सोमवार, 9 फ़रवरी 2026

जिंदगी में कुछ लोग..

जिंदगी में कुछ लोग होना चाहिए..
जो हमारे जिंदगी को स्पंदित करें..
जो हमारे जिंदगी में प्रणोदक(propellant) और  उत्प्रेरक(catalyst)का  काम करें..।।
जिंदगी में कुछ लोग होना ही चाहिए..


ये लोग शुरू से ही होते है हमारे आस-पास, मगर अफसोस हमें समझ ही नहीं होता,इन्हें समझने की..
और हम इनसे दूरियां बना लेते है..।।
दूरियां इतना बना लेते है..की फिर कभी करीब जा नही पाते..
अगर करीब चल भी गए..
तो वो अब न हमें स्पंदित करेंगे..
न ही वो प्रणोदक और उत्प्रेरक का काम करेंगे..।।
कोई नही..धैर्य रखें..
वो फिर से आपके स्पर्श से जीवंत हो उठेंगे..
और वो आपको फिर से स्पंदित,प्रणोदित और उत्प्रेरित करेंगे..।।

हमारे आसपास ऐसे लोगों की भरमार है..
इनसे दूरियां नहीं, इनसे करीबियां बढ़ाये..
ये वो लोग है..
जो आपको..आप से हम बनाएंगे...
और, औरों से खास बनाएंगे..।।

जिंदगी में कुछ लोग होना ही चाहिए..
जो हमारे जिंदगी को स्पंदित करें..
जो हमारे जिंदगी में प्रणोदक(propellant) और  उत्प्रेरक(catalyst)का  काम करें..।।
जिंदगी में कुछ लोग होना ही चाहिए..।

हमारे जिंदगी को सबसे पहले स्पंदित,प्रणोदित और उत्प्रेरित हमारे माता-पिता,भाई-बहन,रिश्तेदार, मित्र,शिक्षक,समाज और गुरु करते है..।।
मगर जब हम इनसे दूरियां बना लेते है..
तो फिर इनके बिना हमारा कोई अस्तित्व नही रह जाता..।।
ये वो लोग होते है..
जो हमारे जिंदगी को स्पंदित,प्रणोदित और उत्प्रेरित करके हमारे जिंदगी को नया मुकाम देते है..।।
ज्यादा खुशी मत होइये..😊
कभी-कभी इसका उल्टा परिणाम भी होता है..।
अगर आप उनके स्पंदन,प्रणोदन और उत्प्रेण को अच्छी तरह समझ नही पाए तो..।

जिंदगी में कुछ लोग होना ही चाहिए..

रविवार, 8 फ़रवरी 2026

सफल होना है यार..

सफल होना है यार..
अपनी कहानी बयां करने के लिए..
किस तरह गुजारी बचपन..
किस तरह गुजारा स्कूल का दिन..
किस तरह गुजारा कॉलेज का दिन..
ये सब कहानी सुनानी है सबको..।
सफल होना है यार..
अपनी कहानी बयां करने के लिए..

मैं हूँ कंहा..

मैं हूँ कंहा..

मझदार में..या फिर किनारे पे..

मैं हूँ कंहा..??

न पाँव तले ज़मीन है...न सर पे आसमान है..

मैं हूँ कंहा..??

तलाशता हूँ खुद को मैं..इन लहरों के शोर में..

बंधा हूँ किसी अनकही...अनजानी सी डोर से..।

मैं हूँ कंहा..??

शायद मैं ही नदी हूँ..मैं ही सागर हूँ.. 

मैं ही उसका मझदार हूँ और मैं ही उसका किनारा हूँ..।

मैं हूँ कंहा..??

शायद मैं ही अपनी कश्ती का अब इकलौता सहारा हूँ।

मैं हूँ कंहा..

मझदार में या फिर किनारे पे..

मैं हूँ कंहा..।।

आसमाँ की और देखता हूँ..और नजरें फैलाता हूँ..

फिर खुद से पूछता हूँ..

मैं हूँ कंहा..

इस शून्य में..या फिर उस शून्य मैं..

जिस शून्य में,सब समाहित है..।

मैं हूँ कंहा..??




हे कृष्ण..

हरेक को जीवन में एक कृष्ण जैसे सारथी की जरूरत है,जो करें तो कुछ नही बस आपके साथ खड़ा रहें और सही गलत का अहसास करवाता रहें, और गलती करने पर डांट लगाए,और हमेशा सही मार्ग पर ले जाये..।।

ढेर सारे कृष्ण और अर्जुन भटक रहें है..
मगर कृष्ण,अर्जुन को नही, पहचान रहें है.
और न ही, अर्जुन, कृष्ण को पहचान रहें है..
बताओ इस समर में इन दोनों का क्या होगा..
बिना इनदोनों के मिलन से..
इस समर में विजयघोष कैसे होगा..??



शायद ही ऐसा कोई दिन हो..जिस रोज हमारी बहन-बेटियों के साथ बुरा बर्ताव न होता हो..इतने कामी,क्रोधी,हवसी,हैवान और दरिंदे घूम रहे है,की मौका पाते ही गिद्ध की तरह नोचने लगते है,या फिर अपने हरकतों से डराते रहते है..इनसे इनकी रक्षा कौन करेगा..??
कृष्णा(द्रौपदी) की रक्षा के लिए प्रभु आये..इनके रक्षा के लिए कौन आएगा..??
ढेर सारे कृष्ण घूम रहे है..
कृष्णा एकबार पुकार के तो देखें..(द्रौपदी ने भी अंतिम समय मे कृष्ण को याद किया था..मगर अब तो कृष्ण को कोई याद ही नही करता..)



कौरवों की भरमार है,चहु ओर..
सब कामी,क्रोधी,लोभी बन कर कृष्णा को नोंचने को तैयार है चहु ओर..
बिना कृष्ण के कृष्णा की रक्षा कौन करेगा..??
हरेक कृष्णा को दरकार है आज..
एक कृष्ण और भीम की..
जो गिद्ध जैसी आंखों से घूर रहे है,
कृष्णा को..।
जो अपने काम,क्रोध को बुझाने के लिए,
रौंद रहे है कृष्णा को..।
हे कृष्ण,हे भीम..
अब तो सुनो इनकी पुकार..
फिर से बहाओ उन पापियों की लहू की धार..।
हे कृष्ण..सुन लो अब कृष्णा की पुकार..।।


इस स्वार्थी हो गई दुनिया को फिर से निःस्वार्थ दोस्ती का मोल सिखाने का वक़्त आ गया है..जब अच्छा वक्त होता है,तो दुश्मन भी मित्र बन जाते है,और जब बुरा वक्त होता है..तो मित्र भी दुश्मन बन जाते है..।।


हे कृष्ण,फिर से आओ इस धरा पर..
और फिर से मित्रता का पाठ पढ़ाओ तुम..
मित्रता को जो कुलुषित कर रहे है..
उन्हें फिर से थपेड़े लगाओ तुम..।
मित्रता क्या होता है..
सबको सरेआम बताओ तुम..
मित्र से मित्रता का बोध कराओ तुम..
हे कृष्ण..फिर से आओ तुम
मित्रता का फिर से सम्मान बढ़ाओ तुम..।
मित्र होने का बोध कराओ तुम..
जो तुम हो,वही मैं हूँ..
इसका बोध फिर से कराओ तुम..।।


शायद ही कोई दिन हो,जिस दिन किसी का दिल न टूटता हो,शायद ही कोई दिन हो जिस दिन किसी का किसी से दिल न लगता हो..क्या हो गया है सबको..??दिल शायद ही किसीका,किसी से मिलता हो..मगर जिस्म हर रोज मिल रहे है..मानो ये जरूरत हो गई है..मगर इन जरूरत में प्रेम कंही खो गया है..।।


हे कृष्ण फिर से आओ इस धरा पर..
और प्रेम की परिभाषा..
फिर से दोहराओ इस धरा पर..।
प्रेम तो दो मन का मिलन है..
इसमें जिस्म आता कंहा से..
मगर आज प्रेम,
इसी जिस्म से तो हो रहा है..
हे कृष्ण फिर से आओ तुम..
प्रेम की पराकाष्ठा जो गिर चुकी है..
उसको फिर से सम्मान दिलाओ तुम..।
प्रेम की अमरत्वता को फिर से बढ़ाओ तुम..।।
हे कृष्ण फिर से आओ तुम..

हमारा एक ही सच्चा साथी है..

दुनिया में आपका एक ही सच्चा साथी है..जो आपका साथ कभी नही छोड़ता और वो है दुःख..।



मगर अफसोस हमसब उससे पीछा छुड़ाना चाहते है..जबकि सत्य ये है कि आप जितना उससे पीछा छुड़ाना चाहेंगे वो आपका उतना ही पीछा करेगा..और एक दिन आप वास्तविक दुःख से सामना किये ही इस दुनिया को छोड़ देंगे..।
दुःख से भागे नही,बल्कि दुःख का सामना करें, और उसको अपना सारथी बनाये..ये दुःख ही ऐसा सारथी है,जो आपको इस भवसागर से पार कराएगा..।


मगर हम क्या करते है..??
दुःख को सारथी नही,बल्कि दुःख का ही सारथी बन जाते है..
और जिंदगी यही से दुःखी हो जाती है..।

हम सब दुःख से छुटकारा पाना चाहते है..
मगर क्या ये संभव है...??
बिल्कुल नही..।
क्योंकि दुःख ही तो मनुष्य और अन्य जीव को संवारता और निखारता है..।

कभी आपने अंकुरण की प्रक्रिया देखी है..??
कभी आपने कीट या पंक्षी को अंडे से निकलते देखा है..??
कभी आपने जानवर के बच्चों को पहली बार खड़े होते देखा है..??
कभी आपने जन्म लेने के बाद बच्चे को रोते हुए देखा है..??

ये सब प्रक्रिया इतना तकलीफदेह है..की हम कल्पना नही कर सकते..
मगर यही प्रक्रिया हमें मजबूत बनाती है..।

जरा खुद को देखिए..और सोचिए..
आज आप जंहा है..और वंहा आप, खुद को एक सुखी इंसान के रुप में देखते है...तो वो इसलिय क्योंकि आपने दुःख को अपना सारथी बनाया.. 

मगर आप जंहा है,और जिंदगी को तकलीफदेह मानते है,तो वो इसलिए क्योंकि आपने दुःख को सारथी नही,बल्कि दुःख का सारथी बन गए है..
आप अभी इस दुःख के केचुल को उतार कर फेंक सकते है..
दुःख को अपना सारथी बना करके..दुःख से भागे नही,उसे जानने की कोशिश करें..की ये दुःख क्यों है..इसका कारण ढूंढे..।।

"दुःख ही दुःख से निकलने का मार्ग है..।।"

अपने आसपास देखें..
और सुखी लोगे को ढूंढें..
आपको वही सुखी मिलेंगे..
जिन्होंने दुःख को स्वीकार किया है..।।

"सुख क्षणभंगुर पानी के बुलबुले के समान है..
और दुःख पानी के समान..।
सुख की उत्पत्ति ही दुःख से होती है..
और दुःख में ही फिर समाहित हो जाती है..।।"



इसलिए दुःखी मत होइए..
जिंदगी में सुखी, दुःख से ही आता है..
उस दुःख को सहस्र स्वीकार करें..
जो आपके हिस्से में है..।
क्योंकि ये दुःख ही आपको अपने जिंदगी के ऊंचाई पे ले जाएगा..।।

दुःख को अपना सारथी बनाये..
और उस पर सवार होइए..
और उन सब दुःख के कारणों को,
रौंद दीजिये..
जो आपके जिंदगी में रोड़ा अटका रहा है..।।



शनिवार, 7 फ़रवरी 2026

क्रिकेट... ट्राय बॉल..और बचपन की यादें..

आपने बचपन में क्रिकेट खेला है..?
खेला ही होगा..
आपको याद है..
जब आप या आपके दोस्त पहली बॉल पर आउट होते थे,तो क्या बोलते थे..
शायद अक्सरहाँ यही कहता होगा ट्राय बॉल है😊..।

आज रास्ते से गुजर रहा था..
तो कुछ बच्चे गली में क्रिकेट खेल रहे थे..
एक बच्चा बैटिंग कर रहा था..
और वो आउट हो गया..
और आउट होते ही बोला..
ट्राय बॉल है,ट्राय बॉल है..
मगर कुछ बच्चे बोले ट्राय बॉल पहले ही हो गया था..।।

ये वाकया देखकर हंसी आ गई..
और बचपन की यादों में खो गया..।
वो भी क्या दिन थे..
क्रिकेट खेलने के लिए घर से चोरी छुपे निकलना..
और धूप छाव में क्रिकेट खेलना..
और फिर घर जाते ही घरवाले से डांट सुनना..
मगर फिर भी...
अगले दिन,फिर से चोरी छुपे निकलना..
फिर घर जाकर डांट सुनना..।
ये सिलसिला तबतक चलता रहा जब तक वो गलियां, वो घर और वो गाँव न छुटा..।
सबकुछ छूट गया मगर वो ट्राइ बॉल इस तरह जेहन में बस गया कि अभी भी उसकी गूंज सुनकर सारी यादें ताजा हो गई..।




मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026

शिव कौन है..??

जाबालि उपनिषद सामवेद से संबंधित एक लघु उपनिषद है। इस उपनिषद में महर्षि जाबालि और ऋषि पैप्पलाद के बीच संवाद के माध्यम से शिव के बारे में बताया गया है।


ऋषि पैप्पलाद ने जाबालि से पूछा शिव कौन है तो जाबालि कहते है-

सहोवाच जाबालिः- 

"पशुपतिं सवज्ञं जगदुदयस्थितिभङ्गहेतुं सर्वेश्वरं महादेवं ज्ञात्वा मृत्युमुत्तीर्यते॥

 जाबालि कहते है - शिव समस्त पशुओं (जीवों) के स्वामी है, वो सर्वज्ञ, जगत की उत्पत्ति, स्थिति और विनाश का  कारण है, सर्वेश्वर 'महादेव' को जानकर ही मनुष्य मृत्यु को पार कर सकता हूं। 

शिव केवल देवता नहीं, बल्कि ब्रह्मांड का आधार है।




शिव कौन है - शिव पशुपति है..

"​अहंकारमयाः जीवाः पशवः परिकीर्तिताः।

तेषां पतित्वाद्देवेशः पशुपतिरित्युच्यते॥"

अहंकार से युक्त जितने भी जीव हैं, वे 'पशु' कहलाते हैं। उन सभी जीवों के स्वामी (पति) होने के कारण महादेव को 'पशुपति' कहा जाता है।



​★शिव कौन है- शिव  'भस्मधारी' है।

अग्निरेवेति भस्म। वायुरिति भस्म। जलमिति भस्म। स्थलमिति भस्म। व्योमेति भस्म। सर्वं ह वा इदं भस्म॥

अग्नि भस्म है, वायु भस्म है, जल भस्म है, पृथ्वी भस्म है और आकाश भस्म है।संपूर्ण दृश्यमान जगत भस्म का ही विस्तार है।

 

◆प्रलय के पश्चात जो शेष बचता है,वही शिव है..


शिव ही शिव है..

शिव के सिवा कुछ और नही है..

शिव ही शिव है..

शिव..शिव..शिव..