बुधवार, 11 मार्च 2026

No Smoking🚭 Day..

क्या आपको पता है..भारत में हरेक साल स्मोकिंग🚬 के कारण 14 लाख से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो जाती है..।



आपको ये जानकर और हैरानी होगी कि सेकंड हैंड स्मोकिंग(SHS)( दूसरे के पीने के कारण प्रभाव) के कारण 4 लाख से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो जाती है..।(अगर आप स्मोकिंग नही करते मगर आपके साथ रहने वाले लोग अगर स्मोकिंग करते है तो उनसे दूरियां बना ले.)

भारत की 29% आबादी आज स्मोकिंग 🚬के चंगुल में फंसा हुआ है..इसमें सिगरेट के अलावा स्मोकलेस टोबेको(बिना धुंए वाला तंबाकू) जैसे पान मसाला,खैनी इत्यदि का सेवन करने वाले दुनिया में 70% भारतीय ही है..।।

क्या आपको पता है..हावड़ा ब्रिज कमजोर हो गया है..क्योंकि हम भारतीयों ने गुटखा खाकर थूक-थूक कर उसे कमजोर कर दिया है..🤔।

भारत दुनिया मे दूसरा सबसे बड़ा तंबाकू का उपभोक्ता और उत्पादक है.. जिसके कारण औसतन 6-10 साल पहले लोग अपनी जीवन गंवा देते है..। क्योंकि लोग फेफड़ों के कैंसर(80%मौतें धूम्रपान के कारण),स्वसन रोग,हृदय रोग, टाइप-2 डाइबिटीज, हड्डियां संबंधित रोग, प्रजनन क्षमता का कम होना, आंख की समस्या, मानसिक समस्या.. इत्यादि रोगों से लोग जूझ रहे है..।

आपको जानकर हैरानी होगी कि..

भारत की तंबाकू कंपनियां का राजस्व हरेक साल 10% के औसत से निरंतर बढ़ता ही जा रहा है..।

जबकि सरकार के कुल राजस्व में तंबाकु से होने वाली हिस्सेदारी 2-2.5% है..सरकार हरेक साल तंबाकु उत्पादों पे GST, सेस और एक्साइस टैक्स लगाकर लगभग 50000₹करोड़ से लेकर 60000₹ करोड़ का राजस्व हासिल करता है..।

जबकि सरकार को तंबाकु से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान की भरपाई में सिर्फ 1.77 लाख करोड़ है..।यानी सरकार को लगभग 3-4 गुणा अधिक खर्च करना पड़ता है..।जोकि एक मजाक है लगता है..मगर सोचने वाली बात ये है कि,अगर सरकार को नुकसान हो रहा है तो वो इसे पूर्ण प्रतिबंधित क्यों नही करते जबकि वास्तविकता ये है कि सरकार के राजस्व में हरेक साल इसकी हिस्सेदारी बढ़ती ही जा रही है..।।

क्या हम स्मोकिंग छोड़ सकते है..??

शायद नही,या फिर हां.. ये हमपे निर्णय करता है,और हमारे माहौल पे और परवरिश पर निर्भर करता है..।

अगर आप स्मोकिंग करते ही है,तो प्लीज् सार्वजनिक जगहों पे ना करें.. और प्लीज् गुटखा,पान मसाला,खैनी खाकर सार्वजनिक जगहों को रंगीन न बनाये..।

जब हम जानकर भी कोई गलती करते है,तो फिर वो गलतियां हमारे लिए अपराधबोध नही रह जाता,जबतक की उसकी कीमत न चुकाना पड़ जाए।

स्मोकिंग से छुटकारा सिर्फ महिलाएं ही दिला सकती है..मगर अफसोस आज महिलाएं खुद इसके गिरफ्त में आ रही है...।।



सोमवार, 9 मार्च 2026

इस T-20 विश्वकप से आपने क्या सीखा..??

धैर्य,साहस,होंसला,कठिन परिश्रम, दृढ़ निश्चय, दृढ़ संकल्प, दृढ़ विश्वास और दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो आप कुछ भी कर सकते है..।
ये सभी गुण एक-दूसरे के पूरक है..।।
आपमें इनमें से कौन सा गुण है..??
तबतक आप अपने अंदर आंख बंदकर थोड़ी देर झांकिए..।
मैं आगे बढ़ता हूँ..😊।

इस T-20 विश्वकप से बहुत कुछ सीखने को है..खिलाड़ी से, टीम से, टीम मैनेजमेंट से, देश से और दर्शकों से..।।



चलिए पहले देश से शुरुआत करते है..

इस विश्व कप में सर्वाधिक चर्चा बांग्लादेश का रहा,क्योंकि वो अंतिम क्षण में ये कहकर खेलने से मना कर दिया कि भारत मे खेलना हमारे खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित नही है..।।
बांग्लादेश से क्या सीख सकते है..??
यही की दूसरे के बहकावे में कभी नही आये..।।
 
दूसरा देश जो सर्वाधिक चर्चा में रहा वो जिम्बाबे था..
क्यों..??
क्योंकि उन्होंने वो किया जिसकी अपेक्षा किसी को नही था,उन्होंने ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका को हराया..।
अगर आत्मविश्वास हो तो आप कुछ भी कर सकते है..मगर इस आत्मविश्वास को लगातार बनाये रखना बड़ा दुष्कर है,ये पानी के बुलबुले के समान है..इसलिए लगातार सही दिशा में  मेहनत करते रहने की जरूरत है..जिससे आत्मविश्वास लगातार बना रहे..

तीसरा देश जो चर्चा में नही है,मगर इस टूर्नामेंट में एक मैच की वजह से सालों चर्चा में रहेंगे..
वो देश अफगानिस्तान है,जिसने साउथ अफ्रीका को हराते-हराते दूसरे सुपर ओवर में उनसे हार गया..।
हम अफगानिस्तान से यही सीख सकते है कि,अंतिम समय तक धैर्य बनाये रखना होता है,ज्यों धैर्य टूटा की आप टूट जाएंगे..।

दर्शकों से क्या सीखें..
हमारे प्रधानमंत्री ने 'स्वछता अभियान' शुरू किये, जिसका बहुत प्रभाव पड़ा,मगर स्वछता अबतक हमारे अंदर नही उतरा है..।।
अगर आप थोड़ा सजग है,तो आपको पैदल चलने वाले और BMW से चलने वाले भी गंदगी फैलाते नजर आ जायेंगें..।

इस टूर्नामेंट में सर्वाधिक प्रभावित नेपाल के दर्शकों ने किया ,स्टेडियम खाली करने से पहले वो स्टेडियम का कचरा साफ कर रहें थे..वो हम भारतीयों की तरह रील और फ़ोटो खिंचा कर सोशल मीडिया पर डालने के लिए नही,बल्कि स्वछता उनके जिंदगी का हिस्सा है..।।
हम उनसे यही सीख सकते है कि स्वछता को जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बनाये।।

टीम मैनेजमेंट से क्या सीखें..??
जिस तरह कुछ टीम मैनेजमेंट ने अपने खिलाड़ियों पे अंतिम समय तक विश्वास किया उसी तरह हमें भी खुद पे और अपने सहभागी पर विश्वास करना चाहिए...।
हो सकता है,कोई किसी कारणवश असफल हो रहा हो,उसके कारण को हल करने में उसका मदद करें और उसे एक और मौका दे..वो जरूर सफल होगा..।

खिलाड़ियों से क्या सीखें..
इस टूर्नामेंट में एक नही कई खिलाड़ी है,जिसने अपनी पहचान बनाई है,और अपना जगह लोगों के जुबां पे बनाया है..।
चलिए उन खिलाड़ियों से शुरुआत करते है जिसने अपनी जगह लोगों के जुबां पे बनाई है..।

जैकब बैथल..भूल गए क्या..ये वही खिलाड़ी है,जिसने भारत की झोली से जीत छीन ही ली थी,मगर अंतिम समय मे धैर्य का साथ छूटने के कारण जीत भारत की झोली में ही रह गई..।

ब्लेसिंग मुजरबानी - शायद T-20 वर्ल्ड कप शुरू होने से पहले पूरा जिम्बाबे भी इन्हें नही जानता होगा,मगर इन्होंने ऐसा बॉलिंग किया जिससे ऑस्ट्रेलिया और श्रीलंका को मात देने में अहम योगदान दिया..।इनका संघर्ष हमें बताता है कि संघर्ष अगर निरंतर हो,तो संघर्ष अपना रंग दिखाता ही है..।

उस्मान तारिक- ये पाकिस्तान से है, जो अपने बॉलिंग स्टाइल के कारण चर्चा में रहें..मगर क्या फायदा अगर पारस पत्थर किसी कसाई को दे दिया जाएं तो..इनके साथ भी वही हुआ,संभावना तो बहुत थी मगर वो माहौल ही इन्हें नही मिला, और ना ही दिया गया..।।

और कई खिलाड़ी है जिसके नाम जुबां पे है,ब्रायन बेनेट,फिन एलेन, मिचेल सैंटनर इत्यादि..।

अब बात करते है उन खिलाड़ियों को जिसने दिल मे जगह बनाई..
अगर आज वो न होते तो शायद हम T-20 के विजेता नही होता..
वो खिलाड़ी है..
◆"संजू सैमसन"- 
धैर्य रख,
विश्वास रख,
तुम्हारा भी समय आएगा,
बस निरंतर प्रयास कर.
और हर परिस्थिति में खुद पर विश्वास रख..।।

ये पंक्तियां उनपे सटीक बैठती है..।
उनसे बहुत कुछ सीखने को है..।

ईशान किशन - इनसे यही सीखने को मिलता है कि अगर आप गलती करते है,और उसे सुधार करके आगे बढ़ते है,तो लोग आपको नजरअंदाज नही बल्कि आपको सर आंखों पे बिठाएंगे..।

बुमराह - हमारे जिंदगी में भी एक इंसान ऐसा होना चाहिए,जिसपे हरेक परिस्थिति में विश्वास कर सकते है..।।

और कई खिलाड़ी है,जिससे आप बहुत कुछ सीख सकते है..।

आपको किस खिलाड़ी ने,किस टीम ने और किस देश ने सर्वाधिक प्रभावित किया..??

रविवार, 8 मार्च 2026

मैं खो गया हूँ..

मैं खो गया हूँ..
कंही किसी राह पर..।
क्या कर रहा हूं..
किधर जा रहा हूँ.
कुछ पता नही..।
मैं खो गया हूँ,
कंही किसी राह पर..।
कल बेवजह गवाया..
आज बेवजह गवा रहा हूँ..
कल भी बेवजह गवाऊंगा...।
कब तक खुद के साथ..
समय को गवांता रहूंगा..।
एकदिन कंही ऐसा न हो जाये..
न समय बचे,
न मैं बचु..
और फिर से उस दुष्चक्र को पूरा करने..
फिर से मैं धरती पर आ जाऊ..।
क्यों न इस ही जन्म जागकर..
उस दुष्चक्र से छुटकारा पा जाऊ..।।
मैं खो गया हूँ..
कंही किसी राह पर..।।



शनिवार, 7 मार्च 2026

वोमेन्स डे:अधिकार,न्याय और अधिकार के लिए..

"वो मुस्कुराती भी है,तो दूसरों के लिए,
 वो जीती भी है,तो दूसरों के लिए,
वो जब भी खुद के लिए जीना चाहती है..
तब-तब..
परिवार, समाज,और देश  उसका दम घोंट देता है।"

क्या आपको पता है..
कल "अंतरराष्ट्रीय वोमेन्स डे" है..
कल महिलाओं के अधिकार और सम्मान की खूब बातें होंगी..
मगर फिर अगले दिन..
हम वही इंसान बन जाएंगे..नीच,क्रूर,कामी,हिंसक प्रवृति वाले..।
ये पढ़ कर थोड़ा आप असहज हो रहे है..
मगर इससे क्या फर्क पड़ेगा क्योंकि हम बदलने वाले नही है..।
क्योंकि बचपन से हमारे संस्कार ऐसे है कि स्त्रियों को सम्मान करना सिखाया नही गया,सिर्फ पढ़ाया गया..।



क्या आप स्त्रियों का सम्मान करते है..??
अगर आपका जबाब हां मैं है..तो आप गलत है..।।
क्योंकि मेरा अगला जबाब है..
आप किन स्त्रियों का सम्मान करता है..??
घर की स्त्री का या बाहर का..??
छोड़िए इस बहस में नही पड़ते है..।
मगर सोचियेगा..।

हमारी संस्कृति कहती है-
 "यत्र नारी पूज्यन्ते, तत्र देवता रमन्ते।"

वही हमारा संविधान महिलाओं के कुछ अधिकार की बात करता है-
अनुछेद 14 : समानता का अधिकार..
क्या आज मिल रहा है..हां कंही-कंही..
मगर सच कहूं तो नही मिल रहा है..।

अभी भी उन्हें असमानता का सामना करना पड़ता है,और इसकी शुरुआत घर से होते हुए समाज की गलियों से होते हुए,स्कूल,कॉलेज के गलियारे होते हुए,ऑफिस तक पहुँचता है..।

अनुछेद 15 : लिंग के आधार पर भेदभाव नही..
 मगर अभी भी हो रहा है..
आप अपने आसपास देख रहे होंगे.आसपास छोड़िए इसकी भी शुरुआत घर से ही होती है..।

अनुछेद 21 : गरिमामय जीवन का अधिकार देता है..।
 एक मनुष्य यही तो चाहता है,मगर क्या ये महिला को मिलता है..??
 आज भी महिला सड़क पर नजरें उठा के नही चल सकती..(10% को छोड़कर)

NCRB(नेशनल क्राइम रेकॉर्ड ब्यूरो) के अनुसार 30% से कम ही महिलाओं को न्याय मिल पाता है..।
आखिर क्यों..??
क्योंकि..कानून तो है,मगर कानून लागू करने वाले पुरूष प्रवृति वाले है..
एक तो महिलाएं न्याय के लिए आगे नही आती,अगर कुछ आ भी गई तो थाने से डांट-डपट कर डरा धमका कर भगा देते है,अगर उनमें से कोई हिम्मतवाली होती है,तो वो कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटते-काटते टूट जाती है..और हार मान लेती है..।
पुलिस में महिला की भागदारी ~10-12% है।
★पंजीकृत महिला वकील की संख्या ~15-20% है।
★ HC/SC में महिला न्यायाधीश की संख्या ~14-17% है।
★ विधानसभा और लोकसभा में भागीदारी ~10-15% है।



जरा सोचिए जंहा से न्याय की शुरुआत होती है,और जंहा न्याय के लिए कानून बनाया जाता है वंहा उनकी भागीदारी 20% से भी कम है..
तो कंहा से न्याय मिल पायेगा..??

NFHS(नेशनल फैमिली हाउस सर्वे) के अनुसार 30% से अधिक विवाहित महिलाओं को शारिरिक या यौन हिंसा का शिकार होना पड़ा है(2024-2025)।बहुत बड़ी संख्या तो उनकी है जो इस तरह की हिंसा को ताउम्र अपने अंदर छुपा कर रखती है और सहन करती रहती है..।

महिलाओं के साथ भेदभाव का शुरुआत जन्म लेते ही शुरू हो जाता है..अगर बेटा ने जन्म लिया तो खूब ढोल नगारे बजते है,अगर बेटी ने जन्म लिया तो..आप जानते ही है..😊

फिर जब यही लडकिया बड़ी होती है,तो परिवार और समाज इनसे भेदभाव करना शुरू कर देता है..ये नही करना है,वो नही करना है..यानी क्या करना है ये भी परिवार और समाज ही हद तक तय करती है..।

आज महिलाओं के लिए और समस्या बढ़ गया है..पहले समस्या खड़ा करने वाले सामने होते थे मगर आज डिजिटल माध्यम से नुकसान पहुंचा रहे है..सोशल मीडिया पे पीछा करना,गंदे कमेंट करना, ऑनलाइन उत्पीड़न करना,अश्लील तस्वीर को लेकर आये दिन धमकियां आना..
और जब से AI आया है,महिलाएं और असुरक्षित हो गई है,क्योंकि प्रॉम्प्ट फ़ोटो और वीडियो के माध्यम से अश्लील तस्वीर बनाकर आये दिन सोशल मीडिया पे फैलाने की धमकी देना..।।
सरकार को जल्द से जल्द इसके ऊपर कानून बनाकर सख्त सजा का प्रावधान करना चाहिए..।।

समस्या का हल क्या है..??
आर्थिक निर्भरता..जबतक महिला आर्थिक रूप से दूसरे पर निर्भर रहेंगी तबतक उन्हें हिंसा,अन्याय और शोषण का शिकार होना पड़ेगा..।।

LFPR(लेबर फ़ोर्स पार्टिसिपेशन रेट) के अनुसार सिर्फ 35% के आसपास ही महिला काम कर रही है..।।

संयुक्त राष्ट्र ने इस बार "महिला दिवस" की थीम रखी है-
"अधिकार,न्याय और कारवाई,
सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए..।"

ये तबतक नही मिलेगा जबतक हमारी माताएं और बहने आर्थिक रूप से संपन्न नही होंगे..।।

जाते-जाते यही कहूंगा..
स्त्री को स्त्री की तरह नही,
बल्कि आप खुद को जैसे देखते है,
उसी तरह से देखे..।।




गुरुवार, 5 मार्च 2026

Yoga for Cardiovascular

हृदय स्वास्थ्य ❤️ (Cardiovascular Health) के लिए योग और प्राणायाम के वैज्ञानिक लाभ और साक्ष्य नीचे दिए गए हैं:

​◆ ताड़ासन  (Mountain Pose) - रक्तचाप नियंत्रण

  • वैज्ञानिक साक्ष्य: शोध के अनुसार, ताड़ासन जैसी स्थिर मुद्राएं स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (Autonomic Nervous System) को संतुलित करती हैं। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए प्रभावी है जो उच्च रक्तचाप (Hypertension) से जूझ रहे हैं, क्योंकि यह रक्त वाहिकाओं के तनाव को कम करता है।
  • प्रभाव: यह हृदय की मांसपेशियों पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम करता है और शरीर में रक्त के सुचारू प्रवाह को सुनिश्चित करता है।

​◆ सेतुबंधासन (Bridge Pose) - धमनियों का स्वास्थ्य

  • वैज्ञानिक साक्ष्य: यह आसन छाती और हृदय क्षेत्र को फैलाता है, जिससे धमनियों (Arteries) में लचीलापन बढ़ता है। वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि यह आसन 'बैरोरेसेप्टर' (Baroreceptor) संवेदनशीलता को बढ़ाता है, जो शरीर के रक्तचाप को नियंत्रित करने वाले प्राकृतिक सेंसर होते हैं।

  • प्रभाव: यह हृदय में ऑक्सीजन युक्त रक्त के संचार को बढ़ाता है और कोलेस्ट्रॉल के जमाव को रोकने में मदद करता है।

​◆ भ्रामरी प्राणायाम (Humming Bee Breath) - नाइट्रिक ऑक्साइड का उत्पादन

  • वैज्ञानिक साक्ष्य: भ्रामरी के दौरान निकलने वाली 'हम्मिंग' ध्वनि नाक की गुहाओं (Nasal cavities) में नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) के स्तर को 15 गुना तक बढ़ा देती है। नाइट्रिक ऑक्साइड एक शक्तिशाली वासोडिलेटर है, जो रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करता है और हृदय को आराम देता है।

  • प्रभाव: यह तनाव को कम करके 'स्ट्रेस-इंड्यूस्ड' हार्ट अटैक के जोखिम को काफी हद तक कम कर देता है

​◆ अनुलोम-विलोम (Alternate Nostril Breathing) - हार्ट रेट वेरिएबिलिटी (HRV)

  • वैज्ञानिक साक्ष्य: 'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कार्डियोलॉजी' के अनुसार, यह प्राणायाम Heart Rate Variability (HRV) में सुधार करता है। उच्च HRV का अर्थ है एक मजबूत और लचीला हृदय जो तनाव को आसानी से झेल सकता है।

  • प्रभाव: यह हृदय की धड़कन को स्थिर करता है और अतालता (Arrhythmia) जैसी समस्याओं से बचाता है।



नीतीश कुमार: बिहार का,एक अध्याय का अंत..

बिहार की राजनीति में जब भी 'सुशासन' (Good Governance) शब्द का जिक्र होगा, तो नीतीश कुमार का नाम सबसे ऊपर आएगा। 

दशकों तक बिहार की कमान संभालने के बाद, उनका कार्यकाल केवल सत्ता का खेल नहीं, बल्कि एक पिछड़े राज्य को मुख्यधारा में लाने का संघर्ष रहा है।



क्या यह वास्तव में एक अध्याय का अंत है? 

शायद हाँ, क्योंकि नीतीश कुमार ने बिहार को उस 'जंगलराज' की छवि से बाहर निकाला जिसने राज्य को वर्षों पीछे धकेल दिया था।आज वो मुख्यमंत्री पद छोड़कर राज्यसभा सदस्य बनने के लिए नामंकन भर रहें है..।

 आइए नजर डालते हैं उनके उन महत्वपूर्ण योगदानों पर जिन्होंने बिहार की तस्वीर बदली।

​◆ कानून व्यवस्था: 'जंगलराज' से 'सुशासन' तक

​नीतीश कुमार के सत्ता संभालते ही उनकी सबसे पहली प्राथमिकता बिहार की चरमराई कानून व्यवस्था को सुधारना था। उन्होंने अपराधियों में कानून का डर पैदा किया और स्पीडी ट्रायल के जरिए बाहुबलियों को सलाखों के पीछे भेजा।

  • परिणाम: शाम ढलने के बाद घरों से निकलने में डरने वाले बिहार में लोग अब बेखौफ सड़कों पर नजर आने लगे।

​◆ महिला सशक्तिकरण: 'साइकिल' से बदली सोच

नीतीश कुमार ने समझा कि बिहार तब तक प्रगति नहीं कर सकता जब तक उसकी आधी आबादी पीछे है। उनकी 'मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना'🚲 ने ग्रामीण बिहार की शिक्षा व्यवस्था में क्रांति ला दी।

  • पंचायती राज में आरक्षण: बिहार देश का पहला ऐसा राज्य बना जिसने पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया।
  • शराबबंदी: सामाजिक सुधार की दिशा में उन्होंने कड़ा कदम उठाते हुए शराबबंदी लागू की, जिसका उद्देश्य घरेलू हिंसा को कम करना और गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधारना था

​◆ बुनियादी ढांचा: सड़कों और पुलों का जाल

​आज बिहार के किसी भी कोने से राजधानी पटना पहुँचने में लगने वाला समय काफी कम हो गया है। नीतीश सरकार ने सड़कों और पुलों के निर्माण को अपनी प्राथमिकता बनाया।

  • हर घर बिजली: 'सात निश्चय' योजना के तहत बिहार के लगभग हर गाँव और घर तक बिजली पहुँचाई गई, जो एक समय में नामुमकिन सा लगता था।(आज इसी योजना के तर्ज पर पूरे भारत मे हरेक घर तक बिजली पहुचाई जा रही है)

​◆ शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार

​नीतीश कुमार के कार्यकाल में बड़ी संख्या में शिक्षकों की भर्ती हुई और स्कूल छोड़ने वाले बच्चों (Drop-out rate) की संख्या में भारी गिरावट आई। स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) की हालत सुधारी गई और मुफ्त दवाओं के वितरण की व्यवस्था की गई।(बिहार भारत के सबसे अग्रणी राज्यों में से है जो सर्वाधिक मुफ्त दवा का वितरण करता है)

क्या रही चुनौतियां..?

उनकी उपलब्धियों के बीच कुछ मोर्चों पर आलोचनाएं भी हुईं:

  • पलायन: रोजगार के अवसरों की कमी के कारण आज भी बिहार का युवा दूसरे राज्यों की ओर रुख करता है।

  • भ्रष्टाचार: निचले स्तर पर प्रशासनिक भ्रष्टाचार पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पाई।

  • राजनीतिक अस्थिरता: बार-बार गठबंधन बदलने की उनकी छवि ने उनकी विश्वसनीयता पर सवाल भी उठाए।

नीतीश कुमार का दौर बिहार के लिए बुनियादी बदलावों का दौर था। उन्होंने बिहार को 'सड़क, बिजली और पानी' जैसे मूलभूत मुद्दों पर आत्मनिर्भर बनाया। इतिहास उन्हें एक ऐसे मुख्यमंत्री के रूप में याद रखेगा जिसने एक बीमारू राज्य को विकास की पटरी पर खड़ा किया। 

भले ही वो अब राज्यसभा के सदस्य बन गए है, लेकिन बिहार के आधुनिक इतिहास में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।

मंगलवार, 3 मार्च 2026

मन करता है..

मन करता है..
तेरा दीदार करू..
तुमसे दो-चार बात करू..।

मगर कमबख्त एक दीवार खड़ी हो गई है..
न मैंने खड़ी की..
न तूने खड़ी की..
फिर न जाने...
किस कमबख्त ने खड़ी की..।

मन करता है..
तेरा दीदार करू..
तुमसे दो-चार बात करू..।



No Smoking🚭 Day..