जाबालि उपनिषद सामवेद से संबंधित एक लघु उपनिषद है। इस उपनिषद में महर्षि जाबालि और ऋषि पैप्पलाद के बीच संवाद के माध्यम से शिव के बारे में बताया गया है।
ऋषि पैप्पलाद ने जाबालि से पूछा शिव कौन है तो जाबालि कहते है-
सहोवाच जाबालिः-
"पशुपतिं सवज्ञं जगदुदयस्थितिभङ्गहेतुं सर्वेश्वरं महादेवं ज्ञात्वा मृत्युमुत्तीर्यते॥
जाबालि कहते है - शिव समस्त पशुओं (जीवों) के स्वामी है, वो सर्वज्ञ, जगत की उत्पत्ति, स्थिति और विनाश का कारण है, सर्वेश्वर 'महादेव' को जानकर ही मनुष्य मृत्यु को पार कर सकता हूं।
◆शिव केवल देवता नहीं, बल्कि ब्रह्मांड का आधार है।
★ शिव कौन है - शिव पशुपति है..
"अहंकारमयाः जीवाः पशवः परिकीर्तिताः।
तेषां पतित्वाद्देवेशः पशुपतिरित्युच्यते॥"
अहंकार से युक्त जितने भी जीव हैं, वे 'पशु' कहलाते हैं। उन सभी जीवों के स्वामी (पति) होने के कारण महादेव को 'पशुपति' कहा जाता है।
★शिव कौन है- शिव 'भस्मधारी' है।
अग्निरेवेति भस्म। वायुरिति भस्म। जलमिति भस्म। स्थलमिति भस्म। व्योमेति भस्म। सर्वं ह वा इदं भस्म॥
अग्नि भस्म है, वायु भस्म है, जल भस्म है, पृथ्वी भस्म है और आकाश भस्म है।संपूर्ण दृश्यमान जगत भस्म का ही विस्तार है।
◆प्रलय के पश्चात जो शेष बचता है,वही शिव है..
शिव ही शिव है..
शिव के सिवा कुछ और नही है..
शिव ही शिव है..
शिव..शिव..शिव..


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