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सोमवार, 15 जून 2026

बप्पा..

मैं उनसे नजरें चुरा रहा था..
और वो..
मुस्कुरा रहे थे..।
क्योंकि मैं जिधर देखूं..
उधर सिर्फ..
वो-ही-वो नजर आ रहे थे..।
कुछ देर बाद..
अपनी मूर्खता पे हंसी आई...
जिसे देखने को लोग ताउम्र गवां देते है..
वो हमें चहु और दिख रहे थे..
और मैं..
उनसे नजरें चुरा रहा था..।।



बुधवार, 10 जून 2026

अपने "क्यों" को ढूंढिए

यू ही कोई छोड़ के जाता है क्या..
यू ही कोई मुँह मोड़ के जाता है क्या..।
क्या करें..
जाना तो सब को है..।
जो रुक गए..
वो वहीं रुक गए..।
जो निकल गए..
वो बुद्ध और महावीर बन गए..।

निकलना तो सब को है..
मगर जो "क्यों" के लिए निकलते है..
वो नए कीर्तिमान रचते है..
और नए मार्ग प्रशस्त करते है..।

वैसे तो हर क्षण..
लोग निकल रहे है..
व्यर्थ की जिन्दगीं गवां कर..।


सोमवार, 25 मई 2026

मूवी: "मिलियन डॉलर बेबी" और अमेज़न प्राइम

कुछ दिन पहले यूट्यूब पे एक वीडियो दिखी उस वीडियो में एक व्यक्ति एक फ़िल्म के किरदार के बारे में बात कर रहा था..।
कैसे वो किरदार जिंदगी की शरुआत करता है,और कैसे उसका अंत होता है..।


मैं उनके बातों से और इस मूवी के किरदार से प्रभावित हुआ..क्योंकि शायद मैं भी जिंदगी से जूझ रहा हूँ..वैसे सब जूझ रहे है..सब का स्तर सिर्फ अलग-अलग है..😊।
मैं इस मूवी को यूट्यूब इंटरनेट पे ढूंढना शुरू किया शायद कोई फ्री का जुगाड़ लग जाये..।मगर कोई जुगाड़ नही लगा..अंत में मैंने अमेज़न प्राइम का सब्सक्रिप्शन लेने का सोचा वैसे मैंने सस्ती वाली सब्सक्रिप्शन लिया हूँ जिसमे डिलीवरी सिर्फ फ्री होती है..मैंने 1-2 रोज इग्नोर किया फिर सोचा सब्सक्रिप्शन लेने पर किंडल का बुक तो पढ़ ही पाऊंगा 2-4 बुक पढ़ लूंगा तो पैसा रिकवरी हो जाएगा..।
मैंने सब्स्क्रिप्शन किंडल पे बुक पढ़ने के लिए ही लिया..।
सब्सक्रिप्शन लिया और सबसे पहले वो मूवी देखी..।
जिस मूवी को देखने के लिए कुछ दिनों से बेचैन था..।

उस मूवी में एक लड़की का संघर्ष दिखाया गया है..जो 30 साल की है..और बॉक्सिंग करना चाहती है..वो रेस्टोरेंट में काम करती है..और प्लेट में बचे खाने अपने खाने के लिए रख लेती है..इस स्तर का संघर्ष था..अपने लिए जिस कोच का चयन करती है..वो कोच सीधे मना कर देता है कि मैं लड़की को नही सिखाता..मगर वो रोज उस जिम खाने में जाती है और प्रैक्टिस करती है..वो रात-रात भर प्रैक्टिस करती है,और रेस्टोरेंट में काम भी करती है..।
उस कोच का जो सबसे होनहार छात्र होता है,वो उसे छोड़ कर अपना दूसरा मैनेजर चुन लेता है..जिस कारण वो अपसेट होता है..उसके कानों में एक आवाज आती है..वो अपने सहयोगी से पूछता है ये किसका आवाज है..तो वो कहता है आज उसका जन्मदिन है..वो कोच उस लड़की के पास जाता है..और कहता है..सिर्फ मेहनत करने से कुछ नही होता,सही दिशा में मेहनत करने से परिणाम मिलता है..मैं लड़की को नही सिखाता मगर तुम्हें सिखाऊंगा..मगर मैं तुम्हारा मैनेजर नही बनूंगा..लड़की तैयार हो जाती है..।
उसकी कोचिंग कम्पलीट होता है,और उसे दूसरे मैनेजर को सोप दिया जाता है,जब रिंग में वो बॉक्सिंग कर रही होती है तो मैनेजर उसे अच्छे से गाइड नही कर रहा होता जिस कारण वो गुस्सा होता है..उसके सहयोगी उससे कहते है..यंहा खीजने से क्या होगा..तुम्ही उसे सही से गाइड कर सकते हो..वो बीच मैच में ही जाता है,और उस लड़की को गाइड करने लगता है,रेफरी कहता है आप इस तरह गाइड नही कर सकते..कोच कहता है मैं इसका मैनेजर हूँ. लड़की खुश होती है..।कोच कहता है सबसे पहला सबक है - खुद को सुरक्षित रखें..लड़की वो मैच जीत जाती है..इसके बाद एक के बाद एक कई मैच वो जीतती जाती है..वो बॉक्सिंग जगत में सबसे पॉपुलर हो जाती है..नाम,शोहरत सब कुछ उसे मिलता है,वो अपने जिंदगी के ऊंचाइयों पे होती है..।
एक मैच में उसका सामना उस समय के सबसे आक्रमक खिलाड़ी से होता है..1st राउंड में वो खिलाड़ी इसे मात देता है,मगर दूसरे राउंड मैं कोच कहता है,स्वयं को बचाओ और उसके दाहिने साइड वार करो..2nd राउंड में वो उसे पराजित कर देती है..जब वो जीत जाती है..तो वो अपने कॉर्नर पर आ रही होती है,तो,पीछे से वो खिलाड़ी इसके गले पर पंच मार देती है..और वो नीचे गिर जाती है..।उसका शरीर पैरालाइज हो जाता है..वो खुद से कुछ नही कर पाती..बेड पे लेटे-लेटे उसका पाँव सड़ने लगता है,डॉक्टर कहता है,इसका पाँव काटना पड़ेगा,उसका पाँव काट दिया जाता है..।
कोच ये सब देखता है,और अपने सहयोगी से कहता है,ये सब तुम्हारे कारण ही हुआ है,तुम्हारे कारण ही मैंने इसे ट्रेनिंग दी..और आज मैं कुछ नही कर सकता..वो खुद को असहाय महसूस करता है..।वो उसका देखभाल अपने बेटी की तरह करता है..
वो लड़की एकदिन कहती है..कोच आपने मुझे नई जिंदगी दी,मैंने जिंदगी में ढेर सारा शोहरत पाया..सब आपके कारण..मुझे माफ़ कर दीजिए..मैं खुद को सुरक्षित नही रख पाई..।कोच..आपने मुझे नया जिंदगी दिया..अब मुझे इस जिंदगी से भी छुटकारा दे दीजिए..मैं इस पीड़ा में और नही रहना चाहता..।
कोच उसकी बातों को सुनकर भावुक हो जाता है,और चर्च जाता है,हिम्मत जुटाता है..और उसे एक इंजेक्शन इंजेक्ट करता है,और उसके सपोर्ट सिस्टम को हटा कर चला जाता है..।।

ये मूवी वाकय में बेहतरीन थी..इस मूवी में जो संघर्ष और दुविधा दिखाई गई है,उससे हमसब रोज दो-चार होते है..
इस मूवी का नाम - "मिलियंस डॉलर बेबी" है..।


इस मूवी से मैंने क्या सीखा-
संघर्ष से मत भागे..बल्कि अपने सपनों के पीछे भागे..
आपका कठिन परिश्रम ही आपको परिणाम तक पहुचायेगा..
• हम जिससे भागते है, हो सकता है वही हमारे जिंदगी में सबसे बड़ा बदलाव लाये..
हमेशा खुद को सुरक्षित रखें.. हरेक परिस्थितियों में..।
• हम जैसा सोचते है,वैसा हमेशा नही होता..।
बुरे दौर में भी उन लोगों को शुक्रियदा करें जिसने आपके जिंदगी में बदलाव लाया है..।।

मंगलवार, 14 अप्रैल 2026

खुद के बारे में सोचो..

खुद के बारे में सोचो..
आखिर तुम कर क्या रहे हो..??
क्या यही सोच के तुम बड़े हुए हो..??
खुद के बारे में सोचो..
तुम कर क्या रहे हो..??
क्या अपने सोच से..
तुमने समझौता कर लिया है..
अगर,हां..??
तब ठीक है..
तुम जैसे जी रहे हो..
वैसे जियो..।

अगर,नही...
तो धिक्कार है,तुमपे..
तुम अबतक आखिर कर क्या रहे हो..??
सिर्फ सोचने से क्या होता है..
वो पैर जो जकड़ चुके है..
उसे हिलाओ,डुलाओ..
और अपने सोच को साकार करने के लिए..
उस और कदम बढ़ाओ..।।



न तुम आलसी हो..
न ही तुम कायर हो..
न ही तुम निर्लज्ज हो..
न ही तुम नकारा हो..।
तुम में वो सबकुछ है..
जिससे तुम अपने सपने को 
साकार कर सकते हो..
तो फिर आखिर क्यों..??
अपना जिंदगी बर्बाद कर रहे हो..??
खुद के बारे में सोचो..
आखिर तुम कर क्या रहे हो..??

तुम कर सकते हो..

अगर अपना सपना साकार करना हो..
तो अपने प्रति क्रूर होइये..
सिर्फ अपने प्रति ही नही बल्कि..
अपनों के प्रति भी क्रूर होइये..।।




आप जबतक अपने प्रति क्रूर नही होंगे..तो आपके सपने, सपने ही रह जाएंगे।समय हाथ से निकल जायेगा और आप सिर्फ हाथ मलते रह जाएंगे..।
खुद को देखिए आईने..
क्या खुद पे गुस्सा नही आता,
क्या खुद से घिन्न नही आता..।
क्या थे आप और क्या हो गए है आप..।।

तोड़ दीजिए उस बेड़ियों को..
जो अब ढाल बन चुका है..
नोच दीजिए उस केचुल को,
जो आपका पहचान लील रहा है..।
माना कि ये संभव नही है..
मगर असंभव आखिर क्या है..।

खुद से पूछिए..
आखिर क्यों जन्मा आपके माता-पिता ने..??
क्या अपेक्षा किया आपके चाहने वालों ने..??
और क्या कर रहे है आप..??
खुद से पूछिए..।

शायद ये जबाब देने की हिम्मत न हो आपमें..
मगर जो भी हो..
आप कायर तो नही है..।

एक बार फिर क्यों नही प्रयास करते हो..
अपने उस छवि को क्यों नही साकार करते हो..
जिस छवि से अपेक्षा थी सबोको...
उस छवि को क्यों नही साकार करते हो..
एक बार फिर क्यों नही प्रयास करते हो..।

आखिर क्या नही होता है..
प्रयास करने से..
लोगों ने हिमालय के साथ चंद्रमा को भी फतह किया..
तुम आखिर क्यों नही..
अपने सपनों को फतह कर सकते हो..??

खुद को देखो एकबार आइने में..
और फिर से उस छवि को स्वीकार कर..
अपने सपने को साकार कर..।।
तुम कर सकते हो..।।
सच मे तुम कर सकते हो..।।

रविवार, 5 अप्रैल 2026

मैं जब भी..

मैं जब भी उनसे दूर जाना चाहता हूं..
वो हर बार मुझे..
अपने करीब खींच लाते है..।
फिर जब मैं उनके करीब जाता हूँ..
तब अहसास होता है..।
भला शरीर के बिना..
आत्मा कैसे रह सकता है..।।

मैं जब भी उनसे दूर जाना चाहता हूं..
वो हर बार मुझे..
अपने करीब खींच लाते है..।
फिर जब मैं उनके करीब जाता हूँ..
तब अहसास होता है..।
भला सूरज के पृथ्वी का क्या हश्र होगा...
ये सोच के ही मन घबराता है..।

मैं जब भी उनसे दूर जाना चाहता हूं..
वो हर बार मुझे..
अपने करीब खींच लाते है..।


तुम सागर हो..