तो,मैं आसमां की और देखता हूँ..
और मुस्कुराता हूँ..
और सोचता हूँ..
इस ब्रह्मांड में पृथ्वी का क्या अस्तित्व है..??
यही,जो..
हमारे पृथ्वी पर बैक्टेरिया और वायरस का है..।
तो फिर जरा सोचिए..
इस ब्रह्मांड मैं..
हमारा क्या अस्तित्व है..??😊
हम जिस तरह उन्हें नंगी आंख से नही देख सकते..
उसी तरह से एक छोर पे बैठा कोई..
हमारे पृथ्वी को नंगी आंख से नही देख सकता..
या फिर लाख प्रयत्न करने के बाबजूद भी नही देख सकता..।
मुझे जब भी हीनता और गौरवान्वित का अहसास होता है..
तो,मैं आसमां की और देखता हूँ..।।
तो,मैं आसमां की और देखता हूँ..।।
•प्रसिद्ध खगोलशास्त्री "कार्ल सगन"ने पृथ्वी को "धूल के एक कण पर टिका हुआ छोटा सा नीला बिंदु" कहा था।
•ब्रह्मांड में हमारी स्थिति बहुत ही विशिष्ट है। पृथ्वी सौरमंडल का एक हिस्सा है, जो आकाशगंगा (Milky Way) की एक छोटी सी भुजा (ओरियन आर्म) में स्थित है। आकाशगंगा में लगभग 100 से 400 अरब तारे हैं। ब्रह्मांड में ऐसी अरबों-खरबों आकाशगंगाएं हैं।
यदि पूरे ब्रह्मांड को एक महासागर मान लिया जाए, तो पृथ्वी उस महासागर में पानी की एक छोटी सी बूंद के समान भी नहीं है।

