शनिवार, 8 अगस्त 2026

नी..

नी..
कंहा से शुरू करू..
तुम्हारी दास्तां..
वंही से शुरू करता हूँ..
तुम्हारी दास्तां..
जंहा पहली दफा देखा था..
तपती सुबह में,पेड़ की छावं में.
गिट्टी के ढेर पे.
मुहर वाले फ्रॉक में,
ब्रश मुँह में लिए.
ब्रश करते हुए देखा था पहली बार..।
हां पहली दफा तुम्हें देख के वो अहसास न हुआ..
मगर न जाने अक्सरहाँ तुम्हें देखते-देखते
वो अहसास कब होने लगा पता न चला..
नी कंहा से शुरु करू तुम्हारी दास्तां


(साभार - "नी" )


हम सोचते क्यों है..

आपने कभी सोचा है कि..
आप सोचते क्यों है.??
क्योंकि आपके पास करने को कुछ नही है
या फिर करने को कुछ है..
मगर हास्यपद ये है कि हम आज सोचते ही नही।



शुक्रवार, 7 अगस्त 2026

माना कि..

माना कि मैं,
असफलता के बोझ से ढका हुआ हूँ..
मगर वो दिन दूर नही..
जब इन्ही असफलताओं के बोझ पर..
सफलता का सिंहासन लगाऊंगा..

क्योंकि जब मैं असफल हो सकता हूँ..
तो सफल भी जरूर होऊंगा..।



मुझे मत ढूंढो..।

मुझे मत ढूंढो..
मैं नही मिलूंगा..
क्योंकि में बहुत सूक्ष्म हूँ..।
और हर जगह विद्यमान हूँ..
तुम मुझे कंहा-कंहा ढूंढोगो..।

मुझे मत ढूंढो..
मैं नही मिलूंगा..
क्योंकि मैं बहुत विशालकाय हूँ..
न मेरा ओर है,
न ही मेरा छोर है..
इस जंहा में..
सिर्फ मैं ही, मैं व्याप्त हूँ..।

मुझे मत ढूंढो..
मैं नही मिलूंगा..
क्योंकि मैं कंही हूँ ही नही..
अगर हूँ,
तो तुम्हारे अहसास में..।
मुझे महसूस करो..
क्योंकि,मैं..
तुममें ही हूँ..
तुमसे ही हूँ..।
मुझे मत ढूंढो..
मैं नही मिलूंगा..।


गुरुवार, 6 अगस्त 2026

जब सारा शहर..

जब सारा शहर हंस रहा था..
तो मैं, मौन था..
जब सारा शहर उदास है..
तो मैं,मुस्कुरा रहा हूँ..।
मैं इसलिए नही मुस्कुरा रहा कि..
ये उदास है..
मैं इसलिय मुस्कुरा रहा हूँ कि..
यही तो सत्य है..
तो फिर इस सत्य से,
मुँह फेर के उदास क्यों होऊ मैं..
इसे स्वीकार कर..
क्यों न मुस्कुराऊँ मैं..।


सोशल मीडिया और उद्देश्यहीन जिंदगी..

कभी आपने सोचा है..
आप क्यों मिनटों,घंटों सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करते हो..??
शायद नही सोचा होगा..
क्योंकि सोशल मीडिया हमसे सोचने और समझने की शक्ति छीनते जा रहे है..।



रॉयल मेलबर्न इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी का एक शोध बताता है कि लगातार सोशल मीडिया के इस्तेमाल से हमारा क्रिटिकल थिंकिंग और डेप्थ प्रोसेसिंग की क्षमता घटती जा रही है..

यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास का "स्मार्टफोन एंड वर्क मेमोरी" शोध बताता है कि केवल पास में रखा फोन(चाहे वो स्विच ऑफ हो) हमारे मानसिक क्षमता को कमजोर कर रहा है..

हावर्ड यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट "डोपामाइन एंड अटेंशन स्पैन" बताता है कि..सोशल मीडिया के नोटिफिकेशन, 'लाइक' और शॉर्ट्स दिमाग में डोपामाइन (Reward Chemical) रिलीज करते है.. जिससे दिमाग को तुरंत खुशी मिलने की आदत हो जाती है..जिसके कारण जिस काम में तुरंत नतीजा नहीं मिलता (जैसे पढ़ाई करना या कोई गहरी समस्या सुलझाना), उसमें दिमाग जल्दी बोर हो जाता है और ध्यान भटक जाता है..।

मेरा फिर से वही सवाल है..की, हम क्यों घंटों सोशल मीडिया पर समय बिताते हैं..??

इसका एक ही जबाब है..
हम उद्देश्यपूर्ण जिंदगी नही जी रहे है..अगर हमारे पास कोई उद्देश्य होता तो हम अपना समय सोशल मीडिया पर नही जाया करते..।
जरा गौर कीजिए..आप जितने भी लोकप्रिय चेहरे या नाम जानते है..उनके बारे में पता कीजिये..
वो कितना समय सोशल मीडिया पे बिताते हैं..?
आपको जबाब मिल जाएगा..।
(आप उन्हें छोड़ दे जिन्होंने सोशल मीडिया को ही अपना उद्देश्य बना लिया है..)

इसिलिय जिंदगी में कोई उद्देश्य बनाये और उसे पूर्ति करने में समय गवांये न कि सोशल मीडिया पे..
सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना गलत नही है..आज ये आम आदमी का अपना नजरिया,अपना भाव व्यक्त करने का साधन है..।

मगर सतर्क रहने की जरूरत है..
सोशल मीडिया को आप अपना साधन बनाये..ऐसा न हो कि सोशल मीडिया आपको अपना साधन बना ले..जोकि बना चुका है..हम वही देखते है,जो हमें दिखाया जाता है..हम वही सुनते है जो हमें सुनाया जा रहा है..।
आपको याद है,आप लास्ट टाइम कब सर्च करके कुछ देखा या सुना था..??😊




सोमवार, 3 अगस्त 2026

उपयोग और उपभोग..

साधारणतया हम उपयोग और उपभोग में कोई अंतर नही समझ पाते,हमें लगता है ये दोनों शब्द का मतलब एक ही है..।
मगर दोनों शब्द में जमीन और आसमां का अंतर है..।

किसी चीज का उपयोग करना सही है..
जैसे स्मार्टफोन को ही ले..
ये हमारे लाइफ का अभिन्न हिस्सा है..हम इसके बिना अपने दिन की शुरुआत और अंत कर ही नही सकते..ये आज इसकी महत्ता हमारे जीवन के हरेक स्तर पर है..इसके बिना आर्थिक गतिविधियां से लेकर मनोरंजन तक कि गतिविधियों का हम कल्पना नही कर सकते..।

मगर हम में से अधिकांश लोग आज स्मार्टफोन का उपयोग नही कर रहें है,बल्कि उपभोग कर रहें है..।
उपभोग का साधारण अर्थ है..उप+भोग= दूसरों के लिए भोग(इस्तेमाल) करना..(इसके और कई अर्थ है)


आपने गौर किया होगा..जब आप स्मार्टफोन उठाते है तो आप करना कुछ और चाहते है,और कर कुछ और रहे होते है..।और जो आप कर रहें होते है..वो आप अपने लिए नही बल्कि आप दूसरों के लिए कर रहें होते है..।
हां यही वास्तविकता है..नही तो आपके रील स्क्रोल करने से,ऐड देखने से कैसे कई लोग धनवान होते जा रहे है,और आप वही के वही है..।
कुछ लोगों का कहना है,जब हम रील या सोशल मीडिया देखते है तो हमें खुशी मिलती है..
आखिर ये कैसी खुशी है,जिसे देखना बंद करते ही आप फिर से उसी स्थिति में आ जाते है,जिस स्थिति में आपने देखना शुरू किया था..क्या ये सच नही है..??

आज हम उस दौर में जी रहें है..जिस दौड़ में जिंदगी की बागडौर हमारे हाथों में है ही नही..और आश्चर्य की बात ये है कि हमें पता ही नही है..।
जिन्हें पता चल गया है,वो नित नए कीर्तिमान रच रहे है..।
क्या ऐसा नही है..??
जरा आप सोचिए आप क्या पहनते है,क्या खाते है,क्या खरीदते है..यंहा तक कि क्या करते है..ये सब आप कंही-न-कंही दूसरों से प्रभावित होकर ही कर रहे है।

 और हमें प्रभावित कौन कर रहा है..??
जिसका हम सर्वाधिक उपभोग कर रहें है..।
ऐसा नही है कि ये समस्या आज ही उभरी है,ये पहले भी था,मगर पहले अधिकांश लोग थोड़ा सोचते थे,उसका हमारे जीवन मे क्या प्रभाव होगा नही होगा इस बारें में विचार करते थे..।

मगर आज हमारे विचार को नियत्रंण कर लिया गया है..हम खुद से कुछ विचार ही नही करते,किसी विषय वस्तु पर हमारा कोई विचार ही नही है,हम या तो उसके या फिर इसके विचार से प्रभावित है।।
और ऐसे ही लोग किसी चीज का उपयोग के बदले उपभोग करते है,और कइयों का उपभोग का साधन बन जाते है..।।

जरा सोचिएगा..
क्या आप किसी चीज का उपयोग करते है,या फिर उपभोग..??

गुरुवार, 30 जुलाई 2026

मुझे खुद को बदलना है..

मुझे खुद को बदलना है..
जब आइने में खुद को देखूं..
तो नजरें मिला सकूँ..
और मुस्कुरा सकूँ..।
मुझे खुद को बदलना है..
जब अपने अतीत में देखु..
तो वर्तमान पे गौरवान्वित महसूस कर सकूं..।
मुझे खुद को बदलना है..
जब भीड़ में किसी चाहने वालों से मिलूं..
तो उनसे नजरें फेरु नहीं,
बल्कि उनसे नजरें मिला सकूँ..
मुझ खुद को बदलने है..
जब आईने में खुद को देखूं..
तो नजरें मिला सकूँ..।


बुधवार, 29 जुलाई 2026

मैं..

मैं बहना चाहता हूं..
नदी की तरह..।
मैं उड़ना चाहता हूं..
बादल की तरह..।
मैं खिलना चाहता हूं..
सूर्य की रोशनी की तरह..।
मैं विलीन होना चाहता हूं..
शून्य की तरह..।
मैं,
मैं का भान खोना चाहता हूं..
इस प्रकृति की तरह..।

कंहा ढूंढू गुरु को..

कंहा ढूंढू गुरु को..
इस माया से ढकी अंधियारे में..
कभी इधर,तो कभी उधर..
यू ही भटक रहा हूँ मैं..।
कंहा ढूंढू मैं..
गुरु को..
मैं तो अभी उस योग्य भी नहीं..
की उन्हें ढूंढने का साहस करू..।
मुझमें अभी वो योग्यता भी नहीं..
की उनके थपकियों का चोट सह सकू..।
कंहा ढूंढू गुरु को..।
(जिस तरह कुम्हार मिट्टी के बर्तन को थपकी देकर आकार देता है,उसी तरह गुरु कुम्हार की तरह ही शिष्य को आकार देता है)

कंहा ढूंढू गुरु को..
जो व्यर्थ हो रहे जीवन को नई दिशा दे..
कंहा ढूंढू..
कहते है..
गुरु को ढूंढ नही सकते..
बल्कि गुरु स्वयं ही आपको ढूंढ लेते है..।

आखिर क्या करूँ..
की गुरु की कृपा हो..।
अपने अंदर की प्यास और जिजीविषा को जितना बढ़ा सकते है..
उतना बढ़ाये..
अपने कमियों से निजात पाए..
स्वयं को निश्छल और पवित्र बना ले..
गुरु का अंकुरण स्वयं ही होगा..।।

गुरु आपको देख रहे है..
आपका वाट जोह रहें है..
आज से नहीं,
सदियों से..
आप ही राह भटक चुके है..
आप आगे तो बढ़े..
गुरु स्वयं ही आपका हाथ थाम लेंगे..।।





मंगलवार, 28 जुलाई 2026

विरोध के लिए विरोध नही..

विरोध के लिए विरोध नही..
बल्कि अपने हक़ और सम्मान के लिए विरोध जरूरी है..
सिर्फ विरोध के लिए विरोध नही..
बल्कि समय की नजाकत को देखते हुए विरोध जरूरी है..।
विरोध के लिए विरोध नहीं..।
बल्कि अपने अधिकार के लिए विरोध जरूरी है।


एक बेचैनी है..

एक बेचैनी है..
एक छटपटाहट है..
जो हूँ..
उससे निजात पाने की..।

क्या करूँ,कैसे करू..
कुछ समझ नही आता..
मगर जो हूँ..
उससे निजात पाना है..।

क्योंकि अभी जो मैं हूँ..
उस लायक नही हूँ मैं..
मैं इससे और बेहतर होना चाहता हूं..
खुद को बदलना चाहता हूं..
और एक नए जिंदगी की शुरुआत करते है..।

एक बेचैनी है..
एक छटपटाहट है..
जो हूँ..
उससे निजात पाने की..।

थोड़ा नही,पूर्णतया निजात पाना चाहता हूं..।
और खुद को नए मुकाम पे ले जाना चाहता हूं..
और इस चाह को वास्तविकता में परिवर्तित करना चाहता हूं..।

आसान नही है,
स्वयं को बदलना..
मगर हरेक रोज स्वयं को 1%भी बदलना शुरू किया..
तो एक दिन स्वयं में बदलाव दिखना शुरू हो जाएगा..।

सबसे पहले अपने कमियों पे काम करते है..
अपने कमियों को पहचानते है..
और उसे दूर करते है..
ये आसान नही है..
मगर बिना इसे दूर किये हुए..
खुद को बदल नही सकते..।
क्योंकि आज जो मैं हूँ..
अपने कमियों और गलतियों के वजह से..
और कल जो मैं होऊंगा..
वो अपने कमियों और गलतियों को दूर करके ही..।

एक बेचैनी है..
एक छटपटाहट है..
जो हूँ..
उससे निजात पाने की..।

क्या करूँ,कैसे करू..
कुछ समझ नही आता..
मगर जो हूँ..
उससे निजात पाना है..।


गुरुवार, 23 जुलाई 2026

लड़ाई जारी है..

लड़ाई जारी था..

लड़ाई जारी है..

और लड़ाई जारी रहेगा..

​जब-जब सत्ताशीन अहंकारी और सत्ता के नशे में चूर होंगे..

तब-तब लोग सड़कों पे उतरेंगे..

और उनकी औकाद बतायेंगे..

​तुम जनता से हो, और

जनता के लिए हो..।

 


बुधवार, 22 जुलाई 2026

दूरियां..

मैंने तो बहुत कोशिस की तुम्हारे पास जाने को..
मगर तुम्हीं दूरियां बनाती गई..
मैं तब भी नजदीकियां बढ़ाता गया..
मगर तुमने इतनी दूरियां बना ली..
की अब तुम्हारे करीब आने का मन नही करता..।
क्योंकि तुम्हारा मन चाहता ही नही..
की मैं तुम्हारे करीब आऊ..।



कौन अच्छा,कौन बुरा..

मैं कैसे किसी में बुराइयां देखूं..
जब मुझमे ही ढेर सारी कमियां है..।
यंहा बुरा कौन..
और अच्छा कौन है..??
सब परिस्थितियों के मारे है..
जो आज बुरे है..
हो सकता है,
वो कल अच्छे हो जाये..।
और जो, आज अच्छे है,
हो सकता है,
वो कल बुरे हो जाये..।।



मंगलवार, 21 जुलाई 2026

मित्र..

मैं ऋणी हूँ तुम्हार मित्र..
और उऋण भी नही होना चाहता..।
क्योंकि अगर फिर जन्म हो..
तो तुम्हारा ऋण चुकाने के बहाने..
तुमसे अगले जन्म में भी,
फिर से मुलाकात हो..।
मैं ऋणी हूँ तुम्हारा मित्र..।



सोमवार, 20 जुलाई 2026

शतरंज..

मेरी जिंदगी में ♟️शतरंज♟️ की बहुत अहमियत है..
जब भी हताश और निराश होता हूँ..
तो ♟️शतरंज♟️ खेलता हूँ..।

जब जीतता हूँ..
तो कुछ नही सीखता..।
मगर जब हारता हूँ..
तो बहुत कुछ सीखता हूँ..।।

चलिये एक चाल चलते है..
और जिंदगी के हताशाओं और निराशाओं को,
पीछे छोड़ते है..।।



रविवार, 19 जुलाई 2026

कमियां

मुझमें भी अभी है..
ढेर सारी कमियां..
क्योंकि..
मुझे दूसरों में दिखती है कमियां..।
क्या करूँ..
कैसे दूर करू..
अपनी कमियां..।
शायद दूसरों की खूबियां स्वीकार कर..
और उनके कमियों को दरकिनार कर..।

और अपनी गलतियां स्वीकार कर,और उसे सुधार कर..।
शायद अपने गलतियों को दूर किया जा सकता है..।







मूवी : श्रीकांत..

72 वाँ राष्ट्रीय अवार्ड के लिए बेस्ट मूवी के लिए "श्रीकांत" मूवी को चुना गया..।




ये मूवी श्रीकांत बोल्ला के जीवन पर आधारित है,जो बचपन से ही अंधे थे..।

मगर उन्होंने जिंदगी में वो मुकाम हासिल किया जो भारत की 95% से ज्यादा आबादी उस मुकाम को हासिल नही कर सकते..।


- अभी भी साइंस स्ट्रीम लेकर कितने लोग पढ़ते है..

- भारत के कितने लोगों को MIT(विश्व की सबसे अग्रणी इंजीनियरिंग संस्थान) में पढ़ने का मौका मिलता हूं..।

- भारत के कितने लोग सफल एंटरप्रेन्योर(उद्यमी) बनते है..।


उन्होंने वो सब हासिल किया जो वो पाना चाहते थे..उसके लिए उन्होंने मेहनत किया..और उन्हें अच्छे लोगों का साथ मिलता रहा..।


हममें से अक्सरहाँ लोग कुछ करना तो चाहते है..मगर करते नही..अगर करते है,तो उसे मुकाम तक नही पहुंचा पाते..।।


इसी फ़िल्म में A.P.J अब्दुल कलाम सर् की एक लाइन है..

"अच्छा करो,अच्छे लोग खुद-व-खुद मिलते रहेंगे.."।


इस फ़िल्म के बारे में कहें तो फ़िल्म का मुख्य पात्र अपने परिस्थितियों का रोना कभी नही रोता..शायद इसिलिय वो सफल हुए..

मगर हम आप अपने परिस्थितियों का अक्सरहाँ रोना रोते है..मगर उस परिस्थितियों का समाधान नही ढूंढते..।


एक बार ये मूवी अवश्य देखें..

क्योंकि ये मूवी एक समय पे खुद से रु-ब-रु करवाती है..हमारे आपके दोनों पहलुओं को दिखाता है..।


"सफल वही होते है,जो सफल होना चाहते है.."

शनिवार, 18 जुलाई 2026

आप अपनी ऊर्जा कंहा खर्च करते है..।

आपने कभी गौर किया है..
आप अपनी ऊर्जा कंहा खर्च करते है..??
जंहा खर्च करते है..
वंहा से आपको क्या मिलता है..?



थोड़ा रुकिए,और जरा सोचिए..
सोचिए नहीं, मनन कीजिये..
आप अपनी ऊर्जा कंहा खर्च करते है..
जंहा खर्च करते है..
वंहा से आपको क्या मिलता है..
अगर कुछ मिलता है..
तो वो आपके जिंदगी में क्या बदलाव ला रहा है..
क्या वो ऊर्जा आपके जिंदगी को नया आयाम दे रहा है..?
या फिर आपको धरातल में ही ले जा रहा है..?
जरा सोचिए..।


समय ऊर्जा है..
और ऊर्जा जिंदगी है..।
आप अपना समय जैसे इस्तेमाल करेंगे..
जिंदगी वैसी ही होगी..।

नी..