रविवार, 31 अगस्त 2025

इक तुम्ही थी..

इक तुम्हीं थी..
जिसे देख के दिल धड़कता था..
जबकि,तुमसे कई हसीं चेहरे देखे है मैंने..
मगर किसी के लिए कभी दिल नही धड़का..
इक तुम ही थी..।।

शनिवार, 30 अगस्त 2025

तुम्हारा अक्स..

तुम्हारा अक्स जब भी नजर आ जाता है,
मेरे चेहरे पे मुस्कान बिखर जाता है..
मानों रेत में, बारिश की फुहार हो रही हो..
अमावश की रातों में चाँद नजर आ रही हो..
कुछ ऐसा ही, हो जाता है कुछ पल के लिए..।।
तुम्हारा अक्स जब भी नजर आ जाता है..

अब ना ही तुमसे मिलने की हसरत है..
ना ही तुमसे कुछ कहने को दास्तां है..।
बस अगर कुछ है...
तो तुम्हारा अक्स है..
जो कभी-कभी मेरे चेहरे पे खुशियां बिखेर जाती है..।।
तुम्हार अक्स जब भी...



बुधवार, 27 अगस्त 2025

गणेश जी क्यों पूजनीय है..??

वक्र तुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ:।

निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभ कार्येषु सर्वदा ॥

ये मंत्र आपने जरूर कभी-न-कभी सुना होगा,क्या आपने कभी इस मंत्र का मतलब जानने का कोशिस किया है..??

"हाथी जैसे विशालकाय जिनका तेज सूर्य के सहस्त्र किरणों के समान है।आप हमेशा मेरे कार्य को बिना विघ्न के पूरा करें,एवं सदा ही मेरे शुभ की कामना करें..।"

उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार गणपति शब्द का उपयोग  ऋग्वेद(2.23.1) में मिलता है। वहीं "अमरकोश" में गणपति के आठ पर्यायवाची नाम मिलते है। विनायक, विघ्नराज,द्वेमातुर, गणाधिप, एकदंत,हेरम्बा, लंबोदर एवं गजानन..।



विनायक नाम का उल्लेख अनेक पुराणों एवं बौद्ध पुस्तको में मिलता है..

तमिल भाषा मे गणेश जी को पिल्लई या पिल्लैयार नाम से जाना जाता है।

वही बर्मा मे गणेश जी को "महा पेइने" और थाईलैंड में "खानेट" नाम से जाना जाता है..

गणेश जी सिर्फ भारत मे ही नही बल्कि अफगानिस्तान से लेकर पूरे दक्षिण पूर्व एशिया में पूजे जाते थे..उनकी अनेक छवियां चीन में भी मिले है..।।

6ठी शताब्दी से गणेश जी की मूर्ति भारत के कई क्षेत्र में बनने लगे और ये धीरे-धीरे अनेक क्षेत्र में बनता गया..।।


क्या आपने कभी गौर से गणेश जी को देखा है..??
शायद नही ही देखा होगा..

जरा गौर से फिर से देखिए..
और सोचिये...🤔
मन में क्या-क्या विचार आ रहा है..??

क्या आपने सोचा..??
अगर हां, तो क्या-क्या विचार आया...।।
उनका छवि कितना बेढोल है..
उनका मुख.. उनका पेट..उनका भीमकाय शरीर..
और ऊपर से उनका सवारी..मूषक..।।

इतना सब होते हुए भी वो सबसे पहले पूजे जाते है..
आखिर क्यों..??

वो उन सभी दिव्यांगों का प्रतिनिधित्व करते है..जिसे हम अलग नजर से देखते है..।ये उस समय से प्रतिनिधित्व करते आ रहे है जब दिव्यांग होना अभिशाप माना जाता था,वो आज भी माना जाता है..।
पुराणों उपनिषदों या पूरे विश्व के सभी ग्रंथों में ये एकलौते दिव्यांग अभिव्यक्ति है..जो सिर्फ पूजनीय ही नही बल्कि प्रथम पूजनीय है...बिना इनके पूजा के किसी का पूजा नही होता..।।

हो सकता है आप मेरे बारे में गलत सोच रहे हो..
सोच रहें ही होंगे,क्योंकि मैं कुछ भी बोल और लिख रहा हूँ..।
दरसल इसमें आपका या हमारा कोई गलती नही है..क्योंकि पुराण और उपनिषद कहानी के रूप में लिखा गया है..इसे खुद से ही मंथन करके उसमें से निचोड़ निकालना होगा..।।

आप अपने सभी देवी देवता को देखें..और उनके सवारी और उनके आसन को देखें...क्या उन जीवों को सवारी बनाना आसान है..?

अब गणेश जी को देखें...और उनके सवारी को देखें..दरसल गणेश जी ने मूषक को चुना नही बल्कि मूषक ने गणेश जी को चुना..।।
गणेश जी के आसन(बैठने वाला जगह) को देखें एक साधारण सा तख्त और अन्य देवताओं का आसन देखें..।।

इतने सब होने के बाद भी गणेश जी प्रथम पूजनीय क्यों है..??
हम आपने एक पौराणिक कहानी सुना है,
कहानी का सारांश ये है कि- "गणेश जी पार्वती के बेटे है और वो पार्वती के द्वारपाल बने है जो अंदर किसी को न आने देने की आज्ञा का पालन कर रहे है..शिव जी आते है वो जाना चाहते है मगर गणेश जी जाने नही देते है,शिवजी को गुस्सा आता है और वो उनका वध कर देते है ये देखकर पार्वती जी को गुस्सा आता है,शिवजी गुस्सा देखकर उनको फिर से जीवित कर देते है..।।"

अब इस कहानी को दूसरे नजरिये से देखिए-
गणेश जी जब पैदा हुए तो इनके शरीर को देख कर इनके माता-पिता ने इन्हें छोड़ दिया होगा(जो आज भी होता है)और ये माता पार्वती को मिलते है,और ये इनका लालन-पालन करते है..हो सकता है शिवजी वर्षों बाद अपने घर आये हो..और गणेश जी को देखकर अचंभित हुए हो..और गणेश जी को लेकर माता पार्वती और शिवजी में खूब गहमा-गहमी हुआ हो...।
फिर शिवजी गणेश जी को स्वीकार करने के लिए तैयार हो गए हो..
और गणेश जी का अच्छा परवरिश और उस समय के हरेक ज्ञान से उन्हें अवगत करा दिया हो..और वो उस समय के सबसे बड़े विद्वान बन गए हो..और सभी देवी-देवता को उनके विद्यता के सामने नतमस्तक होना पड़ा हो..।।
शायद यही वहज हो..जिस कारण वो प्रथम पूजनीय भगवान बने..
और गणेश जी अंत में इन सबका श्रेय अपने माता-पिता को देते है..।।

इससे हमें क्या सीख मिलता है..??

अगर हम एक मनुष्य है तो हमें गणेश जी से सीखना चाहिए कि..शरीर का सरंचना हमारे व्यक्तित्व में बाधा नही बन सकता..हम उस ऊंचाइयों तक पहुंच सकते है जंहा कोई नही पहुंच सकता..।
अपने माता-पिता के प्रति श्रद्धा(हमेशा रखना चाहिए) उस समय भी रखना चाहिए जिस समय आप जिंदगी के सर्वोच्च शिखर पर हों..क्योंकि अगर वो नही होते तो आप नही होते..।।
अगर हम माता-पिता है तो..हम अपने परवरिश से अपने संतान को जीवन के किसी भी ऊंचाइयों पे पहुंचा सकते है...।।(मगर अफसोस आज हम अपने बच्चों की परवरिश सही से नही कर रहे है,WHO के अनुसार,हरेक 10 में से 6 बच्चों(2-14 वर्ष) के साथ माता-पिता या उनके जानने वाले उन्हें शारीरिक दंड देते है)

गणेश जी सिर्फ विद्वता,और अच्छे संतान का ही प्रतिनिधित्व नही करते बल्कि वो उन करोडों लोगों का प्रतिनिधित्व करते है,जो समाज के हाशिये पे नही बल्कि समाज का हिस्सा तक नही है..।।

ऐसे प्रतिनिधित्वकर्ता को बारंबार प्रणाम..
ऐसे संघर्षकर्ता को बारंबार प्रणाम..
सभी विद्या के विद्वेता को बारंबार प्रणाम..
उनके माता पिता को बारंबार प्रणाम..।।






मंगलवार, 26 अगस्त 2025

आखिर जीत कुत्ते की हुई..

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-NCR से आवारा कुत्ते को हटाने का आदेश दिया था मगर कुछ कुत्ते प्रेमी और NGO सड़क पे उतर आए..खूब कोहराम मचा..अंत में मुख्य न्यायाधीश को हस्तक्षेप करना पड़ा और उन्होंने 3 जजों की स्पेशल बेंच का गठन किया...

3 जजों ने निर्णय दिया कि किसी कुत्ते को  दिल्ली-NCR से हटाया नही जाएगा,बल्कि सबों का नसबंदी करके उसी जगह पर छोड़ दिया जाएगा..।।


क्या कुत्ता इतना बड़ा समस्या बन गया कि,हमारे सुप्रीम कोर्ट को दखलंदाजी करना पड़ा..??

PIB(press information bureau) के अनुसार 2022 में 21.89 लाख कुत्ते के काटने का मामला आया था जबकि 2024 में 37.15 लाख..

WHO के अनुसार हरेक साल 55 हजार से ज्यादा मौत रेबीज़ से होता है,इसमें से मरने वाला हरेक तीसरा भारतीय होता है..।।

क्या आपको पता है..??

सबसे पहला पालतू पशु कौन था..??

सबसे पहला जीव जो पृथ्वी के ऑर्बिट में गया..??

इंसानो और कुत्तों के बीच मे दोस्ती का सिलसिला लगभग 20-40 हज़ार के आसपास से है..।

जब मानव अपने बदलाव के चरण में थे उसी समय कुछ भेड़ियों में भी हार्मोनल बदलाव आना शुरू हुआ..।जिस कारण ये मानव के करीब आये..और मनुष्य ने शायद अपना बचा हुआ मांस का टुकड़ा इन्हें दिया होगा और ये तब से इनके आसपास रहना शुरू कर दिए होंगे...और बदले में ये शिकार में मदद करते होंगे..।

जेनेटिक टेस्टिंग से पता चला है कि 90% कुत्ते सिर्फ 3 मादा भेड़िये से विकसित हुये..🤔

मानव और कुत्ते के बीच मे संबंध का एक बड़ा कारण हार्मोनल है..जब इंसान या कुत्ते एक दूसरे के आंख में देखते है तो ऑक्सीटोसिन हॉर्मोन का स्त्राव होता है..जो एक दूसरे के लगाव को बढ़ाता है..।।

सिंधु सभ्यता से लेकर मेसोपोटामिया के कब्र से अनेक साक्ष्य मिले है जंहा इंसान के साथ कुत्तों को दफनाया गया है..।।

ये इतने सालों से हमारे साथ रह रहे है कि ये हमारे समाज ही नही बल्कि हमारे सुख-दुःख का भी हिस्सा बन चुके है..।।

शायद इसलिय जब सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा कदम उठाया तो लोग विरोध पर उतर आया..मगर ये भी हमें देखना होगा कि,कुत्ते के काटने की घटना दिनप्रतिदिन बढ़ती जा रही है..।।

इससे निदान के अनेक उपाय है...

•अगर सच मे आप कुत्ता प्रेमी है तो आप देसी नस्ल का कुत्ता पालिये..।

•सड़क चौराहे पे खिलाने के जगह उसे अपने घर या दरवाजे के सामने खिलाये..।

•इन्हें नियमित टीकाकरण करवाये..।।

मगर ये आसान नही तो मुश्किल भी नही है...

मगर इन आवारा कुत्ते से अनेक देश ने निजात पाई है भारत भी अगर चाहे तो निजात पा सकता है..इन कुत्तों का नसबंदी करके..सिंगापुर, स्वीडन,भूटान ने कर दिखाया है..।।

अब सुप्रीम कोर्ट के दखलंदाजी से जरूर कुछ बदलाव आएगा..।।

"कुत्ते समस्या नही है,बल्कि हम ही समस्या है...हम इतने बड़े समस्या है कि,आज प्रकृति कराह रही है..मालूम नही प्रकृति हम मानवों के साथ क्या करेगी..।"








शनिवार, 23 अगस्त 2025

क्या आपके साथ अच्छा होता है..??

जब आप अच्छा करते हैं तो आपके साथ अच्छा होना शुरू हो जाता है..
आखिर ये अच्छा होता क्या है..??

हममें से कई लोग होंगे जो बोलेंगे..
मैं तो अच्छा करता हूँ मगर मेरे साथ अच्छा कंहा होता है..
इसीलिए,ये अच्छा क्या है..??
जरा सोचिए..
आपके नजर मैं अच्छा क्या है..??
जरा सोचिए..
स्वास्थ्य,परिवार,समाज में आप अच्छे है तो इससे अच्छा और क्या हो सकता है..।।
मगर हम अच्छे होने का मतलब सिर्फ आर्थिक क्रियाकलाप से जोड़ लेते है,जो बिल्कुल गलत है..।।
अब आप सोचिये..
क्या जब आप अच्छा करते है तो आपके साथ अच्छा नही होता..??

सच कहूं तो यंहा कुछ भी बुरा नही है,
अगर कुछ बुरा है भी, तो हमारे देखने का नजरिया है..
हमारा नजरिया बदलते ही बुरा चीज भी अच्छा दिखने लगता है..।।

बुधवार, 20 अगस्त 2025

भारत में कंप्यूटर और सूचना क्रांति के जनक...

हम भूल जाते है,या फिर हमारे स्मृति से हटाने का प्रयास किया जाता है,या फिर हटा दिया जाता है..??
और हमें पता भी नही चलता..।।
आज हम सही और गलत का निर्णय खुद से नही करते,बल्कि किसी को सुनकर, देखकर और पढ़कर करते है..।

सबसे बड़ा उदाहरण गांधीजी का ही है..उन्हें वो लोग उलूल जुलूल कहते है,जो उनके बारे में कुछ जानते तक नही...।

मगर आज मैं उनकी बात नही,बल्कि ऐसे स्वप्द्रष्टा व्यकि का बात करूंगा, जो भारत को विश्वपटल पर देखना चाहता थे, और उसके लिए उन्होंने अहम कार्य किया..।
वो व्यक्ति भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्री "राजीव गांधी"थे..

आज उनका जन्मदिवस है..मुझे भी मालूम नही था,वैसे भी लोगों को अपना जन्मदिवस याद नही रहता,कितनों को याद रखें..।
मगर कुछ संस्थाओं का दायित्व है कि वो उन्हें जरूर याद करें जिन्होंने देश के लिए कुछ किया है,उनके और उनके कार्यो के बारे में लोगों से अवगत कराना उनका कर्तव्य..।
मैंने आज का अखबार पलटा तो एक कॉर्नर में लिखा था 
आज का दिन-राजीव गांधी का जयंती है..जिसे 'सदभावना दिवस' के रूप में मनाते है।
मैंने फिर बहुत उम्मीद से अखबार पढ़ना शुरू किया कि कंही कोई आर्टिकल उनके बारे में पढ़ने को मिले,मगर अफसोस उनके बारे में कुछ पढ़ने को नही मिला,फिर हमने इंग्लिश अखबार पढ़ना शुरू किया कि कंही इसमें कुछ पढ़ने को मिले मगर ना ही the hindu, indian express और ना ही the times of india में एक भी आर्टिकल पढ़ने को मिला यंहा तक कि एक लाइन तक भी नही था..।।

आखिर हमें राजीव गांधी को क्यों याद करना चाहिए..??
●उन्होंने 61वा संविधान संशोधन करके वोट की आयु 21 से 18 किया..
भारत में कंप्यूटर क्रांति और दूरसंचार क्रांति का शुरुआत किया..आज हम जिस डिजिटल क्रांति की बात करते है उसका नीवं राजीव गांधी ने ही रखा था..।
पंचायती राज्य व्यवस्था का नींव इन्होंने रखा(इनके मृत्यु के उपरांत 73वा और 74वा संविधन संशोधन लागू हुआ)
●दूसरी बार 1986 में "नई शिक्षा नीति" लेकर आये..
 • दूरस्थ शिक्षा की शुरुआत की इसके तहत भारत का सबसे बड़ा विश्विद्यालय "IGNOU" का स्थापना किया गया..
 •"ऑपरेशन ब्लैकबोर्ड" की शुरुआत..
 •" प्रौढ़ शिक्षा"की शुरुआत..
 •और तो और "नवोदय विद्यालय" की शुरुआत जिसमें 6-12th तक सबकुछ का वहन सरकार करता है,खाना,कपड़ा सबकुछ..
महिलाओं के लिए पहली बार 33% आरक्षण की वकालत..

-आज भारत के GDP में सर्विस सेक्टर का जो महत्वपूर्ण योगदान है उसमें राजीव गांधी का अहम योगदान है..
-आज बंगलुरु भारत का सिलिकॉन सिटी अगर बना है तो उनके दूरसंचार क्रांति के शुरुआत के ही कारण..।
-उनकी मृत्यु भी श्रीलंका में शांति स्थापित करने के कारण हुई

मगर अफसोस हम उन्हें आज भूल गए..भूले नही,बल्कि स्मृति से मिटा दिए गए..।
"उसकी हर कहानी का अलग ही किरदार है,
उसने मोहब्बत भी शान से की और
शहादत का कर्ज भी खूब निभाया।"




शनिवार, 16 अगस्त 2025

श्रीकृष्ण के जीवन का सारांश..

जिस कृष्ण को हम पूजते है,उससे कुछ सीखते ही नही.. तो फिर पूजने से क्या होगा..??


श्रीकृष्ण के पूरे जीवन का सारांश यही है,की संघर्ष से मत भागो,हां अगर भाग सकते हो तो इतना दूर भागो की वो तुम्हारा पीछा न कर पाए..।।

जब जरासंध बार-बार मथुरा पे आक्रमण कर रहा था तब कृष्ण थककर वंहा से अपने सगे संबंधी और प्रजा को लेकर द्वारका आ गए...और खुद को इतना सुदृढ़ किये की उन्होंने, जरासंध के अखाड़े में ही भीम के द्वारा उसे परास्त किया।।

कृष्ण से श्रीकृष्ण की यात्रा इतना आसान नही थी..जिसके जन्म से पहले ही मृत्यु पहरा दे रहा हो,उसका जीवन कैसा हो सकता है..?

श्रीकृष्ण के जीवन के झलकियों को देखे तो ताउम्र वो संघर्षों और द्वन्दों से ही जूझते रहें..मगर चेहरे पर हमेशा मंद मुस्कान मृत्यु तक बनाये रखें..।।

मगर उन्होंने हरेक का निराकरण किया उससे भागे नही,उसका सामना किया...।।

हम किसी को भगवान या पुण्यात्मा तब कहना शुरू करते है..जब हम उनके आचरणों का अनुसरण नही कर पाते या फिर उसके आसपास भी नही होते, तो हम उन्हें भगवान मान लेते है..।।

भगवान मानना आसान है,मगर सही आचरण का अनुसरण करना कठिन है..।।

और हमारे भारतभूमि में कई पुण्यात्मा हुए जो उन आचरणों का अनुशरण करके आज पूजनीय बने हुए है..।।

कृष्ण को पूजना तब सार्थक होगा,जब हम उनके आचरण से कुछ सीखें.. वो बहुत विस्तृत है..आप उनमें से जो भी कुछ चाहे,वो ले सकते है..और उस आचरण का अनुसरण कर सकते है..।।

गुरुवार, 14 अगस्त 2025

भारत की आजादी 15 अगस्त को क्यों..??

आपने अक्सरहाँ सुना होगा.."भारत सोने की चिड़िया था"
कभी सोचा है क्यों..?

इसके अनेक कारण है,मगर इन अनेक कारणों का एक कारण भारत की भोगौलिक स्थिति है..
जिस कारण भारत मे विभिन्न संस्कृति-सभ्यता,भाषा,रहन-सहन,और आर्थिक विकास हुआ..।।

गंगा-सिंधु का उपजाऊ मैदान और मालाबार,कोरोमंडल तट ने भारत को समृद्ध ही नही बल्कि सोने की चिड़िया बनाया..।इन क्षेत्र ने भारत को इतना समृद्ध बनाया की, भारत में कई देशों से धन आना शुरू हो गया..आज जैसे अमेरिका आर्थिक रूप से केंद्र में है,उसी तरह एक समय भारत केंद्र में था..।

आखिर ऐसा क्या हुआ कि भारत का पतन होना शुरू हो गया..??.
●भारत की पतन की शुरुआत की नींव 1600 में ब्रिटेन में,ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना से शुरू होता है..इस कंपनी का पहला जहाज 1608 में सूरत में पहुंचता है..और मुगल शाशकों से टैक्स में छूट प्राप्त कर  मशालों और कपड़ो का व्यापार शुरू करते है..
(जैसे आज हरेक घर मे चीनी समान है, उसी तरह उस समय यूरोप के अधिकांश घरों में भारत के मशालें और कपड़े हुआ करता था।)

● औरंगजेब के मृत्यु के बाद कोई मजबूत मुगल शासक नही हुआ जिस कारण मुग़ल साम्राज्य बिखर गया और कई सूबा अलग होकर खुद को स्वतंत्र मानने लगा..जिसका फायदा अंग्रेज कंपनी ने उठाया..उसे अपना संरक्षण देकर..।।

प्लासी की लड़ाई(1757) और बक्सर की लड़ाई(1764) में अंग्रेजों की जीत और पानीपत की लड़ाई(1761) में मराठों की हार ने भारत को पूर्णतया कंपनी के अधीन बना दिया..।

अंग्रेज के खिलाफ विद्रोह की शुरुआत..??
●अंग्रेज के खिलाफ प्रथम विद्रोह जनजाति लोगों ने करना शुरू किया..
मगर संगठित होकर पहला विद्रोह 1857 में किया गया..जिसने ब्रिटेन की जड़े को हिला दिया..अगर राजवाड़े लोग अंग्रेज का सहयोग नही करते तो भारत को उसी समय ब्रिटेन से मुक्त कर दिया जाता..।(मगर उस समय इन रजवाड़ो का अंग्रेज को सहयोग करने का अपना कारण था)

● ब्रिटिश सरकार तक अपनी बात पहुँचाने के लिए 1885 में कांग्रेस का गठन किया गया..।

पहली बार डोमिनियन स्टेट की डिमांड..
भारत के प्रमुख नेताओं ने प्रथम विश्वयुद्ध में अंग्रेजो का बहुत सहयोग किया..यंहा तक कि भारत से 15 लाख सैनिक प्रथम विश्वयुद्ध में लड़े और लगभग 1 लाख की मृत्यु हो गई..
कांग्रेस ने इस सहयोग के बदले 1917 में पहली बार डोमिनियन स्टेट की मांग की..मगर बदले में जलियावाला नरसंहार किया गया..।
कांग्रेस ने दूसरी बार नेहरू रिपोर्ट(1928) के माध्यम से डोमिनियन स्टेट की मांग की मगर इसका विरोध ब्रिटेन सहित कनाडा,ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और साउथ अफ्रीका के गोरी चमड़ी वाले नेताओं ने किया..।।
(डोमिनियन स्टेट-ब्रिटिश सरकार के अंतर्गत ही एक देश जिसकी अपनी सरकार हो..)

पहली बार पूर्ण स्वतंत्रता की मांग..
नेहरू रिपोर्ट को ठुकरा देने के बाद जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चंद्र बोस जैसे युवा नेताओ ने 1929 के कांग्रेस के लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज की मांग की..

●दूसरा विश्वयुद्ध और डोमिनियन स्टेटस..
1939 से शुरू द्वितीय विश्वयुद्ध में ~23 लाख भारतीय सैनिक को ब्रिटेन की तरफ से युद्ध मे झोंक दिया गया..।
जब इसका विरोध भारत मे शुरू हुआ तो वंहा की सरकार ने कहा आप हमारा सहयोग करें युद्ध के बाद हम डोमिनियन स्टेट का दर्जा देंगें.. मगर भारतीयों ने मना कर दिया और पूर्ण स्वतंत्रता की मांग की...

इस पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री चर्चिल कहता है-
"सम्राट ने भारत मे ब्रिटिश साम्राज्य समाप्त करने के लिए मुझे PM नही बनाया है,भारत को छोड़ना साम्रज्य की हार होगा।"

दूसरे विश्वयुद्ध में ब्रिटेन कमजोर होता जा रहा था और उसके ऊपर अमेरिका का दबाव बढ़ता जा रहा था..।

इलियट रूजवेल्ट अपने किताब "as he saw it" में लिखते है-

फ्रेंकलिन रूजवेल्ट चर्चिल से कहते है- हिटलर और आपमें क्या फर्क है..?उसने यूरोप के एक हिस्से पे कब्जा किया है आपने दुनिया के एक चौथाई हिस्से पे कब्जा किया है..

चर्चिल- 1931 के वेस्टमिंस्टर कानून ने कनाडा,न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसे उपनिवेशों को पहले ही आजादी दे दिया गया है..

रूजवेल्ट- ये काफी नही है,भारत को जितना जल्दी हो सके 5-10 साल में डोमिनियन का दर्जा दीजिये..

चर्चिल भारत का नाम सुनते ही गुर्राया और कहा- मिस्टर प्रेसिडेंट इंग्लैंड एक पल के लिए भी अपना पसंदीदा जगह नही गवाना चाहेगा,जंहा के व्यापार ने इंग्लैंड को महान बनाया ,वह इंग्लैंड के मंत्रियों के शर्तो के हिसाब से चलता रहेगा..।

रूजवेल्ट- भारत एक आधुनिक सरकार,अच्छे स्वास्थ्य और शिक्षा का अधिकार है,अगर आप हरेक साल उसकी सारी दौलत छीन लेंगे तो उसे ये सब कैसे मिलेगा..।।

1946 का नोसैनिक विद्रोह...
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद ब्रिटेन आर्थिक रूप से बदहाल हो गया था,ऊपर से अमेरिका का दबाब और भारत मे 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन हर कस्बा तक पहुंच गया था..।

साथ ही ब्रिटेन के 1945 के आम चुनाव में चर्चिल की कंजरवेटिव पार्टी की हार और एटली की लेबर पार्टी की जीत से बहुत कुछ बदलने वाला था..क्योंकि लेबर पार्टी के सरकार से ब्रिटिश साम्राज्य को संभालना मुश्किल था..और साथ ही एटली उदारवादी था..
एटली ने कहा था-"ब्रिटिश शासन भारत के लिए विदेशी है,इससे भारत मे सुधार नही हो सकता।"

1946 का नोसैनिक विद्रोह ने अंग्रेज को मजबूर कर दिया.
मुम्बई में 11 यूनिट्स,20 हज़ार सैनिक,78 युद्धपोत 23 नेवी स्टेशन इस विद्रोह से जुड़ गया..

ब्रिटेन को समझ मे आ गया कि भारतीय सेना अब भरोसेमंद नही है..

15 अगस्त को आजादी क्यों...? 

 20 फरबरी 1947 को एटली ने कहा हम ब्रिटिश भारत को जून 1948 तक आजाद कर देंगे..।इसके लिए माउंटबेटन को भारत को अंतिम वायसराय बनाया गया..।
माउंटबेटन नेहरू,जिन्ना,पटेल और गांधी से मुलाकात की और 3 जून 1947 को माउंटबेटन प्लान पेश किया..जिसमे भारत पाकिस्तान की विभाजन की योजना थी..।।

4जून1947 को माउंटबेटन प्रेस कॉन्फ्रेंस करते है..
तब एक सवाल आता है..सर् आपने सक्ता सौंपने की तारिख क्या चुनी है..??
माउंटबेटन सोचने लगते है,क्योंकि उन्होंने कोई तारीख नही चुनी होती है..
और कुछ देर सोचने के बाद वो कहते है- 15 अगस्त 1947
(15 अगस्त माउंटबेटन के लिए अहम दिन था क्योंकि इसी दिन उसके नेतृत्व में जापान ने आत्मसमर्पण किया था)

इस घटना को याद करते हुए माउंटबेटन कहते है-'मैं ठान चुका था कि मैं ये साबित कर दूंगा की सब मेरा ही किया धरा है।हालांकि अचानक से अपने मर्जी से घोसित तिथि के कारण लंदन तक विस्फोट हो गया था..।।

अब पता चला कि हम 15 अगस्त को ही स्वतंत्रता दिवस क्यों मनाते है...।


शुक्रवार, 8 अगस्त 2025

भीड़ में..

भीड़ में अच्छा होना आसान है..
अकेले में अच्छा बने रहना मुश्किल है..।
भीड़ में हर रंग....रंग जाता है,
अकेले में हर रंग दिख जाता है..।
भीड़ में हर शब्द कोलाहल बन जाता है..
अकेले में हर शब्द स्पष्ट हो जाता है..।।
भीड़ में हर पहचान छुप जाती है.
अकेले में स्वयं से साक्षात्कार हो सकता है.।
भीड़ में हम कंही खो सकते है..
अकेले में अपनी पहचान बना सकते है..।
मगर..??
भीड़ में अच्छा होना आसान है..
अकेले में अच्छा बना रहना मुश्किल है..।।


शनिवार, 2 अगस्त 2025

हे भगवान कृपा करो..

मैं सुबह-सुबह रास्ते से जा रहा था..तो एक मंदिर दिखा..
मैंने भगवान से कहा-हे भगवान सदमार्ग पे ले चलो..
भगवान जी ने कहा- पहले कुमार्ग तो छोड़ो..।

क्या भगवान के कृपा के बिना आप कुमार्ग छोड़ सकते है..??
शायद बिल्कुल नही..।
मैंने बहुत प्रयास किया..न जाने कितनों के कसम खाये और तोड़े..अंत में,मैंने प्रयास करना ही छोड़ दिया..।
मगर अंतस मन से भगवान को कहा करता था..
 हे भगवान इस दलदल से निकाले..।
मेरा आवाज उन तक पहुंचा,और मैं इतना बीमार हो गया कि मुझमें खड़े होने का हिम्मत तक नही था..ये सिलसिला 1 सप्ताह से ज्यादा तक रहा..सारा दिन बिछावन पर ही लेटा रहता..।

भगवान के कृपा से आज मैं स्वस्थ हूँ..और उस दलदल से निकल चुका हूं..।
हां कभी-कभी वो दलदल मुझे अपनी तरफ खिंचता है,मैं उधर बढ़ भी जाता हूँ,मगर फिर भगवान उधर से खींच कर सदमार्ग पे ले आते है..।।

"भगवान कृपा करते है,उनपे विश्वास रखें..
 हां हमारी आवाज ही देर से पहुंचती है,
 शायद इसलिए कृपा होने में देर लग जाती है।।"



शोध का विषय ये है कि- किस तरह की आवाज भगवान तक पहुंचता है🤔..??

शुक्रवार, 1 अगस्त 2025

मैं थक गया हूँ..

मैं थक गया हूँ..
जबकि अभी तक सही दिशा में चला नही हूँ..
आधी उम्र यू ही सबके नजर से छिपी हुई गंदगियों में बिताया..
लोगों को लग रहा था कि मैं आगे बढ़ रहा हूँ..
मगर सच तो ये है कि उस गंदगियों का आदी हो गया था,
जब उस गंदगी से निकला तबतक सब कुछ खो चुका था..।।
जिस उम्र में लोग सफलता के ऊंचाइयों पे होते है,
मैं उस उम्र में,
एक सफलता के लिए लालायित हूँ..।।


अब वो कुछ कर नही सकता...
जो मैंने सोचा था..।
मगर ऐसा भी नही है कि,
मैं कुछ कर नही सकता..।
अभी भी बहुत कुछ कर सकता हूँ..
जो मैंने सोचा था..
यंहा तक कि उस से भी ज्यादा कर सकता हूँ..
क्योंकि अभी भी मेरे पास कुछ वक्त और उम्र बचे है..
कुछ करने को,खुद को बदलने को..
और खुद के ही नजर मैं गौरवान्वित महसूस करने को..।।

कुछ गलतियां