शुक्रवार, 29 मई 2026

आप कब हंसते है..

आपने कभी गौर किया है..
हमें हंसी कब आती है..??
अक्सरहाँ हमें दूसरों की गलतियों,नादानियों या उसके दयनीय स्थिति पे ही हंसी आती है..।
है ना..।
मगर हम कभी गौर नही करते..।

चाहे हम दोस्तों के बीच में हो,या परिवार के सदस्यों के बीच में हो..
अक्सरहाँ हम किसी के गलतियों,नादानियों या फिर उसके दयनीय स्थिति पे ही हंसते है..।
अगर आप कोई मूवी या कोई कॉमेडी शो देखे..
अक्सरहाँ हम उनके गलतियों या उनकी दयनीय स्थिति पे ही हंसी आती है..।
हमसब ने "हेरा-फेरी" देखा ही होगा..इस फ़िल्म का हरेक किरदार की स्थिति दयनीय ही है..और हम इन्हीं परिस्थितियों को देखकर हंस रहे होते है..।।

आखिर हमें दूसरों पे हंसी आती क्यों है..??
मनोवैज्ञानिक के अनुसार जब हम किसी को कोई गलती करते,या किसी उलझन में देखते हैं, तो हमारे अवचेतन मन को लगता है कि, मैं इस स्थिति में नहीं हूँ या मैं इससे बेहतर हूँ। यह अचानक मिलने वाली मानसिक राहत और श्रेष्ठता की भावना ही हंसी के रूप में बाहर आती है।

हंसी हमें कब-कब आती है..??
दूसरों की गलतियों पे..
● अपनी गलती याद आ जाने पर..
● जब हम समूह में होते है..
● तनाव या मुसीबत से निकलने पे..



बुधवार, 27 मई 2026

लोग बदलते है..

लोग बदलते है..??
इसमें कौन सी बड़ी बात है..
प्रकृति की बनाई हुई हर चीज समय-दर-समय बदल रही है..।

मगर..
मगर क्या..??
इंसान के गुण समय-दर-समय बदलते रहते है..
मगर प्रकृति के द्वारा बनाई हुई हरेक चीज अपने गुण को नही बदलती..।
क्यों..?
क्योंकि आप प्रकृति द्वारा निर्मित अन्य चीजों के साथ उतना वक़्त नही गुजारते..
इसिलिय आपको उनके गुणों के बदलाव का अहसास नही होता..।

आप समझ नही रहे हो..
मैं कहना क्या चाह रहा हूं..।
मैं सब समझ रहा हूँ..
आप जो कहना चाह रहे है..।

हम खुद बदल रहे है..
इसिलिय हमें दूसरों में बदलाव नजर आता है..।
या फिर हम खुद को नही बदल रहें है..
इसिलिय हमें दूसरों में बदलाव नजर आता है..।।

हम चाहते है..
लोग मुझसे वैसा ही व्यवहार करें..
जैसा कल कर रहें थे..
मगर क्या ये संभव है..?
बिल्कुल नही..।
क्योंकि,हो सकता है,आज उनके ऊपर जिम्मेदारियां बढ़ गई हो..
आज उनकी परिस्थितियां बदल गई हो..।
तो फिर हम कैसे कह सकते है..
की वो आज भी मुझसे..
कल जैसा ही व्यवहार करें..।

आप खुद को बदलिए..
और परिस्थितियों का मूल्यांकन कीजिये..
तब कुछ नही बदला नजर आएगा..।

वैसे आपके पास इतना समय है..
की आप लोगों को बदलते हुए देख पा रहें है..😊
अगर हां..।
तो खुद को व्यस्त रखिये..
आपको कोई बदलाव महसूस नही होगा..।

जैसा सूरज,चाँद,तारे..
सबकुछ बदल रहे है..
मगर हमारे पास समय ही नही है,
उनके अवलोकन करने का..
इसीलिए वो हमें बदले हुए नजर नही आते..😊।



शिकायत न करें..

जब आप किसी की शिकायत कर रहें होते है..
तब आप अपनी कमियों का ही इजहार कर रहें होते है..।
इसिलिय जब भी किसी की शिकायत करें..
तो सोच ले..
कंही आप अपने कमियों का तो इजहार नही कर रहें है..।

वंही जब आप किसी की प्रसंशा कर रहे होते है..
तो अप्रत्यक्ष रूप से आप स्वयं को ही निखार रहें होते है..।।

दोनों ही परिस्थितियों में आप..
किसी के आंख के तारे..
तो किसी के आंख के कांटे..
बन जाते है..।।

तो क्या किसी की शिकायत नही करें..??
करें..
अगर आप उनके कमियों को दूर कर सकते है,
या फिर उनकी मदद कर सकते है तब..।।
अन्यथा मजे लेने के लिए नही..
या फिर दिल का बोझ हल्का करने के लिए नही करें..
तो फिर क्या करें..
उनकी प्रसंशा करें..
क्योंकि हरेक इंसान में..
अवगुण से ज्यादा गुण होता है..।
और हमें उनका सिर्फ एक ही अवगुण दिखता है..।।


आप खास हो..

कभी-कभी हम अक्सरहाँ उन चीजों के लिए बाहर भटकते रहते है..
जो चीज हमारे अंदर ही है..
उसे ढूंढने के लिए कितना प्रयत्न करते है..
मगर जब सही समय आता है..
वो चीज खुद व खुद प्रकट हो जाता है..।

इसिलिय सही वक्त का इंतजार करें..
जब जिस चीज की जरूरत होगी..
वो आपको जरूर मिलेगी..
बस आप अपने आप को योग्य बनाते रहें..।

कभी-कभी हम कुछ चीजों को जबरदस्ती हासिल कर लेते है..
जिसके लिए हम उस वक़्त योग्य नही होते..
जिस कारण वो चीज बोझिल लगने लगती है..।

आप जो चाहते है..
वो आपको जरूर मिलेगा..
बस अपने आप को तराशते रहें..
क्योंकि जब वो चीज आपके पास आये..
तो वो खुद को गौरवान्वित महसूस करें..।।

आप खास हो..
क्योंकि आप जैसा..
इस ब्रह्मांड में दूसरा कोई नही है..
इसिलिय आपकी जिम्मेदारी भी है..
की अपने आप को उस काबिल बनाये..
जिससे उस रचियता को भी गौरवान्वित होने का अवसर मिले..।
आप ख़ास हो..।।



मंगलवार, 26 मई 2026

खुद के लिए नियम बनाये..

खुद के लिए कुछ नियम बनाये..
हां,खुद के लिए..
कुछ ऐसे नियम बनाये..
जो सरल हो,सहज हो,सुगम हो,सहय हो और सार्थक हो..
अन्यथा नियम के बोझ में ही दब जायेंगें..
और वंही के वंही रह जायेंगें..।

जिंदगी में अगर बहुत आगे जाना हो,
बहुत कुछ पाना हो..
और जिंदगी को सार्थक बनाना हो..
तो खुद के लिए कुछ नियम बनाओ..
जो सरल हो,सहज हो,सुगम हो,सहय हो और सार्थक हो..
यही जिंदगी को नई दिशा देगी..
और यही नई दिशा..
जिंदगी को नई पहचान देगी..।

जिंदगी में अगर आगे बढ़ना हो..
तो खुद के लिए कुछ नियम बनाओ..
कुछ ऐसे छोटे-छोटे नियम बनाओ..
जिसे सहजता से पूरा कर पाओ..।

अगर जिंदगी के दौड़ में नियम आड़े आये..
तो उस नियम को तोड़ कर..
एक नया नियम बनाओ..
जो जिंदगी के दौड़ को पूरा कर पाए..।।

नियम हमें तबतक बांधती नहीं..
जबतक हम जिंदगी के दौड़ में आगे बढ़ रहे होते है..
नियम हमें तब बांधने लगती है..
जब जिंदगी में ठहराव आ जाये..
जब ऐसा महसूस हो..
तो उस नियम को तोड़ कर..
एक नया नियम बनाओ..
क्योंकि आप स्वयं ही अपना भाग्य विधाता है..
आप स्वयं ही अपना निर्माता है..।।





जिंदगी की वागडोर..

जो क्षण व्यर्थ गया उसके बारे में सोच कर..
क्यों व्यर्थ समय गवाना..।
जो समय बचा है..
उसे सार्थक बना कर..
क्यों न जिंदगी को सार्थक बनाये..।

अगर आप अपने जिंदगी को..
अपने लिए सार्थक नही बनाएंगे..।
तो आपके जिंदगी को..
कोई और..
अपने लिए सार्थक बनायेगा..।।

आप चाहे..
जिंदगी के जिस दौर में हो..
आपके पास हमेशा..
अपने जिंदगी का वागडोर संभालने का अवसर होता है..।
बस थोड़ा साहस..दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम
करने का जज्बा होना चाहिए..
तब,जिंदगी की वागडोर आपके हाथ मे होगा..।।





रूपांतरण

अक्सरहाँ जब हमें कोई वास्तविकता से अभिज्ञ कराता है..
तो हमें तकलीफ होती है..।
मगर कभी-कभी जो हमें..
वास्तविकता से अभिज्ञ कराते है..
वो हमारे जिंदगी को रूपांतरित कर देते है..।।



मगर आज कितने लोग है..??
जो वास्तविकता से अभिग कराने की जिम्मेदारियां निभाते है..
जो निभाते है..
वो हमारे नजर में हमारे विद्रोही बन जाते है..।
इसलिय आजकल लोग वास्तविकता से अभिग कराने की जिम्मेदारियां नही निभाते..।।
जिसका खामियाजा हमें ही भुगतना होता है..।।

जो मीलों दौड़ सकते थे..वो आज चल भी नही सकते..
जो दूसरों की जिंदगी रूपांतरित कर सकते थे..
वो आज खुद की जिंदगी भी रूपांतरित नही कर पा रहे है..।।

अक्सरहाँ जब हमें कोई वास्तविकता से अभिज्ञ कराता है..
तो हमें तकलीफ होती है..।
मगर कभी-कभी जो हमें..
वास्तविकता से अभिज्ञ कराते है..
वो हमारे जिंदगी को रूपांतरित कर देते है..।।

आप कब हंसते है..