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शुक्रवार, 11 सितंबर 2026

जरा सोचिएगा..आपके हाथ मे कौन सा कलम है..

•भारत आज विश्व की 5वी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में से एक है..
•क्रय शक्ति(purchasing power) के अनुसार तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है..
•GDP ग्रोथ के अनुसार सबसे तेज ग्रोथ करनेवालों देशों में सबसे ऊपर है..।
•जनसंख्या में विश्व मे पहले पायदान पर है..।
•सैन्य शक्ति में विश्व मे चौथा स्थान है..।
•मैन्युफैक्चरिंग में विश्व मे पांचवा स्थान है..(~विश्व का 3%)
•वैश्विक निर्यात में (गुड्स और सर्विस) WTO के अनुसार ~12-14वाँ स्थान..
•वैश्विक आयात में(गुड्स और सर्विस) WTO के अनुसार ~8-10वॉ स्थान..
•नवीनकरणीय ऊर्जा में विश्व मे 3रा स्थान..

ये सब सुनकर पढ़कर गौरवान्वित महसूस करते है हम..।
मगर..
क्या आपको पता है..??
आप जिस पेन से लिखते है..
या लिख रहे है..
क्या वो "मेड इन इंडिया" है..?


हमारा इस और कभी ध्यान ही नही जाता है..
मेरा भी नही जाता..
मगर अचानक लिखते वक्त मेरा ध्यान पेन के ढक्कन पर गया जिसपर जापान लिखा था..।
शायद इस पेन ने इसलिए लिखने की दुःसाहस की,क्योंकि ये महंगी थी..।
मगर बाजार में जितने भी लोकप्रिय पेन है,जिसका आप नाम जानते है..
वो अपने देश का नाम नहीं लिखते..
शायद इसलिए की कंही हमें तकलीफ न हो..
कि विश्व के 5वी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश आज भी दूसरे देशों का बनाये हुए पेन का इस्तेमाल करता है..।।

क्या आपको पता है..??
भारत मे राइटिंग इंस्ट्रूमेंट का बाजार ~4500-5500 करोड़ का है (600-700 मिलियन $) जोकि संगठित मार्केट का वैल्यू है,अगर असंगठित(बिना ब्रांड) को जोड़ेंगे तो ये वैल्यू इससे भी बड़ा है..।।

आपको जानकर हैरानी होगी कि.. ~40-45% हिस्सेदारी प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष रूप से विदेशी कंपनियों का है..।

आपको ये जानकर और हैरानी होगी..कि ~25% पूरे मार्केट में हिस्सेदारी रखने वाला cello भारतीय कंपनी नहीं है..है न थोड़ा अजीब क्या cello भारतीय कंपनी नही है..?? हां अब नही है..2015 में फ्रांस की कंपनी(societe BIC) ने इसका अधिग्रहण कर लिया..।

चलिये एक और झटका देता हूँ..
जब भी एक स्लिम पतली पेन का नाम लिया जाएगा तो सबसे पहले Reynolds का नाम आएगा..
क्या आपको पता है..??
ये पेन कंहा की है..?
ये पेन अमेरिकन है..।
एक और नाम है..
जिसका नाम अक्सरहाँ हम गौरवान्वित होकर लेते है..
"Parker" ये भी अमेरिकन पेन ही है..
दोनो पेन "newell Brands(USA)" के द्वारा ही बनाया जाता है।।

भारत मे 100₹ से ऊपर बिकने वाली 90% कलम भारतीय नही है..उसपर विदेशी कंपनी का एकाधिकार है..।

आपका इनमें से फेवरेट पेन कौन सा है..??
Reynolds, Pilot,Cello, Schneider, Uni-ball, Parker, Montblanc, Lamy,  Cross, sheaffer..



क्या इनमें से कोई फेवरेट पेन है आपका..??
अगर हां..
तो आप देशभक्त नही है..😊क्योंकि ये सभी पेन विदेशी है..।।

तो फिर सवाल उठता है कि मेड इन इंडिया पेन कौन सा है..??
तो है कुछ लोकप्रिय कलम जो 100% मेड इन इंडिया है..
Linc , Flair, GM pens(Rorito)..
आपका इनमें से कौन सा फेवरेट है..??

अगली बार जब लिखियेगा तो सोचिएगा..
क्या आपके हाथ मे जो पेन है,क्या वो इंडियन है..।।






शनिवार, 5 सितंबर 2026

शिक्षक कौन है..

शिक्षक संस्कृत की 'शिक्ष' धातु से बना है जिसका अर्थ होता है,सीखना।
जब 'शिक्ष' धातु में 'क'(प्रत्यय) जुड़ जाता है तब शिक्षक बन जाता है,जिसका अर्थ होता है जो हमें सिखाता है..या किसी चीज का बोध कराता है..वो है शिक्षक..।

हमारे जीवन में कई शिक्षक आते है..और सबका हमारे जीवन मे अमूल्य योगदान होता है..।
चलिये आज उन शिक्षकों को जानते है..
जिन्हें हम शिक्षक के रूप में देखते ही नहीं..।


• माता-पिता - ये हमारे पहले शिक्षक होते है..जो जिंदगी का नींव रखते है..
 यही हमारे अंदर संस्कार का बीज बोते है..।
• दादा-दादी/नाना-नानी - ये हमारे दूसरे शिक्षक होते है,जो हमारे अंदर किस्से कहानियों के माध्यम से हमारे अंदर नैतिकता का बीजारोपण करते है..
मगर अफसोस आज आनेवाली पीढ़ी इनके शिक्षा से वंचित होते जा रहे है..।

• बड़े भाई-बहन - ये हमारे तीसरे शिक्षक होते है,जो हमें बाहरी दुनिया से अवगत कराते है,क्या सही है,क्या गलत है ये अवगत कराते रहते है..मगर न जाने बड़े होने के बाद क्या हो जाता है..इनके बीच में खाईयां बढ़ जाती है..।

• शिक्षक - इनका हमारे जीवन में अहम योगदान है..अगर ये न होते तो हम इंसान नही हो पाते..ये वो कलाकार होते है जो मूर्त को अमूर्त बनाते है..।

• मित्र - ये वो शिक्षक है..जिनके पास पूरे ब्रह्मांड का ज्ञान है,इनके पास हरेक समस्या का समाधान है..अगर आपके पास इस तरह के एक भी शिक्षक नहीं है तो आपका जीवन नीरस और व्यर्थ है,..।

• पति/पत्नी - ये वो शिक्षक है..जो आपको फर्श से अर्श पर ले जा सकती/ता है,या फिर अर्श से फर्श पे ला देगी/गा..ये वो शिक्षक है..जो कोई नहीं कर सकता वो,ये हमारे जिंदगी के साथ कर देते है..।ये आपके व्यक्तित्व को विस्तारित या फिर संकुचित कर देते है..।

• पुस्तक :- एक अच्छी पुस्तक आपके जिंदगी में आमूलचूल परिवर्तन ला सकता है,कई ऐसे पुस्तक है जो अभी..।

•मेंटर/कोच :- ये जिंदगी को सही दिशा देते है..ये हमारे खामियां को दूर करते है..कभी-कभी ये उत्प्रेरक का काम करते है..और जिंदगी को नई ऊंचाइयों पे ले जाने का काम करते है..।

• गुरु - इनका स्थान सबसे ऊपर है..क्योंकि ये हमें हमसे ज्यादा जानते है..ये हमारे अंदर छुपे हुए उन पहलुओं से अवगत कराते है..जिससे हम ताउम्र अनभिज्ञ रहते है..।जब हम हताश और निराश होते है तब ये ही जिंदगी में प्रकाश बिखेरते है..।मगर गुरु को ढूंढना बहुत मुश्किल है..अपने आप को जबतक योग्य नहीं बनायेगें तबतक गुरु की कृपा नहीं हो पायेगा..।

वैसे शिक्षक कोई भी हो सकता है..क्योंकि शिक्षक का तात्पर्य ही है..जो हमें सिखाये, वही शिक्षक है..।


शुक्रवार, 4 सितंबर 2026

अपने बच्चों को कृष्ण के चरित्र से अवगत कराए..

अपने बच्चों को सिर्फ राधा कृष्ण के रूप में न सजाए..
बल्कि उन्हें राधा कृष्ण के चरित्र से भी अवगत कराएं..
वैसे पहले आप स्वयं अवगत हो जाये..।
क्योंकि आप स्वयं उनके चरित्र से अवगत नहीं है..
क्योंकि अगर आप उनके चरित्र से अवगत होते..
तो शायद आप कभी नही चाहते कि..
आपके बच्चों के ऊपर कृष्ण और राधा की परछाइयां भी पड़े..।




चलिये कुछ सवाल का जबाब दीजिए..

•क्या आप चाहते कि बच्चे को जन्म देते ही उसे आपसे अलग कर दिया जाय..(कारगाह में जन्म के बाद माँ से अलग होना)

•क्या आपके पास इतनी हिम्मत है कि जिस बच्चे को आपने बचपन से पाला-पोसा उसे ~11 साल के उम्र में मौत के मुँह में भेजे..।
(कंस के बुलावे पे वृंदावन छोड़कर मथुरा जाना..)

•क्या आप चाहते कि आपके संतान को सबकुछ छोड़ करके एक जगह से दूसरे जगह जाना पड़े..(जरासंध के बार-बार आक्रमण करने के कारण मथुरा छोड़कर द्वारिका जाना)

•क्या आप चाहते कि आपके संतान को उस चीज के लिए दोषी ठहराया जाय जो गलती उसने किया ही नही है..।(युद्ध समाप्ति के बाद गांधारी द्वारा युद्ध का दोषी ठहराना)

जरा सोचिए..
क्या आप अब भी चाहते है के आपके बच्चों के जिंदगी में इस तरह की कठिनाई आये..एक माँ होने के नाते आप कभी नही चाहेंगे..
मगर कृष्ण को श्रीकृष्ण इन्हीं कठिनाइयों ने बनाया..
उन्होंने हरेक चुनौतियों को स्वीकार किया और उनका सामना किया..
उन्होंने किसी के ऊपर दोसरोपन नही किया..न ही चुनौतियों से भागने का कोशिस किया..इसिलिय वो कृष्ण से श्रीकृष्ण बन पाए..।।

अपने बच्चों को कृष्ण के व्यक्तित्व से अवगत कराएं..
उन्हें चुनौतियों से सामना करना सिखाया..
न कि उसे गोल-मटोल गोपाल बनाकर उत्सव मनाए..।
इस जन्माष्टमी अपने बच्चों में कृष्ण के व्यक्तित्व का बीज बोए..
जो उन्हें आने वाले परिस्थितियों से सामना करने में मदद करें..।

मंगलवार, 1 सितंबर 2026

जिंदगी एक दौड़ है..

मैं जिंदगी के रेस में बहुत पीछे रह गया..
इसका मुझे मलाल नहीं..
कि मैं पीछे रह गया..
क्योंकि मुझे पता है..
जिंदगी में एक मोड़ तो आएगी..
जो मुझे फिर से बहुत आगे ले जाएगी..।

जिंदगी एक रेस नहीं..
जिंदगी एक दौड़ है..
रेस तो वक़्त-वे-वक़्त खत्म हो जाती है..
मगर दौड़ कभी खत्म नही होती..।



हौंसला रखिये..
चेहरे पे मुस्कान रखिये..
और खुद पे विश्वास रखिये..
तब देखिए..
भले ही आज आप रेंग रहे है,चल रहें है,या फिर दौड़ रहे है..
यही निरंतरता..
आपका एक दिन अपना दौड़ लाएगा..।

विश्वास रखिये..
क्योंकि आप जानते है..
अपने काबिलियत को पहचानते है..
गिर के फिर से उठ खड़ा होना जानते है..।।


शनिवार, 4 जुलाई 2026

तुमसे भी बेहतर..

तुमसे भी बेहतर हैं,
कई इस जंहा में..
तुम्हीं गलतफहमी पाले हुए हो..
मुझसे बेहतर कौन है..
इस जंहा में..?

कोई बेहतर नही है..
इस जंहा में,
सब में,
कुछ-न-कुछ कमियां है ही..
इस जंहा में..

कुछ लोग अपने कमियों को दरकिनार कर..
और अपने खूबियों को निखार कर..
आगे निकल जाते है..
तो..
कुछ लोग अपने कमियों का रोना रोकर..
ताउम्र वंही के वंही रह जाते है..।

तुमसे भी बेहतर हैं,
कई इस जंहा में..
तुम्हीं गलतफहमी पाले हुए हो..
मुझसे बेहतर कौन है..
इस जंहा में..।



शुक्रवार, 3 जुलाई 2026

जिंदगी के दौड़ में..

मैं जिंदगी के दौर में बहुत पीछे रह गया हूँ..
मगर मुझे उम्मीद अभी भी है..।
कोई मोड़ तो आएगा..
जो मुझे सबसे आगे ले जाकर खड़ा कर जाएगा..।

मगर वो मोड़ कब आएगा..
इसका कोई पता नही..
मगर वो मोड़ जरूर आएगा..।

बस मुझे सजग और सतर्क रहना है..
कंही वो मोड़ गलती से छूट न जाये..
नही तो..
मैं जिंदगी के दौड़ में पीछे ही रह जाऊंगा..।।



बुधवार, 10 जून 2026

अपने "क्यों" को ढूंढिए

यू ही कोई छोड़ के जाता है क्या..
यू ही कोई मुँह मोड़ के जाता है क्या..।
क्या करें..
जाना तो सब को है..।
जो रुक गए..
वो वहीं रुक गए..।
जो निकल गए..
वो बुद्ध और महावीर बन गए..।

निकलना तो सब को है..
मगर जो "क्यों" के लिए निकलते है..
वो नए कीर्तिमान रचते है..
और नए मार्ग प्रशस्त करते है..।

वैसे तो हर क्षण..
लोग निकल रहे है..
व्यर्थ की जिन्दगीं गवां कर..।


रविवार, 19 अप्रैल 2026

भारतीय महिला..

कुछ दिनों से हमारे देश में महिलाओं की खूब चिंता हो रही है..क्योंकि संसद में "महिला आरक्षण विधेयक" लाया गया..जिसमें महिलाओं को लोकसभा और विधानसभा में 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया था..।
इस विधेयक को 2/3 बहुमत से पास होना था जो नही हो पाया..।

आप क्या सोचते है..??
क्या सरकार को सच में महिला की चिंता है..??
या फिर विपक्ष को महिला की कोई चिंता ही नही है..??

मगर वास्तविकता ये है कि इनदोनों में से किसी को महिला की चिंता नही है,इनदोनों को अपने वोट बैंक की चिंता है..।।
ढेर सारे सवाल खड़े किए जा सकते है..पक्ष और विपक्ष के ऊपर..।

इनसब को छोड़िये...
क्या आपको अपने परिवार की महिलाओं की चिंता है..??

हमारे भारत मे 3 तरह की महिलाएं है-

•पहली श्रेणी में वो महिला है..जो अपना अधिकार जानती है,और उसे लड़ कर लेती है..

•दूसरी श्रेणी में वो महिला है,जो अपना अधिकार तो जानती है,मगर उसके लिए लड़ती नही है..।

•तीसरी श्रेणी में वो महिला है..जो अपना अधिकार जानती ही नही है..।

मगर आपको जानकर आश्चर्य होगा कि..इन तीनों महिला का हश्र एक जैसा ही है..।

•पहली श्रेणी की महिला को अपने समाज,परिवार सबसे उपेक्षा झेलनी पड़ती है..और जिंदगी एकांकी हो जाती है..।मगर कभी-कभी जब ये विद्रोह करती है तो इनके विद्रोह को स्वीकार कर इनसे दूरियां बना लिया जाता है..।

•दूसरी श्रेणी की महिला को परिवार और समाज मे इज्जत तो मिलता है,मगर अपने ही नजरों में वो गिर जाती है,क्योंकि वो गलत को गलत और सही को सही नही बोल पाती..मगर कभी-कभी जब ये विद्रोह करती है तो इनके विद्रोह को दबा दिया जाता है..।

•तीसरी श्रेणी की महिला को कोई फर्क ही नही पड़ता,उन्हें लगता है कि महिला शोषण के लिए ही पैदा हुई है..मगर कभी-कभी जब ये विद्रोह करती है तो इनके विद्रोह को कुचल दिया जाता है..।




चलिये महिलाओं की दयनीय स्थिति को देखते है..
●NCRB के अनुसार महिलाओं के प्रति होनेवाले अपराधों में 32% अपराध परिवार वाले ही करते है..।

●NCRB के अनुसार ही भारत मे हरेक 15 से 16 मिनट में एक बलात्कार का मामला दर्ज किया जाता है..मगर सामाजिक शर्म के कारण कई मामले दर्ज ही नही होते..।

●NCRB के अनुसार महिलाओं के साथ साइबर अपराध की घटना 25% की वृद्धि से बढ़ोतरी हो रही है..।

सवाल ये है कि..क्या सरकार को सच मे ही महिला की चिंता है..??

महिला के साथ जी घृणित कार्य करता है,उसे सजा तक नही मिलता है,लंबी कानूनी प्रक्रिया के कारण लड़की/महिला परिवार,समाज, कानून और कोर्ट के सामने थक कर हार मान जाती है..।
अगर सरकार को सच मे चिंता है तो महिलाओं के साथ होने वाली हरेक घटनाओं को 1-3 महिना में सुलझाकर अपराधी को दंडित किया जाय..।
मगर आज अपराधी बेशर्म की तरह खुले घूमते है,और जो निर्दोष है वो शर्म के मारे अपने चेहरे ढक कर घूम रही है..।
सबसे पहले हमें ये नजरिया बदलना होगा..।।

★ महिलाओं के प्रति हिंसा का मुख्य कारण-
• पितृसत्तात्मक सोच- जरा सोचियेगा हम मंदिर में देवियों के आगे तो सर् झुकाते है,मगर बाहर क्या करते है..(मैंने उन महिलाओं को भी देखा है,जो अपने व्यवहार के कारण आपको मन ही मन नतमस्तक होने पे मजबूर कर देती है,मगर मैंने कुछ उन महिलाओं को भी देखा है,जो अपने व्यवहार के कारण आपको उनके प्रति नफरत पैदा कर देती है..मगर इसका कारण भी कोई पुरुष ही है..)

• आर्थिक निर्भरता- महिला जबतक दूसरे पर आश्रित रहेंगी तबतक उनका शोषण होता रहेगा..मगर ये एक ही पहलू है,शहरों में अब अधिकांश महिला आत्मनिर्भर है,मगर अब भी उनका शोषण हो रहा है,या तो घर मे या फिर ऑफिस में..आखिर महिला करें तो क्या करें..??

• कानूनी प्रक्रिया में देरी- कानून ढेर सारे है,मगर इसकी प्रक्रिया इतनी धीमी है कि महिलाएं थक जाती है..।

क्या इसका कोई हल नही है..?
अगर सच कहूं तो नही है..
क्योंकि पुरूष अपना नजरिया नही बदलने वाले है,जिस रोज उनका नजरिया महिला के प्रति बदल जायेगा, उस रोज महिला के लिए कानून बनाने के लिए या उनके अधिकार के लिए सरकार को कुछ करने की जरूरत नही पड़ेगा..।।

•आपको जानकर हैरानी होगी कि पूरे विश्व मे महिलाओं की स्थिति दयनीय है..उन देशों में भी,जिन देश मे 90% महिला आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है..
•उन देशों में भी महिला की स्थिति दयनीय है,जिन देश मे महिला के प्रति हिंसा के लिए कड़े कानून बनाये गए है...।।

•क्या आपको अपेस्टिन फ़ाइल की जानकारी है..?
•क्या आप अरब देशों के महिला की स्थिति से वाकिफ है..?

इन सब स्थितियों को देखते हुए..
हमारी भारतीय महिलाओं की स्थिति अच्छी है..
इन्हें और अच्छा करने के लिए हम पुरुषों को और नम्र होने की जरूरत है..।



सोमवार, 13 अप्रैल 2026

मैं खो जाना चाहता हूँ..

मैं खो जाना चाहता हूँ ऐसे..
जैसे मेरा अस्तित्व कभी था ही नही..।
मैं खो जाना चाहता हूं ऐसे..
जैसे किसी का अस्तित्व था ही नही..।
मैं खो जाना चाहता हूं ऐसे..
जैसे उस अस्तित्व का अस्तित्व कभी था ही नही,ऐसे..
मैं खो जाना चाहता हूं ऐसे..
जैसे मेरा अस्तित्व कभी था ही नही ऐसे..।



रविवार, 12 अप्रैल 2026

कभी-कभी मैं सोचता हूँ..

कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
मैं कर क्या रहा हूँ..??
कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
मैं जा किधर रहा हूँ...??
कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
मैं व्यर्थ ही जीवन गवां रहा हूँ..।
कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
की कुछ सोच ही नही पा रहा हूँ..।
कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
की सोचना ही छोड़ दूं..
मगर..
सोचना ही छोड़ दु..
तो फिर कैसे अपने सोच को साकार करू..।

इस सोच ने ही तो..
इस संसार के अस्तित्व को साकार किया..
इस सोच ने ही तो..
इस विश्व का विस्तार किया..
इस सोच ने ही तो..
कई संस्कार का विस्तार कर..
नए कीर्तिमान का निर्माण किया..।

कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
की सोचना ही छोड़ दूं..।
मगर..
इस तरह की सोच तब आती है..
जब जिंदगी..
हमारे अनुकूल नही चलती..।
मगर फिर सोचता हूँ..
आखिर हमारे अनुकूल चलती ही क्या है..??
जो चल रही है..
अगर उसे ही ईमानदारी से अपने अनुकूल बना ले..
तो फिर सोचना ही क्या है..।

कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
मैं कर क्या रहा हूँ..??
कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
मैं जा किधर रहा हूँ...??
कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
मैं व्यर्थ ही जीवन गवां रहा हूँ..।
कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
की कुछ सोच ही नही पा रहा हूँ..।
कभी-कभी मैं सोचता हूँ..
की सोचना ही छोड़ दूं..।




गुरुवार, 12 मार्च 2026

महिलाएं पुरुष से बेहतर क्यों है..??

क्या आपको पता है..
आपके घर में सबसे पहले कौन उठता है..??
आपके घर मे सबसे बाद में कौन सोता है..??
सबसे ज्यादा आपका ख्याल कौन रखता है..??
प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से आपके घर में सर्वाधिक कार्य कौन करता है..??



इसका जबाब शायद हमसबको मिल गया होगा..।।

क्या आपको पता है..महिलाएं पुरुष से बेहतर क्यों है..??
चलिए कुछ रिसर्च के माध्यम से जानते है आखिर क्यों महिला पुरुष से बेहतर है..।

◆महिलाओं की इमोशनल इंटेलीजेंस पुरुषों से 86% बेहतर है..
-अमेरिकी कंसल्टेंसी फर्म 'कॉर्न फैरी हेय ग्रुप' के रिसर्च के मुताबिक महिलाएं 12 पैमाने में से 11 पैमाने पर पुरूष से इमोशनल इंटेलीजेंस में आगे है।

-2022 में भारत सहित 57 देशों में एक स्टडी हुआ था,जिसमे लोगों की आंखों की तस्वीर देखकर ये पता लगाना था कि वो क्या सोच रहे है..इसमें 36 देशों की महिलाओं ने पुरुष से बेहतर प्रदर्शन किया,जबकि 21 देश की महिला ने पुरुष की बराबरी की।

-अमेरिकन सायकोलॉजिस्ट डेनियल गोलमेन के अनुसार - बेहतर नतीजों के लिए जरूरी स्किल्स में से 67% इमोशनल इंटेलीजेंस ही है।
-हॉवर्ड बिज़नेस रिव्यु के अनुसार- असरदार लीडर्स में एक बात कॉमन होता है, वो इमोशनल इंटेलीजेंस से लबरेज होते है..।

◆महिलाएं तनाव में भी बेहतर फैसला लेती है..।
•यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया के 2016 के स्टडी के अनुसार बताया कि, जब दबाब बढ़ता है,तब महिलाएं पुरुष से बेहतर निर्णय लेती है।
•पीटरसन इंस्टीट्यूट के रिसर्च के अनुसार जिन कंपनियों में टॉप लीडरशिप में 30% महिलायें होती है,वो औसत से 15% ज्यादा प्रॉफिट कमाते है।

◆ महिलाएं कम बीमार पड़ती है,और सहने की क्षमता भी ज्यादा।
•महिलाओं में गंभीर बीमारियों से उबरने की क्षमता भी,पुरुषों से ज्यादा होता है,जंहा 1लाख पुरुषों में कैंसर से मरने वालों की संख्या 171 है,वंही महिला की संख्या 126 है..।
• साइंटिफिक स्टडी के अनुसार महिलाओं की जैविक बनावट इस तरह की होती है कि उन्हें पुरुष से बेहतर स्वास्थ्य प्रदान करता है..
•महिलाओं में दो X क्रोमोजोम पाया जाता है,जबकि पुरुष में X और Y क्रोमोजोम पाया जाता है..वैज्ञानिक शोध में पाया गया है कि X क्रोमोजोम में इम्यून सिस्टम से संबंधित सर्वाधिक जीन्स होते है।
•पुरुषों में प्रोजेस्ट्रोन और टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन का स्राव महिला से ज्यादा होता है,ये हॉर्मोन इम्यून सिस्टम के काम को सीमित कर देता है।
• महिलाओं में एस्ट्रोजन हॉर्मोन ज्यादा होता है।प्रेग्नेंसी के दौरान ये हॉर्मोन ज्यादा एक्टिव होकर महिलाओं की इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है।महिलाओं में मेंस्ट्रुअल साईकल के दौरान भी ऐसा होता है।

◆महिलाएं चीजे ढूंढने में पुरुषों से बेहतर होती है..।
आपने ये अक्सरहाँ देखा होगा,आपको जो चीज नही मिलती वो माँ/बहन/बीबी को झट से मिल जाती है..😊।
•महिलाओं में विजुअल मेमोरी पुरुषों से बेहतर होता है..वो चेहरा,बातचीत,चीजें याद रखने में पुरुष से बेहतर होती (अपवाद,पुरुष रास्ता याद रखने में बेहतर)
• ब्रेन के MRI स्टडी से पता चला है कि पुरुष जब कोई काम पर फोकस  करता है,तो उसका दिमाग एक ही एरिया में केंद्रित होता है,जबकि महिलाएं अपने दिमाग का कई रूप में इस्तेमाल करती है।

◆ महिलाएं पुरूष से औसतन 5 साल ज्यादा जीती है..
• यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन डिवीजन के अनुसार पुरुष की औसत आयु 71 वर्ष की है,जबकि महिला की औसत आयु 76 वर्ष है।(भारत मे 74 और 71 औसत आयु है)
•महिलाओं में जन्म से लेकर जीवन के हरेक फेज में उनके जीने की संभावना ज्यादा होती है।
•जन्म - यूनिवर्सिटीज ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया के रिसर्च के अनुसार - लड़को के तुलना में लड़कियां के प्री-मैच्योर पैदा होने की संभावना 60% तक कम होती है।लड़कियों में शिशु मृत्यु दर भी कम होता है।
•जवानी - हॉवर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्च के अनुसार इंसानी दिमाग के आगे का हिस्सा फैसले लेने की क्षमता को कंट्रोल करता है।महिलाओं में यह पुरुषों से जल्दी विकसित होता है।इस कारण हादसों या हिंसा से महिलाओं की मौत पुरुषों से कम होती है।
•बुढापा - फेफड़ों की समस्या, दिल की बीमारी जैसी गंभीर समस्याएं महिलाओं में कम होती है।इसकी एक वजह पुरुषों का धूम्रपान करना है।

आपको क्या लगता है..
महिलाएं पुरुष से बेहतर क्यों है..??

शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026

AI विनाश की और बढ़ता कदम..

क्या आपको पता है..
हड़प्पा/सिंधु सभ्यता,माया सभ्यता या फिर मेसोपोटामिया सभ्यता का विनाश क्यों हुआ..??

और इन सभ्यता का विनाश तब हुआ जब ये अपने चरम पर था..।
और आज हम वही है..चरम पर..या फिर विनाश के कगार पर..।।

इन सभ्यताओं का विनाश पानी के कारण हुआ..
इन क्षेत्र में पानी की इतनी किल्लत हो गई कि ये क्षेत्र वीरान हो गया..वंही मेसोपोटामिया में पानी का इतना दोहन किया गया कि पानी खारा हो गया और जमीन बंजर हो गई..।।
इन सभ्यताओं का विनाश पानी के कमी के वजह से ही हुआ..।।

और आज हम उसी कगार पर है..।।

•विश्व मे 26%(2.2 अरब ) से ज्यादा आबादी को शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नही है..।

• ~73 करोड़ से ज्यादा लोगों को पानी पीने के लिए आधे घंटे का सफर करके तालाब या नदी से पानी पीने के लिए जाना होता है..
• 4अरब लोग, लगभग आधी आबादी को कम से कम 1 महीना पानी की किल्लत से जूझना होता है..।।

ये सारा आंकड़ा AI के शुरुआत से पहले का है..और AI कंपनी, पानी की खपत की सही जानकारी नही दे रही है..।।

कुछ रिपोर्ट के अनुसार-
• दुनियाभर में जितना बोतलबंद पानी का खपत हो रहा है,उससे ज्यादा AI पानी का खपत कर रहा है..।।

•2025 में 312-765 अरब लीटर पानी का खपत AI के द्वारा किया गया है।
यानी 1 व्यक्ति 3 लीटर पानी पीता है..तो सालभर में लगभग 1095 लीटर यानी 70 करोड़ लोगों का सालाना पानी AI पी रहा है..(73 करोड़ लोग नदी/तालाब का पानी पीने को मजबूर है)



आप कल्पना कर सकते है..
आज जितने लोगों के हाथ में मोबाइल है,अगर सभी लोग यूट्यूब,व्हाट्सएप या अन्य सोशल मीडिया की तरह AI का इस्तेमाल करने लगे तब क्या होगा..??

इसका असर दिखने लगा है..
नवी मुंबई में ,UP में,बंगलुरु में..और कई जगह जंहा-जंहा डाटा सेन्टर का कार्य चालू है..
•UP में पहले बोरबेल(चापाकल) से 60-70 मीटर खुदाई करने पे पानी आ जाता था,अब 100मीटर खुदाई करने पर पानी आता है।।
•वंही नवी मुंबई में रहने वाले कई लोग आपको कहते मिल जाएंगे 10 साल पहले तक पानी की किल्लत नही थी मगर अब हरेक साल पानी की समस्या होती है..।।
•बंगलुरु की समस्या से तो सब अवगत है..।

मगर इन समस्याओं से हमें क्या लेना,बस कुछ दिन,कुछ साल रुकिए..जब आपके हिस्से का भी पानी AI पी जाएगा तब आप भी चिल्लायेंगे..।।



वैसे भी इन समस्याओं का सबसे ज्यादा असर भारत के उन लोगों पे पड़ेगा जो हाशिये पे है..और जो हाशिये पे है..आज 5kg अनाज से खुश है,तो कल 100 लीटर पानी से खुश रहेंगे..।।

हम आप उस भयावह स्थिति को अभी नही देख रहे है..मगर आने वाले सालों में उन समस्या से रु-ब-रु होना ही पड़ेगा..।।

मैं डरा नही रहा हूँ, बस वास्तविकता से अवगत करा रहू है..।

एक हाशिये पे खड़ा इंसान कीपैड मोबाइल चला रहा है,मगर उसे भी 299₹ का रिचार्ज करवाना पड़ रहा है..जबकि वो न 2G,3G,4G, 5G यूज़ कर रहा है...।और मजबूरी ये है कि अब सारे काम मे मोबाइल नंबर लगता ही है..अगर रिचार्ज न कराये तो sim बंद, अगर sim बंद तो OTP नही आएगा..अगर OTP नही आएगा तो सरकार के कई योजनाओं का लाभ नही उठा पायेगा..।।

इसी तरह आप AI इस्तेमाल करें या न करें.. मगर इसकी कीमत चुकानी ही होगी..क्योंकि कोई ऑप्शन ही नही है..।

अगर इसका कोई समाधान न ढूंढा गया...तो वो दिन दूर नही जब हड़प्पा सभ्यता की तरह भारत के बेंगलुरु,नवी मुंबई को किताबों में पढ़ना पड़ेगा..।।

क्या आपके पास कोई समाधान है..??

AI आज जरूरत है,हम,आप इससे मुँह मोड़ नही सकते,AI भारत को सुपर पावर बना सकता है..जिस तरह संचार क्रांति ने भारत को आर्थिक रूप से सशक्त किया उसी तरह AI क्रांति भारत को सुपर पावर बना सकता है...।
मगर इसके दुष्परिणाम के निराकरण के लिए हमारे पास समाधान होना चाहिए..।
AI से घबराए नहीं, बल्कि अपने प्रगति में सही इस्तेमाल करें।।


सोमवार, 16 फ़रवरी 2026

नजरिया..हमारे धर्मग्रंथ और एलियन...

क्या एलियन होते है..??
इसका जबाब न हम, हां में दे सकते है,और न ही, ना में..।

हम भारतीय तो बिल्कुल नही कह सकते है कि एलियन नही होते..
क्योंकि हमारे धर्म ग्रंथ में जिस भूत, पिशाच, दैत्य,प्रेत, असुर,यक्ष, बेताल इत्यादि का जिक्र किया जाता है,आखिर वो लोग है कौन..?




इनके बारे में हमेशा, हमलोगों को सिर्फ गलत बातें ही बताया गया..
बल्कि इन लोगों ने मानवों के साथ मिलकर कई अच्छे काम किये है..
●जिसमें सबसे प्रमुख "समुंद्र-मंथन" का जिक्र आता है..
●साथ ही कई "गण"(भूत, प्रेत,पिशाच, डाकिनी और शाकिनी इत्यादि) भगवान शिव के सेना में शामिल है..।

●अभी भी ग्रामीण भारत मे क्षेत्रपाल का मंदिर मिल जाएगा..ये मंदिर गाँव के रक्षा के लिए बनाया जाता है..।ये मंदिर सामान्यतः गाँव के सबसे अंत मे मिलेगा..(अक्सरहाँ हम इसे ब्रह्म बाबा के मंदिर के रूप में मानते है..)

●हममें से कई लोग विक्रम और बेताल की कहानी जरूर सुने होंगे..क्या आपने या हमने सोचा है..ये बेताल कौन है..??
बेताल के IQ(इंटेलिजेंस कोशेंट) लेवल पे हमलोगों ने कभी गौर ही नही किया..।।

● वंही जब हम हनुमान चालीसा पढ़ते है तो उसमें एक पंक्ति है-"भूत पिशाच निकट नही आवै, महावीर जब नाम सुनावै"..ये भूत,पिशाच है कौन जिसे हनुमान जी नियंत्रित करते है..
वंही जब हम हनुमान जी की "पंचमुखी" छवि देखते है,तो वो कुछ और ही कहता है..।

●बौद्ध धर्म में भी "धर्मपाल" की आकृति वाली मूर्ति दिखती है,जो पिशाच जैसा ही मिलता जुलता है..बौद्ध मान्यता ये है कि पहले ये नकारात्मक थे,मगर बौद्ध की शिक्षाओं से प्रभावित होकर धर्म और मानवता के रक्षक बन गए..

● जैन धर्म मे भी "यक्ष-यक्षिणी" की मूर्तियां मिलती है,जो द्वारपाल का कार्य करती है,मानव से बिल्कुल ही अलग दिखती है..।

◆वंही अन्य धर्म मे भी ऐसे लोगों का उल्लेख है,जिन्हें मानव के हितैषी के रूप में दर्शाया गया है..

●इस्लाम धर्म मे "जिन्नात" का उल्लेख है..कहा जाता है कि कुछ जिन्न सूफी संतों और पैगम्बरों के मददगार भी रहे है,वही बुरे जिन्न को "इबलीस" (शैतान)का अनुयायी माना जाता है..।

●ईसाई धर्म मे मुख्य रूप से "डेमन्स" और "फालेन एंजेल्स" का जिक्र सर्वाधिक है,मान्यता ये है कि कभी ये फरिश्ते थे,मगर ईश्वर के विरुद्ध विद्रोह करने पर स्वर्ग से निकाल दिया गया..

●वंही यहूदी लोककथाओं में "डिब्बक" का उल्लेख मिलता है..।




हरेक धर्म में इनका अलग-अलग तरीके से जिक्र किया गया है..मगर सब किसी-न-किसी रूप से मानव के हितैषी ही रहें.. फिर ऐसा क्या हुआ कि मानव और इनमें अलगाव हो गया और उन्हें हम नकारात्मक रूप में लेने लगे..।।

-वर्तमान समय में भी जब हम आधुनिक शब्द "एलियन" का नाम लेते है तो एक नकारात्मक रूप में ही..
आखिर कुछ तो ऐसा अतीत में हुआ होगा..जो इन्हें हीरो से विलेन बना दिया..।।

फिर से हमारा सवाल है कि - "एलियन" होते है..??
हम जो चीज नही देखते इसका ये मतलब नही की वो चीज नही होते है..।।
हम बैक्टेरिया,वायरस,प्रोटोज़ोआ को नही देख पाते मगर वो है..सिर्फ है ही नही बल्कि हमारा अस्तित्व भी उनके हाथ मे है...😊।

इस ब्रह्मण्ड🌏 को हम कितना जानते है...??
शायद 1% भी नही..।
सच बताऊ तो अभी हम पृथ्वी के भी कई रहस्य को नही जानते...।

एलोरा और वंहा की कुछ मूर्तियां कुछ तो संकेत संकेत करती है..।
क्रमशः...

रविवार, 11 जनवरी 2026

नजरिया..काम(ऊर्जा) और वासना(विस्तार)..

 "आवृतं ज्ञानमेतेन ज्ञानिनो नित्यवैरिणा 
     कामरूपेण कौन्तेय दुष्परेणानलेन च ।।"
भगवद्गीता के अनुसार- ज्ञानियों का ज्ञान इस काम रूपी शत्रु के द्वारा ढका हुआ है।यह कामवासना कभी न पूर्ण होने वाली और अग्नि के समान जला डालने वाली है।।


काम और वासना शब्द ज्योहीं हमारे जेहन में आते है..हम कुछ और ही सोचने लगते है..।
भारतीय दर्शन के अनुसार- इस प्रकृति का सृजन "काम(ऊर्जा)"से हुआ है..और इस ब्रह्मांड का प्रसार "वासना" से हुआ है...।

मगर आज इंसान की अधोगति का कारण काम और वासना ही है..
ये कैसी विड़बना है..??

"काम"
भारतीय संस्कृति में काम को जीवन का आवश्यक हिस्सा माना गया है..।
सामन्यतः इसका अर्थ है-इच्छा,कामना और सुख की प्राप्ति।इन्द्रियों के माध्यम से संसार का आंनद लेना है।इसमें कला,सौंदर्य,,प्रेम और पारिवारिक सुख सब सम्मिलित है..।

भगवद्गीता में श्रीकृष्ण कहते है-
"धर्माविरुद्धो भूतेषु कामोsस्मि भरतर्षभ।"
- हे अर्जुन , मैं भूतों(प्राणियों) में धर्म के अनुकूल काम हूँ..।

 " काम ऐष क्रोध एष रजोगुणसमुद्भवः ।
   महाशनो महापापमा विद्ध्येनमिह वैरिणम ।।"
जब रजोगुण से उत्पन्न होने वाला यह काम ही है जो क्रोध बनता है।यह कभी तृप्त न होने वाला और बड़ा पापी है..।।

● अगर काम(ऊर्जा) का सही से इस्तेमाल किया, तो आप.. ईश्वर तत्व बन जाएंगे,अगर सही से नही इस्तेमाल किया तो आप स्वयं के साथ-साथ सबके शत्रु बन जाएंगे..।


-ये काम(ऊर्जा)कभी समाप्त नही होता,बस इसका स्वरूप बदलता है..।
मगर हम ज्ञान के अभाव में काम का एक ही स्वरूप को समझते है..।जो दुःखदायी और पीड़ादायी है..।
हम भूल जाते है की..अगर काम का सही से इस्तेमाल किया तो सृजन होगा,अगल गलत तरीके से इस्तेमाल किया तो स्वयं के साथ दूसरों का भी विनाश होगा..और आज वही हो रहा है..लोग काम का दुरुपयोग ही कर रहे है..मगर कुछ लोग है जो इसके ऊर्जा का सही से सदुपयोग करके सृजन कर रहें है..।।

● वही सिंगमंड फ्रायड ने काम को "Libido"(जीवन ऊर्जा) कहा है,जो मनुष्य को सृजन(creation) और सुख की और ले जाता है..अगर इस ऊर्जा का सही से इस्तेमाल नही किया तो ये विनाशकारी हो जाता है..।।
 
"वासना"
जिस तरह काम ऊर्जा है,उसीतरह उसके विस्तार का भाव "वासना" है..।
जंहा काम होगा वंहा वासना होगा ही..
बिना काम के वासना का कोई अस्तित्व नही है..।
जब तक दिए में तेल न हो तबतक दिया कैसे जलेगा..जब दिया जलेगा ही नही तो उसके प्रकाश का विस्तार कैसे होगा..।।

हम अक्सरहाँ काम और वासना को एक ही समझते है..मगर दोनों एक दूसरे से अलग होते हुए भी भिन्न नही है..जैसे दिए का जलना काम है,तो उसकी रोशनी वासना है..।

वासना क्या है-
"महोपनिषद" के अनुसार-
"दृढ़भावनया त्यक्तपुर्वापरविचारणं।
  यदादानम पदार्थस्य वासना सा प्रकीतिर्ता।।"
" जब मनुष्य बिना किसी सही गलत के विचार के ,केवल तीव्र मानसिक संस्कार के वशीभूत होकर किसी वस्तु को ग्रहण करता है या उसकी और भागता है,तो उसे ही वासना कहता है..।"
ये उसी तरफ भागता है..जिस तरफ हमारी काम(ऊर्जा) उद्विग्न होता है..।

मनुस्मृति के अनुसार वासना कभी खत्म नही होता..
"न जातु कामः कामानामुपभोगेन शाम्यति।
 हविषा कृष्ण वत्यमैर्व भूय ऐवाभिवर्धते ।।"
काम की पूर्ति करते रहने से वासना कभी शांत नही होता,बल्कि ठीक उसी प्रकार बढ़ता है,जिस तरह अग्नि में घी डालने से आग धधकने लगता है।

काम और वासना जिंदगी का ज्योतिपुंज है,बिना इसके,जीवन का हम कल्पना नही कर सकते..।
अब निर्भर हम पे करता है..की हम इस ज्योतिपुंज को किस और ले जा रहे है..अगर हम अपने काम को उन्नति की और ले जा रहे है,तो वासना इसका विस्तार करेगा..अगर अवनति की और ले जा रहे है,तो भी वासना इसका विस्तार करेगा..।

क्या हम काम और वासना से छुटकारा पा सकते है..??
तो इसका जबाब ये है कि,क्या हम बिना सूर्य के जीवन व्यतीत कर सकते है..??
काम एक ऊर्जा है,और बिना ऊर्जा के जीवन का कोई अस्तित्व नही है..हां हम अपने ऊर्जा का स्वरूप बदल कर एक स्तर से दूसरे स्तर पर पहुंच सकते है..उस परम ब्रह्म ऊर्जा में खुद को समाहित कर सकते है..जिसे हम मोक्ष कहते है..।
ऊर्जा कभी खत्म नही होती,बल्कि उसका स्वरूप बदलता रहता है..। 
इसलिय अपने कामवासना से भागें नही बल्कि उसे सही दिशा में रूपांतरित करके अपना और समाज का कल्याण करें..।

इसे रूपांतरित कैसे करें..??
इसका जबाब संभव नही है,क्योंकि हम सब का ऊर्जा स्रोत तो एक ही है,मगर उसका पथ अलग-अलग है..इसलिय सबके जबाब अलग-अलग होंगे..
हां हम स्रोत के आधार पर ये कह सकते है कि ऊर्जा रूपांतरित करने का एक माध्यम ईश्वरभक्ति है..जो सबके लिए है।
तो ईश्वर का ध्यान करें,ऊर्जा रूपांतरित जरूर होगा..।




बुधवार, 27 अगस्त 2025

गणेश जी क्यों पूजनीय है..??

वक्र तुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ:।

निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभ कार्येषु सर्वदा ॥

ये मंत्र आपने जरूर कभी-न-कभी सुना होगा,क्या आपने कभी इस मंत्र का मतलब जानने का कोशिस किया है..??

"हाथी जैसे विशालकाय जिनका तेज सूर्य के सहस्त्र किरणों के समान है।आप हमेशा मेरे कार्य को बिना विघ्न के पूरा करें,एवं सदा ही मेरे शुभ की कामना करें..।"

उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार गणपति शब्द का उपयोग  ऋग्वेद(2.23.1) में मिलता है। वहीं "अमरकोश" में गणपति के आठ पर्यायवाची नाम मिलते है। विनायक, विघ्नराज,द्वेमातुर, गणाधिप, एकदंत,हेरम्बा, लंबोदर एवं गजानन..।



विनायक नाम का उल्लेख अनेक पुराणों एवं बौद्ध पुस्तको में मिलता है..।

तमिल भाषा मे गणेश जी को पिल्लई या पिल्लैयार नाम से जाना जाता है।

वही बर्मा मे गणेश जी को "महा पेइने" और थाईलैंड में "खानेट" नाम से जाना जाता है..

गणेश जी सिर्फ भारत मे ही नही बल्कि अफगानिस्तान से लेकर पूरे दक्षिण पूर्व एशिया में पूजे जाते थे..उनकी अनेक छवियां चीन में भी मिले है..।।

6ठी शताब्दी से गणेश जी की मूर्ति भारत के कई क्षेत्र में बनने लगे और ये धीरे-धीरे अनेक क्षेत्र में बनता गया..।।


क्या आपने कभी गौर से गणेश जी को देखा है..??
शायद नही ही देखा होगा..

जरा गौर से फिर से देखिए..
और सोचिये...🤔
मन में क्या-क्या विचार आ रहा है..??

क्या आपने सोचा..??
अगर हां, तो क्या-क्या विचार आया...।।
उनका छवि कितना बेढोल है..
उनका मुख.. उनका पेट..उनका भीमकाय शरीर..
और ऊपर से उनका सवारी..मूषक..।।

इतना सब होते हुए भी वो सबसे पहले पूजे जाते है..
आखिर क्यों..??

वो उन सभी दिव्यांगों का प्रतिनिधित्व करते है..जिसे हम अलग नजर से देखते है..।ये उस समय से प्रतिनिधित्व करते आ रहे है जब दिव्यांग होना अभिशाप माना जाता था,वो आज भी माना जाता है..।
पुराणों उपनिषदों या पूरे विश्व के सभी ग्रंथों में ये एकलौते दिव्यांग अभिव्यक्ति है..जो सिर्फ पूजनीय ही नही बल्कि प्रथम पूजनीय है...बिना इनके पूजा के किसी का पूजा नही होता..।।

हो सकता है आप मेरे बारे में गलत सोच रहे हो..
सोच रहें ही होंगे,क्योंकि मैं कुछ भी बोल और लिख रहा हूँ..।
दरसल इसमें आपका या हमारा कोई गलती नही है..क्योंकि पुराण और उपनिषद कहानी के रूप में लिखा गया है..इसे खुद से ही मंथन करके उसमें से निचोड़ निकालना होगा..।।

आप अपने सभी देवी देवता को देखें..और उनके सवारी और उनके आसन को देखें...क्या उन जीवों को सवारी बनाना आसान है..?

अब गणेश जी को देखें...और उनके सवारी को देखें..दरसल गणेश जी ने मूषक को चुना नही बल्कि मूषक ने गणेश जी को चुना..।।
गणेश जी के आसन(बैठने वाला जगह) को देखें एक साधारण सा तख्त और अन्य देवताओं का आसन देखें..।।

इतने सब होने के बाद भी गणेश जी प्रथम पूजनीय क्यों है..??
हम आपने एक पौराणिक कहानी सुना है,
कहानी का सारांश ये है कि- "गणेश जी पार्वती के बेटे है और वो पार्वती के द्वारपाल बने है जो अंदर किसी को न आने देने की आज्ञा का पालन कर रहे है..शिव जी आते है वो जाना चाहते है मगर गणेश जी जाने नही देते है,शिवजी को गुस्सा आता है और वो उनका वध कर देते है ये देखकर पार्वती जी को गुस्सा आता है,शिवजी गुस्सा देखकर उनको फिर से जीवित कर देते है..।।"

अब इस कहानी को दूसरे नजरिये से देखिए-
गणेश जी जब पैदा हुए तो इनके शरीर को देख कर इनके माता-पिता ने इन्हें छोड़ दिया होगा(जो आज भी होता है)और ये माता पार्वती को मिलते है,और ये इनका लालन-पालन करते है..हो सकता है शिवजी वर्षों बाद अपने घर आये हो..और गणेश जी को देखकर अचंभित हुए हो..और गणेश जी को लेकर माता पार्वती और शिवजी में खूब गहमा-गहमी हुआ हो...।
फिर शिवजी गणेश जी को स्वीकार करने के लिए तैयार हो गए हो..
और गणेश जी का अच्छा परवरिश और उस समय के हरेक ज्ञान से उन्हें अवगत करा दिया हो..और वो उस समय के सबसे बड़े विद्वान बन गए हो..और सभी देवी-देवता को उनके विद्यता के सामने नतमस्तक होना पड़ा हो..।।
शायद यही वहज हो..जिस कारण वो प्रथम पूजनीय भगवान बने..
और गणेश जी अंत में इन सबका श्रेय अपने माता-पिता को देते है..।।

गणेश जी से हमें क्या सीख मिलता है..??

•अगर हम एक मनुष्य है तो हमें गणेश जी से सीखना चाहिए कि..शरीर का सरंचना हमारे व्यक्तित्व में बाधा नही बन सकता..हम उस ऊंचाइयों तक पहुंच सकते है जंहा कोई नही पहुंच सकता..।

•अपने माता-पिता के प्रति श्रद्धा(हमेशा रखना चाहिए) उस समय भी रखना चाहिए जिस समय आप जिंदगी के सर्वोच्च शिखर पर हों..क्योंकि अगर वो नही होते तो आप नही होते..।।

•अगर हम माता-पिता है तो..हम अपने परवरिश से अपने संतान को जीवन के किसी भी ऊंचाइयों पे पहुंचा सकते है...।।(मगर अफसोस आज हम अपने बच्चों की परवरिश सही से नही कर रहे है,WHO के अनुसार,हरेक 10 में से 6 बच्चों(2-14 वर्ष) के साथ माता-पिता या उनके जानने वाले उन्हें शारीरिक दंड देते है)

गणेश जी सिर्फ विद्वता,और अच्छे संतान का ही प्रतिनिधित्व नही करते बल्कि वो उन करोडों लोगों का प्रतिनिधित्व करते है,जो समाज के हाशिये पे नही बल्कि समाज का हिस्सा तक नही है..।।

ऐसे प्रतिनिधित्वकर्ता को बारंबार प्रणाम..
ऐसे संघर्षकर्ता को बारंबार प्रणाम..
सभी विद्या के विद्वेता को बारंबार प्रणाम..
उनके माता पिता को बारंबार प्रणाम..।।






खुद को बदलिए..