रविवार, 22 दिसंबर 2024

चलो खुद को बदलते है..

हमलोग कछुआ और खरगोश की कहानी बचपन से ही सुनते आ रहें है..
इस कहानी में अभी तक खरगोश जीत नही पाया है..
आखिर क्यों..??
कभी इस और ध्यान गया है..आखिर क्यों हर बार खरगोश ही हार रहा है..
क्योंकि वो खुद को बदलना नही चाहता..
उसे हर बार लगता है की वो बीच मे आराम करके फिर से दौड़कर जीत जाएगा..मगर वो हर बार इसी तरह से हारता है..।।




हम मनुष्य का भी तो यही हाल है..
हम हर बार हारते है..
मगर खुद को बदलना नही चाहते..।।
क्यों..??
क्योंकि खुद के अंदर बदलाव लाना सबसे मुश्किल कार्य है..।


हम दूसरों पर प्रभाव डालने के लिए अपने अंदर बदलाव तो लाते है..

मगर जो कमियां हमारे अंदर है,जिसे मेरे सिवा कोई नहीं जानता, उसे दूर करने का हम प्रयास नही करते..अगर करते भी है तो निरर्थक प्रयास करते है..।।

क्योंकि हमें उन कमियों की आदत हो गई है,या फिर कह सकते है कि हमारी कमियां इतना विराट हो गई है कि हम उससे हर बार निरर्थक प्रयास करके हार जाते है..।

क्या उससे जीता नही जा सकता..??

अगर वोटिंग कराया जाए तो 100% हां में ही जबाब आएगा..
मगर जब उसे अमल में लाने की बात हो तो 95% लोग असफल हो जाते है..।
सिर्फ 5% लोग ही अमल में ला पाते है..
और वही 5% लोग दुनिया को अपने अनुरूप चलाते है..।।

क्या हम उस 5% में नही आ सकते..?
क्यों नहीं..
सिर्फ उन कमियों को दूर करके जिसे सिर्फ हम जानते है..
चलिए आज से शुरू करते है...
सबसे पहले अपने कमियों को लिखते है..
हमारी कमियां हमारे अच्छाइयों से कम ही है..😊

मगर हमारी कमियां सिर्फ हमारे अच्छाइयों पे ही हावी नही बल्कि पूरे जीवन पर हावी हो जाता है..।।

चलिए उसे दूर करते है..
और इस बीतते हुए साल के साथ अपने कमियों को भी अलविदा कहते है..
और नए वर्ष में नया शुरुआत करते है😊..।।



बुधवार, 18 दिसंबर 2024

दूसरों में कमियां निकालना बंद कीजिए..

आपने अक्सरहाँ सुना होगा या फिर कभी आपके साथ भी हुआ होगा..
की आपने किसी को अच्छा बोला मगर उसे बुरा लग गया..
कभी सोचा है क्यों..??
क्योंकि हमारी बोलनी की शैली पर सबकुछ निर्भर करता है..

एक उदाहरण से समझिए..
●आप कहते है की ये रेस्टुरेंट खराब है..
वंही दूसरा कहता है कि इस रेस्टुरेंट का फास्टफूड अच्छा नही है..
●वंही आप किसी बच्चे को कहते है..
-तुम बहुत बदमाश है..
वंही दूसरा कहता है..आप बहुत चंचल है..

हमारे शब्दों का चयन बहुत मायने रखता है..
आप किस शब्दों का कंहा चयन करते है,
किसके लिए करते है..
ये बहुत महत्वपूर्ण है..।

आप जरा याद कीजिये..
आपका रिलेशन किसके साथ खराब है..
और गौर कीजिये क्यों खराब हुआ..
कंही-न-कंही आपके या उनके बातों में कुछ ऐसे शब्दों का मिश्रण रहा होगा..
जो आपको या उनको तकलीफ पहुँचाया होगा

शुक्रवार, 13 दिसंबर 2024

बिहार की धरती बांझ हो चुकी है...

बिहार की धरती बांझ हो चुकी है.. फिर से एक हलधर की जरूरत है ..

जो पूरे बिहार को अच्छी तरह से कुरेदकर..

इसके बांझपन को नाश करें..

फिर से एक चाणक्य की जरूरत है..

जो बिहार की जड़ता खत्म कर..

एक नया कीर्तिमान रचें..

फिर से एक शेरशाह की जरूरत है..

फिर से एक जयप्रकाश नारायण की जरूरत है..

जो पूरे देश के युवाओं के जड़ता को तोड़कर

एक आंदोलन खड़ा कर..

सक्ता पे आसीन जर हो चुके नेताओं को उखाड़ के फेंके..

बिहार की धरती बांझ हो चुकी है..

फिर से एक हलधर की जरूरत है..

जो इसके बांझपन को मिटाये...


कंहा हो तुम..

अब तुम्हारी कमी खलती है..
कंहा हो तुम..
जंहा भी हो..
अब आ जाओ..
अब तुम्हारी कमी खलती है..।।

बुधवार, 11 दिसंबर 2024

हमारे भगवान..

आपने कभी ध्यान दिया है..
हम जैसे होते जा रहे है..
वैसे ही अपने भगवान को गढ़ते जा रहे है..

आपने आज से 5-6 साल पहले तक इतना उग्र,क्रोधी भगवान का स्वरूप सोशल मीडिया पे या वॉलपेपर के रूप में नही देखा होगा..
जैसा आजकल लोग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पे स्टेटस लगाते है या फिर शेयर करते है..।।



अगर आपके देखने का नजरिया थोड़ा अलग है तो..आप लोगों के इस तरह के कार्य से आप उन्हें पहचान सकते है कि वो किस तरह के लोग है...।।

आज कल जिस तरह से हम Hi-tech होते जा रहे है,और समाज से कटते जा रहे है,उसी तरह से भगवान को भी hitech बनाते जा रहे है और उन्हें एकाकी बनाते जा रहे है .

पहले के पुराने भगवान को देखे वो अकेले नही दिखेंगे..
अब के फोटो देखे वो अकेले ही दिखेंगे..

पहले के भगवान के फ़ोटो में उनका स्वरूप सौम्य, और मंद मुस्कान लिए होता था,और अब के मांसल शरीर के साथ क्रोध से आंख लाल लिए..

पहले के भगवान के फोटो में प्राकृतिक परिवेश दिखता है..
अब नही दिखता..क्योंकि हम प्रकृति को नष्ट करते जा रहे है..

पहले के देवियों के तस्वीरों में उनके वस्त्र और आभूषण शालीनता लिए हुआ था..अभी के वस्त्र और आभूषण तड़क-भड़क होता जा रहा है..।।



आखिर क्यों..??
क्योंकि हम खुद ऐसे होते जा रहे है..

हम जैसे होते है..उसी तरह का स्वरूप भी भगवान का गढ़ते है..।।





शनिवार, 7 दिसंबर 2024

सपने अगर अपने हो..

कभी सपनों को मरने मत देना..
क्योंकि सपने जरूर पूरे होते है..
अगर सपने अपने हो..
जिसे आपने देखा है..
वैसे सपने जरूर पूरे होते है..।।



कभी-कभी हम
जिंदगी के भागदौड़ में 
अपने सपनों को भूल जाते है..
इसीलिए वो सपने हकीकत में तब्दील नही हो पाते..
इसीलिए सपनों को संजो के रखे..
क्योंकि सपने अगर अपने हो तो जरूर पूरा होता है..।

अगर सपनें पूरे नही होते..
उसके लिए भी हम खुद ही जिम्मेदार है..
हर अपराध के लिए हम स्वयं ही कसूरवार है..।
ये आरोप प्रत्यारोप का समय नहीं..
बल्कि एकबार फिर से बिखरे हुए सपनों को समेटकर..
उसे पूरे करना का समय है..।।

अगर सपने अपने हो तो वो जरूर पूरे होते है..
अगर पूरे नही होते है..
तो एकबार फिर से सबकुछ दांव पे लगा कर पूरा करने का प्रयत्न करें..
क्योंकि सपने अगर अपने हो तो वो जरूर पूरा होते है..।

शुक्रवार, 6 दिसंबर 2024

हमारे हिस्से की लड़ाई..

कभी-कभी हमारे हिस्से की लड़ाई दूसरे भी लड़ रहे होते है..
और हमें पता नही चलता..
कभी सोचा है इसके बारे में..
उस और हमारा कभी ध्यान ही नही जाता..


हमें लगता है,
हमें खुद ही अपने हिस्से की लड़ाई लड़नी होती है..
मगर ऐसा नही है..
कुछ लोग और भी होते है,जो आपके हिस्से की लड़ाई लड़ रहे होते है..
या तो वो कभी दिखते है,या फिर नही दिखते..
या फिर हमें ताउम्र समझ मे ही नही आता..
और हम गलतफहमी पाल लाते है कि ये सब कुछ हमने ही किया है..।।
इसीलिये जब सफल हो..
तो अपने अंदर कृतिज्ञता का भाव जरूर रखें..
अगर हो सकें तो किसी जरूरतमंद के हवनकुंड(जीवन) मे अक्षत की आहुति कम-से-कम जरूर दे..
मगर अफसोस ये शौभाग्य सब को नही मिलता..
कुछ को अगर मिलता भी है तो वो उसका सदुपयोग नही कर पाते..
और कुछ लोग नए कीर्तिमान रच देते है..।।

कंहा से शुरुआत करू...
चलिए शुरू से ही शुरुआत करते है...
अगर हमारे पूर्वज खड़े होने के लिए असहनीय पीड़ा नही सहे होते तो शायद आज हम मानव समुदाय पे कोई और राज 
करता..जरा कल्पना कीजिये..
अगर हड़प्पा काल में हमारे पूर्वज उतना उन्नतशील नही होते तो आज हमें ये गुमान नही होता कि ये सबसे उन्नत और सबसे बड़ी सभ्यता थी..
अगर वैदिक काल मे हमारे ऋषियो ने वेद की ऋचा नही रची होती..तो आज हम गुमान नही करते..
अगर महाजनपद काल मे बिम्बिसार,घनानंद,अशोक,नही होता तो दुनिया का सबसे बड़ा मगध साम्राज्य नही बनता..
अगर गुप्त काल उन्नतशील नही होता तो विश्व की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी नालंदा नही होती..और वराहमिहिर, आर्यभट, कालिदास, धन्वंतरि इत्यादि जैसे विद्वान नही होते..।
अगर हमारे पूर्वज एकजुट हुए होते तो मध्यकाल में मुस्लिम आक्रांता हमपे राज नही करते..अगर वो दक्षिण भारत विजय कर लेते तो..तो स्थापत्यकला की ऊंचाइयों को छूने वाला मंदिर ना होता
अगर मुगलकाल सुदृढ़ नही होता तो कुछ ऐतिहासिक इमारत का निर्माण नही होता,अगर वो कमजोर ना होते तो अंग्रेज हमपे राज ना करते..
अगर हमारे क्रांतिकारी नेता अपना बलिदान नही देते तो आजादी की आवाज घर-घर मे बुलंद नही होता..अगर गांधी,नेहरू,बोस,पटेल,अंबेडकर, आजाद,भगत, बिस्मिल्लाह कितनों का नाम लू अगर ये ना होते तो भारत शायद ऐसा न होता..
अगर आज हम यंहा है..और मनुष्य या भारतीय होने पे नाज कर रहे है..
तो इसके पीछे लंबा संघर्ष चला है और ये चल रहा है...
●हम अभी जिस अवस्था मे है इसके पीछे भी लंबा संघर्ष चला है...
हम कल्पना भी नही कर सकते..
हमारे एकल सेल(स्पर्म) को करोड़ों सेल से संघर्ष करके
अंडाशय तक कि यात्रा करनी पड़ी है..
फिर 9 महीने तक हमारी माँ को संघर्ष करना पड़ा है..
फिर जन्म लेते ही..आपके साथ-साथ कइयों का संघर्ष चालू हो गया है..
और ये संघर्ष अभी भी चालू है..और अनवरत चालू रहेगा..


इसीलिए जब भी आप जीवन मे संघर्ष कर रहे हो..
तो जान लीजिए कुछ और लोग भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से आपके साथ संघर्ष कर रहे है..और आपको भी बेहतर दुनिया के लिए संघर्ष करना है..

इसीलिए उदास मत होइए..
बल्कि अपने संघर्ष को अपना कवच बना कर सफलता का पताका फहराइये..।।



Yoga for digestive system