गुरुवार, 30 जुलाई 2026

मुझे खुद को बदलना है..

मुझे खुद को बदलना है..
जब आइने में खुद को देखूं..
तो नजरें मिला सकूँ..
और मुस्कुरा सकूँ..।
मुझे खुद को बदलना है..
जब अपने अतीत में देखु..
तो वर्तमान पे गौरवान्वित महसूस कर सकूं..।
मुझे खुद को बदलना है..
जब भीड़ में किसी चाहने वालों से मिलूं..
तो उनसे नजरें फेरु नहीं,
बल्कि उनसे नजरें मिला सकूँ..
मुझ खुद को बदलने है..
जब आईने में खुद को देखूं..
तो नजरें मिला सकूँ..।


बुधवार, 29 जुलाई 2026

मैं..

मैं बहना चाहता हूं..
नदी की तरह..।
मैं उड़ना चाहता हूं..
बादल की तरह..।
मैं खिलना चाहता हूं..
सूर्य की रोशनी की तरह..।
मैं विलीन होना चाहता हूं..
शून्य की तरह..।
मैं,
मैं का भान खोना चाहता हूं..
इस प्रकृति की तरह..।

कंहा ढूंढू गुरु को..

कंहा ढूंढू गुरु को..
इस माया से ढकी अंधियारे में..
कभी इधर,तो कभी उधर..
यू ही भटक रहा हूँ मैं..।
कंहा ढूंढू मैं..
गुरु को..
मैं तो अभी उस योग्य भी नहीं..
की उन्हें ढूंढने का साहस करू..।
मुझमें अभी वो योग्यता भी नहीं..
की उनके थपकियों का चोट सह सकू..।
कंहा ढूंढू गुरु को..।
(जिस तरह कुम्हार मिट्टी के बर्तन को थपकी देकर आकार देता है,उसी तरह गुरु कुम्हार की तरह ही शिष्य को आकार देता है)

कंहा ढूंढू गुरु को..
जो व्यर्थ हो रहे जीवन को नई दिशा दे..
कंहा ढूंढू..
कहते है..
गुरु को ढूंढ नही सकते..
बल्कि गुरु स्वयं ही आपको ढूंढ लेते है..।

आखिर क्या करूँ..
की गुरु की कृपा हो..।
अपने अंदर की प्यास और जिजीविषा को जितना बढ़ा सकते है..
उतना बढ़ाये..
अपने कमियों से निजात पाए..
स्वयं को निश्छल और पवित्र बना ले..
गुरु का अंकुरण स्वयं ही होगा..।।

गुरु आपको देख रहे है..
आपका वाट जोह रहें है..
आज से नहीं,
सदियों से..
आप ही राह भटक चुके है..
आप आगे तो बढ़े..
गुरु स्वयं ही आपका हाथ थाम लेंगे..।।





मंगलवार, 28 जुलाई 2026

विरोध के लिए विरोध नही..

विरोध के लिए विरोध नही..
बल्कि अपने हक़ और सम्मान के लिए विरोध जरूरी है..
सिर्फ विरोध के लिए विरोध नही..
बल्कि समय की नजाकत को देखते हुए विरोध जरूरी है..।
विरोध के लिए विरोध नहीं..।
बल्कि अपने अधिकार के लिए विरोध जरूरी है।


एक बेचैनी है..

एक बेचैनी है..
एक छटपटाहट है..
जो हूँ..
उससे निजात पाने की..।

क्या करूँ,कैसे करू..
कुछ समझ नही आता..
मगर जो हूँ..
उससे निजात पाना है..।

क्योंकि अभी जो मैं हूँ..
उस लायक नही हूँ मैं..
मैं इससे और बेहतर होना चाहता हूं..
खुद को बदलना चाहता हूं..
और एक नए जिंदगी की शुरुआत करते है..।

एक बेचैनी है..
एक छटपटाहट है..
जो हूँ..
उससे निजात पाने की..।

थोड़ा नही,पूर्णतया निजात पाना चाहता हूं..।
और खुद को नए मुकाम पे ले जाना चाहता हूं..
और इस चाह को वास्तविकता में परिवर्तित करना चाहता हूं..।

आसान नही है,
स्वयं को बदलना..
मगर हरेक रोज स्वयं को 1%भी बदलना शुरू किया..
तो एक दिन स्वयं में बदलाव दिखना शुरू हो जाएगा..।

सबसे पहले अपने कमियों पे काम करते है..
अपने कमियों को पहचानते है..
और उसे दूर करते है..
ये आसान नही है..
मगर बिना इसे दूर किये हुए..
खुद को बदल नही सकते..।
क्योंकि आज जो मैं हूँ..
अपने कमियों और गलतियों के वजह से..
और कल जो मैं होऊंगा..
वो अपने कमियों और गलतियों को दूर करके ही..।

एक बेचैनी है..
एक छटपटाहट है..
जो हूँ..
उससे निजात पाने की..।

क्या करूँ,कैसे करू..
कुछ समझ नही आता..
मगर जो हूँ..
उससे निजात पाना है..।


गुरुवार, 23 जुलाई 2026

लड़ाई जारी है..

लड़ाई जारी था..

लड़ाई जारी है..

और लड़ाई जारी रहेगा..

​जब-जब सत्ताशीन अहंकारी और सत्ता के नशे में चूर होंगे..

तब-तब लोग सड़कों पे उतरेंगे..

और उनकी औकाद बतायेंगे..

​तुम जनता से हो, और

जनता के लिए हो..।

 


बुधवार, 22 जुलाई 2026

दूरियां..

मैंने तो बहुत कोशिस की तुम्हारे पास जाने को..
मगर तुम्हीं दूरियां बनाती गई..
मैं तब भी नजदीकियां बढ़ाता गया..
मगर तुमने इतनी दूरियां बना ली..
की अब तुम्हारे करीब आने का मन नही करता..।
क्योंकि तुम्हारा मन चाहता ही नही..
की मैं तुम्हारे करीब आऊ..।