सोमवार, 16 फ़रवरी 2026

नजरिया..हमारे धर्मग्रंथ और एलियन...

क्या एलियन होते है..??
इसका जबाब न हम, हां में दे सकते है,और न ही, ना में..।

हम भारतीय तो बिल्कुल नही कह सकते है कि एलियन नही होते..
क्योंकि हमारे धर्म ग्रंथ में जिस भूत, पिशाच, दैत्य,प्रेत, असुर,यक्ष, बेताल इत्यादि का जिक्र किया जाता है,आखिर वो लोग है कौन..?

इनके बारे में हमेशा, हमलोगों को सिर्फ गलत बातें ही बताया गया..
बल्कि इन लोगों ने मानवों के साथ मिलकर कई अच्छे काम किये है..
●जिसमें सबसे प्रमुख "समुंद्र-मंथन" का जिक्र आता है..
साथ ही कई "गण"(भूत, प्रेत,पिशाच, डाकिनी और शाकिनी इत्यादि) भगवान शिव के सेना में शामिल है..।

●अभी भी ग्रामीण भारत मे क्षेत्रपाल का मंदिर मिल जाएगा..ये मंदिर गाँव के रक्षा के लिए बनाया जाता है..।ये मंदिर सामान्यतः गाँव के सबसे अंत मे मिलेगा..(अक्सरहाँ हम इसे ब्रह्म बाबा के मंदिर के रूप में मानते है..)

●हममें से कई लोग विक्रम और बेताल की कहानी जरूर सुने होंगे..क्या आपने या हमने सोचा है..ये बेताल कौन है..??
बेताल के IQ(इंटेलिजेंस कोशेंट) लेवल पे हमलोगों ने कभी गौर ही नही किया..।।

● वंही जब हम हनुमान चालीसा पढ़ते है तो उसमें एक पंक्ति है-"भूत पिशाच निकट नही आवै, महावीर जब नाम सुनावै"..ये भूत,पिशाच है कौन जिसे हनुमान जी नियंत्रित करते है..
वंही जब हम हनुमान जी की "पंचमुखी" छवि देखते है,तो वो कुछ और ही कहता है..।

बौद्ध धर्म में भी "धर्मपाल" की आकृति वाली मूर्ति दिखती है,जो पिशाच जैसा ही मिलता जुलता है..बौद्ध मान्यता ये है कि पहले ये नकारात्मक थे,मगर बौद्ध की शिक्षाओं से प्रभावित होकर धर्म और मानवता के रक्षक बन गए..

जैन धर्म मे भी "यक्ष-यक्षिणी" की मूर्तियां मिलती है,जो द्वारपाल का कार्य करती है,मानव से बिल्कुल ही अलग दिखती है..।

वंही अन्य धर्म मे भी ऐसे लोगों का उल्लेख है,जिन्हें मानव के हितैषी के रूप में दर्शाया गया है..

इस्लाम धर्म मे "जिन्नात" का उल्लेख है..कहा जाता है कि कुछ जिन्न सूफी संतों और पैगम्बरों के मददगार भी रहे है,वही बुरे जिन्न को "इबलीस" (शैतान)का अनुयायी माना जाता है..।

ईसाई धर्म मे मुख्य रूप से "डेमन्स" और "फालेन एंजेल्स" का जिक्र सर्वाधिक है,मान्यता ये है कि कभी ये फरिश्ते थे,मगर ईश्वर के विरुद्ध विद्रोह करने पर स्वर्ग से निकाल दिया गया..

●वंही यहूदी लोककथाओं में "डिब्बक" का उल्लेख मिलता है..।




हरेक धर्म में इनका अलग-अलग तरीके से जिक्र किया गया है..मगर सब किसी-न-किसी रूप से मानव के हितैषी ही रहें.. फिर ऐसा क्या हुआ कि मानव और इनमें अलगाव हो गया और उन्हें हम नकारात्मक रूप में लेने लगे..।।

-वर्तमान समय में भी जब हम आधुनिक शब्द "एलियन" का नाम लेते है तो एक नकारात्मक रूप में ही..
आखिर कुछ तो ऐसा अतीत में हुआ होगा..जो इन्हें हीरो से विलेन बना दिया..।।

फिर से हमारा सवाल है कि - "एलियन" होते है..??
हम जो चीज नही देखते इसका ये मतलब नही की वो चीज नही होते है..।।
हम बैक्टेरिया,वायरस,प्रोटोज़ोआ को नही देख पाते मगर वो है..सिर्फ है ही नही बल्कि हमारा अस्तित्व भी उनके हाथ मे है...😊

इस ब्रह्मण्ड🌏 को हम कितना जानते है...??
शायद 1% भी नही..।
सच बताऊ तो अभी हम पृथ्वी के भी कई रहस्य को नही जानते...।

एलोरा और वंहा की कुछ मूर्तियां कुछ तो संकेत संकेत करती है..।
क्रमशः...

शनिवार, 14 फ़रवरी 2026

शिव और धड़कन..

न जाने वर्षों बाद ऐसा हुआ..
पहले ये दिल सिर्फ उसके लिए धड़कता था..
फिर उसके गुम होने के बाद..
इसने धड़कना बंद कर दिया..।।

फिर शिव की कृपा हुई..
और इक अनजान..
इस वेबजाल में भटकते-भटकते..
मुझतक पहुंच गई..।
फिर भी ये धड़कना शुरू नही हुआ..।

न जाने आज फिर क्यों..
ये दिल फिर से धड़कना शुरू किया...।
शायद शिव के करीब जा रहा हूँ मैं..
या फिर शिव ही मेरे करीब आ रहे है..।
बिना शिव के चाहे, क्या होता है..
वो जो चाहे..सो होता है..।।


शुक्रवार, 13 फ़रवरी 2026

जिंदा होने का तात्पर्य..

अगर आप जिंदा है..
तो आप..
दूसरों को भी जिंदा रख सकते है..।
इसीलिए जिंदा रहना जरूरी है..।




जिंदा होने से तात्पर्य सांस चलने से नही है..
बल्कि जिंदा होने का अहसास..
दूसरों को करवाने से है..।
अगर आप अपने जिंदा होने का अहसास दूसरों को नही करवा रहे है..
तो आप उनके लिए जिंदा नही है...।।

तो फिर क्या करें..
अपने मौजूदगी और अपने जिंदा होने का अहसास करवाये..।
अपने चाहने और जाननेवालों से जुड़े..अब जुड़ना आसान है..
एक क्लिक करते ही आप उनके लिए जिंदा हो सकते है..।

जिन्हें आप नही जानते है..
उन्हें अपनी मौजूदगी का अहसास अपने मुस्कान से कराए..
हमेशा मुस्कुराते रहें..क्योंकि..
आपकी मुस्कान दूसरों के चेहरे पे भी मुस्कान ला सकती है..।।






गुरुवार, 12 फ़रवरी 2026

मैं अच्छा हूँ या बुरा हूँ..

मैं अच्छा हूँ, या बुरा हूँ..
इसका निर्णय कौन करेगा..??​
ये भीड़...
या मैं स्वयं..
मैं अपने हर सच और हर झूठ से वाकिफ हूँ..
इसलिए सही निर्णय तो मैं ही कर पाऊंगा..।
ये भीड़ सिर्फ मुखौटा देखती है..
मन की गहराई नहीं..।



मैं अच्छा हूँ, या बुरा हूँ..
इसका निर्णय कौन करेगा..??
तराजू तो सबके हाथ में है..
पर बांट सबके अलग अलग है..
कोई स्वार्थ से तोलेगा..
तो कोई संस्कार से..
बेहतर है कि मैं खुद को खुद से तोलूं..।।

मैं अच्छा हूँ, या बुरा हूँ..
इसका निर्णय कौन करेगा..??




"कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।  
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥"
(भगवद्गीता)

हम सुंदर दिखना चाहते है..

हम सुंदर दिखना चाहते है..
आखिर क्यों..??
है न बड़ा अजीब सवाल..।
आपको याद है..
आप आखरी बार,खुद के लिए सुंदर कब बने थे..??
नही याद होगा..
क्योंकि हम खुद के लिए सुंदर बनते ही नही..
बल्कि लोग क्या कहेंगे..
इसके लिए सुंदर बनते है..और अपनी सुंदरता का दिखावा करते है। 



हमें सुंदर क्या बनाता है..??
क्या हमारे कपड़े,गहने या फिर हमारा सौंदर्य प्रसाधन..
शायद ये सब नही..
मगर ये वास्तविकता नही है..
ये हमें सुंदर नही, बल्कि हमारे सुंदरता में चार चांद लगाते है..।
तो फिर हमें सुंदर कौन बनाता है..??

हमें आकर्षक कौन बनाता है..??
इन सबका सिर्फ जबाब ही नही हमें मालूम है बल्कि..
हम सब इन खूबियों से लबरेज है..।।

वो चीज आखिर है क्या..??

वो चीज..
आपके चेहरे पे है..
और वो है..
आपकी मुस्कान..।।

कृष्ण सुंदर है अपने मुस्कान के कारण..
कृष्ण सौम्य है,अपने मुस्कान के कारण..
कृष्ण आराध्य है,अपने मुस्कान के कारण..।।

ये मुस्कान सिर्फ मुस्कान ही नही है..
बल्कि स्वयं से आत्मसाक्षात्कार कराने का साधन है..।।
इसीलिए मुस्कुराइए..
खुद के लिए..


बुधवार, 11 फ़रवरी 2026

मौन हूँ मैं..

ना ही कुछ कहने को है..
ना ही कुछ पूछने को है..
इसीलिए मौन हूँ मैं..
मेरे मौन को तुम..
मेरी उदासी मत समझना..।
मेरे मौन में..
वो सबकुछ है..
जो इस शून्य में है..।।




अगर तुम इस शून्य को,समझ सकते हो..
तो मेरे मौन को भी, 
समझ ही लोगे..।
इस शून्य से ही,तो मैं हूँ,
इस शून्य से ही,तो तुम हो..
और तुमको ही समझने को,
मौन हूँ मैं..
क्योंकि मौन ही तो..
शून्य से साक्षात्कार का सबसे सरल साधन है..।।

ना ही कुछ कहने को है..
ना ही कुछ पूछने को है..
इसीलिए मौन हूँ मैं..
मेरे मौन को तुम..
मेरी उदासी मत समझना..।
मेरे मौन में..
वो सबकुछ है..
जो इस शून्य में है..।।

मंगलवार, 10 फ़रवरी 2026

शतरंज से सीख..

अक्सरहाँ जब मैं उदास होता हूँ,वैसे होता नही हूँ..😊 
या फिर क्या करूँ,क्या न करू.. की स्थिति उपजती है,तो मैं अपने मोबाइल/टेब पर शतंरज♟️ खेलता हूँ..अक्सरहाँ हारता हूँ, या फिर जीतता हूँ..मगर अक्सरहाँ हारता ही हूँ..😀।

अभी खेलते-खेलते कुछ सीखने को मिला..वैसे अक्सरहाँ मिलता है..मगर आज मैंने उस सीख को कागज पे उतारा..फिर सोचा क्यों न ब्लॉग पर ही लिखू..और यंही तक नही रुका मैं,फिर मैंने सोचा..हरेक लेवल से जो सीख मिलेगी उसे एक किताब का रूप दूंगा..😊।

आज मैंने..
67वे लेवल.. से सीखा...



हमारा पहला कदम ही जीत का नींव रखता है,और साथ ही जीत और हार का दिशा तय करता है..
(हमारा दिन कैसा होगा,अक्सरहाँ हमारे सुबह के शुरुआत से तय हो जाता है,मगर मैं इससे सहमत नही हूँ..😊हां कभी-कभी ऐसा होता होगा..वैसे आप अपने दिन को कभी भी खुशनुमा बना सकते है..चेहरे पे एक मुस्कान😊 लाकर..
मुस्कुराइए..😊 क्योंकि आप जिंदा है..और जिंदा इंसान कुछ भी कर सकता है..।)

कभी-कभी हमें आगे बढ़ने के लिए मदद की जरूरत पड़ती है...अगर मदद नही लिया तो...जंहा अटके है,वंहा न जाने कबतक अटके रहेंगे इसका पता नही चलेगा..दिन,सप्ताह,महीना,साल या ताउम्र..।
इसलिए आगे बढ़ने के लिए मदद लेने से झिझके नही..मदद ले और आगे बढें.. अपने झिझक को तोड़े..।
(मगर अफसोस हम जैसे कुछ लोग है,जिनकी झिझक टूटती ही नही😊..जिनका खामियाजा उन्हें ताउम्र भुगतना पड़ता है..😢)

मगर एक बात तो है..जब आप बिना मदद के आगे बढ़ते है..और सफल होते है,तो उसका सुकून ही कुछ और होता है..😊और ये सुकून हमेशा आपको सुकून देता है..।
मगर इसका दूसरा पहलू भी है..
अगर आप सफल नही हुए तो..🤔
इसलिए मदद लेने से हिचकिये मत..😊।
आगे बढ़ना है तो मदद लीजिये..चाहे वो आपका दुश्मन ही क्यों न हो..उससे भी मदद लीजिये।

68वा लेवल..से सीखा..
अपने हरेक मोहरे पे नजर रखें.. 
-जिस तरह शतंरज में हम अपने हरेक मोहरे पर नजर रखते है,उसी तरह जिंदगी में भी हमें, अपने हरेक सगे-संबंधी एवं आसपास के लोगों पर नजर रखनी होती है..क्योंकि इनकी अनदेखी कभी-कभी भारी पर सकता है,या फिर इनसे जुड़े रहने से जिंदगी में उत्थान आ सकता है..

शतंरज में कभी भी कोई चाल बिना सोचे समझे न चले-
जिंदगी में अक्सरहाँ हम कई बार बिना सोचे समझे,अनमने ढंग से आगे बढ़ते है,जिसका खामियाजा हमें अक्सरहाँ उठाना पड़ता है..

हमेशा धैर्य बनाये रखें..
कभी-कभी जीत हमारे हिस्से में इसलिय नही आता कि हम जितना चाहते है,बल्कि वो इसलिए आता है कि हम धैर्य बनाये रखते है..।

●69वा लेवल