चाहे आप कितने भी बुरे दौड़ से क्यों न गुजर रहे हो,आपके पास एक मौका होता है,उस बुरे दौड़ से निकलने का..मगर निकलना तो आपको ही पड़ेगा,वो हौंसला, जुनून,कठिन परिश्रम तो आपको ही करना होगा..।
प्रकृति सबके लिए रास्ता बनाता है..उस रास्ते पर तो हमको ही चलना होगा,
जब हम प्रकृति द्वारा बनाये गए समय पर उस रास्ते से नही चलते तब वो रास्ता कोई काम का नही रह जाता,फिर प्रकृति हमारे लिए दूसरा रास्ता बनाता है,अगर हम फिर से उस रास्ते पे चलने पे असफल हो गए,तो प्रकृति फिर तीसरा रास्ता बनाता है,प्रकृति कभी भी रास्ता बनाना बंद नही करता,वो हमेशा हमारे लिए रास्ता बनाते रहता है..।
भले ही हमारा लक्ष्य कुछ और क्यों न हो..मगर प्रकृति का एक ही लक्ष्य है,की आप सफल हो..और आपके सफलता में प्रकृति हमेशा अपना सहयोग दे रहा होता है..।
जब हमारा तादात्मय प्रकृति से बैठ जाता है,तो वो हमारे अनुरूप ही रास्ता बनाता है,मगर जब हमारा तादात्म्य प्रकृति से नही बैठता है,तो प्रकृति हमेशा वो रास्ता बनाता है,जो हमारे लिए बेहतर हो..।।
मगर हम जैसे कई नक्कारे निक्कमे लोग है,जो न प्रकृति से तादात्म्य बिठा पाते है और न ही प्रकृति द्वारा बनाये गए रास्ते पे चलते है..।
आखिर क्यों..??
क्या हम खुद के लिए और दूसरे के लिए बोझ बनना चाहते है..।
अगर प्रकृति द्वारा बनाये गए रास्ते पे नही चलना है तो फिर क्यों उस रास्ते पे कदम रखकर उस रास्ते को बेकार कर रहे हो..इससे खुद की जीवन भी बर्बाद कर रहे हो साथ ही प्रकृति की मंशा को भी,मगर जब हम कुछ कदम चल कर मंजिल तक नही पहुंच पाते तो फिर प्रकृति एक नया रास्ता बनाता है,और वो बनाता रहता है,और वो तबतक बनाता रहेगा जबतक की आप उस रास्ते पर चलकर सफल न हो जाये..।।
पूरी प्रकृति आपको सफल होना देखना चाहता है,और वो आपके सफलता के लिए अपनी पूरी सृष्टि की सरंचना को आपके अनुसार ढालता है,फेर-बदल करता है..मगर हमें ये सब नही दिखता..क्योंकि हमने प्रकृति से अपना तादात्म्य बिठा के ही नही रखा है..।।
प्रकृति ने आपको जिस उद्देश्य से भेजा है,वो अपने उदेश्य की पूर्ति के लिए आपके लिए हमेशा रास्ता बनाता रहेगा..
अगर आप उस जगह पर पहुंचने में असफल होते है तो प्रकृति आप जैसे दूसरे को उस जगह पर पहुचायेगा..
आपने गौर किया होगा..अगर आप अपने सपने नही पूरा करते तो कोई और उस सपने को पूरा करता है,और पूरा जंहा उसका गुणगान करता है,फर्क बस इतना है कि आप उस रास्ते पे सही से चले नही,और दूसरा सही से चल कर उस मंजिल तक पहुंचा..।
मगर प्रकृति इतना अन्यायी नही है,वो तबतक आपके लिए रास्ता बनाता रहेगा जबतक की आप अपने मंजिल पर पहुंच न जाये..।।
प्रकृति से जितना तादात्म्य बिठायेंगे प्रकृति उतना मदद करेगा..अगर प्रकृति से तादात्म्य नही बिठाया तो प्रकृति सिर्फ रास्ता बना कर छोड़ देगी,अगर तादात्म्य बिठाया तो वो सिर्फ रास्ता ही नही बल्कि उस रास्ते पे आपको चलने में सहयोग भी करेगी..।।
आखिर प्रकृति से कैसे तादात्मय बिठाया..??
ये तो मुझे भी नही पता..
मगर मुझे ये पता है कि आखिर क्यों प्रकृति से तादात्म्य नही बैठ रहा है..??
क्योंकि में अपने समय का सही सदुपयोग नही कर रहा हूँ,
क्योंकि मैं अपनी ऊर्जा का सही दिशा में इस्तेमाल नही कर रहा हूँ,
क्योंकि मैं लक्ष्यविहीन जिंदगी जी रहा हूँ।
इसीलिए प्रकृति से तादात्म्य नही बिठा पा रहा हूँ..
शायद मैं लक्ष्यपरक जिंदगी जियूँ,और अपने समय और ऊर्जा का सही सदुपयोग करू तो प्रकृति स्वयं ही मुझे अपनी और आकर्षित कर लेगी..।।
क्योंकि प्रकृति का एक ही उद्देश्य है,सबको स्वयं में समाहित करके स्वयं जैसा बनाना..
जैसे एक पिता और गुरु का सपना होता है कि उसका पुत्र,शिष्य उससे भी ज्यादा सफल हो,उसी तरह इस प्रकृति की भी इच्छा है कि उसके द्वारा निर्मित इस सृष्टि में उस जैसा भी कोई हो,जो इस सृष्टि के संचालन में सहयोग करें..।।
प्रकृति हमेशा बाहें फैलाये हुए है,मगर कुछ कदम तो स्वयं ही बढ़ाना होगा..।
जिस तरह फूल सुंगंध फैला कर भौंरा को अपनी और आकर्षित करता है..
उसी तरह प्रकृति हमारे लिए रास्ता बना कर हमें अपने बाहों में भरने के लिए हमारा इंतजार कर रही है..जिस तरह भौंरा को स्वयं ही पुष्प के पास जाना होता है,उसी तरह हमें भी स्वयं ही उस रास्ते पे चलना होगा..।।
बस आप एक कदम तो बढ़ाओ,प्रकृति अपनी ऊर्जा से आपको दो कदम और आगे खींच लेगा,क्योंकि आपसे ज्यादा बेशब्री से उसे आपका इंतजार है..।।

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