इसका जबाब न हम, हां में दे सकते है,और न ही, ना में..।
हम भारतीय तो बिल्कुल नही कह सकते है कि एलियन नही होते..
क्योंकि हमारे धर्म ग्रंथ में जिस भूत, पिशाच, दैत्य,प्रेत, असुर,यक्ष, बेताल इत्यादि का जिक्र किया जाता है,आखिर वो लोग है कौन..?
इनके बारे में हमेशा, हमलोगों को सिर्फ गलत बातें ही बताया गया..
बल्कि इन लोगों ने मानवों के साथ मिलकर कई अच्छे काम किये है..
●जिसमें सबसे प्रमुख "समुंद्र-मंथन" का जिक्र आता है..
●साथ ही कई "गण"(भूत, प्रेत,पिशाच, डाकिनी और शाकिनी इत्यादि) भगवान शिव के सेना में शामिल है..।
●अभी भी ग्रामीण भारत मे क्षेत्रपाल का मंदिर मिल जाएगा..ये मंदिर गाँव के रक्षा के लिए बनाया जाता है..।ये मंदिर सामान्यतः गाँव के सबसे अंत मे मिलेगा..(अक्सरहाँ हम इसे ब्रह्म बाबा के मंदिर के रूप में मानते है..)
●हममें से कई लोग विक्रम और बेताल की कहानी जरूर सुने होंगे..क्या आपने या हमने सोचा है..ये बेताल कौन है..??
बेताल के IQ(इंटेलिजेंस कोशेंट) लेवल पे हमलोगों ने कभी गौर ही नही किया..।।
● वंही जब हम हनुमान चालीसा पढ़ते है तो उसमें एक पंक्ति है-"भूत पिशाच निकट नही आवै, महावीर जब नाम सुनावै"..ये भूत,पिशाच है कौन जिसे हनुमान जी नियंत्रित करते है..
वंही जब हम हनुमान जी की "पंचमुखी" छवि देखते है,तो वो कुछ और ही कहता है..।
●बौद्ध धर्म में भी "धर्मपाल" की आकृति वाली मूर्ति दिखती है,जो पिशाच जैसा ही मिलता जुलता है..बौद्ध मान्यता ये है कि पहले ये नकारात्मक थे,मगर बौद्ध की शिक्षाओं से प्रभावित होकर धर्म और मानवता के रक्षक बन गए..
● जैन धर्म मे भी "यक्ष-यक्षिणी" की मूर्तियां मिलती है,जो द्वारपाल का कार्य करती है,मानव से बिल्कुल ही अलग दिखती है..।
◆वंही अन्य धर्म मे भी ऐसे लोगों का उल्लेख है,जिन्हें मानव के हितैषी के रूप में दर्शाया गया है..
●इस्लाम धर्म मे "जिन्नात" का उल्लेख है..कहा जाता है कि कुछ जिन्न सूफी संतों और पैगम्बरों के मददगार भी रहे है,वही बुरे जिन्न को "इबलीस" (शैतान)का अनुयायी माना जाता है..।
●ईसाई धर्म मे मुख्य रूप से "डेमन्स" और "फालेन एंजेल्स" का जिक्र सर्वाधिक है,मान्यता ये है कि कभी ये फरिश्ते थे,मगर ईश्वर के विरुद्ध विद्रोह करने पर स्वर्ग से निकाल दिया गया..
●वंही यहूदी लोककथाओं में "डिब्बक" का उल्लेख मिलता है..।
हरेक धर्म में इनका अलग-अलग तरीके से जिक्र किया गया है..मगर सब किसी-न-किसी रूप से मानव के हितैषी ही रहें.. फिर ऐसा क्या हुआ कि मानव और इनमें अलगाव हो गया और उन्हें हम नकारात्मक रूप में लेने लगे..।।
-वर्तमान समय में भी जब हम आधुनिक शब्द "एलियन" का नाम लेते है तो एक नकारात्मक रूप में ही..
आखिर कुछ तो ऐसा अतीत में हुआ होगा..जो इन्हें हीरो से विलेन बना दिया..।।
फिर से हमारा सवाल है कि - "एलियन" होते है..??
हम जो चीज नही देखते इसका ये मतलब नही की वो चीज नही होते है..।।
हम बैक्टेरिया,वायरस,प्रोटोज़ोआ को नही देख पाते मगर वो है..सिर्फ है ही नही बल्कि हमारा अस्तित्व भी उनके हाथ मे है...😊।
इस ब्रह्मण्ड🌏 को हम कितना जानते है...??
शायद 1% भी नही..।
सच बताऊ तो अभी हम पृथ्वी के भी कई रहस्य को नही जानते...।
एलोरा और वंहा की कुछ मूर्तियां कुछ तो संकेत संकेत करती है..।
क्रमशः...







