दादी इतना प्यार करती है कि उनके प्यार का अहसास ही नही होता..
उनका प्यार,उनका व्यवहार लगने लगता है,शायद इसीलिए उनके प्यार को हम अहसास नही कर पाते,जब दूर चली जाती है,तब अहसास होता है..।
मेरी दादी माँ..उनके बारे में जितना लिखू उतना कम है..।
मैं बचपन से ही दादी माँ के करीब था शायद इसलिए उनका प्यार ज्यादा पाने का मौका मिला..।
मेरी दादी माँ गलत घर में पैदा हो गई थी..।अगर वो किसी राजनीतिज्ञ के घर मे पैदा हु
हुई होती, तो आज शायद उन्हें सब जानता।अगर वो किसी उद्योगपति के घर पैदा हुई होती, तो बहुत बड़ी उद्योगपति होती..।अगर किसी कलाकार,लेखक के घर पैदा हुई होती तो अच्छा कलाकार/लेखक होती..।मगर प्रकृति को कुछ और ही मंजूर था..।
उनमें जितना करुणा और प्रेम था,उतना ही क्रोध भी..उनमें सब गुण था..।
भगवान ने उन्हें सब सुख दिया..लगभग उनकी सब इच्छायें पूर्ति हो ही गई,अगर कुछ बाकी रह भी गया तो,सब इच्छायें सबकी कंहा पूरी होती है..।।
दादीमाँ के कथनानुसार उन्होंने गरीबी के साथ संघर्ष भी देखा बचपन मे भी और शादी के बाद भी(जब बाबा दुर्घटना में महीनों घायल रहें) मगर भगवान के दया से उन्हें सबसु ख मिला..इसलिए शायद उन्हें भगवान से शिकायत ना के बराबर रही होगी..।
कुछ लिखने का मन नही करता..
शायद अपने साथ दादी माँ अपनी स्मृतियां भी ले गई..।
या फिर लिखने को इतना कुछ है कि कुछ लिख नही पाता..।

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