शुक्रवार, 23 जनवरी 2026

कंहा से आई वो..

ये दूसरी दफा हो रहा है..
जब दिल फिर से धड़कना शुरू हो गया..।

पहले..एक अल्हड़ के लिए धड़कता था..
जिसे देखते ही मेरी फिजा रंगीन हो जाती थी..।

अब उसके लिए थोड़ा-थोड़ा धड़कना शुरू हुआ..
जो मुझसे मिलों दूर है..
उसका मेसैज मेंरे हृदय को स्पंदित कर देता है..।

मालूम नही कंहा से आई वो..??
और मेरे वीरान हो गई जिंदगी में..
हरियाली सी छा गई वो..।


गुरुवार, 22 जनवरी 2026

"ठीक-ठाक"..

मैंने पूछा..
कैसे हो..??
उसने कहा "ठीक-ठाक"..।
इस ठीक-ठाक में न जाने कितना दर्द छुपा था..
न वो बयां कर सकते थे...
और न ही मैं..
इस ठीक-ठाक में छुपा दर्द को समझ सकता था..।


अक्सरहाँ जब दर्द बयां नही कर पाते है..
तो "ठीक-ठाक" कह कर काम चला लेते है..
क्योंकि और ऑप्शन ही क्या है..😊??

कहने को,सिर्फ दो शब्द है "ठीक-ठाक"..
मगर इस शब्द में..
न जाने कितना दर्द और आहें छुपा हुआ है..
ये सिर्फ ठीक-ठाक कहने वाले ही जानते है..
या फिर जो जान लेते है..
वो भी "ठीक-ठाक" को स्वीकार कर लेते है..
क्योंकि और ऑप्शन ही क्या है😊..??





सोमवार, 19 जनवरी 2026

दादी माँ..

दादी माँ..
अब तक आपका..
कम से कम दो बार कॉल आ गया होता..
आप,पहली बार जन्मदिन की शुभकामना और ढेर सारा आशीर्वाद और प्यार देती..
और दूसरी बार कॉल करके पूछती क्या-क्या बनाया..
फिर तीसरी बार रात में कॉल करती...
मगर इस बार आपका कॉल नही आएगा..😢



मगर अभी भी,आपका मुस्कुराता चेहरा, मेरे सामने है..😊
ऐसा लग रहा है..
जैसे,उस जंहा से भी आप ढेर सारा प्यार मुझपे बरसा रही है..।।

आपका मुस्कुराता चेहरा आज भी मेरे जेहन में है..
और सदा रहेगा..।।
लव यू दादी माँ..





मैं अभी कुछ नही हूँ..

मैं अभी कुछ नही हूँ..
मगर अब भी मुझमें..
असीम संभावनाएं बची हुई है..।

बस एक बार खुद को समेटना है..
और खुद को समेट कर 
उस असीम संभावनाओं को
साकार करना है..।।

मैं अभी कुछ नही हूँ..
मगर अब भी मुझमें..
असीम संभावनाएं बची हुई है..।

पापा..

पापा..
मैं आपका काबिल बेटा नही बन पाया..
पापा..
मैं आपके सपनों को रंग नही दे पाया..
पापा..
मैं काबिल नही बन पाया..
पापा..
मगर एक दिन जरूर..
वो दिन आएगा..
जब आप मुझपे गौरवान्वित महसूस कर पाएंगे..।।
पापा..

रविवार, 18 जनवरी 2026

सुबह हो ही रही थी..

सुबह हो ही रही थी...
की आंख लग गई..।
आंख लगी ही थी कि..
सपनों में तुम आ गई..।
तुम आई ही थी,
की आंख खुल गई..।
आंख खुली ही थी..
कि मोबाइल पे एक मैसेज आया..
उस मेसैज ने मेरे लिए 
गुड मॉर्निंग का पैगाम लाया..।

सुबह हो ही रही थी..
की आंख लग गई..।


दोसजी..

मैं उसे हर रोज याद करता हूँ..
मगर उसे कॉल नही करता..।
क्योंकि..
ड़र लगता है..
कंही वो फिर कॉल न काट दे..।।



तुम्हारा फोन न उठाना उतना तकलीफ देह नही था..
जितना तुम्हारा फोन काटना..
आज भी दर्द देता है..।।

मालूम नही..
किस मनहूस घरी पर मैंने..
तुम्हें फोन किया..
जो तुम्हें फोन काटना पड़ा..।

मालूम नही क्यों..
मैं तुम्हें आज भी याद करता हूँ..
और तुम्हारे फ़ोन आने का इंतजार करता हूँ..।।

फ़ोन करने को मैं भी फ़ोन कर दु...
मगर डरता हूँ..
कंही तुम फिर फोन न काट दो..।।

मैं ये भी जानता हूँ..
क्योंकि.. 
तुम्हारी जिंदगी अब सिर्फ तुम्हारी नही है..
क्योंकि आधी जिंदगी की लगाम तूने..
मोहतरमा के हाथों में थमा दिया है..।

मुझे आज भी तुम्हारे फोन का इंतजार है..
और एक सच या झूठ सुनने का इंतजार है..
तुम फोन करो..और कहो..
दोसजी मैंने नही,हो सकता है..
उन्होंने फोन काट दिया हो..।
और मैं मुस्कुराते हुए इस सच को स्वीकार कर लूं..।

मुझे आज भी तुम्हारे कॉल का इंतजार है..
दोसजी..