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प्लीज् मुस्कुराये, क्योंकि आपके मुस्कुराने से ओरो के चेहरे पे भी मुस्कान आएगा..।।
सोमवार, 13 अप्रैल 2026
मैं खो जाना चाहता हूँ..
रविवार, 12 अप्रैल 2026
अलविदा 'स्वर-साम्राज्ञी': आशा भोसले
आज संगीत की दुनिया का एक ऐसा सूरज अस्त हो गया है, जिसने अपनी किरणों से सात दशकों तक भारतीय सिनेमा और संगीत को आलोकित किया। आशा भोसले, जिन्हें दुनिया प्यार से 'आशा ताई' कहती थी, अब हमारे बीच नहीं रहीं। लेकिन क्या वाकई एक कलाकार मरता है? शायद नहीं।
उनकी आवाज़ की खनक, उनकी हरकतों में छुपी शरारत और उनके सुरों की गहराई अब हमारे जीवन का हिस्सा बन चुकी है।
आशा जी का जीवन एक प्रेरणादायक कहानी है। एक ऐसे दौर में जब उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर की आवाज़ का जादू पूरी दुनिया पर छाया हुआ था, अपनी अलग जगह बनाना लगभग नामुमकिन था। लेकिन आशा जी ने कभी हार नहीं मानी। उन्होंने 'सेकंड लीड' और उन गानों को अपनाया जिन्हें उस दौर में चुनौतीपूर्ण माना जाता था। उन्होंने साबित किया कि "प्रतिभा को किसी की परछाई दबा नहीं सकती।"
हम अक्सरहाँ आशा ताई को मुस्कुराते ही देखे है..मगर एक दौर ऐसा था जब ये अपने जिंदगी से तंग आकर जिंदगी से मुँह मोड़ने की सोच रही थी..।
1949 में 16 साल की उम्र में लता मंगेशकर के सचिव गणपत राव भोंसले से भाग कर शादी कर लेती है..जिस कारण इनकी बहन और माँ इनसे रिश्ता तोड़ लेती है..।जिस कारण इनको आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा..साथ ही जिसके लिए परिवार छोड़ा वो इनके साथ हिंसा करने लगा जिस कारण 1960 में तलाक ले लिया..।
जब इन्होंने अपने पति से तलाक ले लिया तब फिर से परिवार वालों से संबंध अच्छा हो गया..।
•1956 में R.D.बर्मन से मुलाकात होती है और दोस्ती गहरी हो जाती है..इन दोनों ने मिलकर कई सुपरहिट सदाबहार गाने दिए है..।
R.D.बर्मन आशा भोंसले से शादी करना चाहते थे,मगर R.D वर्मन के परिवार वाले नही चाहते थे क्योंकि आशा भोंसले उनसे उम्र में 6 साल बड़े थे..जब RD बर्मन के पिता की मृत्यु हो गई और माँ की तबियत अस्वस्थ रहने लगी,तब उन्होंने 1980 में आशा भोंसले से शादी कर लिया..।।
●1943 में 10 वर्ष की उम्र में पहला गाना मराठी में गाया।
●1948 में फ़िल्म चुनरियां के लिए हिंदी में पहली बार गाया।
●उन्होंने 20 भाषा मे 12हज़ार से ज्यादा गाना गाई..।
●2011 में इनका नाम गिनीज बुक वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज है..।
●2010 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया..।
●1997 में ग्रेमी अवार्ड में नॉमिनेट होने वाली पहली भारतीय गायिका बनी थी..।।
आज वो हमारे बीच में नही है..मगर उनके गाने आज भी हमारे बीच मे हो..वो अपने सदाबहार गानों के कारण हमेशा जिंदा रहेंगी..।।
"संगीत की दुनिया मे कोई दूसरी 'लता' तो बन सकती है,लेकिन 'आशा' बनना नामुमकिन है।-लता मंगेश्कर
कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
बुधवार, 8 अप्रैल 2026
मैं थोड़ा देर सोना चाहता हूँ..
मंगलवार, 7 अप्रैल 2026
शिव..
क्या आप स्वस्थ हैं?
अक्सर जब कोई हमसे पूछता है, "कैसे हैं आप?"
तो हमारा सहज जवाब होता है, "ठीक हूँ।" लेकिन क्या हम वाकई ठीक होते हैं?
क्या केवल बीमारी का न होना ही 'स्वस्थ' होना है?
समदोषः समाग्निश्च समधातुमलक्रियः।
प्रसन्नात्मेन्द्रियमनाः स्वस्थ इत्यभिधीयते॥
(सुश्रुत संहिता)
जिसका वात-पित्त-कफ (दोष) संतुलित हो, जिसकी जठराग्नि तेज हो, जिसके शरीर के धातु और मल-क्रियाएं सामान्य हों, और सबसे महत्वपूर्ण—जिसकी आत्मा, इंद्रियां और मन प्रसन्न हों, वही वास्तव में 'स्वस्थ' है।
वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य के आंकड़े चिंताजनक हैं..
मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health): विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में हर 8 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी मानसिक विकार से जूझ रहा है। भारत में, लगभग 15% वयस्क ऐसे हैं जिन्हें किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य सहायता की आवश्यकता है।
जीवनशैली बीमारियाँ (Lifestyle Diseases): एक शोध के अनुसार, भारत में लगभग 60% मौतें गैर-संचारी रोगों (NCDs) जैसे हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर के कारण होती हैं, जिनका सीधा संबंध हमारे खान-पान और तनाव से है।
शारीरिक निष्क्रियता: 'द लैंसेट' की रिपोर्ट बताती है कि लगभग 50% भारतीय महिलाएं और 25% पुरुष पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं कर पाते, जो भविष्य में गंभीर रोगों का कारण बन सकता है।
शारीरिक स्वास्थ्य: क्या आपका शरीर आपका साथ दे रहा है?
योग के अनुसार एक स्वस्थ शरीर वह है जहाँ ऊर्जा का प्रवाह निर्बाध हो। क्या आप बिना जल्दी थके अपने दिनभर के कार्य कर पा रहे हैं?
मानसिक स्वास्थ्य: विचारों का संतुलन
मानसिक थकान शारीरिक थकान से कहीं ज्यादा घातक है। सांख्य दर्शन के अनुसार, दुखों का निवारण विवेक और आत्मज्ञान से होता है। स्वस्थ मन वह है जो विपरीत परिस्थितियों में भी विचलित न हो।
प्रतिदिन 10-15 मिनट का ध्यान (Meditation) मानसिक स्वास्थ्य के लिए 'शील्ड' का काम करता है।
सामाजिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य
मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। यदि हमारे संबंध कटु हैं, तो हम स्वस्थ नहीं रह सकते। साथ ही, जब हम अपने अंतर्मन से जुड़ते हैं, तब ही हम 'स्वस्थ' (स्व + स्थ = स्वयं में स्थित होना) होते हैं।
रविवार, 5 अप्रैल 2026
मैं जब भी..
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क्या सोच रहे हो तुम..?? यही सोच रहा हूँ कि.. क्या सोच रहा हूँ मैं..। सच कहूं तो.. कुछ तो सोच रहा हूँ मैं... मगर अफसोस क्या सोच रहा हूँ.. यह...
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अतीत से लेकर वर्तमान तक,हम सभी दुःखो से घिरे हुए है.. आखिर क्यों..?? इस क्यों का जबाब हम अतीत से ही ढूंढते आ रहे है..हमारे ऋषियों-मनीषियों न...
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हम सब खास(special) दिखना चाहते है.. मगर सवाल है क्यों..?? इसका सबसे बड़ा कारण है कि हम स्वयं को खास समझते ही नही..। जब हम स्वयं को खास समझने ...







