"मुस्कुराओ, भले ही तुम्हारा दिल टूट रहा हो... अगर तुम मुस्कुराओगे, तो देखोगे कि जीवन अभी भी जीने योग्य है।"
आज एक किताब पढ़ रहा था..और उसमें चार्ली चैपलिन का जिक्र आया..और तब से उन्हें और जानने की इच्छा हुई..इससे पहले भी कई दफा उनके बारे में पढ़ा,सुना और उनकी कई मूवीयाँ देखी है..मगर उन्हें जितने बार पढ़ो हरेक बार कुछ नया जानने को मिलता है,नया सीखने को मिलता है..।
आज की जेनरेशन उनके बारे में जानती तो होगी..मगर उन्हें नही जानते होंगे..जिन्होंने उन्हें चार्ली चैपलिन बनाया..।
चलिये उनके बारे में कुछ नया जानते है..।
क्या आपको पता है..वो पहली बार स्टेज पर परफॉरमेंस कितने साल के उम्र में किये..??
5 साल की उम्र में..हां 5 साल की उम्र में..
हो सकता है इसमें से कइयों को ये ताज्जुब न लगे..मगर इसके पीछे की कहानी आपको थोड़ा हैरान कर देगा..शायद नही करेगा..।
● चार्ली की माँ, हन्ना चैपलिन, लंदन के एक थिएटर में गा रही थीं। अचानक गाते समय उनकी आवाज़ फटने लगी और वे सुर खो बैठीं। दर्शकों ने शोर मचाना और उन पर चीजें फेंकना शुरू कर दिया।थिएटर के मैनेजर ने स्थिति संभालने के लिए नन्हे चार्ली को स्टेज पर भेज दिया, क्योंकि उन्होंने चार्ली को अपनी माँ की नकल करते हुए देखा था।
जब चार्ली स्टेज पर आए और गाना शुरू किया साथ ही माँ की आवाज का नकल करना शुरू किया,तो लोगों ने कुछ सिक्के उछालने लगे..वो गाना,गाना बंद करके सिक्के उठाना शुरू कर दिए..इस मासूमियत को देख करके सारा हॉल हंसी से भर गया..।और यंही से चार्ली चैपलिन का उदय हुआ..।
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"आइना मेरा सबसे अच्छा दोस्त है, क्योंकि जब मैं रोता हूँ, तो वह कभी नहीं हंसता।"
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मगर इसी रात इनकी माँ की आवाज सदा के लिए चला गया..पिता शराबी थे,शराब पीने के कारण ही इनकी मृत्यु हो गई,उस समय चार्ली चैपलिन 12 साल के थे..माँ काम न मिलने के कारण और गरीबी के कारण मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गई जिस कारण उन्हें कई बार पागलखाना जाना पड़ा..।और इन्हें वर्क हाउस(गरीबों के लिए बना सरकारी जगह) में रहना पड़ा और मजदूरी करना पड़ा,वंहा की जिंदगी जेल जैसी थी।
चार्ली चैपलिन अपने माँ से बहुत प्यार करते थे वो अपने आत्मकथा में लिखते है- "वे और उनके भाई अपनी माँ को सड़कों पर बदहवास हालत में देखते थे,और हम चाहकर भी कुछ नही कर पाते थे..।"
चार्ली अक्सर कहते थे-
"जीने के लिए हंसी ज़रूरी है, खासकर तब जब आपके पास रोने के सौ कारण हों।"
•जब चार्ली लगभग 9 साल के थे, उनकी माँ की बीमारी के कारण घर चलाना मुश्किल था। तब उनके पिता के संपर्कों के जरिए उन्हें 'द एइट लंकाशायर लैड्स' नाम के एक डांसिंग ग्रुप में काम मिला। यहाँ उन्होंने 'क्लॉग डांसिंग' (लकड़ी के जूतों के साथ डांस) सीखी। यह उनकी प्रोफेशनल ट्रेनिंग की शुरुआत थी।
चार्ली को असली पहचान तब मिली जब 14 साल की उम्र में उन्हें एक मशहूर नाटक 'शर्लक होम्स' में 'बिली' (एक न्यूज़बॉय) का रोल मिला।दिलचस्प बात ये है कि उस समय चार्ली को पढ़ने तक नही आता था,अपने भाई सिडनी के मदद से डायलॉग रटे थे..।
•19 साल की उम्र तक चार्ली एक मँझे हुए कलाकार बन चुके थे। उन्हें प्रतिष्ठित 'फ्रेड कार्नो' की कॉमेडी कंपनी में जगह मिली,यहाँ उन्होंने 'बिना बोले अभिनय' (Pantomime) और 'स्लैपस्टिक कॉमेडी' की बारीकियां सीखीं।इसी कंपनी के साथ वे अमेरिका के दौरे पर गए, जहाँ हॉलीवुड की नज़र उन पर पड़ी।
•अमेरिका के दौरे के दौरान, 'कीस्टोन स्टूडियो' के मालिक मैक सेनेट ने चार्ली का टैलेंट देखा और उन्हें फिल्मों के लिए साइन कर लिया।शुरुआत में चार्ली कैमरा के सामने थोड़ा झिझक रहे थे, लेकिन जल्द ही उन्होंने अपनी जगह बना ली।अपनी दूसरी ही फिल्म 'किड ऑटोस एट वेनिस' (1914) में उन्होंने पहली बार वह ड्रेस पहनी जो आगे चलकर "द ट्रैम्प" (The Tramp) के रूप में अमर हो गई।
●26 साल की उम्र में, उन्होंने उस समय का सबसे बड़ा कॉन्ट्रैक्ट साइन किया, जिसके लिए उन्हें $670,000 (सालाना) मिला,जो उस ज़माने में एक अविश्वसनीय रकम था।
★उस समय के बड़े फिल्म स्टूडियो कलाकारों को बहुत कम पैसा देते थे और फिल्मों की कहानी में बहुत दखल देते थे। चैपलिन अपनी कला के साथ समझौता नहीं करना चाहते थे। 1919 में, चैपलिन ने उस समय के तीन अन्य बड़े दिग्गजों (मैरी पिकफोर्ड, डगलस फेयरबैंक्स और डी.डब्ल्यू. ग्रिफिथ) के साथ मिलकर अपनी खुद की कंपनी 'United Artists' बनाई।अब वे खुद अपनी फिल्मों के मालिक थे। वे अपनी फिल्मों के लेखक, निर्देशक, अभिनेता और यहाँ तक कि संगीतकार भी खुद ही थे। इससे उन्हें वह स्वतंत्रता मिली जिससे उन्होंने 'द गोल्ड रश' और 'सिटी लाइट्स' जैसी कालजयी फिल्में बनाईं।
◆द ग्रेट डिक्टेटर' (1940) यह फिल्म चैपलिन के साहस का सबसे बड़ा उदाहरण है।यह फिल्म एडोल्फ हिटलर और नाज़ीवाद का मज़ाक उड़ाती थी। जिस समय यह फिल्म बन रही थी, हिटलर का खौफ पूरी दुनिया में था।
(हिटलर और चैपलिन का जन्म एक ही साल और एक ही महीने (अप्रैल 1889) में हुआ था। दोनों की मूँछें भी एक जैसी थीं। चैपलिन ने इसी समानता का फायदा उठाकर हिटलर (फिल्म में हेंकल) का किरदार निभाया।)
"मेरा दर्द किसी के लिए हंसी का कारण हो सकता है, लेकिन मेरी हंसी कभी किसी के दर्द का कारण नहीं होनी चाहिए।"
◆क्या आपको पता है..चार्ली चैपलिन गांधी से मिले थे..??
जब गांधीजी दूसरे गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए लंदन गए तो चार्ली चैपलिन उनसे मिलने की इच्छा जताया,शुरुआत में तो उन्होंने मना कर दिया क्योंकि गांधीजी चार्ली चैपलिन को नही जानते थे,फिर उन्हें बताया गया की वो दुनिया के मशहूर कलाकार और गरीब मजदूर के हितैषी है,तब गांधीजी उनसे मिलने के लिए राजी हुए..।
जब चैपलिन गांधीजी से मिले तो उन्होंने पूछा-आप मशीनों का विरोध क्यों करते हैं? मशीनें तो इंसान का काम आसान बनाती हैं और उसे गुलामी से मुक्त कर सकती हैं।
गांधीजी ने जबाब दिया - "मैं मशीनों के खिलाफ नहीं हूँ, लेकिन मैं उस व्यवस्था के खिलाफ हूँ जो मशीनों का उपयोग करोड़ों लोगों को बेरोजगार करने के लिए करती है। भारत जैसे देश में, जहाँ आबादी इतनी ज्यादा है, वहां इंसान को काम की जरूरत है, मशीन की नहीं।"
गांधीजी के बातों से ही प्रेरित होकर उन्होंने "मॉडर्न टाइम्स" मूवी बनाया जिसमे दिखाया गया कि कैसे मशीन इंसान पर हावी होकर उनके भावनाओ को खत्म कर देता है।
"हमें मशीनों से ज्यादा इंसानियत की जरूरत है। चालाकी से ज्यादा दया और शालीनता की जरूरत है। बिना इन गुणों के, जीवन हिंसक हो जाएगा और सब कुछ खो जाएगा।"
◆चैपलिन के अंतिम दिन स्विट्जरलैंड में बीते। उन्हें अपने राजनीतिक विचारों के कारण अमेरिका छोड़ना पड़ा था। लेकिन 1972 में, यानी करीब 20 साल बाद, वे दोबारा अमेरिका गए जब उन्हें 'मानद ऑस्कर' (Honorary Oscar) से नवाजा गया। उस समय उन्हें सिनेमा के इतिहास का सबसे लंबा (12 मिनट का) 'स्टैंडिंग ओवेशन' मिला था।
चार्ली चैपलिन की मृत्यु 25 दिसंबर, 1977 को क्रिसमस के दिन 88 वर्ष की आयु में नींद में मुस्कुराते हुए हो गया..।
"इंसान की कीमत उसके कपड़ों या बैंक बैलेंस से नहीं, बल्कि उसके व्यवहार और दूसरों के प्रति उसकी संवेदना से तय होती है।"