गुरुवार, 26 मार्च 2026

प्यार की पांति..

मुझे लगा मैं ही हूँ ,
तुझे चाहने वाला..।
मगर में नादान समझ नही पाया..
मुझ जैसे कई है तुझे चाहने वाले..।।

हर बार मैं ही तेरे करीब जाता हूँ..
मुझे याद नही..
तुम आखरी बार करीब कब आई..
मैं तुझसे जुड़कर पूर्ण होना चाहता हूँ..
मगर तुम तो पहले से ही पूर्ण हो..।।

मुझे लगा मैं ही हूँ ,
तुझे चाहने वाला..।

सोचता हूँ तुमसे दूरियां बनाऊ..
मगर मैं,तुम्हारे मकड़ जाल में फंस गया हूँ..
तुमसे दूर जाकर भी..
तुमसे दूर नही जा पाऊंगा..
मगर किसी किनारे पे रहकर..
तुमसे दूरियां बना के रखूंगा..।

किसी दिन तुम उस किनारे पे आओगी..
जिस किनारे पे रहकर मैं..तुम्हे याद कर रहा होऊंगा..।।
तुम धीरे से मेरे कंधे पे हाथ रखोगी..
और मैं कंही खो जाऊंगा..।।

मुझे लगा मैं ही हूँ ,
तुझे चाहने वाला..।



​माँ महागौरी: पवित्रता और शांति की देवी

​'महा' का अर्थ है अत्यंत और 'गौरी' का अर्थ है श्वेत (सफेद)। कठिन तपस्या के कारण जब इनका शरीर काला पड़ गया था, तब भगवान शिव ने गंगाजल से इन्हें स्नान कराया, जिससे इनका वर्ण पूर्णतः गोरा हो गया। इसी कारण इन्हें 'महागौरी' कहा जाता है।



स्वरूप और प्रतीकवाद

  • श्वेत वर्ण: माँ का रंग पूर्णतः गोरा है और वे श्वेत वस्त्र ही धारण करती हैं। यह 'परम शुद्धि' (Pure Consciousness) का प्रतीक है।
  • चतुर्भुज: इनके चार हाथ हैं। ऊपर वाले दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले में त्रिशूल है। ऊपर वाले बाएं हाथ में डमरू और नीचे वाला हाथ वरमुद्रा में है।
  • वाहन: माँ महागौरी का वाहन वृषभ (बैल) है।

​◆योग विज्ञान: सोम चक्र (Soma Chakra)

महा अष्टमी पर साधक का मन सोम चक्र (सहस्रार के भीतर का एक सूक्ष्म केंद्र) की ओर बढ़ता है।

  • भाव: आज का दिन 'चित्त की शुद्धि' का है। जैसे माँ ने गंगाजल से स्नान कर कांति प्राप्त की, वैसे ही साधक प्राणायाम और ध्यान के जल से अपने अंतर्मन की मलिनता को धोता है।
  • प्रभाव: इस दिन साधना करने से संचित पापों का नाश होता है और बुद्धि अत्यंत सात्विक हो जाती है।


श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।

महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥ 

अर्थ: सफेद बैल पर सवार, श्वेत वस्त्र धारण करने वाली और महादेव को आनंद देने वाली पवित्र माँ महागौरी मेरा कल्याण करें।

बुधवार, 25 मार्च 2026

​माँ कालरात्रि: अंधकार का नाश करने वाली शक्ति

'काल' का अर्थ है समय और मृत्यु, और 'रात्रि' का अर्थ है अज्ञान का अंधकार। माँ कालरात्रि वह शक्ति हैं जो समय के चक्र को नियंत्रित करती हैं और अज्ञानता व दुष्टों का विनाश करती हैं।



​◆ स्वरूप और प्रतीकवाद

  • रंग: इनका शरीर रात के अंधकार की तरह काला है। इनके बिखरे हुए बाल और गले में बिजली की तरह चमकने वाली माला है।
  • त्रिनेत्र: माँ के तीन नेत्र ब्रह्मांड की तरह गोल हैं, जिनसे अग्नि की किरणें निकलती हैं।
  • चार भुजाएँ: इनके दाहिने हाथ 'अभय' और 'वरद' मुद्रा में हैं, जो भक्तों को सुरक्षा और वरदान देते हैं। बाएं हाथों में 'खड्ग' और 'कांटेदार अस्त्र' हैं।
  • वाहन: माँ कालरात्रि गर्दभ (गधा) पर सवार हैं।
  •  इनका रूप भयानक भले ही हो, लेकिन ये हमेशा शुभ फल देने वाली हैं, इसलिए इनका एक नाम 'शुभंकरी' भी है


    ​◆ योग विज्ञान: सहस्रार चक्र (Sahasrara Chakra)

    महा सप्तमी के दिन साधक का मन सहस्रार चक्र (ब्रह्मरंध्र) के पास पहुँचने की तैयारी में होता है।

    • स्थान: सिर का सबसे ऊपरी हिस्सा।
    • प्रभाव: माँ कालरात्रि की कृपा से साधक के भीतर का सारा 'भय' समाप्त हो जाता है। यह ब्रह्मांड की शक्तियों से जुड़ने का द्वार है।
    • साधकों के लिए: यदि आप मानसिक तनाव या किसी अज्ञात भय से जूझ रहे हैं, तो आज का ध्यान आपको परम शांति और साहस प्रदान करेगा।


    ​माँ कालरात्रि की वंदना के लिए इस श्लोक का पाठ करें:

    एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।

    लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥

    वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा।

    वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

मंगलवार, 24 मार्च 2026

नजरिया : प्रकृति को समझिए

आप जब भी खुद को कमजोर,असहाय,बीमार और खुद को जर्जर महसूस करें तो अपने आपको भाग्यवान समझें..।।
क्योंकि प्रकृति आपको अपने करीब बुला रही होती है।।
ये एक रहस्य है..
इसे सब समझ नही पाते...।।



हम तो अक्सरहाँ इस परिस्थिति में,उस प्रकृति के ऊपर दोषारोपण ही करते है..
है भगवान ये क्या किया..मेरे साथ ही क्यों किया..??

कभी आपने सोचा है..
आपके ही साथ बुरा क्यों हुआ..??

सच कहूं तो हमारे जिंदगी में अच्छा और बुरा कुछ नही होता..
बल्कि हमें जो अच्छा लगता है,वो अच्छा होता है..
जो बुरा लगता है,वो बुरा होता है..।।

मगर प्रकृति कभी-कभी आपको असहाय महसूस करवाकर अपने करीब बुलाती है..मगर कुछ ही लोग होते है,जो उनके करीब जा पाते है...और उनके मौन को सुन पाते है..।।
ऐसे कुछ ही भाग्यशाली लोग होते है..
जो प्रकृति के इस इशारे को समझ पाते है..।।

भविष्य में या फिर वर्तमान में जब भी आप बुरी परिस्थितियों से गुजरे तो समझ लीजिए..प्रकृति आपको अपने करीब बुला रही है..।।
उनके करीब जाइये..
उनके मौन को समझिए..
वो आपको रूपांतरित कर देंगे..।।
आप-आप नही बल्कि आप कुछ और हो जाएंगे..।।




"माँ कात्यायनी"

ऋषि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था, इसीलिए इनका नाम 'कात्यायनी' पड़ाइन्हें महिषासुर का वध करने वाली 'युद्ध की देवी' भी माना जाता है।


​◆ स्वरूप और प्रतीकवाद

  • चतुर्भुज रूप: माँ की चार भुजाएँ हैं। बाईं ओर के ऊपरी हाथ में तलवार और नीचे वाले हाथ में खड्ग है। दाईं ओर के हाथ अभय और वरद मुद्रा में हैं।
  • वाहन: माँ कात्यायनी का वाहन सिंह है।
  • ऊर्जा: इनका स्वरूप अत्यंत भव्य और चमकीला है, जो बुराई के विनाश और धर्म की स्थापना का प्रतीक है।

​◆ योग विज्ञान: आज्ञा चक्र (Ajna Chakra)

​एक योग साधक के लिए आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि आज चेतना आज्ञा चक्र (तीसरी आँख) में स्थित होती है।

  • स्थान: दोनों भौहों के बीच (Eyebrow Center)।
  • महत्व: यह चक्र अंतर्ज्ञान (Intuition), एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता का केंद्र है। माँ कात्यायनी की कृपा से साधक को आत्म-साक्षात्कार की शक्ति प्राप्त होती है।


​माँ कात्यायनी की वंदना के लिए इस श्लोक का पाठ करना चाहिए-

चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।

कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥

अर्थ: जिनके हाथों में चमकती हुई चंद्रहास तलवार है और जो श्रेष्ठ सिंह पर सवार हैं, वे दानवों का विनाश करने वाली माँ कात्यायनी मेरा कल्याण करें।

सोमवार, 23 मार्च 2026

​माँ स्कंदमाता: वात्सल्य और ज्ञान की देवी


भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र 'कार्तिकेय' का एक नाम 'स्कंद' भी है। स्कंद की माता होने के कारण ही देवी के इस स्वरूप को 'स्कंदमाता' कहा जाता है।


​◆ स्वरूप और प्रतीकवाद

  • चतुर्भुज रूप: माँ की चार भुजाएँ हैं। अपनी ऊपरी दो भुजाओं में वे कमल का पुष्प धारण करती हैं।
  • गोद में स्कंद: माँ अपनी एक भुजा से गोद में बाल कार्तिकेय (स्कंद) को पकड़े हुए हैं। यह स्वरूप ममता और वात्सल्य का प्रतीक है।
  • वरमुद्रा: इनका एक हाथ वरमुद्रा में रहता है, जो भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने का संकेत है।
  • पद्मासना: चूँकि माँ कमल के आसन पर विराजमान होती हैं, इसलिए इन्हें 'पद्मासना देवी' भी कहा जाता है। इनका वाहन सिंह है।

​◆ योग विज्ञान: विशुद्ध चक्र (Vishuddha Chakra)

आज साधक की चेतना विशुद्ध चक्र में स्थित होती है।

  • स्थान: कंठ (गले) के मध्य में।
  • तत्व: आकाश (Space Element)।
  • प्रभाव: यह चक्र संचार, अभिव्यक्ति और रचनात्मकता का केंद्र है। माँ स्कंदमाता की कृपा से साधक की वाणी में माधुर्य आता है और वह सत्य को स्पष्ट रूप से व्यक्त कर पाता है।

सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।

शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥

23 मार्च..क्यों है खास..।

इतिहास के कुछ ऐसे पन्ने है,जो कभी पुराने नही हो सकते..
और न ही वो मिट सकते है..चाहे इतिहास के वो पन्ने फाड़ ही क्यों न दिया जाय..मगर वो कंही न कंही अपना जगह बना ही लेंगे..।।
आप उसे इतिहास से हटाओगे तो वो साहित्य में शामिल हो जाएगा..
अगर उसे साहित्य से भी हटाओगे तो वो लोगों के जुबां पे आ जायेगा..।।

आज की तारीख़ यानी 23 मार्च उन्हीं लोगों को समर्पित है..
जिस उम्र में हम कैरियर और अपने भविष्य के बारे में सोचते है..
उस उम्र में वो तीन, वो मुकाम हासिल कर लिए..
जिस मुकाम पे कोई पहुंच नही सकता..।।

पता है वो 3 कौन थे..??
आज ही के दिन उन्हें उन गुनाह के लिए फांसी दे दी गई,जो गुनाह अंग्रेजी हुकूमत साबित नही कर पाया..(लाहौर षड्यंत्र)
वो इतने भयभीत थे कि उन्हें तय तारीख से एक दिन पहले चुपके से फांसी दे दी गई..।।
और वो 3 भारत माता की जय..और इंकलाब जिंदाबाद का नारा लगाते-लगाते शहीद हो गए..।।

वो 3 कौन थे..??

शिवराम राजगुरु,सुखदेव थापर और तीसरा भगत सिंह थे..।।

भारत के चौराहों पे गांधी,अंबेडकर, बोस,के बाद सर्वाधिक अगर किसी की मूर्ति लगी है तो वो भगत सिंह की..।।




आज की युवा इन्हें थोड़ा बहुत तो जानती है..
मगर सच कहूं तो बहुत बड़ी आबादी इन्हें नही जानती है..।

इनके क्रांतिकारी कार्यों से कोई अवगत नही है..??
जब क्रूर,अमानुष,हिंसक,नीच अंग्रेज के नजरों से सब बचे रहते थे,उस समय इन क्रांतिकारियों ने अंग्रेजों को नाको दम कर दिया था..
अंग्रेज इन क्रांतिकारियों से इतने भयभीत थे कि इन्हें किसी तरह अपने रास्ते से हटाना चाहते थे..।।

गांधी जी ने अगर लोगों को जागरूक किया..तो इन क्रांतिकारियों ने लोगों को अपने अधिकार के लिए लड़ना सिखाया..।।
मगर आज ये क्रांतिकारी कंही धूमिल हो गए है..।।

आज भारत को फिर से क्रांतिकारियों की जरूरत है..
जो भ्रष्टाचार के खिलाफ,अन्याय के खिलाफ, अधर्म के खिलाफ आवाज उठा सके..।।

मगर अफ़सोस आज के युवा तो खुद अघोषित गुलाम हो चुके है..।
आज उनके पास समय नही है..
जबकि सारा काम ऑनलाइन हो जा रहा है..।
हमारे युवा रील देखने मे या फिर सोशल मीडिया में व्यस्त है..।।
मगर खुद को शारीरिक,मानसिक,आध्यात्मिक रूप से कितने युवा खुद को मजबूत बना रहे है..??

अगर इन क्रांतिकारियों को जानना हो तो कुछ पुस्तक पढ़िए...

भगत सिंह ने अपने पुस्तक "why I am an atheist?" में लिखते है - 
"बम और पिस्तौल क्रांति नही लाते,क्रांति की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है.."

"आलोचना और स्वतंत्र विचार एक क्रांतिकारी के दो अनिवार्य गुण हैं..।"

"क्रांति से हमारा तात्पर्य अंततः एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था की स्थापना से है जिसे इस प्रकार के घातक खतरों का सामना न करना पड़े और जिसमें सर्वहारा वर्ग (श्रमिक वर्ग) का प्रभुत्व हो।"

भगत सिंह को जानने के लिए इनकी पुस्तक "why I am an atheist?" पढ़ें..आप सोचने पे विवश हो जाएंगे..।

 


सुखदेव थापर
ये हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) के मुख्य रणनीतिकार थे। उन्हें दल का 'मस्तिष्क' माना जाता था..।

इनके अनुसार-
 ​"क्रांति केवल बम और पिस्तौल से नहीं आती, बल्कि एक अनुशासित संगठन और स्पष्ट विचारधारा से आती है।"

"हमें फांसी की सजा का स्वागत करना चाहिए, क्योंकि हमारी मौत सोई हुई जनता को जगाने का काम करेगी। एक जीवित क्रांतिकारी से कहीं अधिक शक्तिशाली एक मृत (शहीद) क्रांतिकारी होता है।"

सुखदेव जी ने गांधी जी को 7अक्टूबर 1930 को पत्र लिखा था,तबतक इन्हें फांसी की सजा सुना दिया गया था. उस पत्र के कुछ प्रमुख अंश-

क्रांतिकारियों को पथभ्रष्ट या हिंसक कहने पर गांधीजी से कहते है-

"आप हमें जनता के सामने अपराधी की तरह पेश करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि हम जो कर रहे हैं, वह देश के गौरव और स्वाभिमान के लिए है..?"

गांधी इरविन समझौता पर वार्ता के समय सवाल करते है-

 ​"यदि आप सरकार के साथ समझौता कर रहे हैं, तो याद रखें कि केवल कुछ कैदियों की रिहाई से क्रांति समाप्त नहीं होगी। जब तक पूर्ण स्वतंत्रता और शोषण का अंत नहीं होता, तब तक यह आग जलती रहेगी।"

"हम मौत से नहीं डरते। हम तो चाहते हैं कि हमारी फांसी देश के युवाओं के दिलों में आजादी की मशाल जला दे। क्या आपकी अहिंसा इस बलिदान की शक्ति को समझ पाएगी?"

सुखदेव इस बात के सख्त खिलाफ थे कि गांधीजी उनकी फांसी रुकवाने के लिए अंग्रेजों से 'दया' की भीख मांगें। उन्होंने गौरव के साथ कहा कि वे शहीद होना चाहते हैं ताकि उनका रक्त देश के काम आए। 

◆राजगुरु..

जहाँ भगत सिंह 'विचारक' और सुखदेव 'रणनीतिकार' थे, वहीं राजगुरु दल के सबसे घातक 'निशानेबाज' माने जाते थे।

राजगुरु महाराष्ट्र से थे और छत्रपति शिवाजी महाराज उनके सबसे बड़े आदर्श थे। वे अक्सर कहा करते थे...

"गुलामी की जंजीरों में जकड़े रहकर सौ साल जीने से बेहतर है कि,स्वतंत्रता की वेदी पर एक दिन शेर की तरह शहीद हो जाना.."

 फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद, जब जेल में साथियों के बीच चर्चा होती थी, तब राजगुरु ने मुस्कुराते हुए कहा था..

"फांसी का फंदा मेरे लिए फूलों की माला जैसा है। मुझे गर्व है कि मैं अपने देश के काम आ रहा हूँ और भगत सिंह व सुखदेव जैसे शेरों के साथ शहीद हो रहा हूँ।"

 राजगुरु संस्कृत के विद्वान थे। वे अक्सर जेल में कठिन संस्कृत श्लोकों का पाठ करते थे। उनका मानना था कि भारतीय संस्कृति और शास्त्र हमें अन्याय के खिलाफ लड़ना सिखाते हैं..।।

 


रविवार, 22 मार्च 2026

Yoga for digestive system

पाचन तंत्र हमारे शरीर का इंजन है। योग के आसन और प्राणायाम 'पेरिस्टालिसिस' (Peristalsis - आंतों की गति) को विनियमित करते हैं और पोषक तत्वों के अवशोषण (Absorption) में सुधार करते हैं।

​◆ मयूरासन (Peacock Pose) और रक्त का अंतःप्रवाह

  • वैज्ञानिक साक्ष्य: यह आसन कोहनी के माध्यम से उदर महाधमनी (Abdominal Aorta) पर अस्थायी दबाव डालता है। जब आसन छोड़ा जाता है, तो पाचन अंगों में ताजे ऑक्सीजन युक्त रक्त की बाढ़ आ जाती है।
  • शारीरिक प्रभाव: यह लिवर और अग्न्याशय (Pancreas) को पुनर्जीवित करता है और पुरानी कब्ज को दूर करने में वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है।

​◆ पवनमुक्तासन (Wind-Relieving Pose) और आंतों की गतिशीलता

• वैज्ञानिक साक्ष्य: पेट पर पड़ने वाला शारीरिक दबाव बड़ी आंत (Large Intestine) में फंसी गैस को बाहर निकालने में मदद करता है और मल त्याग की प्रक्रिया को सुचारू बनाता है।

• शारीरिक प्रभाव: यह 'इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम' (IBS) के लक्षणों को कम करने और पेट फूलने (Bloating) की समस्या में राहत देता है

अग्निसार क्रिया और चयापचय (Metabolism)

  • वैज्ञानिक साक्ष्य: पेट की मांसपेशियों का तेजी से संकुचन और विस्तार 'पैरासिम्पेथेटिक नर्व' को उत्तेजित करता है। शोध बताते हैं कि यह बेसल मेटाबॉलिक रेट (BMR) को बढ़ाता है
  • शारीरिक प्रभाव: यह सुस्त पाचन को सक्रिय करता है और शरीर की अतिरिक्त चर्बी को कम करने में मदद करता है।

​◆ वज्रासन और वेगस नर्व (Vagus Nerve) का सक्रियण

  • वैज्ञानिक साक्ष्य: भोजन के बाद वज्रासन में बैठने से पैरों की ओर रक्त का प्रवाह कम होकर पाचन क्षेत्र की ओर बढ़ जाता है। यह वेगस नर्व को संकेत देता है कि पाचन प्रक्रिया शुरू की जाए।
  • शारीरिक प्रभाव: यह भोजन के बाद होने वाली भारीपन की भावना को कम करता है और एसिड रिफ्लेक्स (Acid Reflux) को रोकता है।


​माँ कुष्मांडा: सृष्टि की आदि-शक्ति

माँ कुष्मांडा: सृष्टि की आदि-शक्ति

​'कु' का अर्थ है छोटा, 'ष्म' का अर्थ है ऊर्जा और 'अंडा' का अर्थ है ब्रह्मांड। माना जाता है कि जब चारों ओर अंधेरा था, तब माँ ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी।

​◆ स्वरूप और प्रतीकवाद

  • अष्टभुजा देवी: माँ की आठ भुजाएँ हैं, इसलिए इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। इनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृत-कलश, चक्र और गदा है।

  • अष्टसिद्धि और नवनिधि: इनके आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है।

  • वाहन: माँ कुष्मांडा सिंह पर सवार हैं, जो साहस का प्रतीक है।

​◆ योग विज्ञान: अनाहत चक्र (Anahata Chakra)

​आज साधक का मन अनाहत चक्र (हृदय चक्र) में स्थित होता है।

  • स्थान: हृदय के मध्य में।
  • तत्व: वायु (Air Element)।
  • प्रभाव: इस चक्र के जाग्रत होने से व्यक्ति के भीतर प्रेम, करुणा और क्षमा का भाव जागता है। यह वह केंद्र है जहाँ भौतिक और आध्यात्मिक ऊर्जाएँ मिलती हैं।

​◆ वैज्ञानिक पक्ष: जीवनी शक्ति (Vital Energy)

​माँ कुष्मांडा का निवास 'सूर्य मंडल' के भीतर माना जाता है। विज्ञान की दृष्टि से देखें तो सूर्य ही इस पृथ्वी पर ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। माँ कुष्मांडा इसी जीवनी शक्ति (Pranic Energy) का प्रतिनिधित्व करती हैं जो हमारे स्वास्थ्य और बुद्धि को तेज करती हैं।

"सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।

दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥"


"बिहार दिवस": हां हम बिहारी है..

हां हम बिहारी है..

और बिहारी होने पे गुमान है..

क्योंकि मेरे कारण ही..

भारत कभी विश्वगुरु और सोने की चिड़िया था..

और मेरे कारण ही भारत फिर से सोने की चिड़िया और विश्व गुरु बनेगा..

हां हम बिहारी है..।।



मेरे ही गोद में..

जानकी,बुद्ध, महावीर,चंद्रगुप्त, चाणक्य, अशोक, समुंद्रगुप्त,आर्यभट, वराहमिहिर,विद्यापति,वाल्मीकि,गुरु गोविंद,शेर शाह,कुँवर सिंह,डॉ राजेन्द्र प्रसाद, रामधारी सिंह दिनकर, जयप्रकाश,बिस्मिल्लाह खां इत्यादि पले है..

कितना नाम गिनाऊँ..

किस-किस का काम गिनाऊँ..।

इस सबने मिलकर भारत को आयाम दिया..

विश्व में इक पहचान दिया..।।


मगर इस भारत ने..

आजादी के बाद इसको क्या दिया..??

इसके संसाधन का शोषण करके..

हरियाणा,गुजरात,महाराष्ट्र इत्यादि राज्यों में कंपनी और उद्योग का निर्माण किया..।

मजबूरन यंहा के लोगों को..

पेट भरने के लिए..

उस भारत में प्रस्थान किया..

कभी जिनके पूर्वजों ने..

भारत को विश्व का शिरमोर बनाया..।

आज उनके ही संतानों को..

पूरे भारत ने "बिहारी" कह कर सम्मान किया..।।

हां हम बिहारी है..।


भारत का शायद ही कोई कोना ऐसा हो.

जंहा हम बिहारी अपने पसीनों से उस क्षेत्र को न सींचा हो..

हां हम बिहारी है..।

आज भारत जिस संसाधन और जिन-जिन चीजों पे इतरा रहा..

उन सबको बिहारी ने अपने पसीनों से सींचा है..।

हां हम बिहारी है..।।


शनिवार, 21 मार्च 2026

संस्मरण:बचपन,जाति, धर्म

जब मैं छोटा बच्चा था..
तो मुझे जात-पात का भान नही था..
फिर जब थोड़ा बड़ा हुआ तो मुझे,
अपने जात का भान हुआ..
फिर जब थोड़ा और बड़ा हुआ..तो
ईद के बहाने मुसलमानों से मुलाकात हुआ..
थोड़ा और बड़ा हुआ तो..
जाति का भान हुआ..
और एक नए धर्म इस्लाम का ज्ञान हुआ..।
फिर जब अपने गाँव से अपने शहर पढ़ने गया..तो
जाति को गहरा करने वाला आरक्षण से मुलाकात हुआ..।
फिर कुछ महीनों सालों बाद 
क्रिसमस के दिन ईसाई धर्म का ज्ञात हुआ..।



अखबार पलटते-पलटते..
नेताओं के भाषणों को सुनते-सुनते..
मेरे अंदर भी, जाति,धर्म गहरा तक समा गया..
न जाने मैं कब समाजवादी,मार्क्सवादी..फिर पूंजीवादी बन गया पता ही नही चला..
गिरगिट की तरह रंग-बदलता रहा..।।

मगर वास्तविकता का भान तब चला..
जब दुनिया को देखना शुरू किया..
सच कहूं तो..
जो देश चलाते है..
न उनका कोई धर्म है,
न ही उनका कोई जाति है..
वो अपने अवसर के लिए समय-समय पर,
अपना जाति-धर्म बदलते रहते है।।

सच कहूं..
तो जाति धर्म के बोझ को वो ढ़ो रहे है..
जो दूसरों पर आश्रित है..
जो आर्थिक रूप से संपन्न है,
उनके लिए जाति-धर्म मायने नही रखता..।

हमारा एक ही जाति होना चाहिए..
वो सफलता..
और हमारा एक ही धर्म होना चाहिए..
अपने सफलता को ताउम्र बरकरार रखना..।।


"माँ चंद्रघंटा" निर्भयता, ध्वनि विज्ञान और मणिपूर चक्र का रहस्य

"माँ चंद्रघंटा"निर्भयता, ध्वनि विज्ञान और मणिपूर चक्र का रहस्य

नवरात्रि के तीसरे दिन हम माँ चंद्रघंटा की उपासना करते हैं। इनका स्वरूप जितना सौम्य है, उतना ही वीरता से भरा हुआ है। एक साधक के लिए यह दिन अपनी आंतरिक शक्ति (Inner Strength) को पहचानने का है।



​◆ स्वरूप - शांति और युद्ध का अद्भुत संतुलन

​माँ चंद्रघंटा का वाहन सिंह है और उनके दस हाथों में अस्त्र-शस्त्र सुशोभित हैं। उनके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है। यह दर्शाता है कि एक संतुलित व्यक्तित्व वही है जो शांति (चंद्रमा) और शक्ति (घंटा/नाद) को एक साथ साध सके।

​◆ योग और मणिपूर चक्र (The Power House)

​आज चेतना मणिपूर चक्र (नाभि केंद्र) पर होती है।

  • तत्व: अग्नि।
  • महत्व: जैसे अग्नि अशुद्धियों को जला देती है, वैसे ही मणिपूर चक्र का जागरण हमारे डर और संशय को भस्म कर देता है।
  • साधकों के लिए: यदि आप जीवन में आत्मविश्वास की कमी महसूस करते हैं, तो माँ चंद्रघंटा का ध्यान आपको 'शेर जैसी निर्भयता' प्रदान करता है।

​◆ घंटे की ध्वनि का विज्ञान (Sound Healing)

​माँ के गले में स्थित घंटे की ध्वनि का रहस्य यह है कि यह 'नाद ब्रह्म' का प्रतीक है। वैज्ञानिक रूप से, घंटे की तीक्ष्ण ध्वनि मस्तिष्क के दोनों हिस्सों (Left & Right Brain) को संतुलित करती है और एकाग्रता बढ़ाती है

"पिण्डज प्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।

प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥"

शुक्रवार, 20 मार्च 2026

वर्ड हैप्पीनेस इंडेक्स..खुशियों का पैमाना

आपके अनुसा

र खुशियां क्या है..??
जरा सोचिए..
क्या खुशियों का कोई परिभाषा हो सकता है..
मेरे अनुसार तो नही..
क्योंकि जो चीज आपको दुःखी करता है..
हो सकता है वही चीज दूसरों के लिए खुशी का कारण हो..।


मगर कुछ तो सार्वभौमिक सत्य होता ही है..
मगर आपको जानकर हैरानी होगी कि खुशी सार्वभौमिक सत्य नही है...जबकि दुःख है..।

तो फिर खुश कैसे रहा जाए..??
हरेक परिस्थितियों को स्वीकार कर उसका सामना करके ही खुश रहा जा सकता है..।
और कोई उपाय नही है..।।

आप कोई भी ऐसा व्यक्ति दिखा दीजिए..
जो खुश है..
अगर कोई खुश है..
तो वो खुशी क्षणभंगुर होगी..
1 दिन,2 दिन, 2 महीना,2 साल..उसके बाद..
जिसे वो खुशी समझ रहे है,वही उनके लिए अभिशाप बन जायेगा।।

हम ताउम्र खुश नही रह सकते..
मगर हम ताउम्र आनंदमय जीवन जी सकते है..।।

आज 20 मार्च है,और दुनिया इस दिन को..
"विश्व हैप्पीनेस डे" के रूप में मनाता है..इसकी शुरुआत 2012 में "ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय" के "वेल बीइंग रिसर्च सेंटर" और "संयुक्त राष्ट्र सतत विकास समाधान नेटवर्क(UNSDSN)" द्वारा शुरू किया गया..।
ये दोनों मिलकर एक इंडेक्स भी जारी करते है..
147 देशों में फिनलैंड लगातार 9वे साल भी पहले पायदान पर है..
आपको जानकर हैरानी होगी कि इजरायल जो लगभग सालभर से युद्धरत है वो इस पायदान में 8वे स्थान पर है..।
और अगर आप भारतीय है..तो आपको जानकर और हैरानी होगी कि पाकिस्तान की रैंकिंग भारत से अच्छी है..पाकिस्तान 104वे स्थान पर है..जबकि भारत 116वे स्थान पर..।।

आखिर ये इंडेक्स जारी कैसे किया जाता है..??
इसके 6 पैमाने है..
प्रति व्यक्ति GDP, जीवन प्रत्याशा,सामाजिक संबंध,भ्रष्टाचार,उदारता, और निर्णय लेने की स्वतंत्रता..।।

अगर हम इन 6 पैमाने को देखें तो लगता है..सही ही है,हम भारतीयों की रैंकिंग..।
मगर एक सवाल है..
क्या खुशियों का कोई पैमाना होता है..??
सच कहूं तो खुशियों का कोई पैमाना नही होता..
बस खुश होने का एक बहाना ढूंढना होता है..।।

क्या आपको पता है..
मारी खुशियां सोशल मीडिया छीन रहा है..?

•देखा गया है कि जो 5 घंटे से ज्यादा समय सोशल मीडिया(व्हाट्सएप, फेसबुक,इंस्टाग्राम,यूट्यूब इत्यादि)पे समय बिताते हैं वो दुःखी होते है..।।

वंही जो 1घण्टे से कम समय सोशल मीडिया पे बिताते हैं,वो खुश होते है..।।
(अगर आपका आय का जरिया सोशल मीडिया है तो ये आपके लिए नही है..😊)

तो आपने क्या सोचा..
आपके लिए हैप्पीनेस के क्या मायने है..??




गुरुवार, 19 मार्च 2026

माँ ब्रह्मचारिणी

चैत्र नवरात्रि का दूसरा दिन माँ ब्रह्मचारिणी को समर्पित है। 'ब्रह्म' का अर्थ है तपस्या और 'चारिणी' का अर्थ है आचरण करने वाली। यह स्वरूप हमें सिखाता है कि बिना कठिन परिश्रम और एकाग्रता के जीवन में किसी भी उच्च लक्ष्य (सिद्धि) को प्राप्त करना असंभव है।



​◆ स्वरूप का प्रतीकवाद: नंगे पैर और हाथ में माला

माँ ब्रह्मचारिणी का स्वरूप अत्यंत सरल और भव्य है..

  • नंगे पैर चलना: यह सुख-सुविधाओं के त्याग और जमीन से जुड़े रहने का प्रतीक है।
  • दाहिने हाथ में जपमाला: यह निरंतर अभ्यास (Abhyasa) और मंत्र शक्ति का सूचक है।
  • बाएं हाथ में कमंडल: यह ज्ञान और वैराग्य के जल को संचित करने का प्रतीक है।


  • यह स्वरूप संदेश देता है कि ज्ञान (कमंडल) और क्रिया/अभ्यास (माला) का संतुलन ही सफलता की कुंजी है।

  • योग विज्ञान और 'स्वाधिष्ठान चक्र'

    ​नवरात्रि के दूसरे दिन साधक का मन स्वाधिष्ठान चक्र (Sacral Chakra) में स्थित होता है।

    • तत्व: जल (Water Element)
    • मनोवैज्ञानिक प्रभाव: यह चक्र हमारी सृजनात्मकता और भावनाओं का केंद्र है। माँ ब्रह्मचारिणी की पूजा से व्यक्ति अपनी भावनाओं पर नियंत्रण (Self-restraint) पाना सीखता है।

    ◆  पौराणिक संदर्भ: शिव को पाने का संकल्प

    ​देवी ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए हजारों वर्षों तक कठिन तपस्या की। उन्होंने केवल फल-फूल खाए और अंत में केवल पत्तों (अपर्णा) पर जीवित रहीं। यह कथा हमें 'अनंत धैर्य' की सीख देती है। आज के युग में जहाँ हम तुरंत परिणाम (Instant Gratification) चाहते हैं, माँ ब्रह्मचारिणी हमें धैर्य की शक्ति सिखाती हैं।

    ​◆ वैज्ञानिक दृष्टिकोण: तपस्या और मस्तिष्क (Neuroplasticity)

    ​आज का विज्ञान मानता है कि 'तप' या अनुशासन से हमारे मस्तिष्क की Neuroplasticity बढ़ती है। जब हम किसी कठिन लक्ष्य के लिए अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण पाते हैं, तो हमारे मस्तिष्क का 'प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स' मजबूत होता है, जिससे निर्णय लेने की क्षमता और मानसिक शक्ति बढ़ती है।

    माँ ब्रह्मचारिणी का यह दिन हमें याद दिलाता है कि संघर्ष ही प्रगति का आधार हैयदि आपके जीवन में संघर्ष है, तो समझ लीजिए कि आप माँ के बताए 'तप' के मार्ग पर हैं, जिसका अंत 'सिद्धि' (सफलता) में ही होगा।

       

      दधाना करपद्माभ्यामक्षमालाकमण्डलू।

      देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥

      जिनके एक हाथ में अक्षमाला और दूसरे में कमंडल है, ऐसी परम श्रेष्ठ देवी ब्रह्मचारिणी मुझ पर प्रसन्न हों।

    आप सभी को नवरात्रि के द्वितीय दिन की मंगलकामनाएं..


संभावनाएं कभी खत्म नही होता

संभावनाएं कभी खत्म नही होता है,
बल्कि हम अपने जीवन से इतने हताश हो जाते है कि,
दस्तक दे रहे संभावनाओं के लिए दरवाजे ही नही खोलते..।
इसीलिए हताश मत होइये जनाब..
तैयार रहिये..
उन संभावनाओं के स्वागत के लिए..
जो आपको फर्श से अर्श पर ले जाने के लिए आनेवाला है..।

मगर ये आसान नही है..
हम अपनी असफलताओं और रोजमर्रा के जिंदगी से इतने थक जाते है कि, हमें उन संभावनाओं का पता ही नही चलता,जो हमारे जिंदगी में बदलाव लाने वाला होता है..।
हम उसे देखकर भी अनदेखा कर देते है..
और इसका फायदा कोई और उठा ले जाता है..।।

इसीलिए कभी हताश मत होइए..
क्योंकि संभावनाएं कभी खत्म नही होता..।।



Yoga For Bone & skeletal system

हड्डियाँ जीवित ऊतक हैं जो यांत्रिक तनाव (Mechanical Stress) मिलने पर खुद को मजबूत बनाती हैं। योग में शरीर के वजन का सही इस्तेमाल से हड्डियों को लोहे जैसा मजबूत बनाया जा सकता है।

​★ वीरभद्रासन (Warrior Poses) और अस्थि खनिज घनत्व (BMD)

  • वैज्ञानिक साक्ष्य: 'जर्नल ऑफ अल्टरनेटिव एंड कॉम्प्लिमेंट्री मेडिसिन' के एक अध्ययन के अनुसार, वीरभद्रासन जैसे खड़े होकर किए जाने वाले आसन ऑस्टियोब्लास्ट (Osteoblasts) हड्डी बनाने वाली कोशिकाओं को सक्रिय करते हैं।

  • शारीरिक प्रभाव: यह रीढ़ की हड्डी और कूल्हे की हड्डियों के घनत्व (Bone Density) को बढ़ाता है, जिससे 'ऑस्टियोपोरोसिस' (हड्डियों का भुरभुरापन) का खतरा कम हो जाता है।

सेतुबंधासन (Bridge Pose) और रीढ़ की हड्डी का लचीलापन

  • वैज्ञानिक साक्ष्य: यह आसन रीढ़ की हड्डियों (Vertebrae) के बीच 'सिनोवियल फ्लूइड' (Synovial Fluid) के प्रवाह को बढ़ाता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह डिस्क के बीच पोषण पहुँचाने का एकमात्र तरीका है।

  • शारीरिक प्रभाव: यह रीढ़ की हड्डियों के आपस में घिसने और कैल्सीफिकेशन (जकड़न) को रोकता है।

वृक्षासन (Tree Pose) और संतुलन नियंत्रण (Proprioception)

  • वैज्ञानिक साक्ष्य: एक पैर पर संतुलन बनाने से मस्तिष्क के सेरेबेलम (Cerebellum) को तीव्र संकेत मिलते हैंइससे टखनों और घुटनों के स्नायुबंधन (Ligaments) मजबूत होते हैं।

  • शारीरिक प्रभाव: यह शरीर के 'प्रोपियोसेप्शन' (स्थानिक जागरूकता) को सुधारता है, जिससे भविष्य में गिरने और फ्रैक्चर होने की संभावना न्यूनतम हो जाती है।

कुंभक (प्राणायाम) और क्षारीय संतुलन (Alkaline Balance)

  • वैज्ञानिक साक्ष्य: जब हम प्राणायाम में सांस रोकते (कुंभक), तो शरीर का pH स्तर संतुलित होता है। शोध बताते हैं कि यदि रक्त बहुत अम्लीय (Acidic) हो जाए, तो शरीर हड्डियों से कैल्शियम खींचने लगता है।

  • शारीरिक प्रभाव: सही श्वसन तकनीक रक्त को क्षारीय बनाए रखती है, जिससे हड्डियों का कैल्शियम सुरक्षित रहता है


माँ शैलपुत्री: स्थिरता, संकल्प और मूलाधार का विज्ञान

आज से चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो रहा है। यह केवल व्रत और उपवास का समय नहीं है, बल्कि अपनी चेतना को ऊपर उठाने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। नवरात्रि के पहले दिन हम माँ शैलपुत्री की आराधना करते हैं। आइए जानते हैं, इस स्वरूप के पीछे छिपे गहरे आध्यात्मिक और योगिक रहस्यों को।



​★ 'शैल' का अर्थ: अडिग हिमालय जैसी स्थिरता

​'शैल' का अर्थ है पत्थर या पर्वत। हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा गया। जीवन में किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए (चाहे वह आध्यात्मिक हो या सांसारिक), सबसे पहली आवश्यकता है 'स्थिरता'। माँ शैलपुत्री हमें सिखाती हैं कि विपरीत परिस्थितियों में भी हिमालय की तरह अडिग कैसे रहें।

★ योग विज्ञान और मूलाधार चक्र

​योग शास्त्र के अनुसार, माँ शैलपुत्री मूलाधार चक्र (Root Chakra) की अधिष्ठात्री देवी हैं।

  • तत्व: पृथ्वी (Earth Element)
  • बीज मंत्र: 'लं' (LAM) हमारी ऊर्जा का स्रोत यहीं स्थित है। जब हम माँ की पूजा करते हैं, तो वास्तव में हम अपनी सुप्त ऊर्जा (कुंडलिनी) को जागृत करने की पहली सीढ़ी पर कदम रखते हैं। बिना आधार (Root) को मजबूत किए, ऊँचाइयों को नहीं छुआ जा सकता।

​★  स्वरूप का रहस्य: वृषभ और त्रिशूल

  • वृषभ (बैल): यह 'धर्म' और 'परिश्रम' का प्रतीक है। देवी का इस पर सवार होना दर्शाता है कि शक्ति हमेशा धर्म के नियंत्रण में होनी चाहिए।
  • त्रिशूल और कमल: एक हाथ में त्रिशूल (अनुशासन और कष्टों का नाश) और दूसरे में कमल (करुणा और मानसिक शांति)। यह एक पूर्ण व्यक्तित्व का संतुलन है—बाहर से कठोर और भीतर से कोमल

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम।

वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम॥

इस नवरात्रि, जब आप दीप जलाएं, तो संकल्प लें कि आप अपने भीतर की 'शैलपुत्री' यानी अपनी इच्छाशक्ति (Will Power) को जाग्रत करेंगे। 

आप इस नवरात्रि अपने भीतर कौन सा सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं..???

आप सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ!

रविवार, 15 मार्च 2026

YOGA for skeletal🦴 System & Osteogenesis

Yoga is a weight-bearing exercise that uses your own body weight to strengthen the "scaffolding" of your body.

​◆Virabhadrasana (Warrior Poses) & Bone Mineral Density (BMD)

  • Scientific Evidence: A 10-year study published in Topics in Geriatric Rehabilitation proved that just 12 minutes of daily yoga increases bone mineral density in the spine and femur. Warrior poses create a "closed-chain" kinetic movement that stimulates Osteoblasts (cells that build new bone).

  • Anatomical Effect: The mechanical tugging of muscles against the bone during these standing poses triggers Wolff’s Law, which states that bone grows or remodels in response to the forces placed upon it.

​◆Setu Bandhasana (Bridge Pose) & Spinal Calcification Prevention

  • Scientific Evidence: Research indicates that weight-bearing backbends stimulate the production of synovial fluid in the facet joints of the spine. This fluid acts as a lubricant and nutrient delivery system for the intervertebral discs.
  • Anatomical Effect: It prevents the "stiffening" or calcification of the spinal column, keeping the vertebrae mobile and resilient against compression fractures.

​◆Kumbhak (Breath Retention) & Alkaline Balance

  • Scientific Evidence: While not an asana, the practice of Kumbhak (internal or external breath retention) during pranayama helps regulate the pH level of the blood.

  • Anatomical Effect: When blood becomes too acidic, the body "leaches" calcium from the bones to neutralize the acid. By maintaining an optimal alkaline-acid balance through breathing, you indirectly preserve your bone's calcium stores..

​◆Vrikshasana (Tree Pose) & Joint Proprioception

  • Scientific Evidence: Balancing on one leg sends rapid-fire signals to the Cerebellum. Studies show this strengthens the ligaments and tendons around the ankle and knee, creating a "biological brace.

  • Anatomical Effect: It enhances proprioception (the body's ability to sense its position in space), which is the primary scientific defense against falls—the leading cause of bone fractures.


शनिवार, 14 मार्च 2026

पेड़ पौधे की अहमियत

आपका कोई दोस्त हो ना हो..
मगर आपके आसपास पेड़-पौधा जरूर होना चाहिए..
आपको अहसास कराने के लिए..
की आप कैसे हो..??
आपके मूड को बेहतर करने के लिए..
आपको नकारात्मक से बाहर निकालने के लिए..।।

मेरे जीवन मे पेड़-पौधों का बहुत रोल है..
मैं जब भी हताश होता हूँ,ये मुझे हरेक बार हताशाओं से निकाल लेता है..।
मेरे स्टडी टेबल दरवाजे के पास है,और ठीक दरवाजे के पास सदाबहार,और अपराजिता का पौधा है..।
ये दोनों पौधे हमेशा मेरा मार्गदर्शन करते रहते है..।
मेरी मायूसी को पढ़ कर मेरा होंसला अफजाई करते है...।।

सच मे आपका कोई मित्र हो न हो..
एक दो पेड़-पौधे तो जिंदगी में होने ही चाहिए..।।





शुक्रवार, 13 मार्च 2026

प्यार की पांति...

मैं ही बार-बार गिरूं तेरे प्यार में..
कभी,तू भी तो गिर..।
क्या होता है गिरना..
इसका अहसास कभी ,
तू भी तो कर..।
मैं ही बार-बार गिरूं तेरे प्यार में..
कभी तू भी तो गिर..।।

क्या होता है इंतजार करना..
इसका अहसास कभी,
तू भी तो कर..
यू ही घन्टों जाया कर देना..
बस एक झलक के लिए..
इसका अहसास कभी, 
तू भी तो कर..।।

क्या होता है एक झलक को देखकर..
मुस्कुराना..
इसका अहसास कभी,
तू भी तो कर..।
क्या-क्या होता है,
प्यार में..
एक बार तू भी तो प्यार करके देख..।

मैं ही बार-बार गिरूं तेरे प्यार में..
कभी तू भी तो गिर..।