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गुरुवार, 12 मार्च 2026

महिलाएं पुरुष से बेहतर क्यों है..??

क्या आपको पता है..
आपके घर में सबसे पहले कौन उठता है..??
आपके घर मे सबसे बाद में कौन सोता है..??
सबसे ज्यादा आपका ख्याल कौन रखता है..??
प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से आपके घर में सर्वाधिक कार्य कौन करता है..??



इसका जबाब शायद हमसबको मिल गया होगा..।।

क्या आपको पता है..महिलाएं पुरुष से बेहतर क्यों है..??
चलिए कुछ रिसर्च के माध्यम से जानते है आखिर क्यों महिला पुरुष से बेहतर है..।

महिलाओं की इमोशनल इंटेलीजेंस पुरुषों से 86% बेहतर है..
-अमेरिकी कंसल्टेंसी फर्म 'कॉर्न फैरी हेय ग्रुप' के रिसर्च के मुताबिक महिलाएं 12 पैमाने में से 11 पैमाने पर पुरूष से इमोशनल इंटेलीजेंस में आगे है।

-2022 में भारत सहित 57 देशों में एक स्टडी हुआ था,जिसमे लोगों की आंखों की तस्वीर देखकर ये पता लगाना था कि वो क्या सोच रहे है..इसमें 36 देशों की महिलाओं ने पुरुष से बेहतर प्रदर्शन किया,जबकि 21 देश की महिला ने पुरुष की बराबरी की।

-अमेरिकन सायकोलॉजिस्ट डेनियल गोलमेन के अनुसार - बेहतर नतीजों के लिए जरूरी स्किल्स में से 67% इमोशनल इंटेलीजेंस ही है।
-हॉवर्ड बिज़नेस रिव्यु के अनुसार- असरदार लीडर्स में एक बात कॉमन होता है, वो इमोशनल इंटेलीजेंस से लबरेज होते है..।

महिलाएं तनाव में भी बेहतर फैसला लेती है..।
यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया के 2016 के स्टडी के अनुसार बताया कि, जब दबाब बढ़ता है,तब महिलाएं पुरुष से बेहतर निर्णय लेती है।
पीटरसन इंस्टीट्यूट के रिसर्च के अनुसार जिन कंपनियों में टॉप लीडरशिप में 30% महिलायें होती है,वो औसत से 15% ज्यादा प्रॉफिट कमाते है।

महिलाएं कम बीमार पड़ती है,और सहने की क्षमता भी ज्यादा
•महिलाओं में गंभीर बीमारियों से उबरने की क्षमता भी,पुरुषों से ज्यादा होता है,जंहा 1लाख पुरुषों में कैंसर से मरने वालों की संख्या 171 है,वंही महिला की संख्या 126 है..।
साइंटिफिक स्टडी के अनुसार महिलाओं की जैविक बनावट इस तरह की होती है कि उन्हें पुरुष से बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करता है..
•महिलाओं में दो X क्रोमोजोम पाया जाता है,जबकि पुरुष में X और Y क्रोमोजोम पाया जाता है..वैज्ञानिक शोध में पाया गया है कि X क्रोमोजोम में इम्यून सिस्टम से संबंधित सर्वाधिक जीन्स होते है।
पुरुषों में प्रोजेस्ट्रोन और टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन का स्राव महिला से ज्यादा होता है,ये हॉर्मोन इम्यून सिस्टम के काम को सीमित कर देता है।
महिलाओं में एस्ट्रोजन हॉर्मोन ज्यादा होता है।प्रेग्नेंसी के दौरान ये हॉर्मोन ज्यादा एक्टिव होकर महिलाओं की इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है।महिलाओं में मेंस्ट्रुअल साईकल के दौरान भी ऐसा होता है।

महिलाएं चीजे ढूंढने में पुरुषों से बेहतर होती है..।
आपने ये अक्सरहाँ देखा होगा,आपको जो चीज नही मिलती वो माँ/बहन/बीबी को झट से मिल जाती है..😊।
महिलाओं में विजुअल मेमोरी पुरुषों से बेहतर होता है..वो चेहरा,बातचीत,चीजें याद रखने में पुरुष से बेहतर होती (अपवाद,पुरुष रास्ता याद रखने में बेहतर)
• ब्रेन के MRI स्टडी से पता चला है कि पुरुष जब कोई काम पर फोकस  करता है,तो उसका दिमाग एक ही एरिया में केंद्रित होता है,जबकि महिलाएं अपने दिमाग का कई रूप में इस्तेमाल करती है।

महिलाएं पुरूष से औसतन 5 साल ज्यादा जीती है..
• यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन डिवीजन के अनुसार पुरुष की औसत आयु 71 वर्ष की है,जबकि महिला की औसत आयु 76 वर्ष है।(भारत मे 74 और 71 औसत आयु है)
•महिलाओं में जन्म से लेकर जीवन के हरेक फेज में उनके जीने की संभावना ज्यादा होती है।
जन्म - यूनिवर्सिटीज ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया के रिसर्च के अनुसार - लड़को के तुलना में लड़कियां के प्री-मैच्योर पैदा होने की संभावना 60% तक कम होती है।लड़कियों में शिशु मृत्यु दर भी कम होता है।
जवानी - हॉवर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्च के अनुसार इंसानी दिमाग के आगे का हिस्सा फैसले लेने की क्षमता को कंट्रोल करता है।महिलाओं में यह पुरुषों से जल्दी विकसित होता है।इस कारण हादसों या हिंसा से महिलाओं की मौत पुरुषों से कम होती है।
बुढापा - फेफड़ों की समस्या, दिल की बीमारी जैसी गंभीर समस्याएं महिलाओं में कम होती है।इसकी एक वजह पुरुषों का धूम्रपान करना है।

आपको क्या लगता है..
महिलाएं पुरुष से बेहतर क्यों है..??

शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026

AI विनाश की और बढ़ता कदम..

क्या आपको पता है..
हड़प्पा/सिंधु सभ्यता,माया सभ्यता या फिर मेसोपोटामिया सभ्यता का विनाश क्यों हुआ..??

और इन सभ्यता का विनाश तब हुआ जब ये अपने चरम पर था..।
और आज हम वही है..चरम पर..या फिर विनाश के कगार पर..।।

इन सभ्यताओं का विनाश पानी के कारण हुआ..
इन क्षेत्र में पानी की इतनी किल्लत हो गई कि ये क्षेत्र वीरान हो गया..वंही मेसोपोटामिया में पानी का इतना दोहन किया गया कि पानी खारा हो गया और जमीन बंजर हो गई..।।
इन सभ्यताओं का विनाश पानी के कमी के वजह से ही हुआ..।।

और आज हम उसी कगार पर है..।।

विश्व मे 26%(2.2 अरब ) से ज्यादा आबादी को शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नही है..।

~73 करोड़ से ज्यादा लोगों को पानी पीने के लिए आधे घंटे का सफर करके तालाब या नदी से पानी पीने के लिए जाना होता है..
4अरब लोग, लगभग आधी आबादी को कम से कम 1 महीना पानी की किल्लत से जूझना होता है..।।

ये सारा आंकड़ा AI के शुरुआत से पहले का है..और AI कंपनी, पानी की खपत की सही जानकारी नही दे रही है..।।

कुछ रिपोर्ट के अनुसार-
दुनियाभर में जितना बोतलबंद पानी का खपत हो रहा है,उससे ज्यादा AI पानी का खपत कर रहा है..।।

2025 में 312-765 अरब लीटर पानी का खपत AI के द्वारा किया गया है।
यानी 1 व्यक्ति 3 लीटर पानी पीता है..तो सालभर में लगभग 1095 लीटर यानी 70 करोड़ लोगों का सालाना पानी AI पी रहा है..(73 करोड़ लोग नदी/तालाब का पानी पीने को मजबूर है)



आप कल्पना कर सकते है..
आज जितने लोगों के हाथ में मोबाइल है,अगर सभी लोग यूट्यूब,व्हाट्सएप या अन्य सोशल मीडिया की तरह AI का इस्तेमाल करने लगे तब क्या होगा..??

इसका असर दिखने लगा है..
नवी मुंबई में ,UP में,बंगलुरु में..और कई जगह जंहा-जंहा डाटा सेन्टर का कार्य चालू है..
•UP में पहले बोरबेल(चापाकल) से 60-70 मीटर खुदाई करने पे पानी आ जाता था,अब 100मीटर खुदाई करने पर पानी आता है।।
•वंही नवी मुंबई में रहने वाले कई लोग आपको कहते मिल जाएंगे 10 साल पहले तक पानी की किल्लत नही थी मगर अब हरेक साल पानी की समस्या होती है..।।
•बंगलुरु की समस्या से तो सब अवगत है..।

मगर इन समस्याओं से हमें क्या लेना,बस कुछ दिन,कुछ साल रुकिए..जब आपके हिस्से का भी पानी AI पी जाएगा तब आप भी चिल्लायेंगे..।।



वैसे भी इन समस्याओं का सबसे ज्यादा असर भारत के उन लोगों पे पड़ेगा जो हाशिये पे है..और जो हाशिये पे है..आज 5kg अनाज से खुश है,तो कल 100 लीटर पानी से खुश रहेंगे..।।

हम आप उस भयावह स्थिति को अभी नही देख रहे है..मगर आने वाले सालों में उन समस्या से रु-ब-रु होना ही पड़ेगा..।।

मैं डरा नही रहा हूँ, बस वास्तविकता से अवगत करा रहू है..।

एक हाशिये पे खड़ा इंसान कीपैड मोबाइल चला रहा है,मगर उसे भी 299₹ का रिचार्ज करवाना पड़ रहा है..जबकि वो न 2G,3G,4G, 5G यूज़ कर रहा है...।और मजबूरी ये है कि अब सारे काम मे मोबाइल नंबर लगता ही है..अगर रिचार्ज न कराये तो sim बंद, अगर sim बंद तो OTP नही आएगा..अगर OTP नही आएगा तो सरकार के कई योजनाओं का लाभ नही उठा पायेगा..।।

इसी तरह आप AI इस्तेमाल करें या न करें.. मगर इसकी कीमत चुकानी ही होगी..क्योंकि कोई ऑप्शन ही नही है..।

अगर इसका कोई समाधान न ढूंढा गया...तो वो दिन दूर नही जब हड़प्पा सभ्यता की तरह भारत के बेंगलुरु,नवी मुंबई को किताबों में पढ़ना पड़ेगा..।।

क्या आपके पास कोई समाधान है..??

AI आज जरूरत है,हम,आप इससे मुँह मोड़ नही सकते,AI भारत को सुपर पावर बना सकता है..जिस तरह संचार क्रांति ने भारत को आर्थिक रूप से सशक्त किया उसी तरह AI क्रांति भारत को सुपर पावर बना सकता है...।
मगर इसके दुष्परिणाम के निराकरण के लिए हमारे पास समाधान होना चाहिए..।
AI से घबराए नहीं, बल्कि अपने प्रगति में सही इस्तेमाल करें।।


सोमवार, 16 फ़रवरी 2026

नजरिया..हमारे धर्मग्रंथ और एलियन...

क्या एलियन होते है..??
इसका जबाब न हम, हां में दे सकते है,और न ही, ना में..।

हम भारतीय तो बिल्कुल नही कह सकते है कि एलियन नही होते..
क्योंकि हमारे धर्म ग्रंथ में जिस भूत, पिशाच, दैत्य,प्रेत, असुर,यक्ष, बेताल इत्यादि का जिक्र किया जाता है,आखिर वो लोग है कौन..?




इनके बारे में हमेशा, हमलोगों को सिर्फ गलत बातें ही बताया गया..
बल्कि इन लोगों ने मानवों के साथ मिलकर कई अच्छे काम किये है..
●जिसमें सबसे प्रमुख "समुंद्र-मंथन" का जिक्र आता है..
साथ ही कई "गण"(भूत, प्रेत,पिशाच, डाकिनी और शाकिनी इत्यादि) भगवान शिव के सेना में शामिल है..।

●अभी भी ग्रामीण भारत मे क्षेत्रपाल का मंदिर मिल जाएगा..ये मंदिर गाँव के रक्षा के लिए बनाया जाता है..।ये मंदिर सामान्यतः गाँव के सबसे अंत मे मिलेगा..(अक्सरहाँ हम इसे ब्रह्म बाबा के मंदिर के रूप में मानते है..)

●हममें से कई लोग विक्रम और बेताल की कहानी जरूर सुने होंगे..क्या आपने या हमने सोचा है..ये बेताल कौन है..??
बेताल के IQ(इंटेलिजेंस कोशेंट) लेवल पे हमलोगों ने कभी गौर ही नही किया..।।

● वंही जब हम हनुमान चालीसा पढ़ते है तो उसमें एक पंक्ति है-"भूत पिशाच निकट नही आवै, महावीर जब नाम सुनावै"..ये भूत,पिशाच है कौन जिसे हनुमान जी नियंत्रित करते है..
वंही जब हम हनुमान जी की "पंचमुखी" छवि देखते है,तो वो कुछ और ही कहता है..।

बौद्ध धर्म में भी "धर्मपाल" की आकृति वाली मूर्ति दिखती है,जो पिशाच जैसा ही मिलता जुलता है..बौद्ध मान्यता ये है कि पहले ये नकारात्मक थे,मगर बौद्ध की शिक्षाओं से प्रभावित होकर धर्म और मानवता के रक्षक बन गए..

जैन धर्म मे भी "यक्ष-यक्षिणी" की मूर्तियां मिलती है,जो द्वारपाल का कार्य करती है,मानव से बिल्कुल ही अलग दिखती है..।

वंही अन्य धर्म मे भी ऐसे लोगों का उल्लेख है,जिन्हें मानव के हितैषी के रूप में दर्शाया गया है..

इस्लाम धर्म मे "जिन्नात" का उल्लेख है..कहा जाता है कि कुछ जिन्न सूफी संतों और पैगम्बरों के मददगार भी रहे है,वही बुरे जिन्न को "इबलीस" (शैतान)का अनुयायी माना जाता है..।

ईसाई धर्म मे मुख्य रूप से "डेमन्स" और "फालेन एंजेल्स" का जिक्र सर्वाधिक है,मान्यता ये है कि कभी ये फरिश्ते थे,मगर ईश्वर के विरुद्ध विद्रोह करने पर स्वर्ग से निकाल दिया गया..

●वंही यहूदी लोककथाओं में "डिब्बक" का उल्लेख मिलता है..।




हरेक धर्म में इनका अलग-अलग तरीके से जिक्र किया गया है..मगर सब किसी-न-किसी रूप से मानव के हितैषी ही रहें.. फिर ऐसा क्या हुआ कि मानव और इनमें अलगाव हो गया और उन्हें हम नकारात्मक रूप में लेने लगे..।।

-वर्तमान समय में भी जब हम आधुनिक शब्द "एलियन" का नाम लेते है तो एक नकारात्मक रूप में ही..
आखिर कुछ तो ऐसा अतीत में हुआ होगा..जो इन्हें हीरो से विलेन बना दिया..।।

फिर से हमारा सवाल है कि - "एलियन" होते है..??
हम जो चीज नही देखते इसका ये मतलब नही की वो चीज नही होते है..।।
हम बैक्टेरिया,वायरस,प्रोटोज़ोआ को नही देख पाते मगर वो है..सिर्फ है ही नही बल्कि हमारा अस्तित्व भी उनके हाथ मे है...😊

इस ब्रह्मण्ड🌏 को हम कितना जानते है...??
शायद 1% भी नही..।
सच बताऊ तो अभी हम पृथ्वी के भी कई रहस्य को नही जानते...।

एलोरा और वंहा की कुछ मूर्तियां कुछ तो संकेत संकेत करती है..।
क्रमशः...

रविवार, 11 जनवरी 2026

नजरिया..काम(ऊर्जा) और वासना(विस्तार)..

 "आवृतं ज्ञानमेतेन ज्ञानिनो नित्यवैरिणा 
     कामरूपेण कौन्तेय दुष्परेणानलेन च ।।"
भगवद्गीता के अनुसार- ज्ञानियों का ज्ञान इस काम रूपी शत्रु के द्वारा ढका हुआ है।यह कामवासना कभी न पूर्ण होने वाली और अग्नि के समान जला डालने वाली है।।


काम और वासना शब्द ज्योहीं हमारे जेहन में आते है..हम कुछ और ही सोचने लगते है..।
भारतीय दर्शन के अनुसार- इस प्रकृति का सृजन "काम(ऊर्जा)"से हुआ है..और इस ब्रह्मांड का प्रसार "वासना" से हुआ है...।

मगर आज इंसान की अधोगति का कारण काम और वासना ही है..
ये कैसी विड़बना है..??

"काम"
भारतीय संस्कृति में काम को जीवन का आवश्यक हिस्सा माना गया है..
सामन्यतः इसका अर्थ है-इच्छा,कामना और सुख की प्राप्ति।इन्द्रियों के माध्यम से संसार का आंनद लेना है।इसमें कला,सौंदर्य,,प्रेम और पारिवारिक सुख सब सम्मिलित है..।

भगवद्गीता में श्रीकृष्ण कहते है-
"धर्माविरुद्धो भूतेषु कामोsस्मि भरतर्षभ।"
- हे अर्जुन , मैं भूतों(प्राणियों) में धर्म के अनुकूल काम हूँ..।

 " काम ऐष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः ।
   महाशनो महापापमा विद्ध्येनमिह वैरिणम ।।"
जब रजोगुण से उत्पन्न होने वाला यह काम ही है जो क्रोध बनता है।यह कभी तृप्त न होने वाला और बड़ा पापी है..।।

अगर काम(ऊर्जा) का सही से इस्तेमाल किया, तो आप.. ईश्वर तत्व बन जाएंगे,अगर सही से नही इस्तेमाल किया तो आप स्वयं के साथ-साथ सबके शत्रु बन जाएंगे..।


-ये काम(ऊर्जा)कभी समाप्त नही होता,बस इसका स्वरूप बदलता है..
मगर हम ज्ञान के अभाव में काम का एक ही स्वरूप को समझते है..।जो दुःखदायी और पीड़ादायी है..।
हम भूल जाते है की..अगर काम का सही से इस्तेमाल किया तो सृजन होगा,अगल गलत तरीके से इस्तेमाल किया तो स्वयं के साथ दूसरों का भी विनाश होगा..और आज वही हो रहा है..लोग काम का दुरुपयोग ही कर रहे है..मगर कुछ लोग है जो इसके ऊर्जा का सही से सदुपयोग करके सृजन कर रहें है..।।

● वही सिंगमंड फ्रायड ने काम को "Libido"(जीवन ऊर्जा) कहा है,जो मनुष्य को सृजन(creation) और सुख की और ले जाता है..अगर इस ऊर्जा का सही से इस्तेमाल नही किया तो ये विनाशकारी हो जाता है..।।
 
"वासना"
जिस तरह काम ऊर्जा है,उसीतरह उसके विस्तार का भाव "वासना" है..।
जंहा काम होगा वंहा वासना होगा ही..
बिना काम के वासना का कोई अस्तित्व नही है..।
जब तक दिए में तेल न हो तबतक दिया कैसे जलेगा..जब दिया जलेगा ही नही तो उसके प्रकाश का विस्तार कैसे होगा..।।

हम अक्सरहाँ काम और वासना को एक ही समझते है..मगर दोनों एक दूसरे से अलग होते हुए भी भिन्न नही है..जैसे दिए का जलना काम है,तो उसकी रोशनी वासना है..।

वासना क्या है-
"महोपनिषद" के अनुसार-
"दृढ़भावनया त्यक्तपुर्वापरविचारणं।
  यदादानम पदार्थस्य वासना सा प्रकीतिर्ता।।"
" जब मनुष्य बिना किसी सही गलत के विचार के ,केवल तीव्र मानसिक संस्कार के वशीभूत होकर किसी वस्तु को ग्रहण करता है या उसकी और भागता है,तो उसे ही वासना कहता है..।"
ये उसी तरफ भागता है..जिस तरफ हमारी काम(ऊर्जा) उद्विग्न होता है..।

मनुस्मृति के अनुसार वासना कभी खत्म नही होता..
"न जातु कामः कामानामुपभोगेन शाम्यति।
 हविषा कृष्ण वत्यमैर्व भूय ऐवाभिवर्धते ।।"
काम की पूर्ति करते रहने से वासना कभी शांत नही होता,बल्कि ठीक उसी प्रकार बढ़ता है,जिस तरह अग्नि में घी डालने से आग धधकने लगता है।

काम और वासना जिंदगी का ज्योतिपुंज है,बिना इसके,जीवन का हम कल्पना नही कर सकते..।
अब निर्भर हम पे करता है..की हम इस ज्योतिपुंज को किस और ले जा रहे है..अगर हम अपने काम को उन्नति की और ले जा रहे है,तो वासना इसका विस्तार करेगा..अगर अवनति की और ले जा रहे है,तो भी वासना इसका विस्तार करेगा..।

क्या हम काम और वासना से छुटकारा पा सकते है..??
तो इसका जबाब ये है कि,क्या हम बिना सूर्य के जीवन व्यतीत कर सकते है..??
काम एक ऊर्जा है,और बिना ऊर्जा के जीवन का कोई अस्तित्व नही है..हां हम अपने ऊर्जा का स्वरूप बदल कर एक स्तर से दूसरे स्तर पर पहुंच सकते है..उस परम ब्रह्म ऊर्जा में खुद को समाहित कर सकते है..जिसे हम मोक्ष कहते है..।
ऊर्जा कभी खत्म नही होती,बल्कि उसका स्वरूप बदलता रहता है..। 
इसलिय अपने कामवासना से भागें नही बल्कि उसे सही दिशा में रूपांतरित करके अपना और समाज का कल्याण करें..।

इसे रूपांतरित कैसे करें..??
इसका जबाब संभव नही है,क्योंकि हम सब का ऊर्जा स्रोत तो एक ही है,मगर उसका पथ अलग-अलग है..इसलिय सबके जबाब अलग-अलग होंगे..
हां हम स्रोत के आधार पर ये कह सकते है कि ऊर्जा रूपांतरित करने का एक माध्यम ईश्वरभक्ति है..जो सबके लिए है।
तो ईश्वर का ध्यान करें,ऊर्जा रूपांतरित जरूर होगा..।




Yoga for digestive system