मगर सवाल है क्यों..??
इसका सबसे बड़ा कारण है कि हम स्वयं को खास समझते ही नही..।
जब हम स्वयं को खास समझने लगेंगे, तब खास बनने की जरूरत नही पड़ेगा..।।
हम खास बनने के लिए या दिखने के लिए क्या करते है..??
हम आम आदमी अच्छे कपड़े पहनते है,अच्छे दिखने के लिए,साथ ही खूबसूरत दिखने के लिए अपने चेहरे को खराब करते है..।ऊपर से इत्र से नहाते है..जो हमारे त्वचा के छिद्र को नुकसान पहुंचाते हैं..।हम खास दिखने के लिए वो सब करते है,जिससे स्वयं को नुकसान हो..।
ऐसा नही की इससे हम खास नही दिखते है..दिखते है..मगर ये कबतक बरकरार रहता है..??
1दिन,2दिन,1सप्ताह,1 महीना या फिर 1 साल..??
अक्सरहाँ 24 घंटे के बाद ही हम खास से आम बन जाते है,बस उसकी कुछ यादें रह जाते है..और कुछ नही..।।
हम आप चक्रवर्ती सम्राट अशोक को जरूर जानते होंगे..??
क्या आपको पता है..वो इतना कुरूप थे कि उनके पिता बिंदुसार भी उनसे घृणा करता था..
मगर वो स्वयं को खास बनाकर पूरे विश्व के मानसपटल पे छा गये.।
सम्राट अशोक पुराने हो गये..।
वर्तमान समय की ही बात करते है..
हम सब जोमैटो से परिचित है..
उनके फाउंडर कौन है पता है..??
दीपिन्दर गोयल..है।
इन्हें बचपन से ही हकलाने की समस्या है,जिसके कारण वो नर्वस और सचेत रहते थे,हमेशा आत्मविश्वास की कमी बनी रहती थी,जिसकारण सार्वजनिक कार्यक्रमों से हमेशा दूरियां बनाके रखते थे..।
उन्होंने एक पॉडकास्ट में कहा-"मुझे बोलने में बहुत मेहनत करना पड़ता है,जिस कारण ढेर सारा कैलोरी खत्म हो जाता है,क्योंकि मैं हकलाता हूँ..।।
आज जोमैटो से सब वाकिफ है,मगर उनकी कमियों से नही..
आपकी कमियां आपके आत्मविश्वास और सफलता के सामने में तुच्छ है..।
खास बनने के लिए कुछ खास करना होता है,न कि अपनी कमियों को छुपाना..।।
● इसी तरह हम oyo से परिचित होंगे..
उनके संस्थापक रितेश अग्रवाल जो कभी सिमकार्ड बेचा करते थे..कॉलेज ड्रॉपआउट थे,ओड़िशा के छोटे से कस्बे से आते थे..
उन्होंने अपने हरेक कमियों को स्वीकार और विश्व की सबसे बड़ी होटल चैन में से एक ओयो को बना दिया..।।
● शायद हममें से बहुत लोग कल्पना सरोज को नही जानते होंगे..
वे "कमानी ट्यूब्स" के CEO है..।
इनका जीवन बहुत संघर्षमय था..
सबसे पहले बेटी के रूप में जन्म लेना(हमारी मानसिकता आज भी नही बदली है)।ऊपर से दलित परिवार में जन्म लेना..फिर 12 साल की उम्र में शादी हो जाना..फिर घरेलू हिंसा और गरीबी की मार इतना झेलना की आत्महत्या तक कि कोशिश कर लेना..।
मगर उन्होंने फिर निर्णय लिया खुद के लिए जीने का..
मुम्बई में गारमेंट फैक्टरी में 2₹ रोजाना की मजदूरी पर काम करना शुरू किया और फिर आगे चलकर "कमानी ट्यूब्स"की कमान संभाली..।
और आज वो कई कंपनियों की मालकिन है..।
ऐसे कई लोग है हमारे आसपास जिन्होंने अपने कमियों का रोना नही रोया बल्कि अपने कमियों को दरकिनार करके सफलता के झंडे गाड़े..।।
◆ आखिर खास बनने के बजाय खास बने कैसे..??
●सबसे पहले आप जैसे है,वैसे खुद को स्वीकार करें.. जबतक आप स्वयं को नही स्वीकारेंगे तबतक आपको कोई और कैसे स्वीकारेगा..।
●अपनी खूबियों को पहचाने और निखारें.. साथ ही अपने कमियों को दूर करें..।
●अपना दृष्टिकोण बदले..समस्या को रुकावट नही बल्कि चुनौती माने..।
●हम दूसरों के साथ वैसा ही व्यवहार करें,जैसा हम उनसे अपेक्षा रखते है..।
●सुनने की आदत डालें...
●आत्म-अनुशासन और स्वास्थ्य का ख्याल रखें..
●दूसरों की मदद कर सकने में सक्षम है तो मदद करें..
● विनम्र बने..
● और आखरी चीज..किसी चीज या किसी व्यक्ति से अपेक्षा न रखें..क्योंकि अपेक्षाएं हमेशा तकलीफ देती है..।
अगर हम अच्छे बनने के जगह इन आचरणों को आत्मसात करेंगे तो जीवन में कभी खास बनने की जरूरत नही पड़ेगी..बल्कि हम खास हो जाते है..बनते नही..।।




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