मंगलवार, 7 अप्रैल 2026

शिव..

शिव कहते है..
लीन हो जाओ..
स्वयं में ऐसे..
जैसे स्वयं का भान न हो।

तब ही शिव का ज्ञान,
और शिव का भान संभव है..।

शिव तो शिव है..
शिव तो हर जगह विद्यमान है..
शिव को जानने के लिए,
खुद को भी सब जगह विद्यमान कर..।

शिव कहते है..
लीन हो जाओ..
स्वयं में ऐसे..
जैसे स्वयं का भान न हो।


क्या आप स्वस्थ हैं?

अक्सर जब कोई हमसे पूछता है, "कैसे हैं आप?"

तो हमारा सहज जवाब होता है, "ठीक हूँ।" लेकिन क्या हम वाकई ठीक होते हैं?

क्या केवल बीमारी का न होना ही 'स्वस्थ' होना है?


समदोषः समाग्निश्च समधातुमलक्रियः।

प्रसन्नात्मेन्द्रियमनाः स्वस्थ इत्यभिधीयते॥

(सुश्रुत संहिता)


जिसका वात-पित्त-कफ (दोष) संतुलित हो, जिसकी जठराग्नि तेज हो, जिसके शरीर के धातु और मल-क्रियाएं सामान्य हों, और सबसे महत्वपूर्ण—जिसकी आत्मा, इंद्रियां और मन प्रसन्न हों, वही वास्तव में 'स्वस्थ' है।



वैश्विक और राष्ट्रीय स्तर पर स्वास्थ्य के आंकड़े चिंताजनक हैं..


मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health): विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, दुनिया भर में हर 8 में से 1 व्यक्ति किसी न किसी मानसिक विकार से जूझ रहा हैभारत में, लगभग 15% वयस्क ऐसे हैं जिन्हें किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य सहायता की आवश्यकता है।


जीवनशैली बीमारियाँ (Lifestyle Diseases): एक शोध के अनुसार, भारत में लगभग 60% मौतें गैर-संचारी रोगों (NCDs) जैसे हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर के कारण होती हैं, जिनका सीधा संबंध हमारे खान-पान और तनाव से है।


शारीरिक निष्क्रियता: 'द लैंसेट' की रिपोर्ट बताती है कि लगभग 50% भारतीय महिलाएं और 25% पुरुष पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं कर पाते, जो भविष्य में गंभीर रोगों का कारण बन सकता है।



शारीरिक स्वास्थ्य: क्या आपका शरीर आपका साथ दे रहा है?

​योग के अनुसार एक स्वस्थ शरीर वह है जहाँ ऊर्जा का प्रवाह निर्बाध हो। क्या आप बिना जल्दी थके अपने दिनभर के कार्य कर पा रहे हैं?

मानसिक स्वास्थ्य: विचारों का संतुलन

मानसिक थकान शारीरिक थकान से कहीं ज्यादा घातक है। सांख्य दर्शन के अनुसार, दुखों का निवारण विवेक और आत्मज्ञान से होता है। स्वस्थ मन वह है जो विपरीत परिस्थितियों में भी विचलित न हो

प्रतिदिन 10-15 मिनट का ध्यान (Meditation) मानसिक स्वास्थ्य के लिए 'शील्ड' का काम करता है।


सामाजिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य

​मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। यदि हमारे संबंध कटु हैं, तो हम स्वस्थ नहीं रह सकते। साथ ही, जब हम अपने अंतर्मन से जुड़ते हैं, तब ही हम 'स्वस्थ' (स्व + स्थ = स्वयं में स्थित होना) होते हैं

रविवार, 5 अप्रैल 2026

मैं जब भी..

मैं जब भी उनसे दूर जाना चाहता हूं..
वो हर बार मुझे..
अपने करीब खींच लाते है..।
फिर जब मैं उनके करीब जाता हूँ..
तब अहसास होता है..।
भला शरीर के बिना..
आत्मा कैसे रह सकता है..।।

मैं जब भी उनसे दूर जाना चाहता हूं..
वो हर बार मुझे..
अपने करीब खींच लाते है..।
फिर जब मैं उनके करीब जाता हूँ..
तब अहसास होता है..।
भला सूरज के पृथ्वी का क्या हश्र होगा...
ये सोच के ही मन घबराता है..।

मैं जब भी उनसे दूर जाना चाहता हूं..
वो हर बार मुझे..
अपने करीब खींच लाते है..।


शुक्रवार, 3 अप्रैल 2026

शहर और अंधेरा..

चला था अंधेरे में,
अंधेरा ढूंढने..
मगर इस शहर में अब, अंधेरा है कंहा..??
जो अंधेरा मिले कंही..।

ये शहर अंधेरा को लील रहा है ऐसे..
जैसे कृष्ण विवर लील रहा हो रोशनी को..।।

चला था अंधेरे में,
अंधेरा ढूंढने..
मगर इस शहर में अब, अंधेरा है कंहा..??
जो अंधेरा मिले कंही..।


बुधवार, 1 अप्रैल 2026

मालूम नही क्यों..

मालूम नही क्यों..
तेरे साथ कुछ वक्त बिताने का मन करता है..।
मालूम नही क्यों..
तेरे कंधे पे सर् रखकर,
तेरे बारे में सबकुछ जानने का मन करता है..।
मालूम नही क्यों..
तेरे मौन को पढ़ने का मन करता है..।
मालूम नही क्यों..
तेरे गोद मे सर् रखकर..
तेरे चेहरे को पढ़ने को मन करता है..।
मालूम नही क्यों..
कुछ पल के लिए..
तुममें समाहित होकर अपना अस्तित्व खो देने का मन करता है..।
मालूम नही क्यों..
तुममें शून्यता का अहसास करने का मन करता है..।
मालूम नही क्यों..
तुममें शिवत्व का अहसास करने का मन करता है..।
मालूम नही क्यों..
मालूम नही क्यों..
मालूम नही क्यों..


रविवार, 29 मार्च 2026

कहानी: "नी"

हम कब,कंहा किससे और कैसे मिलेंगे..
ये कोई नही जानता..।
ये वाकया ही कुछ ऐसा है..।

दरभंगा एक ऐसा जगह है,जंहा एक तरफ किला की लंबी दिवार खड़ा होकर अपना इतिहास बताता है..तो वंही लंबी-चौड़ी सड़के अपना भविष्य बताता है..।मुझे मालूम नही था,की एकदिन मुझे दरभंगा से अलग होना होगा..
मगर हो गया,सिर्फ दरभंगा से ही नही,बल्कि उसके यादो से भी..।

अब जब दरभंगा आता-जाता हूँ,तो दरभंगा नीरस दिखता है,मानों जो पेड़ हमने लगाया था,वो सूख गया हो..ऐसा ही प्रतीत होता है..
जिन गलियों में,मैं रहा करता था,उस गली में जाने से डर लगता है,क्योंकि मैं वंहा से चुपचाप भाग आया था..।।
मगर मुझे क्या मालूम कि,जिससे भागा था,उससे मुलाकात कुछ इस तरह से होगा..।।

रात हो गई थी,और मैं दरभंगा स्टेशन पर सिमरिया जाने वाले ट्रैन का इंतजार कर रहा था,ट्रैन स्टेशन पर आई और मैं एक बोगी में चढ़ा,सीट ढूंढ ही रहा था कि एक फैमिली दिखी जिसे देखकर मेरे खुशी का ठिकाना नही रहा..।
मैंने उन अंकल-ऑन्टी को प्रणाम किया..और एक छोटा सा प्यारा सा बच्चा था,मैंने पूछा ये कौन है..उन्होंने कहा ये इसकी बेटी है..
मैंने पूछा गोद मे उठा लू..
उन्होंने इशारा दिया..
और मैं हर्षित होकर उसे गोद मे उठाया..
और उसे सीने से लगाया..।



सीने से लगाते ही मैं इतना भावुक हो गया कि मैं रोने लगा..(क्योंकि ऐसा लगा जैसे मैं, उसे गले लगा रहा हूँ..जिसे लगाने की तमन्ना थी,उसके शरीर से भी उसकी खुश्बू आ रही थी जिसके खुशबू में,मैं डूबना चाहता था..)
और खुद को नियंत्रित करके मुस्कुराते हुए पूछा..
इसका नाम क्या है..
थोड़ी देर के लिए सब सुन हो गए..
मानो मैंने क्या पूछ लिया..।
फिर उस बच्ची के माँ ने मेरे तरफ देखते हुई कहा..
इसका नाम "नी" है..
उसके माँ-बाप इस नाम से शायद खुश नही थे..।
मैंने कहा अच्छा है..छोटा नाम है..
लोग के जुबां पे जल्दी आ जायेगा..।।

मैंने देखा कि माहौल थोड़ा शांत हो गया है,जोकि कुछ देर पहले तक ठीक था,मगर मेरा नाम पूछते ही माहौल बिल्कुल बदल गया है..
मुझे अहसास हुआ कि यंहा रहना सही नही है..।
मैं ने मुस्कुराते हुए कहा-
ठीक है मैं चलता हूँ, 
पीछे खाली जगह है..।।

मैं आकर खिड़की वाले सीट पर लेट गया,और खिड़की से अंधेरे को निघारता रहा..अचानक मेरी नजर दूसरी तरफ गई तो देखा वो खड़ी है..मालूम नही कब से वो खड़ी थी..।
मैंने उससे पूछा बाथरूम जाना है...
चलु मैं..
वो चुपचाप मेरे तरफ देख रही थी..।
मानो वो बिना बोले बहुत कुछ बोल रही थी..
और मैं उसके मौन को समझते हुए भी,
नासमझी का बहाना बना रहा था..।
मैं अपने सीट से खड़ा हो गया..
और कहा चलो..
वो आगे बढ़ी..बाथरूम तक आई..
उसे देखकर ऐसा लग रहा था..
जैसे दुनिया की सारी ताकत खुद में समेटकर..
वो मुझे गला लगाना चाह रही हो..।
मगर वो मेरे इशारे का इंतजार कर रही थी..।
एकबार में उसे ईशारा तो करू..
मगर मैंने उसे सहमति नही दी..
उसकी आँखें मुझसे ये कह रही थी की..
मानो सब गलती मेरी ही थी..।

वो अपने आँखों से कह रही थी..
"पहली दफा तुमसे प्यार न हुआ तो क्या हुआ..
 दूसरी दफ़ा तुम पहल तो करते..
 शायद तुम्हें मुझसे प्यार था ही नही..
 अगर प्यार होता..
 तो तुम मुझे पाने के लिए वो सब करते..
 जिससे मैं,तुम्हारे करीब आ सकू..
 शायद तुम्हें मुझसे प्यार था ही नहीं..
 सिर्फ आकर्षण था..।।

मैं स्तब्ध खड़ा रहा..
मेरे पास उसके सवालों का कोई जबाब नही था..।
मैं अपने सीट पे आ गया..
और वो अपने सीट पर चली गई..।

न जाने कब हम अपने गंतव्य पर पहुंचे,
पता ही नही चला..
गंगा मैं स्नान किया..स्नान करते वक़्त ऐसा महसूस हो रहा था..
जैसे मैं कोई पाप धो रहा हूँ..।
स्नान करके हम बाहर निकले..
मेरा नजर उन परिवार वालों से फिर मिला..
मगर इस बार ऐसा लगा..
जैसे हम दोनों एक-दूसरे को जानते ही नही..।।

हम भविष्य के बारे में क्यों चिंतित है..

भविष्य के गर्भ में क्या है..
ये कोई नही जानता..
जब हम भविष्य के बारे में जानते ही नही,तो फिर हम क्यों भविष्य को लेकर चिंतित है..??




क्योंकि हम अपने वर्तमान से संतुष्ट नही है..इसलिय भविष्य के बारे में सोचते है..।।
अगर हम वर्तमान में जिये तो फिर हमें भविष्य की चिंता होगी ही नही..।
मगर विडंबना ये है कि, आज पूरा विश्व भविष्य के लिए ही चिंतित है..
आखिर क्यों..??
क्योंकि हमपे बाजारबाद हावी है,और बाजारबाद भविष्य को बेहतर या डरा कर ही अपना कारोबार करता है..।

अगर वैज्ञानिक रूप से देखें..तो हमारे मस्तिष्क का अगला हिस्सा "प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (Prefrontal Cortex)" जिसकी बनावट ही इस तरह की होती है,जो हमें मानसिक रूप से भविष्य की यात्रा करवाता है..

आखिर "प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (Prefrontal Cortex)" ऐसा क्यों करता है..??
इसे जानने के लिए आपको अतीत में डुबकी लगाना होगा..जब मानव अपने जिंदगी के लिए जदोजहद कर रहा था,तब वो अपने जिंदा रहने के बारे में सोचता था..हिंसक जानवरों से कैसे बचें,कल क्या खाएंगे.. इसी सोच के कारण हमारा प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स (Prefrontal Cortex)" का विकास हुआ,और यही से हम भविष्य के बारे में सोचने लगे..।
पहले हम जिंदा रहने के बारे में सोचते थे,
और आज हम, बेहतर जिंदगी के बारे में सोचते है..।।

शिव..