बुधवार, 3 दिसंबर 2025

मैं क्या से क्या हो गया..

मैं क्या से क्या हो गया..
जब खुद को देखता हूँ,
तो खुद को ही, हीन समझता हूं,
मैं क्या से क्या हो गया..
कंहा मेरे सपने थे..
कंहा मेरे ख्वाब थे..
न अब सपने है,और न ही ख्वाब है..
बस एक हांड-मांस का शरीर है..।
कभी दूसरों के जिंदगी में रंग भरने का सोचा करता था..
आज खुद ही, बदरंग जिंदगी जी रहा हूँ..।

मैं क्या से क्या हो गया..
शायद मैं हुआ नही,होने दिया..
सब कुछ गवाने के बाद ..
अब दूसरों की जिंदगी को गवा रहा हूँ..
आखिर क्यों..??
अपनी बदरंग जिंदगी की छावं,
दूसरों के जिंदगी पे डाल रहा हूं..
आखिर क्यों..??
मैं क्या से क्या हो गया..
अभी भी वक़्त है..
मुस्कुरा के कहने का..
मैं क्या से क्या हो गया..।
अभी भी वक़्त है,
रंगीन से बदरंग हुए जिंदगी में रंग भरने का..
अभी भी वक़्त है,
अपनी बदरंग जिंदगी की छावं को,
रंगीन छावं में तब्दील करने का..
अभी भी वक़्त है..
सीना तानकर,
मुस्कुराते हुए कहने का..
मैं क्या से क्या हो गया😊...।।




आप भारत के कितने प्रधानमंत्री को जानते है..

हम मनुष्यों की एक खूबी है..
हम अच्छाइयों को लंबे समय तक याद नही रखते जबकि किसी बुराइयों को लंबे समय तक ढोते है..।।

अगर आपसे पुछु..
पिछले सप्ताह आपके साथ क्या-क्या अच्छा हुआ, तो शायद आप नही बता पाएंगे,मगर आपसे पुछु आपके साथ क्या-क्या बुरा हुआ,वो आपको बिल्कुल याद होगा..।।
इसमें हमारी आपकी कोई गलती नही है,दरसल ये आनुवांशिक प्रक्रिया है,कुछ लोग इसे तोड़ने में सफल होते है,और अपने व्यक्तित्व से सबको आश्चर्यचकित करते है..।।

हां हम कंही और थे..
हमारा सवाल क्या था..??
हां, आप बताये भारत में अबतक कितने प्रधानमंत्री हुए है..??
चलिए ये तो गूगल या AI से भी पूछ सकते है..पूछ लीजियेगा मगर..।।

हम ये पूछना चाहते है कि..
आपको भारत के कितने प्रधानमंत्री के नाम पता है..??
और क्यों...??

80% भारतीय सिर्फ 4 प्रधानमंत्री के नाम जानते है..
पहला- पंडित जवाहरलाल नेहरू
दूसरा- लाल बहादुर शास्त्री
तीसरा- इंदिरा गांधी
चौथा- अटल बिहारी बाजपेयी

और वर्तमान में- नरेंद्र मोदी भारत के 14वे प्रधानमंत्री है..।।


तो फिर आखिर क्यों भारत की आम जनता 10 प्रधानमंत्री के नाम से अनभिज्ञ है..??
क्या उन्होंने कोई अच्छा काम नही किया..??
क्या उनका कार्यकाल छोटा था..??
क्या उनका व्यक्तित्व आकर्षक नही था..??

•जंहा तक अच्छे काम की बात है..तो हम उन प्रधानमंत्री को नही भूल सकते जिन्होंने संचार क्रांति की नींव रखी..मगर हम भूल चुके है..
•आज भारत जिस GDP का और इतने बड़े बाजार का दंभ भर है,उसमें उस P.M का अहम योगदान है,जिसने पहली बार भारत के बाजार को पूरे विश्व के लिए खोला..
कुछ लोग इनसे भी जरूर परिचित होंगे..।।

मगर आखिर क्यों..पूरा भारत सिर्फ नेहरू,शास्त्री,इंदिरा और अटल को ही जानता है..??
जरा सोचिए..शायद ही कोई व्यक्ति होगा जो इनके नाम से अनभिज्ञ होगा..?

इन चारों में एक सामान्य बात थी...
इन चारों को युद्ध का सामना करना पड़ा..
और युद्ध की त्रासदी हमारे जेहन में बसी हुई है,जो कभी हट नही सकता,यंहा तक कि आपके जेहन में नही भी है,तो आपके जेहन में किताबों, अखबारों, समाचारों, फिल्मों के माध्यम से आ ही जाएगी...।।

क्योंकि त्रासदी दर्द देती है,और दर्द दूर हो भी जाये न,तो उसका डर सदैव बना रहता है..।।

हम अच्छाइयों के द्वारा लाये गए बदलाव को याद नही रखते,वंही बुराइयों के द्वारा लाये गए बदलाव को लंबे समय तक याद रखते है..।

हम लोगों की बुराइयों को तो याद रखते है,मगर उनके अच्छाइयों को भूल जाते है..।।

हां सच में भूल जाते है..।

अच्छा एक सवाल बताये..
भारत में संचार क्रांति की नींव किस प्रधानमंत्री ने रखा...
क्या आपको पता है,भारत के GDP में सर्वाधिक किस सेक्टर का योगदान है..??
सर्विस सेक्टर का..
LPG(liberalization, Privatization, Globalization) लाने का श्रेय किस प्रधानमंत्री को दिया जाता है..।

पता है,इन दो कदमों के कारण ही आज विश्व के अग्रणी देशों में से एक है हम।मगर बहुत कम ही लोग उन दो कदम उठाने वाले प्रधानमंत्री को जानते होंगे..।।



शनिवार, 29 नवंबर 2025

कुछ गलतियां

जिंदगी में कुछ गलतियां होनी चाहिए,
जिसका मलाल ताउम्र होना चाहिए..
अगर कोई गलतियां न हो..
और उसका मुस्कान भरा अफसोस न हो..
तो फिर ये भी कोई जिंदगी है..
इसलिए..
जिंदगी में कुछ गलतियां होना चाहिए..।
जब जिंदगी में अकेलापन सताये..
तो यही गलतियां तो साथ रह जाता है..
और एक नए होंसले के साथ आगे बढ़ने का मुकम्मल राज देता है..

इसलिए जिंदगी में कुछ गलतियां होनी चाहिए..
जिसका मलाल ताउम्र रहें...।।


शुक्रवार, 28 नवंबर 2025

जिंदगी से कोई शिकायत नही है..

जिंदगी से कोई शिकायत नही है..,
खुद से ही शिकायत है..।
जिंदगी ने तो वो सबकुछ दिया..
जिस-जिस के में लायक था..
मगर मैं क्या...???
उस लायक बन पाया..
जिस लायक जिंदगी ने मुझसे अपेक्षा की थी..
तो जबाब है नही..।

जिंदगी से कोई शिकायत नही है..
खुद से ही शिकायत है..।
मैं ही काबिल न बन पाया..
अपने कमजोरियों से भागता रहा..
और कमजोरियों के बोझ तले दबता गया..।

जिंदगी से कोई शिकायत नही है...
खुद से ही शिकायत है..।
जिंदगी तो अब भी..
हाथ फैलाये हुए है,
मुझे आलीगं करने के लिए..।
मैं ही बेबकूफ हूँ..
इन बेड़ियों को अपना साथी मानकर इससे लिपटा हुआ हूँ,
जबकि ये बेड़ियां सिर्फ जख्म दे रही है..।

जिंदगी से कोई शिकायत नही है..


रविवार, 23 नवंबर 2025

मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ

मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
कभी दुनिया बदलने की बातें किया करता था,
अब खुद को बदलने की जुस्तजू में लगा रहता हूँ..।
मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..।
कभी दूसरों के सपनों को पूरे करने का सपना देखा करता था,
आज खुद के भी सपने पूरे नही कर पा रहा हूं..
मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
कभी अपनों को मुझमें उम्मीद दिखती थी,..
आज सबों ने मुझसे उम्मीद छोड़ दी है..।
मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
सबकुछ बदल गया है..
मगर बदला नही है,तो मेरे आदतों और मेरे असफलताओं का सिलसिला..
मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
न जाने अब भी,
मैं खुद से उम्मीद किये बैठा हूँ..
मैं यू ही तो नही आया हूँ.. 
मगर क्यों आया हूँ..??
इसके जबाबों का इंतजार किये बैठा हूँ..
मैं यू ही तो नही आया हूँ..।
मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
कभी दुनिया बदलने की बातें किया करता था,
अब खुद को बदलने की जुस्तजू में लगा रहता हूँ..
मैं यू ही तो नही आया हूँ..।।



कभी पूछा है खुद से..

कभी पूछा है खुद से..
की आखिर तुम कर क्या रहे हो..
कभी पूछा है खुद से..
की आखिर तुम जा किधर रहे हो..
कभी पूछा है खुद से..
की आखिर तुम चाहते क्या हो..
कभी पूछा है खुद से..
आखिर तुम्हारी मंजिल कंहा है...
कभी पूछा है खुद से...

क्यों पूछते डर लगता है..??
कंही सच्चाई से सामना न हो जाये..
क्या करना है,पता नही है,
किधर जाना है,पता नही है,
क्या चाहते है,पता नही है,
मंजिल कंहा है,पता नही है..।
इसीलिए पूछते डर लगता है..।

आखिर इस डर से भला कबतक भागोगे..
कभी तो सामना करना पड़ेगा..
हिम्मत जुटाओ और अपने सवालों का सामना करो..
क्योंकि सवाल में ही हल छुपा हुआ है..।
आखिर कब तक भागते रहोगे,
आखिर कब तक टालते रहोगे..।

जो हो तुम उसे स्वीकार कर..
स्वयं के वास्तविकता को अंगीकार कर..
फिर से खुद को तराशकर..
नव-निर्मित मानव तैयार कर..
अपने असफलताओं के बेड़ियों को तोड़कर..
सफलता के नए सोपान रचकर..
अपने आप को स्वीकार कर..
इस जीवन का उद्धार कर..।।

शुक्रवार, 21 नवंबर 2025

ये उम्मीद ही तो है..

जब किसी को तुमसे उम्मीद न हो..
तो तब तुम खुद से उम्मीद रखो,
कोई रखें या न रखें तुम जरूर खुद से उम्मीद रखों..
ये उम्मीद ही तो है...
जो जीने का हौंसला देता है,
ये उम्मीद ही तो है..
जो असंभव को संभव बनाता है..
ये उम्मीद ही तो है..
जो नर को नारायण बनाता है..
ये उम्मीद ही तो है,
जो दानव को देवता बनाता है..
ये उम्मीद ही तो है..
जो नही है,उस से भी साक्षात्कार कराता है..
ये उम्मीद ही तो है..
जो कल का सूरज दिखाता है..
ये उम्मीद ही तो है..

बिना उम्मीद के यंहा, कंहा कुछ है..
उम्मीद की ज्योत तबतक जलाये रखो..
जबतक सांस और धड़कन चल रही है..
क्या पता कब उम्मीद की किरण आये..
और जिंदगी की दिशा बदल दे..।
ये उम्मीद ही तो है.


Yoga for digestive system