदतों को छोड़ना चाहते है..
अधिकांश लोग कभी-न-कभी इसे छोड़ना चाहते है,मगर इसे कम ही लोग छोड़ पाते है..
आखिर क्यों..??
क्योंकि हममें से 99% आदतों के सर्किल में फंसे हुए है..
और उन्हें पता ही नही है कि कंहा से निकलने है..??

तो फिर क्या करें..??

सबसे पहले हमें अपने सर्किल के बिंदु(point) को पहचानना होगा..की मेरे आदतों का सर्किल कितना बड़ा है..
हमारे आदत जितने पुराने होंगे उतना ही बड़ा सर्किल होगा..

इसके लिए हमें अपने अतीत में जाना होगा..क्योंकि वो बिंदु का पता अतीत से ही चलेगा जंहा से सर्किल बनना शुरू हुआ था..
और खुद से सवाल पूछना होगा..आखिर इसकी शुरुआत हमने क्यों,और किस परिस्थितियों में किया था..??

क्या अब भी वो परिस्थिति है,या उस जैसी परिस्थिति है..।
अगर हां, तो आप उसी बिंदु पे है,जंहा से आपने इन आदतों की शुरुआत किया था..आपके पास सुनहरा मौका है,इन आदतों के चक्र से निकलने का..।

अगर उस जैसी परिस्थितियां अभी नही है,तो आप उस चक्र से अभी निकल तो जाएंगे,मगर कुछ दिनों के बाद आप फिर से उस चक्र के परिधि में आ जाएंगे..और ये चक्र निरंतर चलता रहेगा, और दिन-प्रतिदिन बड़ा होता जायेगा..।।

हममें से कुछ लोग होते है,जो अपने दृढनिश्चय और आत्मविश्वास के बूते इस सर्किल से निर्णय लेते ही निकल जाते है..
इसके लिए इतनी शक्ति चाहिए होती है,जितना पृथ्वी के कक्ष से किसी वस्तु को बाहर जाने के लिए..।
जो वस्तु(उपग्रह) पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल से निकल नही पाते है,उसका क्या हश्र होता है..कभी-कभी हम में से कुछ मनुष्य का भी यही हश्र होता है..।।

इसलिए अपने आदतों के चक्र से छुटकारा पाने के लिए हमें उन जैसे परिस्थितियों को ढूंढ़ना होगा,जिन परिस्थितियों में हमने इसकी शुरुआत किया था..
अन्यथा इस चक्र से निकलना बड़ा दूभर है..।।

बुधवार, 24 सितंबर 2025

रेलवे स्टेशन और बुक स्टॉल..

आपने आखरी बार रेल से कब सफर किया था..??

आपने आखरी बार रेल में किताब या अखबार कब पढ़ा था..??

आपने आखरी बार रेलवे स्टेशन पर बुक स्टॉल कब देखा था..??

आपने आखरी बार रेलवे स्टेशन के बुक स्टॉल से बुक कब खरीदा था..??

मैं पूरी उम्मीद के साथ कह सकता हूँ कि,आपको बिल्कुल याद नही होगा कि ,आपने कब रेल सफर के दौरान बुक पढ़ा या बुक स्टॉल देखा..।।

इसमें कोई ताज्जुब की बात नही है,क्योंकि दिनप्रतिदिन हमारी पढ़ने की क्षमता कम होता जा रहा है..इसलिय आप अफसोस न करें कि आपने रेल सफर मोबाइल देख के बिताया..।।

मगर अफसोस हमारे किताब पढ़ने की दूरियां के वजह से रेलवे स्टेशन का बुक स्टॉल गायब होता जा रहा है..
मुझे फोन बूथ की याद आती है..जो अब लुप्त हो चुका है..
कंही ऐसा ना हो कि बुक स्टॉल भी रेलवे स्टेशन से गायब हो जाये..।।
पहले कोई भी व्यक्ति सफर के दौरन कुछ-न-कुछ पढ़ने के लिए खरीदता ही था,भले ही वो पढ़े ना,पेज ही पलटे मगर खरीदता जरूर था..
मगर आज..हममें से कितने लोग है जो रेलवे सफर के दौरान बुक/पत्रिका खरीदते है..शायद न के बराबर..।।
इसलिय तो भारत के 60% स्टेशन से बुक स्टॉल गायब हो चुके है..।।

अगर आप जब भी सफर करें तो एक बुक या पत्रिका जरूर खरीदे,शायद आपके खरीदने से वो बुक स्टॉल एक दिन और बंद होने से बच जाए..।।

पता है बुक पढ़ने के क्या-क्या फायदे है..??

मंगलवार, 23 सितंबर 2025

दुःख..

कुछ चीजें हमारे हाथ मे नही होता है,
और जो चीज, हमारे हाथ मे नही होता है,
उसके लिए अफसोस करना,और खुद को तकलीफ में डालना बेबकूफी नही तो,और क्या है..??

हममें से आधे लोग बेवजह के तकलीफ में है..
और इस तकलीफ से आपको,सिर्फ और सिर्फ आपके सिवा और कोई नही निकाल सकता..।।

क्या आप दुःखी है..??
अगर हां..
तो फिर से सोचिये..
क्या आप सही में दुःखी है..??
अगर फिर से हां..
तो आप..अपने तकलीफ का कारण लिखिए..।।
हां पहले लिख लीजिये तब आगे पढियेगा..
क्या आपने लिख लिया/सोच लिया..


अगर हां...
तो इससे कैसे छुटकारा पाया जा सकता है..
अब ये लिखिए..।।

हममें से आधे लोग इसलिए दुःखी है कि,उनके आस-पास के लोग दुःखी है..।उस आस-पास के लोगों के जिंदगी में बदलाव लाना उतना जल्दी संभव नही है,जितना जल्दी स्वयं के अन्दर बदलाव लाना..।।
इसलिय स्वयं के अंदर बदलाव लाये और दुःख के दलदल से बाहर निकलिये..।।
जिसे आप दुःख/तकलीफ मान बैठे है..वास्तव में,वो जिंदगी का अभिन्न हिस्सा है..बिना उसके जिंदगी में प्रगति संभव नही है..।।

बस अपना थोड़ा नजरिया बदलिए..
और देखिए..
आपके जिंदगी में दुःख, है, ही नही..।

दुःख और सुख दोनों पानी के बुलबुले की तरह क्षणभंगुर है..
बुलबुला पानी से बनता है,और पानी मे ही विलीन हो जाता है..।
मगर हम मनुष्य सबकुछ भूल कर बस उस बुलबुले की छवि में ही खोये रहते है..होना ये चाहिए कि हमें पानी की तरह आगे बढ़ जाना चाहिए..।।

दुःख का सबसे बड़ा कारण जिंदगी में ठहराव का है..
आप जिस उम्र में हो..
आप नित प्रतिदिन कुछ-न-कुछ अलग करते रहे,या फिर अलग तरीके से करते रहे...।।







शनिवार, 20 सितंबर 2025

किताब और जिंदगी

पहले मैं सोचा करता था,औरतें इतनी पूजा क्यों करती है..
फिर मैंने सोचा-
"हिन्दू नारी इतनी असहाय होती है,उसे पति से,पुत्र से,सभी से इतना लांक्षन,अपमान और तिरस्कार मिलता है कि पूजा-पाठ न हो तो पशु बन जाये।पूजा पाठ ने ही हिन्दू नारी का चरित्र अभी तक इतना ऊंचा रखा है..।"

क्या आप बता सकते है की ये पंक्तियां किस पुस्तक से लिया गया है..??
मैं भी कमाल करता हूँ,कंहा से बता पाएंगे आप..कल तक तो मैं भी अनजान था इन पंक्तियों और इस रहस्य से..।।

सालों से इच्छा थी ये पुस्तक पढ़ने की मगर पढ़ने का मौका ही नही मिला..अमेज़न,फ्लिपकार्ट पे सर्च करके कार्ट में कई दफा रखा,मगर कितने पुस्तक खरीदे और पढ़ लिया मगर इसे पढ़ने से बार-बार वंचित ही रह जाता था..।

मगर इस बार जब अपने घर से आ रहा था,तो स्टेशन पर ये बुक दिखी..मैंने बुक इसलिय नही खरीदी की मुझे पढ़नी थी,क्योंकि मैंने इसलिए खरीदा,की मेरे खरीदने से, शायद ये बुकस्टाल शायद एक दिन और चल जाये।(स्टेशन से लगभग बुक स्टॉल गायब हो चुके है,आज से 5 साल पहले तक लगभग हरेक स्टेशन पर आपको बुक स्टॉल मिल जाता,मगर आज दुर्लभ होता जा रहा है)
ये पुस्तक 1949 में प्रकाशित हुई थी,मगर आज भी ये हिंदी साहित्य(उपन्यास)में अपना अग्रणी स्थान रखता है..
इस पुस्तक का नाम "गुनाहों का देवता" है,जिसे धर्मवीर भारती ने लिखा है..।

इन्होंने लेखनी के माध्यम से प्रेम की नई ऊंचाइयां दी है...
इन्होंने इस पुस्तक में उन पहलुओं को भी छुआ है जो हमें वर्तमान में देखने को मिल रहा है..
"लिव-इन-रिलेशन"आज नया नाम है,मगर चंदर और पम्मी के बीच मे 1949 में ही था..और धर्मवीर भारती जी ने बखूबी प्रेम और लिव-इन-रिलेशन के बारे में बताया है..
एक आतिम्क है,तो दूसरा शरीरिक..शारीरिक भूख जब एक समय पर भर जाता है,तो दोनों के बीच में दूरियां बढ़ जाती है,जो लिव-इन-रिलेशन टूटने का सबसे बड़ा कारण है..।।
आत्मिक भूख कभी नही मरती..ये तो एक दूसरे की पूर्ति के लिए जान तक न्यौछावर कर देते है..।।

प्रेम का स्थान वासना से ऊपर है..जब हम प्रेम के माध्यम से वासना की पूर्ति करते है,तो प्रेम खत्म हो जाता है..।

इस पुस्तक के मुख्य पात्र- चंदर,सुधा,बिनती,पम्मी,गेसू इत्यादि है..
सबका अपना-अपना व्यक्तित्व है जो हमें कई सीख देता है..

इस पुस्तक के कुछ प्रमुख अंश-
जीवन मे अलगाव,दूरी,दुख,और पीड़ा आदमी को महान बना सकता है।भावुकता और सुख नही।
•"ये आज फिजा खामोश है क्यों,
    हर जर्रे को आखिर होश है क्यों?
   या तुम ही किसी के हो न सके,
   या कोई तुम्हार हो न सका।"

कभी-कभी एक व्यक्ति के माध्यम से दूसरे व्यक्ति की भावनाओं की अनुभूति होने लगती है।

मैं ईसाई हूँ, पर सभी अनुभवों के बाद मुझे पता लगता है कि हिंदुओं के यंहा प्रेम नही वरन धर्म और सामाजिक परिस्थितियों के आधार पर विवाह की रीति बहुत वैज्ञानिक और नारी के लिए सबसे ज्यादा लाभदायक है।उसमें नारी का थोड़ा बंधन चाहे क्यों न हो लेकिन दायित्व रहता है,संतोष रहता है,वह अपने घर की रानी रहती है।

मनुष्य का एक स्वभाव होता है।जब वह दूसरों पर दया करता है तो वह चाहता है कि याचक पूरी विनम्र होकर उसे स्वीकारे।अगर याचक दान लेने में कंही भी स्वाभिमान दिखलाता है तो आदमी अपनी दानवृति और दयाभाव भूलकर नृशंसता से उसके स्वाभिमान को कुचलने में व्यस्त हो जाता है

ये पुस्तक हरेक युवा को पढ़नी चाहिए खासकर उन्हें जो प्रेम के दहलीज पर कदम रख रहे है..धर्मवीर भारती ने खुद इसे 23 साल की उम्र में लिख दिया था..मगर इसे पढ़ने और समझने के लिए 25 की उम्र काफी है..।
अगर आप 25 से पहले इसे पढ़ लेते है तो आप अपने प्रेम को नई ऊंचाइयां दे पाएंगे..।
मगर आजकल तो प्रेम...कोपलें फूटने से पहले ही,हो जा रहा है..आज की जेनरेशन 100 सेकंड की वीडियो पूरा नही देख पाता है तो 100-200 पेज की पुस्तक कंहा से पढ़ पाएंगे..।।

मैं कहूंगा आज नही तो कल ये पुस्तक जरूर पढ़ें..
क्योंकि न ही प्रेम की उम्र होती है,और न ही वासना की कोई सीमा..
ये पुस्तक आपको प्रेम और वासना के पराकाष्ठा और अवसान से अवगत कराएगा..।।

Yoga for digestive system