मैंने भी आज दोपहर में एक सपना देखा..सपने के कुछ अंश अभी तक याद है..
पहला दृश्य-
मैं देखता हूँ कि दक्षिण भारतीय शैली का मंदिर है आसपास और छत पे कुछ लड़कियां नाच रही है और हल्की फुल्की बारिश हो रही है..
मैं छत से नीचे झांकता हूँ तो देखता हूँ कि छत के किनारे एक सोई हुई मूर्ति(भगवान) है लगभग 7-8 फ़ीट जो काले पत्थर की है..मेरी नजर उस मूर्ति से मिलते ही, मूर्ति बैठ जात है,और कहता है कि तुम बहुत दिन जियोगे वो कुछ और भी कहते है,मगर मुझे याद नहीं है..मैं ये सोचने लगता हूँ कि मैं इतना दिन जी के क्या करूँगा ये सोचकर में अत्यचारी हो जाता हूँ जिससे मेरी मृत्यु करीब आ जाये,मेरे इस अत्याचार के कारण वो मूर्ति(देवता) प्रगट होते है और मुझे मारते है,तबतक कोई उनसे प्राथना करता है,और मेरे जीवन की भी
ख मांगता है,मुझे मालूम नही,मैं बचता हूँ कि नहीं मगर मेरा शरीर दिव्य स्वरूप का हो जाता है,और मैं उनसे कहता हूं कि मैंने सुना है कि देवता के हाथों से मरने से मोक्ष की प्राप्ति होती है,इसलिए मैंने ऐसा किया..।।
ख मांगता है,मुझे मालूम नही,मैं बचता हूँ कि नहीं मगर मेरा शरीर दिव्य स्वरूप का हो जाता है,और मैं उनसे कहता हूं कि मैंने सुना है कि देवता के हाथों से मरने से मोक्ष की प्राप्ति होती है,इसलिए मैंने ऐसा किया..।।
मैंने सीखा- किसी के द्वारा जो भी बोला जाए, उसे अच्छी तरह सुना जाए,अन्यथा उसका परिणाम गलत हो सकता है..।
दूसरा दृश्य-
दूसरे दृश्य में देखता हूँ कि मेरी फैमली किसी झंझट में फंस गई है..और मैं उसे बचाने का प्रयास करता हूँ..और उसमें सफल भी हो जाता हूँ..।
मैंने सीखा- अगर आपके पास धैर्य और साहस हो तो किसी भी परिस्थितियों से निपटा जा सकता है..
तीसरा दृश्य-
इस दृश्य में देखता हूँ कि कोई फंक्शन हो रहा है और उसमें कई चीजें बन रही है..देखता हूँ कि कोई चीज बन रही है,जिसे तेल में तला जा रहा है,मगर उसके साथ न खाए जाने वाली गंदगी भी साथ मे तली जा रही है..मैं उस रॉ मैटेरियल को टेस्ट करता हूँ तो मुझे शंका होता है,मैं ये जानने की कोशिस करता हूँ कि ये रॉ मटेरियल कंहा से आ रहा है,तो देखता हूँ जंहा से वो समान आ रहे है वंहा कुंच गंदगियां भी है जो साथ मे आ जा रहा है,मैं उन गंदगियों को अलग करने लगता हूँ,और कोशिस करता हूँ कि ये खबर आगे न जाये क्योंकि अगर ये खबर आगे जाएगी तो परिस्थितियां बिगड़ सकती है,वो गंदगियां ऐसी नही है,जिसे खाने से नुकसान हो,मगर उससे घृणा सबको हो सकता है..।इसिलिय मैं किसी को कुछ नही बताता..।
मैंने सीखा- कभी-कभी गलतियों को अनदेखा करने से और उसे सुधारने से बहुत बड़े मुसीबत को टाला जा सकता है..।
इसी दृश्य में देखता हूँ कि एक लंबा पाइप नुमा स्ट्रक्चर है जिसमें लोग ऊपर जाते है,और नीचे जाते है..उस पाइप नुमा सरंचना में देखता हूँ कि कुछ लोग उल्टे लटके हुए है वो इतने ऊंचे लटके हुए है की अगर गिरे तो शायद मृत्यु तक हो सकता है..।
नीचे से कोई आवाज देता है पाँव को फसा कर नीचे आ जाओ..हमलोग भी ऐसे ही आये है,उनलोगों को होंसला मिलता है,और शायद वो लोग नीचे आ जाते है..
मैंने सीखा- जब आपके पास कोई समाधान न हो तो दूसरे के द्वारा बताए हुए समाधान को मानना चाहिए..।








