'सिद्धि' का अर्थ है अलौकिक शक्ति और 'दात्री' का अर्थ है देने वाली। भगवान शिव ने भी इन्हीं की कृपा से आठ सिद्धियाँ प्राप्त की थीं और उनका आधा शरीर देवी का हुआ था, जिससे वे 'अर्धनारीश्वर' कहलाए।
◆ स्वरूप और प्रतीकवाद
- कमल पर विराजमान: माँ सिद्धिदात्री कमल के पुष्प पर आसीन हैं (हालाँकि इनका वाहन सिंह भी है)।
- चतुर्भुज: इनके चार हाथ हैं। दाहिने नीचे वाले हाथ में चक्र और ऊपर वाले में गदा है। बाएं नीचे वाले हाथ में शंख और ऊपर वाले में कमल का पुष्प है।
- पूर्णता: यह स्वरूप दर्शाता है कि साधना अब पूर्ण हो चुकी है और साधक को उसके तप का फल मिलने वाला है।
◆ योग विज्ञान: निर्वाण (Nirvana)
आज साधक की चेतना सहस्रार चक्र (Crown Chakra) में पूर्णतः स्थित होती है।
- अवस्था: यह 'अद्वैत' की अवस्था है जहाँ साधक और शक्ति एक हो जाते हैं।
- प्रभाव: माँ सिद्धिदात्री की कृपा से ब्रह्मांड का सारा ज्ञान और सभी अष्ट सिद्धियाँ (अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व) सुलभ हो जाती है
सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात् सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥
अर्थ: जिन्हें सिद्ध, गंधर्व, यक्ष, असुर और देवता भी पूजते हैं, वे सिद्धियाँ देने वाली माँ सिद्धिदात्री हमें भी सफलता प्रदान करें।

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