सोमवार, 18 मई 2026

मैं खुद को बदलना चाहता हूँ..

मैं खुद को बदलना चाहता हूं..
अपने गलतियों को सुधारना चाहता हूं..
मगर मैं हर बार हार जाता हूँ..।
मगर..
मैं फिर खड़ा होता हूँ..
और फिर हार जाता हूँ..
और फिर खड़ा होता हूँ..।

ये सिलसिला सदियों से चलता आ रहा..।
जिसने अपने कमियों पे विजय पाया..
उसके नाम आज भी जुबां पे है..
और जिसने अपने कमियों पे विजय नही पाया..
वो आज भी इस जन्म-मरण के चक्र में घूम रहे है..।।

मैं खुद को बदलना चाहता हूं..
अपने गलतियों को सुधारना चाहता हूं..।


नदी के दो किनारे..

हमदोनों नदी के दो किनारे है..
साथ तो चल सकते है..
मगर कभी मिल नही सकते..।
अगर मिलने की कोशिस की..
तो न तुम रह पाओगे..
और न मैं रह पाऊंगा..।
हमदोनों का कोई अस्तित्व ही नही रह जायेगा..।

यू ही चलते रहें..
यू ही बढ़ते रहें..
ये सफर कंही खत्म हो जाएगा..
और हमदोनों भी कंही खत्म होकर..
एकाकार हो जाएंगे..
और मैं का भान खत्म हो जाएगा..।।

हमदोनों नदी के दो किनारे है..
साथ तो चल सकते है..
मगर कभी मिल नही सकते..।
लेकिन हम, 
अपने अस्तित्व को खोकर..
एकदूसरे में विलीन हो सकते है..।

हमदोनों नदी के दो किनारे है..
साथ तो चल सकते है..
मगर कभी मिल नही सकते..।



शनिवार, 16 मई 2026

शिकायत..

हमें अक्सरहाँ शिकायत ही रहता है..
कभी इससे,कभी उससे..।
पता नही..किस-किस से..
पता है क्यों..??
क्योंकि..
हम अपने कमियों को छुपाना चाहते है..।

और ये हम अनजाने में ही करते है..।
जिस रोज हम अपने कमियों का अहसास करने लगेंगे,
उस रोज फिर किसी में कमियां नही दिखेगा..।
ये बड़ा कठिन है..।

मगर जब आप दूसरों में कमियां देखने के बजाय..
खुद में कमियां देखने लगेंगे..
उस रोज आप,आप नही रह जाएंगे..
आप खास हो जाएंगे..।

जबतक हमें दूसरों में कमियां दिखता रहेगा..
तबतक हमें अपने कमियों को दूर करता रहना होगा..।
जब किसी मे कमियां न दिखे...
उस रोज समझ लीजिए..
आप मे कोई कमियां नही है..।।
मगर ये इतना सरल कंहा है..



शुक्रवार, 15 मई 2026

प्यार की पांति..

मैं ही दीदार करू..
हर बार तेरा..
तू भी तो दीदार कर..
एक बार मेरा..।

माना कि..
मैं,वो नही..
जिसका तुम्हें तलाश है..।
मगर,क्या तुम्हें पता है..
आखिर तुम्हें तलाश क्या है..??
तलाश जारी रखो..
क्या पता कंही कोई मिल जाये..।

मैं ही दीदार करू..
हर बार तेरा..
तू भी तो दीदार कर..
एक बार मेरा..।


नदी की धारा..

जब अपने हाथ में कुछ ना हो, 
तो..
खुद को बहने दो..
नदी की धारा की तरह..।



जिधर,जैसे जा रही है जिंदगी..
जाने दो..
इसे मोड़ने की कोशिस न करो..
क्योंकि मोड़ने में तकलीफ के सिवा..
और कुछ नही होगा..
खुद को बहने दो नदी की धारा की तरह..।

जो पीछे छूट गया..
उसे छोड़ के आगे बढ़ते चलो..
उसके साथ लेने की कोशिस मत करो..
क्योंकि उसका साथ..
वंही तक था..।

नदी की धारा की तरह आगे बढ़ते रहो..
जब तक मंज़िल न मिल जाये..
तबतक यू ही..
नदी की धारा की तरह बहते रहो...।

खालीपन...

उसे ढूंढ रहे हो..
हां उसे ही ढूंढ रहा हूँ..
आखिर क्यों ढूंढ रहे हो..
अपने खालीपन को भरने के लिए ढूंढ रहा हूँ..।

ये खालीपन आखिर है क्यों..
क्योंकि मैं खुद ही खाली हूँ..
इसिलिय शायद ये खालीपन है..।

तो अपने खालीपन को स्वयं भरो..
न कि उसे भरने के लिए दूसरों का सहारा लो..
क्योंकि अगर वो चला गया छोड़ के..
तो ये खालीपन और बढ़ जाएगा..
और फिर शायद तुम उस खालीपन को भर न पाओ..।

अपने खालीपन को स्वयं भरो..
खालीपन स्वयं ही दूर हो जाएगा..।।




शनिवार, 2 मई 2026

ब्रह्मांड,पृथ्वी और हम..

मुझे जब भी हीनता और गौरवान्वित का अहसास होता है..
तो,मैं आसमां की और देखता हूँ..
और मुस्कुराता हूँ..
और सोचता हूँ..
इस ब्रह्मांड में पृथ्वी का क्या अस्तित्व है..??
यही,जो..
हमारे पृथ्वी पर बैक्टेरिया और वायरस का है..।
तो फिर जरा सोचिए..
इस ब्रह्मांड मैं..
हमारा क्या अस्तित्व है..??😊



हम जिस तरह उन्हें नंगी आंख से नही देख सकते..
उसी तरह से एक छोर पे बैठा कोई..
हमारे पृथ्वी को नंगी आंख से नही देख सकता..
या फिर लाख प्रयत्न करने के बाबजूद भी नही देख सकता..।

मुझे जब भी हीनता और गौरवान्वित का अहसास होता है..
तो,मैं आसमां की और देखता हूँ..।।

•प्रसिद्ध खगोलशास्त्री "कार्ल सगन"ने पृथ्वी को "धूल के एक कण पर टिका हुआ छोटा सा नीला बिंदु" कहा था

•ब्रह्मांड में हमारी स्थिति बहुत ही विशिष्ट है। पृथ्वी सौरमंडल का एक हिस्सा है, जो आकाशगंगा (Milky Way) की एक छोटी सी भुजा (ओरियन आर्म) में स्थित है आकाशगंगा में लगभग 100 से 400 अरब तारे हैं। ब्रह्मांड में ऐसी अरबों-खरबों आकाशगंगाएं हैं।

यदि पूरे ब्रह्मांड को एक महासागर मान लिया जाए, तो पृथ्वी उस महासागर में पानी की एक छोटी सी बूंद के समान भी नहीं है