रविवार, 14 जून 2026

नाकामियां

आपके नाकामियां पे मुस्कुराने वाले भरे पड़े है..
उन्हें एक बार..दो बार मुस्कुराने का मौका दे..
बार-बार नही..
अन्यथा वो आपके नाकामियों पे नही..
आप पे मुस्कुराने लगेंगे..
ये स्थिति आने से पहले..
स्वयं को बदल डालें..।।
क्योंकि आप किसी की मुस्कुराहट की वजह बन सकते है..
तो आप किसी के ईष्या,द्वेष की वजह भी बन सकते है..।।



बुधवार, 10 जून 2026

अच्छा होना भी एक अभिशाप है..

अच्छा होना भी एक अभिशाप है...
क्योंकि अच्छाई के बोझ के कारण,
आप बुरे नही हो सकते..।
और अच्छाई का बोझ आपको 
दबाता चला जायेगा,
और आप दबते चले जाएंगे..।
अगर आप इस दबाब को सहन कर गए..
तो आप उन पंक्तियों में होंगे..
जिन पंक्तियों में वो खड़े है,
जिनका नाम हम आदर से लेते है..।।

मगर अफसोस दबाव को सब सहन नही कर पाते..
और वो बदल जाते है..
यही तो प्रकृति का नियम है..।
मगर कुछ होते है..
जो प्रकृति के नियम को धत्ता बताते है..
और नए कीर्तिमान रचते है..।।
आप भी उन्ही में सो हो..।।


अपने "क्यों" को ढूंढिए

यू ही कोई छोड़ के जाता है क्या..
यू ही कोई मुँह मोड़ के जाता है क्या..।
क्या करें..
जाना तो सब को है..।
जो रुक गए..
वो वहीं रुक गए..।
जो निकल गए..
वो बुद्ध और महावीर बन गए..।

निकलना तो सब को है..
मगर जो "क्यों" के लिए निकलते है..
वो नए कीर्तिमान रचते है..
और नए मार्ग प्रशस्त करते है..।

वैसे तो हर क्षण..
लोग निकल रहे है..
व्यर्थ की जिन्दगीं गवां कर..।


मंगलवार, 9 जून 2026

नदी के दो किनारे..

हम दोनों नदी के दो किनारे है..
हम दोनों साथ तो चल सकते है..
मगर कभी मिल नही सकते..।
अगर मिल गए..
तो फिर,
न हमारा..
और न ही तुम्हारा..
कोई अस्तित्व रह जाएगा..।।

हम दोनों नदी के दो किनारे है..
तुम वो किनारा हो..
जंहा हमेशा चकाचौध और चहल-पहल रहती है..
मैं वो किनारा हूँ..
जंहा दूर तक कोई नही..
बस मौन के सिवा..।।
हम दोनों नदी के दो किनारे है..
तुम हर रोज कइयों की जिंदगी संवारती हो..
और मैं..
जिंदगी का इंतजार कर रहा हूँ..
कभी कोलाहल हो हमारे भी किनारे पे..
बस इसी का इंतजार करता हूँ..।
हम दोनों नदी के दो किनारे है..
हम दोनों साथ तो चल सकते है..
मगर कभी मिल नही सकते..।


सोमवार, 8 जून 2026

एक बात कहूँ..

एक बात कहूँ...
नही..।
कहने दो न..

क्या कहोगी..
मैं वो जानता हूँ..
तुम्हारी मुस्कान सब कुछ बयां कर रही है..।

क्या हुआ
कुछ नही..।

मैं जानता हूँ..
तुम्हारी मौन सब कुछ बयां कर रही है..।

एक बात कहूँ...
नही..।
कहने दो न..।



रविवार, 7 जून 2026

कभी देखिए खुद को..

कभी देखिए खुद को..
क्या थे और क्या हो गए..।
क्या आप वही है..
जो आप होना चाहते थे..।
अगर नही..
तो फिर से देखिए खुद को..
क्या आप वही होना चाहते है..
जो आप पहले होना चाहते थे..
अगर हां..
तो फिर आखिर आप..
वो क्यों न हुए..??
जो आप होना चाहते थे..।।

खुद से पूछिए..
क्या आप सच मे वंही होना चाहते थे..
या फिर कुछ और होना चाहते थे..??

हमारे पास हमेशा इतना वक़्त और अवसर होता ही है..
जो हम होना चाहते है..
वो किसी न किसी माध्यम से हो ही जाते है..
प्रत्यक्ष नही तो अप्रत्यक्ष रूप से..

कभी देखिए खुद को..
क्या थे और क्या हो गए..।


हम भूल जाते है..

कभी-कभी हम भूल जाते है..
हम क्या करने आये है..।
कुछ लोग उस भूल को भूलकर..
कुछ और भूल कर रहे होते है..
और इस भूल के चक्र से कभी निकल नही पाते..।।

कुछ लोग उस भूल की याद आते ही..
उसे सुधार करते है..
मगर कुछ क्षण बाद फिर भूल कर जाते है..
और इस चक्र में फंसे रहते है..।

और कुछ लोग उस भूल की याद आते ही..
दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ उस भूल को सुधार कर..
आगे बढ़ते जाते है..
अगर बीच राह में भूल हो भी गई..
तुरंत उस भूल को सुधार कर..
आगे बढ़ जाते है..।
और इनमें से कुछ लोग जीवनपर्यंत भूल नही करते..
और जिंदगी को वो मुकाम देते है..
जिस मुकाम के लिए हमसब बने है..।
मगर हमसब बार-बार भूल करके,
भूल कर रहे है..
और इस चक्र में फंसे हुए है..।।


नाकामियां