शुक्रवार, 12 दिसंबर 2025

दादी माँ..

आजकल आपकी बहुत याद आ रही है..दादी माँ..
न जाने क्यों..??
आपके जाने से कुछ लोग जरूर खुश होंगे..तो वंही कुछ लोगों को आपकी बहुत कमी खल रही होगी..उनमें से मैं भी एक हूँ..।

अगर आप इस जंहा पे होते तो आप ज्यादा खुश होते..
छोटे चाचा ने दिल्ली में जमीन रजिस्ट्री करवाई है..
तो लाल चाचा ने दिल्ली में 2BHK का फ्लैट लिया है..
आपके 3 बेटों में से 2 बेटों ने बहुत बड़ा काम किया है दादी माँ..
आप होते तो सच मे बहुत खुश होते..।।

आप कंही न कंही से तो देख ही रही होंगी..क्योंकि अब आप इस ब्रह्मांड का हिस्सा जो बन गई है..।


गुरुवार, 11 दिसंबर 2025

प्रकृति हमेशा एक रास्ता बनाती है..

आपके पास हमेशा एक मौका होता है..
चाहे आप कितने भी बुरे दौड़ से क्यों न गुजर रहे हो,आपके पास एक मौका होता है,उस बुरे दौड़ से निकलने का..मगर निकलना तो आपको ही पड़ेगा,वो हौंसला, जुनून,कठिन परिश्रम तो आपको ही करना होगा..।

प्रकृति सबके लिए रास्ता बनाता है..उस रास्ते पर तो हमको ही चलना होगा,
जब हम प्रकृति द्वारा बनाये गए समय पर उस रास्ते से नही चलते तब वो रास्ता कोई काम का नही रह जाता,फिर प्रकृति हमारे लिए दूसरा रास्ता बनाता है,अगर हम फिर से उस रास्ते पे चलने पे असफल हो गए,तो प्रकृति फिर तीसरा रास्ता बनाता है,प्रकृति कभी भी रास्ता बनाना बंद नही करता,वो हमेशा हमारे लिए रास्ता बनाते रहता है..।


भले ही हमारा लक्ष्य कुछ और क्यों न हो..मगर प्रकृति का एक ही लक्ष्य है,की आप सफल हो..और आपके सफलता में प्रकृति हमेशा अपना सहयोग दे रहा होता है..।
जब हमारा तादात्मय प्रकृति से बैठ जाता है,तो वो हमारे अनुरूप ही रास्ता बनाता है,मगर जब हमारा तादात्म्य प्रकृति से नही बैठता है,तो प्रकृति हमेशा वो रास्ता बनाता है,जो हमारे लिए बेहतर हो..।।

मगर हम जैसे कई नक्कारे निक्कमे लोग है,जो न प्रकृति से तादात्म्य बिठा पाते है और न ही प्रकृति द्वारा बनाये गए रास्ते पे चलते है..।
आखिर क्यों..??
क्या हम खुद के लिए और दूसरे के लिए बोझ बनना चाहते है..।
अगर प्रकृति द्वारा बनाये गए रास्ते पे नही चलना है तो फिर क्यों उस रास्ते पे कदम रखकर उस रास्ते को बेकार कर रहे हो..इससे खुद की जीवन भी बर्बाद कर रहे हो साथ ही प्रकृति की मंशा को भी,मगर जब हम कुछ कदम चल कर मंजिल तक नही पहुंच पाते तो फिर प्रकृति एक नया रास्ता बनाता है,और वो बनाता रहता है,और वो तबतक बनाता रहेगा जबतक की आप उस रास्ते पर चलकर सफल न हो जाये..।।

पूरी प्रकृति आपको सफल होना देखना चाहता है,और वो आपके सफलता के लिए अपनी पूरी सृष्टि की सरंचना को आपके अनुसार ढालता है,फेर-बदल करता है..मगर हमें ये सब नही दिखता..क्योंकि हमने प्रकृति से अपना तादात्म्य बिठा के ही नही रखा है..।।

प्रकृति ने आपको जिस उद्देश्य से भेजा है,वो अपने उदेश्य की पूर्ति के लिए आपके लिए हमेशा रास्ता बनाता रहेगा..
अगर आप उस जगह पर पहुंचने में असफल होते है तो प्रकृति आप जैसे दूसरे को उस जगह पर पहुचायेगा..
आपने गौर किया होगा..अगर आप अपने सपने नही पूरा करते तो कोई और उस सपने को पूरा करता है,और पूरा जंहा उसका गुणगान करता है,फर्क बस इतना है कि आप उस रास्ते पे सही से चले नही,और दूसरा सही से चल कर उस मंजिल तक पहुंचा..।
मगर प्रकृति इतना अन्यायी नही है,वो तबतक आपके लिए रास्ता बनाता रहेगा जबतक की आप अपने मंजिल पर पहुंच न जाये..।।

प्रकृति से जितना  तादात्म्य बिठायेंगे प्रकृति उतना मदद करेगा..अगर प्रकृति से तादात्म्य नही बिठाया तो प्रकृति सिर्फ रास्ता बना कर छोड़ देगी,अगर तादात्म्य बिठाया तो वो सिर्फ रास्ता ही नही बल्कि उस रास्ते पे आपको चलने में सहयोग भी करेगी..।।

आखिर प्रकृति से कैसे तादात्मय बिठाया..??
ये तो मुझे भी नही पता..
मगर मुझे ये पता है कि आखिर क्यों प्रकृति से तादात्म्य नही बैठ रहा है..??
क्योंकि में अपने समय का सही सदुपयोग नही कर रहा हूँ,
क्योंकि मैं अपनी ऊर्जा का सही दिशा में इस्तेमाल नही कर रहा हूँ,
क्योंकि मैं लक्ष्यविहीन जिंदगी जी रहा हूँ।

इसीलिए प्रकृति से तादात्म्य नही बिठा पा रहा हूँ..
शायद मैं लक्ष्यपरक जिंदगी जियूँ,और अपने समय और ऊर्जा का सही सदुपयोग करू तो प्रकृति स्वयं ही मुझे अपनी और आकर्षित कर लेगी..।।

क्योंकि प्रकृति का एक ही उद्देश्य है,सबको स्वयं में समाहित करके स्वयं जैसा बनाना..
जैसे एक पिता और गुरु का सपना होता है कि उसका पुत्र,शिष्य उससे भी ज्यादा सफल हो,उसी तरह इस प्रकृति की भी इच्छा है कि उसके द्वारा निर्मित इस सृष्टि में उस जैसा भी कोई हो,जो इस सृष्टि के संचालन में सहयोग करें..।।
प्रकृति हमेशा बाहें फैलाये हुए है,मगर कुछ कदम तो स्वयं ही बढ़ाना होगा..।
जिस तरह फूल सुंगंध फैला कर भौंरा को अपनी और आकर्षित करता है..
उसी तरह प्रकृति हमारे लिए रास्ता बना कर हमें अपने बाहों में भरने के लिए हमारा इंतजार कर रही है..जिस तरह भौंरा को स्वयं ही पुष्प के पास जाना होता है,उसी तरह हमें भी स्वयं ही उस रास्ते पे चलना होगा..।।

बस आप एक कदम तो बढ़ाओ,प्रकृति अपनी ऊर्जा से आपको दो कदम और आगे खींच लेगा,क्योंकि आपसे ज्यादा बेशब्री से उसे आपका इंतजार है..।।




शनिवार, 6 दिसंबर 2025

दोसजी..

आज तकलीफ हुई..सिर्फ तकलीफ ही नही, बल्कि रुआंसी भी हो गया मैं..।
मगर मैं तुमसे नाराज नही हूँ मेरे दोस्त..बस थोड़ी सी तकलीफ हुई..
और ये तकलीफ भी पानी के बुलबुले के समान है..।।

मैं क्या समझू..??
व्हाट्सएप का रिप्लाई नही करते,फोन रिसीव नही बल्कि काट देते हो..।।
इतनी तो तुम्हें आजादी है,ही..वैसे भी अब हम में और तुम में समानता कंहा रहा..।
तुम 1 से 2 हो गए..और में अकेला रह गया..😊

ये तो मेरी आपबीती है,जो मैंने सुना दिया..।

मगर तुम जिस दौर से गुजर रहे हो..उसे तुम्हारे सिवा और कौन समझ सकता है..
जंहा तक मैं जानता हूँ,किसी के खालीपन को भरना मुमकिन ही नही है,और ऐसे व्यक्ति का खालीपन भरना तो बड़ा मुश्किल है,जो ताउम्र दूसरे के खालीपन को भरने में सहयोग करता रहा हो..।
तुम्हारे जिंदगी में उनका अहम योगदान है,आज तुम जो हो,वो उनके कारण ही हो,और ऐसे व्यक्ति का ऐसे वक्त साथ छूटना जब तुम जिंदगी के अहम पड़ाव में कदम रख रहे हो..।
मैं समझ सकता हूं.. मगर कुछ कर नही सकता..।।

और ऐसे वक्त चुप रहने का ही मन करता है,किसी से कुछ बात करने का मन नही करता..।।
आशा करता हूँ,जो तुम्हारी जिंदगी में आई है..
वो तुम्हें इन दुःख से उबरने में जरूर सहयोग करेंगी..।।

वैसे भी पत्नी से बड़ा कोई मित्र नही होता..
तुम उन्हें हमेशा पत्नी से ज्यादा मित्र ही समझना,
उनके भावनाओं का सम्मान करना..
क्योंकि तुम्हारी और उनकी परवरिश अलग-अलग माहौल में हुआ है,इसलिए विचारों में मतभेद हो सकता है..
और उन मतभेद को दूर करने के लिए मैत्रीपूर्ण विचार करके मतभेद को दूर करना..।।

और क्या कहूं.. मेरे दोस्त..।

मुझे तुम्हारे कॉल का इंतजार रहेगा..।
तुम अकेले ही थे जिससे कुछ बाते हुआ करता था,जिंदगी के कुछ पन्ने पे,मगर तुम्हें तो एक नई मित्र मिल गई है..।
आशा करता हूँ, तुम्हारी मित्र किसी की कमी नही खलनी देगी..।



मगर मुझे तुम्हारी कमी जरूर खलेगी😊..।।
लव यू दोसजी..।।

गुरुवार, 4 दिसंबर 2025

रास्ते..

जब लोगों को आपसे उम्मीद नही होती है,
तब ही खुद से उम्मीद करने का वक़्त होता है..।

जब सारे रास्ते बंद हो जाते है..
तब एक रास्ता खुलता है..
और वो..
वो रास्ता होता है,
जिस रास्ते पे आप चलना चाहते थे..।
वो रास्ता हमेशा किसी न किसी रूप में आपतक आता है..
जिस रास्ते पे आप चलना चाहते है..।।


इसीलिए जिंदगी में हताश और निराश मत हो.. ..
धैर्य रखों..
क्योंकि,जो कुछ भी नही है,
वो बहुत कुछ है..
फर्क बस इतना है कि हम समझ नही पाते..।

इन आसमां से भरे तारों से परे भी कुछ है..
इन उफनाती हुई समुद्रं के उसपार भी कुछ है..
सीना ताने खड़े इस पहाड़ के उसपार भी कुछ है..
रेत से भरे मैदान के उसपार भी कुछ है..
इस अंधियारी रात के बाद ही सुबह तो है..
इसलिए हताश मत हो..
जिंदगी के इस चक्र में असफलता के बाद,
 कभी-न-कभी सफलता का चक्र तो है..।

बुधवार, 3 दिसंबर 2025

मैं क्या से क्या हो गया..

मैं क्या से क्या हो गया..
जब खुद को देखता हूँ,
तो खुद को ही, हीन समझता हूं,
मैं क्या से क्या हो गया..
कंहा मेरे सपने थे..
कंहा मेरे ख्वाब थे..
न अब सपने है,और न ही ख्वाब है..
बस एक हांड-मांस का शरीर है..।
कभी दूसरों के जिंदगी में रंग भरने का सोचा करता था..
आज खुद ही, बदरंग जिंदगी जी रहा हूँ..।

मैं क्या से क्या हो गया..
शायद मैं हुआ नही,होने दिया..
सब कुछ गवाने के बाद ..
अब दूसरों की जिंदगी को गवा रहा हूँ..
आखिर क्यों..??
अपनी बदरंग जिंदगी की छावं,
दूसरों के जिंदगी पे डाल रहा हूं..
आखिर क्यों..??
मैं क्या से क्या हो गया..
अभी भी वक़्त है..
मुस्कुरा के कहने का..
मैं क्या से क्या हो गया..।
अभी भी वक़्त है,
रंगीन से बदरंग हुए जिंदगी में रंग भरने का..
अभी भी वक़्त है,
अपनी बदरंग जिंदगी की छावं को,
रंगीन छावं में तब्दील करने का..
अभी भी वक़्त है..
सीना तानकर,
मुस्कुराते हुए कहने का..
मैं क्या से क्या हो गया😊...।।




आप भारत के कितने प्रधानमंत्री को जानते है..

हम मनुष्यों की एक खूबी है..
हम अच्छाइयों को लंबे समय तक याद नही रखते जबकि किसी बुराइयों को लंबे समय तक ढोते है..।।

अगर आपसे पुछु..
पिछले सप्ताह आपके साथ क्या-क्या अच्छा हुआ, तो शायद आप नही बता पाएंगे,मगर आपसे पुछु आपके साथ क्या-क्या बुरा हुआ,वो आपको बिल्कुल याद होगा..।।
इसमें हमारी आपकी कोई गलती नही है,दरसल ये आनुवांशिक प्रक्रिया है,कुछ लोग इसे तोड़ने में सफल होते है,और अपने व्यक्तित्व से सबको आश्चर्यचकित करते है..।।

हां हम कंही और थे..
हमारा सवाल क्या था..??
हां, आप बताये भारत में अबतक कितने प्रधानमंत्री हुए है..??
चलिए ये तो गूगल या AI से भी पूछ सकते है..पूछ लीजियेगा मगर..।।

हम ये पूछना चाहते है कि..
आपको भारत के कितने प्रधानमंत्री के नाम पता है..??
और क्यों...??

80% भारतीय सिर्फ 4 प्रधानमंत्री के नाम जानते है..
पहला- पंडित जवाहरलाल नेहरू
दूसरा- लाल बहादुर शास्त्री
तीसरा- इंदिरा गांधी
चौथा- अटल बिहारी बाजपेयी

और वर्तमान में- नरेंद्र मोदी भारत के 14वे प्रधानमंत्री है..।।


तो फिर आखिर क्यों भारत की आम जनता 10 प्रधानमंत्री के नाम से अनभिज्ञ है..??
क्या उन्होंने कोई अच्छा काम नही किया..??
क्या उनका कार्यकाल छोटा था..??
क्या उनका व्यक्तित्व आकर्षक नही था..??

•जंहा तक अच्छे काम की बात है..तो हम उन प्रधानमंत्री को नही भूल सकते जिन्होंने संचार क्रांति की नींव रखी..मगर हम भूल चुके है..
•आज भारत जिस GDP का और इतने बड़े बाजार का दंभ भर है,उसमें उस P.M का अहम योगदान है,जिसने पहली बार भारत के बाजार को पूरे विश्व के लिए खोला..
कुछ लोग इनसे भी जरूर परिचित होंगे..।।

मगर आखिर क्यों..पूरा भारत सिर्फ नेहरू,शास्त्री,इंदिरा और अटल को ही जानता है..??
जरा सोचिए..शायद ही कोई व्यक्ति होगा जो इनके नाम से अनभिज्ञ होगा..?

इन चारों में एक सामान्य बात थी...
इन चारों को युद्ध का सामना करना पड़ा..
और युद्ध की त्रासदी हमारे जेहन में बसी हुई है,जो कभी हट नही सकता,यंहा तक कि आपके जेहन में नही भी है,तो आपके जेहन में किताबों, अखबारों, समाचारों, फिल्मों के माध्यम से आ ही जाएगी...।।

क्योंकि त्रासदी दर्द देती है,और दर्द दूर हो भी जाये न,तो उसका डर सदैव बना रहता है..।।

हम अच्छाइयों के द्वारा लाये गए बदलाव को याद नही रखते,वंही बुराइयों के द्वारा लाये गए बदलाव को लंबे समय तक याद रखते है..।

हम लोगों की बुराइयों को तो याद रखते है,मगर उनके अच्छाइयों को भूल जाते है..।।

हां सच में भूल जाते है..।

अच्छा एक सवाल बताये..
भारत में संचार क्रांति की नींव किस प्रधानमंत्री ने रखा...
क्या आपको पता है,भारत के GDP में सर्वाधिक किस सेक्टर का योगदान है..??
सर्विस सेक्टर का..
LPG(liberalization, Privatization, Globalization) लाने का श्रेय किस प्रधानमंत्री को दिया जाता है..।

पता है,इन दो कदमों के कारण ही आज विश्व के अग्रणी देशों में से एक है हम।मगर बहुत कम ही लोग उन दो कदम उठाने वाले प्रधानमंत्री को जानते होंगे..।।



शनिवार, 29 नवंबर 2025

कुछ गलतियां

जिंदगी में कुछ गलतियां होनी चाहिए,
जिसका मलाल ताउम्र होना चाहिए..
अगर कोई गलतियां न हो..
और उसका मुस्कान भरा अफसोस न हो..
तो फिर ये भी कोई जिंदगी है..
इसलिए..
जिंदगी में कुछ गलतियां होना चाहिए..।
जब जिंदगी में अकेलापन सताये..
तो यही गलतियां तो साथ रह जाता है..
और एक नए होंसले के साथ आगे बढ़ने का मुकम्मल राज देता है..

इसलिए जिंदगी में कुछ गलतियां होनी चाहिए..
जिसका मलाल ताउम्र रहें...।।


Yoga for digestive system