अजपा जप
साँस 'सो' की ध्वनि के साथ अंदर एवं 'हं' ध्वनि के साथ बाहर आती है, तो इसे 'अजपा गायत्री' कहते हैं।
जब नामोच्चारण मुख से हो तो - "जप"
जब नामोच्चारण हृदय से हो तो - "अजपा"
अजपा के द्वारा समाधि का प्रत्यक्ष अनुभव किया जा सकता है।
अजपा क्रियायोग का एक अंग है।
(तप, स्वाध्याय, ईश्वर प्रणिधान क्रियायोग है - पतंजलि)
•अजपा की साधना के लिए गुरु की आवश्यकता नहीं होता..
"स्वाध्याय" क्या है..? अपने कार्यों के प्रति निरंतर जागरूकता ही स्वाध्याय है।
•अजपा करते समय आज्ञा चक्र या अनाहत चक्र या शरीर के अन्य केंद्रों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए..।
●अजपा करते वक़्त 3 महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान देना चाहिए..
1. गहरी श्वसन क्रिया 2.विश्रांति 3.पूर्ण जागरूकता पर
"श्वसन प्रक्रिया में मंत्रों का योग ही 'अजपा' है।"
अजपा में इच्छित रूप से लंबी और गहरी श्वास लेना से
आयु बढ़ती है..😊
दाहिनी — पिंगला — सूर्य नाड़ी
बांई — इड़ा — चंद्र नाड़ी
इन दोनों का क्रमिक प्रवाह चेतना से अलग रखती है।
●जब सुषुम्ना का प्रवाह हो तो ध्यान करना चाहिए।
●श्वास-प्रश्वास की दर प्रति मिनट 15 बार होना चाहिए।
● अजपा करने की प्रक्रिया:
सुखद आसन में बैठकर शरीर को शिथिल रखें और गहरी साँस ले..
भीतर लेने वाली साँस के साथ "सो" और बाहर आने वाली साँस के साथ "हं" का योग करना चाहिए और इस दौरान कोई मानसिक विराम नहीं लेना चाहिए..।और कुछ समय के बाद शून्य में प्रवेश एवं भ्रूमध्य में चेतना को ले जाकर आज्ञा चक्र या अनाहत चक्र पर मन को एकाग्र करना चाहिए..और कुछ समय बाद फिर अनाहत का जाप करना चाहिए।
अजपा का अभ्यास बैठकर या लेटकर भी किया जा सकता है।
महत्वपूर्ण शब्द:
पूरक — सांस लेना
रेचक — श्वास छोड़ना
कुंभक — सांस रोकना
●ध्यान के 4 सोपान हैं-
•विश्रांतिकरण,जागरूकता,एक हो जाना और स्वयं को भूल जाना..।
◆ध्यान की प्रक्रिया में एकाग्रता नहीं वरन जागरूकता का विशेष महत्त्व है।
अजपा अभ्यास में प्रमुख बातें-
लययुक्त श्वसन, कल्पना, पूर्ण अविरल सजगता, पूर्ण शिथिलीकरण तथा समस्त शरीर के प्रति चैतन्यता।
चिदाकाश धारणा
चिदाकाश :- चित् + आकाश (चेतना का आकाश)
चित - मन, बुद्धि, अहंकार (अंत:करण)
चित् :- चेतना का पर्यायवाची।
स्मृतियों में 3 प्रकार के आकाश का वर्णन:
प्राकृतिक (सामान्य) आकाश
चित्ताकाश (मन का आकाश)
चिदाकाश (बुद्धि का आकाश)
प्रथम दो की अपेक्षा यह सूक्ष्म होता है,इसका संबंध शुद्ध चेतना से है।
योग उपनिषद में 5 प्रकार के आकाश की चर्चा:
आकाश :- प्राकृतिक आकाश, जिसे देख सकते हैं।
पराकाश :- अंदर एवं बाहर के अंधकार का संकेत करता है।
महाकाश :- अंदर एवं बाहर अनुभवगम्य अग्नि की सी चमक का प्रतिनिधित्व करता है।
तत्वाकाश :- अंदर की आत्मा की अनुभूति का दिग्दर्शन कराता है।
सूर्याकाश :- शुद्ध चेतना को प्रदर्शित करता है जो हजार सूर्यों की भांति तेजोमय है।
धारणा :- मानसिक शक्तियों को किसी विशेष क्षेत्र या वस्तु विशेष पर केंद्रित करना ही "धारणा" है।
●ध्यान के लिए दो आसन सर्वोत्तम है-
पद्मासन और सिद्धासन (स्वस्तिकासन)
●चेतना क्या है?
हमारे अंदर की ज्ञान शक्ति है,जिसे स्वयं का और दूसरे का ज्ञान रहता है।सूक्ष्म रूप से चेतना सर्वव्याप्त है।चेतना का स्वरूप इंद्रियों के माध्यम से प्रकट होता है।चेतना अस्तित्व का एक बुनियादी तत्व है। वह अपने स्वरूप को किसी भी माध्यम से किसी भी रूप में प्रकट कर सकती है।
रूप या माध्यम की सीमा चेतना की सीमा नहीं है, सिर्फ चेतना की अभिव्यक्ति ही सीमा है।
● समाधि' का अर्थ..?
चित्त का समाहित हो जाना और इंद्रियों के अनुभव से ऊपर उठ जाना ही समाधि है।
कष्ट का मूल कारण है..?? आसक्ति(कर्म के प्रति, विचार के प्रति, आशा और मान्यताओं के प्रति)।
अजपा अभ्यास कितनी बार करना चाहिए..??
3 बार करना चाहिए
सुबह 4-6 के बीच: बैठकर
शाम में आराम कुर्सी या आरामदायक पोस्चर में बैठकर और
सोते वक्त सोते हुए।
अजपा जप से क्या लाभ होता है..??
अजपा हरेक रोगों की रामबाण दवा है।रोग के कई कारणों में एक कारण 'अतृप्त इच्छा' है, जिसका इलाज किसी के पास नहीं है, इसे अजपा से दूर कर सकते हैं।
"मनुष्य दवाइयों से नहीं, बल्कि प्राणशक्ति के प्रवाह से ठीक होता है। अजपा के द्वारा प्राणशक्ति अविरल और सभी अंगों में प्रवाहित होती है।"
अजपा जप द्वारा मानसिक क्लेश का निवारण:
सभी व्याधियों (problems) का दो ही कारण है: — राग और द्वेष।
इसके कारण ही मानसिक क्लेश उत्पन्न होते हैं।
इसे नियंत्रित करना न ही संभव है और न ही आसान।
मगर अजपा के द्वारा मानसिक क्लेशों को दूर किया जा सकता है।
अजपा जप आधुनिक समय मे सबके लिए सहज है..इसके लिए न ही गुरु की आवश्यकता है और न ही किसी कर्मकांड की..मगर अजपा के द्वारा हम अपने जीवन के हरेक समस्याओं से छुटकारा पा सकते है..।
ये जितना सरल है,उतना ही प्रभावी है..इसीलिए अजपा को अपने जीवन मे अपनाकर अपने जीवन को सरल और सहज बनाये..।।






