शुक्रवार, 14 अगस्त 2026

आखिर कबतक..

तुम ढूंढते हो उसे..
जिसे तुम्हारी कद्र ही नहीं..
तुम भटकते हो..
उसके लिए..
जिसे तुम्हारी फिक्र ही नही..।
आखिर कबतक सबकुछ खबर होते हुए भी..
बेखबर बने रहोगे..।



हम क्यों किसी के बारे में सोचते है..

हम क्यों किसी के बारे में सोचते है..??
सच कहूं तो आप निकम्मे और निठल्ले हो😊..
इसिलिय आप किसी के बारे में सोचते है..
खुद को इतना समय क्यों देते है..
कि आप किसी के बारे में सोचे..।
अपने जिंदगी को उद्देश्यपरक बनाये..
और पूरा समय उसमें लगाए..
तब देखिए आप कैसे किसी के बारे में सोचते है..
जबतक उद्देश्यहीन जिंदगी जीते रहेंगे..
तबतक हम यू ही..
किसी और के बारे में सोचते रहेंगे..।
खुद को व्यस्त रखें..
अपने उद्देश्य की पूर्ति में..
अगर कोई उद्देश्य नही है..
तो अभी बनाये..
अन्यथा जिंदगी यू ही..
दूसरों के बारे में सोचते-सोचते खत्म हो जाएगा..।



गुरुवार, 13 अगस्त 2026

मन भटक रहा है..

मन भटक रहा है..
क्यों..??
ये सवाल नया नही,
सदियों पुराना है..
मन भटक रहा है..।
आखिर भटकेगा क्यों नहीं..
क्योंकि उसे खुला छोड़ जो रखा है..।



क्या करें, कैसे करें..
कैसे इसे नियंत्रित करें..??
इसे नियंत्रण करना आसान कंहा है..
ये तो बिना लगाम के घोड़े के समान स्वछंद है..
इसके लगाम को जितना जकड़ने की कोशिश करेंगे..
ये उतना ही उलझन बढ़ाता जाएगा..।

फिर आखिर क्या करें,कैसे करें..??
कुछ नहीं..
बस अपने उद्देश्य को ढूंढिए..
और उसके पूर्ति के लिए लग जाइये..
और अपने मन को भी वंही लगाइए..।
क्योंकि हमारा मन भी तो..
किसी उद्देश्य के लिए ही भटक रहा है..
उसे सार्थक उद्देश्य की पूर्ति में लगाइए..।
न कि बेवजह के उद्देश्य में उसे उलझाइये..
जबतक बेवजह के उद्देश्य में उसे उलझाइयेगा
तबतक वो यू ही भटकता रहेगा..
खुद से ही सार्थक उद्देश्य को तलाशता रहेगा..।।

मन भटक रहा है..
मगर वास्तविकता तो कुछ और है..
हम ही भटक रहे है..
मन तो अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए भटक रहा है..।
हम क्यों भटक रहे है..?
जिस रोज हम अपने उद्देश्य की पूर्ति में लग जाएंगे..
उस रोज मन भी तादात्म्य बिठाकर उद्देश्य पूर्ति में लग जायेगा..।
जिस रोज उद्देश्य निर्रथक लगने लगेगा..
फिर से मन भटकने लगेगा..।

मन भटक रहा है..।

कुछ लिखने का मन करता है..

कुछ लिखने को मन करता है..
मगर लिखने से ड़र लगता है..।
कंही मेरी लेखनी..
किसी को सुई की तरह न चुभ जाये..
या फिर किसी को समझ ही न आये..
दोनों में खतरा है..
भला ये खतरा कौन मोल उठाये..।


कुछ लिखने का मन करता है..
मगर लिखने से डर लगता है..
क्योंकि आजकल कौन पढ़ता है..
और किसको इतनी समझ है..कि
किसी की लेखनी को समझ पाए..
हम वही समझ पाते है..
जो पढ़ पाते है..
मगर उस लेखनी के उस पार झांक नही पाते..।

कुछ लिखने को मन करता है..
मगर लिखने से ड़र लगता है..
क्योंकि शब्दों के मायाजाल में कोई फंसकर..
यू ही गुमराह न हो जाये..
क्योंकि सही राह चलना बड़ा दुष्कर है..
गलत राह पर तो हम चल ही रहें है..।

कुछ लिखने को मन करता है..
मगर लिखने से ड़र लगता है..
क्योंकि..
मेरी लेखनी किसी को समझ आएगा कि नही..
या फिर मैं कुछ ऐसा लिख भी पाऊंगा की नही..
जो सार्थक हो,सामर्थ्य हो,समृद्ध हो..
शायद यही सब सोचकर लिखने से डर लगता है..।

कुछ लिखने को मन करता है..
मगर लिखने से ड़र लगता है..

मंगलवार, 11 अगस्त 2026

गलतियां

गलतियां होना सामान्य सी बात है..
गलतियों का अहसास होना अच्छी बात है..
और उस गलती को फिर से न दोहराना बहुत बड़ी बात है..।

मगर आजकल हमलोग गलती करते ही नहीं..
अगर गलती करते तो,उसका अहसास होता..
मगर आजकल अहसास कंहा हो रहा है..
अगर अहसास होता..
तो हम फिर से उस गलती को नहीं दोहराते..।

मगर आजकल हमलोग,कई गलतियां रोज दोहरा रहें है..
जैसे वो जिंदगी का हिस्सा हो चुका है..और हमें लगता है ये सामान्य सी बात है..क्या ऐसा नहीं है..??

आप रोज जानते हुए कि ये गलत है,तब भी गलती करते है..ऐसा गलती दिनभर में कितना करते है..??
जरा सोचिए..🤔

ये गलतियां धीरे-धीरे बेड़ियां की तरह भारी और मजबूत होता जाएगा,और आपके जिंदगी का बोझ बन जायेगा..आप जितना देर करेंगें उतना ये बेड़ियां मजबूत होता जाएगा..जबतक आपको अहसास होगा तबतक ये बेड़ियां आपको अपना गुलाम बना लिया होगा..और आप चाहकर भी इससे नही निकल सकते..।

इसलिए जितना जल्दी हो सके अपने गलतियों को पहचानिए और उसे स्वीकारिये और इसे 

सोमवार, 10 अगस्त 2026

खुद को देखिए जनाब..

खुद को देखिए जनाब..
आपको हो क्या गया है..??
कल तक आप सबके चहेते थे..
आज आपको हो क्या गया है..?
आपको लगता है..
लोग बदल गए है..
मगर नहीं..
आप ही बदल गए है..।


सूर्य को फर्क नहीं पड़ता कि..
कौन उसके ऊपर कीचड़ उछालता है..
या फिर पानी उछालता है..
वो तो सबपे..
एक समान रोशनी का बौछार करता है..।
आप तो सूर्य से थे..
तो फिर,
आजकल एक आंगन के, 
दीपक क्यों बन गए है..??

खुद को देखिए जनाब..
आपको हो क्या गया है..??
कल तक आप सबके चहेते थे..
आज आपको हो क्या गया है..?

माना कि लोग गलत है..
मगर,वो सही ही कब थे..
बिच्छु काटना,और 
शेर दहाड़ना तो बंद नही करेंगे..
वो कल भी ऐसे थे..
और आज भी ऐसे ही है..
मगर आपको क्या हो गया है..??
आप तो ऐसे नहीं थे..??

किसी को कोई फर्क नही पड़ेगा..
आपके बदलने से..
आपके चाहने वाले थोड़ा हताश और निराश होंगे..
और कुछ दिनों बाद उन्हें आदत हो जाएगी..।
मगर आपका क्या होगा..??
क्या आप कभी..
स्वयं को आईने में देख पाएंगे..?
क्या आप कभी अकेले में..
स्वयं से नजरें मिला पाएंगें..?

खुद को देखिए जनाब..
आपको हो क्या गया है..??
कल तक आप सबके चहेते थे..
आज आपको हो क्या गया है..??

लोग नहीं बदलते..
हम ही बदल जाते है..
और हमें लगता है..
लोग बदल गए है..।



मैं..से मैं तक..

मैं,जो हूँ..
वो मैं होना चाहता हूँ..
वो,मैं..
मैं,कैसे होऊं..।
जबतक मैं,
वो मैं न होऊं..
तबतक बैचैन ही रहूंगा..
वो मैं,मैंकैसे होऊ..
इसका तो पता नही...
मगर उस मैं के अवरोधक को हटा दे..
तो शायद उस मैं तक जाने का पता चल जाये..

आखिर कबतक..