बुधवार, 28 अक्टूबर 2026

कभी-कभी आप जिस चीज से बचना चाहते है,आपको उसी चीज से सामना करना पड़ता है..।इसिलिय किसी चीज से बचने की कोशिस मत कीजिये..
जो हो रहा है,या होनेवाला है,उसका सामना कीजिये..।
आखिर कब तक किसी चीज से बचते रहेंगे..।

मैंने 28 की ट्रेन की टिकट कराया था,जिसे मैंने ये सोच के कैंसल कर दिया कि ये मुम्बई आधी रात में पहुचायेगा और मैंने 27 को पटना से तत्काल की टिकट ये सोच के कराया कि ये शाम को मुम्बई पहुंचा देगा तो आराम से 10 बजे तक रूम पर पहुंच जाऊंगा..मगर हुआ क्या..ये ट्रैन 5 घंटे से ज्यादा लेट हो चुका है..5:50P.M में मुम्बई पहुचने का टाइम था अभी मनमाड से ही कुछ देर पहले खुला है LTT पहुँचाने का समय 11 बजे रात्रि का दिखा रहा है..।।

सोमवार, 26 अक्टूबर 2026

रात्रि भोज का सपना..

बहुत दिनों बाद कोई सपना देखा जो याद रहा..
अक्सरहाँ हम वही सपने देखते है जो हमारे अंतस मन मे संचित रहता है..।

आज मैंने सुबह- सुबह देखा कि कुछ लोग को निमंत्रण दिया गया था..
मगर कुछ लोग बहुत देर से आ रहे थे तो किसी ने उनलोगों को कहा कि अब कंहा सब खा पी लिये अब कंहा जा रहे हो..वो लोग वापस चले गए..और मैं सड़क पर खड़े होकर उन्हें देख रहा था..।
फिर कुछ देर के बाद देखता हूँ कि पापा सबको खाने के लिए बुला रहे है,जिनलोगों को हमलोग ने निमंत्रण नही दिया था,बल्कि कोई और ने दिया था..पापा उनलोगों को भी बुला लाये..
मुझे ये देखकर गुस्सा आया कि घर मे कुछ खाने को है नही और पापा ने सबको बुला लिया..
सबको बिठाया गया और खाना परोसा गया..
दाल बहुत कम था..
मगर सबको हो गया..।
सबको अच्छे तरह से हो गया..।
और मेरा नींद खुल गया..।।




जब नींद खुला तो मेरे सामने दो सवाल उपजे..।
1. मुझे पापा पे गुस्सा क्यों आया..?
 -मैंने सिर्फ एक पहलू देखा,पापा के भावनाओं को समझता तो शायद गुसा नही आता..।
2.मुझे भगवान पर आस्था क्यों नहीं रहा..??
 - मैं ये सोचने लगा कि आखिर मुझे भगवान पर विश्वास क्यों नही रहा..?

मैंने ये सपना क्यों देखा..??
शायद एक-दो रोज से भोज का माहौल था शायद इसलिए देखा..।

बुधवार, 21 अक्टूबर 2026

माना कि..

माना कि,है तुममें..
ढेर सारी कमियां..
मगर..
उन खूबियों का क्या करें..
जो तुम्हें खास बनाता है..।
तुम्हारी कमियां..
उभरती है,
तुम्हारी कमजोरियों से..।
मगर तुम्हारी..
खूबियां उभरती है..
निःस्वार्थ भाव से
अच्छाई के लिए..
किसी के भलाई के लिए..।।

मैं तुम्हें..
कैसे बुरा कहूं..
जब तुम्हें अपने बुराइयों का अहसास है..।
तुम खास हो..
इस प्रकृति का अहसास हो..।

प्लीज..
तुम वो होओ..
जिसके लिए तुम हुए हो..।।



मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026

रावण आज फिर मुस्कुरा रहा है..

रावण आज फिर मुस्कुरा रहा है..
क्योंकि..
दिन-प्रतिदिन..
उसका कद बढ़ते ही जा रहा है..
और राम का कद..??




रावण आज फिर मुस्कुरा रहा है..
हमारी मूर्खता पे..।
हम क्या कर रहे है..??
सौ-सौ फीट का पुतला दहन कर रहे है..
जबकि हमारे अंदर जो..
काम,क्रोध,मद,मोह,लोभ,द्वेष,
ईष्या,आलस्य,हिंसा और अविद्या
जो विद्यमान है..
उसका तो हम दहन ही नहीं कर रहें है..।

जरा खुद से पूछिए..
क्या आपको रावण दहन करने या
फिर उसे दहन होते हुए देखने का अधिकार है..।
जबकि आपके अंदर तो..
स्वयं ही रावण विद्यमान है..
रावण आज फिर मुस्कुरा रहा है..।

रविवार, 18 अक्टूबर 2026

हम गलती क्यों करते है..??

हम जानते है..
ये गलत है..।
फिर भी हम गलती करते है..
गलती करते ही नहीं,
बल्कि उसे बार-बार दोहराते है..
आखिर हम ऐसा क्यों करते है..??

द्वंद..मैं कर क्या रहा हूँ..

मैं कर क्या रहा हूँ..
क्या मैं..
जो कर रहा हूँ..
क्या 
वो सही कर रहा हूँ..??

कुछ समझ में नही आ रहा है कि..
मैं जा किधर रहा हूँ..
बस चले जा रहा हूँ..
मैं जानता हूँ..
इस तरह चलते रहने से..
उत्थान तो नहीं हुआ..
मगर पतन की ओर..
और बढ़ता गया..
कुछ समझ में नही आ रहा कि क्या करूँ..??



शनिवार, 17 अक्टूबर 2026

कुछ लोग..

कुछ लोग दूर चले जाते है..
और कुछ लोग बहुत दूर चले जाते है..
और ऐसे लोगों का पीछा..
चाह कर भी नहीं कर सकते..।

मगर..
कुछ लोग दूर जाकर भी..
हमारे जिंदगी में.. 
अपनी छाप छोड़ जाते है..
जो हमारे जिंदगी को और बेहतरीन बनाते है..।