शुक्रवार, 10 जनवरी 2025

अच्छे और बुरे इंसान कौन होते है..??

सबसे बुरे इंसान कौन होते है..??

वैसे कोई बुरा नही होता,हरेक इंसान में अच्छाइयां होती ही है..

वैसे कबीर दास जी कहते है-

"बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोई,जो दिल खोजा आपना मुझसे बुरा न कोई।"

मगर ऐसे इंसान से हमेशा दूरियां बनाके रखें,

जो दूसरों की निंदा पीठ-पीछे करता है,

जो दूसरों का मजाक पीठ-पीछे उड़ाता है,

ऐसे इंसान में चाहे कितनी भी अच्छाईयां क्यों न हो..

उनसे दूरियां बनाके रखें..

ऐसे इंसान किसी के नहीं होते..

और इनसे बुरा कोई नही होता..क्योंकि ये आपके साथ तबतक ही होते है,जबतक इनका स्वार्थ आपसे सधता है।।


सबसे अच्छे इंसान कौन होते है ...😊??

जो किसी भी परिस्थितियों में, दुश्मन तक कि निंदा नही,बल्कि प्रसंशा करते है,वो सबसे अच्छे इंसान है..🙂

ये अगर आपकी निंदा आपके सामने करते है,तो आप अपनी खुशनसीबी समझें..।

कबीरदास जी कहते है-

"निंदक नियरे राखिये,आंगन कुटी छवाय,बिन पानी,साबुन बिना,निर्मल करे सुभाय।"

क्योंकि आजकल जो आपके हितैषी है,(माँ-बाप,भाई-बहन,शिक्षक,मित्र इत्यादि) वो भी आपकी निंदा आपके सामने करने से बचते है,क्योंकी आजकल हमें इनकी बात भी बुरी लगने लगी है...।।

पहले ऐसा नही था..मगर अब ये चलन बढ़ता जा रहा है..।

क्योंकि हमारी शिक्षा आधुनिक जो होती जा रही है..

ये हमें पैसा कमाना तो सिखा रहा है,

मगर परिस्थितियों से सामना करना नही है।।





बुधवार, 8 जनवरी 2025

महिलाएं सबसे ज्यादा असुरक्षित कंहा है..

एक बात पूछता हूँ...
महिलाएं या लड़कियां सबसे ज्यादा सुरक्षित कंहा है..??


शायद आप जो जबाब सोच रहे है... वो गलत हो....


हाल ही में UN(यूनाइटेड नेशंस) द्वारा जारी घरेलू हिंसा रिपोर्ट में बताया गया है कि-
" महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित स्थान घर है ।"
जबकि सुरक्षित स्थान घर के बाहर सार्वजनिक स्थान और कार्यस्थल है..।

2023 में 85 हज़ार महिलाओं एवं बालिकाओं की हत्या जानबूझकर किया गया, (ये आंकड़े ज्यादा भी हो सकते है)
इसमें 60% हत्याएं किसी साथी या परिवार के द्वारा किया गया..प्रतिदिन 140 महिलाओं एवं बालिकाओं की हत्या उनके अंतरंग साथी या परिवार के सदस्य द्वारा कर दी जाती है..।।
(यानी जबतक आप इसे पढ़ के खत्म करेंगे तबतक किसी पारिवारिक सदस्य के द्वारा ही किसी महिला की हत्या कर दिया गया होगा)

आपको जानकर हैरानी होगी कि,इस तरह की हत्या सर्वाधिक अफ्रीका में किया जा रहा है..
वंही घरेलू हिंसा सर्वाधिक अमेरिका में किया जा रहा है,UN के अनुसार 1 लाख महिलाओं पर 1.6 महिलाओं पे किया जाता है..।।
•वंही यूरोप(1लाख/0.6) और एशिया(1लाख/0.8) में ये दर कम है..।

हो सकता है वास्तविकता इससे और भयावह हो..क्योंकि कुछ मामलों को दबा दिया जाता है..

•वंही UN रिपोर्ट के अनुसार पुरषों की अधिकांश हत्या घर के बाहर होता है,80% वंही महिला की 20% होती है..।।

महिलाओं के लिए घर सुरक्षित नही है, वंही पुरुष घर के बाहर सुरक्षित नही है..।।

जरा सोचियेगा..
आखिर क्यों महिलाओं के लिए घर सुरक्षित नही है...
क्या आप उनमें से तो नहीं,जिसके कारण कोई महिला या बालिकाएं या फिर गर्भ में पल रही बची असुरक्षित महसूस कर रही है..।।

आखिर क्यों कोई ऐसा करता है...??
"की महिला घर में ही असुरक्षित महसूस करती है"....

मंगलवार, 7 जनवरी 2025

हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचें..

इस अथाह समुन्द्र की कोई थाह नही है..(अब है)
इस खुले आसमां का कोई किनारा नही है..
इसी तरह मनुष्य की जिजीविषा का कोई अंत नही है..।
मनुष्य आज कंहा नही है..
अगर जंहा नही है..
वंहा का इसे पता नही है..
अन्यथा ये हर जगह है,
जंहा नही है,
वंहा जाने का प्रयत्न कर रहा है..।।



हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचें..
हमने अपने स्वार्थ के लिए,
अपनों का भी बलिदान दिया..
हम यू ही आज सभ्य नही कहलाते..
हमने कई सभ्यताओं का नाश कर,
आज सभ्य हुए है..
हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचे है..।

जितनी परतें खोलते जाऊंगा..
हमारी असभ्यता का परत-दर-परत खुलता जाएगा..
हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचें है..
हमारे कारण आज प्रकृति के कई जीव-जंतु और पेड़-पौधे
विलुप्त हो गए..
कितने आज विलुप्ति के कगार पे है..
आज हम मनुष्यों के कारण ऐसा कोई जगह नही जो सुरक्षित है..
हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचें है..
विकास के नाम पर हम खुद को नाश करने के कगार पे ले जा रहे है..।।
शायद ही पृथ्वी का कोई कोना हो,जो आज शांत हो..
हम मनुष्यों ने अपनी आहटों से सबकी शांति भंग कर दी है..।


हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचें..
हमने अपने स्वार्थ के लिए,
अपनों का भी बलिदान दिया..
हम यू ही आज सभ्य नही कहलाते..
हमने कई सभ्यताओं का नाश कर,
आज सभ्य हुए है..
हम मनुष्यों ने कई कीर्तिमान रचे है..।।

सोमवार, 6 जनवरी 2025

एलिफेंटा की यात्रा

"यात्रा हमेशा आपके जीवन में बदलाव लाता है..
अगर यात्रा आपके जीवन में बदलाव नही लाता तो वो यात्रा व्यर्थ है..।।"

मैं सोचता हूँ, आज हम कितना विकसित हो गए है..
मगर जब एलिफेंटा जैसी गुफाओं में खुदी आकृति,कलाकृति को देखता हूँ ,तो आश्चर्यचकित होता हूँ..
आज हमारे अंदर धैर्य की बिल्कुल ही कमी है..
मगर इन कलाकृतियों,आकृतियों को तराशने में कितना धैर्य रखना पड़ा होगा ये हम सोच के ही घबराते है..।।

वो क्या कलाकार रहें होगा..
वो कैसा हथौड़ी-छैनी रहा होगा..
जिसने पहाड़ में छुपी शिव की प्रतिमा को सबके सामने ला दिया..
जो आज भी जीवंत दिखलाय दे रहा है..
जिसे देखकर आप भाव-विभोर हो जाओगे..
आप उस तेजोमयी आभा से सरोबोर हो जाओगो..।





https://en.m.wikipedia.org/wiki/Elephanta_Caves


मंगलवार, 31 दिसंबर 2024

नव वर्ष मंगलमय हो..😊

कल भी आज की तरह ही सूरज उगेगा..
चिड़िया आज की तरह ही चहचहाएँगी,
नदिया आज की तरह ही बहेंगी..
प्रकृति में कुछ बदलाव नही होगा..
बदलेगा तो सिर्फ हमारा कैलेंडर और हमारा उत्साह..।।

मगर हम इस उत्साह को कब तक बरकरार रख सकते है..??

मगर क्या हम खुद को कैलेंडर की तरह बदल पाएंगे..??

थोड़ी देर रुकिए..और सोचिए..
2024 शुरू होने से पहले आपने खुद के अंदर परिवर्तन लाने के बारे में क्या सोचा था..और उसपे आपने कितना अमल किया..और आज आप कंहा है..।।

छोड़िए ये सब..
2025 का प्लान बनाइये..
इस वर्ष आप क्या पाना चाहते है,और क्या छोड़ना चाहते है..
इसे लिखिए और प्लानिंग बनाइये..
क्योंकि बिना रोडमैप के आप कंही नही पहुंच पाएंगे..
आप चलना शुरू तो करेंगे..
मगर ज्यादा दूर तक नही चल पायेंगे.. अगर चलेंगे भी तो भटक जाएंगे..
इसलिये थोड़ा रुकिए और 2025 में क्या पाना चाहते है और क्या छोड़ना चाहते है,उसके बारे में रोडमैप तैयार कीजिये..।।

और इस नव वर्ष को नए जीवन के रूप में परिवर्तित कीजिये..
नव वर्ष मंगलमय हो



मैंने मुस्कुराना सीख लिया है..😊

मैंने मुस्कुराना सीख लिया है..
जब भी खुद को आयने में देखता हूँ तो मुस्कुराता हूं,
जब भी पंछियो को पंख फैला कर उड़ते देखता हूँ तो मुस्कुराता हूँ..
जब भी सूर्य की लालिमा को देखता हूँ तो मुस्कुराता हूँ..
जब भी प्रकृति की लीला देखता हूँ तो मुस्कुराता हूँ
मैंने मुस्कुराना सीख लिया है..।।



अब मैं दुःखी नही होता..
क्योंकि दुःख तो जीवन का हिस्सा है..
इसे आने से कोई नही रोक सकता..
मगर ये मेरे ऊपर कितने समय तक हावी रहे,
इसका निर्णय मेरे हाथ मैं है..
इसीलिए मैं अब इसे ज्यादा देर तक अपने ऊपर हावी नही होने देता..
मैंने मुस्कुराना सीख लिया है..।।

हमारी  मुस्कान सबसे बड़ा गहना है,
जो प्रकृति से उपहार मैं मिला है..
हम जब भी मुस्कुराते है..
प्रकृति भी मुस्कुराती है..।।

सोमवार, 30 दिसंबर 2024

अपनी समस्या से खुद निपटे..

अपनी समस्या से हमें खुद को ही जूझना पड़ता है..



यंहा कोई और नही है जिसे आपकी समस्या की परवाह पड़ी हुई है...क्योंकि आपकी समस्या के बारे में आपके सिवा किसी को नही पता है..
इसीलिए कोई चाह करके भी आपकी मदद नही कर सकता..

हां सिर्फ माँ-बाप ही आपका साथ लंबे समय तक दे सकते है,बिना आपके समस्या को जाने हुए भी..
इसीलिए जितना जल्दी हो सके अपने समस्या से निपटने की कोशिश करें....


Yoga for digestive system