शुक्रवार, 15 मई 2026

खालीपन...

उसे ढूंढ रहे हो..
हां उसे ही ढूंढ रहा हूँ..
आखिर क्यों ढूंढ रहे हो..
अपने खालीपन को भरने के लिए ढूंढ रहा हूँ..।

ये खालीपन आखिर है क्यों..
क्योंकि मैं खुद ही खाली हूँ..
इसिलिय शायद ये खालीपन है..।

तो अपने खालीपन को स्वयं भरो..
न कि उसे भरने के लिए दूसरों का सहारा लो..
क्योंकि अगर वो चला गया छोड़ के..
तो ये खालीपन और बढ़ जाएगा..
और फिर शायद तुम उस खालीपन को भर न पाओ..।

अपने खालीपन को स्वयं भरो..
खालीपन स्वयं ही दूर हो जाएगा..।।




शनिवार, 2 मई 2026

ब्रह्मांड,पृथ्वी और हम..

मुझे जब भी हीनता और गौरवान्वित का अहसास होता है..
तो,मैं आसमां की और देखता हूँ..
और मुस्कुराता हूँ..
और सोचता हूँ..
इस ब्रह्मांड में पृथ्वी का क्या अस्तित्व है..??
यही,जो..
हमारे पृथ्वी पर बैक्टेरिया और वायरस का है..।
तो फिर जरा सोचिए..
इस ब्रह्मांड मैं..
हमारा क्या अस्तित्व है..??😊



हम जिस तरह उन्हें नंगी आंख से नही देख सकते..
उसी तरह से एक छोर पे बैठा कोई..
हमारे पृथ्वी को नंगी आंख से नही देख सकता..
या फिर लाख प्रयत्न करने के बाबजूद भी नही देख सकता..।

मुझे जब भी हीनता और गौरवान्वित का अहसास होता है..
तो,मैं आसमां की और देखता हूँ..।।

•प्रसिद्ध खगोलशास्त्री "कार्ल सगन"ने पृथ्वी को "धूल के एक कण पर टिका हुआ छोटा सा नीला बिंदु" कहा था

•ब्रह्मांड में हमारी स्थिति बहुत ही विशिष्ट है। पृथ्वी सौरमंडल का एक हिस्सा है, जो आकाशगंगा (Milky Way) की एक छोटी सी भुजा (ओरियन आर्म) में स्थित है आकाशगंगा में लगभग 100 से 400 अरब तारे हैं। ब्रह्मांड में ऐसी अरबों-खरबों आकाशगंगाएं हैं।

यदि पूरे ब्रह्मांड को एक महासागर मान लिया जाए, तो पृथ्वी उस महासागर में पानी की एक छोटी सी बूंद के समान भी नहीं है

शुक्रवार, 1 मई 2026

मैं सुकून ढूंढने चला था

मैं सुकून ढूंढने चला था..
बिना ये जाने की..
सुकून आखिर है क्या..??
जब ये जाना तो खुद पे हंसी आयी..
और साथ ही खुद पे तरस आयी..।
मैं सुकून ढूंढने चला था..
बिना ये जाने की..
सुकून आखिर है क्या..??

लोग व्यर्थ में भटक रहे है..
उस सुकून को ढूंढने के लिए..
जो सुकून उनके अंदर ही है..
कभी अंदर भी तो डुबकियां लगाओ तब तो पता चले..
सुकून आखिर है क्या..
जब किसी की बातें..
जब किसी की यादें..
जब कोई परिस्थितियां परेशान न करें..
उसी क्षण में तो सुकून है..।

मगर ये इतना आसान कंहा है..
लोग सदियों से ये जानते है..
विरला ही कोई होता है..
जो सुकुन से जीता है..
नही तो सारा जंहा व्यर्थ ही जिंदगी गवांता है..।।

मैं सुकून ढूंढने चला था..
बिना ये जाने..
सुकून आखिर है क्या..??
समुंद्र की लहरों ने बताया..
सूरज का तेज ने बताया..
चंद्रमा की शीतलता ने बताया..
चिड़ियों की चहचहाट ने बताया..
फूलों की खुश्बू ने बताया..
अपने कर्तव्य में तल्लीन हो जाना ही..
सुकून को पा जाना है..।

मैं सुकून ढूंढने चला था..
बिना ये जाने..
सुकून आखिर है क्या..??


बुधवार, 29 अप्रैल 2026

"माँ"..

बेइंतिहा प्यार करो उन्हें..
जो बिना शर्त आपसे प्यार करते है..।

इस जंहा में एक ही तो है..
जो बेइंतिहा और बिना शर्त..
आपसे प्यार करती है..
और वो.. 
"माँ" है..।

मगर इसका अहसास ही नही होता..
क्योंकि "माँ"..
बिना शर्त जो प्यार करती है..।
बाकी और कोई नही है..
इस जंहा में..
जो बिना शर्त प्यार करती हो..

शंकराचार्य कहते है..
"कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता  भवति..।"






यू ही भटक रहा हूँ..

यू ही जाहिलों की तरह भटक रहा हूँ..
जाहिलों के आंगन में..
कब मुक्ति मिलेगी..
इन जाहिलों और इस जाहिलों के आंगन से..।।

जिन्हें में जाहिल कह रहा हूँ..
वो तो जाहिल है ही नही..
मैं ही जाहिल हूँ..
जो सबको जाहिल समझ रहा हूँ..।





उसने कहा..

उसने कहा..
मैं थक गया हूँ..
थोड़ी छावं चाहिए..

मैंने कहा..
आपने पेड़ ही कंहा लगाए..
जिसके छावं मैं बैठ सको...।

वो असहाय होकर आसमां निघारने लगा..
मालूम नही क्या जादू किया उसने..
देखते ही देखते..
पूरा आसमाँ काला होने लगा..
मानों बादलों का झुंड हमारे ही और आ रहा हो..।



ये क्या..
ये तो धुंए का अंबार था..।

शायद कंही दूर जंगलों में आग लगी है..
या फिर कंक्रीट के जंगलों के लिए..
जंगल मे आग लगाई गई है..??

सोमवार, 27 अप्रैल 2026

हम असफल क्यों होते है..

आपने कभी सोचा है..
कुछ लोग सफल और असंख्य लोग असफल क्यों होते है..??
आपको जानकर हैरानी होगी कि कुछ लोग जो सफल हुए है..उन्हें भी सफलता की उम्मीद नही थी..
मगर वो सफल हो गए..
आखिर कैसे..??
क्योंकि उन्हें पता था कि,जाना कंहा है..।


सफलता के कई कारण हो सकते है..
मगर असफलता के कुछ मूलभूत कारण ही होते है..।
अगर हम उन कारणों को ढूंढ ले तो हम असफलता से छुटकारा पा सकते है..।
मगर क्या ये आसान है..
बिल्कुल नही,क्योंकि हम वो कारण सदियों से जानते है..
मगर उसपे कुछ ही लोग अमल कर पाते है..
और जो अमल कर पाते है,वो नया कीर्तिमान रच जाते है..।।

असफलता के कुछ मूलभत कारण है..

अपने लक्ष्य का पता ना होना..

लक्ष्य का पता होने के बाबजूद उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वो सब नही करना जो करना अतिआवश्यक है..(बाकी सबकुछ करते है,कुछ नही छोड़ते)

अपने लक्ष्य को पाने के बारे में न सोचना..(बाकी सबकुछ सोचते है,लक्ष्य प्राप्त न हुआ तो क्या होगा,लक्ष्य प्राप्ति के बाद क्या-क्या होगा..न जाने और क्या-क्या)

अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए सर्वस्व त्याग के लिए, तैयार न होना..(हम सिर्फ क्षणभंगुर सुख को पाना चाहते है,भले ही उसके लिए अपने लक्ष्य से समझौता ही क्यों न करना पड़े)


अगर सच कहूं तो हमसब जानबूझकर असफल होते है..क्योंकि ये मूलभूत बातें हमें सदियों से पता है,और बचपन से इसके बारे में सिखाया जाता है..
मगर हम इसपर अमल नही कर पाते..और हम इन असफलता का दोष दूसरों पे मढ़ते है..हममें इतनी भी हिम्मत नही होती कि हम अपनी असफलता को स्वीकार करें..।
 जब हम अपनी असफलता को स्वीकारते है,तब अपने लिए सफलता का नया द्वार खोलते है..।।
क्योंकि हम स्वयं ही अपने असफलता के लिए जिम्मेदार है..।

नदी की धारा..