कैसे हो..??
उसने कहा "ठीक-ठाक"..।
इस ठीक-ठाक में न जाने कितना दर्द छुपा था..
न वो बयां कर सकते थे...
और न ही मैं..
इस ठीक-ठाक में छुपा दर्द को समझ सकता था..।
अक्सरहाँ जब दर्द बयां नही कर पाते है..
तो "ठीक-ठाक" कह कर काम चला लेते है..
क्योंकि और ऑप्शन ही क्या है..😊??
कहने को,सिर्फ दो शब्द है "ठीक-ठाक"..
मगर इस शब्द में..
न जाने कितना दर्द और आहें छुपा हुआ है..
ये सिर्फ ठीक-ठाक कहने वाले ही जानते है..
या फिर जो जान लेते है..
वो भी "ठीक-ठाक" को स्वीकार कर लेते है..
क्योंकि और ऑप्शन ही क्या है😊..??

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें