सोमवार, 6 जुलाई 2026

फ़िल्म "सतलुज"..

कहते है फ़िल्म समाज का आइना होता है..
सब फ़िल्म तो नही मगर कुछ फिल्में जरूर होते है,उन्ही में से एक फ़िल्म है "सतलुज''...।

इसे बने 3 साल हो गए थे मगर CBFC ने 121 कट लगाए और फ़िल्म का नाम(पंजाब 95) बदलने को कहा..
मगर मेकर और दिलजीत दोसांझ नही माने..
और इसे 3जुलाई 2026 को Zee_5 OTT पे रिलीज किया और 6 जुलाई को किसी कारणवश हटा दिया गया..।

ये फ़िल्म 90 के दशक के पंजाब के हालात दिखा रहे है,कैसे उस समय के हालात थे,ये फ़िल्म बैंक कर्मचारी और मानवाधिकार कार्यकर्ता "जसवंत सिंह खालरा' जी के ऊपर है..उन्होंने किस तरह सरकार और प्रशासन के खिलाफ आवाज उठाया और इस मामले को दुनिया के सामने लाया..मगर अफसोस वो दोनों कंही गुम गए..।
ये फ़िल्म उन्हीं के दास्तां को बयां कर रही है..।




ये फ़िल्म प्रशासन और सरकार की वो क्रूरता को दिखाता है जिसे आम आदमी कभी बयां नही कर पाता,क्योंकि जिसके साथ क्रूरता होता है,वो कुछ बयां करने के लिए बचता ही नही..।।

सरकार और प्रशासन ने अपनी क्रूरता को छुपाने के लिए #सतलुज फ़िल्म को OTT से हटा दिया है..।।

लोग बदलते है..पद,प्रतिष्ठा नही..आज की सरकार भी वही कर रही है..जो 90के दशक में कर रही है..।।

पंजाब की भोगौलिक स्थिति ही ऐसी है,जिस कारण उसे सदियों से आक्रांताओं का सामना करना पड़ा है..पंजाब और पंजाब के लोग वो पहरेदार है,जो अपने लहू बहाकर सदियों से भारत की पहरेदारी कर रहे है..
मगर उन्हें मिला क्या..??

जब सारा देश आजादी का जश्न मना रहा था..
तब पंजाब खून से लतपथ लाशों में अपनों को ढूंढ रहा था..।
फिर कभी..।।

शनिवार, 4 जुलाई 2026

तुमसे भी बेहतर..

तुमसे भी बेहतर हैं,
कई इस जंहा में..
तुम्हीं गलतफहमी पाले हुए हो..
मुझसे बेहतर कौन है..
इस जंहा में..?

कोई बेहतर नही है..इस जंहा में
सब में,कुछ-न-कुछ कमियां होता ही है..
इस जंहा में..

कुछ लोग अपने कमियों को दरकिनार कर..
अपने खूबियों को निखार कर..
आगे निकल जाते है..
और..
औरों से बेहतर बन जाते है..।

तुमसे भी बेहतर हैं,
कई इस जंहा में..
तुम्हीं गलतफहमी पाले हुए हो..
मुझसे बेहतर कौन है..
इस जंहा में..।



कंहा है आशियाना मेरा .


कंहा है..
आशियाना मेरा..
जंहा कल था..
वंहा आज कुछ और है..
कंहा है आशियाना मेरा..।

मैं यू ही ढूंढ रहा हूँ..
उस आशियाने को..
जो मेरा कभी, था ही नही..।

क्या मैं उतनी दूरी तय कर..
आशियाना बनाने आया हूँ...??
या फिर उस मुकम्मल..
आशियाने को पाने आया हूँ..
जिसे पाकर..
किसी आशियाने की चाह न रह जाये..।


शुक्रवार, 3 जुलाई 2026

जिंदगी के दौड़ में..

मैं जिंदगी के दौर में बहुत पीछे रह गया हूँ..
मगर मुझे उम्मीद अभी भी है..।
कोई मोड़ तो आएगा..
जो मुझे सबसे आगे ले जाकर खड़ा कर जाएगा..।

मगर वो मोड़ कब आएगा..
इसका कोई पता नही..
मगर वो मोड़ जरूर आएगा..।

बस मुझे सजग और सतर्क रहना है..
कंही वो मोड़ गलती से छूट न जाये..
नही तो..
मैं जिंदगी के दौड़ में पीछे ही रह जाऊंगा..।।



बुधवार, 1 जुलाई 2026

मुस्कुराइए..😊

क्या आपको मालूम है..
आप दिन में कितने बार हंसते या मुस्कुराते है..??
एक बार..दो बार..
या फिर एक बार भी नही..🤔

अगर आप एक बार भी नही हंसते या मुस्कुराते है..
तो ये चिंतनीय है..
क्योंकि आप अपने शरीर के अंगों के लिए बोझ बन रहे है..
और अपने अंगों को बोझिल कर रहे है..।

क्योंकि जब आप एक बार भी नही मुस्कुराते है..
तब आप अपने मांसपेशियों को तनाव में डाल रहे होते है,जिसके कारण शरीर मे थकान महससू होती है..।
वंही जब हम हंसते है तो हमारी ब्लड वेसल्स फैलती है,जिस कारण ब्लड सर्कुलेशन के साथ हमारा हृदय स्वस्थ रहता है..
वंही जब हम नही हंसते/मुस्कुराते है..तो हमारी ब्लड वेसेल्स सिकुड़ती जाती है,साथ ही स्ट्रेस हॉर्मोन(कार्टिसोल और अड्रेनिल)बढ़ता जाता है जिस कारण दिल की बीमारियों को हम न्योता देते है..।
T-cells(एंटीबॉडी) का निर्माण जब हम हंसते या मुस्कुराते है तो हमारे अंदर एंटीबॉडी का निर्माण होता है,जो हमारे इम्मयून तंत्र को मजबूत करता है..।अगर आप नही हंसते या मुस्कुराते है तो आपको सर्दी-खांसी या अन्य संक्रमण बीमारियों से सामना करना पड़ सकता है..।।
फेफड़ो की कार्यक्षमता- जब हम जोर से हंसते है तो हमारे फेफड़े की क्षमता बढ़ती है और ऑक्सीजन गहन करने की क्षमता बढ़ जाती है,जिस कारण हरेक कोशिका तक ऑक्सीजन आसानी से पहुंच जाता है..अगर नही हसेंगे तो क्या होगा..जरा सोचिए..।
●मानसिक स्वास्थ्य- जब हम हंसते या मुस्कुराते है तो डोपामिन और सेरोटोनिन हॉर्मोन का स्त्राव होता है,जिससे मष्तिष्क को ये सिग्नल मिलता है कि सब ठीक है..अगर न मुस्कुराए तो शरीर को क्या सिग्नल जाएगा..जरा सोचिए..।।

मुस्कुराइए..
क्योंकि हमारा जन्म ही मुस्कुराने के लिए हुआ है..
क्योंकि इस ब्रह्मांड में जो कुछ भी है..
वो किसी न किसी रूप में मुस्कुरा ही रहे है..।
इसिलिय मुस्कुराइए..
क्योंकि उदास होने के लिए कई कारण मिल जाएंगे
मगर मुस्कुराने के लिए कोई कारण नही चाहिए..
इसिलिय मुस्कुराइए..
क्योंकि हमारा जन्म ही मुस्कुराने के लिए हुआ है..😊


सफलता ही शाश्वत है..

एक बार सफल होना चाहता हूं..
इतना सफल..
की जिन लोगों ने मुझसे मुँह फेरा है..
एक बार उन्हें फिर से..
मुँह फेरने के लिए विवश करू..।

सफलता ही शाश्वत सत्य है..
क्योंकि हम यंहा सफल होने के लिए ही आये है..
मगर हम दूसरों चीजों में उलझ कर असफल हो गए है..।।

सबसे सफल प्राणी इस ब्रह्मांड में मनुष्य ही है..
मगर सबसे बड़ा असफल संख्या मनुष्यों का ही है..।

जबकि हरेक पेड़-पौधे या जीव जंतु अपने सफलता के पराकाष्ठा पे पहुंच ही जाते है..
जो नही पहुंच पाते वो अपना अस्तित्व गवां देते..।
मगर मनुष्यों में सामुदायिक भावना के कारण असफल लोग भी सफल लोगों के सहारे जी लेते है..।



सोमवार, 29 जून 2026

खुद को बदलना..

कुछ लोग इतिहास बदलते है..
और कुछ लोग खुद को बदलते है..
अक्सरहाँ वही लोग इतिहास बदलते है..
जो खुद को बदलते है..।।

मगर खुद को बदलना इतना आसान कंहा है..
अगर आसान होता तो..
इतिहास में गिने चुने का ही नाम क्यों होता..।।
ये वही गिने-चुने है..
जिसने खुद को बदला..
और इतिहास ने उन्हें स्थान दिया।।



फ़िल्म "सतलुज"..