शनिवार, 2 मई 2026

ब्रह्मांड,पृथ्वी और हम..

मुझे जब भी हीनता और गौरवान्वित का अहसास होता है..
तो,मैं आसमां की और देखता हूँ..
और मुस्कुराता हूँ..
और सोचता हूँ..
इस ब्रह्मांड में पृथ्वी का क्या अस्तित्व है..??
यही,जो..
हमारे पृथ्वी पर बैक्टेरिया और वायरस का है..।
तो फिर जरा सोचिए..
इस ब्रह्मांड मैं..
हमारा क्या अस्तित्व है..??😊



हम जिस तरह उन्हें नंगी आंख से नही देख सकते..
उसी तरह से एक छोर पे बैठा कोई..
हमारे पृथ्वी को नंगी आंख से नही देख सकता..
या फिर लाख प्रयत्न करने के बाबजूद भी नही देख सकता..।

मुझे जब भी हीनता और गौरवान्वित का अहसास होता है..
तो,मैं आसमां की और देखता हूँ..।।

•प्रसिद्ध खगोलशास्त्री "कार्ल सगन"ने पृथ्वी को "धूल के एक कण पर टिका हुआ छोटा सा नीला बिंदु" कहा था

•ब्रह्मांड में हमारी स्थिति बहुत ही विशिष्ट है। पृथ्वी सौरमंडल का एक हिस्सा है, जो आकाशगंगा (Milky Way) की एक छोटी सी भुजा (ओरियन आर्म) में स्थित है आकाशगंगा में लगभग 100 से 400 अरब तारे हैं। ब्रह्मांड में ऐसी अरबों-खरबों आकाशगंगाएं हैं।

यदि पूरे ब्रह्मांड को एक महासागर मान लिया जाए, तो पृथ्वी उस महासागर में पानी की एक छोटी सी बूंद के समान भी नहीं है

शुक्रवार, 1 मई 2026

मैं सुकून ढूंढने चला था

मैं सुकून ढूंढने चला था..
बिना ये जाने की..
सुकून आखिर है क्या..??
जब ये जाना तो खुद पे हंसी आयी..
और साथ ही खुद पे तरस आयी..।
मैं सुकून ढूंढने चला था..
बिना ये जाने की..
सुकून आखिर है क्या..??

लोग व्यर्थ में भटक रहे है..
उस सुकून को ढूंढने के लिए..
जो सुकून उनके अंदर ही है..
कभी अंदर भी तो डुबकियां लगाओ तब तो पता चले..
सुकून आखिर है क्या..
जब किसी की बातें..
जब किसी की यादें..
जब कोई परिस्थितियां परेशान न करें..
उसी क्षण में तो सुकून है..।

मगर ये इतना आसान कंहा है..
लोग सदियों से ये जानते है..
विरला ही कोई होता है..
जो सुकुन से जीता है..
नही तो सारा जंहा व्यर्थ ही जिंदगी गवांता है..।।

मैं सुकून ढूंढने चला था..
बिना ये जाने..
सुकून आखिर है क्या..??
समुंद्र की लहरों ने बताया..
सूरज का तेज ने बताया..
चंद्रमा की शीतलता ने बताया..
चिड़ियों की चहचहाट ने बताया..
फूलों की खुश्बू ने बताया..
अपने कर्तव्य में तल्लीन हो जाना ही..
सुकून को पा जाना है..।

मैं सुकून ढूंढने चला था..
बिना ये जाने..
सुकून आखिर है क्या..??


बुधवार, 29 अप्रैल 2026

"माँ"..

बेइंतिहा प्यार करो उन्हें..
जो बिना शर्त आपसे प्यार करते है..।

इस जंहा में एक ही तो है..
जो बेइंतिहा और बिना शर्त..
आपसे प्यार करती है..
और वो.. 
"माँ" है..।

मगर इसका अहसास ही नही होता..
क्योंकि "माँ"..
बिना शर्त जो प्यार करती है..।
बाकी और कोई नही है..
इस जंहा में..
जो बिना शर्त प्यार करती हो..

शंकराचार्य कहते है..
"कुपुत्रो जायेत क्वचिदपि कुमाता  भवति..।"






यू ही भटक रहा हूँ..

यू ही जाहिलों की तरह भटक रहा हूँ..
जाहिलों के आंगन में..
कब मुक्ति मिलेगी..
इन जाहिलों और इस जाहिलों के आंगन से..।।

जिन्हें में जाहिल कह रहा हूँ..
वो तो जाहिल है ही नही..
मैं ही जाहिल हूँ..
जो सबको जाहिल समझ रहा हूँ..।





उसने कहा..

उसने कहा..
मैं थक गया हूँ..
थोड़ी छावं चाहिए..

मैंने कहा..
आपने पेड़ ही कंहा लगाए..
जिसके छावं मैं बैठ सको...।

वो असहाय होकर आसमां निघारने लगा..
मालूम नही क्या जादू किया उसने..
देखते ही देखते..
पूरा आसमाँ काला होने लगा..
मानों बादलों का झुंड हमारे ही और आ रहा हो..।



ये क्या..
ये तो धुंए का अंबार था..।

शायद कंही दूर जंगलों में आग लगी है..
या फिर कंक्रीट के जंगलों के लिए..
जंगल मे आग लगाई गई है..??

सोमवार, 27 अप्रैल 2026

हम असफल क्यों होते है..

आपने कभी सोचा है..
कुछ लोग सफल और असंख्य लोग असफल क्यों होते है..??
आपको जानकर हैरानी होगी कि कुछ लोग जो सफल हुए है..उन्हें भी सफलता की उम्मीद नही थी..
मगर वो सफल हो गए..
आखिर कैसे..??
क्योंकि उन्हें पता था कि,जाना कंहा है..।


सफलता के कई कारण हो सकते है..
मगर असफलता के कुछ मूलभूत कारण ही होते है..।
अगर हम उन कारणों को ढूंढ ले तो हम असफलता से छुटकारा पा सकते है..।
मगर क्या ये आसान है..
बिल्कुल नही,क्योंकि हम वो कारण सदियों से जानते है..
मगर उसपे कुछ ही लोग अमल कर पाते है..
और जो अमल कर पाते है,वो नया कीर्तिमान रच जाते है..।।

असफलता के कुछ मूलभत कारण है..

अपने लक्ष्य का पता ना होना..

लक्ष्य का पता होने के बाबजूद उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए वो सब नही करना जो करना अतिआवश्यक है..(बाकी सबकुछ करते है,कुछ नही छोड़ते)

अपने लक्ष्य को पाने के बारे में न सोचना..(बाकी सबकुछ सोचते है,लक्ष्य प्राप्त न हुआ तो क्या होगा,लक्ष्य प्राप्ति के बाद क्या-क्या होगा..न जाने और क्या-क्या)

अपने लक्ष्य प्राप्ति के लिए सर्वस्व त्याग के लिए, तैयार न होना..(हम सिर्फ क्षणभंगुर सुख को पाना चाहते है,भले ही उसके लिए अपने लक्ष्य से समझौता ही क्यों न करना पड़े)


अगर सच कहूं तो हमसब जानबूझकर असफल होते है..क्योंकि ये मूलभूत बातें हमें सदियों से पता है,और बचपन से इसके बारे में सिखाया जाता है..
मगर हम इसपर अमल नही कर पाते..और हम इन असफलता का दोष दूसरों पे मढ़ते है..हममें इतनी भी हिम्मत नही होती कि हम अपनी असफलता को स्वीकार करें..।
 जब हम अपनी असफलता को स्वीकारते है,तब अपने लिए सफलता का नया द्वार खोलते है..।।
क्योंकि हम स्वयं ही अपने असफलता के लिए जिम्मेदार है..।

शनिवार, 25 अप्रैल 2026

खुद को बदलने के लिए..

खुद को बदलने के लिए..
खुद को बदलना होता है..।
खुद से लड़ने के लिए..
सबसे पहले..
खुद से लड़ना होता है..।
दुनिया से..
नजर मिलाने से पहले..
खुद से नजर मिलाना होता है..।
काबिल बनने से पहले..
खुद के नजर में पहले..
काबिल बनना होता है..।।

ये इतना..
आसना नही है..
खुद को बदलना..।
जिसने भी खुद को बदला..
खुदा का ही नही..
सारे जंहा का प्यारा हो गया..।
जिस-जिस के लिए..
इज्जत है तेरी नजर में..।
उन सबने पहले..
खुद से नजर मिलाना सीखा..।
क्या तुम हो.. 
उस काबिल..
जो खुद से नजर मिला सको..
अगर हां..
तो तैयार हो जाओ..
दुनिया कब से बांहे पसारे..
तुम्हारा इंतजार कर रही है..।।


खुद को बदलने के लिए..
खुद को बदलना होता है..।






बुधवार, 22 अप्रैल 2026

दायित्व का बोझ

बचपन से लेकर मृत्यु तक हम किसी न किसी बोझ को लेकर जीते ही है..
चाहे वो बोझ शिक्षा का हो,रोजगार का हो,रिश्ते-नाते का हो,परिवार का हो,समाज का हो,आदतों का हो या फिर वर्तमान में सोशल मीडिया का हो..।



हम किसी न किसी बोझ में जी रहे होते है..।।
इसमें से कई बोझ तो हम निरर्थक का ढो रहे होते है..
अगर समय रहते निरर्थक बोझ को नही हटाया तो वो आजीवन आपके जिंदगी का हिस्सा बन जायेगा..।
उस बोझ के कारण न आप खुश रहेंगे और न ही आपके ऊपर वो बोझ लादने वाला..
इसीलिए शुरुआत में ही अगर वो बोझ निरर्थक लगे तो उसे उतार फेंकिये..बिना किसी के फिक्र किये हुए..क्योंकि वो आपको बोझ उठाने में सहयोग तो करेंगे..मगर उसे ढोना आपको ही पड़ेगा..।।

आप किस तरह के निरर्थक बोझ को ढो रहे है..??
या फिर आपको आभास ही नही है,की आप बोझ ढो रहे है..??

बोझ उतार फेंकने का ये मतलब नही की आप अपने दायित्वों से भागे..बल्कि उसी दायित्व का निर्वहन करें जिसे करने में आप सक्षम हो..अन्यथा जिंदगी तकलीफ देह हो जाती है,अगर दायित्व का निर्वहन सही से न हो तो..।

इसका मतलब ये नही की आप दायित्व न ले..दायित्व ले मगर अपने क्षमता और परिस्थितियों को देखते हुए..।।
ये जिंदगी के हरेक क्षेत्र पर लागू होता है.।

सोमवार, 20 अप्रैल 2026

पुस्तक : जीवन के अदभुत रहस्य

कल रात मैंने "गौर गोपाल दास" जी की पुस्तक "जीवन के अद्भुत रहस्य" पढ़ा..


ये पुस्तक सालों से मेरे पास था..मेरी नजर कई दफा इस पुस्तक पे पड़ता था,और में इससे मुँह मोड़ लेता था..मगर पिछले सप्ताह इसे पढ़ना शुरू किया..और कल रात पढ़ के खत्म किया..शायद इसे मैं आज पढ़ के खत्म करता मगर कल रात एक वाकया हुआ..जो में आपको बताता हूँ-
दिन में जब इस पुस्तक को पढ़ रहा था,तो सोचा इसे आज पढ़ के खत्म कर दूंगा..रात में मैंने इसे पढ़ना शुरू किया..न जाने कब 11:30 बज गए पता नही चला..
मैंने खुद से कहा कल सुबह उठना है,बाकी कल पढ़ लूंगा..।
अंदर से एक आवाज आई..
क्या तुम्हें मालूम है कि तुम कल सुबह उठोगे..??
ये सवाल मन मे उठते ही..
मैं जो खड़ा था,वो बैठ गया..।
और पुस्तक को पढ़ना शुरू किया..और पुस्तक को पढ़ कर खत्म कर दिया..।

अक्सरहाँ हम आज का काम कल पे टालते है..
जबकि हमें कल का पता नही होता..
कोशिश करें आज का काम आज ही निपटा ले..
क्योंकि कल का किसे पता है..।।

ये पुस्तक आप पढ़ सकते है..ज्यों-ज्यों आप आगे बढ़ेंगे आपको पुस्तक में रुचि आने लगेगा..।।
मैं ये नही कह सकता कि ये पुस्तक आपके जिंदगी में बदलाव ला सकता है..
मगर ये जरूर कह सकता हूँ कि, पुस्तक में कई पंक्तिया ऐसी है,अगर वो आपके अंदर घऱ कर गई, तो आपका जिंदगी बदल सकता है..।
ये पुस्तक पाठक के आगे कई मोतियां बिखेरता है..
अगर आप सक्षम है तो उन मोतियों को चुन कर अपने जिंदगी को नया आयाम दे सकते है..।।

इस पुस्तक की कुछ झलकियां दिखाता हूँ-




रविवार, 19 अप्रैल 2026

फ़ोन कॉल..

जिंदगी में एक इंसान तो जरूर होना चाहिए..
जिसे आप कभी-भी,किसी समय भी..
बेजिझक, बेधड़क कॉल कर सकते है..।।

क्या आपके जिंदगी में कोई ऐसा है..??
अगर हां..
तो आप मुस्कुराइये😊..
आप लाखों में नही करोडों में एक है..।
ये कोई भी हो सकता है..
आपके माँ-बाप,भाई-बहन,पति-पत्नी या आपके मित्र..।
इनमें से कोई भी हो सकता है..।




आपने अक्सरहाँ देखा होगा..
आप किसी को फ़ोन करने का तो,सोचते है,
मगर फ़ोन नही करते..
कभी सोचा है..
आप ऐसा क्यों करते है..??
कभी सोचियेगा..😊

क्योंकि आज के भागम-भाग जिंदगी में 
हम दूसरों से नही,बल्कि खुद से ही भाग रहे है..
और भागते-भागते इतना थक चुके है कि..
हम खुद को ही भूल गए है..
तो फिर दूसरों को कैसे याद रख सकते है..।।

जिंदगी में कभी भी किसी का कॉल आये..
तो उसे रिसीव जरूर कीजिये..
क्या पता वो उसका आख़री कॉल हो..।।

अगर उस समय रिसीव नही कर सकते तो..
समय मिलते ही जल्दी से कॉल बैक करें..
क्या पता वो ज्यादा देर तक..
आपके कॉल का इंतजार न कर सके..।।

भारतीय महिला..

कुछ दिनों से हमारे देश में महिलाओं की खूब चिंता हो रही है..क्योंकि संसद में "महिला आरक्षण विधेयक" लाया गया..जिसमें महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया था..।
इस विधेयक को 2/3 बहुमत से पास होना था जो नही हो पाया..

आप क्या सोचते है..??
क्या सरकार को सच में महिला की चिंता है..??
या फिर विपक्ष को महिला की कोई चिंता ही नही है..??

मगर वास्तविकता ये है कि इनदोनों में से किसी को महिला की चिंता नही है,इनदोनों को अपने वोट बैंक की चिंता है..।।
ढेर सारे सवाल खड़े किए जा सकते है..पक्ष और विपक्ष के ऊपर..

इनसब को छोड़िये...
क्या आपको अपने परिवार की महिलाओं की चिंता है..??

हमारे भारत मे 3 तरह की महिलाएं है-

पहली श्रेणी में वो महिला है..जो अपना अधिकार जानती है,और उसे लड़ कर लेती है..

दूसरी श्रेणी में वो महिला है,जो अपना अधिकार तो जानती है,मगर उसके लिए लड़ती नही है..।

तीसरी श्रेणी में वो महिला है..जो अपना अधिकार जानती ही नही है..।

मगर आपको जानकर आश्चर्य होगा कि..इन तीनों महिला का हश्र एक जैसा ही है..।

पहली श्रेणी की महिला को अपने समाज,परिवार सबसे उपेक्षा झेलनी पड़ती है..और जिंदगी एकांकी हो जाती है..।मगर कभी-कभी जब ये विद्रोह करती है तो इनके विद्रोह को स्वीकार कर इनसे दूरियां बना लिया जाता है..।

दूसरी श्रेणी की महिला को परिवार और समाज मे इज्जत तो मिलता है,मगर अपने ही नजरों में वो गिर जाती है,क्योंकि वो गलत को गलत और सही को सही नही बोल पाती..मगर कभी-कभी जब ये विद्रोह करती है तो इनके विद्रोह को दबा दिया जाता है..।

तीसरी श्रेणी की महिला को कोई फर्क ही नही पड़ता,उन्हें लगता है कि महिला शोषण के लिए ही पैदा हुई है..मगर कभी-कभी जब ये विद्रोह करती है तो इनके विद्रोह को कुचल दिया जाता है..।




चलिये महिलाओं की दयनीय स्थिति को देखते है..
NCRB के अनुसार महिलाओं के प्रति होनेवाले अपराधों में 32% अपराध परिवार वाले ही करते है..।

●NCRB के अनुसार ही भारत मे हरेक 15 से 16 मिनट में एक बलात्कार का मामला दर्ज किया जाता है..मगर सामाजिक शर्म के कारण कई मामले दर्ज ही नही होते..।

●NCRB के अनुसार महिलाओं के साथ साइबर अपराध की घटना 25% की वृद्धि से बढ़ोतरी हो रही है..।

सवाल ये है कि..क्या सरकार को सच मे ही महिला की चिंता है..??

महिला के साथ जी घृणित कार्य करता है,उसे सजा तक नही मिलता है,लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण लड़की/महिला परिवार,समाज, कानून और कोर्ट के सामने थक कर हार मान जाती है..।
अगर सरकार को सच मे चिंता है तो महिलाओं के साथ होने वाली हरेक घटनाओं को 1-3 महिना में सुलझाकर अपराधी को दंडित किया जाय..।
मगर आज अपराधी बेशर्म की तरह खुले घूमते है,और जो निर्दोष है वो शर्म के मारे अपने चेहरे ढक कर घूम रही है..।
सबसे पहले हमें ये नजरिया बदलना होगा..।।

महिलाओं के प्रति हिंसा का मुख्य कारण-
पितृसत्तात्मक सोच- जरा सोचियेगा हम मंदिर में देवियों के आगे तो सर् झुकाते है,मगर बाहर क्या करते है..(मैंने उन महिलाओं को भी देखा है,जो अपने व्यवहार के कारण आपको मन ही मन नतमस्तक होने पे मजबूर कर देती है,मगर मैंने कुछ उन महिलाओं को भी देखा है,जो अपने व्यवहार के कारण आपको उनके प्रति नफरत पैदा कर देती है..मगर इसका कारण भी कोई पुरुष ही है..)

आर्थिक निर्भरता- महिला जबतक दूसरे पर आश्रित रहेंगी तबतक उनका शोषण होता रहेगा..मगर ये एक ही पहलू है,शहरों में अब अधिकांश महिला आत्मनिर्भर है,मगर अब भी उनका शोषण हो रहा है,या तो घर मे या फिर ऑफिस में..आखिर महिला करें तो क्या करें..??

कानूनी प्रक्रिया में देरी- कानून ढेर सारे है,मगर इसकी प्रक्रिया इतनी धीमी है कि महिलाएं थक जाती है..

क्या इसका कोई हल नही है..?
अगर सच कहूं तो नही है..
क्योंकि पुरूष अपना नजरिया नही बदलने वाले है,जिस रोज उनका नजरिया महिला के प्रति बदल जायेगा, उस रोज महिला के लिए कानून बनाने के लिए या उनके अधिकार के लिए सरकार को कुछ करने की जरूरत नही पड़ेगा..।।

आपको जानकर हैरानी होगी कि पूरे विश्व मे महिलाओं की स्थिति दयनीय है..उन देशों में भी,जिन देश मे 90% महिला आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है..
•उन देशों में भी महिला की स्थिति दयनीय है,जिन देश मे महिला के प्रति हिंसा के लिए कड़े कानून बनाये गए है...।।

•क्या आपको अपेस्टिन फ़ाइल की जानकारी है..?
•क्या आप अरब देशों के महिला की स्थिति से वाकिफ है..?

इन सब स्थितियों को देखते हुए..
हमारी भारतीय महिलाओं की स्थिति अच्छी है..
इन्हें और अच्छा करने के लिए हम पुरुषों को और नम्र होने की जरूरत है..।



शनिवार, 18 अप्रैल 2026

प्यार की पांति..

मैंने उससे कहा-
मैं अब तुमसे प्यार नही करता..।

उसने कहा-
क्यों..??

मैंने कहा-
क्योंकि तुम मुझसे प्यार नही करती..।

उसने कहा-
तो क्या हुआ..
तुम तो मुझसे प्यार करते हो..।।

प्यार का मतलब ये थोड़े ही होता है..
की आप जिससे प्यार करें उससे भी आप प्यार की अपेक्षा रखें..
अगर ऐसा है,तो ये प्रेम नही है..
ये तो फिर सौदा है..।।
अगर आप सौदा ही करना चाहते हो..
तो इतने बड़े सौदागर बनो की..
दूसरे के पास कोई दूसरा रास्ता ही न बचें..।।









गुरुवार, 16 अप्रैल 2026

कभी तो जागोगे..

कभी तो जागोगे..
मगर कब जागोगे..
जब सबकुछ खो जाओगे..
क्या तब जागोगे..
मगर तब जागकर भी..
क्या पाओगे..??

अभी भी कुछ नही,खोया है तूने..
अभी भी पाने के लिए,सारा जंहा है..
अब तो जाग जाओ..।

कंही ऐसा न हो..
तुम सोए रह जाओ..
और तुम्हारे हिस्से का भी हिस्सा 
कोई और पा जाए..।

कभी तो जागोगे..
मगर कब जागोगे..।।



मैं क्या था..

मैं क्या था..
मैं क्या हो गया हूँ..😞
अपने राह से भटक कर..
मैं कुछ न रह गया हूँ..।।

मैं क्या था..
मैं क्या हो गया हूँ..
मैं जिस राह से भटक कर..
जिस राह पे चल दिया हूँ..
उस राह के अनुभवों से..
क्यों न सफलता का एक नया राह बना लूं..।
और मैं क्या था..
और मैं क्या हो गया हूँ..।
इस नए स्वरूप को स्वीकार कर..
क्यों न अपने लिए..
एक नए कीर्तिमान का निर्माण करू.. 
मैं क्या था..
और क्या हो गया हूँ..😊।




मंगलवार, 14 अप्रैल 2026

मैं हर जगह विद्यमान हूँ..

मैं न मिलूं तो हैरान मत होना..
क्योंकि मैं तो, 
हर जगह विद्यमान हूँ..।
खुद को कुरेदना..
खुद को डुबोना..
आध्यात्मिक गहराइयों में..
उस गहराइयों में भी,
मेरी परछाइयां न दिखें..
तो हैरान मत होना..।
क्योंकि मैं तो हर जगह विद्यमान हूँ..।

थोड़ा अपना औरों के प्रति नजरिया बदलना..
अपने वाणी में थोड़ा मधुरता लाना..
औरों में भी मेरा अक्स देखना..
अगर न दिखाई दे..
तो हैरान मत होना..।
क्योंकि मैं तो हर जगह विद्यमान हूँ..।।

अगर मैं कंही न मिलूं..
तो अपने अंदर ही गौता लगाना..
और हृदयस्थली पर अपना ध्यान लगाना..
मैं यंही विद्यमान हूँ..
आज से नही..
तुम्हारे सृजनकाल से ही..।।

मैं न मिलूं तो हैरान मत होना..
क्योंकि मैं तो, 
हर जगह विद्यमान हूँ..।



क्यों न शुरू से शुरूआत करें..

क्यों न शुरू से शुरुआत करें..
फिर से एक नई शुरुआत करें..।
जो पीछे छूट गया उसे वहीं रहने दें,
वक्त की लहरों को अपनी दिशा में बहने दें..।
क्यों न शुरू से शुरुआत करें..
फिर से एक नई शुरुआत करें..।

नाकामी की धूल को जरा झाड़ कर,
अपनी हिम्मत को फिर से संवार कर..।
क्यों न शुरू से शुरुआत करें..
फिर से एक नई शुरुआत करें..।



खुद के बारे में सोचो..

खुद के बारे में सोचो..
आखिर तुम कर क्या रहे हो..??
क्या यही सोच के तुम बड़े हुए हो..??
खुद के बारे में सोचो..
तुम कर क्या रहे हो..??
क्या अपने सोच से..
तुमने समझौता कर लिया है..
अगर,हां..??
तब ठीक है..
तुम जैसे जी रहे हो..
वैसे जियो..।

अगर,नही...
तो धिक्कार है,तुमपे..
तुम अबतक आखिर कर क्या रहे हो..??
सिर्फ सोचने से क्या होता है..
वो पैर जो जकड़ चुके है..
उसे हिलाओ,डुलाओ..
और अपने सोच को साकार करने के लिए..
उस और कदम बढ़ाओ..।।



न तुम आलसी हो..
न ही तुम कायर हो..
न ही तुम निर्लज्ज हो..
न ही तुम नकारा हो..।
तुम में वो सबकुछ है..
जिससे तुम अपने सपने को 
साकार कर सकते हो..
तो फिर आखिर क्यों..??
अपना जिंदगी बर्बाद कर रहे हो..??
खुद के बारे में सोचो..
आखिर तुम कर क्या रहे हो..??

अगर तुम ठान लो..

अगर तुम ठान लो कि जीना है..
तो तुम्हें, जीने से कौन रोक सकता है..।
क्योंकि..
मैंने सूखे हुए पेड़ो से कलगी देते हुए देखा है..
मैंने मुरझाए हुए चेहरे पे मुस्कान देखा है..।
मैंने असंभव को संभव होते हुए देखा है..।।

आखिर कब तक ये सब सिर्फ मैं देखता रहूंगा..
इनसब से हौंसला लेकर..
अपने सपनों को साकार करूँगा..।।

अगर तुम ठान लो कि जीना है..
तो तुम्हें, जीने से कौन रोक सकता है..।



तुम कर सकते हो..

अगर अपना सपना साकार करना हो..
तो अपने प्रति क्रूर होइये..
सिर्फ अपने प्रति ही नही बल्कि..
अपनों के प्रति भी क्रूर होइये..।।




आप जबतक अपने प्रति क्रूर नही होंगे..तो आपके सपने, सपने ही रह जाएंगे।समय हाथ से निकल जायेगा और आप सिर्फ हाथ मलते रह जाएंगे..।
खुद को देखिए आईने..
क्या खुद पे गुस्सा नही आता,
क्या खुद से घिन्न नही आता..।
क्या थे आप और क्या हो गए है आप..।।

तोड़ दीजिए उस बेड़ियों को..
जो अब ढाल बन चुका है..
नोच दीजिए उस केचुल को,
जो आपका पहचान लील रहा है..।
माना कि ये संभव नही है..
मगर असंभव आखिर क्या है..।

खुद से पूछिए..
आखिर क्यों जन्मा आपके माता-पिता ने..??
क्या अपेक्षा किया आपके चाहने वालों ने..??
और क्या कर रहे है आप..??
खुद से पूछिए..।

शायद ये जबाब देने की हिम्मत न हो आपमें..
मगर जो भी हो..
आप कायर तो नही है..।

एक बार फिर क्यों नही प्रयास करते हो..
अपने उस छवि को क्यों नही साकार करते हो..
जिस छवि से अपेक्षा थी सबोको...
उस छवि को क्यों नही साकार करते हो..
एक बार फिर क्यों नही प्रयास करते हो..।

आखिर क्या नही होता है..
प्रयास करने से..
लोगों ने हिमालय के साथ चंद्रमा को भी फतह किया..
तुम आखिर क्यों नही..
अपने सपनों को फतह कर सकते हो..??

खुद को देखो एकबार आइने में..
और फिर से उस छवि को स्वीकार कर..
अपने सपने को साकार कर..।।
तुम कर सकते हो..।।
सच मे तुम कर सकते हो..।।

व्हाट्सएप और यात्रा..

क्या आपको पता है..
वर्तमान समय मे अपनों से जुड़ने का सबसे बड़ा साधन क्या है..??
चाहे मैसेज भेजना हो,कॉल करना हो या फिर वीडियो कॉल करना हो..या फिर अपने चाहने वालों को थोड़ा जलाना ही क्यों न हो..तो हम क्या करते है..व्हाट्सएप करते है..

क्या आपको पता है वर्तमान समय मे व्हाट्सएप इस्तेमाल करने वालों की संख्या कितना है..330 करोड़ ।
प्रत्येक दिन 100 अरब मेसैज व्हाट्सएप के द्वारा हम एक दूसरे को भेजते है..।




क्या आपको पता है..व्हाट्सएप का निर्माण कैसे हुआ..??
अक्सरहाँ जब हमें रिजेक्शन मिलता है तो हम हताश और निराश होते है..मगर कुछ लोग कीर्तिमान रचते है..।

उन्ही में से एक है ब्रायन एक्टन जिन्होंने स्टेनफोर्ड से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की और एप्पल कंपनी में पहला जॉब किया फिर कई कंपनी में काम किया अंत मे याहू! कंपनी के साथ 2007 तक जुड़े रहे..।फिर अपने मित्र "जैन कूम" के साथ 1 वर्ष के लिए साउथ अमेरिका की यात्रा पर निकल गए..।
जब अपना यात्रा पूरा कर वापस आ रहे थे तो दोनों ने फेसबुक और ट्विटर के पास नॉकरी के लिए अप्लाई किया..मगर दोंनो कंपनी ने इन्हें रिजेक्ट कर दिया..।
"ऐक्टन" ने मई 2009 में एक ट्वीट किया- ट्विटर के हेडक्वार्टर से रिजेक्शन मिला,ठीक ही है..इतना दूर जाना-आना भी मुश्किल होता।

फिर उन्होंने अगस्त 2009 में एक ट्वीट किया - फेसबुक ने मुझे अस्वीकार कर दिया,यह शानदार लोगों के साथ जुड़ने का अद्भुत अवसर था।देखते है आगे क्या होता है..।।

पता है इसके आगे क्या हुआ..??
इसी वर्ष सिलिकॉन वैली,कैलिफोर्निया में व्हाट्सएप को संस्थापित करते है..।
इसके बाद क्या हुआ हम सब जानते है...।

2014 में फेसबुक ने 19.3 बिलियन $ में खरीद लिया..यह तकनीकी इतिहास के सबसे बड़े अधिग्रहणों में से एक था..।।

यात्रा जरूरी है..
यात्रा सिर्फ जिंदगी नही,
बल्कि दुनिया बदल देती है..।
दुनिया मे बड़े बदलाव यात्रा से ही हुई है..