मंगलवार, 7 अप्रैल 2026
शिव..
रविवार, 22 मार्च 2026
माँ कुष्मांडा: सृष्टि की आदि-शक्ति
माँ कुष्मांडा: सृष्टि की आदि-शक्ति
'कु' का अर्थ है छोटा, 'ष्म' का अर्थ है ऊर्जा और 'अंडा' का अर्थ है ब्रह्मांड। माना जाता है कि जब चारों ओर अंधेरा था, तब माँ ने अपनी मंद मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना की थी।
◆ स्वरूप और प्रतीकवाद
- अष्टभुजा देवी: माँ की आठ भुजाएँ हैं, इसलिए इन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। इनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृत-कलश, चक्र और गदा है।
- अष्टसिद्धि और नवनिधि: इनके आठवें हाथ में सभी सिद्धियों और निधियों को देने वाली जपमाला है।
- वाहन: माँ कुष्मांडा सिंह पर सवार हैं, जो साहस का प्रतीक है।
◆ योग विज्ञान: अनाहत चक्र (Anahata Chakra)
आज साधक का मन अनाहत चक्र (हृदय चक्र) में स्थित होता है।
- स्थान: हृदय के मध्य में।
- तत्व: वायु (Air Element)।
- प्रभाव: इस चक्र के जाग्रत होने से व्यक्ति के भीतर प्रेम, करुणा और क्षमा का भाव जागता है। यह वह केंद्र है जहाँ भौतिक और आध्यात्मिक ऊर्जाएँ मिलती हैं।
◆ वैज्ञानिक पक्ष: जीवनी शक्ति (Vital Energy)
माँ कुष्मांडा का निवास 'सूर्य मंडल' के भीतर माना जाता है। विज्ञान की दृष्टि से देखें तो सूर्य ही इस पृथ्वी पर ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। माँ कुष्मांडा इसी जीवनी शक्ति (Pranic Energy) का प्रतिनिधित्व करती हैं जो हमारे स्वास्थ्य और बुद्धि को तेज करती हैं।
"सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥"
गुरुवार, 19 मार्च 2026
माँ शैलपुत्री: स्थिरता, संकल्प और मूलाधार का विज्ञान
आज से चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व शुरू हो रहा है। यह केवल व्रत और उपवास का समय नहीं है, बल्कि अपनी चेतना को ऊपर उठाने की एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। नवरात्रि के पहले दिन हम माँ शैलपुत्री की आराधना करते हैं। आइए जानते हैं, इस स्वरूप के पीछे छिपे गहरे आध्यात्मिक और योगिक रहस्यों को।
★ 'शैल' का अर्थ: अडिग हिमालय जैसी स्थिरता
'शैल' का अर्थ है पत्थर या पर्वत। हिमालय की पुत्री होने के कारण इन्हें शैलपुत्री कहा गया। जीवन में किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए (चाहे वह आध्यात्मिक हो या सांसारिक), सबसे पहली आवश्यकता है 'स्थिरता'। माँ शैलपुत्री हमें सिखाती हैं कि विपरीत परिस्थितियों में भी हिमालय की तरह अडिग कैसे रहें।
★ योग विज्ञान और मूलाधार चक्र
योग शास्त्र के अनुसार, माँ शैलपुत्री मूलाधार चक्र (Root Chakra) की अधिष्ठात्री देवी हैं।
- तत्व: पृथ्वी (Earth Element)
- बीज मंत्र: 'लं' (LAM) हमारी ऊर्जा का स्रोत यहीं स्थित है। जब हम माँ की पूजा करते हैं, तो वास्तव में हम अपनी सुप्त ऊर्जा (कुंडलिनी) को जागृत करने की पहली सीढ़ी पर कदम रखते हैं। बिना आधार (Root) को मजबूत किए, ऊँचाइयों को नहीं छुआ जा सकता।
★ स्वरूप का रहस्य: वृषभ और त्रिशूल
- वृषभ (बैल): यह 'धर्म' और 'परिश्रम' का प्रतीक है। देवी का इस पर सवार होना दर्शाता है कि शक्ति हमेशा धर्म के नियंत्रण में होनी चाहिए।
- त्रिशूल और कमल: एक हाथ में त्रिशूल (अनुशासन और कष्टों का नाश) और दूसरे में कमल (करुणा और मानसिक शांति)। यह एक पूर्ण व्यक्तित्व का संतुलन है—बाहर से कठोर और भीतर से कोमल।
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम॥
इस नवरात्रि, जब आप दीप जलाएं, तो संकल्प लें कि आप अपने भीतर की 'शैलपुत्री' यानी अपनी इच्छाशक्ति (Will Power) को जाग्रत करेंगे।
आप इस नवरात्रि अपने भीतर कौन सा सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं..???
आप सभी को नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएँ!
शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026
खालीपन..
कस्तूरी कुंडल बसै, मृग ढूँढै बन माहि।
ऐसे घट-घट राम हैं, दुनिया देखत नाहि॥
हमारा हाल भी तो उस मृग की ही तरह है..हम अपने खालीपन को भरने के लिए क्या-क्या नही करते,सोशल मीडिया/मूवी/वेबसेरीज़ न जाने और क्या-क्या करते है, अपने खालीपन को भरने के लिए..जबकि ये हमारे खालीपन को और बढ़ाता है..।और ज्यों-ज्यों खालीपन बढ़ता जाता है,हम बैचैन और विक्षिप्त होते जाते है..।
तो हम क्या करें..??
कबीरदास जी कहते है..-
जिन ढूँढा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ।
मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ॥
हमें अपने खालीपन को भरने के लिए अपने अंदर ही डुबकियां लगाना होगा,मगर ये कठिन है..क्योंकि जब हम अपने अंदर डुबकियां लगाते है,तो हमें अपने ही बुराइयों का सामना करना होता है,जो बहुत कठिन है..विरला ही कोई-कोई होता है,जो अपनी बुराइयों को स्वीकार कर उसे परास्त कर अपने अंदर डुबकियां लगा पाता है..और अपने खालीपन को दूर कर पाते है..।।मंगलवार, 3 फ़रवरी 2026
शिव कौन है..??
जाबालि उपनिषद सामवेद से संबंधित एक लघु उपनिषद है। इस उपनिषद में महर्षि जाबालि और ऋषि पैप्पलाद के बीच संवाद के माध्यम से शिव के बारे में बताया गया है।
ऋषि पैप्पलाद ने जाबालि से पूछा शिव कौन है तो जाबालि कहते है-
सहोवाच जाबालिः-
"पशुपतिं सवज्ञं जगदुदयस्थितिभङ्गहेतुं सर्वेश्वरं महादेवं ज्ञात्वा मृत्युमुत्तीर्यते॥
जाबालि कहते है - शिव समस्त पशुओं (जीवों) के स्वामी है, वो सर्वज्ञ, जगत की उत्पत्ति, स्थिति और विनाश का कारण है, सर्वेश्वर 'महादेव' को जानकर ही मनुष्य मृत्यु को पार कर सकता हूं।
◆शिव केवल देवता नहीं, बल्कि ब्रह्मांड का आधार है।
★ शिव कौन है - शिव पशुपति है..
"अहंकारमयाः जीवाः पशवः परिकीर्तिताः।
तेषां पतित्वाद्देवेशः पशुपतिरित्युच्यते॥"
अहंकार से युक्त जितने भी जीव हैं, वे 'पशु' कहलाते हैं। उन सभी जीवों के स्वामी (पति) होने के कारण महादेव को 'पशुपति' कहा जाता है।
★शिव कौन है- शिव 'भस्मधारी' है।
अग्निरेवेति भस्म। वायुरिति भस्म। जलमिति भस्म। स्थलमिति भस्म। व्योमेति भस्म। सर्वं ह वा इदं भस्म॥
अग्नि भस्म है, वायु भस्म है, जल भस्म है, पृथ्वी भस्म है और आकाश भस्म है।संपूर्ण दृश्यमान जगत भस्म का ही विस्तार है।
◆प्रलय के पश्चात जो शेष बचता है,वही शिव है..
शिव ही शिव है..
शिव के सिवा कुछ और नही है..
शिव ही शिव है..
शिव..शिव..शिव..
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क्या सोच रहे हो तुम..?? यही सोच रहा हूँ कि.. क्या सोच रहा हूँ मैं..। सच कहूं तो.. कुछ तो सोच रहा हूँ मैं... मगर अफसोस क्या सोच रहा हूँ.. यह...
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हम सब खास(special) दिखना चाहते है.. मगर सवाल है क्यों..?? इसका सबसे बड़ा कारण है कि हम स्वयं को खास समझते ही नही..। जब हम स्वयं को खास समझने ...
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अतीत से लेकर वर्तमान तक,हम सभी दुःखो से घिरे हुए है.. आखिर क्यों..?? इस क्यों का जबाब हम अतीत से ही ढूंढते आ रहे है..हमारे ऋषियों-मनीषियों न...






