बुधवार, 24 जून 2026

कोई नही है अपना..

दुनिया बहुत बेरहम है..
जो आपके साथ है..
वो भी आपके साथ नही है..
क्योंकि साथ रहने से..
थोड़े ही कोई साथ रहता है..।

हम ही भ्रम में जीते है..
हमारे साथ वो है..वो है..
का गुणगान करके यू ही जिंदगी जीते है..
जब वक़्त आता है..
तो उन "वो"में से कोई भी साथ नही आता..
जो अपने है..
वो ही साथ आते है..।

आखिर ये अपने है कौन..??
अपने वही है..
जिनके जीवन में आपने योगदान दिया है..
जितना योगदान दिया है,
उतने ही वो,
अपने है..
सच कहूं..तो कोई नही है अपना..
सिर्फ एक के सिवा..
उनमें अपना निवेश करें..
उनपे अपना सर्वस्व न्यौछावर करें..
अपना वागडोर ही उनको दे दो..
क्योंकि कोई नही है..
इस जग में उनके सिवा..।।




सोमवार, 22 जून 2026

तुम्हारा ख्याल आया..

मालूम नहीं क्यों..
आसमां में बिखरते हुए बादल को देख के..
मेरे जेहन में तुम्हारा ख्याल आया...।

👩🏻क्या ख्याल आया..??

👦🏻यही..

👩🏻यही क्या..??

👦🏻अबे सोचने तो दो..

👩🏻ठीक है..तुम सोचो में जा रही हूं..
जब ख्याल आ जाए..तो उन बिखरते हुए बादल को बता देने..
वो भटकते-भटकते मुझ तक पहुंच जाएंगे..और बारिश की बूंद में बदल कर मुझसे बयां कर जाएंगे..।।




मैं ही हरदफ़ा

मैं ही हरदफ़ा बात क्यों बढ़ाऊ..
कभी-कभी तुम भी तो बात बढ़ाओ..।
मैं ही हरदफ़ा तुम्हारे पास आने का बहाना क्यों ढूंढू..
कभी-कभी तुम भी तो कोई बहाना ढूंढो..।

मैं ही क्यों इस गलतफहमी में रहू..
जो मैं सोच रहा हूँ..
वो भी तू सोच रही है..।
इस गलतफहमी से निकलकर क्यों ना,
मैं आगे बढ़ जाऊ..।

मैं ही हरदफ़ा बात क्यों बढ़ाऊ..
कभी-कभी तुम भी तो बात बढ़ाओ..।


सोमवार, 15 जून 2026

बप्पा..

मैं उनसे नजरें चुरा रहा था..
और वो..
मुस्कुरा रहे थे..।
क्योंकि मैं जिधर देखूं..
उधर सिर्फ..
वो-ही-वो नजर आ रहे थे..।
कुछ देर बाद..
अपनी मूर्खता पे हंसी आई...
जिसे देखने को लोग ताउम्र गवां देते है..
वो हमें चहु और दिख रहे थे..
और मैं..
उनसे नजरें चुरा रहा था..।।



रविवार, 14 जून 2026

नाकामियां

आपके नाकामियां पे मुस्कुराने वाले भरे पड़े है..
उन्हें एक बार..दो बार..
मुस्कुराने का मौका दे..
बार-बार नही..।
अन्यथा वो आपके नाकामियों पे नही..
आप पे मुस्कुराने लगेंगे..
ये स्थिति आने से पहले..
स्वयं को बदल डालें..।।
क्योंकि आप जब किसी की मुस्कुराहट की वजह बन सकते है..
तो आप,किसी के ईष्या,द्वेष की वजह भी बन सकते है..।।



बुधवार, 10 जून 2026

अच्छा होना भी एक अभिशाप है..

अच्छा होना भी एक अभिशाप है...
क्योंकि अच्छाई के बोझ के कारण,
आप बुरे नही हो सकते..।
और अच्छाई का बोझ आपको 
दबाता चला जायेगा,
और आप दबते चले जाएंगे..।
अगर आप इस दबाब को सहन कर गए..
तो आप उन पंक्तियों में होंगे..
जिन पंक्तियों में वो खड़े है,
जिनका नाम हम आदर से लेते है..।।

मगर अफसोस दबाव को सब सहन नही कर पाते..
और वो बदल जाते है..
यही तो प्रकृति का नियम है..।
मगर कुछ होते है..
जो प्रकृति के नियम को धत्ता बताते है..
और नए कीर्तिमान रचते है..।।
आप भी उन्ही में सो हो..।।


अपने "क्यों" को ढूंढिए

यू ही कोई छोड़ के जाता है क्या..
यू ही कोई मुँह मोड़ के जाता है क्या..।
क्या करें..
जाना तो सब को है..।
जो रुक गए..
वो वहीं रुक गए..।
जो निकल गए..
वो बुद्ध और महावीर बन गए..।

निकलना तो सब को है..
मगर जो "क्यों" के लिए निकलते है..
वो नए कीर्तिमान रचते है..
और नए मार्ग प्रशस्त करते है..।

वैसे तो हर क्षण..
लोग निकल रहे है..
व्यर्थ की जिन्दगीं गवां कर..।


मंगलवार, 9 जून 2026

नदी के दो किनारे..

हम दोनों नदी के दो किनारे है..
हम दोनों साथ तो चल सकते है..
मगर कभी मिल नही सकते..।
अगर मिल गए..
तो फिर,
न हमारा..
और न ही तुम्हारा..
कोई अस्तित्व रह जाएगा..।।

हम दोनों नदी के दो किनारे है..
तुम वो किनारा हो..
जंहा हमेशा चकाचौध और चहल-पहल रहती है..
मैं वो किनारा हूँ..
जंहा दूर तक कोई नही..
बस मौन के सिवा..।।
हम दोनों नदी के दो किनारे है..
तुम हर रोज कइयों की जिंदगी संवारती हो..
और मैं..
जिंदगी का इंतजार कर रहा हूँ..
कभी कोलाहल हो हमारे भी किनारे पे..
बस इसी का इंतजार करता हूँ..।
हम दोनों नदी के दो किनारे है..
हम दोनों साथ तो चल सकते है..
मगर कभी मिल नही सकते..।


सोमवार, 8 जून 2026

एक बात कहूँ..

एक बात कहूँ...
नही..।
कहने दो न..

क्या कहोगी..
मैं वो जानता हूँ..
तुम्हारी मुस्कान सब कुछ बयां कर रही है..।

क्या हुआ
कुछ नही..।

मैं जानता हूँ..
तुम्हारी मौन सब कुछ बयां कर रही है..।

एक बात कहूँ...
नही..।
कहने दो न..।



रविवार, 7 जून 2026

कभी देखिए खुद को..

कभी देखिए खुद को..
क्या थे और क्या हो गए..।
क्या आप वही है..
जो आप होना चाहते थे..।
अगर नही..
तो फिर से देखिए खुद को..
क्या आप वही होना चाहते है..
जो आप पहले होना चाहते थे..
अगर हां..
तो फिर आखिर आप..
वो क्यों न हुए..??
जो आप होना चाहते थे..।।

खुद से पूछिए..
क्या आप सच मे वंही होना चाहते थे..
या फिर कुछ और होना चाहते थे..??

हमारे पास हमेशा इतना वक़्त और अवसर होता ही है..
जो हम होना चाहते है..
वो किसी न किसी माध्यम से हो ही जाते है..
प्रत्यक्ष नही तो अप्रत्यक्ष रूप से..

कभी देखिए खुद को..
क्या थे और क्या हो गए..।


हम भूल जाते है..

कभी-कभी हम भूल जाते है..
हम क्या करने आये है..।
कुछ लोग उस भूल को भूलकर..
कुछ और भूल कर रहे होते है..
और इस भूल के चक्र से कभी निकल नही पाते..।।

कुछ लोग उस भूल की याद आते ही..
उसे सुधार करते है..
मगर कुछ क्षण बाद फिर भूल कर जाते है..
और इस चक्र में फंसे रहते है..।

और कुछ लोग उस भूल की याद आते ही..
दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ उस भूल को सुधार कर..
आगे बढ़ते जाते है..
अगर बीच राह में भूल हो भी गई..
तुरंत उस भूल को सुधार कर..
आगे बढ़ जाते है..।
और इनमें से कुछ लोग जीवनपर्यंत भूल नही करते..
और जिंदगी को वो मुकाम देते है..
जिस मुकाम के लिए हमसब बने है..।
मगर हमसब बार-बार भूल करके,
भूल कर रहे है..
और इस चक्र में फंसे हुए है..।।


मुस्कुराते हुए चेहरे..

मैंने मुस्कुराते हुए चेहरे को मुरझाते हुए देखा है..
और मुरझाए हुए चेहरे को मुस्कुराते हुए देखा है..
मगर कुछ चेहरे हमेशा मुरझाए हुए ही रहते है..
क्यों..??
क्योंकि शायद उनकी आदत बन गई हो..
उससे वो निकलना ही नही चाहते..।
मगर ऐसा नही है..
वो चेहरे भी मुस्कुरायेंगे एक दिन,
जिसदिन सावन की हल्की फुहार उनके रूह पर पड़ेगी..।
मगर कब पड़ेगी..??
जब वो घर से निकलेंगे..।
कब निकलेंगे..??
जब वो चाहे..
या फिर कोई उनकी अंगुलियां थाम कर घर से बाहर लाये..।।

इस जंहा में हर कोई मुस्कुराना चाहता है..
बस कोई मुस्कुराने वाला भी तो दिखे..।
जिसे देख के कोई मुस्कुराए..
और उसे देखकर,
कोई और मुस्कुराए..
और इस तरह, 
ये सारा जंहा मुस्कुराए..।।

हम रोने के लिए नही..
बल्कि हंसने के लिए पैदा हुए है..
हम अपने हिस्से का रोना तो..
जन्म लेते ही रो लेते है..।
बाकी तो दूसरे के कारण रोते है..
कोशिश करें आपके कारण कोई रोये नही..
बल्कि आपके कारण..
कोई हंसे..
कोई मुस्कुराए..
और ये मुस्कान सारे जंहा में फैल जाए..।।




बुधवार, 3 जून 2026

मैं..

मैं वो होना चाहता हूं..
जो मैं हूँ..
मैं उसमें खो जाना चाहता हूं..
जिससे मैं हूँ..
मैं,
मैं हो जाना चाहता हूं..
जो मैं हूँ..।
मगर कैसे होऊं..??
कुछ पता नही..
मैं वो होना चाहता हूं..
जो मैं हूँ..।।


सोमवार, 1 जून 2026

गलतियां..

गलतियां सबसे होती है..
मगर अपने गलतियों का बोध कुछ लोगों को ही होता है..
और उनमें से कुछ लोग ही,अपने गलतियों को स्वीकारते है..
और उनमें से कुछ चुनिंदा लोग ही,
अपने गलतियों को स्वीकार कर,अपने गलतियों को नही दोहराते है..।।

आप इनमें से कौन है..
•क्या आपको अपने गलतियों का बोध है..?
•क्या आप अपने गलतियों को स्वीकारते है..?
•क्या आप अपने गलती को नही दोहराते है..?




ऐसे कौन लोग है जो अपनी गलती नही दोहराते..??
ये वही लोग है..
जो सफल है..।
जो गलतियां करने के बाद,
अपने गलतियों को न छुपाते है,
और न ही भागते है..
बल्कि अपने गलतियों को सुधारते है..।।

हममें से अधिकांश लोग..
गलतियां करते है..
कभी अनजाने में तो कभी जानबूझकर..
मगर हरेक गलतियां नुकसानदेह नही होती..
मगर वही गलतियां जब आदत बन जाती है,
तब वो नुकसानदेह हो जाती है..।
जैसे..देर से स्टेशन पहुचने पर दौड़कर ट्रैन पकड़ना..अगर ये आदत बन जाये तो..
या फिर जल्दीबाजी में ट्रैफिक नियम को तोड़ना..अगर रोज तोड़ने लगे तो..??

कभी-कभी हम गलतियां जानबूझकर करते है..
अगर वो गलतियां आप, 
दूसरों को नुकसान पहुंचाने के लिए कर रहे होते है तो,
इससे बड़ा अपराध कोई नही है..।



शुक्रवार, 29 मई 2026

आप कब हंसते है..

आपने कभी गौर किया है..
हमें हंसी कब आती है..??
अक्सरहाँ हमें दूसरों की गलतियों,नादानियों या उसके दयनीय स्थिति पे ही हंसी आती है..।
है ना..।
मगर हम कभी गौर नही करते..।

चाहे हम दोस्तों के बीच में हो,या परिवार के सदस्यों के बीच में हो..
अक्सरहाँ हम किसी के गलतियों,नादानियों या फिर उसके दयनीय स्थिति पे ही हंसते है..।
अगर आप कोई मूवी या कोई कॉमेडी शो देखे..
अक्सरहाँ हम उनके गलतियों या उनकी दयनीय स्थिति पे ही हंसी आती है..।
हमसब ने "हेरा-फेरी" देखा ही होगा..इस फ़िल्म का हरेक किरदार की स्थिति दयनीय ही है..और हम इन्हीं परिस्थितियों को देखकर हंस रहे होते है..।।

आखिर हमें दूसरों पे हंसी आती क्यों है..??
मनोवैज्ञानिक के अनुसार जब हम किसी को कोई गलती करते,या किसी उलझन में देखते हैं, तो हमारे अवचेतन मन को लगता है कि, मैं इस स्थिति में नहीं हूँ या मैं इससे बेहतर हूँ। यह अचानक मिलने वाली मानसिक राहत और श्रेष्ठता की भावना ही हंसी के रूप में बाहर आती है।

हंसी हमें कब-कब आती है..??
दूसरों की गलतियों पे..
● अपनी गलती याद आ जाने पर..
● जब हम समूह में होते है..
● तनाव या मुसीबत से निकलने पे..



बुधवार, 27 मई 2026

लोग बदलते है..

लोग बदलते है..??
इसमें कौन सी बड़ी बात है..
प्रकृति की बनाई हुई हर चीज समय-दर-समय बदल रही है..।

मगर..
मगर क्या..??
इंसान के गुण समय-दर-समय बदलते रहते है..
मगर प्रकृति के द्वारा बनाई हुई हरेक चीज अपने गुण को नही बदलती..।
क्यों..?
क्योंकि आप प्रकृति द्वारा निर्मित अन्य चीजों के साथ उतना वक़्त नही गुजारते..
इसिलिय आपको उनके गुणों के बदलाव का अहसास नही होता..।

आप समझ नही रहे हो..
मैं कहना क्या चाह रहा हूं..।
मैं सब समझ रहा हूँ..
आप जो कहना चाह रहे है..।

हम खुद बदल रहे है..
इसिलिय हमें दूसरों में बदलाव नजर आता है..।
या फिर हम खुद को नही बदल रहें है..
इसिलिय हमें दूसरों में बदलाव नजर आता है..।।

हम चाहते है..
लोग मुझसे वैसा ही व्यवहार करें..
जैसा कल कर रहें थे..
मगर क्या ये संभव है..?
बिल्कुल नही..।
क्योंकि,
हो सकता है,
आज उनके ऊपर जिम्मेदारियां बढ़ गई हो..
आज उनकी परिस्थितियां बदल गई हो..।
तो फिर हम कैसे कह सकते है..
की वो आज भी मुझसे..
कल जैसा ही व्यवहार करें..।

आप खुद को बदलिए..
और परिस्थितियों का मूल्यांकन कीजिये..
तब कुछ नही बदला नजर आएगा..।

वैसे आपके पास इतना समय है..
की आप लोगों को बदलते हुए देख पा रहें है..😊
अगर हां..।
तो खुद को व्यस्त रखिये..
आपको कोई बदलाव महसूस नही होगा..।

जैसा सूरज,चाँद,तारे..
सबकुछ बदल रहे है..
मगर हमारे पास समय ही नही है,
उनके अवलोकन करने का..
इसीलिए वो हमें बदले हुए नजर नही आते..😊।



शिकायत न करें..

जब आप किसी की शिकायत कर रहें होते है..
तब आप अपनी कमियों का ही इजहार कर रहें होते है..।
इसिलिय जब भी किसी की शिकायत करें..
तो सोच ले..
कंही आप अपने कमियों का तो इजहार नही कर रहें है..।

वंही जब आप किसी की प्रसंशा कर रहे होते है..
तो अप्रत्यक्ष रूप से आप स्वयं को ही निखार रहें होते है..।।

दोनों ही परिस्थितियों में आप..
किसी के आंख के तारे..
तो किसी के आंख के कांटे..
बन जाते है..।।

तो क्या किसी की शिकायत नही करें..??
करें..
अगर आप उनके कमियों को दूर कर सकते है,
या फिर उनकी मदद कर सकते है तब..।।
अन्यथा मजे लेने के लिए नही..
या फिर दिल का बोझ हल्का करने के लिए नही करें..
तो फिर क्या करें..
उनकी प्रसंशा करें..
क्योंकि हरेक इंसान में..
अवगुण से ज्यादा गुण होता है..।
और हमें उनका सिर्फ एक ही अवगुण दिखता है..।।


आप खास हो..

कभी-कभी हम अक्सरहाँ उन चीजों के लिए बाहर भटकते रहते है..
जो चीज हमारे अंदर ही है..
उसे ढूंढने के लिए कितना प्रयत्न करते है..
मगर जब सही समय आता है..
वो चीज खुद व खुद प्रकट हो जाता है..।

इसिलिय सही वक्त का इंतजार करें..
जब जिस चीज की जरूरत होगी..
वो आपको जरूर मिलेगी..
बस आप अपने आप को योग्य बनाते रहें..।

कभी-कभी हम कुछ चीजों को जबरदस्ती हासिल कर लेते है..
जिसके लिए हम उस वक़्त योग्य नही होते..
जिस कारण वो चीज बोझिल लगने लगती है..।

आप जो चाहते है..
वो आपको जरूर मिलेगा..
बस अपने आप को तराशते रहें..
क्योंकि जब वो चीज आपके पास आये..
तो वो खुद को गौरवान्वित महसूस करें..।।

आप खास हो..
क्योंकि आप जैसा..
इस ब्रह्मांड में दूसरा कोई नही है..
इसिलिय आपकी जिम्मेदारी भी है..
की अपने आप को उस काबिल बनाये..
जिससे उस रचियता को भी गौरवान्वित होने का अवसर मिले..।
आप ख़ास हो..।।



मंगलवार, 26 मई 2026

खुद के लिए नियम बनाये..

खुद के लिए कुछ नियम बनाये..
हां,खुद के लिए..
कुछ ऐसे नियम बनाये..
जो सरल हो,सहज हो,सुगम हो,सहय हो और सार्थक हो..
अन्यथा नियम के बोझ में ही दब जायेंगें..
और वंही के वंही रह जायेंगें..।

जिंदगी में अगर बहुत आगे जाना हो,
बहुत कुछ पाना हो..
और जिंदगी को सार्थक बनाना हो..
तो खुद के लिए कुछ नियम बनाओ..
जो सरल हो,सहज हो,सुगम हो,सहय हो और सार्थक हो..
यही जिंदगी को नई दिशा देगी..
और यही नई दिशा..
जिंदगी को नई पहचान देगी..।

जिंदगी में अगर आगे बढ़ना हो..
तो खुद के लिए कुछ नियम बनाओ..
कुछ ऐसे छोटे-छोटे नियम बनाओ..
जिसे सहजता से पूरा कर पाओ..।

अगर जिंदगी के दौड़ में नियम आड़े आये..
तो उस नियम को तोड़ कर..
एक नया नियम बनाओ..
जो जिंदगी के दौड़ को पूरा कर पाए..।।

नियम हमें तबतक बांधती नहीं..
जबतक हम जिंदगी के दौड़ में आगे बढ़ रहे होते है..
नियम हमें तब बांधने लगती है..
जब जिंदगी में ठहराव आ जाये..
जब ऐसा महसूस हो..
तो उस नियम को तोड़ कर..
एक नया नियम बनाओ..
क्योंकि आप स्वयं ही अपना भाग्य विधाता है..
आप स्वयं ही अपना निर्माता है..।।





जिंदगी की वागडोर..

जो क्षण व्यर्थ गया उसके बारे में सोच कर..
क्यों व्यर्थ समय गवाना..।
जो समय बचा है..
उसे सार्थक बना कर..
क्यों न जिंदगी को सार्थक बनाये..।

अगर आप अपने जिंदगी को..
अपने लिए सार्थक नही बनाएंगे..।
तो आपके जिंदगी को..
कोई और..
अपने लिए सार्थक बनायेगा..।।

आप चाहे..
जिंदगी के जिस दौर में हो..
आपके पास हमेशा..
अपने जिंदगी का वागडोर संभालने का अवसर होता है..।
बस थोड़ा साहस..दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन परिश्रम
करने का जज्बा होना चाहिए..
तब,जिंदगी की वागडोर आपके हाथ मे होगा..।।