शनिवार, 18 अप्रैल 2026

प्यार की पांति..

मैंने उससे कहा-
मैं अब तुमसे प्यार नही करता..।

उसने कहा-
क्यों..??

मैंने कहा-
क्योंकि तुम मुझसे प्यार नही करती..।

उसने कहा-
तो क्या हुआ..
तुम तो मुझसे प्यार करते हो..।।

प्यार का मतलब ये थोड़े ही होता है..
की आप जिससे प्यार करें उससे भी आप प्यार की अपेक्षा रखें..
अगर ऐसा है,तो ये प्रेम नही है..
ये तो फिर सौदा है..।।
अगर आप सौदा ही करना चाहते हो..
तो इतने बड़े सौदागर बनो की..
दूसरे के पास कोई दूसरा रास्ता ही न बचें..।।









गुरुवार, 16 अप्रैल 2026

कभी तो जागोगे..

कभी तो जागोगे..
मगर कब जागोगे..
जब सबकुछ खो जाओगे..
क्या तब जागोगे..
मगर तब जागकर भी..
क्या पाओगे..??

अभी भी कुछ नही,खोया है तूने..
अभी भी पाने के लिए,सारा जंहा है..
अब तो जाग जाओ..।

कंही ऐसा न हो..
तुम सोए रह जाओ..
और तुम्हारे हिस्से का भी हिस्सा 
कोई और पा जाए..।

कभी तो जागोगे..
मगर कब जागोगे..।।



मैं क्या था..

मैं क्या था..
मैं क्या हो गया हूँ..😞
अपने राह से भटक कर..
मैं कुछ न रह गया हूँ..।।

मैं क्या था..
मैं क्या हो गया हूँ..
मैं जिस राह से भटक कर..
जिस राह पे चल दिया हूँ..
उस राह के अनुभवों से..
क्यों न सफलता का एक नया राह बना लूं..।
और मैं क्या था..
और मैं क्या हो गया हूँ..।
इस नए स्वरूप को स्वीकार कर..
क्यों न अपने लिए..
एक नए कीर्तिमान का निर्माण करू.. 
मैं क्या था..
और क्या हो गया हूँ..😊।




मंगलवार, 14 अप्रैल 2026

मैं हर जगह विद्यमान हूँ..

मैं न मिलूं तो हैरान मत होना..
क्योंकि मैं तो, 
हर जगह विद्यमान हूँ..।
खुद को कुरेदना..
खुद को डुबोना..
आध्यात्मिक गहराइयों में..
उस गहराइयों में भी,
मेरी परछाइयां न दिखें..
तो हैरान मत होना..।
क्योंकि मैं तो हर जगह विद्यमान हूँ..।

थोड़ा अपना औरों के प्रति नजरिया बदलना..
अपने वाणी में थोड़ा मधुरता लाना..
औरों में भी मेरा अक्स देखना..
अगर न दिखाई दे..
तो हैरान मत होना..।
क्योंकि मैं तो हर जगह विद्यमान हूँ..।।

अगर मैं कंही न मिलूं..
तो अपने अंदर ही गौता लगाना..
और हृदयस्थली पर अपना ध्यान लगाना..
मैं यंही विद्यमान हूँ..
आज से नही..
तुम्हारे सृजनकाल से ही..।।

मैं न मिलूं तो हैरान मत होना..
क्योंकि मैं तो, 
हर जगह विद्यमान हूँ..।



क्यों न शुरू से शुरूआत करें..

क्यों न शुरू से शुरुआत करें..
फिर से एक नई शुरुआत करें..।
जो पीछे छूट गया उसे वहीं रहने दें,
वक्त की लहरों को अपनी दिशा में बहने दें..।
क्यों न शुरू से शुरुआत करें..
फिर से एक नई शुरुआत करें..।

नाकामी की धूल को जरा झाड़ कर,
अपनी हिम्मत को फिर से संवार कर..।
क्यों न शुरू से शुरुआत करें..
फिर से एक नई शुरुआत करें..।



खुद के बारे में सोचो..

खुद के बारे में सोचो..
आखिर तुम कर क्या रहे हो..??
क्या यही सोच के तुम बड़े हुए हो..??
खुद के बारे में सोचो..
तुम कर क्या रहे हो..??
क्या अपने सोच से..
तुमने समझौता कर लिया है..
अगर,हां..??
तब ठीक है..
तुम जैसे जी रहे हो..
वैसे जियो..।

अगर,नही...
तो धिक्कार है,तुमपे..
तुम अबतक आखिर कर क्या रहे हो..??
सिर्फ सोचने से क्या होता है..
वो पैर जो जकड़ चुके है..
उसे हिलाओ,डुलाओ..
और अपने सोच को साकार करने के लिए..
उस और कदम बढ़ाओ..।।



न तुम आलसी हो..
न ही तुम कायर हो..
न ही तुम निर्लज्ज हो..
न ही तुम नकारा हो..।
तुम में वो सबकुछ है..
जिससे तुम अपने सपने को 
साकार कर सकते हो..
तो फिर आखिर क्यों..??
अपना जिंदगी बर्बाद कर रहे हो..??
खुद के बारे में सोचो..
आखिर तुम कर क्या रहे हो..??

अगर तुम ठान लो..

अगर तुम ठान लो कि जीना है..
तो तुम्हें, जीने से कौन रोक सकता है..।
क्योंकि..
मैंने सूखे हुए पेड़ो से कलगी देते हुए देखा है..
मैंने मुरझाए हुए चेहरे पे मुस्कान देखा है..।
मैंने असंभव को संभव होते हुए देखा है..।।

आखिर कब तक ये सब सिर्फ मैं देखता रहूंगा..
इनसब से हौंसला लेकर..
अपने सपनों को साकार करूँगा..।।

अगर तुम ठान लो कि जीना है..
तो तुम्हें, जीने से कौन रोक सकता है..।