सोमवार, 22 जून 2026

तुम्हारा ख्याल आया..

मालूम नहीं क्यों..
आसमां में बिखरते हुए बादल को देख के..
मेरे जेहन में तुम्हारा ख्याल आया...।

👩🏻क्या ख्याल आया..??

👦🏻यही..

👩🏻यही क्या..??

👦🏻अबे सोचने तो दो..

👩🏻ठीक है..तुम सोचो में जा रही हूं..
जब ख्याल आ जाए..तो उन बिखरते हुए बादल को बता देने..
वो भटकते-भटकते मुझ तक पहुंच जाएंगे..और बारिश की बूंद में बदल कर मुझसे बयां कर जाएंगे..।।




मैं ही हरदफ़ा

मैं ही हरदफ़ा बात क्यों बढ़ाऊ..
कभी-कभी तुम भी तो बात बढ़ाओ..।
मैं ही हरदफ़ा तुम्हारे पास आने का बहाना क्यों ढूंढू..
कभी-कभी तुम भी तो कोई बहाना ढूंढो..।

मैं ही क्यों इस गलतफहमी में रहू..
जो मैं सोच रहा हूँ..
वो भी तू सोच रही है..।
इस गलतफहमी से निकलकर क्यों ना,
मैं आगे बढ़ जाऊ..।

मैं ही हरदफ़ा बात क्यों बढ़ाऊ..
कभी-कभी तुम भी तो बात बढ़ाओ..।


सोमवार, 15 जून 2026

बप्पा..

मैं उनसे नजरें चुरा रहा था..
और वो..
मुस्कुरा रहे थे..।
क्योंकि मैं जिधर देखूं..
उधर सिर्फ..
वो-ही-वो नजर आ रहे थे..।
कुछ देर बाद..
अपनी मूर्खता पे हंसी आई...
जिसे देखने को लोग ताउम्र गवां देते है..
वो हमें चहु और दिख रहे थे..
और मैं..
उनसे नजरें चुरा रहा था..।।



रविवार, 14 जून 2026

नाकामियां

आपके नाकामियां पे मुस्कुराने वाले भरे पड़े है..
उन्हें एक बार..दो बार..
मुस्कुराने का मौका दे..
बार-बार नही..।
अन्यथा वो आपके नाकामियों पे नही..
आप पे मुस्कुराने लगेंगे..
ये स्थिति आने से पहले..
स्वयं को बदल डालें..।।
क्योंकि आप जब किसी की मुस्कुराहट की वजह बन सकते है..
तो आप,किसी के ईष्या,द्वेष की वजह भी बन सकते है..।।



बुधवार, 10 जून 2026

अच्छा होना भी एक अभिशाप है..

अच्छा होना भी एक अभिशाप है...
क्योंकि अच्छाई के बोझ के कारण,
आप बुरे नही हो सकते..।
और अच्छाई का बोझ आपको 
दबाता चला जायेगा,
और आप दबते चले जाएंगे..।
अगर आप इस दबाब को सहन कर गए..
तो आप उन पंक्तियों में होंगे..
जिन पंक्तियों में वो खड़े है,
जिनका नाम हम आदर से लेते है..।।

मगर अफसोस दबाव को सब सहन नही कर पाते..
और वो बदल जाते है..
यही तो प्रकृति का नियम है..।
मगर कुछ होते है..
जो प्रकृति के नियम को धत्ता बताते है..
और नए कीर्तिमान रचते है..।।
आप भी उन्ही में सो हो..।।


अपने "क्यों" को ढूंढिए

यू ही कोई छोड़ के जाता है क्या..
यू ही कोई मुँह मोड़ के जाता है क्या..।
क्या करें..
जाना तो सब को है..।
जो रुक गए..
वो वहीं रुक गए..।
जो निकल गए..
वो बुद्ध और महावीर बन गए..।

निकलना तो सब को है..
मगर जो "क्यों" के लिए निकलते है..
वो नए कीर्तिमान रचते है..
और नए मार्ग प्रशस्त करते है..।

वैसे तो हर क्षण..
लोग निकल रहे है..
व्यर्थ की जिन्दगीं गवां कर..।


मंगलवार, 9 जून 2026

नदी के दो किनारे..

हम दोनों नदी के दो किनारे है..
हम दोनों साथ तो चल सकते है..
मगर कभी मिल नही सकते..।
अगर मिल गए..
तो फिर,
न हमारा..
और न ही तुम्हारा..
कोई अस्तित्व रह जाएगा..।।

हम दोनों नदी के दो किनारे है..
तुम वो किनारा हो..
जंहा हमेशा चकाचौध और चहल-पहल रहती है..
मैं वो किनारा हूँ..
जंहा दूर तक कोई नही..
बस मौन के सिवा..।।
हम दोनों नदी के दो किनारे है..
तुम हर रोज कइयों की जिंदगी संवारती हो..
और मैं..
जिंदगी का इंतजार कर रहा हूँ..
कभी कोलाहल हो हमारे भी किनारे पे..
बस इसी का इंतजार करता हूँ..।
हम दोनों नदी के दो किनारे है..
हम दोनों साथ तो चल सकते है..
मगर कभी मिल नही सकते..।