शनिवार, 2 मई 2026

ब्रह्मांड,पृथ्वी और हम..

मुझे जब भी हीनता और गौरवान्वित का अहसास होता है..
तो,मैं आसमां की और देखता हूँ..
और मुस्कुराता हूँ..
और सोचता हूँ..
इस ब्रह्मांड में पृथ्वी का क्या अस्तित्व है..??
यही,जो..
हमारे पृथ्वी पर बैक्टेरिया और वायरस का है..।
तो फिर जरा सोचिए..
इस ब्रह्मांड मैं..
हमारा क्या अस्तित्व है..??😊



हम जिस तरह उन्हें नंगी आंख से नही देख सकते..
उसी तरह से एक छोर पे बैठा कोई..
हमारे पृथ्वी को नंगी आंख से नही देख सकता..
या फिर लाख प्रयत्न करने के बाबजूद भी नही देख सकता..।

मुझे जब भी हीनता और गौरवान्वित का अहसास होता है..
तो,मैं आसमां की और देखता हूँ..।।

•प्रसिद्ध खगोलशास्त्री "कार्ल सगन"ने पृथ्वी को "धूल के एक कण पर टिका हुआ छोटा सा नीला बिंदु" कहा था

•ब्रह्मांड में हमारी स्थिति बहुत ही विशिष्ट है। पृथ्वी सौरमंडल का एक हिस्सा है, जो आकाशगंगा (Milky Way) की एक छोटी सी भुजा (ओरियन आर्म) में स्थित है आकाशगंगा में लगभग 100 से 400 अरब तारे हैं। ब्रह्मांड में ऐसी अरबों-खरबों आकाशगंगाएं हैं।

यदि पूरे ब्रह्मांड को एक महासागर मान लिया जाए, तो पृथ्वी उस महासागर में पानी की एक छोटी सी बूंद के समान भी नहीं है

शुक्रवार, 1 मई 2026

मैं सुकून ढूंढने चला था

मैं सुकून ढूंढने चला था..
बिना ये जाने की..
सुकून आखिर है क्या..??
जब ये जाना तो खुद पे हंसी आयी..
और साथ ही खुद पे तरस आयी..।
मैं सुकून ढूंढने चला था..
बिना ये जाने की..
सुकून आखिर है क्या..??

लोग व्यर्थ में भटक रहे है..
उस सुकून को ढूंढने के लिए..
जो सुकून उनके अंदर ही है..
कभी अंदर भी तो डुबकियां लगाओ तब तो पता चले..
सुकून आखिर है क्या..
जब किसी की बातें..
जब किसी की यादें..
जब कोई परिस्थितियां परेशान न करें..
उसी क्षण में तो सुकून है..।

मगर ये इतना आसान कंहा है..
लोग सदियों से ये जानते है..
विरला ही कोई होता है..
जो सुकुन से जीता है..
नही तो सारा जंहा व्यर्थ ही जिंदगी गवांता है..।।

मैं सुकून ढूंढने चला था..
बिना ये जाने..
सुकून आखिर है क्या..??
समुंद्र की लहरों ने बताया..
सूरज का तेज ने बताया..
चंद्रमा की शीतलता ने बताया..
चिड़ियों की चहचहाट ने बताया..
फूलों की खुश्बू ने बताया..
अपने कर्तव्य में तल्लीन हो जाना ही..
सुकून को पा जाना है..।

मैं सुकून ढूंढने चला था..
बिना ये जाने..
सुकून आखिर है क्या..??