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प्लीज् मुस्कुराये, क्योंकि आपके मुस्कुराने से ओरो के चेहरे पे भी मुस्कान आएगा..।।
गुरुवार, 26 मार्च 2026
प्यार की पांति..
माँ महागौरी: पवित्रता और शांति की देवी
'महा' का अर्थ है अत्यंत और 'गौरी' का अर्थ है श्वेत (सफेद)। कठिन तपस्या के कारण जब इनका शरीर काला पड़ गया था, तब भगवान शिव ने गंगाजल से इन्हें स्नान कराया, जिससे इनका वर्ण पूर्णतः गोरा हो गया। इसी कारण इन्हें 'महागौरी' कहा जाता है।
◆स्वरूप और प्रतीकवाद
- श्वेत वर्ण: माँ का रंग पूर्णतः गोरा है और वे श्वेत वस्त्र ही धारण करती हैं। यह 'परम शुद्धि' (Pure Consciousness) का प्रतीक है।
- चतुर्भुज: इनके चार हाथ हैं। ऊपर वाले दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले में त्रिशूल है। ऊपर वाले बाएं हाथ में डमरू और नीचे वाला हाथ वरमुद्रा में है।
- वाहन: माँ महागौरी का वाहन वृषभ (बैल) है।
◆योग विज्ञान: सोम चक्र (Soma Chakra)
महा अष्टमी पर साधक का मन सोम चक्र (सहस्रार के भीतर का एक सूक्ष्म केंद्र) की ओर बढ़ता है।
- भाव: आज का दिन 'चित्त की शुद्धि' का है। जैसे माँ ने गंगाजल से स्नान कर कांति प्राप्त की, वैसे ही साधक प्राणायाम और ध्यान के जल से अपने अंतर्मन की मलिनता को धोता है।
- प्रभाव: इस दिन साधना करने से संचित पापों का नाश होता है और बुद्धि अत्यंत सात्विक हो जाती है।
श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
अर्थ: सफेद बैल पर सवार, श्वेत वस्त्र धारण करने वाली और महादेव को आनंद देने वाली पवित्र माँ महागौरी मेरा कल्याण करें।
बुधवार, 25 मार्च 2026
माँ कालरात्रि: अंधकार का नाश करने वाली शक्ति
'काल' का अर्थ है समय और मृत्यु, और 'रात्रि' का अर्थ है अज्ञान का अंधकार। माँ कालरात्रि वह शक्ति हैं जो समय के चक्र को नियंत्रित करती हैं और अज्ञानता व दुष्टों का विनाश करती हैं।
◆ स्वरूप और प्रतीकवाद
- रंग: इनका शरीर रात के अंधकार की तरह काला है। इनके बिखरे हुए बाल और गले में बिजली की तरह चमकने वाली माला है।
- त्रिनेत्र: माँ के तीन नेत्र ब्रह्मांड की तरह गोल हैं, जिनसे अग्नि की किरणें निकलती हैं।
- चार भुजाएँ: इनके दाहिने हाथ 'अभय' और 'वरद' मुद्रा में हैं, जो भक्तों को सुरक्षा और वरदान देते हैं। बाएं हाथों में 'खड्ग' और 'कांटेदार अस्त्र' हैं।
- वाहन: माँ कालरात्रि गर्दभ (गधा) पर सवार हैं।
- स्थान: सिर का सबसे ऊपरी हिस्सा।
- प्रभाव: माँ कालरात्रि की कृपा से साधक के भीतर का सारा 'भय' समाप्त हो जाता है। यह ब्रह्मांड की शक्तियों से जुड़ने का द्वार है।
- साधकों के लिए: यदि आप मानसिक तनाव या किसी अज्ञात भय से जूझ रहे हैं, तो आज का ध्यान आपको परम शांति और साहस प्रदान करेगा।
• इनका रूप भयानक भले ही हो, लेकिन ये हमेशा शुभ फल देने वाली हैं, इसलिए इनका एक नाम 'शुभंकरी' भी है।
◆ योग विज्ञान: सहस्रार चक्र (Sahasrara Chakra)
महा सप्तमी के दिन साधक का मन सहस्रार चक्र (ब्रह्मरंध्र) के पास पहुँचने की तैयारी में होता है।
●माँ कालरात्रि की वंदना के लिए इस श्लोक का पाठ करें:
एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥
वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा।
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥
मंगलवार, 24 मार्च 2026
नजरिया : प्रकृति को समझिए
"माँ कात्यायनी"
ऋषि कात्यायन की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर देवी ने उनके घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था, इसीलिए इनका नाम 'कात्यायनी' पड़ा। इन्हें महिषासुर का वध करने वाली 'युद्ध की देवी' भी माना जाता है।
◆ स्वरूप और प्रतीकवाद
- चतुर्भुज रूप: माँ की चार भुजाएँ हैं। बाईं ओर के ऊपरी हाथ में तलवार और नीचे वाले हाथ में खड्ग है। दाईं ओर के हाथ अभय और वरद मुद्रा में हैं।
- वाहन: माँ कात्यायनी का वाहन सिंह है।
- ऊर्जा: इनका स्वरूप अत्यंत भव्य और चमकीला है, जो बुराई के विनाश और धर्म की स्थापना का प्रतीक है।
◆ योग विज्ञान: आज्ञा चक्र (Ajna Chakra)
एक योग साधक के लिए आज का दिन अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि आज चेतना आज्ञा चक्र (तीसरी आँख) में स्थित होती है।
- स्थान: दोनों भौहों के बीच (Eyebrow Center)।
- महत्व: यह चक्र अंतर्ज्ञान (Intuition), एकाग्रता और मानसिक स्पष्टता का केंद्र है। माँ कात्यायनी की कृपा से साधक को आत्म-साक्षात्कार की शक्ति प्राप्त होती है।
माँ कात्यायनी की वंदना के लिए इस श्लोक का पाठ करना चाहिए-
चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्याद्देवी दानवघातिनी॥
अर्थ: जिनके हाथों में चमकती हुई चंद्रहास तलवार है और जो श्रेष्ठ सिंह पर सवार हैं, वे दानवों का विनाश करने वाली माँ कात्यायनी मेरा कल्याण करें।
सोमवार, 23 मार्च 2026
माँ स्कंदमाता: वात्सल्य और ज्ञान की देवी
भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र 'कार्तिकेय' का एक नाम 'स्कंद' भी है। स्कंद की माता होने के कारण ही देवी के इस स्वरूप को 'स्कंदमाता' कहा जाता है।
◆ स्वरूप और प्रतीकवाद
- चतुर्भुज रूप: माँ की चार भुजाएँ हैं। अपनी ऊपरी दो भुजाओं में वे कमल का पुष्प धारण करती हैं।
- गोद में स्कंद: माँ अपनी एक भुजा से गोद में बाल कार्तिकेय (स्कंद) को पकड़े हुए हैं। यह स्वरूप ममता और वात्सल्य का प्रतीक है।
- वरमुद्रा: इनका एक हाथ वरमुद्रा में रहता है, जो भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करने का संकेत है।
- पद्मासना: चूँकि माँ कमल के आसन पर विराजमान होती हैं, इसलिए इन्हें 'पद्मासना देवी' भी कहा जाता है। इनका वाहन सिंह है।
◆ योग विज्ञान: विशुद्ध चक्र (Vishuddha Chakra)
आज साधक की चेतना विशुद्ध चक्र में स्थित होती है।
- स्थान: कंठ (गले) के मध्य में।
- तत्व: आकाश (Space Element)।
- प्रभाव: यह चक्र संचार, अभिव्यक्ति और रचनात्मकता का केंद्र है। माँ स्कंदमाता की कृपा से साधक की वाणी में माधुर्य आता है और वह सत्य को स्पष्ट रूप से व्यक्त कर पाता है।
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
23 मार्च..क्यों है खास..।
"क्रांति से हमारा तात्पर्य अंततः एक ऐसी सामाजिक व्यवस्था की स्थापना से है जिसे इस प्रकार के घातक खतरों का सामना न करना पड़े और जिसमें सर्वहारा वर्ग (श्रमिक वर्ग) का प्रभुत्व हो।"
भगत सिंह को जानने के लिए इनकी पुस्तक "why I am an atheist?" पढ़ें..आप सोचने पे विवश हो जाएंगे..।
"हमें फांसी की सजा का स्वागत करना चाहिए, क्योंकि हमारी मौत सोई हुई जनता को जगाने का काम करेगी। एक जीवित क्रांतिकारी से कहीं अधिक शक्तिशाली एक मृत (शहीद) क्रांतिकारी होता है।"
सुखदेव जी ने गांधी जी को 7अक्टूबर 1930 को पत्र लिखा था,तबतक इन्हें फांसी की सजा सुना दिया गया था. उस पत्र के कुछ प्रमुख अंश-
• क्रांतिकारियों को पथभ्रष्ट या हिंसक कहने पर गांधीजी से कहते है-
"आप हमें जनता के सामने अपराधी की तरह पेश करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि हम जो कर रहे हैं, वह देश के गौरव और स्वाभिमान के लिए है..?"
• गांधी इरविन समझौता पर वार्ता के समय सवाल करते है-
"यदि आप सरकार के साथ समझौता कर रहे हैं, तो याद रखें कि केवल कुछ कैदियों की रिहाई से क्रांति समाप्त नहीं होगी। जब तक पूर्ण स्वतंत्रता और शोषण का अंत नहीं होता, तब तक यह आग जलती रहेगी।"
•"हम मौत से नहीं डरते। हम तो चाहते हैं कि हमारी फांसी देश के युवाओं के दिलों में आजादी की मशाल जला दे। क्या आपकी अहिंसा इस बलिदान की शक्ति को समझ पाएगी?"
●सुखदेव इस बात के सख्त खिलाफ थे कि गांधीजी उनकी फांसी रुकवाने के लिए अंग्रेजों से 'दया' की भीख मांगें। उन्होंने गौरव के साथ कहा कि वे शहीद होना चाहते हैं ताकि उनका रक्त देश के काम आए।
◆राजगुरु..
जहाँ भगत सिंह 'विचारक' और सुखदेव 'रणनीतिकार' थे, वहीं राजगुरु दल के सबसे घातक 'निशानेबाज' माने जाते थे।
राजगुरु महाराष्ट्र से थे और छत्रपति शिवाजी महाराज उनके सबसे बड़े आदर्श थे। वे अक्सर कहा करते थे...
"गुलामी की जंजीरों में जकड़े रहकर सौ साल जीने से बेहतर है कि,स्वतंत्रता की वेदी पर एक दिन शेर की तरह शहीद हो जाना.."
फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद, जब जेल में साथियों के बीच चर्चा होती थी, तब राजगुरु ने मुस्कुराते हुए कहा था..
"फांसी का फंदा मेरे लिए फूलों की माला जैसा है। मुझे गर्व है कि मैं अपने देश के काम आ रहा हूँ और भगत सिंह व सुखदेव जैसे शेरों के साथ शहीद हो रहा हूँ।"
राजगुरु संस्कृत के विद्वान थे। वे अक्सर जेल में कठिन संस्कृत श्लोकों का पाठ करते थे। उनका मानना था कि भारतीय संस्कृति और शास्त्र हमें अन्याय के खिलाफ लड़ना सिखाते हैं..।।
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क्या सोच रहे हो तुम..?? यही सोच रहा हूँ कि.. क्या सोच रहा हूँ मैं..। सच कहूं तो.. कुछ तो सोच रहा हूँ मैं... मगर अफसोस क्या सोच रहा हूँ.. यह...
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अतीत से लेकर वर्तमान तक,हम सभी दुःखो से घिरे हुए है.. आखिर क्यों..?? इस क्यों का जबाब हम अतीत से ही ढूंढते आ रहे है..हमारे ऋषियों-मनीषियों न...
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हम सब खास(special) दिखना चाहते है.. मगर सवाल है क्यों..?? इसका सबसे बड़ा कारण है कि हम स्वयं को खास समझते ही नही..। जब हम स्वयं को खास समझने ...






