रविवार, 19 अप्रैल 2026

फ़ोन कॉल..

जिंदगी में एक इंसान तो जरूर होना चाहिए..
जिसे आप कभी-भी,किसी समय भी..
बेजिझक, बेधड़क कॉल कर सकते है..।।

क्या आपके जिंदगी में कोई ऐसा है..??
अगर हां..
तो आप मुस्कुराइये😊..
आप लाखों में नही करोडों में एक है..।
ये कोई भी हो सकता है..
आपके माँ-बाप,भाई-बहन,पति-पत्नी या आपके मित्र..।
इनमें से कोई भी हो सकता है..।




आपने अक्सरहाँ देखा होगा..
आप किसी को फ़ोन करने का तो,सोचते है,
मगर फ़ोन नही करते..
कभी सोचा है..
आप ऐसा क्यों करते है..??
कभी सोचियेगा..😊

क्योंकि आज के भागम-भाग जिंदगी में 
हम दूसरों से नही,बल्कि खुद से ही भाग रहे है..
और भागते-भागते इतना थक चुके है कि..
हम खुद को ही भूल गए है..
तो फिर दूसरों को कैसे याद रख सकते है..।।

जिंदगी में कभी भी किसी का कॉल आये..
तो उसे रिसीव जरूर कीजिये..
क्या पता वो उसका आख़री कॉल हो..।।

अगर उस समय रिसीव नही कर सकते तो..
समय मिलते ही जल्दी से कॉल बैक करें..
क्या पता वो ज्यादा देर तक..
आपके कॉल का इंतजार न कर सके..।।

भारतीय महिला..

कुछ दिनों से हमारे देश में महिलाओं की खूब चिंता हो रही है..क्योंकि संसद में "महिला आरक्षण विधेयक" लाया गया..जिसमें महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया था..।
इस विधेयक को 2/3 बहुमत से पास होना था जो नही हो पाया..

आप क्या सोचते है..??
क्या सरकार को सच में महिला की चिंता है..??
या फिर विपक्ष को महिला की कोई चिंता ही नही है..??

मगर वास्तविकता ये है कि इनदोनों में से किसी को महिला की चिंता नही है,इनदोनों को अपने वोट बैंक की चिंता है..।।
ढेर सारे सवाल खड़े किए जा सकते है..पक्ष और विपक्ष के ऊपर..

इनसब को छोड़िये...
क्या आपको अपने परिवार की महिलाओं की चिंता है..??

हमारे भारत मे 3 तरह की महिलाएं है-

पहली श्रेणी में वो महिला है..जो अपना अधिकार जानती है,और उसे लड़ कर लेती है..

दूसरी श्रेणी में वो महिला है,जो अपना अधिकार तो जानती है,मगर उसके लिए लड़ती नही है..।

तीसरी श्रेणी में वो महिला है..जो अपना अधिकार जानती ही नही है..।

मगर आपको जानकर आश्चर्य होगा कि..इन तीनों महिला का हश्र एक जैसा ही है..।

पहली श्रेणी की महिला को अपने समाज,परिवार सबसे उपेक्षा झेलनी पड़ती है..और जिंदगी एकांकी हो जाती है..।मगर कभी-कभी जब ये विद्रोह करती है तो इनके विद्रोह को स्वीकार कर इनसे दूरियां बना लिया जाता है..।

दूसरी श्रेणी की महिला को परिवार और समाज मे इज्जत तो मिलता है,मगर अपने ही नजरों में वो गिर जाती है,क्योंकि वो गलत को गलत और सही को सही नही बोल पाती..मगर कभी-कभी जब ये विद्रोह करती है तो इनके विद्रोह को दबा दिया जाता है..।

तीसरी श्रेणी की महिला को कोई फर्क ही नही पड़ता,उन्हें लगता है कि महिला शोषण के लिए ही पैदा हुई है..मगर कभी-कभी जब ये विद्रोह करती है तो इनके विद्रोह को कुचल दिया जाता है..।




चलिये महिलाओं की दयनीय स्थिति को देखते है..
NCRB के अनुसार महिलाओं के प्रति होनेवाले अपराधों में 32% अपराध परिवार वाले ही करते है..।

●NCRB के अनुसार ही भारत मे हरेक 15 से 16 मिनट में एक बलात्कार का मामला दर्ज किया जाता है..मगर सामाजिक शर्म के कारण कई मामले दर्ज ही नही होते..।

●NCRB के अनुसार महिलाओं के साथ साइबर अपराध की घटना 25% की वृद्धि से बढ़ोतरी हो रही है..।

सवाल ये है कि..क्या सरकार को सच मे ही महिला की चिंता है..??

महिला के साथ जी घृणित कार्य करता है,उसे सजा तक नही मिलता है,लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण लड़की/महिला परिवार,समाज, कानून और कोर्ट के सामने थक कर हार मान जाती है..।
अगर सरकार को सच मे चिंता है तो महिलाओं के साथ होने वाली हरेक घटनाओं को 1-3 महिना में सुलझाकर अपराधी को दंडित किया जाय..।
मगर आज अपराधी बेशर्म की तरह खुले घूमते है,और जो निर्दोष है वो शर्म के मारे अपने चेहरे ढक कर घूम रही है..।
सबसे पहले हमें ये नजरिया बदलना होगा..।।

महिलाओं के प्रति हिंसा का मुख्य कारण-
पितृसत्तात्मक सोच- जरा सोचियेगा हम मंदिर में देवियों के आगे तो सर् झुकाते है,मगर बाहर क्या करते है..(मैंने उन महिलाओं को भी देखा है,जो अपने व्यवहार के कारण आपको मन ही मन नतमस्तक होने पे मजबूर कर देती है,मगर मैंने कुछ उन महिलाओं को भी देखा है,जो अपने व्यवहार के कारण आपको उनके प्रति नफरत पैदा कर देती है..मगर इसका कारण भी कोई पुरुष ही है..)

आर्थिक निर्भरता- महिला जबतक दूसरे पर आश्रित रहेंगी तबतक उनका शोषण होता रहेगा..मगर ये एक ही पहलू है,शहरों में अब अधिकांश महिला आत्मनिर्भर है,मगर अब भी उनका शोषण हो रहा है,या तो घर मे या फिर ऑफिस में..आखिर महिला करें तो क्या करें..??

कानूनी प्रक्रिया में देरी- कानून ढेर सारे है,मगर इसकी प्रक्रिया इतनी धीमी है कि महिलाएं थक जाती है..

क्या इसका कोई हल नही है..?
अगर सच कहूं तो नही है..
क्योंकि पुरूष अपना नजरिया नही बदलने वाले है,जिस रोज उनका नजरिया महिला के प्रति बदल जायेगा, उस रोज महिला के लिए कानून बनाने के लिए या उनके अधिकार के लिए सरकार को कुछ करने की जरूरत नही पड़ेगा..।।

आपको जानकर हैरानी होगी कि पूरे विश्व मे महिलाओं की स्थिति दयनीय है..उन देशों में भी,जिन देश मे 90% महिला आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है..
•उन देशों में भी महिला की स्थिति दयनीय है,जिन देश मे महिला के प्रति हिंसा के लिए कड़े कानून बनाये गए है...।।

•क्या आपको अपेस्टिन फ़ाइल की जानकारी है..?
•क्या आप अरब देशों के महिला की स्थिति से वाकिफ है..?

इन सब स्थितियों को देखते हुए..
हमारी भारतीय महिलाओं की स्थिति अच्छी है..
इन्हें और अच्छा करने के लिए हम पुरुषों को और नम्र होने की जरूरत है..।



शनिवार, 18 अप्रैल 2026

प्यार की पांति..

मैंने उससे कहा-
मैं अब तुमसे प्यार नही करता..।

उसने कहा-
क्यों..??

मैंने कहा-
क्योंकि तुम मुझसे प्यार नही करती..।

उसने कहा-
तो क्या हुआ..
तुम तो मुझसे प्यार करते हो..।।

प्यार का मतलब ये थोड़े ही होता है..
की आप जिससे प्यार करें उससे भी आप प्यार की अपेक्षा रखें..
अगर ऐसा है,तो ये प्रेम नही है..
ये तो फिर सौदा है..।।
अगर आप सौदा ही करना चाहते हो..
तो इतने बड़े सौदागर बनो की..
दूसरे के पास कोई दूसरा रास्ता ही न बचें..।।









गुरुवार, 16 अप्रैल 2026

कभी तो जागोगे..

कभी तो जागोगे..
मगर कब जागोगे..
जब सबकुछ खो जाओगे..
क्या तब जागोगे..
मगर तब जागकर भी..
क्या पाओगे..??

अभी भी कुछ नही,खोया है तूने..
अभी भी पाने के लिए,सारा जंहा है..
अब तो जाग जाओ..।

कंही ऐसा न हो..
तुम सोए रह जाओ..
और तुम्हारे हिस्से का भी हिस्सा 
कोई और पा जाए..।

कभी तो जागोगे..
मगर कब जागोगे..।।



मैं क्या था..

मैं क्या था..
मैं क्या हो गया हूँ..😞
अपने राह से भटक कर..
मैं कुछ न रह गया हूँ..।।

मैं क्या था..
मैं क्या हो गया हूँ..
मैं जिस राह से भटक कर..
जिस राह पे चल दिया हूँ..
उस राह के अनुभवों से..
क्यों न सफलता का एक नया राह बना लूं..।
और मैं क्या था..
और मैं क्या हो गया हूँ..।
इस नए स्वरूप को स्वीकार कर..
क्यों न अपने लिए..
एक नए कीर्तिमान का निर्माण करू.. 
मैं क्या था..
और क्या हो गया हूँ..😊।




मंगलवार, 14 अप्रैल 2026

मैं हर जगह विद्यमान हूँ..

मैं न मिलूं तो हैरान मत होना..
क्योंकि मैं तो, 
हर जगह विद्यमान हूँ..।
खुद को कुरेदना..
खुद को डुबोना..
आध्यात्मिक गहराइयों में..
उस गहराइयों में भी,
मेरी परछाइयां न दिखें..
तो हैरान मत होना..।
क्योंकि मैं तो हर जगह विद्यमान हूँ..।

थोड़ा अपना औरों के प्रति नजरिया बदलना..
अपने वाणी में थोड़ा मधुरता लाना..
औरों में भी मेरा अक्स देखना..
अगर न दिखाई दे..
तो हैरान मत होना..।
क्योंकि मैं तो हर जगह विद्यमान हूँ..।।

अगर मैं कंही न मिलूं..
तो अपने अंदर ही गौता लगाना..
और हृदयस्थली पर अपना ध्यान लगाना..
मैं यंही विद्यमान हूँ..
आज से नही..
तुम्हारे सृजनकाल से ही..।।

मैं न मिलूं तो हैरान मत होना..
क्योंकि मैं तो, 
हर जगह विद्यमान हूँ..।



क्यों न शुरू से शुरूआत करें..

क्यों न शुरू से शुरुआत करें..
फिर से एक नई शुरुआत करें..।
जो पीछे छूट गया उसे वहीं रहने दें,
वक्त की लहरों को अपनी दिशा में बहने दें..।
क्यों न शुरू से शुरुआत करें..
फिर से एक नई शुरुआत करें..।

नाकामी की धूल को जरा झाड़ कर,
अपनी हिम्मत को फिर से संवार कर..।
क्यों न शुरू से शुरुआत करें..
फिर से एक नई शुरुआत करें..।



फ़ोन कॉल..