यू ही कोई मुँह मोड़ के जाता है क्या..।
क्या करें..
जाना तो सब को है..।
जो रुक गए..
वो वहीं रुक गए..।
जो निकल गए..
वो बुद्ध और महावीर बन गए..।
निकलना तो सब को है..
मगर जो "क्यों" के लिए निकलते है..
वो नए कीर्तिमान रचते है..
और नए मार्ग प्रशस्त करते है..।
वैसे तो हर क्षण..
लोग निकल रहे है..
व्यर्थ की जिन्दगीं गवां कर..।

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