बुधवार, 20 मई 2026

क्या कमेंट करना सही है..

हम मनुष्यों में कई जन्मजात प्रतिभा होती है..
कुछ अच्छी तो कुछ बुरी होती है..।
मगर हम में से कई लोग अपनी बुरी प्रतिभा को अपने अच्छे प्रतिभा से दबा देते है,तो कई लोग अपने बुरे प्रतिभा से अपने अच्छे प्रतिभा का दमन कर देते है..।
उन्हीं में से एक प्रतिभा कमेंट करनी की है..
क्या कमेंट करना सही है..??
शायद ही हममें से कोई हो जिसे कमेंट करने की खुजली न हो..
जब से सोशल मीडिया आया है तब से तो ये खुजली और बढ़ गई है..।
कमेंट भी दो तरह के होते है-
एक अच्छे और एक बुरे..
मगर हममें से कुछ ही लोग होते है..जो अच्छे कमेंट करते है..।

क्या हमें कमेंट करने का अधिकार है..??
अगर हां,तो किसके ऊपर..।
आज सोशल मीडिया के दौर में ये जन्मजात अधिकार बन गया है..
हम किसी से,किसी के ऊपर बिना सोचे समझे कमेंट कर देते है..
बिना ये सोचे कि,क्या हमें कमेंट करना चाहिए..??
शायद ही हममें से कोई ये सोचता है..।
मगर इसका दुष्परिणाम आभासी दुनिया(सोशल मीडिया) में तो न के बराबर पड़ता है,मगर वास्तविक दुनिया मे इसका दुष्परिणाम पड़ता है..।।

जिसतरह हम बिना सोचे समझे सोशल मीडिया पे कमेंट कर देते है,उसी तकरह हम वास्तविक दुनिया मे भी कर देते है..।
जिसके कारण हमारे संबंध खराब होते है..।

क्या हमें कमेंट नही करना चाहिए..??
ये सवाल ही गलत है..क्या हमें जन्मजात अधिकार छोड़ना चाहिए..तो बिल्कुल नही..बल्कि उसका इस्तेमाल करना सीखना चाहिए..।।
आखिर कैसे इस्तेमाल करें..??
•कमेंट हमेशा अपने बराबरी वालों के ऊपर करें, और कमेंट हमेशा पॉजिटिव और उद्देश्यात्मक हो..
•जब तक आपसे कोई राय न मांगा जाय तबतक कमेंट न करें..
•अगर कमेंट करना उस व्यक्ति के हित मे हो तो जरूर करें..

कमेंट करते वक़्त उसमें ईष्या, द्वेष, घृणा का भाव नही झलकना चाहिए..।।

ये आसान नही नही है..😊
क्योंकि कमेंट करने की खुजली जन्मजात जो मिली हुई है..😊।



सोमवार, 18 मई 2026

मैं खुद को बदलना चाहता हूँ..

मैं खुद को बदलना चाहता हूं..
अपने गलतियों को सुधारना चाहता हूं..
मगर मैं हर बार हार जाता हूँ..।
मगर..
मैं फिर खड़ा होता हूँ..
और फिर हार जाता हूँ..
और फिर खड़ा होता हूँ..।

ये सिलसिला सदियों से चलता आ रहा..।
जिसने अपने कमियों पे विजय पाया..
उसके नाम आज भी जुबां पे है..
और जिसने अपने कमियों पे विजय नही पाया..
वो आज भी इस जन्म-मरण के चक्र में घूम रहे है..।।

मैं खुद को बदलना चाहता हूं..
अपने गलतियों को सुधारना चाहता हूं..।


नदी के दो किनारे..

हमदोनों नदी के दो किनारे है..
साथ तो चल सकते है..
मगर कभी मिल नही सकते..।
अगर मिलने की कोशिस की..
तो न तुम रह पाओगे..
और न मैं रह पाऊंगा..।
हमदोनों का कोई अस्तित्व ही नही रह जायेगा..।

यू ही चलते रहें..
यू ही बढ़ते रहें..
ये सफर कंही खत्म हो जाएगा..
और हमदोनों भी कंही खत्म होकर..
एकाकार हो जाएंगे..
और मैं का भान खत्म हो जाएगा..।।

हमदोनों नदी के दो किनारे है..
साथ तो चल सकते है..
मगर कभी मिल नही सकते..।
लेकिन हम, 
अपने अस्तित्व को खोकर..
एकदूसरे में विलीन हो सकते है..।

हमदोनों नदी के दो किनारे है..
साथ तो चल सकते है..
मगर कभी मिल नही सकते..।



शनिवार, 16 मई 2026

शिकायत..

हमें अक्सरहाँ शिकायत ही रहता है..
कभी इससे,कभी उससे..।
पता नही..किस-किस से..
पता है क्यों..??
क्योंकि..
हम अपने कमियों को छुपाना चाहते है..।

और ये हम अनजाने में ही करते है..।
जिस रोज हम अपने कमियों का अहसास करने लगेंगे,
उस रोज फिर किसी में कमियां नही दिखेगा..।
ये बड़ा कठिन है..।

मगर जब आप दूसरों में कमियां देखने के बजाय..
खुद में कमियां देखने लगेंगे..
उस रोज आप,आप नही रह जाएंगे..
आप खास हो जाएंगे..।

जबतक हमें दूसरों में कमियां दिखता रहेगा..
तबतक हमें अपने कमियों को दूर करता रहना होगा..।
जब किसी मे कमियां न दिखे...
उस रोज समझ लीजिए..
आप मे कोई कमियां नही है..।।
मगर ये इतना सरल कंहा है..



शुक्रवार, 15 मई 2026

प्यार की पांति..

मैं ही दीदार करू..
हर बार तेरा..
तू भी तो दीदार कर..
एक बार मेरा..।

माना कि..
मैं,वो नही..
जिसका तुम्हें तलाश है..।
मगर,क्या तुम्हें पता है..
आखिर तुम्हें तलाश क्या है..??
तलाश जारी रखो..
क्या पता कंही कोई मिल जाये..।

मैं ही दीदार करू..
हर बार तेरा..
तू भी तो दीदार कर..
एक बार मेरा..।


नदी की धारा..

जब अपने हाथ में कुछ ना हो, 
तो..
खुद को बहने दो..
नदी की धारा की तरह..।



जिधर,जैसे जा रही है जिंदगी..
जाने दो..
इसे मोड़ने की कोशिस न करो..
क्योंकि मोड़ने में तकलीफ के सिवा..
और कुछ नही होगा..
खुद को बहने दो नदी की धारा की तरह..।

जो पीछे छूट गया..
उसे छोड़ के आगे बढ़ते चलो..
उसके साथ लेने की कोशिस मत करो..
क्योंकि उसका साथ..
वंही तक था..।

नदी की धारा की तरह आगे बढ़ते रहो..
जब तक मंज़िल न मिल जाये..
तबतक यू ही..
नदी की धारा की तरह बहते रहो...।

खालीपन...

उसे ढूंढ रहे हो..
हां उसे ही ढूंढ रहा हूँ..
आखिर क्यों ढूंढ रहे हो..
अपने खालीपन को भरने के लिए ढूंढ रहा हूँ..।

ये खालीपन आखिर है क्यों..
क्योंकि मैं खुद ही खाली हूँ..
इसिलिय शायद ये खालीपन है..।

तो अपने खालीपन को स्वयं भरो..
न कि उसे भरने के लिए दूसरों का सहारा लो..
क्योंकि अगर वो चला गया छोड़ के..
तो ये खालीपन और बढ़ जाएगा..
और फिर शायद तुम उस खालीपन को भर न पाओ..।

अपने खालीपन को स्वयं भरो..
खालीपन स्वयं ही दूर हो जाएगा..।।