शुक्रवार, 1 मई 2026

मैं सुकून ढूंढने चला था

मैं सुकून ढूंढने चला था..
बिना ये जाने की..
सुकून आखिर है क्या..??
जब ये जाना तो खुद पे हंसी आयी..
और साथ ही खुद पे तरस आयी..।
मैं सुकून ढूंढने चला था..
बिना ये जाने की..
सुकून आखिर है क्या..??

लोग व्यर्थ में भटक रहे है..
उस सुकून को ढूंढने के लिए..
जो सुकून उनके अंदर ही है..
कभी अंदर भी तो डुबकियां लगाओ तब तो पता चले..
सुकून आखिर है क्या..
जब किसी की बातें..
जब किसी की यादें..
जब कोई परिस्थितियां परेशान न करें..
उसी क्षण में तो सुकून है..।

मगर ये इतना आसान कंहा है..
लोग सदियों से ये जानते है..
विरला ही कोई होता है..
जो सुकुन से जीता है..
नही तो सारा जंहा व्यर्थ ही जिंदगी गवांता है..।।

मैं सुकून ढूंढने चला था..
बिना ये जाने..
सुकून आखिर है क्या..??
समुंद्र की लहरों ने बताया..
सूरज का तेज ने बताया..
चंद्रमा की शीतलता ने बताया..
चिड़ियों की चहचहाट ने बताया..
फूलों की खुश्बू ने बताया..
अपने कर्तव्य में तल्लीन हो जाना ही..
सुकून को पा जाना है..।

मैं सुकून ढूंढने चला था..
बिना ये जाने..
सुकून आखिर है क्या..??


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