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गुरुवार, 19 मार्च 2026

माँ शैलपुत्री: स्थिरता, संकल्प और मूलाधार का विज्ञान

आज से चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो रहा है। यह केवल व्रत और उपवास का समय नहीं है, बल्कि अपनी चेतना को ऊपर उठाने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। नवरात्रि के पहले दिन हम माँ शैलपुत्री की आराधना करते हैं। आइए जानते हैं, इस स्वरूप के पीछे छिपे गहरे आध्यात्मिक और योगिक रहस्यों को।



​★ 'शैल' का अर्थ: अडिग हिमालय जैसी स्थिरता

​'शैल' का अर्थ है पत्थर या पर्वत। हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा गया। जीवन में किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए (चाहे वह आध्यात्मिक हो या सांसारिक), सबसे पहली आवश्यकता है 'स्थिरता'। माँ शैलपुत्री हमें सिखाती हैं कि विपरीत परिस्थितियों में भी हिमालय की तरह अडिग कैसे रहें।

★ योग विज्ञान और मूलाधार चक्र

​योग शास्त्र के अनुसार, माँ शैलपुत्री मूलाधार चक्र (Root Chakra) की अधिष्ठात्री देवी हैं।

  • तत्व: पृथ्वी (Earth Element)
  • बीज मंत्र: 'लं' (LAM) हमारी ऊर्जा का स्रोत यहीं स्थित है। जब हम माँ की पूजा करते हैं, तो वास्तव में हम अपनी सुप्त ऊर्जा (कुंडलिनी) को जागृत करने की पहली सीढ़ी पर कदम रखते हैं। बिना आधार (Root) को मजबूत किए, ऊँचाइयों को नहीं छुआ जा सकता।

​★  स्वरूप का रहस्य: वृषभ और त्रिशूल

  • वृषभ (बैल): यह 'धर्म' और 'परिश्रम' का प्रतीक है। देवी का इस पर सवार होना दर्शाता है कि शक्ति हमेशा धर्म के नियंत्रण में होनी चाहिए।
  • त्रिशूल और कमल: एक हाथ में त्रिशूल (अनुशासन और कष्टों का नाश) और दूसरे में कमल (करुणा और मानसिक शांति)। यह एक पूर्ण व्यक्तित्व का संतुलन है—बाहर से कठोर और भीतर से कोमल

वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम।

वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम॥

इस नवरात्रि, जब आप दीप जलाएं, तो संकल्प लें कि आप अपने भीतर की 'शैलपुत्री' यानी अपनी इच्छाशक्ति (Will Power) को जाग्रत करेंगे। 

आप इस नवरात्रि अपने भीतर कौन सा सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं..???

आप सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ!

मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026

शिव कौन है..??

जाबालि उपनिषद सामवेद से संबंधित एक लघु उपनिषद है। इस उपनिषद में महर्षि जाबालि और ऋषि पैप्पलाद के बीच संवाद के माध्यम से शिव के बारे में बताया गया है।


ऋषि पैप्पलाद ने जाबालि से पूछा शिव कौन है तो जाबालि कहते है-

सहोवाच जाबालिः- 

"पशुपतिं सवज्ञं जगदुदयस्थितिभङ्गहेतुं सर्वेश्वरं महादेवं ज्ञात्वा मृत्युमुत्तीर्यते॥

 जाबालि कहते है - शिव समस्त पशुओं (जीवों) के स्वामी है, वो सर्वज्ञ, जगत की उत्पत्ति, स्थिति और विनाश का  कारण है, सर्वेश्वर 'महादेव' को जानकर ही मनुष्य मृत्यु को पार कर सकता हूं। 

शिव केवल देवता नहीं, बल्कि ब्रह्मांड का आधार है।




शिव कौन है - शिव पशुपति है..

"​अहंकारमयाः जीवाः पशवः परिकीर्तिताः।

तेषां पतित्वाद्देवेशः पशुपतिरित्युच्यते॥"

अहंकार से युक्त जितने भी जीव हैं, वे 'पशु' कहलाते हैं। उन सभी जीवों के स्वामी (पति) होने के कारण महादेव को 'पशुपति' कहा जाता है।



​★शिव कौन है- शिव  'भस्मधारी' है।

अग्निरेवेति भस्म। वायुरिति भस्म। जलमिति भस्म। स्थलमिति भस्म। व्योमेति भस्म। सर्वं ह वा इदं भस्म॥

अग्नि भस्म है, वायु भस्म है, जल भस्म है, पृथ्वी भस्म है और आकाश भस्म है।संपूर्ण दृश्यमान जगत भस्म का ही विस्तार है।

 

◆प्रलय के पश्चात जो शेष बचता है,वही शिव है..


शिव ही शिव है..

शिव के सिवा कुछ और नही है..

शिव ही शिव है..

शिव..शिव..शिव..

Yoga for digestive system