बुधवार, 1 अक्टूबर 2025

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ(RSS)

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS के बारे में भले ही आप कुछ नही जानते हो,मगर आपने ये नाम जरूर सुना होगा..।
इस विजयदशमी को RSS अपना 100 साल पूरा कर लेगा..

हममें से अक्सरहाँ लोग RSS मतलब हिंदूवादी संगठन मान लेते है..या फिर इसे BJP से जोड़ देते है..जो कुछ हद तक सही भी है..मगर RSS का प्रमुख कार्य राष्ट्रसेवा और समाजसेवा है..जब भी राष्ट्र पर आंच आता है तो ये खुलकर बोलता और राष्ट्रहित में कार्य करता है..
देशहित में सैन्य संगठन के बाद सर्वाधिक बलिदान इस संगठन ने दिया है..।
भले ही इस संगठन पर ये आरोप लगाया जाता है कि इसने 1942 के "भारत छोड़ो आंदोलन"का विरोध किया था जो सही है..मगर उनकी उस विचारधारा को नही बताया जाता कि इन्होंने क्यों विरोध किया था..(क्योंकि जब जिन्ना मुस्लिम राष्ट्र के लिए अड़ गए थे,उस समय RSS भी हिंदू राष्ट्र की मांग कर रहा था,और कांग्रेस का मत था कि आजादी के बाद इसके बारे में निर्णय किया जाएगा)मगर इसके अलावा RSS ने 1948,1962,1965,1971,1999 के युद्ध मे अभूतपूर्व योगदान दिया,साथ ही हरेक प्राकृतिक आपदा में सेना के साथ कंधे से कंधे मिला कर अपना योगदान दिया..।।

क्या आपको पता है RSS का गठन कैसे और क्यों हुआ..??
चलिए आपको 1923 ईसवी में ले चलते है..नागपुर में एक शुक्रवारी तालाब के पास एक "गणेश मंडली/मंडल" था इसके करीब ही एक मस्जिद था,मुसलमानों ने मस्जिद के सामने से हिन्दू धार्मिक जुलूस निकालने पर आपत्ति जताया..नागपुर के जिलाधिकारी ने हिंदुओं को झांकी निकालने पर प्रतिबंध लगा दिया..।
हिन्दू भी अड़ गए उन्होंने कहा जब तक अनुमति नही मिलेगा गणेश विसर्जन नही करेंगे..जिलाधिकारी एक कदम और आगे बढ़ गए और उन्होंने मस्जिद के सामने से दिंडी(भजन मंडली)को भी जाने से प्रतिबंधित कर दिया..जिससे दंगे भड़क गए..और हिंसा हुई..।।
इस घटना को देखते हुए एक कांग्रेसी कार्यकर्ता को अपने बड़े नेताओं से बड़ी उम्मीद थी कि वो हिंदुओं की आवाज उठाएंगे मगर उन्हें निराशा हाथ लगी..
उस कार्यकर्ता ने नागपुर के जिलाधिकारी के खिलाफ "दिंडी सत्याग्रह" का शुरुआत किया और देखते ही देखते जय विट्ठल का नारा लगाते हुए 20 हजार से ज्यादा लोग एकत्रित हो गए..।
और यंही से RSS के गठन की उधेड़बुन चालू हो गई..
और 27 सितंबर 1925 को RSS(राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) की स्थापना विजयदशमी के दिन हुई..।।

क्या आपको पता है..वो कांग्रेसी कार्यकर्ता कौन था..??
दिन था 22 जून 1897 रानी विक्टोरिया की ताजपोशी का 60वा सालगिरह पूरे भारत के साथ नागपुर में भी मनाया जा रहा था..एक 8 साल का बच्चा स्कूल से सामारोह छोड़कर घर आ गया,उसके भाई ने पूछा इतना गुस्सा क्यों हो,तुम्हें मिठाई नही मिला क्या..उसने कहा मिला था,मैंने फेंक दिया..ऐसे लोगों के समारोह में मुझे भाग नही लेना..
13 साल की उम्र में प्लेग से इनके माता-पिता की मृत्यु हो गई...तब इनके बडे भाई महादेव ने इनकी परवरिश की..
15 साल की उम्र में इनकी दोस्ती B.S मुंजे से हुई, स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े मुंजे ने इन्हें अपने घर पर बम बनाने की ट्रेनिंग दी..।
1910 में डॉक्टरी का पढ़ाई करने के लिए कोलकाता गए,5 साल बाद नागपुर लौटे तो नॉकरी के बजाय उन्होंने युवाओं के लिए व्यायामशाला खोला,यंहा पे व्यायाम के अलावा युवाओ को देश-विदेश के घटनाओं पे चर्चा करते और करवाते..।
1919 में कांग्रेस से जुड़ गए..
1920 में हिन्दूवादी नेता L.V परांजपे के "भारत स्वयंसेवक मंडल" से जुड़ गए,इस संगठन का मुख्य कार्य कांग्रेस के अधिवेशनों के लिए ज्यादा से ज्यादा युवाओ को एकत्रित करना था..
1921 में एक भाषण के कारण इनके ऊपर देशद्रोह का मुकदमा चला और एक साल तक जेल में रहे..जेल में ही इन्हें V.D सावरकर की किताब "हिंदुत्व:हिन्दू कौन है" पढ़ने को मिला, तब से ही इनके अंदर हिंदुओ के लिए एक संघ बनाने का विचार आया..
क्योंकि खिलाफत आंदोलन और मालाबार हिंसा ने कांग्रेस के प्रति इनके नजरिये को बदल दिया..।
1923 का नागपुर हिंसा ने इनके विचार को और प्रबल किया,क्योंकि कांग्रेस ने इस हिंसा के खिलाफ आवाज तक नही उठाई..और इनका कांग्रेस से मोहभंग हो गया..
और ये हिन्दू महासभा(1915) से जुड़ गए..।मगर कुछ समय बाद इन्होंने हिन्दू महासभा को छोड़ दिया क्योंकि इन्हें अहसास हुआ कि हिंदू महासभा अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के कारण हिन्दू हितों से समझौता कर सकता है..।
और उन्होंने 27 सितंबर 1925 को अपने घर पर 4 लोगों को बुलाया और कहा कि- आज से हम संघ की शुरूआत करते है..।।(गणेश सावरकर,B.S मुंजे,L.V परांजपे, B.B थोलकर)

17 अप्रैल 1926 को इस संगठन का नामकरण हुआ - "राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ" यानी "RSS"..।

वो व्यक्ति कोई और नही बल्कि "केशव बलिराम हेडगेवारजी" थे..।

 20 जून 1940 को बीमार अवस्था मे एक पर्ची उन्होंने माधव सदाशिव गोवलकर को पकड़ाई.. और अगले सुबह उनकी मृत्यु हो गई..
13 दिन बाद ये पर्ची खोली गई..जिसमे लिखा था "ये संगठन चलाने की पूरी जिम्मेदारी तुम्हारी है"..
इससे तरह RSS के अगले प्रमुख- माधव सदाशिव गोवलकर बने..


 " RSS अमर है,चाहे इसके संस्थापक की मृत्यु हो गई हो,लेकिन ये संघ आगे बढ़ता रहेगा"

आज RSS के 100 वर्ष पूरे हो गए है..मगर आज भी संघ पहले से ज्यादा मजबूत और विस्तारित हुआ है..ये चुपचाप अपना काम कर रहा है..हां कभी-कभी इस संगठन के ऊपर राजनीति होती है,मगर ये स्वयं को राजनीति से दूर रखता है.।
इनके लिए हरेक भारतीय हिन्दू है..चाहे वो किसी भी धर्म और मजहब से हो..।इनके लिए राष्ट्रहित ही सर्वोपरि है..




मंगलवार, 30 सितंबर 2025

स्वयं को देखिए..

हम जब हताश और निराश होते है..तो अपने चारों ओर देखते है..इस उम्मीद से की कंही से कोई आस की नजर आ जाये..
मगर क्या होता है..??
अक्सरहाँ सांत्वना के सिवा और कुछ नही मिलता..मगर ऐसे समय मे सांत्वना भी बड़ा काम आता है..।

हम अक्सरहाँ अपने समस्या का निराकरण के लिए इधर-उधर भटकते है.मगर इसका निराकरण हमारे स्वयं के अंदर ही है..।।
हम अक्सरहाँ जब सब जगह से हार जाते है,तब स्वयं के करीब आते है..और स्वयं से सवाल करते है..तब जादू होता है..क्योंकि स्वयं से सवाल करने पर स्वयं से जबाब मिलता है..।


आपने आखरी बार स्वयं को कब देखा था..या खुद के साथ कब समय बिताया था..
शायद याद नही होगा..या फिर जेहन में सवाल आया होगा कि ये क्या होता है..
सबसे पहले ये क्या होता है..इसका जबाब दे देता हूँ..स्वयं के साथ समय बिताने का मतलब स्वयं का अवलोकन करना
आप एक दिन,एक सप्ताह,एक महीना ,एक साल या फिर अबतक के पूरे जीवन का अवलोकन कर सकते है..
आपने क्या पाया,क्या खोया..आपमें किस तरह की कमियां और खूबियां है..इस तरह से स्वयं का अवलोकन कर सकते है..।

इसे करने से क्या होगा..??
साधारण शब्दों में कहू तो,हमें हमारे परेशानियों से छुटकारा या फिर रास्ता मिलेगा..या फिर भविष्य में होने वाली गलतियों से बच सके..अतीत में जो गलतियां हो चुका है,उस अपराधबोध से छुटकारा मिलेगा..
और जीवन जीने का अलग नजरिया मिलेगा..।।

स्वयं को कैसे देखे..??
बड़ा ही आसान है..
यंहा में 2 तरीका बताता हूँ..
1st:- आयने के सामने चुपचाप खड़े हो/बैठ जाये कम से कम 5-10 मिनट और सिर्फ स्वयं को देखते रहे..
ढेर सारे सवाल जेहन में आएंगे उसे आने देंगे..तबतक जबतक आना ना बंद हो जाये..
2nd :- रात में सोते वक्त अपने पूरे दिन के क्रियाकलाप का अवलोकन करें, आपने क्या अच्छा किया,कंहा गलती की..
आप इस तरह से 1 महीने,1साल या फिर अबतक के अपने पूरे जीवन का अवलोकन करें..

ये एक दिन नही रोज करें..
अगर रोज नही तो कम से कम सप्ताह में 1 दिन तो जरूर करें..
देखिए जिंदगी में किस तरह से बदलाव आता है..
वो भी सिर्फ स्वयं को देखने से...😊

दुर्गा पूजा और कन्या भोज

अभी नवरात्रा चल रहा है,और आज अष्टमी है और महागौरी का पूजन है..
 "श्वेत वृषे समारुढा स्वेताम्बरधरा शुचिः
  महागौरी शुभं दद्दानमहादेवप्रमोददा ।

नवरात्र(दुर्गापूजा) से अनेक यादें बचपन की जुड़ी हुई है..
इनमें से एक यादें जो ज्यादा पुरानी नही है,मगर आज छोटे-छोटे कन्याओं को भोजन करके आते हुए देखते हुए सहसा वो सवाल मन में जागा,जो उस समय जागा..।(नवरात्र में कन्याओं को भोजन कराया जाता है,नवदुर्गा का स्वरूप मान के)

चलिए वो वृतांत सुनाता हूँ..
5-6 छोटी-छोटी लड़कियां(इन सब की उम्र 5-10 के बीच मे था) एक जगह खड़ी थी..
इनमें से जो सबसे बड़ी थी..वो सहसा एक छोटी लड़की से बोलती है- तू भी आ गई..वो छोटी लड़की जबाब देती है,ऑन्टी ने सबको बोला था आने को..।
बड़ी वाली लड़की उधेड़बुन में थी और सभी एक जगह ठिठक सी गई थी..।
फिर कुछ सोचने के बाद बड़ी वाली लड़की ने कहा अच्छा ठीक है चलो..और सबको हिदायत दी कि, इसके बारे में कोई नही बताएगा..(क्या नही बताएगा..??)

कुछ घन्टों के बाद वापस में भी घर की और आ रहा था,और ये लोग भी कन्या भोज खाकर वापस आ रही थी..
सभी खुश थे,सभी के हाथ मे कुछ-न-कुछ था,किसी के हाथ मे खिलौने तो किसी के हाथ मे कॉपियां.. सबके चेहरे पे खुशी था..।
मगर एक सवाल मेरे जेहन में था की..
आखिर कोई, क्या नही बताएगा..??
मैं इस सवाल को जानने का इच्छुक नही था..
मगर ये सब जिस और जा रहे थे,उस और में भी जा रहा था..
(अजीब है ना..हमारे गाँव मे हरेक कोई हरेक चेहरा को पहचानता है,अगर कोई नया चेहरा दिखे ,तो हम एक-दूसरे से पूछते है..आखिर ये कौन है..?? मगर शहरों में आपके बगल में कौन रहता है..हम ये नही जानते..??)
अचानक उस समूह में से एक छोटी लड़की दौड़ी...और माँ कहकर चिल्लाई..और माँ ने मुस्कुराते हुए गले से लगा लिया..
मेरे जेहन में जो कुछ घंटे पहले सवाल था,उसका जबाब मिल गया था..
आखिर क्यों बड़ी वाली लड़की ने उस छोटी लड़की से सवाल किया था..की तुम भी आ गई..??
दरसल वो छोटी लड़की मुस्लिम थी..😊

मेरे सवाल का जबाब भी मिला,और न जाने एक आत्मिक आनंद की अनुभूति महसूस हुई..।।

भारत का हरेक नागरिक पहले भारतीय है..
और हरेक भारतीय सनातनी है..।
चाहे हमारा जाति और धर्म कुछ और क्यों न हो..।

मैं कंहा था..मैं कंहा हूँ

मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..??
मेरे क्या सपने थे..अब कोई सपने नही..
पहले क्या होंसला था,अब कोई हौंसला नही..
पहले क्या-क्या इच्छायें था,अब कोई नही..।।

मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
जिंदगी के दौड़ में आगे बढ़ने के बजाय..
जैसे में पीछे ही आ रहा हूँ,या फिर थम सा गया हूँ..।।
अगर खुद से पुछु..
क्या है मेरी उपलब्धियां..??
तो जबाब देना बड़ा आसान है..
क्योंकि कोई उपलब्धियां ही नही है..।।

मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
सच कहूं तो.. 
पहले भी मैं कंही नही था..
मगर मेरे कुछ सपने थे,कुछ आंकाक्षायें थे..
अब कुछ भी नही..
एक दुष्चक्र में फंसा हुआ हूँ..
उसी में चक्कर काट रहा हूँ..

मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..??


सोमवार, 29 सितंबर 2025

विश्व हृदय दिवस..

आज कौन सा दिवस है..??
हमें क्या..विश्व के 95% से ज्यादा आबादी को पता नही होगा..की आज कौन सा दिवस है..??
मगर हरेक लोग के घर में,कोई न कोई इस रोग से जुड़े होंगे..

हां आज "विश्व हृदय❤️दिवस" है..और हम हरेक साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाते है..इसकी शुरुआत 2000 में 'वर्ल्ड हार्ट फेडरेशन'(WHF) द्वारा किया गया..लोगों में जागरूकता फैलाने के लिए..।


हरेक साल विश्व मे ~6.4 करोड़ लोग हृदय 🖤रोग के शिकार होते है..और हर मिनेट विश्व मे 38 लोग इसके शिकार होते है जिस कारण हर तीसरा मौत इसके कारण होता है..।

आखिर हृदय❤️ संबंधित बीमारी क्यों होता है..??
हाई ब्लड प्रेशर,खराब डाइट,लंबे समय तक बैठना,स्मोकिंग,लंबे समय तक तनाव, डाइबिटीज & मोटापा, कम नींद लेना..ये प्रमुख कारण है..।

इसका ❤️ख्याल कैसे रखें..
हेल्थी डाइट, व्यायाम, स्ट्रेस मैनेजमेंट और भरपूर नींद, वजन कंट्रोल, नो स्मोकिंग..

❤️हमारे दिल से 96 हज़ार किलोमीटर लंबी ब्लड वेसल्स जुड़ी होती है..ये पूरे शरीर से खून इकट्ठा करता है और ऑक्ससीजेनेटेड खून पूरे शरीर तक पहुचाता है.. एक इंसान की ब्लड वेसल्स से पृथ्वी को 2 बार लपेट सकते है..


खेल,क्रिकेट,मीडिया और राजनीति...

क्या आपको पता है..भारत का राष्ट्रीय खेल कौन सा है..?? शायद पता होगा..बचपन में कभी न कभी..तो जरूर पढ़ा होगा..मगर ज्यों-ज्यों होश संभाला होगा त्यों-त्यों उसे भूल गए होंगे..??

अगर आपसे खेल का नाम पुछु तो आप, कम-से-कम 10-20 खेल का नाम तो जरूर बता पाएंगे..

अगर उनमें से कितना खेल खेलना आता है,ये पुछु..तो आप कम-से-कम 1-2 गेम का नाम जरूर बता देंगे..

अगर कोई खेल खेलने के लिए कहा जाए.. तो आप किसी आउटडोर गेम में से,आप सर्वप्रथम क्रिकेट को चुनेंगे...(ये बात महिला खिलाड़ी पे भी लागू होता है,बस उसे खेलने का मौका मिले तो वो सर्वप्रथम क्रिकेट ही चुनेंगे)

आखिर क्यों..क्रिकेट को चुना जाएगा..??

क्योंकि क्रिकेट पे कुल खेल बजट का 80% खर्च किया जाता है,मीडिया का 95% कवरेज सिर्फ क्रिकेट पे होता है..और 100% राजनीति भी सिर्फ क्रिकेट पे होता है..

क्रिकेट को इसलिय चुना जाएगा..

क्योंकि यंहा पैसा,शोहरत,राजनीति सबकुछ है..मगर अन्य खेल में तीनों में से कोई चीज नही है... भारत मे 90% मैदान सिर्फ और सिर्फ क्रिकेट के लिए रिजर्व है..अन्य खेल के लिए मैदान तक नही है..तो अन्य संसाधनों की बात तो छोड़िए..

मीडिया का अन्य खेल से बेरुखी...क्रिकेट से इनको इतना लगाव है कि खिलाड़ी किस ब्रांड की घड़ी और चढ़ी पहनते है,यंहा तक कि खबर रखते है..मगर किसी अंतरराष्ट्रीय खेल का इवेंट भारत में हो रहा है,इसका खबर तक नही रखते..

आज हरेक के जुबान पर एशिया कप(2025)..का नाम है...क्या आपको पता है... भारत ने एशिया कप(2025) में साउथ कोरिया को फाइनल में हराया..??


आपको लग रहा होगा कि मैं क्या बात कर रहा हूँ..हां मैं सही कह रहा हूँ..हॉकी एशिया कप में भारत ने दक्षिण कोरिया को हराया..4-1 से..।

पता है ये इवेंट कंहा हुआ था..??बिहार के राजगीर में...।एक बात और पता है...?? इस इवेंट में पाकिस्तान ने भाग नही लिया था...क्या..हां पाकिस्तान ने बायकॉट किया था..ये कहकर की भारत ने पाकिस्तान पर हमला किया है,इसलिय हम भारत मे सुरक्षित महसूस नही करेंगे..।।

मगर अफसोस न इसपे राजनीति हुई और न ही मीडिया की कवरेज और न ही लोगों तक खबर पहुंची..

भारत की 90% आबादी को तो ये भी पता नही होगा..की हरमनप्रीत सिंह कौन है..??

मगर भारत के 90% लोगों को वैभव सूर्यवंशी की उम्र,हार्दिक पांड्या का हेयर का रंग तक पता होगा...आखिर क्यों..??

जब हम कल फाइनल क्रिकेट मैच देख रहे थे..


उसी दिन दिल्ली में "विश्व पैरा एथलेटिक्स" में शैलेश और वरुण ने  हाई जम्प में गोल्ड और कांस्य पदक जीता..।।


एक पैरा एथलेटिक्स की जिंदगी अपने आप मे सराहनीय है,ऊपर से जब आप खेलते हो,और पदक जीतते हो तब आप और प्रसंशानीय हो जाते है..आपका जीवन उन लाखों निराश लोगों के जिंदगी में प्रेरणा का काम कर सकता है..मगर इनकी सारी उपलब्धियां स्वयं तक ही रह जाती है..क्योंकि मीडिया को TRP से मतलब है..ऐसे खबर से नही जो जिंदगी को बदल सके..बल्कि ऐसे खबरों से है.. जो आपके जिंदगी में आक्रोश,नीरसता और घृणा पैदा करें...

आपने न्यूज़ देखा है..कभी गौर से देखियेगा..वो क्या दिखाते है..सच कहता हूँ, आप न्यूज़ चैनल उस नजरिये से तो नही देखेंगे,जिस नजरिये से कल तक देख रहे है..।।

अन्य खेल में भारत के लोगों की अभिरुचि क्यों नही है..??

ऐसा नही है कि अभिरुचि नही है..बल्कि वो चीज उन तक पहुंच ही नही पाता..पैसा,मीडिया,TRP, राजनीति सबकुछ क्रिकेट के पास है..जबतक इसे अभिकेंद्रित नही किया जाएगा तबतक भारत मे अन्य खेलों का उत्थान नही हो पायेगा..।।



शनिवार, 27 सितंबर 2025

अधूरे सपने..

अधूरे सपनों के साथ जीना,कितना दूभर है..
ये कौन जानता है..??
ये वही जानता है..
जो अधूरे सपनों के साथ जी रहा है..
हरपल कुरेदता है स्वयं को,
हरपल कोसता है स्वयं को..
काश थोड़ा और मेहनत कर लेता,
या फिर एक और मौका मिल जाता..
तो शायद कहानी कुछ और होता..।।


अधूरे सपनों के साथ जीना,कितना दूभर है..
ये कौन जानता है..??
ये वही जानता है..
जो अधूरे सपनों के साथ जी रहा है..।।