सोमवार, 28 सितंबर 2026

दादी माँ का आख़री कॉल..

अगर किसी का कॉल आये तो उठा लीजिये..
क्या पता वो उनका आख़री कॉल हो..।
अगर उठा नहीं सकते तो..
मौका मिलते ही कॉल बैक कर दिया कीजिये..
क्या पता..
वो आपके कॉल का लंबा इंतजार कर सके की नहीं..।




जिंदगी में हमें अक्सरहाँ किसी-न-किसी बात का मलाल होता है..
समय बढ़ता जाता है,और जिंदगी का मलाल बदलता जाता है..।
मगर जिंदगी के कुछ मलाल ऐसे होते है..
जो हम कभी भुल नहीं पाते..।

मुझे जिंदगी में किसी चीज का मलाल नहीं है..
भले ही मैं कितने दफा असफल हुआ हूँ..।
मगर मुझे शायद ताउम्र इस बात का मलाल रहेगा कि..
मैं दादी माँ का आख़री कॉल उठा न सका..
और न ही कॉल बैक कर सका..।
जब किया तो पता चला वो हॉस्पिटल में है..।

दादी माँ..
मुझे लगता है..
मैंने माँ से ज्यादा वक्त..
आपके साथ गुजारा है..।
मुझे ऐसी कोई रात याद नहीं है..
जो मैंने माँ के साथ गुजारा है..
मगर मुझे अनगिनत रातें याद है..
जो मैंने आपके साथ गुजारा है..।
मुझे माँ की गोद से ज्यादा..
आपके आंचल की छांव याद है..।
क्या-क्या लिखूं..
और कितना लिखूं...
जितना लिखूंगा..
उतना कम है...
दादी माँ...।




दादी माँ का आख़री कॉल शनिवार 27 सेप्टेंबर 2025 को आया था उस रोज नवरात्रि का पंचमी तिथि था..।दादी माँ कुछ महीने से रोज फ़ोन करती थी पहले एक-दो दिन का गैप हो जाता था..मगर कुछ महीने से रोज उनका फ़ोन आता था..खाना खाकर जब वो सोने के लिए जाती तो सबको फोन घुमाती थी..।जब भी रात के 9 बजे के आसपास घंटी बजती तो मुझे अंदाजा हो जाता था दादी माँ का ही फ़ोन है..।
शनिवार 27 सेप्टेंबर को भी दादी माँ का फ़ोन आया,मैं उस समय बस में था ओर बस स्टॉपेज आने वाला था,मैं ये सोचकर फ़ोन नही उठाया कि अभी फ़ोन उठाया तो बस से उतरने में दिक्कत हो जाएगा (सच कहूं तो उस समय शायद बात करने का मन नही था) मैंने सोचा रूम पर पहुंच कर दादी माँ से बात कर लूंगा..।मगर रूम पर आते ही मैं भूल गया..मैं फ्रेश होने गया और उसके बाद खाना खाया..।खाना खाने के बाद जब दादी माँ को फ़ोन करने का ख्याल आया तबतक रात के 10 से ज्यादा बज चुके थे..मैं ये सोच के कॉल बैक नही किया कि दादी माँ सो गई होंगी.।
सुबह जब कॉल किया तो पता चला दादी माँ को सब हॉस्पिटल ले गए है..
मुझे लगा सब ठीक हो जाएगा क्योंकि दादी माँ कई बार हॉस्पिटल से तंदरुस्त होकर आई हुई थी..मगर इस बार मेरा मन उदास था..क्योंकि जब रिपोर्ट में पता चला कि फिर से जांच में पता चला है कि पथरी है,तो मन थोड़ा उदास हुआ,मगर इस और ध्यान ही नहीं गया कि दादीमाँ इस बार हार जाएंगी..।
और कुछ दिनतक संघर्ष किया..और पूर्णिमा के दिन अपने पार्थिव शरीर को त्यागकर चली गई..।।

और आखरी बार दादीमाँ के नंबर से उसी रोज फ़ोन आया जिस रोज दादीमाँ ने अपना पार्थिव शरीर छोड़ा था..मगर इस बार दादीमाँ ने कॉल नही किया था,मेरी छोटी बहन ने दादी माँ के फ़ोन से कॉल किया था,ये कहने के लिए की दादी माँ अब नही रहीं..।।

आज एक साल हो गए..
जब दादी माँ ने आख़री बार कॉल किया था..
और मैं,ना ही फोन उठा सका,और न ही समय पर कॉल बैक कर सका था..।
ये मलाल ताउम्र रहेगा..
शायद इसी बहाने..
दादी माँ मेरे जेहन में ताउम्र रहें..।।


शुक्रवार, 25 सितंबर 2026

मुझे कुछ होना है..

मुझे कुछ होना है,
जिसका हूँ उसका होना है..
कैसे होऊं कुछ पता नही..
बस बेबस होकर..
उनके और देख रहा हूँ..
कंही कुछ चमत्कार हो जाये..
और उनसे साक्षात्कार हो जाये..।
मुझे कुछ होना है,
जिसका हूँ उसका होना है..


बुधवार, 23 सितंबर 2026

खुद को बदलिए..

आईने बदलने से..
चेहरे थोड़े ही बदलते है..
वक़्त बदलने से..
व्यक्तित्व थोड़े ही बदलता है..।
हां,खुद को बदलने से..
चेहरा और व्यक्तित्व..
दोनों ही बदलता है..।

चाहे आईना कितना छोटा हो..
या फिर..
वक़्त कितना ही बुरा हो..
व्यक्तित्व हमेशा बड़ा होना चाहिए..।

उस आईने को तोड़ दीजिए..
और उस वक़्त को छोड़ दीजिए..
जो आपके रास्ते का रोड़ा बन रहा है..
उसे रौंद दीजिए..।
कबतक,आखिर कबतक..
जूझते रहेंगे..
अपने नाकामियों से..
अपने नाकामियों के बेड़ियों को तोड़कर
आगे निकल जाइये..।
क्योंकि,आपका स्वर्णिम पल..
आपका इंतजार कर रहा है..।



मंगलवार, 22 सितंबर 2026

दोस्तजी..

दोस्त की अहमियत क्या होती है..
ये तब पता चलता है..
जब दोस्त से दूरियां बढ़ जाती है..।
और अचानक..
फिर से जब...
दोस्त से करीबियां बढ़ती है..
तब दोस्त की..
अहमियत का अहसास होता है..।

दोस्त वो अहसास है..
जिसे बयां नहीं किया जा सकता..।

वो जेठ की गर्मी है..
तो चैत्य का फुहार है..
वो पूस का ठिठुरन है..
तो फागुन का बहार है..।
इनके बिना..
जीवन कंहा आसान है..।।



शुक्रवार, 18 सितंबर 2026

कुछ होने का मन करता है..
जिसका हूँ..
उसका होने का मन करता हूँ..
मगर कैसे होऊं..
इसका कोई पता नहीं चलता है..।
क्या-क्या जतन करुँ कि..
उसमें ही पतन हो जाऊं..

बुधवार, 16 सितंबर 2026

उम्मीद..

हम कभी इतना देर नहीं होते कि..
हम अपने मंजिल पर पहुंच ही न सकें..
हमारे पास हमेशा इतना समय होता है कि..
हम अपने मंजिल पर पहुंच सकें..।

जिस समय आप..
अपने मंजिल के बारे में..
सोचना बंद कर देते है..
उस समय आप..
अपने मंजिल से बहुत दूर हो जाते है..।

हमेशा अपने मंज़िल के बारे में सोचते रहें..
क्या पता कब..
आपको अपनी मंज़िल दिख जाए..
और आप वंहा पहुंच जाए..।।

उम्मीद बनाये रखिये..
क्योंकि ये उम्मीद ही ने तो..
दुनिया को बदला है..
आप भी खुद को बदलकर..
अपने मंजिल तक जरूर पहुंच सकते है..।।



रविवार, 13 सितंबर 2026

हमें लगता है..

हमें लगता है..
हम अच्छे है..।
ये अच्छा लगना ही..
सबसे बुरा है..।
जब-जब आपको..
अच्छे होने का भान हो..
तो समझ लीजिए..
आपमें अभी भी..
ढेर सारी कमियां है..।।

दूसरों में कमियां देखना..
आसान है..
और खुद की कमियां..
दूर करना दूभर है..।
जबतक आपमें..
कमियां रहेगी..
तबतक आपको, 
दूसरों में कमियां दिखती रहेगी..।