सोमवार, 15 जून 2026

बप्पा..

मैं उनसे नजरें चुरा रहा था..
और वो..
मुस्कुरा रहे थे..
क्योंकि मैं जिधर देखूं..
उधर सिर्फ..
वो-ही-वो व्यापत थे..।
अपनी मूर्खता पे हंसी आई मुझे..
जिसे देखने को लोग ताउम्र गवां देते है..
वो हमें चहु और दिख रहे थे..
और मैं..
उनसे नजरें चुरा रहा था..।।

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बप्पा..