रविवार, 30 अगस्त 2026

सबकुछ बदल रहा है..

लोग बदलते है..
जनाब लोग ही नही..
सबकुछ बदलता है..
जिससे आपको लगाव होता है..
उसके बदलाव का अहसास होता है..
जिससे लगाव नही होता है..
उसके बदलाव का अहसास नहीं होता है..।।

आपने खुद को सीमित ही इतना कर लिया है कि..
आपको सिर्फ कुछ लोगों का बदलने का अहसास होता है..
खुद को इतना विस्तारित करें..कि
हर क्षण ब्रह्मांड में हो रहे बदलाव का अहसास कर सकें...।
छोड़िए हटाइये खुद को इतना विस्तारित मत कीजिये..
खुद को इतना संकुचित कीजिये कि
अपने हृदय गति और सांसों में हो रहे बदलाव का अहसास हो सके..।

ये कैसे होगा..?
ये कैसे होगा नहीं,ये हर क्षण हो रहा है..
बस अपने आपको स्थिर करके देखना है..।।
खुद के अंदर सांसों के सहारे गोता लगाइए..
और सांसों के सहारे बाहर आइए..
तबतक गोता लगाते रहिये जबतक वो मिल न जाये...
जिसकी आपको तलाश है..।




शनिवार, 29 अगस्त 2026

मेरी कोई इच्छाएं नहीं है..
सारी इच्छायें जैसे मर चुकी है..
या फिर ये सब चीज तुच्छ लगने लगी है..
जब अपने अतीत में झांकता हुए बहुत पीछे जाता हूँ..
तब अहसास होता है कि मेरी कोई इच्छायें क्यों नही है..।
मैंने अपने अतीत में वो सब चीज का उपभोग किया है..
जो विश्व की 0.10% लोग ही उपभोग कर पाते है..
बड़ी मुश्किल से छुटकारा पाया..
मगर अभी भी एक चीज से छुटकारा नही पा रहा हूँ..
शायद इस जन्म उससे भी छुटकारा पा लूंगा..
और उस उच्चतम स्तर को छू पाऊंगा..
या फिर उसमें विलीन हो पाऊंगा..।
फिलहाल तो कोई आसार नही दिख रहें..
मगर बदलाव शुरू हो चुके है..😊

गुरुवार, 27 अगस्त 2026

कभी-कभी..

कभी-कभी मुझे भी हताश और निराश होने का मन करता है..
मगर मालूम नहीं क्यों..
अगर मैं, हताश और निराश होता भी हूँ तो..
पानी के बुलबुले के समान क्षणभंगुर..
और फिर..
निर्लज आसमान की तरह मुस्कुराने😊 लगता हूँ..।
शायद हमारी नियति ही मुस्कुराना है..
हम ही मुस्कुराना भूल जाते है..।
अपने आसपास देखिए..
हरेक पेड़-पौधे और जीव-जंतु को..
सब मुस्कुरा रहें है..
अगर नही मुस्कुरा रहें है तो..
मुस्कुराने की कोशिस कर रहें है..।
और हम क्या कर रहें है..?


मंगलवार, 25 अगस्त 2026

मैं क्यों ढूंढता हु उन्हें..

मैं क्यों ढूंढता हूँ उन्हें..
जिन्हें मेरी फिक्र ही नही..।
क्यों ना मैं खुद को ढूंढू..
इतना ढूंढू..
कि दुनिया फिर मुझे ढूंढें..।
मैं क्यों ढूंढता हूँ उन्हें..
जिन्हें मेरी फिक्र ही नही..।



शुक्रवार, 21 अगस्त 2026

जिंदगी..

जिंदगी व्यर्थ मालूम होती है..
क्या होना चाहता था,
और क्या हो गया मैं..
कंहा जाना चाहता था..
और कंहा आ गया मैं..।
क्या अब भी कोई उम्मीद बची हुई है..
तो हां,अभी भी बहुत उम्मीद बची हुई है..
आपके पास अभी भी उतना समय है कि..
आप जो होना चाहते थे वो हो सकते है..
तो उदास मत होइए..
और जो हो सकता है..
वो सब कुछ कीजिये..
चाहे जैसे भी हो..
अपने लक्ष्य को हासिल कीजिये..।।


गुरुवार, 20 अगस्त 2026

बप्पा..

मैं अक्सरहाँ भूल जाता हूँ आपको..
मगर आप ही हो,कि अक्सरहाँ दस्तक दे जाते हो..
और मुझे अपने आगोश में ले लेते हो..
आखिर क्यों करते हो ऐसा..?
मैंने तो कभी..
अच्छे से न नाम लिया,न जप किया,न तप किया..
तो फिर आखिर क्यों..
मुझपे कृपा वरसा रहें हो..
मैं तो उस योग्य भी खुद को नही मानता..
की आपके चरणों की धूलि को अपने सर से लगा सकूँ..
मगर आप हो.. 
जो मेरे साँसों में रच बस गए हो..
ज्योहीं आपसे दूरियां बढ़ती है..
आप हरदफ़ा दस्तक दे जाते हो..।

क्या करूँ,कैसे करू..
की आपमें समाहित हो जाऊं..।
आप ही मार्ग दिखाओ बप्पा..
इस जीवन को अब..
सार्थक बनाओ बप्पा..।





बुधवार, 19 अगस्त 2026

अहमियत..

मुझे लगा मेरी अहमियत कुछ तो होगा..
उनके जिंदगी में..
मगर में गलत था..।
उनके लिए शायद में नहीं..
कुछ और अहमियत रखता है..।