शुक्रवार, 15 मई 2026

नदी की धारा..

जब अपने हाथ में कुछ ना हो, 
तो..
खुद को बहने दो..
नदी की धारा की तरह..।



जिधर,जैसे जा रही है जिंदगी..
जाने दो..
इसे मोड़ने की कोशिस न करो..
क्योंकि मोड़ने में तकलीफ के सिवा..
और कुछ नही होगा..
खुद को बहने दो नदी की धारा की तरह..।

जो पीछे छूट गया..
उसे छोड़ के आगे बढ़ते चलो..
उसके साथ लेने की कोशिस मत करो..
क्योंकि उसका साथ..
वंही तक था..।

नदी की धारा की तरह आगे बढ़ते रहो..
जब तक मंज़िल न मिल जाये..
तबतक यू ही..
नदी की धारा की तरह बहते रहो...।

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नदी की धारा..