सोमवार, 18 मई 2026

नदी के दो किनारे..

हमदोनों नदी के दो किनारे है..
साथ तो चल सकते है..
मगर कभी मिल नही सकते..।
अगर मिलने की कोशिस की..
तो न तुम रह पाओगे..
और न मैं रह पाऊंगा..।
हमदोनों का कोई अस्तित्व ही नही रह जायेगा..।

यू ही चलते रहें..
यू ही बढ़ते रहें..
ये सफर कंही खत्म हो जाएगा..
और हमदोनों भी कंही खत्म होकर..
एकाकार हो जाएंगे..
और मैं का भान खत्म हो जाएगा..।।

हमदोनों नदी के दो किनारे है..
साथ तो चल सकते है..
मगर कभी मिल नही सकते..।
लेकिन हम, 
अपने अस्तित्व को खोकर..
एकदूसरे में विलीन हो सकते है..।

हमदोनों नदी के दो किनारे है..
साथ तो चल सकते है..
मगर कभी मिल नही सकते..।



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