गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026

मैं अच्छा हूँ या बुरा हूँ..

मैं अच्छा हूँ, या बुरा हूँ..
इसका निर्णय कौन करेगा..??​
ये भीड़...
या मैं स्वयं..
मैं अपने हर सच और हर झूठ से वाकिफ हूँ..
इसलिए सही निर्णय तो मैं ही कर पाऊंगा..।
ये भीड़ सिर्फ मुखौटा देखती है..
मन की गहराई नहीं..।



मैं अच्छा हूँ, या बुरा हूँ..
इसका निर्णय कौन करेगा..??
तराजू तो सबके हाथ में है..
पर बांट सबके अलग अलग है..
कोई स्वार्थ से तोलेगा..
तो कोई संस्कार से..
बेहतर है कि मैं खुद को खुद से तोलूं..।।

मैं अच्छा हूँ, या बुरा हूँ..
इसका निर्णय कौन करेगा..??




"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।  
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥"
(भगवद्गीता)

हम सुंदर दिखना चाहते है..

हम सुंदर दिखना चाहते है..
आखिर क्यों..??
है न बड़ा अजीब सवाल..।
आपको याद है..
आप आखरी बार,खुद के लिए सुंदर कब बने थे..??
नही याद होगा..
क्योंकि हम खुद के लिए सुंदर बनते ही नही..
बल्कि लोग क्या कहेंगे..
इसके लिए सुंदर बनते है..और अपनी सुंदरता का दिखावा करते है। 



हमें सुंदर क्या बनाता है..??
क्या हमारे कपड़े,गहने या फिर हमारा सौंदर्य प्रसाधन..
शायद ये सब नही..
मगर ये वास्तविकता नही है..
ये हमें सुंदर नही, बल्कि हमारे सुंदरता में चार चांद लगाते है..।
तो फिर हमें सुंदर कौन बनाता है..??

हमें आकर्षक कौन बनाता है..??
इन सबका सिर्फ जबाब ही नही हमें मालूम है बल्कि..
हम सब इन खूबियों से लबरेज है..।।

वो चीज आखिर है क्या..??

वो चीज..
आपके चेहरे पे है..
और वो है..
आपकी मुस्कान..।।

कृष्ण सुंदर है अपने मुस्कान के कारण..
कृष्ण सौम्य है,अपने मुस्कान के कारण..
कृष्ण आराध्य है,अपने मुस्कान के कारण..।।

ये मुस्कान सिर्फ मुस्कान ही नही है..
बल्कि स्वयं से आत्मसाक्षात्कार कराने का साधन है..।।
इसीलिए मुस्कुराइए..
खुद के लिए..


बुधवार, 11 फ़रवरी 2026

मौन हूँ मैं..

ना ही कुछ कहने को है..
ना ही कुछ पूछने को है..
इसीलिए मौन हूँ मैं..
मेरे मौन को तुम..
मेरी उदासी मत समझना..।
मेरे मौन में..
वो सबकुछ है..
जो इस शून्य में है..।।




अगर तुम इस शून्य को,समझ सकते हो..
तो मेरे मौन को भी, 
समझ ही लोगे..।
इस शून्य से ही,तो मैं हूँ,
इस शून्य से ही,तो तुम हो..
और तुमको ही समझने को,
मौन हूँ मैं..
क्योंकि मौन ही तो..
शून्य से साक्षात्कार का सबसे सरल साधन है..।।

ना ही कुछ कहने को है..
ना ही कुछ पूछने को है..
इसीलिए मौन हूँ मैं..
मेरे मौन को तुम..
मेरी उदासी मत समझना..।
मेरे मौन में..
वो सबकुछ है..
जो इस शून्य में है..।।

मंगलवार, 10 फ़रवरी 2026

शतरंज से सीख..

अक्सरहाँ जब मैं उदास होता हूँ,वैसे होता नही हूँ..😊 
या फिर क्या करूँ,क्या न करू.. की स्थिति उपजती है,तो मैं अपने मोबाइल/टेब पर शतंरज♟️ खेलता हूँ..अक्सरहाँ हारता हूँ, या फिर जीतता हूँ..मगर अक्सरहाँ हारता ही हूँ..😀।

अभी खेलते-खेलते कुछ सीखने को मिला..वैसे अक्सरहाँ मिलता है..मगर आज मैंने उस सीख को कागज पे उतारा..फिर सोचा क्यों न ब्लॉग पर ही लिखू..और यंही तक नही रुका मैं,फिर मैंने सोचा..हरेक लेवल से जो सीख मिलेगी उसे एक किताब का रूप दूंगा..😊।

आज मैंने..
67वे लेवल.. से सीखा...



हमारा पहला कदम ही जीत का नींव रखता है,और साथ ही जीत और हार का दिशा तय करता है..
(हमारा दिन कैसा होगा,अक्सरहाँ हमारे सुबह के शुरुआत से तय हो जाता है,मगर मैं इससे सहमत नही हूँ..😊हां कभी-कभी ऐसा होता होगा..वैसे आप अपने दिन को कभी भी खुशनुमा बना सकते है..चेहरे पे एक मुस्कान😊 लाकर..
मुस्कुराइए..😊 क्योंकि आप जिंदा है..और जिंदा इंसान कुछ भी कर सकता है..।)

कभी-कभी हमें आगे बढ़ने के लिए मदद की जरूरत पड़ती है...अगर मदद नही लिया तो...जंहा अटके है,वंहा न जाने कबतक अटके रहेंगे इसका पता नही चलेगा..दिन,सप्ताह,महीना,साल या ताउम्र..।
इसलिए आगे बढ़ने के लिए मदद लेने से झिझके नही..मदद ले और आगे बढें.. अपने झिझक को तोड़े..।
(मगर अफसोस हम जैसे कुछ लोग है,जिनकी झिझक टूटती ही नही😊..जिनका खामियाजा उन्हें ताउम्र भुगतना पड़ता है..😢)

मगर एक बात तो है..जब आप बिना मदद के आगे बढ़ते है..और सफल होते है,तो उसका सुकून ही कुछ और होता है..😊और ये सुकून हमेशा आपको सुकून देता है..।
मगर इसका दूसरा पहलू भी है..
अगर आप सफल नही हुए तो..🤔
इसलिए मदद लेने से हिचकिये मत..😊।
आगे बढ़ना है तो मदद लीजिये..चाहे वो आपका दुश्मन ही क्यों न हो..उससे भी मदद लीजिये।

68वा लेवल..से सीखा..
अपने हरेक मोहरे पे नजर रखें.. 
-जिस तरह शतंरज में हम अपने हरेक मोहरे पर नजर रखते है,उसी तरह जिंदगी में भी हमें, अपने हरेक सगे-संबंधी एवं आसपास के लोगों पर नजर रखनी होती है..क्योंकि इनकी अनदेखी कभी-कभी भारी पर सकता है,या फिर इनसे जुड़े रहने से जिंदगी में उत्थान आ सकता है..

शतंरज में कभी भी कोई चाल बिना सोचे समझे न चले-
जिंदगी में अक्सरहाँ हम कई बार बिना सोचे समझे,अनमने ढंग से आगे बढ़ते है,जिसका खामियाजा हमें अक्सरहाँ उठाना पड़ता है..

हमेशा धैर्य बनाये रखें..
कभी-कभी जीत हमारे हिस्से में इसलिय नही आता कि हम जितना चाहते है,बल्कि वो इसलिए आता है कि हम धैर्य बनाये रखते है..।

●69वा लेवल

सोमवार, 9 फ़रवरी 2026

जिंदगी में कुछ लोग..

जिंदगी में कुछ लोग होना चाहिए..
जो हमारे जिंदगी को स्पंदित करें..
जो हमारे जिंदगी में प्रणोदक(propellant) और  उत्प्रेरक(catalyst)का  काम करें..।।
जिंदगी में कुछ लोग होना ही चाहिए..


ये लोग शुरू से ही होते है हमारे आस-पास, मगर अफसोस हमें समझ ही नहीं होता,इन्हें समझने की..
और हम इनसे दूरियां बना लेते है..।।
दूरियां इतना बना लेते है..की फिर कभी करीब जा नही पाते..
अगर करीब चल भी गए..
तो वो अब न हमें स्पंदित करेंगे..
न ही वो प्रणोदक और उत्प्रेरक का काम करेंगे..।।
कोई नही..धैर्य रखें..
वो फिर से आपके स्पर्श से जीवंत हो उठेंगे..
और वो आपको फिर से स्पंदित,प्रणोदित और उत्प्रेरित करेंगे..।।

हमारे आसपास ऐसे लोगों की भरमार है..
इनसे दूरियां नहीं, इनसे करीबियां बढ़ाये..
ये वो लोग है..
जो आपको..आप से हम बनाएंगे...
और, औरों से खास बनाएंगे..।।

जिंदगी में कुछ लोग होना ही चाहिए..
जो हमारे जिंदगी को स्पंदित करें..
जो हमारे जिंदगी में प्रणोदक(propellant) और  उत्प्रेरक(catalyst)का  काम करें..।।
जिंदगी में कुछ लोग होना ही चाहिए..।

हमारे जिंदगी को सबसे पहले स्पंदित,प्रणोदित और उत्प्रेरित हमारे माता-पिता,भाई-बहन,रिश्तेदार, मित्र,शिक्षक,समाज और गुरु करते है..।।
मगर जब हम इनसे दूरियां बना लेते है..
तो फिर इनके बिना हमारा कोई अस्तित्व नही रह जाता..।।
ये वो लोग होते है..
जो हमारे जिंदगी को स्पंदित,प्रणोदित और उत्प्रेरित करके हमारे जिंदगी को नया मुकाम देते है..।।
ज्यादा खुशी मत होइये..😊
कभी-कभी इसका उल्टा परिणाम भी होता है..।
अगर आप उनके स्पंदन,प्रणोदन और उत्प्रेण को अच्छी तरह समझ नही पाए तो..।

जिंदगी में कुछ लोग होना ही चाहिए..

रविवार, 8 फ़रवरी 2026

सफल होना है यार..

सफल होना है यार..
अपनी कहानी बयां करने के लिए..
किस तरह गुजारी बचपन..
किस तरह गुजारा स्कूल का दिन..
किस तरह गुजारा कॉलेज का दिन..
ये सब कहानी सुनानी है सबको..।
सफल होना है यार..
अपनी कहानी बयां करने के लिए..

मैं हूँ कंहा..

मैं हूँ कंहा..

मझदार में..या फिर किनारे पे..

मैं हूँ कंहा..??

न पाँव तले ज़मीन है...न सर पे आसमान है..

मैं हूँ कंहा..??

तलाशता हूँ खुद को मैं..इन लहरों के शोर में..

बंधा हूँ किसी अनकही...अनजानी सी डोर से..।

मैं हूँ कंहा..??

शायद मैं ही नदी हूँ..मैं ही सागर हूँ.. 

मैं ही उसका मझदार हूँ और मैं ही उसका किनारा हूँ..।

मैं हूँ कंहा..??

शायद मैं ही अपनी कश्ती का अब इकलौता सहारा हूँ।

मैं हूँ कंहा..

मझदार में या फिर किनारे पे..

मैं हूँ कंहा..।।

आसमाँ की और देखता हूँ..और नजरें फैलाता हूँ..

फिर खुद से पूछता हूँ..

मैं हूँ कंहा..

इस शून्य में..या फिर उस शून्य मैं..

जिस शून्य में,सब समाहित है..।

मैं हूँ कंहा..??