मंगलवार, 14 अप्रैल 2026

मैं हर जगह विद्यमान हूँ..

मैं न मिलूं तो हैरान मत होना..
क्योंकि मैं तो, 
हर जगह विद्यमान हूँ..।
खुद को कुरेदना..
खुद को डुबोना..
आध्यात्मिक गहराइयों में..
उस गहराइयों में भी,
मेरी परछाइयां न दिखें..
तो हैरान मत होना..।
क्योंकि मैं तो हर जगह विद्यमान हूँ..।

थोड़ा अपना औरों के प्रति नजरिया बदलना..
अपने वाणी में थोड़ा मधुरता लाना..
औरों में भी मेरा अक्स देखना..
अगर न दिखाई दे..
तो हैरान मत होना..।
क्योंकि मैं तो हर जगह विद्यमान हूँ..।।

अगर मैं कंही न मिलूं..
तो अपने अंदर ही गौता लगाना..
और हृदयस्थली पर अपना ध्यान लगाना..
मैं यंही विद्यमान हूँ..
आज से नही..
तुम्हारे सृजनकाल से ही..।।

मैं न मिलूं तो हैरान मत होना..
क्योंकि मैं तो, 
हर जगह विद्यमान हूँ..।



क्यों न शुरू से शुरूआत करें..

क्यों न शुरू से शुरुआत करें..
फिर से एक नई शुरुआत करें..।
जो पीछे छूट गया उसे वहीं रहने दें,
वक्त की लहरों को अपनी दिशा में बहने दें..।
क्यों न शुरू से शुरुआत करें..
फिर से एक नई शुरुआत करें..।

नाकामी की धूल को जरा झाड़ कर,
अपनी हिम्मत को फिर से संवार कर..।
क्यों न शुरू से शुरुआत करें..
फिर से एक नई शुरुआत करें..।



खुद के बारे में सोचो..

खुद के बारे में सोचो..
आखिर तुम कर क्या रहे हो..??
क्या यही सोच के तुम बड़े हुए हो..??
खुद के बारे में सोचो..
तुम कर क्या रहे हो..??
क्या अपने सोच से..
तुमने समझौता कर लिया है..
अगर,हां..??
तब ठीक है..
तुम जैसे जी रहे हो..
वैसे जियो..।

अगर,नही...
तो धिक्कार है,तुमपे..
तुम अबतक आखिर कर क्या रहे हो..??
सिर्फ सोचने से क्या होता है..
वो पैर जो जकड़ चुके है..
उसे हिलाओ,डुलाओ..
और अपने सोच को साकार करने के लिए..
उस और कदम बढ़ाओ..।।



न तुम आलसी हो..
न ही तुम कायर हो..
न ही तुम निर्लज्ज हो..
न ही तुम नकारा हो..।
तुम में वो सबकुछ है..
जिससे तुम अपने सपने को 
साकार कर सकते हो..
तो फिर आखिर क्यों..??
अपना जिंदगी बर्बाद कर रहे हो..??
खुद के बारे में सोचो..
आखिर तुम कर क्या रहे हो..??

अगर तुम ठान लो..

अगर तुम ठान लो कि जीना है..
तो तुम्हें, जीने से कौन रोक सकता है..।
क्योंकि..
मैंने सूखे हुए पेड़ो से कलगी देते हुए देखा है..
मैंने मुरझाए हुए चेहरे पे मुस्कान देखा है..।
मैंने असंभव को संभव होते हुए देखा है..।।

आखिर कब तक ये सब सिर्फ मैं देखता रहूंगा..
इनसब से हौंसला लेकर..
अपने सपनों को साकार करूँगा..।।

अगर तुम ठान लो कि जीना है..
तो तुम्हें, जीने से कौन रोक सकता है..।



तुम कर सकते हो..

अगर अपना सपना साकार करना हो..
तो अपने प्रति क्रूर होइये..
सिर्फ अपने प्रति ही नही बल्कि..
अपनों के प्रति भी क्रूर होइये..।।




आप जबतक अपने प्रति क्रूर नही होंगे..तो आपके सपने, सपने ही रह जाएंगे।समय हाथ से निकल जायेगा और आप सिर्फ हाथ मलते रह जाएंगे..।
खुद को देखिए आईने..
क्या खुद पे गुस्सा नही आता,
क्या खुद से घिन्न नही आता..।
क्या थे आप और क्या हो गए है आप..।।

तोड़ दीजिए उस बेड़ियों को..
जो अब ढाल बन चुका है..
नोच दीजिए उस केचुल को,
जो आपका पहचान लील रहा है..।
माना कि ये संभव नही है..
मगर असंभव आखिर क्या है..।

खुद से पूछिए..
आखिर क्यों जन्मा आपके माता-पिता ने..??
क्या अपेक्षा किया आपके चाहने वालों ने..??
और क्या कर रहे है आप..??
खुद से पूछिए..।

शायद ये जबाब देने की हिम्मत न हो आपमें..
मगर जो भी हो..
आप कायर तो नही है..।

एक बार फिर क्यों नही प्रयास करते हो..
अपने उस छवि को क्यों नही साकार करते हो..
जिस छवि से अपेक्षा थी सबोको...
उस छवि को क्यों नही साकार करते हो..
एक बार फिर क्यों नही प्रयास करते हो..।

आखिर क्या नही होता है..
प्रयास करने से..
लोगों ने हिमालय के साथ चंद्रमा को भी फतह किया..
तुम आखिर क्यों नही..
अपने सपनों को फतह कर सकते हो..??

खुद को देखो एकबार आइने में..
और फिर से उस छवि को स्वीकार कर..
अपने सपने को साकार कर..।।
तुम कर सकते हो..।।
सच मे तुम कर सकते हो..।।

व्हाट्सएप और यात्रा..

क्या आपको पता है..
वर्तमान समय मे अपनों से जुड़ने का सबसे बड़ा साधन क्या है..??
चाहे मैसेज भेजना हो,कॉल करना हो या फिर वीडियो कॉल करना हो..या फिर अपने चाहने वालों को थोड़ा जलाना ही क्यों न हो..तो हम क्या करते है..व्हाट्सएप करते है..

क्या आपको पता है वर्तमान समय मे व्हाट्सएप इस्तेमाल करने वालों की संख्या कितना है..330 करोड़ ।
प्रत्येक दिन 100 अरब मेसैज व्हाट्सएप के द्वारा हम एक दूसरे को भेजते है..।




क्या आपको पता है..व्हाट्सएप का निर्माण कैसे हुआ..??
अक्सरहाँ जब हमें रिजेक्शन मिलता है तो हम हताश और निराश होते है..मगर कुछ लोग कीर्तिमान रचते है..।

उन्ही में से एक है ब्रायन एक्टन जिन्होंने स्टेनफोर्ड से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की और एप्पल कंपनी में पहला जॉब किया फिर कई कंपनी में काम किया अंत मे याहू! कंपनी के साथ 2007 तक जुड़े रहे..।फिर अपने मित्र "जैन कूम" के साथ 1 वर्ष के लिए साउथ अमेरिका की यात्रा पर निकल गए..।
जब अपना यात्रा पूरा कर वापस आ रहे थे तो दोनों ने फेसबुक और ट्विटर के पास नॉकरी के लिए अप्लाई किया..मगर दोंनो कंपनी ने इन्हें रिजेक्ट कर दिया..।
"ऐक्टन" ने मई 2009 में एक ट्वीट किया- ट्विटर के हेडक्वार्टर से रिजेक्शन मिला,ठीक ही है..इतना दूर जाना-आना भी मुश्किल होता।

फिर उन्होंने अगस्त 2009 में एक ट्वीट किया - फेसबुक ने मुझे अस्वीकार कर दिया,यह शानदार लोगों के साथ जुड़ने का अद्भुत अवसर था।देखते है आगे क्या होता है..।।

पता है इसके आगे क्या हुआ..??
इसी वर्ष सिलिकॉन वैली,कैलिफोर्निया में व्हाट्सएप को संस्थापित करते है..।
इसके बाद क्या हुआ हम सब जानते है...।

2014 में फेसबुक ने 19.3 बिलियन $ में खरीद लिया..यह तकनीकी इतिहास के सबसे बड़े अधिग्रहणों में से एक था..।।

यात्रा जरूरी है..
यात्रा सिर्फ जिंदगी नही,
बल्कि दुनिया बदल देती है..।
दुनिया मे बड़े बदलाव यात्रा से ही हुई है..

सोमवार, 13 अप्रैल 2026

मैं खो जाना चाहता हूँ..

मैं खो जाना चाहता हूँ ऐसे..
जैसे मेरा अस्तित्व कभी था ही नही..।
मैं खो जाना चाहता हूं ऐसे..
जैसे किसी का अस्तित्व था ही नही..।
मैं खो जाना चाहता हूं ऐसे..
जैसे उस अस्तित्व का अस्तित्व कभी था ही नही,ऐसे..
मैं खो जाना चाहता हूं ऐसे..
जैसे मेरा अस्तित्व कभी था ही नही ऐसे..।



दायित्व का बोझ