बुधवार, 27 अगस्त 2025

गणेश जी क्यों पूजनीय है..??

वक्र तुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ:।

निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभ कार्येषु सर्वदा ॥

ये मंत्र आपने जरूर कभी-न-कभी सुना होगा,क्या आपने कभी इस मंत्र का मतलब जानने का कोशिस किया है..??

"हाथी जैसे विशालकाय जिनका तेज सूर्य के सहस्त्र किरणों के समान है।आप हमेशा मेरे कार्य को बिना विघ्न के पूरा करें,एवं सदा ही मेरे शुभ की कामना करें..।"

उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार गणपति शब्द का उपयोग  ऋग्वेद(2.23.1) में मिलता है। वहीं "अमरकोश" में गणपति के आठ पर्यायवाची नाम मिलते है। विनायक, विघ्नराज,द्वेमातुर, गणाधिप, एकदंत,हेरम्बा, लंबोदर एवं गजानन..।



विनायक नाम का उल्लेख अनेक पुराणों एवं बौद्ध पुस्तको में मिलता है..

तमिल भाषा मे गणेश जी को पिल्लई या पिल्लैयार नाम से जाना जाता है।

वही बर्मा मे गणेश जी को "महा पेइने" और थाईलैंड में "खानेट" नाम से जाना जाता है..

गणेश जी सिर्फ भारत मे ही नही बल्कि अफगानिस्तान से लेकर पूरे दक्षिण पूर्व एशिया में पूजे जाते थे..उनकी अनेक छवियां चीन में भी मिले है..।।

6ठी शताब्दी से गणेश जी की मूर्ति भारत के कई क्षेत्र में बनने लगे और ये धीरे-धीरे अनेक क्षेत्र में बनता गया..।।


क्या आपने कभी गौर से गणेश जी को देखा है..??
शायद नही ही देखा होगा..

जरा गौर से फिर से देखिए..
और सोचिये...🤔
मन में क्या-क्या विचार आ रहा है..??

क्या आपने सोचा..??
अगर हां, तो क्या-क्या विचार आया...।।
उनका छवि कितना बेढोल है..
उनका मुख.. उनका पेट..उनका भीमकाय शरीर..
और ऊपर से उनका सवारी..मूषक..।।

इतना सब होते हुए भी वो सबसे पहले पूजे जाते है..
आखिर क्यों..??

वो उन सभी दिव्यांगों का प्रतिनिधित्व करते है..जिसे हम अलग नजर से देखते है..।ये उस समय से प्रतिनिधित्व करते आ रहे है जब दिव्यांग होना अभिशाप माना जाता था,वो आज भी माना जाता है..।
पुराणों उपनिषदों या पूरे विश्व के सभी ग्रंथों में ये एकलौते दिव्यांग अभिव्यक्ति है..जो सिर्फ पूजनीय ही नही बल्कि प्रथम पूजनीय है...बिना इनके पूजा के किसी का पूजा नही होता..।।

हो सकता है आप मेरे बारे में गलत सोच रहे हो..
सोच रहें ही होंगे,क्योंकि मैं कुछ भी बोल और लिख रहा हूँ..।
दरसल इसमें आपका या हमारा कोई गलती नही है..क्योंकि पुराण और उपनिषद कहानी के रूप में लिखा गया है..इसे खुद से ही मंथन करके उसमें से निचोड़ निकालना होगा..।।

आप अपने सभी देवी देवता को देखें..और उनके सवारी और उनके आसन को देखें...क्या उन जीवों को सवारी बनाना आसान है..?

अब गणेश जी को देखें...और उनके सवारी को देखें..दरसल गणेश जी ने मूषक को चुना नही बल्कि मूषक ने गणेश जी को चुना..।।
गणेश जी के आसन(बैठने वाला जगह) को देखें एक साधारण सा तख्त और अन्य देवताओं का आसन देखें..।।

इतने सब होने के बाद भी गणेश जी प्रथम पूजनीय क्यों है..??
हम आपने एक पौराणिक कहानी सुना है,
कहानी का सारांश ये है कि- "गणेश जी पार्वती के बेटे है और वो पार्वती के द्वारपाल बने है जो अंदर किसी को न आने देने की आज्ञा का पालन कर रहे है..शिव जी आते है वो जाना चाहते है मगर गणेश जी जाने नही देते है,शिवजी को गुस्सा आता है और वो उनका वध कर देते है ये देखकर पार्वती जी को गुस्सा आता है,शिवजी गुस्सा देखकर उनको फिर से जीवित कर देते है..।।"

अब इस कहानी को दूसरे नजरिये से देखिए-
गणेश जी जब पैदा हुए तो इनके शरीर को देख कर इनके माता-पिता ने इन्हें छोड़ दिया होगा(जो आज भी होता है)और ये माता पार्वती को मिलते है,और ये इनका लालन-पालन करते है..हो सकता है शिवजी वर्षों बाद अपने घर आये हो..और गणेश जी को देखकर अचंभित हुए हो..और गणेश जी को लेकर माता पार्वती और शिवजी में खूब गहमा-गहमी हुआ हो...।
फिर शिवजी गणेश जी को स्वीकार करने के लिए तैयार हो गए हो..
और गणेश जी का अच्छा परवरिश और उस समय के हरेक ज्ञान से उन्हें अवगत करा दिया हो..और वो उस समय के सबसे बड़े विद्वान बन गए हो..और सभी देवी-देवता को उनके विद्यता के सामने नतमस्तक होना पड़ा हो..।।
शायद यही वहज हो..जिस कारण वो प्रथम पूजनीय भगवान बने..
और गणेश जी अंत में इन सबका श्रेय अपने माता-पिता को देते है..।।

इससे हमें क्या सीख मिलता है..??

अगर हम एक मनुष्य है तो हमें गणेश जी से सीखना चाहिए कि..शरीर का सरंचना हमारे व्यक्तित्व में बाधा नही बन सकता..हम उस ऊंचाइयों तक पहुंच सकते है जंहा कोई नही पहुंच सकता..।
अपने माता-पिता के प्रति श्रद्धा(हमेशा रखना चाहिए) उस समय भी रखना चाहिए जिस समय आप जिंदगी के सर्वोच्च शिखर पर हों..क्योंकि अगर वो नही होते तो आप नही होते..।।
अगर हम माता-पिता है तो..हम अपने परवरिश से अपने संतान को जीवन के किसी भी ऊंचाइयों पे पहुंचा सकते है...।।(मगर अफसोस आज हम अपने बच्चों की परवरिश सही से नही कर रहे है,WHO के अनुसार,हरेक 10 में से 6 बच्चों(2-14 वर्ष) के साथ माता-पिता या उनके जानने वाले उन्हें शारीरिक दंड देते है)

गणेश जी सिर्फ विद्वता,और अच्छे संतान का ही प्रतिनिधित्व नही करते बल्कि वो उन करोडों लोगों का प्रतिनिधित्व करते है,जो समाज के हाशिये पे नही बल्कि समाज का हिस्सा तक नही है..।।

ऐसे प्रतिनिधित्वकर्ता को बारंबार प्रणाम..
ऐसे संघर्षकर्ता को बारंबार प्रणाम..
सभी विद्या के विद्वेता को बारंबार प्रणाम..
उनके माता पिता को बारंबार प्रणाम..।।






कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

कुछ गलतियां