गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026

बुरे परिस्थितियों में ही अच्छे समय का बीजारोपण होता है...।

हमसब अक्सरहाँ कभी-न-कभी बुरी परिस्थितियों से गुजरते है..
और अक्सरहाँ हम उन परिस्थितियों को कोसते है..।
मगर हम कभी उन परिस्थितियों पे गौर नही करते..।

कभी-कभी हम जिन परिस्थितियों को बुरा कहते है,वही परिस्थितियां हमारे जिंदगी के लिए सबसे अहम साबित होता है..।।

इतिहास भरा पड़ा हुआ है..उन बुरी परिस्थितियों से जिसने इतिहास का रुख ही मोड़ दिया..।

चलिए उनमें से कुछ व्यक्तियों से रु-ब-रु होते है,जो बुरे परिस्थितियों के कारण ही महान बन पाए..।

एक व्यक्ति प्रथम श्रेणी(first class) का वैध टिकट लेकर ट्रैन में सफर करता है,मगर उसके अश्वेत होने के कारण उसे ट्रैन से फेंक दिया जाता है..और वो व्यक्ति सारी रात कड़ाके के ठंड में उस स्टेशन के वेटिंग रूम में ठिठुर कर गुजारता है,और निर्णय लेता है कि इस अन्याय और नस्लभेद के खिलाफ आवाज उठाऊंगा...।



इन्ही के पदचिन्हों पे चलकर "मार्टिन लूथर किंग जूनियर" ने अमेरिका में 'सिविल राइट मूवमेंट' चलाया..
वो कहते है.. 
"ईसा मसीह ने हमें लक्ष्य दिया और....उन्होंने हमें तरीका दिया।"

इसी तरह दक्षिण अफ्रीका के "नेल्सन मंडेला" ने उन्हें अपना आदर्श मानकर दक्षिण अफ्रीका को बिना किसी गृहयुद्ध के दक्षिण अफ्रीका को लोकतांत्रिक देश बनाया..।
(◆नेल्सन मंडेला ने 27 साल जेल में बिताया..इनके लिए इनसे बुरा और क्या हो सकता है,मगर परिणाम सामने है,आज उन्हें पूरा विश्व जानता है..।


"अक्सरहाँ जब हम सबसे बुरे दौड़ से गुजर रहे होते है,उसी समय अच्छे समय का बीजारोपण भी हो रहा होता है..इसीलिए बुरा समय जब भी आये,तो घबराए नही,मुस्कुराए😊.."

अब हममें से अधिकांश लोग जान गए होंगे कि हम किसकी बात कर रहे है..
वो व्यक्ति कोई और नही बल्कि "महात्मा गांधी" थे जिसे 7 जून 1893 को पीटरमैरिट्सबर्ग स्टेशन पे ट्रैन से उस ठिठुरती हुई ठंड में फेंका गया..वो रात ऐतिहासिक रात थी..जिसने मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा गांधी बना दिया..।
जरा सोचियेगा..अगर ये घटना उनके साथ नही होता तो क्या होता..??


चलिए अब उस सख्स से रु-ब-रु होते है,जिन्हें स्कूल से इसलिय निकाल दिया गया कि वो मंद बुद्धि के थे..।
शिक्षक ने उनकी माँ को एक पत्र लिखा कि आपका बच्चा addled( अव्यवस्थित दिमाग) है और वह कुछ सीख नही सकता..।
उनकी माँ ने उस पत्र को पढ़ा और उनसे कहा- स्कूल ने लिखा है कि "आपका बेटा बहुत प्रतिभाशाली है,और हमारे पास उसे पढ़ाने लायक अच्छे शिक्षक नही है,इसिलिय आप इसे खुद पढ़ाये...।"
पता है वो बच्चा कौन था..??
दुनिया उसे "थौक आविष्कारक" के रूप में जानता है..वो और कोई नही बल्कि "थॉमस अल्वा एडिसन" थे...।

उन्होंने वो किया जो आज हमें सामान्य लगता है..
उन्होंने पहली बार बिजली का बल्ब बनाया..इससे पहले दुनिया मोमबत्तियां और गैस की रोशनी पर निर्भर थी।
•उन्होंने पहली बार आवाज रिकॉर्ड कर सुनने वाला पहला उपकरण बनाया,जिससे संगीत उद्योग की शुरुआत हुई..
•आज हम सिनेमा हॉल में फ़िल्म का लुत्फ उठा रहे है तो उन्ही के कारण..उन्होंने "मोशन पिक्चर कैमरा" का आविष्कार किया जिससे फ़िल्म उद्योग का जन्म हुआ..।
•आज हम आप मोबाइल चला रहे है,मगर जरा सोचिए अगर बैटरी रिचार्जजेबल न होता तो क्या होता..।

वो कहते थे-
"मैं असफल नही होता हूँ,बल्कि एक नया तरीका खोज लेता हूँ,जो काम नही करता.."

वो हमेशा कठिन परिश्रम के पक्ष में रहे है,इस बारे में कहते है..-
"प्रतिभा 1% प्रेरणा और 99% कड़ी मेहनत ही सफलता का राज है।"
(Genius is 1% inspiration and 99% perspiration)

जरा सोचियेगा अगर उन्हें स्कूल से नही निकाला गया होता तो क्या होता..??

ये तो वो लोग है जिन्होंने अपने बुरे परिस्थितियों से देश और दुनिया को दिशा दी..
मगर हममें से हरेक घर में,हरेक समाज में कोई न कोई व्यक्ति होता ही है..जो बुरे परिस्थितियों से गुजरकर वो कार्य करते है,जो हमारे लिए आदर्श हो जाते है..।।

याद रखें..आप जब भी बुरे-से-बुरे परिस्थितियों से गुजर रहे हो,तो समझ लीजिए ,आपके अंदर अच्छे समय का बीजारोपण हो रहा है..

मंगलवार, 24 फ़रवरी 2026

मैं अक्सरहाँ लिखता हूँ..

मैं अक्सरहाँ लिखता हूँ..
कभी कुछ,कभी कुछ..और कभी कुछ..
मगर कभी-कभी..
कुछ ऐसा लिखता हूँ..
जिसे लिखने के बाद नही..
बल्कि उसे बाद में पढ़ने के बाद..
अहसास होता है..
ये मैंने लिखा है..
और अपने लेखनी पर हल्का गुमान होता है..।।

और कभी-कभी..
मेरी लेखनी मेरा आइना बनकर मुझे झकझोर देता है..।
और मेरे वास्तविकता से मेरा आत्मसाक्षात्कार करा देता है..।
और कभी-कभी मेरी ही लेखनी मुझे तीर की तरह चुभता है..
और मुझे घायल करके क्षणभर के लिए अचेत कर देता है..।

मैं अक्सरहाँ लिखता हूँ..
कभी कुछ,कभी कुछ..
और कभी कुछ..।




आंनद की अनुभूति..मगर क्यों..??

कभी-कभी आनंद की अनुभूति होती है..
जैसे पूरा रोम-रोम हर्षित हो चुका है..।
शरीर का पूरा कोशिका जागृत हो चुका हो..
ऐसा महसूस होता है..।
मगर ये क्यों होता है..??

इसका कारण मालूम नही..
जब थोड़ा सोचा तो कुछ जबाब मिला..
पहला "अंतस मन" जिससे अभी तक मे अनभिज्ञ हूँ,मगर वो नही..
शायद मेरे कुछ संस्कार(कार्य) के कारण वो मुस्कुराता हो,और इस कारण पूरे शरीर में रोमांच पैदा होता हो..।

हम सब कंही-न-कंही एक दूसरे से जुड़े हुए है..
कुछ लोगों से खास जुड़ाव होता है..
शायद उन खास लोगों में से कोई खास लोग हर्षित होकर जिक्र या याद कर रहें हो..तो वो तरंगें हम तक पहुंचती है,और इस स्थूल शरीर को रोमांचित कर देता है..।।

कभी-कभी इसका विपरीत भी होता है..
आप उदास होते है,
मगर क्यों होते है..?
इसका लाख कारण ढूंढने पर भी नही पता चलता है..
शायद यही कारण होता हो..।।

इसीलिए मुस्कुराइए और अच्छे कार्य कीजिये..
जिससे आपके अंदर विद्यमान सूक्ष्म शरीर आपको हमेशा आंनदित रखें..।

कभी खुद से पूछिए..

कभी खुद से पूछिए,
आप कर क्या रहें है..?
आप जो कर रहें है..
क्या वो सही कर रहे है..?
कभी खुद से पूछिए..
आप कर क्या रहें है..?


घंटों यू ही जाया कर रहें है..
क्यों कर रहें है..?
उस क्यों को ढूंढिये..
और खुद से पूछिए..
आप जो कर रहें है..
क्या वो सही कर रहे है..?

सुबह से शाम..
शाम से रात..
और रात से सुबह..
कब हो जाता है..
ये पता नही चलता..।
ये क्यों नही पता चलता..?
उस क्यों को ढूंढिये..
और खुद से पूछिए..
आप कर क्या रहें है..?

साल दर साल यू ही बीत गए..
और हम वंही के वंही रह गए..
बीज अंकुरित होकर पेड़ बन गए..
पेड़ से गिरा बीज भी अंकुरित होकर पेड़ बन गये..।
और हम वंही के वंही रह गए..
क्यों रह गए..?
उस क्यों को ढूंढिये..।
और खुद से पूछिए..
आप जो कर रहें है..
क्या वो सही कर रहे है..?

सबको भान है अपने कर्तव्य का..
मगर कितने निभाते है अपने कर्तव्य को..?
आखिर क्यों लोग हो जाते है..
कर्तव्यमूढ़..??
उस क्यों को ढूंढकर..
अपने कर्तव्य का पालन कीजिये..।
या फिर यू ही..
घंटों,दिन,साल..जाया कीजिये..।

कभी खुद से पूछिए,
आप कर क्या रहें है..?
आप जो कर रहें है..
क्या वो सही कर रहे है..?
कभी खुद से पूछिए..
आप कर क्या रहें है..??




कंहा ढूंढ रहे हो मुझे..

कंहा ढूंढ रहे हो मुझे..
खुद में ढूंढो न..।
मैं वही हूँ..
और कंही नही..।

अगर कंही कुछ दिख रहा है,तो..
वो सिर्फ तुम्हारे अंदर का ही आभा है..
और कुछ नही..

कंहा ढूंढ रहे हो मुझे..
खुद में ढूंढो न..।
मैं वही हूँ..
और कंही नही..।
कंहा ढूंढ रहे हो मुझे..





रविवार, 22 फ़रवरी 2026

आप उनको कितना महत्व देते है..

क्या आपको पता है..
इस पृथ्वी पर सर्वाधिक मूर्ति किसकी बनी हुई है,और बन रही है..??
ये शायद आपको मालूम होगा..😊
उन्होंने मूर्ति पूजा का विरोध किया था..मगर आज सर्वाधिक मूर्तियां उन्ही की है..
और वो है- "महात्मा बुद्ध"।

और एक सवाल और जो कि आपको मालूम ही होगा..
किस राजनीतिज्ञ का सर्वाधिक मूर्तियां पृथ्वी पर है..?
ये वो है..जिन्हें आज के युवा बिना जाने ही दो-चार कहते रहते है..
जबकि विश्व उनका सम्मान करता है..
आइंस्टीन ने उनके बारे में कहा था- 

"आने वाली पीढ़ियां शायद ही विश्वास करेंगी कि हाड़-मांस से बना ऐसा कोई व्यक्ति कभी इस धरती पर चला था।"

 (Generations to come will scarce believe that such a one as this ever in flesh and blood walked upon this earth.)

आइंस्टीन ने ये शब्द गांधीजी के बारे में कहा था..।
अक्सरहाँ लोग गांधी जी के बारे में कहते है..काहे का राष्ट्रपिता..??मगर जब उसे पता चलता है कि उन्हें राष्ट्रपिता से संबोधन सुभाष चंद्र बोस ने किया था..तब लोग चुप हो जाता है..।।गांधी सिर्फ एक राजनीतिज्ञ नही थे..वो खुद में एक विश्विद्यालय थे..उनकी सोच और विचार आज भी प्रसांगिक है,और आगे भी रहेगा..गांधी को पढ़ना नही समझना जरूरी है..इस गर्मी छुट्टी में स्वयं और अपने बच्चे को गांधी की आत्मकथा पढ़ाये..।।

यू ही न्यूज़ स्क्रॉल कर रहा था..तो एक तस्वीर दिखी..और मैं सोचने लगा..
आखिर क्यों..
हम उन्हें तो जानते है,
मगर इन्हें नही जानते,
जिनके कारण हम उन्हें जानते है..।

शायद हममें से बहुत कम लोग ही "कस्तूरबा गांधी" को जानते होंगे..
गांधी से महात्मा गांधी बनने में अहम योगदान कस्तूरबा गांधी का था..।


•वंही सिद्धार्थ से महात्मा बुद्ध की यात्रा में यशोधरा का अहम योगदान है..।
•वंही अंबेडकर से बाबासाहब अंबेडकर बनने में रमा बाई का अहम योगदान था..

कहा जाता है हरेक सफल व्यक्ति के पीछे एक महिला का योगदान होता है..
मगर वो महिला कंही खो जाती है..और लोग भूल जाते है..।

महिला(माँ, aunty,बहन,पत्नी,बेटी) वो पारस पत्थर है..जो पुरुष को तराशती है..।
वो एक असभ्य मनुष्य को सभ्य बना देती है..।।

एक पुरुष के जीवन मे हरेक पड़ाव पर एक महिला की जरूरत होती है..अगर वो न हो,तो पुरुष पथभ्रष्ट हो जाता है..।।
अगर महिला आप पे निःस्वार्थ प्रेम लुटाए तो आपको दुनिया का सर्वश्रेष्ठ इंसान बना देगी...।मगर कुदृष्टि पड़ गई तो आपका जीवन नरकमय बना देगी..।।

मगर वर्तमान में लोगों का दृष्टिकोण बदल रहा है...
क्या हमारा दृष्टिकोण सही है...??
सोचियेगा..
जब हमारे ही दृष्टि में दोष है तो हम कैसे सही और बुरा देख सकते है..😊।

हम उनको कितना महत्व देते है..
जिनके कारण आज हमारा अस्तित्व है..
जिनके कारण जिंदगी को नया उद्देश्य मिला..
जिनके कारण जिंदगी को सार्थक बना रहे है..
जिनके कारण जिंदगी इंद्रधनुष की तरह रंगीन बन रही है..।



"यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः ।

यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः॥"


शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026

AI विनाश की और बढ़ता कदम..

क्या आपको पता है..
हड़प्पा/सिंधु सभ्यता,माया सभ्यता या फिर मेसोपोटामिया सभ्यता का विनाश क्यों हुआ..??

और इन सभ्यता का विनाश तब हुआ जब ये अपने चरम पर था..।
और आज हम वही है..चरम पर..या फिर विनाश के कगार पर..।।

इन सभ्यताओं का विनाश पानी के कारण हुआ..
इन क्षेत्र में पानी की इतनी किल्लत हो गई कि ये क्षेत्र वीरान हो गया..वंही मेसोपोटामिया में पानी का इतना दोहन किया गया कि पानी खारा हो गया और जमीन बंजर हो गई..।।
इन सभ्यताओं का विनाश पानी के कमी के वजह से ही हुआ..।।

और आज हम उसी कगार पर है..।।

विश्व मे 26%(2.2 अरब ) से ज्यादा आबादी को शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नही है..।

~73 करोड़ से ज्यादा लोगों को पानी पीने के लिए आधे घंटे का सफर करके तालाब या नदी से पानी पीने के लिए जाना होता है..
4अरब लोग, लगभग आधी आबादी को कम से कम 1 महीना पानी की किल्लत से जूझना होता है..।।

ये सारा आंकड़ा AI के शुरुआत से पहले का है..और AI कंपनी, पानी की खपत की सही जानकारी नही दे रही है..।।

कुछ रिपोर्ट के अनुसार-
दुनियाभर में जितना बोतलबंद पानी का खपत हो रहा है,उससे ज्यादा AI पानी का खपत कर रहा है..।।

2025 में 312-765 अरब लीटर पानी का खपत AI के द्वारा किया गया है।
यानी 1 व्यक्ति 3 लीटर पानी पीता है..तो सालभर में लगभग 1095 लीटर यानी 70 करोड़ लोगों का सालाना पानी AI पी रहा है..(73 करोड़ लोग नदी/तालाब का पानी पीने को मजबूर है)



आप कल्पना कर सकते है..
आज जितने लोगों के हाथ में मोबाइल है,अगर सभी लोग यूट्यूब,व्हाट्सएप या अन्य सोशल मीडिया की तरह AI का इस्तेमाल करने लगे तब क्या होगा..??

इसका असर दिखने लगा है..
नवी मुंबई में ,UP में,बंगलुरु में..और कई जगह जंहा-जंहा डाटा सेन्टर का कार्य चालू है..
•UP में पहले बोरबेल(चापाकल) से 60-70 मीटर खुदाई करने पे पानी आ जाता था,अब 100मीटर खुदाई करने पर पानी आता है।।
•वंही नवी मुंबई में रहने वाले कई लोग आपको कहते मिल जाएंगे 10 साल पहले तक पानी की किल्लत नही थी मगर अब हरेक साल पानी की समस्या होती है..।।
•बंगलुरु की समस्या से तो सब अवगत है..।

मगर इन समस्याओं से हमें क्या लेना,बस कुछ दिन,कुछ साल रुकिए..जब आपके हिस्से का भी पानी AI पी जाएगा तब आप भी चिल्लायेंगे..।।



वैसे भी इन समस्याओं का सबसे ज्यादा असर भारत के उन लोगों पे पड़ेगा जो हाशिये पे है..और जो हाशिये पे है..आज 5kg अनाज से खुश है,तो कल 100 लीटर पानी से खुश रहेंगे..।।

हम आप उस भयावह स्थिति को अभी नही देख रहे है..मगर आने वाले सालों में उन समस्या से रु-ब-रु होना ही पड़ेगा..।।

मैं डरा नही रहा हूँ, बस वास्तविकता से अवगत करा रहू है..।

एक हाशिये पे खड़ा इंसान कीपैड मोबाइल चला रहा है,मगर उसे भी 299₹ का रिचार्ज करवाना पड़ रहा है..जबकि वो न 2G,3G,4G, 5G यूज़ कर रहा है...।और मजबूरी ये है कि अब सारे काम मे मोबाइल नंबर लगता ही है..अगर रिचार्ज न कराये तो sim बंद, अगर sim बंद तो OTP नही आएगा..अगर OTP नही आएगा तो सरकार के कई योजनाओं का लाभ नही उठा पायेगा..।।

इसी तरह आप AI इस्तेमाल करें या न करें.. मगर इसकी कीमत चुकानी ही होगी..क्योंकि कोई ऑप्शन ही नही है..।

अगर इसका कोई समाधान न ढूंढा गया...तो वो दिन दूर नही जब हड़प्पा सभ्यता की तरह भारत के बेंगलुरु,नवी मुंबई को किताबों में पढ़ना पड़ेगा..।।

क्या आपके पास कोई समाधान है..??

AI आज जरूरत है,हम,आप इससे मुँह मोड़ नही सकते,AI भारत को सुपर पावर बना सकता है..जिस तरह संचार क्रांति ने भारत को आर्थिक रूप से सशक्त किया उसी तरह AI क्रांति भारत को सुपर पावर बना सकता है...।
मगर इसके दुष्परिणाम के निराकरण के लिए हमारे पास समाधान होना चाहिए..।
AI से घबराए नहीं, बल्कि अपने प्रगति में सही इस्तेमाल करें।।