रविवार, 7 जून 2026

मुस्कुराते हुए चेहरे..

मैंने मुस्कुराते हुए चेहरे को मुरझाते हुए देखा है..
और मुरझाए हुए चेहरे को मुस्कुराते हुए देखा है..
मगर कुछ चेहरे हमेशा मुरझाए हुए ही रहते है..
क्यों..??
क्योंकि शायद उनकी आदत बन गई हो..
उससे वो निकलना ही नही चाहते..।
मगर ऐसा नही है..
वो चेहरे भी मुस्कुरायेंगे एक दिन,
जिसदिन सावन की हल्की फुहार उनके रूह पर पड़ेगी..।
मगर कब पड़ेगी..??
जब वो घर से निकलेंगे..।
कब निकलेंगे..??
जब वो चाहे..
या फिर कोई उनकी अंगुलियां थाम कर घर से बाहर लाये..।।

इस जंहा में हर कोई मुस्कुराना चाहता है..
बस कोई मुस्कुराने वाला भी तो दिखे..।
जिसे देख के कोई मुस्कुराए..
और उसे देखकर,
कोई और मुस्कुराए..
और इस तरह, 
ये सारा जंहा मुस्कुराए..।।

हम रोने के लिए नही..
बल्कि हंसने के लिए पैदा हुए है..
हम अपने हिस्से का रोना तो..
जन्म लेते ही रो लेते है..।
बाकी तो दूसरे के कारण रोते है..
कोशिश करें आपके कारण कोई रोये नही..
बल्कि आपके कारण..
कोई हंसे..कोई मुस्कुराए..
और ये मुस्कान सारे जंहा में फैल जाए..।।




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