शनिवार, 6 दिसंबर 2025

दोसजी..

आज तकलीफ हुई..सिर्फ तकलीफ ही नही, बल्कि रुआंसी भी हो गया मैं..।
मगर मैं तुमसे नाराज नही हूँ मेरे दोस्त..बस थोड़ी सी तकलीफ हुई..
और ये तकलीफ भी पानी के बुलबुले के समान है..।।

मैं क्या समझू..??
व्हाट्सएप का रिप्लाई नही करते,फोन रिसीव नही बल्कि काट देते हो..।।
इतनी तो तुम्हें आजादी है,ही..वैसे भी अब हम में और तुम में समानता कंहा रहा..।
तुम 1 से 2 हो गए..और में अकेला रह गया..😊

ये तो मेरी आपबीती है,जो मैंने सुना दिया..।

मगर तुम जिस दौर से गुजर रहे हो..उसे तुम्हारे सिवा और कौन समझ सकता है..
जंहा तक मैं जानता हूँ,किसी के खालीपन को भरना मुमकिन ही नही है,और ऐसे व्यक्ति का खालीपन भरना तो बड़ा मुश्किल है,जो ताउम्र दूसरे के खालीपन को भरने में सहयोग करता रहा हो..।
तुम्हारे जिंदगी में उनका अहम योगदान है,आज तुम जो हो,वो उनके कारण ही हो,और ऐसे व्यक्ति का ऐसे वक्त साथ छूटना जब तुम जिंदगी के अहम पड़ाव में कदम रख रहे हो..।
मैं समझ सकता हूं.. मगर कुछ कर नही सकता..।।

और ऐसे वक्त चुप रहने का ही मन करता है,किसी से कुछ बात करने का मन नही करता..।।
आशा करता हूँ,जो तुम्हारी जिंदगी में आई है..
वो तुम्हें इन दुःख से उबरने में जरूर सहयोग करेंगी..।।

वैसे भी पत्नी से बड़ा कोई मित्र नही होता..
तुम उन्हें हमेशा पत्नी से ज्यादा मित्र ही समझना,
उनके भावनाओं का सम्मान करना..
क्योंकि तुम्हारी और उनकी परवरिश अलग-अलग माहौल में हुआ है,इसलिए विचारों में मतभेद हो सकता है..
और उन मतभेद को दूर करने के लिए मैत्रीपूर्ण विचार करके मतभेद को दूर करना..।।

और क्या कहूं.. मेरे दोस्त..।

मुझे तुम्हारे कॉल का इंतजार रहेगा..।
तुम अकेले ही थे जिससे कुछ बाते हुआ करता था,जिंदगी के कुछ पन्ने पे,मगर तुम्हें तो एक नई मित्र मिल गई है..।
आशा करता हूँ, तुम्हारी मित्र किसी की कमी नही खलनी देगी..।



मगर मुझे तुम्हारी कमी जरूर खलेगी😊..।।
लव यू दोसजी..।।

गुरुवार, 4 दिसंबर 2025

रास्ते..

जब लोगों को आपसे उम्मीद नही होती है,
तब ही खुद से उम्मीद करने का वक़्त होता है..।

जब सारे रास्ते बंद हो जाते है..
तब एक रास्ता खुलता है..
और वो..
वो रास्ता होता है,
जिस रास्ते पे आप चलना चाहते थे..।
वो रास्ता हमेशा किसी न किसी रूप में आपतक आता है..
जिस रास्ते पे आप चलना चाहते है..।।


इसीलिए जिंदगी में हताश और निराश मत हो.. ..
धैर्य रखों..
क्योंकि,जो कुछ भी नही है,
वो बहुत कुछ है..
फर्क बस इतना है कि हम समझ नही पाते..।

इन आसमां से भरे तारों से परे भी कुछ है..
इन उफनाती हुई समुद्रं के उसपार भी कुछ है..
सीना ताने खड़े इस पहाड़ के उसपार भी कुछ है..
रेत से भरे मैदान के उसपार भी कुछ है..
इस अंधियारी रात के बाद ही सुबह तो है..
इसलिए हताश मत हो..
जिंदगी के इस चक्र में असफलता के बाद,
 कभी-न-कभी सफलता का चक्र तो है..।

बुधवार, 3 दिसंबर 2025

मैं क्या से क्या हो गया..

मैं क्या से क्या हो गया..
जब खुद को देखता हूँ,
तो खुद को ही, हीन समझता हूं,
मैं क्या से क्या हो गया..
कंहा मेरे सपने थे..
कंहा मेरे ख्वाब थे..
न अब सपने है,और न ही ख्वाब है..
बस एक हांड-मांस का शरीर है..।
कभी दूसरों के जिंदगी में रंग भरने का सोचा करता था..
आज खुद ही, बदरंग जिंदगी जी रहा हूँ..।

मैं क्या से क्या हो गया..
शायद मैं हुआ नही,होने दिया..
सब कुछ गवाने के बाद ..
अब दूसरों की जिंदगी को गवा रहा हूँ..
आखिर क्यों..??
अपनी बदरंग जिंदगी की छावं,
दूसरों के जिंदगी पे डाल रहा हूं..
आखिर क्यों..??
मैं क्या से क्या हो गया..
अभी भी वक़्त है..
मुस्कुरा के कहने का..
मैं क्या से क्या हो गया..।
अभी भी वक़्त है,
रंगीन से बदरंग हुए जिंदगी में रंग भरने का..
अभी भी वक़्त है,
अपनी बदरंग जिंदगी की छावं को,
रंगीन छावं में तब्दील करने का..
अभी भी वक़्त है..
सीना तानकर,
मुस्कुराते हुए कहने का..
मैं क्या से क्या हो गया😊...।।




आप भारत के कितने प्रधानमंत्री को जानते है..

हम मनुष्यों की एक खूबी है..
हम अच्छाइयों को लंबे समय तक याद नही रखते जबकि किसी बुराइयों को लंबे समय तक ढोते है..।।

अगर आपसे पुछु..
पिछले सप्ताह आपके साथ क्या-क्या अच्छा हुआ, तो शायद आप नही बता पाएंगे,मगर आपसे पुछु आपके साथ क्या-क्या बुरा हुआ,वो आपको बिल्कुल याद होगा..।।
इसमें हमारी आपकी कोई गलती नही है,दरसल ये आनुवांशिक प्रक्रिया है,कुछ लोग इसे तोड़ने में सफल होते है,और अपने व्यक्तित्व से सबको आश्चर्यचकित करते है..।।

हां हम कंही और थे..
हमारा सवाल क्या था..??
हां, आप बताये भारत में अबतक कितने प्रधानमंत्री हुए है..??
चलिए ये तो गूगल या AI से भी पूछ सकते है..पूछ लीजियेगा मगर..।।

हम ये पूछना चाहते है कि..
आपको भारत के कितने प्रधानमंत्री के नाम पता है..??
और क्यों...??

80% भारतीय सिर्फ 4 प्रधानमंत्री के नाम जानते है..
पहला- पंडित जवाहरलाल नेहरू
दूसरा- लाल बहादुर शास्त्री
तीसरा- इंदिरा गांधी
चौथा- अटल बिहारी बाजपेयी

और वर्तमान में- नरेंद्र मोदी भारत के 14वे प्रधानमंत्री है..।।


तो फिर आखिर क्यों भारत की आम जनता 10 प्रधानमंत्री के नाम से अनभिज्ञ है..??
क्या उन्होंने कोई अच्छा काम नही किया..??
क्या उनका कार्यकाल छोटा था..??
क्या उनका व्यक्तित्व आकर्षक नही था..??

•जंहा तक अच्छे काम की बात है..तो हम उन प्रधानमंत्री को नही भूल सकते जिन्होंने संचार क्रांति की नींव रखी..मगर हम भूल चुके है..
•आज भारत जिस GDP का और इतने बड़े बाजार का दंभ भर है,उसमें उस P.M का अहम योगदान है,जिसने पहली बार भारत के बाजार को पूरे विश्व के लिए खोला..
कुछ लोग इनसे भी जरूर परिचित होंगे..।।

मगर आखिर क्यों..पूरा भारत सिर्फ नेहरू,शास्त्री,इंदिरा और अटल को ही जानता है..??
जरा सोचिए..शायद ही कोई व्यक्ति होगा जो इनके नाम से अनभिज्ञ होगा..?

इन चारों में एक सामान्य बात थी...
इन चारों को युद्ध का सामना करना पड़ा..
और युद्ध की त्रासदी हमारे जेहन में बसी हुई है,जो कभी हट नही सकता,यंहा तक कि आपके जेहन में नही भी है,तो आपके जेहन में किताबों, अखबारों, समाचारों, फिल्मों के माध्यम से आ ही जाएगी...।।

क्योंकि त्रासदी दर्द देती है,और दर्द दूर हो भी जाये न,तो उसका डर सदैव बना रहता है..।।

हम अच्छाइयों के द्वारा लाये गए बदलाव को याद नही रखते,वंही बुराइयों के द्वारा लाये गए बदलाव को लंबे समय तक याद रखते है..।

हम लोगों की बुराइयों को तो याद रखते है,मगर उनके अच्छाइयों को भूल जाते है..।।

हां सच में भूल जाते है..।

अच्छा एक सवाल बताये..
भारत में संचार क्रांति की नींव किस प्रधानमंत्री ने रखा...
क्या आपको पता है,भारत के GDP में सर्वाधिक किस सेक्टर का योगदान है..??
सर्विस सेक्टर का..
LPG(liberalization, Privatization, Globalization) लाने का श्रेय किस प्रधानमंत्री को दिया जाता है..।

पता है,इन दो कदमों के कारण ही आज विश्व के अग्रणी देशों में से एक है हम।मगर बहुत कम ही लोग उन दो कदम उठाने वाले प्रधानमंत्री को जानते होंगे..।।



शनिवार, 29 नवंबर 2025

कुछ गलतियां

जिंदगी में कुछ गलतियां होनी चाहिए,
जिसका मलाल ताउम्र होना चाहिए..
अगर कोई गलतियां न हो..
और उसका मुस्कान भरा अफसोस न हो..
तो फिर ये भी कोई जिंदगी है..
इसलिए..
जिंदगी में कुछ गलतियां होना चाहिए..।
जब जिंदगी में अकेलापन सताये..
तो यही गलतियां तो साथ रह जाता है..
और एक नए होंसले के साथ आगे बढ़ने का मुकम्मल राज देता है..

इसलिए जिंदगी में कुछ गलतियां होनी चाहिए..
जिसका मलाल ताउम्र रहें...।।


शुक्रवार, 28 नवंबर 2025

जिंदगी से कोई शिकायत नही है..

जिंदगी से कोई शिकायत नही है..,
खुद से ही शिकायत है..।
जिंदगी ने तो वो सबकुछ दिया..
जिस-जिस के में लायक था..
मगर मैं क्या...???
उस लायक बन पाया..
जिस लायक जिंदगी ने मुझसे अपेक्षा की थी..
तो जबाब है नही..।

जिंदगी से कोई शिकायत नही है..
खुद से ही शिकायत है..।
मैं ही काबिल न बन पाया..
अपने कमजोरियों से भागता रहा..
और कमजोरियों के बोझ तले दबता गया..।

जिंदगी से कोई शिकायत नही है...
खुद से ही शिकायत है..।
जिंदगी तो अब भी..
हाथ फैलाये हुए है,
मुझे आलीगं करने के लिए..।
मैं ही बेबकूफ हूँ..
इन बेड़ियों को अपना साथी मानकर इससे लिपटा हुआ हूँ,
जबकि ये बेड़ियां सिर्फ जख्म दे रही है..।

जिंदगी से कोई शिकायत नही है..


रविवार, 23 नवंबर 2025

मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ

मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
कभी दुनिया बदलने की बातें किया करता था,
अब खुद को बदलने की जुस्तजू में लगा रहता हूँ..।
मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..।
कभी दूसरों के सपनों को पूरे करने का सपना देखा करता था,
आज खुद के भी सपने पूरे नही कर पा रहा हूं..
मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
कभी अपनों को मुझमें उम्मीद दिखती थी,..
आज सबों ने मुझसे उम्मीद छोड़ दी है..।
मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
सबकुछ बदल गया है..
मगर बदला नही है,तो मेरे आदतों और मेरे असफलताओं का सिलसिला..
मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
न जाने अब भी,
मैं खुद से उम्मीद किये बैठा हूँ..
मैं यू ही तो नही आया हूँ.. 
मगर क्यों आया हूँ..??
इसके जबाबों का इंतजार किये बैठा हूँ..
मैं यू ही तो नही आया हूँ..।
मैं कंहा था,मैं कंहा हूँ..
कभी दुनिया बदलने की बातें किया करता था,
अब खुद को बदलने की जुस्तजू में लगा रहता हूँ..
मैं यू ही तो नही आया हूँ..।।



उम्मीद की किरण