मंगलवार, 14 अप्रैल 2026

अगर तुम ठान लो..

अगर तुम ठान लो कि जीना है..
तो तुम्हें, जीने से कौन रोक सकता है..।
क्योंकि..
मैंने सूखे हुए पेड़ो से कलगी देते हुए देखा है..
मैंने मुरझाए हुए चेहरे पे मुस्कान देखा है..।
मैंने असंभव को संभव होते हुए देखा है..।।

आखिर कब तक ये सब सिर्फ मैं देखता रहूंगा..
इनसब से हौंसला लेकर..
अपने सपनों को साकार करूँगा..।।

अगर तुम ठान लो कि जीना है..
तो तुम्हें, जीने से कौन रोक सकता है..।



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