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शुक्रवार, 13 मार्च 2026

प्यार की पांति...

मैं ही बार-बार गिरूं तेरे प्यार में..
कभी,तू भी तो गिर..।
क्या होता है गिरना..
इसका अहसास कभी ,
तू भी तो कर..।
मैं ही बार-बार गिरूं तेरे प्यार में..
कभी तू भी तो गिर..।।

क्या होता है इंतजार करना..
इसका अहसास कभी,
तू भी तो कर..
यू ही घन्टों जाया कर देना..
बस एक झलक के लिए..
इसका अहसास कभी, 
तू भी तो कर..।।

क्या होता है एक झलक को देखकर..
मुस्कुराना..
इसका अहसास कभी,
तू भी तो कर..।
क्या-क्या होता है,
प्यार में..
एक बार तू भी तो प्यार करके देख..।

मैं ही बार-बार गिरूं तेरे प्यार में..
कभी तू भी तो गिर..।





मंगलवार, 3 मार्च 2026

मन करता है..

मन करता है..
तेरा दीदार करू..
तुमसे दो-चार बात करू..।

मगर कमबख्त एक दीवार खड़ी हो गई है..
न मैंने खड़ी की..
न तूने खड़ी की..
फिर न जाने...
किस कमबख्त ने खड़ी की..।

मन करता है..
तेरा दीदार करू..
तुमसे दो-चार बात करू..।



शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026

मन करता है

मन करता है.. 
चुपचाप तुम्हारे साथ खामोश बैठूं..
घंटो तलक..तुम्हारे साथ बैठूं..
ना तुम कुछ बोलो..
ना मैं कुछ बोलू..।
बस मौन के द्वारा ही सबकुछ बयां करू..
मन करता है...
चुपचाप तुम्हारे साथ खामोश बैठूँ..।

तुम अपना सर्... 
मेरे कंधे पर रखकर..
पूरा ब्रह्मांड निघांरो..
और मैं, 
तुममें...
पूरा ब्रह्मांड निघारू..।
ना तुम कुछ बोलो..
ना मैं कुछ बोलू..
बस मौन के द्वारा ही सबकुछ बयां करू..।
मन करता है...
चुपचाप तुम्हारे साथ खामोश बैठूँ..।



मंगलवार, 17 फ़रवरी 2026

कोई तो होगी..

कोई तो होगी..
जो मेरे अंदर प्यार के वट वृक्ष को देखेगी..
वो मुझे नही,मेरे कैरियर को नही..
सिर्फ मुझे ही देखेगी..
कोई तो होगी..।।

ये दुनिया जालिम है..
अगर वो,
मेरे अंदर..
प्रेम के वट वृक्ष को देख भी लेगी..
तो दुनिया उसे दिग्भ्रमित करेगी..
कैसे रहेगी..??
क्या करेगी..??
क्या भविष्य है इसके साथ..??
क्या करेगी तू इसके साथ..??

मगर शायद..
उसका अंतर्मन कहेगा..
ये वही वट वृक्ष है..
जिसके छावं में..
मैं चैन से,
सो सकूंगी..

कोई तो होगी..।


शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

कंहा से आई वो..

ये दूसरी दफा हो रहा है..
जब दिल फिर से धड़कना शुरू हो गया..।

पहले..एक अल्हड़ के लिए धड़कता था..
जिसे देखते ही मेरी फिजा रंगीन हो जाती थी..।

अब उसके लिए थोड़ा-थोड़ा धड़कना शुरू हुआ..
जो मुझसे मिलों दूर है..
उसका मेसैज मेंरे हृदय को स्पंदित कर देता है..।

मालूम नही कंहा से आई वो..??
और मेरे वीरान हो गई जिंदगी में..
हरियाली सी छा गई वो..।


शुक्रवार, 16 जनवरी 2026

सोचा था..

सोचा था तुम्हें अब मैसेज नही करूँगा..
मगर तुम्हारा स्टेटस देखकर..
मैं भूल गया..
की तुम्हें मैसेज नही करना था😊..।।

तुम मेरी जिंदगी में आई..
तपती धूप में,
बिन बादल बरसात की तरह..।
और मैं तुम्हें भूलने की व्यर्थ कोशिस कर रहा हूँ..
सावन की बरसात की तरह..।

तुम्हारा एक मैसेज..
मुझे स्पंदित कर देता है..
तुम्हारा एक कमेंट मुझे..
अनकही सी उलझन में डाल देता है..
कि कोई अजनबी..
इतना अपना सा कैसे लग सकता है.??


बुधवार, 14 जनवरी 2026

वो दूरियां बना रही है..

वो दूरियां बना रही है तो बनाने दो न..
तुम क्यों उसके करीब जा रहें हो..।
जो चीज तुम्हारी कभी थी ही नही..
उसे पाने को व्यर्थ प्रयत्न क्यों करना..।
जो तुम्हारे हिस्से में है..
वो तुम्हारे हिस्से में आकर ही रहेगा..।
जो नही है,
उसे पाने का क्यों व्यर्थ प्रयत्न करना..।
वो गलती से जिंदगी का हिस्सा बन भी गई..
तो तुम्हीं बताओ जिंदगी कैसी होगी..??

वो दूरियां बना रही है तो बनाने दो न..
तुम क्यों उसके करीब जा रहें हो..।


शुक्रवार, 9 जनवरी 2026

प्यार की पांति..मन करता है..

मन करता है..
हरेक रोज..
तुम्हे कुछ लिखा करू..
मन कहता है..
हरेक रोज..
तुम्हें कुछ कहा करू..।
फिर यही मन कहता है..
छोड़ दे यार..
उन्हें बुरा लगेगा..।


मन करता है..
तुम्हारे साथ..
ढेर सारे..
गप्पे लड़ाऊँ...।
मन करता है..
तुम्हारे साथ..
ढेर सारे.. 
वक़्त बिताऊँ..।

मगर फिर..
वो कहती है..
मन को संभालो..
मन का क्या है..
वो तो चंचल..
बंदर है जी..।

वो कहती है..
जो है..मन में..
मन में, दबा लो..
और एक कब्रगाह बना लो..
और उसपे अश्रु बहाओ..।

मन का क्या है..
ये तो स्वछंद..
उन्मुक्त परिंदा है जी..।
इसको संभालों..
नही तो सच कहता हूं..
तुम्हारी भी कब्रगाह बन जाएगी..😀

मन करता है..
नहीं-नही जी..😊
कुछ नही करता..।।

न जाने ये मन चाहता क्या है..??

मन की भाषा, 
मन ही समझें..
अब हम..
कंहा से लाये..
वो मन..
जो इस मन की..
भाषा को समझें..।



बुधवार, 7 जनवरी 2026

प्यार की पांति..कभी-कभी

कभी-कभी तुम भी कुछ लिखा करो..

कभी-कभी तुम भी कुछ कहा करो..।

मैं ही कबतक अकेले लिखता रहूंगा..

मैं ही अकेले कबतक बकता रहूंगा..।

कभी-कभी तुम भी कुछ लिखा करो..

कभी-कभी तुम भी कुछ कहा करो..।


जानता हूँ..मैं भी..

जानती हो..तुम भी..

हमदोनों के बीच की दूरियों को..

और..

हमदोनों के बीच के खाइयों को..।

कभी-कभी हमदोनों मिलकर दूरियां मिटाये...

कभी-कभी हमदोनों मिलकर खाइयों के गहराइयों का पता लगाएं..

कभी-कभी..तुम भी कुछ लिखा करो..

कभी-कभी तुम भी कुछ कहा करो..।।


यू मुँह मोड़ने से क्या होगा..

यू चुप रहने से क्या होगा..

जबतक नजरें मिलाओगे नहीं..

जबतक चुपिया तोड़ोगे नही..

तुम्हीं बताओ मैं कैसे समझ पाऊंगा..।

कभी-कभी तुम भी कुछ लिखा करो..

कभी-कभी तुम भी कुछ कहा करो..।


माना कि आता नही..

मुझे प्यार जताना..

तुम्हीं सिखाओ..

तुम्ही बताओ..

की कैसे जताए..

की कैसे बताये..।

कभी-कभी तुम भी कुछ लिखा करो..

कभी-कभी तुम भी कुछ कहा करो..।


Yoga for digestive system