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प्लीज् मुस्कुराये, क्योंकि आपके मुस्कुराने से ओरो के चेहरे पे भी मुस्कान आएगा..।।
शनिवार, 7 फ़रवरी 2026
क्रिकेट... ट्राय बॉल..और बचपन की यादें..
मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026
शिव कौन है..??
जाबालि उपनिषद सामवेद से संबंधित एक लघु उपनिषद है। इस उपनिषद में महर्षि जाबालि और ऋषि पैप्पलाद के बीच संवाद के माध्यम से शिव के बारे में बताया गया है।
ऋषि पैप्पलाद ने जाबालि से पूछा शिव कौन है तो जाबालि कहते है-
सहोवाच जाबालिः-
"पशुपतिं सवज्ञं जगदुदयस्थितिभङ्गहेतुं सर्वेश्वरं महादेवं ज्ञात्वा मृत्युमुत्तीर्यते॥
जाबालि कहते है - शिव समस्त पशुओं (जीवों) के स्वामी है, वो सर्वज्ञ, जगत की उत्पत्ति, स्थिति और विनाश का कारण है, सर्वेश्वर 'महादेव' को जानकर ही मनुष्य मृत्यु को पार कर सकता हूं।
◆शिव केवल देवता नहीं, बल्कि ब्रह्मांड का आधार है।
★ शिव कौन है - शिव पशुपति है..
"अहंकारमयाः जीवाः पशवः परिकीर्तिताः।
तेषां पतित्वाद्देवेशः पशुपतिरित्युच्यते॥"
अहंकार से युक्त जितने भी जीव हैं, वे 'पशु' कहलाते हैं। उन सभी जीवों के स्वामी (पति) होने के कारण महादेव को 'पशुपति' कहा जाता है।
★शिव कौन है- शिव 'भस्मधारी' है।
अग्निरेवेति भस्म। वायुरिति भस्म। जलमिति भस्म। स्थलमिति भस्म। व्योमेति भस्म। सर्वं ह वा इदं भस्म॥
अग्नि भस्म है, वायु भस्म है, जल भस्म है, पृथ्वी भस्म है और आकाश भस्म है।संपूर्ण दृश्यमान जगत भस्म का ही विस्तार है।
◆प्रलय के पश्चात जो शेष बचता है,वही शिव है..
शिव ही शिव है..
शिव के सिवा कुछ और नही है..
शिव ही शिव है..
शिव..शिव..शिव..
यात्रा..
सोमवार, 2 फ़रवरी 2026
हादसा..
शिव कौन है..??कैवल्योउपनिषद के अनुसार
कैवल्यो उपनिषद के अनुसार शिव..
इस उपनिषद में ब्रह्माजी शिव के स्वरूप के बारे में ऋषि आश्वलायन को बताते हुए कहते है -
◆ शिव ध्यान स्वरूप है(सगुण और निर्गुण का संगम)
अचिन्त्यमव्यक्तमनन्तरूपं शिवं प्रशान्तममृतं ब्रह्मयोनिम्।
तमादिमध्यान्तविहीनमेकं विभुं चिदानन्दमरूपमद्भुतम् ॥
उमासहायं परमेश्वरं प्रभुं त्रिलोचनं नीलकण्ठं प्रशान्तम्।
ध्यात्वा मुनिर्गच्छति भूतयोनिं समस्तसाक्षिं तमसः परस्तात्।।
शिव अचिन्त्य, अव्यक्त, अनन्त रूपों वाले, कल्याणकारी, परम शान्त, अमृतस्वरूप और ब्रह्म का कारण हैं। वे आदि, मध्य और अन्त से रहित हैं, वे अद्वितीय, सर्वव्यापी, चेतन-आनन्दस्वरूप और निराकार हैं। माता उमा के साथ, परमेश्वर, प्रभु, तीन नेत्रों वाले, नीलकण्ठ और अत्यन्त शान्त स्वरूप का ध्यान करके मुनि समस्त भूतों के कारण, सबके साक्षी और अज्ञान से परे उस परम तत्व को प्राप्त कर लेते हैं।
◆ शिव सर्वव्यापत है-
स ब्रह्मा स शिवः सेन्द्रः सोऽक्षरः परमः स्वराट्।
स एव विष्णुः स प्राणः स कालोऽग्निः स चन्द्रमाः ॥
वो ही ब्रह्मा हैं, वो ही शिव हैं, वो ही इन्द्र हैं, वो ही अविनाशी परम स्वराट् (स्वयं प्रकाशमान) हैं। वही विष्णु हैं, वही प्राण हैं, वही काल, अग्नि और चन्द्रमा भी हैं।
◆ शिव काल से परे है और शिव ही सत्य है..
स एव सर्वं यद्भूतं यच्च भव्यं सनातनम्।
ज्ञात्वा तं मृत्युमत्येति नान्यः पन्था विमुक्तये ॥
जो कुछ भी पहले बीत चुका है और जो भविष्य में होने वाला है, वह सब कुछ वह सनातन शिव ही है। उन्हें जानकर ही मनुष्य मृत्यु को पार कर सकता है,मोक्ष का इसके अतिरिक्त और कोई मार्ग नहीं है।
◆शिव अद्वैत है (आत्मा और शिव एक ही है)
मय्येव सकलं जातं मयि सर्वं प्रतिष्ठितम्।
मयि सर्वं लयं याति तद्ब्रह्माद्वयमस्म्यहम् ॥
मुझसे ही सब कुछ उत्पन्न हुआ है, मुझमें ही सब प्रतिष्ठित है और मुझमें ही सब विलीन हो जाता है,वो अद्वैत ब्रह्म (शिव) मैं ही हूँ।
कैवल्योपनिषद् के अनुसार शिव 'समस्तसाक्षिम्' (सबके साक्षी) हैं। वे 'माया' और 'तम' (अज्ञान) से परे हैं..
शिव ही शिव है..
शिव के सिवा,
कुछ और नही है..
शिव ही शिव है..
रविवार, 1 फ़रवरी 2026
मन चंगा तो कठौती में गंगा..
"शिव" कौन है..??
"ॐकार एव भगवान् रुद्रः
तस्माद् ॐकारं नित्यं जपेत्॥"
ॐ ही रुद्र है,और रुद्र ही शिव है,और सृष्टि का मूल ध्वनि स्पंदन भी ॐ है..।
★शिव ही मूल नाद और कंपन है..।
◆अथर्वशीर्ष (रुद्र) उपनिषद के अनुसार -
"साक्षी चेताः केवलो निर्गुणश्च
सर्वव्यापी सर्वभूतान्तरात्मा॥"
शिव वो चेतना है जो सबकुछ देखती और करती है,लेकिन वो स्वयं किसी क्रिया में नही बंधती है..
★जो देख रहा है,वही शिव है..।
◆कालाग्निरुद्र उपनिषद के अनुसार -
"रुद्रः कालानां कालः।"
शिव समय से परे है..।
★जो समय से परे है वही शिव है..।
◆श्वेताश्वतर उपनिषद के अनुसार -
"एको हि रुद्रो न द्वितीयाय तस्थे।"
"ज्ञानमेव मोक्षसाधनम्।"
ज्ञान ही मोक्ष(शिव) का साधन है..।
◆जाबाल उपनिषद के अनुसार -
"आत्मैव शिवो ज्ञेयः।"
आत्मा या स्वयं को जानना ही शिव है
★स्वयं को जानना ही, शिव को जानना है।
◆महानारायण उपनिषद के अनुसार -
"नारायणो रुद्रः।"
नारायण ही रुद्र है..।
◆पंचब्रह्म उपनिषद के अनुसार -
"सद्योजातं प्रापदामी वामदेवं सदाशिवं।"
मैं सृष्टि के आरम्भकर्ता,करुणामय रक्षक और शाश्वत कल्याणकारी शिव से मोक्ष की कामाना करता हूँ..।
★ सृष्टि की हर क्रिया ही शिव है।
◆ रुद्रहृदय उपनिषद के अनुसार -
"हृदयकमले मध्ये सदा शिवः प्रतिष्ठित:।"
शिव हृदयकमल के मध्य में विराजमान है..।
★ जो भीतर है,वही शिव है..।
◆दक्षिणामूर्ति उपनिषद के अनुसार -
"मौनव्याख्या प्रकटित परब्रह्मतत्त्वम्।"
जो मौन के द्वारा परमब्रह्म का बोध कराये वही शिव है।
★ मौन ही शिव है।
◆स्कन्द उपनिषद के अनुसार -
"शिवज्ञानात् परं नास्ति मोक्षसाधनमुक्तमं।"
शिव को जानने से बड़ा कोई मोक्ष का साधन नही है..।
★शिव ही मोक्ष है..
◆सर्वसार उपनिषद के अनुसार -
"सर्वशास्त्रसारं तत्त्वं शिव एव न संशयः।"
सभी शास्त्रों का सार तत्व शिव ही है..।
★ सबका सार शिव ही है..।
◆योगशिखा उपनिषद के अनुसार -
"योगेन चित्तशुद्धिः शिवसाक्षात्कारः।"
योग से चित्त की शुद्धि होती है और शिव का साक्षात्कार होता है।
★ योग का परमलक्ष्य शिव ही है..।
शिव को शास्त्रों और वेदों के अध्धयन से नही जान सकते क्योंकि इनकी एक सीमा है,और शिव हरेक सीमाओं से परे है..
तो फिर शिव को कैसे जान सकते है..??
शिव को जानने के लिए शिव होना होगा..।
ये उतना ही सरल है..
जितना फूलों का खिलना,चिड़ियों का चहचहाना..
हवाओं का बहना, बादल का बरसना..
ऋतुओं का बदलना,तारो का चमकना..
और हमारा आपका मुस्कुराना..।
ये जितना सरल है,उतना ही सरल शिव को जानना है..।
मगर..ये उतना ही कठिन है..
जितना दिन और रात का होना..
तारों का चमकना,बादल का बरसना,
फूलों का खिलना और हमारा आपका मुस्कुराना..।
शिव कौन है..??
ये सवाल ही गलत है..शिव कौन नही हैं..
या फिर शिव क्या नही हैं..ये सवाल होना चाहिए..।
यंहा शिव के सिवा कुछ और नही है..
सिर्फ शिव ही शिव हैं..
शिव के सिवा कुछ और नही है..
मैं भी शिव हूँ..
तू भी शिव है..
शिव ही शिव है..
शिव के सिवा कुछ और नही है..।
शिव ही शिव है..।।
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क्या सोच रहे हो तुम..?? यही सोच रहा हूँ कि.. क्या सोच रहा हूँ मैं..। सच कहूं तो.. कुछ तो सोच रहा हूँ मैं... मगर अफसोस क्या सोच रहा हूँ.. यह...
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हम सब खास(special) दिखना चाहते है.. मगर सवाल है क्यों..?? इसका सबसे बड़ा कारण है कि हम स्वयं को खास समझते ही नही..। जब हम स्वयं को खास समझने ...













