रविवार, 5 अक्टूबर 2025

प्यार की पाँति...कोई होती..

कोई होती जो मुझे भी खिड़की के ओट से देखती..
मेरी नजर पड़ते ही,नजरें झुका लेती..।

कोई होती जो मुझे देखने को घंटों टकटकी लगाए रहती..
जब मैं उसे देखता,तो मुँह फेर लेती..।

कोई होती जो मुझसे प्यार का इजहार करने का बहाना ढूंढती..
मगर बहाना मिलने पर भी, प्यार का इजहार न कर पाती..।

कोई होती जो मुझसे जी जान से प्यार करती..
मगर मैं कमबख्त उसके प्यार का कद्र न करता..।

कोई होती जो दूसरे का गुस्सा भी मुझपे उतारती..
और मैं चुपचाप उसके गुस्से को अनसुना कर देता..।

कोई होती जो मुझे भी खिड़की के ओट से देखती..



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

कुछ गलतियां