बुधवार, 25 मार्च 2020

त्याग और महानता

#त्याग

हम भारतीयों के लिए जितना महत्व त्याग का है उतना महत्व किसी चीज का नही है।।
हमें बचपन से ही त्याग की भावना को जागृत करना सिखाया जाता है,अपने सामान को एक-दूसरे के साथ बांटना सिखाया जाता है।किसी जरूरत मंद व्यक्ति को मदद करना सिखाया जाता है।।

हम भारतीय इतिहास को अगर पलटे तो पाएंगे कि हमारे लिए आदर्श वही है,जिन्होंने अपना सर्वस्व त्याग दिया है या फिर उनके अंदर त्याग की भावना हो।।

आइये हम कुछ उन बिंदुओं पे ध्यान देते है,जिस कारण कुछ लोग हमारे मानस पटल पर छाए हुए है।।


◆#मर्यादापुरुषोत्तम_राम को ही लीजिए आखिर वो हम भारतीयों के मानस पटल पे क्यों छाए हुए है इसका एक ही कारण है।
और वो है त्याग।
उनकी महत्वता इसलिय नही है कि उन्होंने रावण को मारा,बल्कि उनकी महत्वता इसलिय है कि उन्होंने पिता के वचन पूरे करने के लिए पूरे साम्राज्य का त्याग किया।।

◆राम की बात हो और #हनुमान छूट जाए ऐसा हो सकता है क्या..??
भारत में राम से ज्यादा हनुमान पूजे जाते है,क्योंकि उन्होंने अपना सर्वस्व राम प्रभु के चरणों में त्याग दिया है।
हनुमानजी से बड़ा त्यागी आपको कोई नही मिलेगा क्योंकि उन्होंने अपना हर सांस को राम प्रभु को समर्पण कर दिया है।।


◆अब हम #कृष्ण की बात करते है,कृष्ण की महत्वता इसलिए नही है कि वो जेल में पैदा हुए या फिर उन्होंने कंस को मारा।
 -उनकी महत्वता इसलिए है क्योंकि उन्होंने अपने कर्तव्य का निर्वहन के लिए अपने प्रेम को त्यागा,अपने नंदगाव और उन माँ-बाप को त्यागा जिनके नजर से वो एकपल के लिए भी ओझल नही हो सकते थे।
- उनकी महत्वता इसलिए है कि उन्होंने महाभारत युद्ध के समय कौरवों को अपनी नारायणी सेना दे दी,और अर्जुन के सारथी बन गए।।
ये उनका त्याग ही तो था जो आज हमें उन्हें पूजने पे विवश करता है।।

  ●महाभारत की बात हो और #कर्ण का नाम छूट जाए ऐसा हो सकता है क्या..।
 महाभारत युद्ध में अगर सबसे कठिन परिस्थिति अगर किसी के लिए था तो वो कर्ण के लिए ही था।उनसे सब कुछ ले लिए गया,और उन्होंने सब कुछ स्वेच्छा से दे दिया।
उन्होंने अपने मित्रता कर्तव्य का निर्वहन करने के लिए अपना सर्वस्व त्याग दिया।।
महाभारत युद्ध में कृष्ण के नजर में अगर सब से सम्मानित व्यक्ति अगर कोई था तो वो कर्ण ही था।।


◆#महात्म_बुद्ध जिनकी छवि देखकर हमारा मन करुणा से भर जाता है आखिर क्यों..??
वो त्याग ही तो है जिन्होंने सिद्धार्थ को महात्मा बुद्ध बना दिया।।


◆जैन धर्म के 24वे तीर्थंकर महावीर जिन्हें देखकर मन में अहिंसा का भाव जागता है,आखिर क्यों..??
वो त्याग ही तो था जो वर्द्धमान को महावीर बनाता है।।


◆ चाणक्य नाम तो सुने ही होंगे क्योंकि उन्होंने मगध साम्राज्य में एक महान साम्राज्य की स्थापना किया और चंद्रगुप्त मौर्य के मंत्री बने।।
महर्षि चाणक्य जिन्होंने पहली बार अखंड भारत का सपना देखा और उसे पूरा किया।।
-चाणक्य का नाम लेते ही आखिर क्यों उनकी छवि हमारे सामने आ जाती है तो इसका एक ही कारण है और वो है उनका त्याग।।


◆अशोक नाम तो सुने ही होंगे,जिन्होंने पहली बार अपने प्रजा को संतान कहकर संबोधित किया।
कलिंग युद्ध के बाद उन्होंने युद्ध को त्याग कर बौद्ध धर्म अपनाया और ढेर सारे कल्याणकारी कार्य किये और धम्म को पूरे एशिया में फैलाया।।
ये उनका त्याग ही था जिसने उन्हें महान सम्राट बनाया।।


◆शंकराचार्य जिन्होंने एक भारत को सशक्त भारत बनाया,उन्होंने पूरे भारतवर्ष को धर्म के माध्यम से एक ड़ोर में बांध दिया भारत के चारों दिशा में चार मठ की स्थापना कर।।
-उन्होंने 12 वर्ष की आयु में ही घर त्याग कर संन्यास अपनाया।और पुरे भारत को अद्वेतवाद का पाठ पढ़ाया।
आखिर वो ऐसा क्यों कर पाए..??
 क्योंकि उनका त्याग ही उन्हें इस और लाया,और भारत फिर से अपनी खो रही सभ्यता को पुनर्जीवित करने में सफल हो पाया।।


◆कबीर इनके बारे में क्या कहा जाय दुष्टों के बीच में रहकर दुष्टों का विरोध करना कोई आसान काम नही है।
कबीर के समकालीन शासक सिकंदर लोदी को खुली चुनौती देना कोई आसान काम नही था।
हिन्दू-मुस्लिमों में फैली कुरीतियों पे कुठाराघात करना वो भी उस समय जिस समय समाज पूर्णतया रुढिता से जकड़ा हुआ था।।
ऐसा वो कैसे कर पा रहें थे..??
क्योंकि उनके अंदर त्याग की भावना थी,जिसने उन्हें उस ऊंचाई तक ले गया जंहा से सब निरीह नजर आता था।।


◆स्वामी विवेकानंद नाम लेते ही चेहरे का वो तेज झलकने लगता है,जिसे न जाने कितने युवाओं ने आत्मसात कर लिया है।
युवाओं के आदर्श वो कैसे बने..??
क्योंकि उन्होंने त्याग भाव को अपनाया जिस कारण उनके मन में मानव कल्याण की भावनाओं का भाव उत्पन्न हुआ।।
उन्होंने हम सोए हुए भारतीय को झकझोरा और अपने अंतर्मन में झांकने को कहा,अपनी खोई हुई सभ्यता,संस्कृति को फिर से स्मरण करने को कहा।।
-उन्होंने सनातन संस्कृति को पूरे विश्व में वो सम्मान दिलाया जिसके लिए ये काबिल था।।
आखिर वो सब ऐसा कैसे कर पाए तो इसका एक ही कारण है,और वो है त्याग ।।
-"त्याग हमें कमजोर नही और बलवती बनाता है,
  हम जितना त्यागेंगे उतना बलवती बनेंगे।


◆महात्मा गांधी नाम लेते ही सामने में छवि उभर आती है,आखिर क्यों...??
वो इसलिय की उन्होंने देश को आजाद कराया तो ऐसा बिल्कुल नही है,देश के आज़ाद कराने में उनके योगदान के साथ अनेको का योगदान है तो आखिर क्यों गांधी जी हम भारतीय के मानसपटल पे छा गए तो इसका एक ही कारण है वो उनका त्याग है।।
-उनका त्याग लाखों भारतीयों को अपनापन का अहसास दिलाता था,इसीलिए तो वो गांधी से महात्मा बन गए।।


◆ऐ.पी.जे.अब्दुल कलाम नाम लेते ही वो मुस्कान याद आ जाती है,जिसके कायल लाखों युवा है।।
आखिर उनमें ऐसी कौन सी चीज़ थी जिस कारण उनकी छवि युवाओं के बीच में लोकप्रिय थी,
तो वो उनका त्याग ही तो था।
यंहा तक कि अपना नाम,धर्म सब कुछ उन्होंने त्याग दिया,उनके लिए ये सब तुच्छ चीज़ था इसी कारण तो वो जन-वैज्ञानिक से जन-नेता बन गए।
जो राष्ट्रपति सिर्फ राष्ट्र का राष्ट्रपति होता था उसे उन्होंने जन का राष्ट्रपति बना दिया।।


◆ऐसे हज़ारों नाम है जो भारत को गौरवान्वित करता है।भारत की संस्कृति-सभ्यता को मजबूत बनाता है।
भारत को अन्य राष्ट्रों के समूह में एक अलग पहचान दिलाता है।।
-वो इसलिए संभव हो पाया कि हम भारतीयों के अंदर त्याग की भावना है।
-ये भावना हमें सीखना नही पड़ता बल्कि आनुवांशिक रूप से ही ये हममें आ जाता है।
 मगर वर्तमान में ये भावना हमसे दूर होती जा रही है,छोटी-छोटी चीज़ों के कारण हम आपस में झगड़ पड़ते है।।
आखिर क्यों..??
क्योंकि हम अपनी संस्कृति-सभ्यता को भूल रहें है।।


●पता है नरेंद्र मोदी इतने लोकप्रिय क्यों है,क्योंकि उनके अंदर हमारी संस्कृति और सभ्यता की झलक देखने को मिलती है।
-उनके अंदर वो त्याग भाव नजर आता है,जिसके कारण हम यू ही उनके और खींचे चले आते है।।


●आज पूरा विश्व कोरोना वायरस से ग्रस्त है,हम भी अछूते नही है,इसलिए तो घर में है।
मगर हम उतने घबराये हुए नही है,क्योंकि हमारे अंदर कंही-न-कंही त्याग का भावना छुपा हुआ है,जिस कारण वो हमें मजबूती से लड़ने के लिए प्रेरित कर रहा है।।

मंगलवार, 24 मार्च 2020

प्रकृति और हम

गली में कुत्ते घूम रहे है,
वो हमें ढूंढ रहें है।
पेड़ों पे चिड़िया चहक रही है,
और पूछ रही है...
कंहा गए वो जिन्हें अपने पे मान था,अभिमान था।
नदियों और समुंद्र में मछलियां तैर रही है,
और पलकें उठा के उन आलीशान जहाज को ढूंढ रही है,
जिन्होंने उनका जीवन दुस्वार कर दिया..।।

हवा आज मंद-मंद बह रही है,
नदियां आज कल-कल बह रही है,
समुंद्र आज हिलोरें अपने अनुसार ले रहा है,
पंक्षियाँ आज खुले आसमां में चहचहा रही है,
जंगलों में जानवर आज स्वछंद घूम रहें है,
नदियों और समुंद्र में मछलियां आज स्वंतंत्र तैर रही है।।
क्योंकि आज हम घर में है...।।

जब मन शांत हो,
तो सोचे और खुद से पूछे कि हम मानवों ने,
अपने स्वार्थ के लिए पृथ्वी पर रह रहें जीव को कितना नुकसान पहुँचाया और पहुंचा रहें है।।
हम अपने अस्त्तित्व बचाने के लिए आज घर में है,
मगर उनका क्या जिनका हमनें घर ही उजाड़ दिया था/है।।

हम मानवों ने अपने स्वार्थ के लिए पृथ्वी पर रह रहें सारे जीव को खतरे में डाल दिया है,
आज एक ऐसे वायरस से डरे-सहमें है,जिन्हें हम नंगी आंखों से देख तक नही सकते।।
प्रकृति को चुनौती देने वाले आज कंहा है..??
उसके बनाये सिर्फ एक ऐसे वायरस से पूरा मानव समुदाय खतरे में आन पड़ा है।
जिसे नग्न आंख से देखा तक नही जा सकता..।।
एक साधारण मानव कल्पना नही कर सकता कि कोरोना वायरस कितना छोटा है..इतना छोटा की सुई के नोख पे हज़ारों लाखों बैठ सकते है।।।
आज सारा मानव डरा हुआ है,क्योंकि हमने पृथ्वी पर रह रहें किसी जीव-जंतु को चैन से रहने नही दिया और दे रहे है।
चाहे वो आसमान हो,स्थल हो,जल हो,यंहा तक कि अब अंतरिक्ष तक मे भी कचरा फैलाना शुरू कर दिया है।।

एक कहावत है-जैसा करोगे,वैसा भरोगे।।

 हमारी सनातन संस्कृति,वेद-पुराण में प्रकृति के महत्व के बारे में बताया गया है,उन्होंने हरेक पेड़-पौधे,जीव-जंतुओं,पर्वत-पठार, नदी-तालाब में उस प्रकृति के मौजूदगी के बारे में बताया गया है।।
हम यू ही गंगा और गाय को माँ नही कहते,
हम यू ही पीपल और बरगद को नही पूजते।।
क्योंकि प्रकृति हर कण-कण में मौजूद है।।
आज हम पश्चिमी सभ्यता को आंख मूंद कर अपना रहें है,
उसकी दुष्परिणाम आज हमें वर्तमान में भुगतना पड़ रहा है।।

आज समय आ गया है कि हम फिर से अपने संस्कृति और सभ्यता को अपनाए।।
प्रकृति के साथ-साथ जीना सीखें।।

शनिवार, 21 दिसंबर 2019

हम असफल ही होना चाहते है।

सफलता किसे पसंद है।
शायद ही कोई होगा जिसे असफलता पसंद हो।मगर सच पूछिए हममें से अक्सरहाँ लोग असफल ही होना चाहते है।
है न अजीब सी बात।
भला कौन होगा जो असफल होना चाहता होगा।
मगर सच में विश्वास कीजिये हममें से 90% लोग असफल ही होना चाहते है।
क्योंकि वो सफल होने के लिए वो सब नही कर रहें है जो सफल होने के लिए करना जरूरी ही नही परम जरूरी है तो फिर हम आखिर क्यों नही वो अब चीज़ करते है जो सफल होने के लिए जरूरी है।
क्योंकि हम सफल नही असफल ही होना चाहते है।।

आपने कभी सोचा है कि आप असफल क्यों हुए है।
जरा सोचिएगा तो पता चलेगा कि हमें असफलता हमारी कमियों के वजह से ही मिला है।।

शुक्रवार, 23 अगस्त 2019

कृष्ण एक रहस्य।।

हज़ारों साल से हम कृष्ण को पूजते आये है,
मगर कृष्ण की छवि कृष्ण के बाद किसी
में नही दिखाई दिया।

क्योंकि हमनें सिर्फ कृष्ण को पूजने पे ध्यान दिया उससे कुछ सीखने पे नही।।



कृष्ण ही एक ऐसा स्वरूप है,
जिसमें सबों को कंही न कंही अपना अक्स दिखाई दे जाता है,
इसीलिय तो कृष्ण का हरेक स्वरूप अभी तक जीवंत है।।

सबों ने अपना-अपना स्वरूप कृष्ण में ढूंढा।।
सूरदास ने कृष्ण के बाल्यकाल को आत्मसात किया तो,
मीरा ने कृष्ण के किशोरावस्था में अपने को ढूंढा तो
विवेकानंद ने कृष्ण के युवाकाल से सब कुछ सीखा।
हज़ारों ऐसे संत और व्यक्तित्व हुए जिसने कृष्ण के सिर्फ किसी एक पहलू को ही देखा और जाना,क्योंकि वो जंहा से कृष्ण को जानना शुरू किए वो वही रम गए,क्योंकि उनका हरेक स्वरूप इतना रमणीय है कि कोई एक बार डुबकी लगा कर निकल ही नही पायेगा।।

जितने भी महान संत हुए सबों ने कृष्ण से कुछ सीखा।
 क्योंकि कृष्ण सिर्फ कृष्ण ही नही है,
वो विराट है,
न उनका कोई छोर है,
न कोई अंत
 वो अनंत है।।

कृष्ण को समझना उतना ही कठिन है जितना तारों को गिनना।
और उतना ही आसान है जितना सूर्य के तपन को महसूस करना।।


कृष्ण सागर है।
और उस सागर में जिस-जिस ने डुबकियां लगाई सबों को कुछ न कुछ मिला ही।
वो किसी को निराश नही करते।।
अगर झोलियां ही छोटी पड़ जाय तो निराशा तो स्वाभाविक है,
आपकी झोलियां जितनी बड़ी होगी उतनी जल्दी भरेगी।
क्योंकि कृष्ण को समझ पाना बहुत कठिन है।।

कृष्ण के मुस्कान में सृष्टि का विनाश छुपा हुआ है तो
उनके क्रोध में सृष्टि का कल्याण छुपा हुआ है।।
वो ज्ञानी पुरुष के लिए उतने ही दुर्लभ है,
जितना समुन्द्र से सीपिया निकालना।
और,निश्छल,अनपढ़,गवार के लिए उतने ही सरल है,
जितना समुन्द्र के रेत को पाँव से स्पर्श करना।।


कृष्ण ने कभी नही कहा कि तुम मेरी आराधना करों, उन्होंने हमेशा यही कहा कि तुम मेरे शरण में आओ।।
आराधना करना आसान है
मगर शरण मे जाना मुश्किल।
 क्योंकि जब हम किसी के शरण मे जाते है तो हमें अपने चरित्र को भी उसके तरह ही ढालना पड़ता है तब ही हम किसी के शरण मे जा पाएंगे और रह पाएंगे।
अगर हम अपने चरित्र को उसके अनुसार नही ढालेंगे तो हम उनके शरण में नही रह पाएंगे।।

कृष्ण को सिर्फ पूजे ही नही,
उनसे कुछ सीखे,उन्हें आत्मसात करें।।
क्योंकि वो सर्वश्रेष्ठ है।।

सोमवार, 12 अगस्त 2019

कर्तव्य

एक पुत्र का अपने पिता के प्रति क्या कर्तव्य है?

ये सवाल हरेक पिता और पुत्र के बीच मे रहता है,ये दोनों अपने कर्तव्य का निर्वहन करना चाहते है।
मगर कभी-कभी परिस्थिति ऐसी नही रह पाती की अपने कर्तव्य का निर्वहन कर सकें।

हरेक पुत्र चाहता है कि पिता हमारी हर ख्वाहिश को पूरा करें।पिता करता भी है,ओर करने की कोशिश भी करता है।मगर कभी-कभी परिस्थितियां ऐसी नही रहती की पिता अपने पुत्र की हर ख्वाहिश पूरा कर सकें।

हरेक पिता चाहता है कि मेरा पुत्र हमारा सम्मान करें वो हमारे हर अधूरे काम को पूरा करें, वो हमारे हर सपनों को पूरा करें। हरेक पिता चाहता है कि मेरा पुत्र कुछ ऐसा करें कि हम गौरवान्वित महसूस करें।।
हरेक पिता यही चाहता है और कुछ नही।
वो अपने पुत्र से और पुत्र के द्वारा समाज से सम्मान पाना चाहता है।।
और शायद पिता कुछ नही चाहता।।

पिता बस यही चाहता है कि जो कठिनाइयों का सामना हमनें किया है उस कठिनाइयों का सामना मेरा पुत्र न करें।।
बस पिता यही चाहता है।
मगर पुत्र अपने पिता की भावनाओ को समझ नही पाता,ओर पुत्र दोषारोपण करने लगता है कि आप हमेशा अंगुलियां ही करते रहते है।।

वो पिता अपनेआप को खुशनसीब समझते है,जो पुत्र अपने पिता का सम्मान करते है,जो अपने पिता के अधूरे सपनों को पूरा करते है।।

अगर कोई पुत्र अपने पिता को सपनों को पूरा नही कर पाता तो कोई फर्क नही पड़ता,मगर फर्क तब पड़ता है जब पुत्र अपने सपनों को भी पूरा नही कर पाता तब उस पिता को सर्वाधिक तक़लीफ़ होता है।।

"इस दुनिया में सिर्फ आपका पिता ही है,
जो आपका सर्वाधिक सम्मान कर सकता है"।।

"इस दुनिया मे सिर्फ पिता ही है,
जो आपके उन्नति से,
आपसे ज्यादा खुश होगा"।।

इसीलिए पिता कैसा भी हो,
पिता का सम्मान करना चाहिए,
उनके भावनाओं का कद्र करना चाहिए।।

क्रमशः.....

रविवार, 9 जून 2019

एक बुद्धिजीवी वर्ग

कभी घर से बाहर भी निकले तब आपको पता चलेगा कि आपके समाज मे किस-किस तरह के बुद्धिजीवी रहते है।

कभी बुद्धिजीवियों के बीच मे बैठ कर देखिएगा बड़ा मजा आएगा।
खासकर उस तरह के बुद्धिजीवियों के बीच मे जिन्होंने लगभग अपनी जिंदगी गुजार ली है।।

वाकया ये है कि मैं पार्क में बैठा था लोगो की चहलकदमी बंद सी हो गई थी क्योंकि सूर्य की किरणों ने पूर्णतया पार्क को अपने आगोश में ले लिया था । छांव ढूंढ कर में एक जगह बैठा जंहा पहले से दो व्यक्ति बैठे थे।
मैं अपने मोबाइल में लगा हुआ था और वो दोनों आपस मे बात कर रहे थे कि तीसरे आदमी ने भी उनदोनों का ग्रुप जॉइन किया उनके जुड़ते ही मेरा ध्यान अब उन तीनों की ओर गया।।

और मियां क्या हाल है सब खैरियत है,
हां सब खैरियत है।
ये तीनों 3 स्टेट का प्रतिनिधित्व करते थे एक U.P से और दूसरे जम्मू-कश्मीर से ओर तीसरे गुजरात से।
U.P  वाले ने बोलना शुरू किया- अमेरिका पगला गया है,ईरान के ऊपर पांबन्दी लगा दिया है,चीन ओर भारत बोला है कि हम ईरान से तेल खरीदेंगे चाहे जो भी हो जाये।
अब मेरा ध्यान पूर्णतया उनलोगों की और गया क्योंकि वो अब इंटरनेशनल लेवल की बात कर रहे थे।।
उन्होंने बोलना शुरू किया अमेरिका को जो मन में आता है साला वो करता है।
ईरान से समझौता हुआ था ट्रम्प कार्ड ने तोड़ दिया।ईरान को भी सद्दाम हुसैन की तरह बर्बाद कर देना चाहता है।
मगर ये नही होगा क्योंकि सऊदी अपने यंहा परमाणु संयंत्र लगा रहा है वो अमेरिका गिड़गिड़ा रहा है मत लगाओ-मत लगाओ।
मेरा ध्यान तो अब ओर उनकी ओर चला गया क्योंकि इतनी अंदर की बात इनसे जो सुनने को मिल रहा था।।
तब तक यादव जी भी आये सलाम अदाब किये और बीच मे बैठा गए।
U.P वाले ने फिर दूसरा टॉपिक उठाया तुर्की ने सारे मुसलमान देश को एक होने को कहा है जिससे अमेरिका का कुछ न चले क्योंकि अमेरिका ने इजरायल को बढ़ावा दे रहा है,बीच मे यादव जी बोले हां नाजायज औलाद जो है।
U.P वाले ने फिर बोलना शुरू किया इस बार इजरायल का खात्मा हो जाएगा क्योंकि इस बार रूस,चीन सब मुस्लिम देश उसका नास्तेनुबूत कर देगा सब फिलिस्तीन का साथ देगा,इजारयल बहुत फड़फड़ा रहा है,युद्ध मे पाकिस्तान ईरान भी साथ देगा बीच मे यादव जी बोले भारत नही देगा बाकियों ने भी हां में हां मिलाया ओर बोला हां भारत नही देगा।
हिटलर तो खत्म ही कर दिया था सबकों न जाने कैसे ये लोग बच गया साला,इन सबका खत्म होना जरूरी है।।

यादव जी ने बीच मे बोला सुना है इमरान खान ने इस्तीफा दे दिया है क्या ये सच है क्या,मुझे भी आश्चर्य लगा मगर UP वाले साहब ने मुझे संभाला क्योंकि उन्होंने कहा उसे कौन हटाएगा आर्मी का सपोर्ट है उसको। यादव जी ने कहा वही तो मुझे भी आश्चर्य लगा चीन भी बहुत ज्यादा इन्वेस्ट कर रहा है मगर पाकिस्तान बोला है कि अब एक भी पैसा नही लौटाएंगे ओर CPEC समझौता तोड़ लेंगे क्योंकि चीन शुरुआत में बोला था ढेर सारे रोजगार मिलेंगे मगर कुछ नही मिला सारे आदमी को चीन से ही लाया पाकिस्तानी सिर्फ सड़क के किनारे गाड़ी का पंचर बना रहे है।।
UP वाले ने कहा पाकिस्तान अगर चाहे तो सारा पैसा वापस कर सकता है।मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ क्योंकि उसे अभी खाने के लाले पड़े हुए है और वो सारा पैसा चुका देगा कैसे-क्योंकि पाकिस्तान में बहुत बड़ा तेल का खादान मिला है इतना बड़ा की वो उसे बेच कर आसानीसे चुका देगा।मगर मैंने तो सुना था पढ़ा था कि जितना खर्च किया गया उतने का भी तेल जमीं के अंदर नही मिला।

मेरा दिमाग अब काम नही कर रहा था, मन कर रहा था बीच मे बोलू मगर चुप रहना ही बेहतर समझा।सबसे बड़ा झटका तो यादव जी का बात सुनकर लगा-

यादव जी बोले जो वायुसेना का विमान गायब हुआ था वो मिल गया क्योंकि चीन ने उसे पकड़े हुआ है।
मैं सन्न रह गया ये खबर इन्हें कैसे पता चला।
उन्होंने आगे बोलना शुरू किया चीन उन सेनाओं को पकड़कर उससे गुप्त जानकारी उगलवा रहा है,ये बात पता चलते ही भारतीय सेना ने उनके 200 से ज्यादा जवान को मार गिराया।।
मैं तो होश ही खो बैठा,इतनी बड़ी घटना हुई हमें पता तक नही,सिर्फ हमें ही नही?
लगता है सिर्फ उन्ही को पता था ये खबर।

मैं अब चुप नही रहना चाहता था में चाहता था मैं भी इनके ज्ञान कुंभ में कूद जाऊ, मगर मेरे मन ने मुझे समझाया मत कूद ।।

UP वाले ताऊ ने फिर बोलना शुरू किया उन्होंने कहा इस बार भारत पाकिस्तान के रिस्ते अच्छे हो जाएंगे।
अब तक जो जम्मू-कश्मीर वाले काका जो बैठे थे उन्होंने कहा होना भी चाहिए पहले हमलोग काम करने के लिए इधर से उधर जाया करते थे एक दुसरे से मिला करते थे,हमदोनों का आपस में  शादी भी हुआ करता था भले देश अलग हुआ था मगर दिल मिले हुए थे,अभी भी है।।
UP वाले अंकल ने कहा कारण ये है कि पहले पैसा नही था ज्यों-ज्यों पैसा आया त्यों-त्यों दीवाल घेरते गए बाड़े लगाते गए एक दूसरे से अलग होते गए।
मगर कब तक अलग रह सकता है दो भाई ।कुछ सालों के बाद फिर तो मिलना ही पड़ता है।
ये बात दिल को छू गई।।
इतनी बड़ी बहस में सबसे महत्वपूर्ण बात यही थी।।

तब तक गुजरात वाले चाचा जो अब तक मौन थे उनके मोबाइल की घंटिया बजनी शुरू हुई और उन्होंने अपने मित्रों से कहा साढ़े 9 बज गए अब निकलता हूं।।
मैं भी सोचा अब निकल ही जाऊ कुछ अच्छी यादों को लेकर।।
मन में ढेर सारे विचार उमड़ रहे थे और ये सोच कर हम आगे बढ़ते गए की इस तरह के बुद्धिजीवी  वर्ग का भी होना जरूरी है।क्योंकि??

रविवार, 10 फ़रवरी 2019

मेरी जन्म भूमि मुझे बुला रही है।।

#मेरी जन्म भूमि मुझे बुला रही।।

अभी-अभी सपना देख के उठा और लिखने के लिए बैठा,
अभी में मुंबई के चकाचौध में हु,
मुम्बई की लोकल ट्रेन में आप भागती हुई दुनिया को देख सकते है,
तो दूसरों के ऊपर अपना गुस्सा उतारते हुए देख सकते हो आप,
इन सब से किसी को फर्क नही पड़ता,
मगर मुझे पड़ता है।।

#मैंने अपने सपने में 3 दृश्य देखा जो ये है-

#जब मैंने देखा एक व्यक्ति अपना गुस्सा निरीह कुत्ते पे उतार रहा था।
हमने देखा इस भागते हुए शहर में कुछ लोगो को दूसरे के लिए भी समय है जब हमने स्टेशन पे अपनी दरी पे सिर्फ खुद ही नही दूसरों को भी बिठा पाया।

#मैंने इस भागते हुए लोकल ट्रेन में खचाखच भीड़ से भड़ी हुई ट्रैन को देखा जिसमें सब सफर नही कर पाते वो अगली पकड़ लेंगे ये कह कर उसे छोड़ देते,उन्हें लगता है कुछ नही होगा।
मगर होता है , आप उतने समय के लिए पीछे चले जाते हो।

#मुझे मालूम नही स्टेशन से डायरेक्ट एक बहुत बड़े ऑडिटोरियम में कैसे चला आया वाकय बहुत बड़ा था ऊपर से कांच लगा हुआ था जिससे ऊपर की विहंगम तस्वीर सब दिख रही थी,धीरे धीरे लोग ऑडिटोरियम में आ रहे थे इतने आ गए थे कि हमदोनों भाई को पीछे जाना पड़ा इतने में ऊपर से एक हेलीकाप्टर गुजरी मगर उसने किसी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित नही किया,में ज्योहीं अपने सीट की ओर बैठने के लिये बढ़ा देखता हूं आसमान में एक बहुत बड़ा चिड़िया पंख फैलाये हमारे इधर आ रही है,जब वो ऑडिटोरियम के ठीक ऊपर आया तो बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा हुआ #बिहार एयरवेज ने बिहारियों के मन मे ऊर्जा का संचार कर दिया और हम बिहारियों ने खुशी से चीखना शुरू कर दिया #ऐ बिहार के प्लैन ह।।
मानो क्षणभर के लिए पूरा माहौल ही बदल गया,हम बिहारी इस दृश्य को देखकर गौरवान्वित महसूस कर रहे थे मगर जो लोग बिहार के नही थे वो तरह-तरह के बातें बना रहे थे कोई मजाक उड़ा रहे थे तो कोई शिकायत कर रहे थे।।
#मगर जरा सोचो हम बिहारी को अपने बिहार के नाम से इतना लगाव है तो सच मे बिहार से कितना लगाव होगा।।
मगर जब ये विहंगम दृश्य घटित हुआ तो में भी उस प्लैन पे #बिहार नाम देखकर उत्साहित हुआ और गौरवान्वित महसूस किया।
मगर मेरा ध्यान तुरंत ही उधर आ गया जिधर हम बिहारियों के ऊपर तंज कसे जा रहे थे।।
#तब मन मे एक ही ख्याल आया कि मुझे जो करना है,
 #वो बिहार के लिए ही करना है,ओर में बिहार आने के लिए तब ही सोचने लगा।।
#तब तक मे नींद ही खुल गई।।नींद खुले हुए 15 मिनेट से ज्यादा होने को है अब।।

Yoga for digestive system