क्योंकि..
दिन-प्रतिदिन..
उसका कद बढ़ते ही जा रहा है..
और राम का कद..??
रावण आज फिर मुस्कुरा रहा है..
हमारी मूर्खता पे..।
हम क्या कर रहे है..??
सौ-सौ फीट का पुतला दहन कर रहे है..
जबकि हमारे अंदर जो..
काम,क्रोध,मद,मोह,लोभ,द्वेष,
ईष्या,आलस्य,हिंसा और अविद्या
जो विद्यमान है..
उसका तो हम दहन ही नहीं कर रहें है..।
जरा खुद से पूछिए..
क्या आपको रावण दहन करने या
फिर उसे दहन होते हुए देखने का अधिकार है..।
जबकि आपके अंदर तो..
स्वयं ही रावण विद्यमान है..
रावण आज फिर मुस्कुरा रहा है..।





