सोमवार, 8 जून 2026

एक बात कहूँ..

एक बात कहूँ...
नही..
कहने दो न..।
क्या कहोगी..
मैं वो जानता हूँ..
तुम्हारी मौन/मुस्कान सब कुछ बयां कर रही है..।

एक बात कहूँ...
नही..
कहने दो न..।



रविवार, 7 जून 2026

कभी देखिए खुद को..

कभी देखिए खुद को..
क्या थे और क्या हो गए..।
क्या आप वही है..
जो आप होना चाहते थे..।
अगर नही..
तो फिर से देखिए खुद को..
क्या आप वही होना चाहते है..
जो आप पहले होना चाहते थे..
अगर हां..
तो फिर आखिर आप..
वो क्यों न हुए..??
जो आप होना चाहते थे..।।

खुद से पूछिए..
क्या आप सच मे वंही होना चाहते थे..
या फिर कुछ और होना चाहते थे..??

हमारे पास हमेशा इतना वक़्त और अवसर होता ही है..
जो हम होना चाहते है..
वो किसी न किसी माध्यम से हो ही जाते है..
प्रत्यक्ष नही तो अप्रत्यक्ष रूप से..

कभी देखिए खुद को..
क्या थे और क्या हो गए..।


हम भूल जाते है..

कभी-कभी हम भूल जाते है..
हम क्या करने आये है..।
कुछ लोग उस भूल को भूलकर..
कुछ और भूल कर रहे होते है..
और इस भूल के चक्र से कभी निकल नही पाते..।।

कुछ लोग उस भूल की याद आते ही..
उसे सुधार करते है..
मगर कुछ क्षण बाद फिर भूल कर जाते है..
और इस चक्र में फंसे रहते है..।

और कुछ लोग उस भूल की याद आते ही..
दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ उस भूल को सुधार कर..
आगे बढ़ते जाते है..
अगर बीच राह में भूल हो भी गई..
तुरंत उस भूल को सुधार कर..
आगे बढ़ जाते है..।
और इनमें से कुछ लोग जीवनपर्यंत भूल नही करते..
और जिंदगी को वो मुकाम देते है..
जिस मुकाम के लिए हमसब बने है..।
मगर हमसब बार-बार भूल करके,
भूल कर रहे है..
और इस चक्र में फंसे हुए है..।।


मुस्कुराते हुए चेहरे..

मैंने मुस्कुराते हुए चेहरे को मुरझाते हुए देखा है..
और मुरझाए हुए चेहरे को मुस्कुराते हुए देखा है..
मगर कुछ चेहरे हमेशा मुरझाए हुए ही रहते है..
क्यों..??
क्योंकि शायद उनकी आदत बन गई हो..
उससे वो निकलना ही नही चाहते..।
मगर ऐसा नही है..
वो चेहरे भी मुस्कुरायेंगे एक दिन,
जिसदिन सावन की हल्की फुहार उनके रूह पर पड़ेगी..।
मगर कब पड़ेगी..??
जब वो घर से निकलेंगे..।
कब निकलेंगे..??
जब वो चाहे..
या फिर कोई उनकी अंगुलियां थाम कर घर से बाहर लाये..।।

इस जंहा में हर कोई मुस्कुराना चाहता है..
बस कोई मुस्कुराने वाला भी तो दिखे..।
जिसे देख के कोई मुस्कुराए..
और उसे देखकर,
कोई और मुस्कुराए..
और इस तरह, 
ये सारा जंहा मुस्कुराए..।।

हम रोने के लिए नही..
बल्कि हंसने के लिए पैदा हुए है..
हम अपने हिस्से का रोना तो..
जन्म लेते ही रो लेते है..।
बाकी तो दूसरे के कारण रोते है..
कोशिश करें आपके कारण कोई रोये नही..
बल्कि आपके कारण..
कोई हंसे..कोई मुस्कुराए..
और ये मुस्कान सारे जंहा में फैल जाए..।।




बुधवार, 3 जून 2026

मैं..

मैं वो होना चाहता हूं..
जो मैं हूँ..
मैं उसमें खो जाना चाहता हूं..
जिससे मैं हूँ..
मैं,
मैं हो जाना चाहता हूं..
जो मैं हूँ..।
मगर कैसे होऊं..??
कुछ पता नही..
मैं वो होना चाहता हूं..
जो मैं हूँ..।।


सोमवार, 1 जून 2026

गलतियां..

गलतियां सबसे होती है..
मगर अपने गलतियों का बोध कुछ लोगों को ही होता है..
और उनमें से कुछ लोग ही,अपने गलतियों को स्वीकारते है..
और उनमें से कुछ चुनिंदा लोग ही,
अपने गलतियों को स्वीकार कर,अपने गलतियों को नही दोहराते है..।।

आप इनमें से कौन है..
•क्या आपको अपने गलतियों का बोध है..?
•क्या आप अपने गलतियों को स्वीकारते है..?
•क्या आप अपने गलती को नही दोहराते है..?




ऐसे कौन लोग है जो अपनी गलती नही दोहराते..??
ये वही लोग है..
जो सफल है..।
जो गलतियां करने के बाद,
अपने गलतियों को न छुपाते है,
और न ही भागते है..
बल्कि अपने गलतियों को सुधारते है..।।

हममें से अधिकांश लोग..
गलतियां करते है..
कभी अनजाने में तो कभी जानबूझकर..
मगर हरेक गलतियां नुकसानदेह नही होती..
मगर वही गलतियां जब आदत बन जाती है,
तब वो नुकसानदेह हो जाती है..।
जैसे..देर से स्टेशन पहुचने पर दौड़कर ट्रैन पकड़ना..अगर ये आदत बन जाये तो..
या फिर जल्दीबाजी में ट्रैफिक नियम को तोड़ना..अगर रोज तोड़ने लगे तो..??

कभी-कभी हम गलतियां जानबूझकर करते है..
अगर वो गलतियां आप, 
दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए कर रहे होते है तो,
इससे बड़ा अपराध कोई नही है..।



शुक्रवार, 29 मई 2026

आप कब हंसते है..

आपने कभी गौर किया है..
हमें हंसी कब आती है..??
अक्सरहाँ हमें दूसरों की गलतियों,नादानियों या उसके दयनीय स्थिति पे ही हंसी आती है..।
है ना..।
मगर हम कभी गौर नही करते..।

चाहे हम दोस्तों के बीच में हो,या परिवार के सदस्यों के बीच में हो..
अक्सरहाँ हम किसी के गलतियों,नादानियों या फिर उसके दयनीय स्थिति पे ही हंसते है..।
अगर आप कोई मूवी या कोई कॉमेडी शो देखे..
अक्सरहाँ हम उनके गलतियों या उनकी दयनीय स्थिति पे ही हंसी आती है..।
हमसब ने "हेरा-फेरी" देखा ही होगा..इस फ़िल्म का हरेक किरदार की स्थिति दयनीय ही है..और हम इन्हीं परिस्थितियों को देखकर हंस रहे होते है..।।

आखिर हमें दूसरों पे हंसी आती क्यों है..??
मनोवैज्ञानिक के अनुसार जब हम किसी को कोई गलती करते,या किसी उलझन में देखते हैं, तो हमारे अवचेतन मन को लगता है कि, मैं इस स्थिति में नहीं हूँ या मैं इससे बेहतर हूँ। यह अचानक मिलने वाली मानसिक राहत और श्रेष्ठता की भावना ही हंसी के रूप में बाहर आती है।

हंसी हमें कब-कब आती है..??
दूसरों की गलतियों पे..
● अपनी गलती याद आ जाने पर..
● जब हम समूह में होते है..
● तनाव या मुसीबत से निकलने पे..



एक बात कहूँ..