गुरुवार, 16 अप्रैल 2026

कभी तो जागोगे..

कभी तो जागोगे..
मगर कब जागोगे..
जब सबकुछ खो जाओगे..
क्या तब जागोगे..
मगर तब जागकर भी..
क्या पाओगे..??

अभी भी कुछ नही,खोया है तूने..
अभी भी पाने के लिए,सारा जंहा है..
अब तो जाग जाओ..।

कंही ऐसा न हो..
तुम सोए रह जाओ..
और तुम्हारे हिस्से का भी हिस्सा 
कोई और पा जाए..।

कभी तो जागोगे..
मगर कब जागोगे..।।



मैं क्या था..

मैं क्या था..
मैं क्या हो गया हूँ..😞
अपने राह से भटक कर..
मैं कुछ न रह गया हूँ..।।

मैं क्या था..
मैं क्या हो गया हूँ..
मैं जिस राह से भटक कर..
जिस राह पे चल दिया हूँ..
उस राह के अनुभवों से..
क्यों न सफलता का एक नया राह बना लूं..।
और मैं क्या था..
और मैं क्या हो गया हूँ..।
इस नए स्वरूप को स्वीकार कर..
क्यों न अपने लिए..
एक नए कीर्तिमान का निर्माण करू.. 
मैं क्या था..
और क्या हो गया हूँ..😊।




मंगलवार, 14 अप्रैल 2026

मैं हर जगह विद्यमान हूँ..

मैं न मिलूं तो हैरान मत होना..
क्योंकि मैं तो, 
हर जगह विद्यमान हूँ..।
खुद को कुरेदना..
खुद को डुबोना..
आध्यात्मिक गहराइयों में..
उस गहराइयों में भी,
मेरी परछाइयां न दिखें..
तो हैरान मत होना..।
क्योंकि मैं तो हर जगह विद्यमान हूँ..।

थोड़ा अपना औरों के प्रति नजरिया बदलना..
अपने वाणी में थोड़ा मधुरता लाना..
औरों में भी मेरा अक्स देखना..
अगर न दिखाई दे..
तो हैरान मत होना..।
क्योंकि मैं तो हर जगह विद्यमान हूँ..।।

अगर मैं कंही न मिलूं..
तो अपने अंदर ही गौता लगाना..
और हृदयस्थली पर अपना ध्यान लगाना..
मैं यंही विद्यमान हूँ..
आज से नही..
तुम्हारे सृजनकाल से ही..।।

मैं न मिलूं तो हैरान मत होना..
क्योंकि मैं तो, 
हर जगह विद्यमान हूँ..।



क्यों न शुरू से शुरूआत करें..

क्यों न शुरू से शुरुआत करें..
फिर से एक नई शुरुआत करें..।
जो पीछे छूट गया उसे वहीं रहने दें,
वक्त की लहरों को अपनी दिशा में बहने दें..।
क्यों न शुरू से शुरुआत करें..
फिर से एक नई शुरुआत करें..।

नाकामी की धूल को जरा झाड़ कर,
अपनी हिम्मत को फिर से संवार कर..।
क्यों न शुरू से शुरुआत करें..
फिर से एक नई शुरुआत करें..।



खुद के बारे में सोचो..

खुद के बारे में सोचो..
आखिर तुम कर क्या रहे हो..??
क्या यही सोच के तुम बड़े हुए हो..??
खुद के बारे में सोचो..
तुम कर क्या रहे हो..??
क्या अपने सोच से..
तुमने समझौता कर लिया है..
अगर,हां..??
तब ठीक है..
तुम जैसे जी रहे हो..
वैसे जियो..।

अगर,नही...
तो धिक्कार है,तुमपे..
तुम अबतक आखिर कर क्या रहे हो..??
सिर्फ सोचने से क्या होता है..
वो पैर जो जकड़ चुके है..
उसे हिलाओ,डुलाओ..
और अपने सोच को साकार करने के लिए..
उस और कदम बढ़ाओ..।।



न तुम आलसी हो..
न ही तुम कायर हो..
न ही तुम निर्लज्ज हो..
न ही तुम नकारा हो..।
तुम में वो सबकुछ है..
जिससे तुम अपने सपने को 
साकार कर सकते हो..
तो फिर आखिर क्यों..??
अपना जिंदगी बर्बाद कर रहे हो..??
खुद के बारे में सोचो..
आखिर तुम कर क्या रहे हो..??

अगर तुम ठान लो..

अगर तुम ठान लो कि जीना है..
तो तुम्हें, जीने से कौन रोक सकता है..।
क्योंकि..
मैंने सूखे हुए पेड़ो से कलगी देते हुए देखा है..
मैंने मुरझाए हुए चेहरे पे मुस्कान देखा है..।
मैंने असंभव को संभव होते हुए देखा है..।।

आखिर कब तक ये सब सिर्फ मैं देखता रहूंगा..
इनसब से हौंसला लेकर..
अपने सपनों को साकार करूँगा..।।

अगर तुम ठान लो कि जीना है..
तो तुम्हें, जीने से कौन रोक सकता है..।



तुम कर सकते हो..

अगर अपना सपना साकार करना हो..
तो अपने प्रति क्रूर होइये..
सिर्फ अपने प्रति ही नही बल्कि..
अपनों के प्रति भी क्रूर होइये..।।




आप जबतक अपने प्रति क्रूर नही होंगे..तो आपके सपने, सपने ही रह जाएंगे।समय हाथ से निकल जायेगा और आप सिर्फ हाथ मलते रह जाएंगे..।
खुद को देखिए आईने..
क्या खुद पे गुस्सा नही आता,
क्या खुद से घिन्न नही आता..।
क्या थे आप और क्या हो गए है आप..।।

तोड़ दीजिए उस बेड़ियों को..
जो अब ढाल बन चुका है..
नोच दीजिए उस केचुल को,
जो आपका पहचान लील रहा है..।
माना कि ये संभव नही है..
मगर असंभव आखिर क्या है..।

खुद से पूछिए..
आखिर क्यों जन्मा आपके माता-पिता ने..??
क्या अपेक्षा किया आपके चाहने वालों ने..??
और क्या कर रहे है आप..??
खुद से पूछिए..।

शायद ये जबाब देने की हिम्मत न हो आपमें..
मगर जो भी हो..
आप कायर तो नही है..।

एक बार फिर क्यों नही प्रयास करते हो..
अपने उस छवि को क्यों नही साकार करते हो..
जिस छवि से अपेक्षा थी सबोको...
उस छवि को क्यों नही साकार करते हो..
एक बार फिर क्यों नही प्रयास करते हो..।

आखिर क्या नही होता है..
प्रयास करने से..
लोगों ने हिमालय के साथ चंद्रमा को भी फतह किया..
तुम आखिर क्यों नही..
अपने सपनों को फतह कर सकते हो..??

खुद को देखो एकबार आइने में..
और फिर से उस छवि को स्वीकार कर..
अपने सपने को साकार कर..।।
तुम कर सकते हो..।।
सच मे तुम कर सकते हो..।।

कभी तो जागोगे..