शुक्रवार, 18 सितंबर 2026

कुछ होने का मन करता है..
जिसका हूँ..
उसका होने का मन करता हूँ..
मगर कैसे होऊं..
इसका कोई पता नहीं चलता है..।
क्या-क्या जतन करुँ कि..
उसमें ही पतन हो जाऊं..

बुधवार, 16 सितंबर 2026

उम्मीद..

हम कभी इतना देर नहीं होते कि..
हम अपने मंजिल पर पहुंच ही न सकें..
हमारे पास हमेशा इतना समय होता है कि..
हम अपने मंजिल पर पहुंच सकें..।

जिस समय आप..
अपने मंजिल के बारे में..
सोचना बंद कर देते है..
उस समय आप..
अपने मंजिल से बहुत दूर हो जाते है..।

हमेशा अपने मंज़िल के बारे में सोचते रहें..
क्या पता कब..
आपको अपनी मंज़िल दिख जाए..
और आप वंहा पहुंच जाए..।।

उम्मीद बनाये रखिये..
क्योंकि ये उम्मीद ही ने तो..
दुनिया को बदला है..
आप भी खुद को बदलकर..
अपने मंजिल तक जरूर पहुंच सकते है..।।



रविवार, 13 सितंबर 2026

हमें लगता है..

हमें लगता है..
हम अच्छे है..।
ये अच्छा लगना ही..
सबसे बुरा है..।
जब-जब आपको..
अच्छे होने का भान हो..
तो समझ लीजिए..
आपमें अभी भी..
ढेर सारी कमियां है..।।

दूसरों में कमियां देखना..
आसान है..
और खुद की कमियां..
दूर करना दूभर है..।
जबतक आपमें..
कमियां रहेगी..
तबतक आपको, 
दूसरों में कमियां दिखती रहेगी..।




शुक्रवार, 11 सितंबर 2026

जरा सोचिएगा..आपके हाथ मे कौन सा कलम है..

•भारत आज विश्व की 5वी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में से एक है..
•क्रय शक्ति(purchasing power) के अनुसार तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है..
•GDP ग्रोथ के अनुसार सबसे तेज ग्रोथ करनेवालों देशों में सबसे ऊपर है..।
•जनसंख्या में विश्व मे पहले पायदान पर है..।
•सैन्य शक्ति में विश्व मे चौथा स्थान है..।
•मैन्युफैक्चरिंग में विश्व मे पांचवा स्थान है..(~विश्व का 3%)
•वैश्विक निर्यात में (गुड्स और सर्विस) WTO के अनुसार ~12-14वाँ स्थान..
•वैश्विक आयात में(गुड्स और सर्विस) WTO के अनुसार ~8-10वॉ स्थान..
नवीनकरणीय ऊर्जा में विश्व मे 3रा स्थान..

ये सब सुनकर पढ़कर गौरवान्वित महसूस करते है हम..।
मगर..
क्या आपको पता है..??
आप जिस पेन से लिखते है..
या लिख रहे है..
क्या वो "मेड इन इंडिया" है..?


हमारा इस और कभी ध्यान ही नही जाता है..
मेरा भी नही जाता..
मगर अचानक लिखते वक्त मेरा ध्यान पेन के ढक्कन पर गया जिसपर जापान लिखा था..।
शायद इस पेन ने इसलिए लिखने की दुःसाहस की,क्योंकि ये महंगी थी..।
मगर बाजार में जितने भी लोकप्रिय पेन है,जिसका आप नाम जानते है..
वो अपने देश का नाम नहीं लिखते..
शायद इसलिए की कंही हमें तकलीफ न हो..
कि विश्व के 5वी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश आज भी दूसरे देशों का बनाये हुए पेन का इस्तेमाल करता है..।।

क्या आपको पता है..??
भारत मे राइटिंग इंस्ट्रूमेंट का बाजार ~4500-5500 करोड़ का है (600-700 मिलियन $) जोकि संगठित मार्केट का वैल्यू है,अगर असंगठित(बिना ब्रांड) को जोड़ेंगे तो ये वैल्यू इससे भी बड़ा है..।।

आपको जानकर हैरानी होगी कि.. ~40-45% हिस्सेदारी प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से विदेशी कंपनियों का है..।

आपको ये जानकर और हैरानी होगी..कि ~25% पूरे मार्केट में हिस्सेदारी रखने वाला cello भारतीय कंपनी नहीं है..है न थोड़ा अजीब क्या cello भारतीय कंपनी नही है..?? हां अब नही है..2015 में फ्रांस की कंपनी(societe BIC) ने इसका अधिग्रहण कर लिया..।

चलिये एक और झटका देता हूँ..
जब भी एक स्लिम पतली पेन का नाम लिया जाएगा तो सबसे पहले Reynolds का नाम आएगा..
क्या आपको पता है..??
ये पेन कंहा की है..?
ये पेन अमेरिकन है..।
एक और नाम है..
जिसका नाम अक्सरहाँ हम गौरवान्वित होकर लेते है..
"Parker" ये भी अमेरिकन पेन ही है..
दोनो पेन "newell Brands(USA)" के द्वारा ही बनाया जाता है।।

भारत मे 100₹ से ऊपर बिकने वाली 90% कलम भारतीय नही है..उसपर विदेशी कंपनी का एकाधिकार है..।

आपका इनमें से फेवरेट पेन कौन सा है..??
Reynolds, Pilot,Cello, Schneider, Uni-ball, Parker, Montblanc, Lamy,  Cross, sheaffer..



क्या इनमें से कोई फेवरेट पेन है आपका..??
अगर हां..
तो आप देशभक्त नही है..😊क्योंकि ये सभी पेन विदेशी है..।।

तो फिर सवाल उठता है कि मेड इन इंडिया पेन कौन सा है..??
तो है कुछ लोकप्रिय कलम जो 100% मेड इन इंडिया है..
Linc , Flair, GM pens(Rorito)..
आपका इनमें से कौन सा फेवरेट है..??

अगली बार जब लिखियेगा तो सोचिएगा..
क्या आपके हाथ मे जो पेन है,क्या वो इंडियन है..।।






मेरी बागडोर अब तुम्हीं संभालो

मेरी बागडोर अब तुम्हीं संभालो..
पहले भी मेरी बागडोर तुम्हारे ही हाथ में था..
मगर मैं नासमझ,समझ न पाया..
तुम्हारे इस रहस्य को जान न पाया..
यू ही जस्तज़ु करता रहा..
मगर क्या हासिल हुआ..।
आज वो देखा जिसे देख के सब समझ गया..
मेरी बागडोर पहले भी तुम्हारे हाथ मे था..
अब भी तुम्हारे ही हाथ मे है..
मगर मेरी ना समझी के कारण..
आपने बागडोर ढीला छोड़ दिया..
और में यू ही..भटकता रहा,और भटक रहा हूँ..
अब मेरी बागडोर कस के पकड़ो..
जिस तरह अर्जुन का बागडोर संभाले थे..
अब मेरा भी बागडोर संभालो..।
इतना सामर्थ्य दो..
की पूर्ण समर्पण कर पाऊं..
आप में और खुद का भेद मिटा पाऊं..।
मेरी बागडोर अब तुम्हीं संभालो..।


रविवार, 6 सितंबर 2026

काबिल बनने का मन करता है..

यार काबिल बनने का मन करता है..
इतना काबिल कि..
आईने में खुद को देख के..
गौरवान्वित महसूस कर सकूँ..।


लियोनल मेसी..

खुद से पूछें क्या आज मैं कल से थोड़ा बेहतर हूं? जवाब अगर हां है, तो आप सही राह पर हैं..

​"जिंदगी हो या खेल, इंसान कभी पूरी तरह मुकम्मल नहीं होता। हर दिन आप कुछ नया सीखते हैं, कुछ नया खोजते हैं।"


 

मैंने फुटबॉल खेलना शुरू किया क्योंकि मुझे उससे मोहब्बत है। उस वक्त मुझे नहीं पता था कि एक दिन दुनिया मुझे देखेगी, मेरे नाम की मिसाल दी जाएगी या मैं विश्व कप जीतूंगा। मैं बस गेंद के पीछे भागता था। मेरे लिए फुटबॉल कोई नौकरी या शोहरत नहीं थी, वह मेरा शौक था, मेरी खुशी थी...। 

मैं बहुत छोटा था, शायद तीन-चार साल का, जब गेंद मेरे लिए दुनिया बन गई। मैं हर वक्त किसी ऐसे इंसान को तलाशता था, जिसके साथ फुटबॉल खेल सकूं। मुझे जीत-हार की ज्यादा फिक्र नहीं थी,मुझे बस खेलना था। घंटों तक गेंद को किक मारना, उसे अपने पैरों के करीब रखना और उसके साथ दौड़ना... यही मेरी दुनिया थी।

लोग कहते थे मैं बाकी बच्चों से अलग हूं। लोग मुझे देखने आते थे। बचपन में इसका एहसास नहीं था। मुझे कहां मालूम था कि मेरे अंदर ऐसा कुछ है, जो मुझे दूसरों से अलग बनाता है..? यह समझ धीरे-धीरे आई...।

​हर मुकाबला हमें कुछ न कुछ जरूर सिखाता है

हार हमें रोकने के लिए नहीं बल्कि, हमें खुद को समझने और निखारने का मौका देने के लिए आती है...।हर हार के बाद निराश होना स्वाभाविक है, लेकिन उसी मायूसी से बाहर निकलकर आगे बढ़ना ही असली हिम्मत है। जिंदगी में हर मुकाबला कुछ न कुछ जरूर सिखाता है..।

​आज पीछे मुड़कर देखता हूं तो लगता है मैं जिस तरह पैदा हुआ, वह मेरे लिए ऊपर वाले का तोहफा था। मैंने यह हुनर खुद नहीं बनाया था..यह मिला थालेकिन सिर्फ हुनर मिलना काफी नहीं होता। असली इम्तिहान यह है कि आप उस तोहफे का क्या करते हैं..।

मैंने हमेशा कोशिश की कि जो मिला है, उसका पूरा फायदा उठाऊं..। हर दिन खुद को थोड़ा बेहतर बनाने की कोशिश करता हूँ..।

क्योंकि जिंदगी हो या खेल, इंसान कभी पूरी तरह मुकम्मल नहीं होता..हर दिन आप कुछ नया सीखते हैं। हर दिन अपने अंदर कुछ नया खोजते हैं..। मेरे खेल में भी कई चीजें ऐसी हुईं, जिन्हें मैंने पहले से तय नहीं किया था। कई बार मैदान पर बस एक पल आता है और शरीर खुद फैसला कर लेता है। सामने डिफेंडर होते हैं, रास्ता बंद होता है, लेकिन मैं आगे बढ़ता हूं। एक कदम, फिर दूसरा... और अचानक रास्ता निकलता है। शायद यही मेरा खेल है, गेंद को अपने पैरों के करीब रखना और उस पल पर भरोसा करना।

भरोसे के सहारे मैंने अपना सफर जारी रखा है। मैंने बहुत छोटी उम्र में घर छोड़ा। मैं अर्जेंटीना के रोसारियो से बार्सिलोना आया। यह आसान नहीं था। मैं एक बच्चा था। पीछे मेरा घर था, मेरा शहर था, मेरे अपने लोग थे। सामने एक नई जगह थी, नई जिंदगी थी और बहुत सारी अनजान चीजें... लेकिन खुद पर भरोसा था।

मुझे हुनर मिला, तो मैंने उसे तराशने की कोशिश की। मुझे मौके मिले, तो मैंने उन्हें गंवाने नहीं दिया। मुश्किलें आईं, उन्हें अपनी राह का हिस्सा माना। 

आप भी किसी सपने के पीछे भाग रहे हैं, तो खुद से एक सवाल पूछें कि...क्या मैं कल से थोड़ा बेहतर हूं..? अगर जवाब हां है, तो आप सही रास्ते पर हैं.. कामयाबी एक दिन में नहीं मिलती.. ये छोटे-छोटे कदमों से मिलती है।

ये लियोनल मेसी के कई इंटरव्यू का सार है(स्रोत- दैनिक भास्कर)..इन्होंने हाल ही में 31 अगस्त को सोशल मीडिया के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय मैच से संन्यास की घोषणा की..



वो असाधारण थे,क्योंकि वो साधारण थे..चाहे खेल का मैदान हो या फिर खेल के मैदान के बाहर उनका बर्ताव हमेशा सौम्य और शांत रहता..वो कभी किसी को अहसाह नही होने देते की वो इस युग के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक है..बल्कि वो ये अहसास करवाते है कि वो हममें से एक है..।यही खासियत उन्हें औरों से अलग बनाता है..।