शनिवार, 29 नवंबर 2025

कुछ गलतियां

जिंदगी में कुछ गलतियां होनी चाहिए,
जिसका मलाल ताउम्र होना चाहिए..
अगर कोई गलतियां न हो..
और उसका मुस्कान भरा अफसोस न हो..
तो फिर ये भी कोई जिंदगी है..
इसलिए..
जिंदगी में कुछ गलतियां होना चाहिए..।
जब जिंदगी में अकेलापन सताये..
तो यही गलतियां तो साथ रह जाता है..
और एक नए होंसले के साथ आगे बढ़ने का मुकम्मल राज देता है..

इसलिए जिंदगी में कुछ गलतियां होनी चाहिए..
जिसका मलाल ताउम्र रहें...।।


शुक्रवार, 28 नवंबर 2025

जिंदगी से कोई शिकायत नही है..

जिंदगी से कोई शिकायत नही है..,
खुद से ही शिकायत है..।
जिंदगी ने तो वो सबकुछ दिया..
जिस-जिस के में लायक था..
मगर मैं क्या...???
उस लायक बन पाया..
जिस लायक जिंदगी ने मुझसे अपेक्षा की थी..
तो जबाब है नही..।

जिंदगी से कोई शिकायत नही है..
खुद से ही शिकायत है..।
मैं ही काबिल न बन पाया..
अपने कमजोरियों से भागता रहा..
और कमजोरियों के बोझ तले दबता गया..।

जिंदगी से कोई शिकायत नही है...
खुद से ही शिकायत है..।
जिंदगी तो अब भी..
हाथ फैलाये हुए है,
मुझे आलीगं करने के लिए..।
मैं ही बेबकूफ हूँ..
इन बेड़ियों को अपना साथी मानकर इससे लिपटा हुआ हूँ,
जबकि ये बेड़ियां सिर्फ जख्म दे रही है..।

जिंदगी से कोई शिकायत नही है..


रविवार, 23 नवंबर 2025

मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ

मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
कभी दुनिया बदलने की बातें किया करता था,
अब खुद को बदलने की जुस्तजू में लगा रहता हूँ..।
मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..।
कभी दूसरों के सपनों को पूरे करने का सपना देखा करता था,
आज खुद के भी सपने पूरे नही कर पा रहा हूं..
मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
कभी अपनों को मुझमें उम्मीद दिखती थी,..
आज सबों ने मुझसे उम्मीद छोड़ दी है..।
मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
सबकुछ बदल गया है..
मगर बदला नही है,तो मेरे आदतों और मेरे असफलताओं का सिलसिला..
मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
न जाने अब भी,
मैं खुद से उम्मीद किये बैठा हूँ..
मैं यू ही तो नही आया हूँ.. 
मगर क्यों आया हूँ..??
इसके जबाबों का इंतजार किये बैठा हूँ..
मैं यू ही तो नही आया हूँ..।
मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
कभी दुनिया बदलने की बातें किया करता था,
अब खुद को बदलने की जुस्तजू में लगा रहता हूँ..
मैं यू ही तो नही आया हूँ..।।



कभी पूछा है खुद से..

कभी पूछा है खुद से..
की आखिर तुम कर क्या रहे हो..
कभी पूछा है खुद से..
की आखिर तुम जा किधर रहे हो..
कभी पूछा है खुद से..
की आखिर तुम चाहते क्या हो..
कभी पूछा है खुद से..
आखिर तुम्हारी मंजिल कंहा है...
कभी पूछा है खुद से...

क्यों पूछते डर लगता है..??
कंही सच्चाई से सामना न हो जाये..
क्या करना है,पता नही है,
किधर जाना है,पता नही है,
क्या चाहते है,पता नही है,
मंजिल कंहा है,पता नही है..।
इसीलिए पूछते डर लगता है..।

आखिर इस डर से भला कबतक भागोगे..
कभी तो सामना करना पड़ेगा..
हिम्मत जुटाओ और अपने सवालों का सामना करो..
क्योंकि सवाल में ही हल छुपा हुआ है..।
आखिर कब तक भागते रहोगे,
आखिर कब तक टालते रहोगे..।

जो हो तुम उसे स्वीकार कर..
स्वयं के वास्तविकता को अंगीकार कर..
फिर से खुद को तराशकर..
नव-निर्मित मानव तैयार कर..
अपने असफलताओं के बेड़ियों को तोड़कर..
सफलता के नए सोपान रचकर..
अपने आप को स्वीकार कर..
इस जीवन का उद्धार कर..।।

शुक्रवार, 21 नवंबर 2025

ये उम्मीद ही तो है..

जब किसी को तुमसे उम्मीद न हो..
तो तब तुम खुद से उम्मीद रखो,
कोई रखें या न रखें तुम जरूर खुद से उम्मीद रखों..
ये उम्मीद ही तो है...
जो जीने का हौंसला देता है,
ये उम्मीद ही तो है..
जो असंभव को संभव बनाता है..
ये उम्मीद ही तो है..
जो नर को नारायण बनाता है..
ये उम्मीद ही तो है,
जो दानव को देवता बनाता है..
ये उम्मीद ही तो है..
जो नही है,उस से भी साक्षात्कार कराता है..
ये उम्मीद ही तो है..
जो कल का सूरज दिखाता है..
ये उम्मीद ही तो है..

बिना उम्मीद के यंहा, कंहा कुछ है..
उम्मीद की ज्योत तबतक जलाये रखो..
जबतक सांस और धड़कन चल रही है..
क्या पता कब उम्मीद की किरण आये..
और जिंदगी की दिशा बदल दे..।
ये उम्मीद ही तो है.


गुरुवार, 20 नवंबर 2025

मैं हारा नही हूँ..

मैं हारा नही हूँ, ना ही थका हूँ,
मैं तो सिर्फ राह से भटक गया हूँ,
मुझे अब भी उम्मीद है..
कभी तो खुद को सही राह पर लाऊंगा..
और अपनी मंजिल को पा जाऊंगा..
मैं हारा नही हूँ, ना ही थका हूँ...।



शुक्रवार, 14 नवंबर 2025

चिल्ड्रेन्स डे....

क्या आपको पता है..चिल्ड्रेन्स डे क्यों मनाते है..??
आपको पता ही होगा..।

इस बाल दिवस पर हम ग्वाल-बाल से क्या सीख सकते है..??

1. वर्तमान में जिये...
   पता है आपको.. बच्चों का खुशियों का राज क्या है..??
वो हमेशा वर्तमान में जीते है,खेलते वक़्त खेल पर ध्यान,खाते वक़्त खाने पर ध्यान,सोते वक्त सोने पर ध्यान..।
इसलिए खुश रहना है तो इन बच्चों की तरह वर्तमान में जिये..।
मगर इस आधुनिक युग मे हम उनकी भी दिनचर्या खराब कर रहें है..।

2.बच्चों की तरह हँसिये..
 आपको याद है,आपने आखरी बार दिल खोलकर कब हँसा था..अगर नही हंसे थे तो बच्चों के साथ समय बिताइए दिल खोलकर हंसने का मौका मिलेगा..।
इस भाग दौड़ भरी जिंदगी में हम हँसना भी भूल गए है..।

3.बच्चों की तरह दौड़िये..
आपको याद है..आप आखरी बार कब दौड़े थे..
अगर स्वस्थ रहना है,तो बच्चों की तरह दौड़िये..।

4.बच्चों की तरह खाइये..
बच्चें तब ही खाते है,जब उन्हें भूख लगता है और उतना ही खाता है,जितने की भूख रहती है..
और हम आप क्या करते है..पता ही है,पसंद की चीज मिले तो भूख न होने पर भी खा लेते है..इसीलिए तो सीने की जगह पेट आगे निकल जाता है..😊

5.धूप में समय बिताइए..
 आपको अपना बचपन याद है,कितनी दफा माँ-बाप से बात सुनने को मिला होगा धूप में नही खेलना है..।और आज हम अपने बच्चों को भी कह रहे है,धूप में नही खेलना है..
खुद विटामिन-D लेने के लिए बीच पे जाते है..😊

अगर स्वस्थ रहना है,तो इन प्यारे बच्चों के साथ समय बिताइए..
आप मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से स्वस्थ रहेंगे..।।


इस भागदौड़ भरी जिंदगी में,
इन बच्चों को भी प्यार चाहिए..
इस सोशल मीडिया के दौड़ में, 
इन्हें भी लाइक और सब्सक्राइब चाहिए..।

हम जितना ख्याल अपने गेजेट का रखता है
उतने ही ख्याल की उम्मीद ये हमसे रखते है..।
ध्यान रखिएगा इनका..
कंही गलती से गलती न हो जाये इनके परवरिश में,
नही तो अनफॉलो करने लगेंगे ये.. 
क्योंकि सोशल मीडिया के युग के बच्चे है ये..।

इस भागदौड़ भरी जिंदगी में,
इन बच्चों को भी प्यार चाहिए..
इस सोशल मीडिया के दौड़ में, 
इन्हें भी लाइक और सब्सक्राइब चाहिए..।


कुछ गलतियां