शुक्रवार, 25 सितंबर 2026

मुझे कुछ होना है..

मुझे कुछ होना है,
जिसका हूँ उसका होना है..
कैसे होऊं कुछ पता नही..
बस बेबस होकर उनके और देख रहा हूँ..
कंही कुछ चमत्कार हो जाये..
और उनसे साक्षात्कार हो जाये..।
मुझे कुछ होना है,
जिसका हूँ उसका होना है..

बुधवार, 23 सितंबर 2026

खुद को बदलिए..

आईने बदलने से चेहरे थोड़े ही बदलते है..
वक़्त बदलने से व्यक्तित्व थोड़े ही बदलता है..।

हां,खुद को बदलने से..
चेहरा और व्यक्तित्व दोनों ही बदलता है..।
चाहे आईना कितना छोटा हो..
या फिर वक़्त ही कितना बुरा क्यों न हो..
व्यक्तित्व हमेशा बड़ा दिखता है..।

उस आईने को तोड़ दीजिए..और
उस वक़्त को छोड़ दीजिए..
जो आपको आगे नही बढ़ने दे रहा..
उसे रौंद दीजिए..।
कबतक आखिर कबतक..
जूझते रहेंगे..
अपने नाकामियों से..
इस नाकामियों के बेड़ियों को तोड़कर
आगे निकल जाइये..।
आपका स्वर्णिम पल आपका इंतजार कर रहा है..।

मंगलवार, 22 सितंबर 2026

दोस्तजी..

दोस्त की अहमियत क्या होती है..
ये तब पता चलता है..
जब दोस्त से दूरियां बढ़ जाती है..।
और अचानक फिर से जब...
दोस्त से करीबियां बढ़ती है..
तब दोस्त की अहमियत का अहसास होता है..।

दोस्त वो अहसास है..
जिसे बयां नहीं किया जा सकता..।

वो जेठ की गर्मी है..
तो चैत्य का फुहार है..
वो पूस का ठिठुरन है..
तो फागुन का बहार है..।
इनके बिना..
जीवन कंहा आसान है..।।



शुक्रवार, 18 सितंबर 2026

कुछ होने का मन करता है..
जिसका हूँ..
उसका होने का मन करता हूँ..
मगर कैसे होऊं..
इसका कोई पता नहीं चलता है..।
क्या-क्या जतन करुँ कि..
उसमें ही पतन हो जाऊं..

बुधवार, 16 सितंबर 2026

उम्मीद..

हम कभी इतना देर नहीं होते कि..
हम अपने मंजिल पर पहुंच ही न सकें..
हमारे पास हमेशा इतना समय होता है कि..
हम अपने मंजिल पर पहुंच सकें..।

जिस समय आप..
अपने मंजिल के बारे में..
सोचना बंद कर देते है..
उस समय आप..
अपने मंजिल से बहुत दूर हो जाते है..।

हमेशा अपने मंज़िल के बारे में सोचते रहें..
क्या पता कब..
आपको अपनी मंज़िल दिख जाए..
और आप वंहा पहुंच जाए..।।

उम्मीद बनाये रखिये..
क्योंकि ये उम्मीद ही ने तो..
दुनिया को बदला है..
आप भी खुद को बदलकर..
अपने मंजिल तक जरूर पहुंच सकते है..।।



रविवार, 13 सितंबर 2026

हमें लगता है..

हमें लगता है..
हम अच्छे है..।
ये अच्छा लगना ही..
सबसे बुरा है..।
जब-जब आपको..
अच्छे होने का भान हो..
तो समझ लीजिए..
आपमें अभी भी..
ढेर सारी कमियां है..।।

दूसरों में कमियां देखना..
आसान है..
और खुद की कमियां..
दूर करना दूभर है..।
जबतक आपमें..
कमियां रहेगी..
तबतक आपको, 
दूसरों में कमियां दिखती रहेगी..।




शुक्रवार, 11 सितंबर 2026

जरा सोचिएगा..आपके हाथ मे कौन सा कलम है..

•भारत आज विश्व की 5वी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में से एक है..
•क्रय शक्ति(purchasing power) के अनुसार तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है..
•GDP ग्रोथ के अनुसार सबसे तेज ग्रोथ करनेवालों देशों में सबसे ऊपर है..।
•जनसंख्या में विश्व मे पहले पायदान पर है..।
•सैन्य शक्ति में विश्व मे चौथा स्थान है..।
•मैन्युफैक्चरिंग में विश्व मे पांचवा स्थान है..(~विश्व का 3%)
•वैश्विक निर्यात में (गुड्स और सर्विस) WTO के अनुसार ~12-14वाँ स्थान..
•वैश्विक आयात में(गुड्स और सर्विस) WTO के अनुसार ~8-10वॉ स्थान..
•नवीनकरणीय ऊर्जा में विश्व मे 3रा स्थान..

ये सब सुनकर पढ़कर गौरवान्वित महसूस करते है हम..।
मगर..
क्या आपको पता है..??
आप जिस पेन से लिखते है..
या लिख रहे है..
क्या वो "मेड इन इंडिया" है..?


हमारा इस और कभी ध्यान ही नही जाता है..
मेरा भी नही जाता..
मगर अचानक लिखते वक्त मेरा ध्यान पेन के ढक्कन पर गया जिसपर जापान लिखा था..।
शायद इस पेन ने इसलिए लिखने की दुःसाहस की,क्योंकि ये महंगी थी..।
मगर बाजार में जितने भी लोकप्रिय पेन है,जिसका आप नाम जानते है..
वो अपने देश का नाम नहीं लिखते..
शायद इसलिए की कंही हमें तकलीफ न हो..
कि विश्व के 5वी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश आज भी दूसरे देशों का बनाये हुए पेन का इस्तेमाल करता है..।।

क्या आपको पता है..??
भारत मे राइटिंग इंस्ट्रूमेंट का बाजार ~4500-5500 करोड़ का है (600-700 मिलियन $) जोकि संगठित मार्केट का वैल्यू है,अगर असंगठित(बिना ब्रांड) को जोड़ेंगे तो ये वैल्यू इससे भी बड़ा है..।।

आपको जानकर हैरानी होगी कि.. ~40-45% हिस्सेदारी प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से विदेशी कंपनियों का है..।

आपको ये जानकर और हैरानी होगी..कि ~25% पूरे मार्केट में हिस्सेदारी रखने वाला cello भारतीय कंपनी नहीं है..है न थोड़ा अजीब क्या cello भारतीय कंपनी नही है..?? हां अब नही है..2015 में फ्रांस की कंपनी(societe BIC) ने इसका अधिग्रहण कर लिया..।

चलिये एक और झटका देता हूँ..
जब भी एक स्लिम पतली पेन का नाम लिया जाएगा तो सबसे पहले Reynolds का नाम आएगा..
क्या आपको पता है..??
ये पेन कंहा की है..?
ये पेन अमेरिकन है..।
एक और नाम है..
जिसका नाम अक्सरहाँ हम गौरवान्वित होकर लेते है..
"Parker" ये भी अमेरिकन पेन ही है..
दोनो पेन "newell Brands(USA)" के द्वारा ही बनाया जाता है।।

भारत मे 100₹ से ऊपर बिकने वाली 90% कलम भारतीय नही है..उसपर विदेशी कंपनी का एकाधिकार है..।

आपका इनमें से फेवरेट पेन कौन सा है..??
Reynolds, Pilot,Cello, Schneider, Uni-ball, Parker, Montblanc, Lamy,  Cross, sheaffer..



क्या इनमें से कोई फेवरेट पेन है आपका..??
अगर हां..
तो आप देशभक्त नही है..😊क्योंकि ये सभी पेन विदेशी है..।।

तो फिर सवाल उठता है कि मेड इन इंडिया पेन कौन सा है..??
तो है कुछ लोकप्रिय कलम जो 100% मेड इन इंडिया है..
Linc , Flair, GM pens(Rorito)..
आपका इनमें से कौन सा फेवरेट है..??

अगली बार जब लिखियेगा तो सोचिएगा..
क्या आपके हाथ मे जो पेन है,क्या वो इंडियन है..।।






मेरी बागडोर अब तुम्हीं संभालो

मेरी बागडोर अब तुम्हीं संभालो..
पहले भी मेरी बागडोर तुम्हारे ही हाथ में था..
मगर मैं नासमझ,समझ न पाया..
तुम्हारे इस रहस्य को जान न पाया..
यू ही जस्तज़ु करता रहा..
मगर क्या हासिल हुआ..।
आज वो देखा जिसे देख के सब समझ गया..
मेरी बागडोर पहले भी तुम्हारे हाथ मे था..
अब भी तुम्हारे ही हाथ मे है..
मगर मेरी ना समझी के कारण..
आपने बागडोर ढीला छोड़ दिया..
और में यू ही..भटकता रहा,और भटक रहा हूँ..
अब मेरी बागडोर कस के पकड़ो..
जिस तरह अर्जुन का बागडोर संभाले थे..
अब मेरा भी बागडोर संभालो..।
इतना सामर्थ्य दो..
की पूर्ण समर्पण कर पाऊं..
आप में और खुद का भेद मिटा पाऊं..।
मेरी बागडोर अब तुम्हीं संभालो..।


रविवार, 6 सितंबर 2026

काबिल बनने का मन करता है..

यार काबिल बनने का मन करता है..
इतना काबिल कि..
आईने में खुद को देख के..
गौरवान्वित महसूस कर सकूँ..।


लियोनल मेसी..

खुद से पूछें क्या आज मैं कल से थोड़ा बेहतर हूं? जवाब अगर हां है, तो आप सही राह पर हैं..

​"जिंदगी हो या खेल, इंसान कभी पूरी तरह मुकम्मल नहीं होता। हर दिन आप कुछ नया सीखते हैं, कुछ नया खोजते हैं।"


 

​मैंने फुटबॉल खेलना शुरू किया क्योंकि मुझे उससे मोहब्बत है। उस वक्त मुझे नहीं पता था कि एक दिन दुनिया मुझे देखेगी, मेरे नाम की मिसाल दी जाएगी या मैं विश्व कप जीतूंगा। मैं बस गेंद के पीछे भागता था। मेरे लिए फुटबॉल कोई नौकरी या शोहरत नहीं थी, वह मेरा शौक था, मेरी खुशी थी...। 

मैं बहुत छोटा था, शायद तीन-चार साल का, जब गेंद मेरे लिए दुनिया बन गई। मैं हर वक्त किसी ऐसे इंसान को तलाशता था, जिसके साथ फुटबॉल खेल सकूं। मुझे जीत-हार की ज्यादा फिक्र नहीं थी,मुझे बस खेलना था। घंटों तक गेंद को किक मारना, उसे अपने पैरों के करीब रखना और उसके साथ दौड़ना... यही मेरी दुनिया थी।

​लोग कहते थे मैं बाकी बच्चों से अलग हूं। लोग मुझे देखने आते थे। बचपन में इसका एहसास नहीं था। मुझे कहां मालूम था कि मेरे अंदर ऐसा कुछ है, जो मुझे दूसरों से अलग बनाता है..? यह समझ धीरे-धीरे आई...।

​हर मुकाबला हमें कुछ न कुछ जरूर सिखाता है

​हार हमें रोकने के लिए नहीं बल्कि, हमें खुद को समझने और निखारने का मौका देने के लिए आती है...।हर हार के बाद निराश होना स्वाभाविक है, लेकिन उसी मायूसी से बाहर निकलकर आगे बढ़ना ही असली हिम्मत है। जिंदगी में हर मुकाबला कुछ न कुछ जरूर सिखाता है..।

​आज पीछे मुड़कर देखता हूं तो लगता है मैं जिस तरह पैदा हुआ, वह मेरे लिए ऊपर वाले का तोहफा था। मैंने यह हुनर खुद नहीं बनाया था..यह मिला था। लेकिन सिर्फ हुनर मिलना काफी नहीं होता। असली इम्तिहान यह है कि आप उस तोहफे का क्या करते हैं..।

​मैंने हमेशा कोशिश की कि जो मिला है, उसका पूरा फायदा उठाऊं..। हर दिन खुद को थोड़ा बेहतर बनाने की कोशिश करता हूँ..।

क्योंकि जिंदगी हो या खेल, इंसान कभी पूरी तरह मुकम्मल नहीं होता..हर दिन आप कुछ नया सीखते हैं। हर दिन अपने अंदर कुछ नया खोजते हैं..। मेरे खेल में भी कई चीजें ऐसी हुईं, जिन्हें मैंने पहले से तय नहीं किया था। कई बार मैदान पर बस एक पल आता है और शरीर खुद फैसला कर लेता है। सामने डिफेंडर होते हैं, रास्ता बंद होता है, लेकिन मैं आगे बढ़ता हूं। एक कदम, फिर दूसरा... और अचानक रास्ता निकलता है। शायद यही मेरा खेल है, गेंद को अपने पैरों के करीब रखना और उस पल पर भरोसा करना।

​भरोसे के सहारे मैंने अपना सफर जारी रखा है। मैंने बहुत छोटी उम्र में घर छोड़ा। मैं अर्जेंटीना के रोसारियो से बार्सिलोना आया। यह आसान नहीं था। मैं एक बच्चा था। पीछे मेरा घर था, मेरा शहर था, मेरे अपने लोग थे। सामने एक नई जगह थी, नई जिंदगी थी और बहुत सारी अनजान चीजें... लेकिन खुद पर भरोसा था।

​मुझे हुनर मिला, तो मैंने उसे तराशने की कोशिश की। मुझे मौके मिले, तो मैंने उन्हें गंवाने नहीं दिया। मुश्किलें आईं, उन्हें अपनी राह का हिस्सा माना। 

आप भी किसी सपने के पीछे भाग रहे हैं, तो खुद से एक सवाल पूछें कि...क्या मैं कल से थोड़ा बेहतर हूं..? अगर जवाब हां है, तो आप सही रास्ते पर हैं.. कामयाबी एक दिन में नहीं मिलती.. ये छोटे-छोटे कदमों से मिलती है।

ये लियोनल मेसी के कई इंटरव्यू का सार है(स्रोत- दैनिक भास्कर)..इन्होंने हाल ही में 31 अगस्त को सोशल मीडिया के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय मैच से संन्यास की घोषणा की..



वो असाधारण थे,क्योंकि वो साधारण थे..चाहे खेल का मैदान हो या फिर खेल के मैदान के बाहर उनका बर्ताव हमेशा सौम्य और शांत रहता..वो कभी किसी को अहसाह नही होने देते की वो इस युग के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों में से एक है..बल्कि वो ये अहसास करवाते है कि वो हममें से एक है..।यही खासियत उन्हें औरों से अलग बनाता है..।



शनिवार, 5 सितंबर 2026

शिक्षक कौन है..

शिक्षक संस्कृत की 'शिक्ष' धातु से बना है जिसका अर्थ होता है,सीखना।
जब 'शिक्ष' धातु में 'क'(प्रत्यय) जुड़ जाता है तब शिक्षक बन जाता है,जिसका अर्थ होता है जो हमें सिखाता है..या किसी चीज का बोध कराता है..वो है शिक्षक..।

हमारे जीवन में कई शिक्षक आते है..और सबका हमारे जीवन मे अमूल्य योगदान होता है..।
चलिये आज उन शिक्षकों को जानते है..
जिन्हें हम शिक्षक के रूप में देखते ही नहीं..।


• माता-पिता - ये हमारे पहले शिक्षक होते है..जो जिंदगी का नींव रखते है..
 यही हमारे अंदर संस्कार का बीज बोते है..।
• दादा-दादी/नाना-नानी - ये हमारे दूसरे शिक्षक होते है,जो हमारे अंदर किस्से कहानियों के माध्यम से हमारे अंदर नैतिकता का बीजारोपण करते है..
मगर अफसोस आज आनेवाली पीढ़ी इनके शिक्षा से वंचित होते जा रहे है..।

• बड़े भाई-बहन - ये हमारे तीसरे शिक्षक होते है,जो हमें बाहरी दुनिया से अवगत कराते है,क्या सही है,क्या गलत है ये अवगत कराते रहते है..मगर न जाने बड़े होने के बाद क्या हो जाता है..इनके बीच में खाईयां बढ़ जाती है..।

• शिक्षक - इनका हमारे जीवन में अहम योगदान है..अगर ये न होते तो हम इंसान नही हो पाते..ये वो कलाकार होते है जो मूर्त को अमूर्त बनाते है..।

• मित्र - ये वो शिक्षक है..जिनके पास पूरे ब्रह्मांड का ज्ञान है,इनके पास हरेक समस्या का समाधान है..अगर आपके पास इस तरह के एक भी शिक्षक नहीं है तो आपका जीवन नीरस और व्यर्थ है,..।

• पति/पत्नी - ये वो शिक्षक है..जो आपको फर्श से अर्श पर ले जा सकती/ता है,या फिर अर्श से फर्श पे ला देगी/गा..ये वो शिक्षक है..जो कोई नहीं कर सकता वो,ये हमारे जिंदगी के साथ कर देते है..।ये आपके व्यक्तित्व को विस्तारित या फिर संकुचित कर देते है..।

• पुस्तक :- एक अच्छी पुस्तक आपके जिंदगी में आमूलचूल परिवर्तन ला सकता है,कई ऐसे पुस्तक है जो अभी..।

•मेंटर/कोच :- ये जिंदगी को सही दिशा देते है..ये हमारे खामियां को दूर करते है..कभी-कभी ये उत्प्रेरक का काम करते है..और जिंदगी को नई ऊंचाइयों पे ले जाने का काम करते है..।

• गुरु - इनका स्थान सबसे ऊपर है..क्योंकि ये हमें हमसे ज्यादा जानते है..ये हमारे अंदर छुपे हुए उन पहलुओं से अवगत कराते है..जिससे हम ताउम्र अनभिज्ञ रहते है..।जब हम हताश और निराश होते है तब ये ही जिंदगी में प्रकाश बिखेरते है..।मगर गुरु को ढूंढना बहुत मुश्किल है..अपने आप को जबतक योग्य नहीं बनायेगें तबतक गुरु की कृपा नहीं हो पायेगा..।

वैसे शिक्षक कोई भी हो सकता है..क्योंकि शिक्षक का तात्पर्य ही है..जो हमें सिखाये, वही शिक्षक है..।


शुक्रवार, 4 सितंबर 2026

दादी माँ और कृष्ण जन्माष्टमी..

कुछ लोग जिंदगी से तो चले जाते है..
मगर वो कई यादें छोड़ जाते है..।

ये पहली जन्माष्टमी होगा जो बिना दादी माँ के मनाऊंगा..
जब से होश संभाला हूँ..तबसे किसी-न-किसी तरह दादी माँ के साथ कृष्णजन्माष्टमी को मनाया ही है..।।


कुछ यादें जो कृष्णजन्माष्टमी से जुड़ी है..
मैं,दादी माँ,अमरूद का पेड़ और कृष्णजन्माष्टमी..
का एक अलग ही संबंध था..
आज न अमरूद का पेड़ है,और न ही दादी माँ रही..मगर जेहन में दोनों ही है..।


कंहा से शुरू करू.. वंही से शुरू करता हूँ जंहा से,मैं पेड़ पे चढ़ने के काबिल हो गया था..।
मेरे बड़े चाचा के आंगन में दो अमरूद के पेड़ थे..एक बहुत बड़ा था इतना बड़ा की पक्के अमरूद गिर के इतने नीचे गिरे रहते थे कि आप ये नही पता कर पाएंगे कि अभी पेड़ से कौन सा गिरा है..।

अमरूद इतने होते थे कि दादी माँ ने बेचना शुरू कर दिया 1₹ के चार अमरूद..पहले मेरी बड़ी बहन पेड़ पे चढ़ के तोड़ा करती थी..उसके कुछ सालों बाद मैंने चढ़ना शुरू किया..मैंने अपने दीदी को ही पेड़ पे चढ़ते हुए देख के चढ़ना सीखा है..।
सावन से ही अमरूद बिकना शुरू हो जाता था..घर के बगल में स्कूल था तो कई स्कूल के बच्चे भी अमरूद लेने आते थे..।जितना अमरूद बिकता उसका सारा पैसा दादी माँ के पास जमा होता था..हां उसमें से कभी-कभी 1-2₹ मिल जाया करता था कुछ खाने के लिए..हमलोग भी इतना ईमानदार थे कि दादी माँ के अनुपस्थिति में भी अमरूद बेचने पर वो पैसा दादी माँ को ही बाद में दिया करते थे..।

सावन खत्म होते ही भादो आता और भादो आते ही कृष्ण जन्माष्टमी आता, कृष्ण जन्माष्टमी से एक दिन पहले सारा पैसा गिना जाता और उसके बाद उन पैसों को सारे सदस्यों में बांटा जाता था..दरसल ये बंटवारा कार्य के हिसाब से नही बल्कि उम्र के हिसाब से होता था..किसी वर्ष 25₹ तो किसी वर्ष 30₹ भी मिलता था,जितना अमरूद बिकता था उसी हिसाब से, हमसबको कुछ न कुछ मिलता..।
और जो पैसा बच जाता, उस पैसा का दादी माँ घर के लिए कोई-न-कोई सामना ले लेती थी..कभी-कभी छठ का सूप भी इस पैसा से खरीदा जाता था..।
मगर हमलोगों को जितना पैसा मिलता वो मेला घूमने के लिए काफी था..।
ये सिलसिला तबतक चलता रहा जबतक में पढ़ने के लिए दरभंगा न आ गया..क्योंकि उसके बाद कोई अमरूद तोड़ने वाला था ही नही..।
मगर दादी माँ तब भी हरेक कृष्ण जन्माष्टमी को हमें कुछ न कुछ पैसा देती ही थी..क्योंकि बाबा को पेंशन जो मिलता था..30-40₹ दादी माँ दे ही देती थी..।
फिर जब मैने दरभंगा छोड़ दिया तो दादी माँ हरेक कृष्णजन्माष्टमी को फोन जरूर करती और खोज खबर लेती यंहा के माहौल के बारे में पूछती..।

मगर इस साल उनका कॉल नही आएगा..
क्योंकि वो पिछले साल ही छोड़ के चली गई..।

लोग चले तो जाते है..
मगर कई यादें छोड़ जाते है..
कुछ लोग उन यादों के सहारे उन्हें जिंदा रखते है..
तो कुछ लोग उन यादों को भूल कर उन्हें भूल जाते है..।


अपने बच्चों को कृष्ण के चरित्र से अवगत कराए..

अपने बच्चों को सिर्फ राधा कृष्ण के रूप में न सजाए..
बल्कि उन्हें राधा कृष्ण के चरित्र से भी अवगत कराएं..
वैसे पहले आप स्वयं अवगत हो जाये..।
क्योंकि आप स्वयं उनके चरित्र से अवगत नहीं है..
क्योंकि अगर आप उनके चरित्र से अवगत होते..
तो शायद आप कभी नही चाहते कि..
आपके बच्चों के ऊपर कृष्ण और राधा की परछाइयां भी पड़े..।




चलिये कुछ सवाल का जबाब दीजिए..

•क्या आप चाहते कि बच्चे को जन्म देते ही उसे आपसे अलग कर दिया जाय..(कारगाह में जन्म के बाद माँ से अलग होना)

•क्या आपके पास इतनी हिम्मत है कि जिस बच्चे को आपने बचपन से पाला-पोसा उसे ~11 साल के उम्र में मौत के मुँह में भेजे..।
(कंस के बुलावे पे वृंदावन छोड़कर मथुरा जाना..)

•क्या आप चाहते कि आपके संतान को सबकुछ छोड़ करके एक जगह से दूसरे जगह जाना पड़े..(जरासंध के बार-बार आक्रमण करने के कारण मथुरा छोड़कर द्वारिका जाना)

•क्या आप चाहते कि आपके संतान को उस चीज के लिए दोषी ठहराया जाय जो गलती उसने किया ही नही है..।(युद्ध समाप्ति के बाद गांधारी द्वारा युद्ध का दोषी ठहराना)

जरा सोचिए..
क्या आप अब भी चाहते है के आपके बच्चों के जिंदगी में इस तरह की कठिनाई आये..एक माँ होने के नाते आप कभी नही चाहेंगे..
मगर कृष्ण को श्रीकृष्ण इन्हीं कठिनाइयों ने बनाया..
उन्होंने हरेक चुनौतियों को स्वीकार किया और उनका सामना किया..
उन्होंने किसी के ऊपर दोसरोपन नही किया..न ही चुनौतियों से भागने का कोशिस किया..इसिलिय वो कृष्ण से श्रीकृष्ण बन पाए..।।

अपने बच्चों को कृष्ण के व्यक्तित्व से अवगत कराएं..
उन्हें चुनौतियों से सामना करना सिखाया..
न कि उसे गोल-मटोल गोपाल बनाकर उत्सव मनाए..।
इस जन्माष्टमी अपने बच्चों में कृष्ण के व्यक्तित्व का बीज बोए..
जो उन्हें आने वाले परिस्थितियों से सामना करने में मदद करें..।

मंगलवार, 1 सितंबर 2026

जिंदगी एक दौड़ है..

मैं जिंदगी के रेस में बहुत पीछे रह गया..
इसका मुझे मलाल नहीं..
कि मैं पीछे रह गया..
क्योंकि मुझे पता है..
जिंदगी में एक मोड़ तो आएगी..
जो मुझे फिर से बहुत आगे ले जाएगी..।

जिंदगी एक रेस नहीं..
जिंदगी एक दौड़ है..
रेस तो वक़्त-वे-वक़्त खत्म हो जाती है..
मगर दौड़ कभी खत्म नही होती..।



हौंसला रखिये..
चेहरे पे मुस्कान रखिये..
और खुद पे विश्वास रखिये..
तब देखिए..
भले ही आज आप रेंग रहे है,चल रहें है,या फिर दौड़ रहे है..
यही निरंतरता..
आपका एक दिन अपना दौड़ लाएगा..।

विश्वास रखिये..
क्योंकि आप जानते है..
अपने काबिलियत को पहचानते है..
गिर के फिर से उठ खड़ा होना जानते है..।।


रविवार, 30 अगस्त 2026

सबकुछ बदल रहा है..

लोग बदलते है..
जनाब लोग ही नही..
सबकुछ बदलता है..
जिससे आपको लगाव होता है..
उसके बदलाव का अहसास होता है..
जिससे लगाव नही होता है..
उसके बदलाव का अहसास नहीं होता है..।।

आपने खुद को सीमित ही इतना कर लिया है कि..
आपको सिर्फ कुछ लोगों का बदलने का अहसास होता है..
खुद को इतना विस्तारित करें..कि
हर क्षण ब्रह्मांड में हो रहे बदलाव का अहसास कर सकें...।
छोड़िए हटाइये खुद को इतना विस्तारित मत कीजिये..
खुद को इतना संकुचित कीजिये कि
अपने हृदय गति और सांसों में हो रहे बदलाव का अहसास हो सके..।

ये कैसे होगा..?
ये कैसे होगा नहीं,ये हर क्षण हो रहा है..
बस अपने आपको स्थिर करके देखना है..।।
खुद के अंदर सांसों के सहारे गोता लगाइए..
और सांसों के सहारे बाहर आइए..
तबतक गोता लगाते रहिये जबतक वो मिल न जाये...
जिसकी आपको तलाश है..।




शनिवार, 29 अगस्त 2026

इच्छाएं

मेरी कोई इच्छाएं नहीं है..
सारी इच्छायें जैसे मर चुकी है..
या फिर ये सब चीज तुच्छ लगने लगी है..
जब अपने अतीत में झांकता हुए बहुत पीछे जाता हूँ..
तब अहसास होता है कि मेरी कोई इच्छायें क्यों नही है..।
मैंने अपने अतीत में वो सब चीज का उपभोग किया है..
जो विश्व की 0.10% लोग ही उपभोग कर पाते है..
बड़ी मुश्किल से छुटकारा पाया..
मगर अभी भी एक चीज से छुटकारा नही पा रहा हूँ..
शायद इस जन्म उससे भी छुटकारा पा लूंगा..
और उस उच्चतम स्तर को छू पाऊंगा..
या फिर उसमें विलीन हो पाऊंगा..।
फिलहाल तो कोई आसार नही दिख रहें..
मगर बदलाव शुरू हो चुके है..😊

गुरुवार, 27 अगस्त 2026

कभी-कभी..

कभी-कभी मुझे भी हताश और निराश होने का मन करता है..
मगर मालूम नहीं क्यों..
अगर मैं, हताश और निराश होता भी हूँ तो..
पानी के बुलबुले के समान क्षणभंगुर..
और फिर..
निर्लज आसमान की तरह मुस्कुराने😊 लगता हूँ..।
शायद हमारी नियति ही मुस्कुराना है..
हम ही मुस्कुराना भूल जाते है..।
अपने आसपास देखिए..
हरेक पेड़-पौधे और जीव-जंतु को..
सब मुस्कुरा रहें है..
अगर नही मुस्कुरा रहें है तो..
मुस्कुराने की कोशिस कर रहें है..।
और हम क्या कर रहें है..?


मंगलवार, 25 अगस्त 2026

मैं क्यों ढूंढता हु उन्हें..

मैं क्यों ढूंढता हूँ उन्हें..
जिन्हें मेरी फिक्र ही नही..।
क्यों ना मैं खुद को ढूंढू..
इतना ढूंढू..
कि दुनिया फिर मुझे ढूंढें..।
मैं क्यों ढूंढता हूँ उन्हें..
जिन्हें मेरी फिक्र ही नही..।



शुक्रवार, 21 अगस्त 2026

जिंदगी..

जिंदगी व्यर्थ मालूम होती है..
क्या होना चाहता था,
और क्या हो गया मैं..
कंहा जाना चाहता था..
और कंहा आ गया मैं..।
क्या अब भी कोई उम्मीद बची हुई है..
तो हां,अभी भी बहुत उम्मीद बची हुई है..
आपके पास अभी भी उतना समय है कि..
आप जो होना चाहते थे वो हो सकते है..
तो उदास मत होइए..
और जो हो सकता है..
वो सब कुछ कीजिये..
चाहे जैसे भी हो..
अपने लक्ष्य को हासिल कीजिये..।।


गुरुवार, 20 अगस्त 2026

बप्पा..

मैं अक्सरहाँ भूल जाता हूँ आपको..
मगर आप ही हो,कि अक्सरहाँ दस्तक दे जाते हो..
और मुझे अपने आगोश में ले लेते हो..।
आखिर क्यों करते हो ऐसा..?
मैंने तो कभी..
अच्छे से न नाम लिया,न जप किया,न तप किया..
तो फिर आखिर क्यों..
मुझपे कृपा वरसा रहें हो..
मैं तो उस योग्य भी खुद को नही मानता..
की आपके चरणों की धूलि को अपने सर से लगा सकूँ..
मगर आप हो.. 
जो मेरे साँसों में रच बस गए हो..
ज्योहीं आपसे दूरियां बढ़ती है..
आप हरदफ़ा दस्तक दे जाते हो..।

क्या करूँ,कैसे करू..
की आपमें समाहित हो जाऊं..।
आप ही मार्ग दिखाओ बप्पा..
इस जीवन को अब..
सार्थक बनाओ बप्पा..।





बुधवार, 19 अगस्त 2026

अहमियत..

मुझे लगा मेरी अहमियत कुछ तो होगा..
उनके जिंदगी में..
मगर में गलत था..।
उनके लिए शायद में नहीं..
कुछ और अहमियत रखता है..।



रविवार, 16 अगस्त 2026

थोड़ा कठिन है..

अगर आप चाहते है कि लोग आपको पसंद करें..

तो पहले आप,

लोगों को पसंद करना शुरू कीजिए..

अपने शर्तों पे नहीं..

बल्कि वो जैसे है..

वैसे ही,

पसंद करना शुरू कीजिए..।।


थोड़ा कठिन है..

थोड़ा नही बहुत कठिन है..।

मगर जब आप किसी को उसके ही शर्तों पे पसंद करना शुरू करते है..

तो,वो भी..

आपके शर्तों का ख्याल रखना शुरू कर देते है..😊।



कुछ नियम बनाये थे मैंने अपने लिए..

मैं अपने ही बनाये हुए नियम को..
तोड़ता हूँ अपने लिए..।
जब नियम को तोड़ कर तार-तार कर देता हूँ..
तब ख्याल आता है कि..
ये नियम बनाया था 
मैंने अपने लिए..।




अक्सरहाँ इन बातों को दरकिनार कर आगे बढ़ जाता हूँ..
मगर कभी तो रुकना होगा..
और इन बातों का ख्याल करना होगा..।

जो नियम बनाये थे मैंने..
अपने भले के लिए..
तो भला कबतक,
नियम को दरकिनार कर आगे बढ़ता रहूंगा..।
कभी तो रुकूँगा..
और अपने बनाये नियम पे चलूंगा..
शायद वो वक़्त अब आ गया है..
अपने बनाये नियम को दृढ़ता से अनुसरण करने का..।

शुक्रवार, 14 अगस्त 2026

आखिर कबतक..

तुम ढूंढते हो उसे..
जिसे तुम्हारी कद्र ही नहीं..
तुम भटकते हो..
उसके लिए..
जिसे तुम्हारी फिक्र ही नही..।
आखिर कबतक सबकुछ खबर होते हुए भी..
बेखबर बने रहोगे..।



हम क्यों किसी के बारे में सोचते है..

हम क्यों किसी के बारे में सोचते है..??
सच कहूं तो आप निकम्मे और निठल्ले हो😊..
इसिलिय आप किसी के बारे में सोचते है..
खुद को इतना समय क्यों देते है..
कि आप किसी के बारे में सोचे..।
अपने जिंदगी को उद्देश्यपरक बनाये..
और पूरा समय उसमें लगाए..
तब देखिए आप कैसे किसी के बारे में सोचते है..
जबतक उद्देश्यहीन जिंदगी जीते रहेंगे..
तबतक हम यू ही..
किसी और के बारे में सोचते रहेंगे..।
खुद को व्यस्त रखें..
अपने उद्देश्य की पूर्ति में..
अगर कोई उद्देश्य नही है..
तो अभी बनाये..
अन्यथा जिंदगी यू ही..
दूसरों के बारे में सोचते-सोचते खत्म हो जाएगा..।



गुरुवार, 13 अगस्त 2026

मन भटक रहा है..

मन भटक रहा है..
क्यों..??
ये सवाल नया नही,
सदियों पुराना है..
मन भटक रहा है..।
आखिर भटकेगा क्यों नहीं..
क्योंकि उसे खुला छोड़ जो रखा है..।



क्या करें, कैसे करें..
कैसे इसे नियंत्रित करें..??
इसे नियंत्रण करना आसान कंहा है..
ये तो बिना लगाम के घोड़े के समान स्वछंद है..
इसके लगाम को जितना जकड़ने की कोशिश करेंगे..
ये उतना ही उलझन बढ़ाता जाएगा..।

फिर आखिर क्या करें,कैसे करें..??
कुछ नहीं..
बस अपने उद्देश्य को ढूंढिए..
और उसके पूर्ति के लिए लग जाइये..
और अपने मन को भी वंही लगाइए..।
क्योंकि हमारा मन भी तो..
किसी उद्देश्य के लिए ही भटक रहा है..
उसे सार्थक उद्देश्य की पूर्ति में लगाइए..।
न कि बेवजह के उद्देश्य में उसे उलझाइये..
जबतक बेवजह के उद्देश्य में उसे उलझाइयेगा
तबतक वो यू ही भटकता रहेगा..
खुद से ही सार्थक उद्देश्य को तलाशता रहेगा..।।

मन भटक रहा है..
मगर वास्तविकता तो कुछ और है..
हम ही भटक रहे है..
मन तो अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए भटक रहा है..।
हम क्यों भटक रहे है..?
जिस रोज हम अपने उद्देश्य की पूर्ति में लग जाएंगे..
उस रोज मन भी तादात्म्य बिठाकर उद्देश्य पूर्ति में लग जायेगा..।
जिस रोज उद्देश्य निर्रथक लगने लगेगा..
फिर से मन भटकने लगेगा..।

मन भटक रहा है..।

कुछ लिखने का मन करता है..

कुछ लिखने को मन करता है..
मगर लिखने से ड़र लगता है..।
कंही मेरी लेखनी..
किसी को सुई की तरह न चुभ जाये..
या फिर किसी को समझ ही न आये..
दोनों में खतरा है..
भला ये खतरा कौन मोल उठाये..।


कुछ लिखने का मन करता है..
मगर लिखने से डर लगता है..
क्योंकि आजकल कौन पढ़ता है..
और किसको इतनी समझ है..कि
किसी की लेखनी को समझ पाए..
हम वही समझ पाते है..
जो पढ़ पाते है..
मगर उस लेखनी के उस पार झांक नही पाते..।

कुछ लिखने को मन करता है..
मगर लिखने से ड़र लगता है..
क्योंकि शब्दों के मायाजाल में कोई फंसकर..
यू ही गुमराह न हो जाये..
क्योंकि सही राह चलना बड़ा दुष्कर है..
गलत राह पर तो हम चल ही रहें है..।

कुछ लिखने को मन करता है..
मगर लिखने से ड़र लगता है..
क्योंकि..
मेरी लेखनी किसी को समझ आएगा कि नही..
या फिर मैं कुछ ऐसा लिख भी पाऊंगा की नही..
जो सार्थक हो,सामर्थ्य हो,समृद्ध हो..
शायद यही सब सोचकर लिखने से डर लगता है..।

कुछ लिखने को मन करता है..
मगर लिखने से ड़र लगता है..

मंगलवार, 11 अगस्त 2026

गलतियां

गलतियां होना सामान्य सी बात है..
गलतियों का अहसास होना अच्छी बात है..
और उस गलती को फिर से न दोहराना बहुत बड़ी बात है..।

मगर आजकल हमलोग गलती करते ही नहीं..
अगर गलती करते तो,उसका अहसास होता..
मगर आजकल अहसास कंहा हो रहा है..
अगर अहसास होता..
तो हम फिर से उस गलती को नहीं दोहराते..।

मगर आजकल हमलोग,कई गलतियां रोज दोहरा रहें है..
जैसे वो जिंदगी का हिस्सा हो चुका है..और हमें लगता है ये सामान्य सी बात है..क्या ऐसा नहीं है..??

आप रोज जानते हुए कि ये गलत है,तब भी गलती करते है..ऐसा गलती दिनभर में कितना करते है..??
जरा सोचिए..🤔

ये गलतियां धीरे-धीरे बेड़ियां की तरह भारी और मजबूत होता जाएगा,और आपके जिंदगी का बोझ बन जायेगा..आप जितना देर करेंगें उतना ये बेड़ियां मजबूत होता जाएगा..जबतक आपको अहसास होगा तबतक ये बेड़ियां आपको अपना गुलाम बना लिया होगा..और आप चाहकर भी इससे नही निकल सकते..।

इसलिए जितना जल्दी हो सके अपने गलतियों को पहचानिए और उसे स्वीकारिये और इसे 

सोमवार, 10 अगस्त 2026

खुद को देखिए जनाब..

खुद को देखिए जनाब..
आपको हो क्या गया है..??
कल तक आप सबके चहेते थे..
आज आपको हो क्या गया है..?
आपको लगता है..
लोग बदल गए है..
मगर नहीं..
आप ही बदल गए है..।


सूर्य को फर्क नहीं पड़ता कि..
कौन उसके ऊपर कीचड़ उछालता है..
या फिर पानी उछालता है..
वो तो सबपे..
एक समान रोशनी का बौछार करता है..।
आप तो सूर्य से थे..
तो फिर,
आजकल एक आंगन के, 
दीपक क्यों बन गए है..??

खुद को देखिए जनाब..
आपको हो क्या गया है..??
कल तक आप सबके चहेते थे..
आज आपको हो क्या गया है..?

माना कि लोग गलत है..
मगर,वो सही ही कब थे..
बिच्छु काटना,और 
शेर दहाड़ना तो बंद नही करेंगे..
वो कल भी ऐसे थे..
और आज भी ऐसे ही है..
मगर आपको क्या हो गया है..??
आप तो ऐसे नहीं थे..??

किसी को कोई फर्क नही पड़ेगा..
आपके बदलने से..
आपके चाहने वाले थोड़ा हताश और निराश होंगे..
और कुछ दिनों बाद उन्हें आदत हो जाएगी..।
मगर आपका क्या होगा..??
क्या आप कभी..
स्वयं को आईने में देख पाएंगे..?
क्या आप कभी अकेले में..
स्वयं से नजरें मिला पाएंगें..?

खुद को देखिए जनाब..
आपको हो क्या गया है..??
कल तक आप सबके चहेते थे..
आज आपको हो क्या गया है..??

लोग नहीं बदलते..
हम ही बदल जाते है..
और हमें लगता है..
लोग बदल गए है..।



मैं..से मैं तक..

मैं,जो हूँ..
वो मैं होना चाहता हूँ..
वो,मैं..
मैं,कैसे होऊं..।
जबतक मैं,
वो मैं न होऊं..
तबतक बैचैन ही रहूंगा..
वो मैं,मैंकैसे होऊ..
इसका तो पता नही...
मगर उस मैं के अवरोधक को हटा दे..
तो शायद उस मैं तक जाने का पता चल जाये..

शनिवार, 8 अगस्त 2026

नी..

नी..
कंहा से शुरू करू..
तुम्हारी दास्तां..
वंही से शुरू करता हूँ..
तुम्हारी दास्तां..
जंहा पहली दफा देखा था..
तपती सुबह में,पेड़ की छावं में.
गिट्टी के ढेर पे.
मुहर वाले फ्रॉक में,
ब्रश करते हुए देखा था पहली बार..।
हां पहली दफा तुम्हें देख के वो अहसास न हुआ..
मगर न जाने अक्सरहाँ तुम्हें देखते-देखते
वो अहसास कब होने लगा पता न चला..
नी कंहा से शुरु करू तुम्हारी दास्तां


(साभार - "नी" )


हम सोचते क्यों है..

आपने कभी सोचा है कि..
आप सोचते क्यों है.??
जरा सोचिए..🤔
तो क्या सोचा आपने..
चलिये हम बताते है..
कि हम क्यों सोचते है..
क्योंकि हमारे पास करने को कुछ नही है
या फिर हमारे पास करने को कुछ है..।



मगर हास्यपद ये है कि हम आज सोचते ही नही।
है न बड़ी बात..
क्या सच में ऐसा है..??
हरेक अंग का अपना-अपना काम है..
उसी तरह दिमाग का अपना काम है,सोचना..
अगर दिमाग नही सोचेगा..
तो इसका मतलब है कि दिमाग मे कुछ तो खराबी है..।

अब आप सोच रहें होंगे कि मैं क्या बोल रहा हूँ..
अगर ऐसा है..
तो घबराइए नही..
आपका दिमाग सही है..
क्योंकि आप सोच रहें है..😊।

मगर इससे भी बड़ी बात अब मैं,ये कहने जा रहा हूँ कि..
क्या आप वही सोचते है..
जो आपके लिए जरूरी है..?
या फिर आप वो सोचते है..
जो किसी के द्वारा सोचवाया जा रहा है..??
हां, हममें से अधिकांश लोग वो ही सोचते है,जो हमारे लिए जरूरी नही है..
हम सारा दिन व्यर्थ की बातें सोचते है,और उस सोच को सोशल मीडिया में विस्तारित करते है..जिससे किसी और का स्वार्थ सिद्ध होता है..और हमें अंततः वो सब सोच कर कुछ नही मिलता..।

आपने आखरी बार अपने बारे में कब सोचा था..??
और आज आपने क्या-क्या सोचा..??
या फिर आपने सोचा ही नहीं..?
अगर आपने सोचा ही नहीं, तो ये बड़ी समस्या है क्योंकि अब आपके सोच को कोई अप्रत्यक्ष तरीके से नियंत्रित कर रहा है..
और आज उसका सबसे बड़ा माध्यम सोशल मीडिया है..
ये आपको अजीब लग सकता है..
मगर यही वास्तविकता है..।
आप सफल व्यक्ति को देखें..
उनके दिनचर्या को देखें..
क्या वो सोशल मीडिया इस्तेमाल करते है..
अगर हां तो कितना..??
अगर आप भी सफल होना चाहते है तो..
एक सफल व्यक्ति की तरह ही अपने सफलता के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल करें..न कि एक एडिक्ट की तरह..।

शायद आपको अभी भी कुछ समझ नहीं आया होगा..
अगर आया भी होगा..
तो आप कुछ नही कर सकते..
क्योंकि आपके पास अपना कोई उद्देश्य ही नही है..
अगर उद्देश्य है..
तो आप अभी से ही अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए ही..
सोशल मीडिया इस्तेमाल करेंगे..।

क्या आप अभी भी कुछ सोच रहे है..
अगर हां,
तो अच्छी बात है..😊
क्योंकि आप सोच रहें है..
क्योंकि हमारी सोच ही तो हमें औरों से अलग बनाता है..।


शुक्रवार, 7 अगस्त 2026

माना कि..

माना कि मैं,
असफलता के बोझ से ढका हुआ हूँ..
मगर वो दिन दूर नही..
जब इन्ही असफलताओं के बोझ पर..
सफलता का सिंहासन लगाऊंगा..।

क्योंकि जब मैं असफल हो सकता हूँ..
तो सफल भी जरूर होऊंगा..।