मंगलवार, 3 नवंबर 2026

आप कल बुरे थे इसका ये मतलब नहीं कि..
आप आज भी बुरे है..
कुछ भी स्थायी नहीं है..
अगर कुछ स्थायी है..
तो आपका सोच..
जिसे आप जब चाहे तब बदल सकते है..।
आपका सोच ही आपको बुरा..
या फिर अच्छा बनाता है..।
तो क्यों नहीं हम अपने सोच को बदले..।।
जो बुरा हो गया..
उसके बारे में और सोच कर बुरा को न्योता मत दे..
बल्कि अच्छा सोचकर आनेवाले अच्छे कल को न्यौता दे..
जोकि आपके हाथ में है..
क्या आप तैयार है..??
अभी भी आप कसमकस में है..
आप सोच रहें है कि क्या ये संभव है..
बिल्कुल सम्भव है..
हमारा सोच ही असंभव को संभव..
और संभव को असंभव बनाता है..
तो देर किस बात कि..
तो चलिए नया शुरुआत करते है..।

सपना में अजपा-जप

आज फिर सारी रात सपनों में भटका..
मगर मुझे शिकायत नहीं है..बल्कि खुश हूं..क्योंकि सपनों में भटकते वक़्त भी मैं "ॐ नमः शिवाय" का अजपा जप कर रहा था..😊

वैसे में अक्सरहाँ सोने से पहले ॐ नमः शिवाय का जाप करता हूँ मगर सपनों में जाप पहली बार हुआ..शायद कल रात जब में अपने शिक्षक से योग की कक्षा ले रहा था तो उन्होंने बोला कि सोने से पहले हम जो भी गतिविधियां करते है वो गतिविधियां में हमारा दिमाग सोने का बाद भी लगा रहता है..
मैंने सोचा,मैं तो कितनी दफा सोते वक्त जाप करता हूँ मगर सोने के बाद ऐसा कुछ तो महसूस नही होता..आज फिर कोशिस करेंगे मैन सोने से पहले सांसों के साथ जाप शुरू किया जो मैं अक्सरहाँ करता हूँ,मगर आज कुछ खास हुआ,सपनों में जो में क्रियाकलाप कर रहा था,उसमें मैं जाप कर रहा था..।
ये पहली बार हुआ..
शायद ये जाप मेरे अंतस मन तक पहुंच चुका है..😊।

मैंने सपनों में क्या देखा..
एक छोटा सा जहाज था..उस जहाज पे में था और कुछ लोग मुश्किल से 4-5 लोग रहें होंगे..उसमें से शायद मेरा एक जान पहचान का था उसका नाम पंकज था..। मैंने देखा कि जहाज के चारो और पानी है..और वो पानी समुन्द्र,नदी का नही था बल्कि शायद बाढ़ का था..मैंने जहाज से देखा कि एक जगह पानी की धार बह रही है..मैं उसपे से कूदने लगा सबने मना किया मगर मैं कूद गया.. पानी की धार सच मे भयावह थी मगर मैं मन ही मन जाप कर रहा था और तैर रहा था मैंने देखा कि मैं एक जमीन के किनारे पे आ चुका हूं..(ये जगह हमारे गाँव का मधु गाक्षी था..)



फिर में वंहा से दौड़ते कूदते अपने घर की और शमशान घाट से होते हुए जाने लगा..। मैंने देखा कि शमशान घाट के भिड़ा पे जंहा तँहा एक-दो कमरा बना दिया गया है,मैं ये देख के थोड़ा चिंतित हुआ..मैं मन ही मन सोचने लगा कि आनेवाले समय मे ये शमशान भी खत्म हो जाएगा..जब मैं आगे बढ़ा तो देखता हूँ कि शमशान घाट में किसी की दाह-संस्कार की तैयारी चल रहा है..।
वंहा पे कुछ लोग है,वंहा पे मेरे झाजी भी बैठे हुए है और कुछ दूर पे शायद चाचा सब भी है..।मैं सोचने लगा यंहा पे क्यों दाह-संस्कार हो रहा है,जगह तो वंहा पे है..फिर ख्याल आया कि जिसका दाह संस्कार हो रहा है,ये उसका जमीन है,इसलिय यंहा पे दाह संस्कार हो रहा है..।
और मेरा जाप चल ही रहा था..।
सुबह जब उठा तो मैं खुश था..क्योंकि ऐसा सपना पहली बार देखा था जिसमें मैं सपनों मैं अजपा जप कर रहा था..।।

मैंने ये सपना क्यों देखा..??
•शायद मैंने कल moana मूवी देखा था जिसमें सिर्फ और सिर्फ समुन्द्र नाव दिखाया गया था..शायद इस वजह से ये सीन देखा..
• जंहा तक अजपा-जप का बात है उसका चर्चा मैंने पहले ही किया है..।
•सपने का दूसरा हिस्सा शमशान घाट वाला क्यों देखा मालूम नहीं..।

सपने के क्या मायने है..??
1. चुनौती को स्वीकार करें,जो पसंद आये वो करें सफलता मिलेगा..
2. अजपा-जप शायद ईश्वर की कृपा है..
3. कुछ ऐसा होनेवाला है,जो अप्रत्याशित हो..

रविवार, 1 नवंबर 2026

कभी खुद से मिले है..

कभी खुद से मिले है..??
ये क्या बात हुआ..
हैं न अजीब बात..
आपके अंदर भी एक आप रहता है..
कभी मिलिए उससे..
वो तो अक्सरहाँ आपसे मिल लेता है..
जब भी आप बेहतरीन काम करते है..
या फिर आप हताश और निराश होते है..
वो चुपके से आकर आपका हौंसला अफजाई करता है..
फिर से उठ खड़ा होने के लिए प्रेरित करता है..।

मगर आप उसके लिए क्या करते है..??
दरसल आपको उसका भान ही नही है..
जबतक भान होता है..
तबतक शरीर बेजान हो जाता है..।
कोशिस करें इस शरीर को बेजान होने से पहले..
एक दफा ख़ुद से मिल ले..
जब ख़ुद से मिल लेंगें..
तो ख़ुदा से मिलने की जरूरत नहीं रह जायेगी..।।

कभी खुद से मिले है..??



हैप्पी बर्थडे भाईजी..

हैप्पी बर्थडे भाईजी...
आप उनमें से एक हो..
जिन्हें फ़ोन करते वक़्त सोचना नहीं पड़ता..।


















ये कौन सी बड़ी बात है..
ये बहुत बड़ी बात है..
आपके मोबाइल में 100 से ज्यादा नंबर सेव होंगे..
आप अभी उनमें से कितने लोगों को फोन कर सकते है..।
शायद एक,दो,तीन या फिर 5 शायद इससे ज्यादा नहीं..
अगर इतने लोगों को भी आप बिना सोचें कॉल कर पा रहें है तो आप खुशनसीब है..
क्योंकि ढेर सारे ऐसे बदनसीब लोग है..
जो बिना सोचें किसी को कॉल नही कर सकते..
उन्हें कॉल करने के लिए सही समय का इंतजार करना पड़ता है..।।

फिर से हैप्पी बर्थडे भाईजी..
हमेशा खुश रहिये और स्वस्थ रहिये..😊

शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

वो थी ऐसी..

वो थी ऐसी..
जैसी कोई नहीं..
उससे भी खूबसूरत कई थी..
मगर उस जैसी कोई नहीं..
ये वहम था मेरा..
या फिर..
उसके प्रति  समपर्ण था..।

मगर वो नादान..
समझ नहीं पाई..
या फिर..
उसने आगे की सोची..??
सच कहता हूं..
उसने आगे की ही सोची..
मगर अफसोस..
वो कुछ ज्यादा..
आगे की नहीं सोची..।।

आएगा एक दिन..
जब खुद को..
वो कोसेगी..
अकेले में अश्रु उतना ही बहायेगी..
जितना मैंने..
उसके लिए बहाया था..।

मचलेगी वो..
तड़पेगी वो..
मेरे गले लगाने को..
जितना मैं तड़पा था..
उतना ही तड़पेगी वो..
जब अहसास होगा..
कितना चाहता था..
मैं उसे..।

ऐ रब इतना तो रहम कर..
मेरी सफलता की गूंज...
उस तक न पहुंचे..।
कभी यू ही..
चौराहे पे मिलु उनसे..
मुझे देख के मुस्कुराए..
और मुस्कुरा के..
नजरें फेर ले..
और मन ही मन..
तेरा शुक्रियदा करें..
अच्छा हुआ कि..
तुझसे दिल ना लगाया..।







मैं किसे गलत कहूँ..

मैं किसे गलत कहूँ..
क्योंकि यंहा सही कौन है..
क्योंकि सबमें कुछ-न-कुछ खामियां है..
क्यों न मैं..
उनके खामियों को दरकिनार कर
उनके खूबियों को स्वीकार करू..।

मगर ये आसान कंहा है..
जब हमारा अहम बड़ा हो जाता है..
तो कंहा किसी की खूबियां दिखती है..
अगर दिखती है,तो सिर्फ और सिर्फ कमियां ही..।

तो क्या करें..??
अपने अहम को, कमजोर होने का इंतजार करें..
सारे यश,कीर्ति और पुण्य का क्षरण होने का इंतजार करें..।


मैं किसे गलत कहूँ..
क्योंकि यंहा सही कौन है..
क्योंकि सबमें कुछ-न-कुछ खामियां है..
क्यों न मैं..
उनके खामियों को दरकिनार कर
उनके खूबियों को स्वीकार करू..।







आईने

अगर सामर्थ्यवान भी शिकायत करेंगे...
तो क्या होगा..
सामर्थ्यवान को सामर्थ्य स्वयं के लिए नहीं..
बल्कि सबके लिए मिला है..।
अगर वो सामर्थ्य स्वयं के लिए इस्तेमाल करेंगे..
तो उनका सामर्थ्य क्या रह जायेगा..??

हवा,पानी,अग्नि,आकाश,मिट्टी..
इनका सामर्थ्य स्वयं के लिए नहीं..
सबके लिए है..
मगर हम इनका दोहन किये जा रहें है..
और ये है..
जो मौन होकर मुस्कुरा रहें है..।


उन पैसों,ताकत,रुतबा,
का क्या मोल रह जाएगा..
जो खुद तक ही,
सिमट कर रह जायेगा..।
खुदा ने दिया है आपको..
ख़ुदा का प्रतिबिंब बनकर..
सबों का सरोकार करने को..
मगर आप खुद तक ही..
सिमट कर रह जाएंगे..
तो उस ख़ुदा को..
कैसे मुँह दिखा पाएंगे..।


आईने अगर गंदा हो,
तो उसे साफ करते है..
ये नहीं कि,
चेहरा देखना ही बंद कर देते है..
चेहरा अगर धूमिल दिखें..
तो आईने को साफ करते है..
ये नहीं कि...
नया आईना ही खरीद लेते है..।