शनिवार, 30 अगस्त 2025

तुम्हारा अक्स..

तुम्हारा अक्स जब भी नजर आ जाता है,
मेरे चेहरे पे मुस्कान बिखर जाता है..
मानों रेत में, बारिश की फुहार हो रही हो..
अमावश की रातों में चाँद नजर आ रही हो..
कुछ ऐसा ही, हो जाता है कुछ पल के लिए..।।
तुम्हारा अक्स जब भी नजर आ जाता है..

अब ना ही तुमसे मिलने की हसरत है..
ना ही तुमसे कुछ कहने को दास्तां है..।
बस अगर कुछ है...
तो तुम्हारा अक्स है..
जो कभी-कभी मेरे चेहरे पे खुशियां बिखेर जाती है..।।
तुम्हार अक्स जब भी...



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